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‘तेरे इश्क़ में’ की धमाकेदार ओपनिंग तय! कृति सेनन की इन 5 बड़ी फिल्मों के रिकॉर्ड टूटने के आसार

कृति सेनन और धनुष की अपकमिंग फिल्म ‘तेरे इश्क में’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. इस फिल्म के जरिए दोनों पहली बार स्क्रीन पर रोमांस करते नजर आने वाले हैं. ‘तेरे इश्क में’ 28 नवंबर, 2025 को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है. इससे पहले अब दर्शकों की निगाहें फिल्म के ओपनिंग डे कलेक्शन पर टिकी हैं. आइए जानते हैं कि ‘तेरे इश्क में’ पहले दिन कितने करोड़ों का कलेक्शन कर सकती है.

‘तेरे इश्क में’ बॉक्स ऑफिस पर कृति सेनन की पिछली कई फिल्मों को मात दे सकती है. फिल्म रिलीज होते ही पहले दिन रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर सकती है. ‘तेरे इश्क में’ कृति के करियर की छठी सबसे ज्यादा ओपनिंग करने वाली फिल्म का खिताब भी अपने नाम कर सकती है.

‘तेरे इश्क में’ कर सकती है रिकॉर्ड तोड़ ओपनिंग

    • ‘तेरे इश्क में’ पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर डबल डिजिट में ओपनिंग कर सकती है.
    • कोइमोई की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म 10 करोड़ से ज्यादा की ओपनिंग कर सकती है.
    • अगर ऐसा होता है तो ये कृति सेनन की छठी सबसे ज्यादा ओपनिंग करने वाली फिल्म ‘लुका छुपी’ का रिकॉर्ड तोड़ देगी.
    • साल 2019 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 8.01 करोड़ रुपए की ओपनिंग की थी.
    • ‘तेरे इश्क में’ बॉक्स ऑफिस पर ‘क्रू’ को भी पछाड़ सकती है जिसने ओपनिंग डे पर 10.21 करोड़ रुपए कमाए थे.

धनुष की सबसे बड़ी बॉलीवुड ओपनर बन सकती है ‘तेरे इश्क में’

    • इसके साथ ही ‘तेरे इश्क में’ धनुष की बॉलीवुड में सबसे बड़ी ओपनिंग होगी.
    • इससे पहले ‘रांझणा’ के नाम ये रिकॉर्ड है जिसने 5.12 करोड़ रुपए की ओपनिंग की थी.

‘गुस्ताख इश्क’ से टकराएगी ‘तेरे इश्क में’
‘तेरे इश्क में’ को आनंद एल राय डायरेक्ट कर रहे हैं. इस फिल्म में कृति सेनन और धनुष लीड रोल में होंगे. बॉक्स ऑफिस पर ‘तेरे इश्क में’ मनीष मल्होत्रा की डेब्यू फिल्म ‘गुस्ताख इश्क’ से टकराएगी.

Lack of Sleep Effects: अगर आप रोज़ 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो शरीर पर क्या प्रभाव पड़ते हैं? परेशानी बढ़ने से पहले जानें इसके समाधान।

आज की तेज रफ्तार वाली जिंदगी में, जहां थकान को हम उपलब्धि समझने लगे हैं और आराम को एक इनाम की तरह देखते हैं, बहुत से लोग यह मानकर चलते हैं कि 5 से 6 घंटे की नींद में भी काम चल जाता है. रात देर तक काम करना, सुबह कॉफी का सहारा लेना और दिनभर सुस्ती के साथ जैसे-तैसे खुद को खींचते रहना यह सब आम हो गया है. लेकिन यह आदत धीरे-धीरे शरीर पर भारी पड़ती है. नए शोध बता रहे हैं कि 6 घंटे से कम नींद लेना शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को बिगाड़ सकता है चाहे वो दिमाग हो, दिल हो, मेटाबॉलिज्म या फिर इम्युनिटी. चलिए आपको बताते हैं कि इससे शरीर पर क्या असर होता है.

नींद की कमी आपके शरीर के साथ क्या करती है?

