सोमवार तड़के खैबर पख्तूनख्वा के मायर इलाके में पाकिस्तानी क्रिकेटर नसीम शाह के घर पर अज्ञात हथियारबंद लोगों ने गोलीबारी की. मायर पुलिस के अनुसार घटना रात करीब 1:45 बजे हुई जब हमलावरों ने शाह के घर के मेन गेट पर कई गोलियां चलाईं. हमलावर गोलीबारी के तुरंत बाद मौके से फरार हो गए.
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हमले की जांच शुरू कर दी है. आस-पास के घरों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है और क्रिकेटर के घर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शुरुआती जांच के आधार पर यह घटना आतंकवाद से जुड़ी हुई नहीं लगती बल्कि, यह ज़मीन विवाद या आपसी रंजिश से जुड़ी हो सकती है.
शाह के पिता ने लोअर दीर ज़िले के पुलिस अधिकारी तैमूर ख़ान से मुलाक़ात की. उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि जल्द ही गिरफ़्तारियां की जाएंगी. स्थानीय निवासियों ने बताया कि शाह परिवार को इलाके में इज्जतदार माना जाता है और उनके बीच कोई दुश्मनी या विवाद नहीं है.
कहां हैं नसीम शाह
नसीम शाह इस वक्त पाकिस्तान क्रिकेट टीम के साथ रावलपिंडी में मौजूद हैं. वो फिलहाल टीम के साथ बने हैं. नसीम शाह को श्रीलंका के खिलाफ 3 वनडे की सीरीज के लिए पाक टीम में चुना गया है, जिसके मुकाबले 11 नवंबर से 15 नवंबर के बीच खेले जाएंगे. वनडे सीरीज के बाद नसीम शाह 3 देशों के बीच होने वाली T20 सीरीज में भी पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करते दिखेंगे.
अब तक नसीम ने 20 टेस्ट मैचों में 2108 रन बनाए हैं.32 वनडे में 1437 रन बनाए हैं और 32 ही टी-20 मैचों में 929 रन बनाए हैं.
लगातर बढ़ते हुए प्रदूषण का लेवल फेफड़ों पर दबाव डल रहा है। प्रदूषित हवा, धुआं और टॉक्सिक पदार्थ फेफड़ों में जमा होकर ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा करता है, जिस वजह सेहत पर बुरा असर पड़ता है। अगर आप लंबे समय से प्रदूषिक हवाओं के संपर्क में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ा देता है। वैसे तो हम बाहरी प्रदूषण को रोक नहीं सकते हैं, लेकिन अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव करके फेफड़ों को हेल्दी रख सकते हैं। यदि आप अपने फेफड़ों को टॉक्सिन्स बचाना चाहते हैं, तो अभी से डाइट में इन 5 सुपरफूड्स को शामिल कर लें।
ब्रोकली
ब्रोकली में एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन-सी और सल्फोराफेन मौजूद होता है। यह शरीर के नेचुरल डिटॉक्स प्रोसेस को तेज करती है। ब्रोकली में पाएं जाने पोषक तत्व फेफड़ों की कोशिकाओं को प्रदूषण से होने वाले हानिकारक नुकसान से बचाता है। इसके अलावा, ब्रोकली श्वसन मार्ग में जमा टॉक्सिंस को दूर करती है।
खट्टे फल
फेफड़ों में जमे टॉक्सिंस पदार्थों को निकालने के लिए खट्टे फल का सेवन जरुर करें। इनमें विटामिन-सी, फ्लोवोनोड्स और सिट्रिक एसिड का अच्छा स्त्रोत है। आप नियमित रुप से संतरा, मौसमी, नींबू या किन्नू जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं। यह आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करती है। खट्टे फलों में विटामिन-C शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट होता है, जो फ्री-रेडिकल्स को बेअसर करके फेफड़ों के ऊतकों की मरम्मत करता है और प्रदूषण से होने वाली सूजन को भी कम करता है।
अखरोट
फेफड़ों को अंदर से डिटॉक्स करने के लिए आपनी डाइट में अखरोट शमिल करें। अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। ओमेगा-3 सूजन को कम करके फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है। रेगुलर अखरोट खाने से सांस फूलना और सूजन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
ब्लूबेरी
