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Travel News: पालमपुर के पास स्थित ये एडवेंचर हिल स्टेशन हैं सैलानियों के लिए छिपे हुए रत्न, घूमने का प्लान बनाएं आज ही

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित पालमपुर एक खबूसूरत पहाड़ी शहर है। पालमपुर अपनी खूबसूरती के अलावा हरे-भरे चाय के बागानों और धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं के लिए भी जाना जाता है। पालमपुर अपने सुंदर और अलौकिक प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी जाना जाता है। लेकिन इस शहर को काफी कम लोग हिल स्टेशन मानते हैं। इसलिए लोग पालमपुर के आसपास में स्थित खूबसूरत और शानदार हिल स्टेशन की तलाश में रहते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पालमपुर के आसपास में स्थित कुछ शानदार हिल स्टेशन्स के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां पर आप अपने परिवार, पार्टनर और दोस्तों के साथ सुकून के पल बिताने के लिए पहुंच सकते हैं।

धर्मशाला

पालमपुर के आसपास जब भी किसी खूबसूरत हिल स्टेशन घूमने की बात होती है, तो सबसे पहले लोग धर्मशाला का रुख करते हैं। आप अगर धर्मशाला घूमने जा रहे हैं, तो यहां से करीब 5 किमी दूर स्थित मैक्लोडगंज भी एक्सप्लोर कर सकते हैं। गर्मियों में मैक्लोडगंज और धर्मशाला घूमने के लिए देश के हर कोने से पर्यटक घूमने पहुंचते हैं। जून-जुलाई के महीने में भी यहां पर ठंडी-ठंडी हवाएं चलती हैं।

मुख्य आकर्षण

भागसू वाटरफॉल

धर्मकोट

धर्मशाला टी गार्डन

बीर बिलिंग

समुद्र तल से करीब 2 हजार मीटर की ऊंचाई पर बीर बिलिंग स्थित है। यह हिमाचल प्रदेश का एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह जगह अधिक पैराग्लाइडिंग के लिए जाना जाता है। पैराग्लाइडिंग के लिए बीर बिलिंग दुनिया भर के पर्यटक पहुंचते हैं। यहां पर आप ट्रेकिंग से लेकर कैंपिंग और हाइकिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। गर्मियों में भी यहां का मौसम सुहावना होता है।

मुख्य आकर्षण

बीर सनसेट पॉइंट

चोकलिंग मठ

गुनेहर वॉटरफॉल

बरोट हिल स्टेशन

हिमाचल प्रदेश की हसीन वादियों में स्थित बरोट हिल स्टेशन एक छिपा हुआ खजाना माना जाता है। बरोट अपने घने जंगह, बादलों से ढके ऊंचे-ऊंचे पहाड़, झील-झरनों और देवदार के बड़े-बड़े पेड़ों के लिए जाना जाता है। यहां की ठंडी हवाओं में आप अपने परिवार, पार्टनर और दोस्तों के साथ सुकून के पल बिता सकते हैं। यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए भी स्वर्ग माना जाता है।

मुख्य आकर्षण

बरोट मंदिर

बाडा ग्रान ट्रेक

लापस वॉटरफॉल

कुल्लू

कुल्लू हिमाचल प्रदेश का एक बेहद खूबसूरत जिला और हिल स्टेशन है। यह मंडी-मनाली राजमार्ग पर पड़ता है, जोकि अपने शांत वातावरण और खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यहां पर आपको ऊंचे-ऊंचे पहाड़, झील-झरने और घास के मैदान देखने को मिलेंगे। जून की छुट्टियों में कई लोग कुल्लू घूमने के लिए पहुंचते हैं।

मुख्य आकर्षण

फ्रेंडशिप पीक

नग्गर कैसल

भृगु झील

Virat Kohli And Rohit Sharma Next ODI Series: रोहित शर्मा और विराट कोहली 2025 में कितने मैच खेलने वाले हैं? सभी तारीखें यहां देखें

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज समाप्त हो गई है. भारत इस सीरीज में 2-1 से हार गया. वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज से विराट कोहली और रोहित शर्मा करीब सात महीने बाद इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने मैदान पर उतरे. ये खिलाड़ी अब केवल वनडे क्रिकेट ही खेल रहे हैं. रोहित और विराट दोनों ही टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके हैं. इस साल विराट और रोहित तीन वनडे मैच और खेलने वाले हैं, जो कि वे भारत में ही खेलेंगे.

2025 में कब-कब खेलेंगे रोहित-विराट?