ज्यादातर स्टडी में वयस्कों के लिए रोजाना कम से कम 7 घंटे की नींद जरूरी मानी गई है. लेकिन जब नींद लगातार छह घंटे से नीचे चली जाती है, तो असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता, शरीर की कई सिस्टम गड़बड़ा जाती हैं.

मेटाबॉलिज्म, भूख और वजन पर असर

कम नींद से सबसे पहला झटका मेटाबॉलिज्म और भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन्स पर पड़ता है. कई स्टडीज में पाया गया है कि 5 से 6 घंटे नींद लेने वाले लोगों में प्री-डायबिटीज या टाइप-2 डायबिटीज का खतरा दोगुना हो जाता है. इसके साथ ही ऐसे लोगों का BMI बढ़ता है और मोटापा जल्दी घेरता है. इसके कुछ कारण भी होते हैं, जैसे कि लेप्टिन (पेट भरने का संकेत देने वाला हार्मोन) कम हो जाता है. घ्रेलिन (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) बढ़ जाता है, शरीर लगातार स्ट्रेस मोड में रहता है. इससे खाने की इच्छा बढ़ती है और वजन तेजी से बढ़ सकता है.

दिमाग, सोचने की क्षमता और मूड पर असर

कम नींद सिर्फ शरीर पर नहीं, बल्कि दिमाग पर भी बड़ा प्रभाव डालती है. दिमाग में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं. याददाश्त, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है, इसके चलते रिस्पॉन्स देने की गति कम हो जाती है. लंबे समय में इससे डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. मूड पर इसका असर तुरंत दिखता है. चिड़चिड़ापन, घबराहट, चिंता और डिप्रेशन जैसे लक्षण अक्सर नींद की कमी वाले लोगों में पाए जाते हैं.

इम्युनिटी की कमी

नींद शरीर की मरम्मत, इंफेक्शन से लड़ने और सूजन को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती है. छह घंटे से कम नींद लेने पर शरीर के सैकड़ों जीन प्रभावित होते दिखे हैं. खासकर वे जो इम्यून सिस्टम और स्ट्रेस कंट्रोल से जुड़े होते हैं. इसका नतीजा यह होता है कि शरीर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है, इंफेक्शन जल्दी पकड़ते हैं, रिकवरी धीमी हो जाती है. हार्मोन, ग्रोथ और टिश्यू रिपेयर पर असर पड़ता है. नींद के दौरान शरीर ग्रोथ हॉर्मोन रिलीज करता है, टिश्यू रिपेयर करता है और मेटाबॉलिज्म को संतुलित करता है.

मौत का खतरा

कई स्टडी में यह पाया गया है कि बहुत कम या बहुत ज्यादा नींद, दोनों ही स्थितियां समय से पहले मृत्यु का जोखिम बढ़ाती हैं. पांच घंटे या उससे कम सोने वालों में यह खतरा लगभग 15 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.

इससे बचने के उपाय

नींद कोई विकल्प नहीं है. यह शरीर की बेसिक जरूरत है. अगर आप लगातार छह घंटे से कम सो रहे हैं, तो आपको लगता होगा कि आप मैनेज कर रहे हैं, लेकिन शरीर इसकी कीमत चुका रहा होता है. बेहतर नींद के लिए कुछ आसान कदम यह हैं कि रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें, सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और तेज रोशनी से दूरी रखें और कमरा ठंडा और अंधेरा रखना चाहिए.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

मुनीर और शहबाज़ को बार-बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ क्यों याद आ रहा है? चीन और तुर्किये के साथ मिलकर वे आखिर क्या नई चाल चल रहे हैं?

मई 2025 में भारत की तरफ से चलगाए गए ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आई. उसका सैटेलाइट सर्विलांस नेटवर्क युद्ध जैसी तेज स्थितियों में काम नहीं कर पाया. जमीनी हालात समझने के लिए पाक सेना को समय पर और साफ सैटेलाइट तस्वीरें नहीं मिल सकीं. इसी वजह से युद्ध के कई अहम पल पाकिस्तान की नजरों से छूट गए. इसी कमजोरी ने पाकिस्तान को मजबूर किया कि वह अपने स्पेस सर्विलांस सिस्टम को तेजी से मजबूत करे.