ब्लूबेरी में एंथोसायनिन, विटामिन-K और मैंगनीज जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर में फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को रोकती हैं। फेफड़ों के साथ ही यह त्वचा और दिल को भी प्रदूषण से बचाता है।
मोरिंगा/तुलसी
जड़ी-बूटियों में नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और डिटॉक्सीफाइंग गुण होते हैं। मोरिंगा और तुलसी दोनों ही श्वसन तंत्र को साफ करने में सहायक है। यह फेफड़ों से कफ और हानिकारक कणों से बाहर निकालता है, जिसके बाद आप आसानी से सांस ले सकते हैं। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है और फेफड़ों को इंफेक्शन से लड़ता है।
फेफड़ों को हेल्दी रखने के टिप्स
– रोजाना स्टीम जरुर लें। यह प्रदूषण से जमी धूल और टॉक्सिंस को बाहर निकालता है।
– नियमित रुप से प्राणायाम या डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें, ऐसा करने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।
– हाइड्रेशन जरुरी है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी जरुर पिएं। यह शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालता है।
– इसके अलावा, स्मोकिंग और सेकंड हैंड स्मोक से बचें। यह आपके फेफड़ों के लिए सेफ नहीं है।
आप अपने घर पर मनी प्लांट, एलोवेरा और स्नेक प्लांट के पौधे लगा सकते हैं, इनसे ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है।
नई दिल्ली/लखनऊ। देश की राजधानी दिल्ली को दहलाने वाली ब्लास्ट वारदात की जांच में अब बड़ा खुलासा हुआ है। Red Fort (लाल किला) के पास हुए धमाके से पहले सफेद Hyundai i20 कार ने राजधानी की सड़कों पर कुल 10 घंटे 48 मिनट तक सफर किया था। Delhi Police Special Cell, NIA और Forensic टीमों ने 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगालकर कार की पूरी मूवमेंट टाइमलाइन तैयार कर ली है। इस टाइमलाइन से न केवल ब्लास्ट का पूरा ब्लूप्रिंट सामने आया है, बल्कि आतंकी नेटवर्क की गहराई भी उजागर होने लगी है।
टाइमलाइन: कैसे दिल्ली में दाखिल हुई मौत की कार
8:04 AM – बदरपुर बॉर्डर से एंट्री
जांच के अनुसार, 10 नवंबर की सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर संदिग्ध Hyundai i20 कार बदरपुर टोल प्लाज़ा से दिल्ली में दाखिल हुई। CCTV फुटेज में साफ दिखा कि कार में दो लोग सवार थे। कार की गति सामान्य थी, जिससे एजेंसियों को शक नहीं हुआ।
8:20 AM – ओखला में रुकी, भरा गया पेट्रोल
इसके बाद कार ओखला इंडस्ट्रियल एरिया के पास एक पेट्रोल पंप पर रुकी। यहां लगे कैमरे में कार का नंबर प्लेट साफ नज़र आया – और यही फुटेज बाद में इस केस की सबसे अहम कड़ी साबित हुई।
दोपहर: लाल किले के पास पहुँची संदिग्ध कार
करीब दोपहर 3:19 बजे, यानी लगभग 7 घंटे बाद, कार Red Fort के पास सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में दाखिल हुई। यहां यह करीब तीन घंटे तक खड़ी रही। इस दौरान कोई अंदर या बाहर नहीं आया, जिससे अब शक गहराता जा रहा है कि कार में रिमोट या टाइमर-आधारित विस्फोटक सक्रिय किया गया। CCTV फुटेज में एक व्यक्ति को पास में मंडराते हुए देखा गया, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।
6:22 PM – कार ने ली अंतिम मोड़
शाम 6 बजकर 22 मिनट पर कार पार्किंग से बाहर निकली और दरियागंज- कश्मीरी गेट की दिशा में आगे बढ़ी। एजेंसियों का मानना है कि इसी बीच कार में डिटोनेशन मैकेनिज़्म एक्टिव हुआ।
6:52 PM- धमाके से दहली दिल्ली