भारत को अब अगली वनडे सीरीज साउथ अफ्रीका के साथ खेलनी है. दक्षिण अफ्रीका की टीम नवंबर महीने में भारत दौरे पर आने वाली है, जहां टीम इंडिया और साउथ अफ्रीका के बीच टेस्ट, वनडे और टी20 सीरीज खेली जाएगी. इस दौरान वनडे सीरीज में विराट कोहली और रोहित शर्मा फिर एक बार भारतीय मैदान पर उतर सकते हैं.

    • पहला वनडे- 30 नवंबर, रांची
    • दूसरा वनडे- 3 दिसंबर, रायपुर
    • तीसरा वनडे- 6 दिसंबर, विशाखापट्टनम

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दमदार पारी

रोहित शर्मा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दमदार प्रदर्शन किया. रोहित ने पहले वनडे में 8 रन बनाए थे. लेकिन दूसरे वनडे में रोहित के बल्ले से 73 रनों की पारी आई. वहीं तीसरे वनडे में रोहित शर्मा ने तूफानी शतकीय पारी खेली. रोहित ने 13 चौके और 3 छक्के के साथ 125 गेंदों में 121 रन बनाए. रोहित को इस शानदार पारी के लिए तीसरे वनडे में ‘मैन ऑफ द मैच’ और पूरी सीरीज में 200 से ज्यादा रन बनाने के लिए ‘मैन ऑफ द सीरीज’ चुना गया.

विराट कोहली शुरुआती दो वनडे में शून्य पर आउट हो गए. लेकिन तीसरे वनडे में किंग कोहली के बल्ले से रन आए. विराट ने सिडनी में तीसरे वनडे में 81 गेंदों में 74 रन बनाए. कोहली ने इस पारी में 7 चौके लगाए.

तोरखम बॉर्डर पर थमा व्यापार: अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव से हजारों फंसे ट्रक, सीमा बंद होने से आर्थिक संकट बढ़ा

तोरखम बॉर्डर की ओर जाने वाली सड़क पर फंसे अफगान और पाकिस्तानी ट्रांसपोर्टर्स ने अधिकारियों से अपील की है कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों से द्विपक्षीय व्यापार को अलग रखा जाए. दोनों देशों के बीच जारी तनाव के कारण 13 अक्टूबर से सीमा पार आवागमन पूरी तरह से बाधित है. ट्रांसपोर्टर्स ने लोकल मीडिया को बताया कि उन्हें बहुत परेशानी हो रही है, पैसों की कमी हो रही है, और साथ ही शारीरिक और मानसिक तौर पर वो खुद को काफी बेबस महसूस कर रहे हैं.

फंसे हुए ट्रांसपोर्टर्स के हवाले से, पाकिस्तान के बड़े अखबार डॉन ने बताया कि कई तरह का सामान ले जा रही लगभग 4000 से 5000 गाड़ियां बॉर्डर खुलने का इंतजार कर रही हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते फिर से शुरू होने की कोई पक्की तारीख अभी नजर नहीं आ रही है. उन्होंने कहा कि उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें निजी और सामान की सुरक्षा से लेकर पैसों का नुकसान और खाने और पानी की कमी के कारण हो रहा मानसिक उत्पीड़न शामिल है.

ट्रांसपोर्टर यूनियनों की दिक्कत

एक स्थानीय ट्रांसपोर्टर ने अखबार को बताया कि उनके कई साथियों के पिछले दो हफ्तों में खाना-पानी, दवाइयों और अपनी भरी हुई गाड़ियों के रखरखाव में पैसे खत्म हो गए हैं. उन्होंने कहा कि तथाकथित ट्रांसपोर्टर यूनियनों में से किसी ने भी उनकी समस्याओं के बारे में नहीं पूछा, जबकि ब्रोकर और सामान के मालिक उनकी वित्तीय दिक्कतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं क्योंकि वे उन्हें और नुकसान से बचाने के लिए मौजूदा कंसाइनमेंट (रवाना किए गए माल) को उतारने से मना कर रहे हैं. उनके लिए अपनी भरी हुई गाड़ियों की सुरक्षा करना, खाने और पानी का इंतजाम करना और सड़क की सख्त सतह पर सोना मुश्किल हो रहा है, लेकिन दिक्कत ये है कि विकल्प भी नहीं है.उनकी चिंताएं 11 अक्टूबर को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद सामने आईं, जब काबुल में धमाके हुए और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत में थे. इसके जवाब में, तालिबान ने पाकिस्तान से सटे बॉर्डर पर जानलेवा हमला किया.