चीन-तुर्किये और यूरोप से सहयोग
कमजोरियां दिखने के बाद पाकिस्तान ने कुछ ही महीनों में तीन नए सैटेलाइट लॉन्च किए. साथ ही उसने चीन, तुर्किये, अमेरिका और यूरोपीय कंपनियों से सहयोग बढ़ाकर अपनी निगरानी क्षमता मजबूत करने की कोशिश शुरू की.

जनवरी 2025: तीन दिनों में दो बड़े सैटेलाइट लॉन्च
पहली सैटेलाइट -PAUSAT-1 

पाकिस्तान ने SpaceX के Falcon-9 रॉकेट से PAUSAT-1 लॉन्च किया. द संडे गार्डियन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यह 10U नैनो-सैटेलाइट पाकिस्तान की एयर यूनिवर्सिटी ने तुर्किये की इस्तांबुल टेक्निकल यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर बनाया है. इसमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और खास सेंसर लगे हैं, जो जमीन, फसलों और इमारतों का ज्यादा साफ डेटा देते हैं. तुर्किये के साथ साझेदारी से पाकिस्तान को यूरोपीय तकनीक तक भी अप्रत्यक्ष पहुंच मिल रही है.

दूसरी सैटेलाइट- PRSC-EOL
17 जनवरी को पाकिस्तान ने PRSC-EOL नाम का नया पृथ्वी निगरानी सैटेलाइट चीन के जिउक्वान स्टेशन से लॉन्च किया. हालांकि इसे ‘पाकिस्तान में बना’ बताया जाता है, लेकिन डिजाइन, तकनीक और लॉन्च चीन की मदद से ही होता है. यह कृषि, शहरों और पर्यावरण की निगरानी में काम आता है, लेकिन इसका सैन्य उपयोग भी साफ नजर आता है.

अक्टूबर 2024 में भेजा गया था HS-1
HS-1 पाकिस्तान का पहला हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट है, जिसे चीन ने लॉन्च किया. यह छिपे सैन्य ठिकानों का पता लगाने, एयरबेस की गतिविधियों को समझने और बुनियादी ढांचे में बदलाव पकड़ने में सक्षम है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्योंं फेल हुआ पाकिस्तान?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का मुख्य सैन्य सैटेलाइट PRSS-1 केवल एक बार भारतीय एयरबेसों- पठानकोट, उधमपुर और आदमपुर की साफ तस्वीर ले सका. इसके बाद मौसम और ऑर्बिट की समस्या के कारण कई घंटे तक कोई उपयोगी इमेज नहीं मिली. इसी दौरान भारत ने कई बदलाव कर दिए, जिन्हें पाकिस्तान समय पर पकड़ नहीं सका. PakTES-1A नाम का एक पुराना सैटेलाइट पहले ही काम करना बंद कर चुका था.

ग्राउंड सिस्टम भी कमजोर, बैकअप नहीं
पाकिस्तान के पास सिर्फ दो ही ग्राउंड स्टेशन हैं- कराची और इस्लामाबाद. 2022 की बाढ़ में कराची स्टेशन 18 घंटे ठप रहा, जिसके कारण जरूरी तस्वीरें देरी से मिलीं. पश्चिमी पाकिस्तान में बैकअप स्टेशन की योजना अभी भी अधूरी है.

यूरोपीय तस्वीरें मिलती हैं, लेकिन कंट्रोल नहीं
पाकिस्तान Airbus और यूरोपीय कंपनियों से तस्वीरें तो मंगा सकता है, लेकिन उन्हें तुरंत रिटास्क नहीं कर सकता. 2024 में ईरान-पाकिस्तान तनाव के दौरान यूरोपीय तस्वीरें 36–48 घंटे की देरी से मिली थीं. वहीं, चीन का PRSS-1 लगभग 4-6 घंटे में ताजा तस्वीरें भेज सकता है. इसी वजह से चीन की भूमिका पाकिस्तान के लिए अभी भी सबसे अहम बनी हुई है.