सिर्फ 30 मिनट बाद, शाम 6:52 बजे, कार में भीषण विस्फोट हुआ। धमाके की गूंज पुरानी दिल्ली के कई इलाकों तक सुनाई दी। आसपास खड़ी कई गाड़ियां जलकर खाक हो गईं, और 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हुए।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से Ammonium Nitrate, बैटरी सेल्स, इलेक्ट्रिक सर्किट और वायरिंग के टुकड़े बरामद किए हैं। सभी सबूत अब NIA की टीम को सौंपे गए हैं, जो विस्फोटक के सोर्स की जांच कर रही है।
CCTV से खुला पूरा ट्रैक – दिल्ली की सड़कों पर 10 घंटे 48 मिनट की ट्रेल
Delhi Police Special Cell की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि संदिग्ध कार ने बदरपुर से लाल किला होते हुए दरियागंज और कश्मीरी गेट तक कई इलाकों में मूवमेंट की। टीमों ने लगभग 120 कैमरों की फुटेज देखी और 15 अलग-अलग लोकेशन्स चिन्हित की हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कार को कुछ जगहों पर जानबूझकर स्लो ड्राइव किया गया ताकि निगरानी से बचा जा सके।
Faridabad कनेक्शन: Royal Car Zone से खरीदी गई कार
ब्लास्ट में इस्तेमाल Hyundai i20 कार Faridabad के सेक्टर-37 स्थित Royal Car Zone शोरूम से खरीदी गई थी। पुलिस जब वहां पहुंची तो शोरूम बंद मिला और कर्मचारी फरार थे। जांच में पाया गया कि कार फर्जी आईडी और एड्रेस पर खरीदी गई थी। अब पुलिस शोरूम मालिक, ब्रोकर और डीलिंग एजेंट की तलाश में जुटी है। शक जताया जा रहा है कि इन्हीं लोगों ने कार को फर्जी कागज़ों के ज़रिए दिल्ली नेटवर्क को उपलब्ध कराया।
Terror Network फैला- लखीमपुर से गुजरात तक
जांच अब दिल्ली की सीमाओं से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश और गुजरात तक फैल गई है। Gujarat ATS ने अहमदाबाद से Islamic State Khorasan Province (ISKP) मॉड्यूल से जुड़े तीन संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी मोहम्मद सोहेल, लखीमपुर खीरी के झाला गांव का रहने वाला बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, सोहेल का लिंक मुजफ्फरनगर और शामली के दो अन्य संदिग्धों से था, जो पहले से एजेंसियों की निगरानी में थे। एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं तीनों ने उत्तर प्रदेश और गुजरात नेटवर्क को जोड़ा।
लखनऊ में बड़ी कार्रवाई- डॉक्टर परवेज अंसारी के घर छापा
दिल्ली ब्लास्ट के बाद अब लखनऊ में भी एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई तेज हो गई है। मड़ियांव के IIM रोड स्थित मुतक्कीपुर इलाके में डॉ. परवेज अंसारी के घर पर छापा मारा गया। टीमों ने घर से कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, कार डॉक्यूमेंट्स और मोबाइल रिकॉर्ड्स जब्त किए हैं।
डॉ. परवेज अंसारी का नेटवर्क सहारनपुर तक
जांच में खुलासा हुआ कि डॉ. परवेज अंसारी का कनेक्शन सहारनपुर के डॉक्टर आदिल से है, जो Faridabad आतंकी मॉड्यूल में पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। परवेज के घर से बरामद कार (UP 11 BD 3563) सहारनपुर आरटीओ में रजिस्टर्ड है और उस पर इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ का पास लगा मिला।
ATS को शक है कि यही कार मॉड्यूल के लॉजिस्टिक सपोर्ट और ट्रांजिट के लिए इस्तेमाल की गई थी।
आतंकी डॉ. मुजम्मिल और लखनऊ की शाहीन शाहिद पर भी निगाह
सुरक्षा एजेंसियों ने डॉ. मुजम्मिल नाम के एक संदिग्ध आतंकी की गर्लफ्रेंड शाहीन शाहिद को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है। शाहीन मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली है और उसने पिछले दो साल में कई बार दिल्ली और फरीदाबाद की यात्रा की थी। एजेंसियां अब शाहीन और परवेज अंसारी के बीच के संपर्कों की जांच कर रही हैं।
हुसैनगंज, मड़ियांव, IIM रोड- लखनऊ में कई जगह छापेमारी
लखनऊ ATS, J&K पुलिस और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया। हुसैनगंज, मुतक्कीपुर और मड़ियांव के कई घरों में सर्च अभियान चला। कुछ युवाओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। एजेंसियों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं।
