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Dharmendra Deol: धर्मेंद्र किन बीमारियों से जूझ रहे हैं? जानिए, ये बीमारियां कितनी गंभीर और खतरनाक हो सकती हैं।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 89 साल के धर्मेंद्र पिछले कुछ दिनों से डॉक्टरों की सख्त निगरानी में हैं और फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं. चलिए आपको बताते हैं कि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र किस बीमारी से पीड़ित हैं.

हालत स्थिर, लेकिन निगरानी में

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मेंद्र शुरू में एक रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें भर्ती करने का फैसला किया. ब्रीच कैंडी अस्पताल के एक स्टाफ सदस्य ने मीडिया को बताया कि “धर्मेंद्र जी सांस फूलने की शिकायत लेकर आए थे. अभी वो आईसीयू में हैं और आराम कर रहे हैं.” जब उनकी सेहत को लेकर पूछा गया तो अस्पताल के प्रतिनिधि ने कहा कि फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है. वो स्थिर हैं. उनका हार्ट रेट 70 है, ब्लड प्रेशर 140/80 है और यूरिन आउटपुट भी नॉर्मल है.

डॉक्टरों ने उन्हें कुछ और दिन ऑब्जर्वेशन में रखने की सलाह दी है. इस बीच, उनके बेटे सनी देओल और बॉबी देओल अपने काम से थोड़ा वक्त निकालकर पिता के पास मौजूद हैं. दिसंबर में धर्मेंद्र 90 साल के होने वाले हैं और हाल के सालों में उन्हें कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है.

सांस फूलने की समस्या कितनी गंभीर?

89 साल की उम्र में शरीर के लंग्स और हार्ट पहले जैसे मजबूत नहीं रहते, इसलिए जरा सी थकान या ऑक्सीजन की कमी भी सांस फूलने का कारण बन सकती है. कई बार ऐसा तब होता है जब शरीर में पानी रुक जाता है, फेफड़ों में हल्का संक्रमण हो जाता है या दिल की धड़कनें ठीक से काम नहीं करतीं. सामान्य तौर पर, अगर किसी बुजुर्ग को सिर्फ थकान या मौसम बदलने की वजह से थोड़ी देर के लिए सांस फूलती है, तो यह बहुत खतरनाक नहीं होती. लेकिन जब सांस लेने में तकलीफ अचानक या बार-बार होने लगे, तो यह दिल, फेफड़ों या ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकती है.

कुछ महीने पहले हुई थी सर्जरी

इस साल अप्रैल में धर्मेंद्र की मोतियाबिंद की सर्जरी हुई थी, जिसके बाद उन्होंने जल्दी ही रिकवरी कर ली थी. उम्र के इस पड़ाव पर भी वो खुद को एक्टिव रखते हैं न सिर्फ निजी जिंदगी में बल्कि प्रोफेशनली भी. वर्क फ्रंट की बात करें तो धर्मेंद्र हाल ही में फिल्म तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया (2024) में नजर आए थे, जिसमें शाहिद कपूर और कृति सेनन ने मुख्य भूमिका निभाई थी. अब वह श्रीराम राघवन की फिल्म इक्कीस में नजर आएंगे. यह एक वॉर ड्रामा है जो सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जिंदगी पर आधारित है, जो भारत के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता हैं. फिल्म में अगस्त्या नंदा, सिमर भाटिया, जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे. फिल्म दिसंबर 2025 में रिलीज होने वाली है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

डॉ. राजेश्वर सिंह ने पाँच नई “कम्युनिटी लाइब्रेरी” का किया लोकार्पण: कम्युनिटी लाइब्रेरी, ओपन-एयर जिम और नेट जीरो लक्ष्य के साथ समग्र विकास की दिशा में अग्रसर सरोजनीनगर

  • सरोजनीनगर की 42 आरडब्ल्यूए अब कम्युनिटी लाइब्रेरियों से सुसज्जित
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रस्तुत किया नेट जीरो और सतत विकासशील सरोजनीनगर का विज़न
  • ज्ञान-आधारित और पर्यावरण-संतुलित विधानसभा का निर्माण : डॉ. राजेश्वर सिंह की परिवर्तनकारी पहल
  • पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य के लिए भागीरथी एन्क्लेव निवासियों की सराहना, डिजिटल सहायता का संकल्प