दोनों देश सीजफायर पर सहमत हुए

एक हफ्ते से ज्यादा समय तक चली जबरदस्त लड़ाई के बाद दोनों देश सीजफायर पर सहमत हुए. इस दौरान कई लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए थे.पाकिस्तान ने तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) समेत कई समूहों को अफगानिस्तान में “सुरक्षित जगहों” से संचालन करने की इजाजत देने का आरोप लगाया है, हालांकि काबुल ने इसे सिरे से खारिज किया. तालिबान ने पाकिस्तान की आक्रामक कार्रवाइयों, जिसमें काबुल पर एयरस्ट्राइक भी शामिल है, को संघर्ष बढ़ने का कारण बताया.

आदित्य पंचोली का अनिल कपूर पर आरोप – “भाई की सिफारिश पर तेजाब फिल्म से मुझे बाहर किया गया था”

फिल्म इंडस्ट्री में अब नेपोटिज्म को लेकर काफी बहस होने लगी है लेकिन ये आज की बात नहीं है हमेशासे इंडस्ट्री में राजनीति और नेपोटिज्म रही है. कई बड़े कलाकार भी इसके शिकार हो चुके हैं. बॉलीवुड एक्टर आदित्य पंचोली भी 80 के दशक में इसका शिकार हुए थे. उन्हें 1988 में आई फिल्म तेजाब के लिए कास्ट किया गया था. वो पहले माधुरी दीक्षित के अपोजिट नजर आने वाले थे मगर बाद में उन्हें एक एक्टर ने रिप्लेस करवा दिया था. इस बारे में आदित्य ने खुद खुलासा किया है.

आदित्य पंचोली ने अपने फिल्मी करियर में एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्मों में काम किया है. अब उन्होंने बिना अनिल कपूर का नाम लिए निशाना साधा है. जिसके बाद से इंटरनेट पर खलबली मच गई है.आदित्य का कहना है कि उन्हें राजनीति की वजह से फिल्म से निकाल दिया गया था.

आदित्य पंचोली ने साधा निशाना
आदित्य पंचोली ने सोशल मीडिया पर एक नोट शेयर किया है. जिसमें उन्होंने अपनी फिल्म तेजाब को लेकर खुलासा किया है. उन्होंने लिखा- ‘मैं तेजाब (1988) के लिए माधुरी दीक्षित के अपोजिट ऑरिजिनल च्वाइस था. डायरेक्टर एन चंद्रा अभी भी ये कंफर्म कर सकते हैं. दुर्भाग्यवश, एक एक्टर ने अपने बड़े भाई (जो इंडस्ट्री में अभी भी एक्टिव हैं) से कहकर डायरेक्टर को इंफ्लुएंस करके मुझे रिप्लेस करवा दिया.और बाकी, जैसा वे कहते हैं, इतिहास है.’

I was the original choice for Tezaab (1988), opposite @MadhuriDixit . Director N. Chandra, still very much around can confirm this.

Unfortunately, an actor, through his elder brother (who remains active in the industry), influenced the director to replace me. The rest, as they… pic.twitter.com/0GsBvsK2KG

— Aditya Pancholi (@AdityaRPancholi) October 27, 2025

आदित्य ने आगे लिखा- ‘हाल ही में, मैंने एक एक्टर को अपनी नई रिलीज के प्रमोशन के दौरान नेपोटिज्म के बारे में बोलते देखा. मैं ये साफ कर दूं. फिल्म इंडस्ट्री में राजनीति नेपोटिज्म से कहीं ज्यादा गहरी है. पक्षपात, जोड़-तोड़ और सत्ता के खेल, पारिवारिक रिश्तों से कहीं ज़्यादा करियर को प्रभावित करते हैं.’

लोगों ने किए रिप्लाई
आदित्य पंचोली के पोस्ट पर लोग ढेर सारे कमेंट कर रहे हैं. एक ने लिखा- ‘यह निश्चित रूप से अनिल कपूर की ओर इशारा था. क्योंकि यह कोई आश्चर्य की बात नहीं थी. खैर, कर्मा अपना पता नहीं भूले और एक भी सिनेमा देखने वाले को याद नहीं था कि उनका बेटा एक एक्टर है.’