राष्ट्रीय एजेंसियों का संयुक्त ऑपरेशन
NIA, Delhi Police Special Cell, Gujarat ATS और UP ATS अब इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन चला रही हैं। सूत्रों के अनुसार, यह आतंकी नेटवर्क ISKP के एक सब-मॉड्यूल के रूप में काम कर रहा था, जो भारत में छोटे-छोटे ब्लास्ट्स के ज़रिए बड़ी अस्थिरता फैलाने की कोशिश में था।
एक कार से खुला आतंकी नेटवर्क का जाल
Delhi Blast की जांच अब सिर्फ एक धमाके की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत के चार राज्यों- दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात में फैले एक संगठित आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश बनती जा रही है। हर नई CCTV फुटेज और मोबाइल ट्रेस के साथ एजेंसियां इस साजिश के मास्टरमाइंड के करीब पहुंच रही हैं। एजेंसियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क की जड़ें पूरी तरह उखाड़ दी जाएंगी, और देश की राजधानी पर मंडराता आतंकी खतरा पूरी तरह निष्प्रभावी किया जाएगा।
भारत में दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और तनाव से भरी लाइफस्टाइल ने लोगों के दिल की सेहत को सबसे बड़ा खतरा बना दिया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अब भी लोग अपने खानपान और लाइफस्टाइल पर ध्यान नहीं देंगे, तो आने वाले सालों में हार्ट अटैक के मामले और बढ़ सकते हैं. समय रहते शरीर के संकेतों को पहचानना और नियमित जांच कराना जरूरी है ताकि इस खामोश खतरे से बचा जा सके.
भारत में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले?
भारत में हार्ट डिजीज मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुका है. 2014 से 2019 के बीच देश में हार्ट अटैक के मामलों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है. शहरीकरण, बदलती लाइफस्टाइल, खराब खानपान, तनाव, धूम्रपान और डायबिटीज जैसी बीमारियां इसके मुख्य कारण हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह समस्या केवल सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, परिवारों की स्थिरता और कामकाजी जीवन पर भी पड़ रहा है.
हार्ट अटैक क्यों होता है?
हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक जाने वाली रक्त आर्टरीज में खून का प्रवाह किसी थक्के या ब्लॉकेज से रुक जाता है. इससे दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और कुछ ही देर में कोशिकाएं मरने लगती हैं. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है. विजयवाड़ा स्थित श्रीमाथा हर्ट क्लिनिक में हृदय रोग विशेषज्ञ टी. सुमन कुमार के अनुसार, “ज्यादातर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर अचानक नहीं होते, बल्कि उनके रिस्क फैक्टर पहले से हमारे शरीर में मौजूद होते हैं, जैसे कि हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा और धूम्रपान.”
शरीर में छिपे चार बड़े खतरे
डॉक्टरों के मुताबिक, ज्यादातर लोगों को पहला हार्ट अटैक अचानक नहीं होता, बल्कि उसके पीछे कुछ साइलेंट रिस्क फैक्टर्स छिपे रहते हैं, जैसे कि
हाई ब्लड प्रेशर – लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है.
कोलेस्ट्रॉल – खून में बढ़ा हुआ LDL कोलेस्ट्रॉल आर्टरीज में फैटी डिपॉजिट बना देता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है.
ब्लड शुगर या डायबिटीज– बढ़ी हुई शुगर ब्लड सेल्स को कमजोर करती है और हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ाती है.
स्मोकिंग – तंबाकू हार्ट और आर्टरीज दोनों को नुकसान पहुंचाता है.