लखनऊ। एक पुस्तक दुनिया बदल सकती है, एक पुस्तक सोच बदल सकती है, और एक पुस्तक समाज बदल सकती है। लाइब्रेरी केवल पढ़ने का स्थान नहीं होतीयह समुदाय के हृदय की धड़कन है, जो लोगों, विचारों और पीढ़ियों को जोड़ती है। इसी भावना के साथ सरोजनी नगर विधान सभा क्षेत्र की सभी 104 आरडब्ल्यूए में कम्युनिटी लाइब्रेरी की स्थापना के मिशन को आगे बढ़ाते हुए,विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने रविवार को पाँच आरडब्ल्यूए – गोवर्धन एनक्लेव, कासा ग्रीन, लक्ष्य हाइट्स, द ग्रेस और रोहतास आइकॉन में नई कम्युनिटी लाइब्रेरी का लोकार्पण किया।

इसके साथ ही सरोजनीनगर की कुल 42 आरडब्ल्यूए अब अपनी स्वयं की कम्युनिटी लाइब्रेरियों से सुसज्जित हो चुकी हैं। ये लाइब्रेरियाँ केवल पुस्तकों तक पहुँच का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज में पठन, संवाद और सहभागिता की नई संस्कृति का निर्माण कर रही हैं।

भागीरथी एन्क्लेव के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों की सराहना :
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने भागीरथी एन्क्लेव के निवासियों की पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट पुनर्चक्रण (Waste Recycling) में सक्रिय भागीदारी के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि यहाँ के आरडब्ल्यूए सदस्य प्लास्टिक, पेपर और अन्य पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं का संग्रह पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि यहाँ के बच्चे पर्यावरण के प्रति सजग और जिम्मेदार बन रहे हैं। “ऐसे प्रयास न केवल प्रकृति की रक्षा करते हैं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित भी करते हैं,” डॉ. सिंह ने कहा।

इस अवसर पर उन्होंने भागीरथी एन्क्लेव की पूर्व में स्थापित लाइब्रेरी का भ्रमण किया तथा वहाँ दो कंप्यूटर प्रदान करने का संकल्प व्यक्त किया, ताकि निवासियों और बच्चों के लिए डिजिटल शिक्षा और अधिगम (learning) के अवसर और सुदृढ़ हो सकें। इस दौरान डॉ. सिंह RWA सदस्यों के साथ टेबल टेनिस खेलते भी नजर आए।

सतत जीवनशैली की दिशा में आह्वान :
संसाधनों के अत्यधिक उपभोग की वैश्विक चुनौती पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. सिंह ने Earth Overshoot Day की अवधारणा का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, “जब यह विचार 1972 में प्रारंभ हुआ था, तब मानवता पृथ्वी के वार्षिक संसाधनों का उपयोग 26 दिसंबर तक कर लेती थी। आज यह तिथि घटकर 1 अगस्त पर आ गई है अर्थात हम मात्र सात महीनों में ही वह सब उपयोग कर लेते हैं जो प्रकृति पूरे वर्ष में पुनः उत्पन्न करती है।” उन्होंने नागरिकों से सतत आदतें अपनाने का आह्वान करते हुए कहा, “सतत जीवनशैली समाज के लिए सबसे बड़ा उपचार है, और यही हमारे बच्चों तथा उनके भविष्य के लिए सच्ची सेवा है।”

नेट जीरो की दिशा में अग्रसर सरोजनीनगर :
डॉ. सिंह ने यह भी साझा किया कि सरोजिनी नगर को देश की पहली Net Zero Constituency बनाने की दिशा में कार्य जारी है।
उन्होंने कहा, “हमारा विज़न यह सुनिश्चित करना है कि सरोजिनी नगर में कार्बन उत्सर्जन शून्य हो और विकास का हर पहलू पर्यावरणीय संतुलन के अनुरूप हो। यह मिशन तभी सफल होगा जब प्रत्येक नागरिक इसमें सक्रिय रूप से सहभागी बने।” उन्होंने बताया कि इस दिशा में सौर ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन और सामुदायिक जागरूकता के माध्यम से निरंतर कार्य किया जा रहा है।