शाही अंदाज में प्रदीप कुमार ने दर्शकों का जीता दिल , मधुबाला और मीना कुमारी के साथ उनकी जोड़ी रही सुपरहिट

हिंदी सिनेमा के अभिनेता प्रदीप कुमार ने अपनी अदाकारी से लाखों दिलों को जीता. बड़े पर्दे पर उन्हें हमेशा राजा, शहंशाह और शाही राजकुमार के रूप में देखा गया, लेकिन असल जीवन में उनका सफर उतना ही संघर्षपूर्ण और कठिन था. पुण्यतिथि के मौके पर जानें अभिनेता की करियर की कहानी.

17 साल की उम्र में लिया जीवन का सबसे बड़ा फैसला 
बचपन से ही फिल्में और अभिनय प्रदीप कुमार के दिल के बहुत करीब थे. यही कारण था कि उन्होंने 17 साल की कम उम्र से ही अभिनय की दुनिया में कदम रखा था. उनका यह फैसला जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ.

प्रदीप कुमार का जन्म 19 जनवरी 1925 को कोलकाता में हुआ था. बचपन से उनका झुकाव अभिनय की तरफ अधिक था. स्कूल और मोहल्ले में नाटक और नाटकों में भाग लेना उनके लिए एक खास शौक बन गया.

छोटी उम्र में ही उन्होंने महसूस किया कि फिल्मी दुनिया उनका सपना है और इसी सपने के पीछे वे अपने पूरे जीवन तक चलेंगे. 17 साल की उम्र में लिया गया यह फैसला उनके लिए जैसे जीवन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम था.

बंगाली फिल्मों से सफर शुरू कर हिंदी सिनेमा में बनाई पहचान 
उनकी फिल्मी यात्रा बंगाली सिनेमा से शुरू हुई. बंगाली फिल्म निर्देशक देवकी बोस ने एक नाटक में उनके अभिनय को देखा और प्रभावित होकर उन्हें अपनी फिल्म ‘अलकनंदा’ (1947) में मुख्य भूमिका का मौका दिया. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट नहीं हुई, लेकिन प्रदीप कुमार का अभिनय और उनकी स्क्रीन पर मौजूदगी दर्शकों और फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचने में सफल रही. इसके बाद उन्होंने कई बंगाली फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘भूली नाय’ और ‘स्वामी’ जैसी फिल्में शामिल थीं.

बंगाली फिल्मों के बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा की ओर रुख किया. साल 1952 में प्रदीप कुमार ने फिल्म ‘आनंद मठ’ में अहम भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने 1953 में फिल्म ‘अनारकली’ में बीना राय के साथ और 1954 में ‘नागिन’ में वैजयंतीमाला के साथ मुख्य भूमिका निभाई. इन फिल्मों ने उन्हें बड़े पर्दे पर पहचान दिलाई. उनकी शाही और आकर्षक छवि के कारण दर्शकों ने उन्हें तुरंत पसंद किया.

मधुबाला और मीना कुमारी के साथ हिट थी उनकी जोड़ी 
प्रदीप कुमार ने मधुबाला और मीना कुमारी जैसी बड़ी अभिनेत्रियों के साथ भी कई सफल फिल्में की. मधुबाला के साथ उन्होंने आठ फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘राज हठ’, ‘शिरीन-फरहाद’, और ‘यहूदी की लड़की’ शामिल हैं. वहीं, मीना कुमारी के साथ उन्होंने सात फिल्में की, जिनमें ‘चित्रलेखा’, ‘बहु-बेगम’, और ‘भीगी रात’ प्रमुख हैं.उम्र बढ़ने के साथ उन्हें प्रमुख भूमिकाओं के बजाय सहायक भूमिकाएं निभानी पड़ीं. इसके बावजूद उन्होंने बड़े-बड़े अभिनेताओं जैसे अमिताभ बच्चन, सनी देओल और मनोज कुमार के साथ भी काम किया.

हिंदी सिनेमा में अहम् योगदान के लिए जीते अवार्ड्स 
प्रदीप कुमार की कला और मेहनत ने उन्हें सिर्फ बॉक्स ऑफिस की सफलता ही नहीं दिलाई, बल्कि दर्शकों के दिलों में एक खास जगह भी दी.प्रदीप कुमार को उनके योगदान के लिए कई बार सम्मानित किया गया. उन्होंने 1999 में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार जीता. पर्दे पर मिली सफलता के बावजूद उनका निजी जीवन दुखों से भरा रहा. वे अक्सर अकेलेपन से गुजरते थे. लंबी बीमारी के बाद प्रदीप कुमार का निधन 27 अक्टूबर 2001 को कोलकाता में हुआ. उन्होंने 76 साल की उम्र में आखिरी सांस ली.