2026–27 तक SAR सैटेलाइट लाने की तैयारी
पाकिस्तान अब ऐसा SAR सैटेलाइट बनाना चाहता है जो बादलों और रात में भी तस्वीरें ले सके. यह तकनीक किसी देश को असली सैन्य निगरानी क्षमता देती है.

Shubman Gill neck injury: चौका मारते ही शुभमन गिल के कंधे में तेज दर्द क्यों उभर आया? जानें यह समस्या कितनी गंभीर है।

कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट के दूसरे दिन भारतीय कप्तान शुभमन गिल को स्वीप शॉट से चौका लगाने के तुरंत बाद गर्दन में खिंचाव आ गया. वॉशिंगटन सुंदर के आउट होने के बाद गिल 35वें ओवर में बल्लेबाजी करने उतरे और आते ही एक जबरदस्त स्वीप लगाकर चौका जड़ा. उस शॉट के बाद उन्हें अचानक तेज दर्द महसूस हुआ और वे अपनी गर्दन पकड़ते हुए रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर चले गए. बीसीसीआई ने बताया कि गिल अस्पताल में एडमिट हैं और वह पहले टेस्ट मैच से बाहर हो चुके हैं. आइए जानते हैं कि चौका लगाते ही गिल के कंधे में क्यों हुआ तेज दर्द और यह कंडीशन कितनी खतरनाक है?

शुभमन को क्या दिक्कत?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुभमन गिल को इलाज के लिए ICU में शिफ्ट किया गया है, जहां मेडिकल टीम लगातार उनकी हालत पर नजर रख रही है. स्कैन और MRI की सभी जांचें पूरी हो चुकी हैं. भारतीय कप्तान को गर्दन के पास तेज दर्द की शिकायत थी, इसी कारण उन्हें बेहतर देखभाल के लिए ICU में भर्ती किया गया. अच्छी बात यह है कि शुरुआती रिपोर्ट्स में उनकी स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं. ताजा अपडेट के अनुसार, शुभमन गिल को गर्दन में स्पैसम है, जिसकी वजह से उन्हें सांस लेने और शरीर हिलाने-डुलाने में दिक्कत हो रही है. उन्हें निगरानी के लिए वुडलैंड्स हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है.

गर्दन में खिंचाव कितना खतरनाक?

Mayo Clinic के अनुसार, अचानक होने वाला गर्दन का दर्द अक्सर मांसपेशियों के तनाव, गलत मूवमेंट या नस पर दबाव के कारण होता है. शुभमन गिल के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिली. स्वीप शॉट लगाते वक्त उनका ऊपरी शरीर तेजी से घूम गया, जिससे गर्दन की मांसपेशियों पर अचानक जोर पड़ा और स्पैसम की स्थिति बन गई. यही वजह रही कि चौका लगाने के तुरंत बाद उन्हें तीखा दर्द महसूस हुआ और वह रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर चले गए. तमाम मेडिकल रिपोर्ट्स बताती हैं कि, गर्दन की मांसपेशियों में अचानक पड़ा खिंचाव आम तौर पर हल्का होता है, लेकिन कभी-कभी यह नस पर दबाव, टिश्यू इंजरी या सर्वाइकल स्पाइन पर स्ट्रेस पैदा कर सकता है. ऐसे मामलों में दर्द तेज हो सकता है और सिर घुमाना मुश्किल हो जाता है. इसलिए खिलाड़ियों में ऐसे दर्द को हल्के में नहीं लिया जाता और तुरंत स्कैन करने की सलाह दी जाती है.