फिटनेस और डिजिटल साक्षरता के माध्यम से प्रगति :
डॉ. सिंह के नेतृत्व में सरोजनीनगर में सामुदायिक विकास और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रगति हो रही है। अब तक 100 ओपन-एयर जिम स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे लोग स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति प्रेरित हो रहे हैं। इसके साथ ही, 60 से अधिक विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लास पैनल स्थापित किए गए हैं, ताकि हर बच्चे को आधुनिक डिजिटल शिक्षा का अवसर प्राप्त हो सके।“हर बच्चे को डिजिटल अधिगम का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि भविष्य डिजिटल रूप से सशक्त पीढ़ियों का होगा,” डॉ. सिंह ने कहा।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी गणमान्य अतिथियों और आरडब्ल्यूए सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया -भागीरथी एन्क्लेव अध्यक्ष डॉ. पूजा सिंह, उपाध्यक्ष जे.के. शुक्ला, भाजपा मंडल अध्यक्ष मोहित तिवारी, सेक्टर संयोजक आरती शुक्ला, बूथ अध्यक्ष एस.के. सिंह, दीपक गुप्ता, ओम प्रकाश यादव, रामाशंकर त्रिपाठी, के.एन. सिंह, शैलेन्द्र सिंह, सुमन सिंह, गोवर्धन एनक्लेव आरडब्ल्यूए अध्यक्ष नीरज श्रीवास्तव, रोहतास आइकॉन के भूपेन्द्र तथा समाज के सभी सम्मानित सदस्यों का जिन्होंने साक्षरता, पर्यावरण और सामुदायिक विकास की इस अद्भुत पहल में सक्रिय योगदान दिया।

CM योगी के सरोजनीनगर आगमन पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया स्वागत: डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुँचे थे मुख्यमंत्री

लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में रविवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि –
“परम श्रद्धेय योगी आदित्यनाथ जी के कर्मयोगी व्यक्तित्व, दूरदर्शी नेतृत्व और लोकहितकारी नीतियों ने उत्तर प्रदेश को सुशासन, समृद्धि, सुरक्षा और संवेदनशील प्रशासन के पथ पर अग्रणी राज्य बना दिया है। आपके नेतृत्व में प्रदेश ने विश्वास, पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा गढ़ी है।”

उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन और आशीर्वचन से सरोजनीनगर परिवार निरंतर प्रेरित और अनुग्रहीत है।

हेल्थ टिप्स :किचन में छुपा है ब्लड शुगर कंट्रोल का राज! अपनाएं ये 3 असरदार घरेलू नुस्खे

आज के समय में डायबिटीज बीमारी बेहद खतरनाक है। अगर आप भी डायबिटीज बीमारी से परेशान है, तो आप इन 3 देसी तरीकों से कंट्रोल कर सकते हैं। वैसे भी हमारी प्रकृति के पास हर एक बीमारी के लिए इलाज जरुर छिपा है। अब चाहे इम्यूनिटी बूस्ट करनी हो, बीमरियों से बचना हो या किसी दिक्कतों से बचना चाहते हैं, तो आपके किचन में मौजूद मसाले, हर्ब्स और कई औषधीय गुण वाली चीजें है। डायबिटीज के पेशेंट ब्लड शुगर कंट्रोल करने में सबसे ज्यादा मेहनत लगती है। अगर आप भी ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो देसी नुस्खें को जरुर ट्राई करें। इंसुलिन सीक्रेशन और सेंसिटिविटी को सुधारने और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में कई आयुर्वेदिक टिप्स मदद कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे आप इन 3 आयुर्वेदिक टिप्स से ब्लड शुगर लेवल को मैनेज कर सकते हैं।

त्रिफला गिलोय डिटॉक्स ड्रिंक

त्रिफला और गिलोय से बननी वाली डिटॉक्स ड्रिंक से ब्लड शुगर लेवल कम किया जा सकता है। इन दोनों का सेवन करने से पाचन और इम्यूनिटी दुरुस्त बनीं रहती है। इसके लिए आप आधा-आधा टीस्पून इन दोनों ही चीजों को आपको रातभर एक गिलास पानी में भिगोना है और इसे सुबह खाली पेट पीना है। इतना ही नहीं, इसे आपके लिवर और पैनक्रियाज डिटॉक्स होती है, टॉक्सिन्स कम होते हैं और डाइजेशन में सुधार होता है। डायबिटीज मैनेज करने के लिए यह ड्रिंक सबसे बेस्ट है।

हल्दी और आंवला का चूर्ण

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए आप हल्दी और आंवला पाउडर को समान मात्रा में लेना है। इसके लिए आपको क्या करना है कि 1 टीपस्पून पाउडर को 1 गिलास गुनगुने पानी में खाने से पहले लेना है। इसको पीने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है, इंफ्लेमेशन कम होती है और लिवर फंक्शन बेहतर सही होता है। शरीर को डिटॉक्स करता है और डाइजेशन को बेहतर करता है।