ये सभी फैक्टर धीरे-धीरे असर करते हैं, लेकिन लक्षण तब दिखते हैं जब खतरा बढ़ चुका होता है. इसलिए नियमित जांच जरूरी है.
कैसे कम करें हार्ट अटैक का खतरा?
अच्छी बात यह है कि इन ज्यादातर जोखिमों को नियंत्रित किया जा सकता है. सही खानपान, नियमित व्यायाम और मेडिकल जांच से हार्ट अटैक का खतरा काफी घटाया जा सकता है. इसके लिए आपको अपनी डाइट में कुछ सुधार करने की जरूरत होती है, जैसे कि इसमें फलों, हरी सब्जियों, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स को शामिल करें. इसके अलावा व्यायाम करें, जिसमें रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक या योग करें. जहां तक हो सके, स्मोकिंग छोड़ें. तंबाकू का सेवन बंद करने से हार्ट डिजीज का खतरा तुरंत घटता है. ज्यादातर स्ट्रोक और हार्ट अटैक इसलिए होते हैं क्योंकि लोग अपने स्वास्थ्य की निगरानी नहीं करते. अगर समय पर जांच की जाए, तो डॉक्टर शुरुआती चरण में ही इलाज शुरू कर सकते हैं. विशेष रूप से 30 साल से ऊपर के लोगों या परिवार में हार्ट डिजीज का हिस्ट्री वालों को नियमित जांच करवानी चाहिए.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
अमेरिका में वीजा नियम अब और कड़े हो गए हैं. ट्रंप प्रशासन ने एक नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार अगर किसी विदेशी नागरिक को डायबिटीज, मोटापा, दिल की बीमारी या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, तो उसे वीजा देने से इनकार किया जा सकता है. अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी इस निर्देश के मुताबिक ऐसे लोग भविष्य में अमेरिका के लिए ‘पब्लिक चार्ज’ बन सकते हैं, यानी सरकारी संसाधनों पर बोझ डाल सकते हैं.
नई गाइडलाइन में कई गंभीर बीमारियां की गईं शामिल गाइडलाइन में कहा गया है कि अब वीजा प्रक्रिया में केवल संक्रामक बीमारियों या टीकाकरण की जांच ही नहीं होगी, बल्कि कई गैर-संक्रामक बीमारियों को भी गंभीरता से देखा जाएगा. इसमें दिल की बीमारियां, सांस संबंधी रोग, कैंसर, डायबिटीज, मेटाबोलिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां शामिल हैं. गाइडलाइन में लिखा है कि इन बीमारियों का इलाज बहुत महंगा हो सकता है, जो आवेदक को ‘पब्लिक चार्ज’ बना सकता है.
वीजा अधिकारी पूछेंगे ये सवाल निर्देश में कहा गया है कि वीजा अधिकारी यह भी जांचेंगे कि आवेदक अपनी बीमारी का इलाज बिना सरकारी सहायता के करवाने में सक्षम हैं या नहीं. उनसे यह भी पूछा जाएगा कि क्या वे पूरी उम्र तक इलाज का खर्च खुद उठा पाएंगे या सरकारी संस्थानों पर निर्भर हो जाएंगे. वही सवाल परिवार के सदस्यों जैसे बच्चों या बुजुर्ग माता-पिता के स्वास्थ्य पर भी लागू होंगे.
विशेषज्ञों ने जताई चिंता कई इमिग्रेशन विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि मेडिकल क्षमता का आकलन वीजा अधिकारियों से करवाना उचित नहीं है, क्योंकि वे चिकित्सकीय प्रशिक्षण नहीं रखते. विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकारी निजी धारणाओं या पूर्वाग्रहों की वजह से गलत निर्णय ले सकते हैं.
ज्यादा असर ग्रीन कार्ड आवेदकों पर पड़ेगा हालांकि गाइडलाइन सभी प्रकार के वीजा पर लागू है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे अधिक प्रभाव ग्रीन कार्ड यानी स्थायी निवास के आवेदकों पर पड़ेगा, क्योंकि इन्हें लंबे समय तक अमेरिका में रहना होता है और मेडिकल मूल्यांकन अधिक सख्ती से किया जाता है.