कब यह ज्यादा दिक्कत कर सकती है

Mayo Clinic के अनुसार, वैसे तो यह कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, इलाज करवाने के बाद. लेकिन अगर खिचाव-दर्द के साथ कुछ लक्षण दिखें तो यह सावधानी लायक हो सकता है. जैसे कि

    • दर्द लगातार बने रहना या दिनों में कम न होना
    • दर्द के साथ बाजू-हाथ या कंधे में कमजोरी, सुन्न होना, टिंगलिंग महसूस होना
    • इनमें से कोई भी मिले तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Travel Tips: रील और रियलिटी का शानदार मेल—ये शहर आपको फिल्मों जैसा भव्य अनुभव करवाएंगे।

घूमने-फिरने का शौक तो हर किसी को होता है। हर कोई ऐसी जगहों पर जाना चाहता है, जहां पर वह ढेरों यादगार पलों को इकट्ठा कर सकें। वहीं कुछ खास पलों को खुलकर एंजॉय कर सकें। दुनिया भर में कई ऐसे शहर हैं, जो किसी फिल्मी दुनिया से कम नहीं लगते हैं। इन जगहों पर जाते ही आपको ऐसा लगेगा कि आप किसी फिल्मी दुनिया में आ गए हैं। यहां की इमारतें, गलियां, कैफे और लोग सब मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जो आपको पूरी जिंदगी याद रहते हैं। वहीं फोटोग्राफी के लिहाज से भी यह जगहें बेस्ट हैं। अगर आप भी ऐसी जगहों की तलाश में हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको उन जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं।

जयपुर

अगर भारत में कोई ऐसी जगह है, जो फिल्मी दुनिया का एहसास कराती है। यह राजस्थान का गुलाबी शहर जयपुर है। जयपुर शहर इतिहास, रंगों और रॉयल लुक से भरपूर है। यहां के किले, महल और हवेलियां में आपको बीते वक्त की झलक देखने को मिलेगी। इसके साथ ही रंग-बिरंगे कपड़े, भीड़-भाड़ वाले बाजार, मसाले और हस्तशिल्प हर गली को खास बनाते हैं। आपको जयपुर में सब कुछ गुलाबी देखने को मिलेगा। गुलाबी रंग की इमारतें और पारंपरिक डिजाइन इस शहर को वाकई फिल्मी एहसास देते हैं।

वेनिस

वैसे तो वेनिस एकदम सपनों का शहर लगता है और यहां का नजारा भी काफी ज्यादा रोमांटिक होता है। आप यहां पर गोंडाला राइड करते समय डूबते हुए सूरज का शानदार नजारा देख सकते हैं। वहीं पानी में झलकती इमारतों को देखना किसी फिल्म जैसा अनुभव होता है।

सेंटोरिनी (ग्रीस)

सफेद रंग के घर, नीले गुंबद वाले चर्च और समुद्र के किनारे बसा सेंटोरिनी शहर किसी रोमांटिक फिल्म की शूटिंग जैसा लगता है। सेंटोरिनी में सनसेट का नजारा काफी ज्यादा खूबसूरत लगता है और यह शहर नेचुरल ब्यूटी का जीता जागता उदाहरण है।

रोम (इटली)

जब भी खूबसूरत शहरों की बात होती है, तो सबसे पहले इटली का नाम लिया जाता है। इटली में कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। इटली का रोम शहर अपने आप बेहद शानदार है। ट्रेवी फाउंटेन, कोलोसियम और पुरानी गलियों वाला रोम हर एक पल को खास और फिल्मी बना देता है। यहां की ऐतिहासिक इमारतें भी किसी टाइम ट्रैवल का एक्सपीरियंस कराती हैं।

पेरिस

लोग पेरिस को ‘City Of Love’ कहते हैं। इस शहर की खूबसूरती आपको हर गली-नुक्कड़ पर देखने को मिलती है। पेरिस की सीन नदी, एफिल टॉवर और पुराने पुल जैसे किसी फिल्म का सीन लगते हैं। पेरिस के छोटे-छोटे कैफे, शांत गलियां और सड़क पर कला दिखाते कलाकार हर पल को खास बना देते हैं।

दुबई

बता दें कि दुबई एक ऐसी जगह है, जहां पर जाने का सपना हर भारतीय का होता है। यहां की ऊंची इमारतें, चमकते मॉल और बुर्ज खलीफा इसको पूरी तरह से मॉर्डन फिल्म सेट जैसा बनाते हैं। रात की रोशनी और रेगिस्तान सफारी दुबई का यूनिक कॉम्बिनेशन है।