गुड़मार, तुलसी और दालचीनी की चाय

ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने के लिए आपको गुड़मार, तुलसी की कुछ पत्तियां और एक छोटा टुकड़ा दालचीनी लेना है। इन सब चीजों को 2 गिलास पानी में डालकर आधा रह जाने तब उबालना है। ध्यान रखें कि, यह आपको गुनगुना पीना है। इस ड्रिंक से इंसुलिन फंक्शन को सुधारती है। यह शुगर क्रेविंग्स को कम करती है और ब्लड शुगर लेवल को संतुलन करती हैं। बता दें कि, गुड़मार ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को बेहतर करता है, तुलसी और दालचीनी पैनक्रियाज फंक्शन को सुधार करती है। 

Health Tips: लिवर के खराब होने से पहले शरीर देता है ये 5 ज़रूरी संकेत, समय रहते पहचानें

लिवर डैमेज के शुरूआती संकेत अक्सर समय पर पता नहीं चलते हैं। ऐसे में अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है, तो आपको बिना देर किए शरीर के इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। बता दें कि हमारा शरीर और हाथ कई बार यह संकेत देते हैं कि हमारे शरीर में कुछ गड़बड़ी चल रही है। हाथ हमारे शरीर के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला हिस्सा है। कई बार हाथ हमारी अंदरूनी सेहत की कहानी बयान करते हैं।

अगर आपका लिवर सही तरीके से काम नहीं रहा है, तो स्किन, ब्लड सर्कुलेशन और हार्मोनल संतुलन पर इसका असर पड़ता है। इससे हमारे हाथों में कुछ बदलाव नजर आने लगते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इन बदलावों के बारे में बताने जा रहे हैं और साथ ही यह भी जानेंगे कि यह कैसे लिवर की स्थिति के बारे में जानकारी देते हैं।

हथेलियों पर खुजली या लालपन होना

हथेलियों में अचानक से खुजली या लालपन की समस्या महसूस होती है, तो इसको इग्नोर नहीं करना चाहिए। यह ‘पाल्मर एरीथिमा’ का संकेत हो सकता है। जोकि लिवर डैमेज या फिर लिवर की कमजोरी का संकेत हो सकती है। इस समस्या को सामान्य समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।

नाखूनों का टूटना या पीला पड़ना

अगर आपके नाखून पीले पड़ रहे हैं या फिर आसानी से टूट जा रहे हैं, तो यह भी लिवर से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने की गलती नहीं करना चाहिए। यह संकेत देता है कि आपके शरीर में विषैले पदार्थों का जमाव बढ़ रहा है। जिसको लिवर ठीक तरह से फिल्टर नहीं कर पा रहा है।

उंगलियों में सूजन या दर्द

अगर उंगलियों में बार-बार सूजन या दर्द की समस्या रहती है, तो यह भी लिवर की कमजोरी या लिवर डैमेज का संकेत हो सकता है। हालांकि कई लोग इसको सामान्य थकान या फिर मौसम का असर समझकर इग्नोर कर देते हैं। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो आपको फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

टेरीज नाखून

ऐसी स्थिति में नाखून का पूरा हिस्सा लगभग सफेद या फिर फीका दिखने लगता है। जबकि सिरा गहरा लाल-भूरा होता है। यह नाखूनों में प्रोटीन की कमी और ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव की वजह से होता है। जोकि लिवर सिरोसिस या फिर लिवर फेल्योर का संकेत हो सकता है।

ऐसे करें बचाव

लिवर को हेल्दी रखने के लिए हरी सब्जियां, ओट्स, फल, फाइबर, ग्रीन टी, हल्दी और नींबू पानी का सेवन करना चाहिए। अधिक मसालेदार, तलाभुना, प्रोसेस्ड और जंक फूड्स खाने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि यह लिवर पर दबाव डालता है।

लिवर हमारी बॉडी से विषैले पदार्थ को निकालने में सहायता करता है। दिन भर में 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। इससे शरीर डिटॉक्स होता है और लिवर के काम को आसान बनाता है।

गिलोय, हल्दी, आंवला और एलोवेरा जूस लिवर की सफाई करने में सहायता करता है। रोजाना सुबह खाली पेट गुनगुना नींबू पानी पीने से लिवर डिटॉक्स करने में बहुत फायदेमंद होता है।