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“संजय कपूर की प्रॉपर्टी विवाद में नया मोड़ आया, प्रिया सचदेव पर नकली सिग्नेचर का आरोप लगा है.”

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों की उस याचिका पर दिवंगत संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर से जवाब मांगा है जिसमें उन्होंने अपने पिता की कथित वसीयत की मूल प्रति के निरीक्षण का आग्रह किया है.

संयुक्त रजिस्ट्रार (न्यायिक) गगनदीप जिंदल ने याचिका पर प्रिया कपूर और कथित वसीयत की निष्पादक श्रद्धा सूरी मारवाह को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा. अब मामले की सुनवाई 16 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध की गई है.

प्रिया सचदेव पर लगा जाली हस्ताक्षार करने का आरोप 
यह आवेदन करिश्मा कपूर के बच्चों – समायरा कपूर और उनके भाई – द्वारा दायर मुकदमे में दायर किया गया, जिसमें उनके दिवंगत पिता संजय कपूर की संपत्ति की कथित वसीयत को चुनौती दी गई है.

संबंधित संपत्ति की कीमत कथित तौर पर 30,000 करोड़ रुपये है. वादियों के अनुसार, कथित वसीयत जाली और मनगढ़ंत है, तथा उस पर हस्ताक्षर उनके पिता के नहीं हैं, बल्कि कथित तौर पर प्रिया कपूर ने सत्यापनकर्ता गवाहों के साथ मिलीभगत करके जाली हस्ताक्षर किए हैं.

प्रिया सचदेव के वकील ने दी क्या दलीलें? 
दूसरी ओर, प्रिया कपूर के वकील ने दावा किया कि उनके द्वारा वादी के दावों को ‘फर्जी और निराधार’ बताए जाने के बाद यह आवेदन दायर किया गया है. प्रिया कपूर के वकील ने पहले की सुनवाई में कहा था, ‘वर्तनी की त्रुटियों के कारण वसीयत को फर्जी नहीं कहा जा सकता, और उन्होंने संजय कपूर के हस्ताक्षर पर भी सवाल नहीं उठाया है.’ वकील ने दावा किया कि यह तर्क उठाए जाने के बाद, वादी ने अब हस्ताक्षर की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए नया आवेदन दायर किया है.

संपत्ति से अलग करने की हुई कोशिश 
आवेदन में करिश्मा कपूर के बच्चों ने अपने दिवंगत पिता की कथित वसीयत की मूल प्रति के निरीक्षण का आग्रह किया है, जिसे मारवाह ने 25 सितंबर को एक सीलबंद लिफाफे में, समर्थन हलफनामों के साथ दायर किया था.

अदालत करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा दायर एक अंतरिम निषेधाज्ञा याचिका पर भी सुनवाई कर रही है, जिसमें प्रिया कपूर को संजय कपूर की संपत्ति से उन्हें अलग करने से रोकने का आग्रह किया गया है. इस याचिका पर सुनवाई 20 नवंबर को जारी रहेगी.

प्रिया सचदेव को कहा सिंड्रेला की सौतेली मां 
बच्चों ने कथित वसीयत की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अदालत के सामने प्रिया कपूर पर ‘‘लालची’’ होने का आरोप लगाया और उन्हें ‘‘सिंड्रेला की सौतेली मां’’ कहा.

परीकथा सिंड्रेला में, इसी नाम की युवती के साथ उसकी सौतेली मां द्वारा दुर्व्यवहार किया जाता है, जो अपना सारा ध्यान अपनी दो बेटियों पर केंद्रित करती है.ससे पहले, उच्च न्यायालय ने प्रिया कपूर से उनकी संपत्तियों की सूची अदालत को सौंपने को कहा था.

इस बीच, प्रिया कपूर ने अदालत को बताया कि एक्ट्रेस के बच्चों को पारिवारिक ट्रस्ट से पहले ही 1,900 करोड़ रुपये मिल चुके हैं.

Health Effects of Poop Timing: “सुबह या शाम—आप कब शौच जाते हैं? इसकी टाइमिंग आपकी सेहत के बारे में कई अहम बातें बताती है.”

अक्सर लोग इस बात पर ध्यान ही नहीं देते कि वे सुबह जाते हैं या शाम को, लेकिन पॉटी की टाइमिंग आपके पेट, इंटेस्टाइन और मेटाबॉलिज्म की हालत के बारे में बहुत कुछ बताती है. हमारा पाचन तंत्र भी 24 घंटे की एक सर्कैडियन रिद्म पर चलता है, ठीक उसी तरह जैसे नींद, भूख, हार्मोन और बॉडी क्लॉक काम करते हैं. यही वजह है कि ज्यादातर लोग सुबह उठने के कुछ समय बाद ही फ्रेश होने जाते हैं, क्योंकि उस समय कोलन सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है.

लेकिन अगर कोई व्यक्ति रोज शाम को या कभी भी अनियमित समय पर पॉटी जाता है, तो ये अक्सर इस बात का संकेत होता है कि उसकी बॉडी क्लॉक, तनाव का स्तर या खाने-पीने की आदतें बदल गई हैं. टाइमिंग पर ध्यान देने से आप बिना किसी झिझक के अपने मेटाबॉलिक हेल्थ की कई छोटी लेकिन अहम बातें समझ सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इससे कौन-कौन सी चीजें पता चलती हैं.

सुबह पॉटी क्यों पसंद करती है बॉडी?

आपको बता दें कि पेट और कोलन का मूवमेंट पूरे दिन एक जैसा नहीं रहता. सुबह उठने के बाद इसकी एक्टिविटी सबसे ज्यादा होती है. रिसर्च बताते हैं कि कोलन की मोटिलिटी का खुद का सर्कैडियन रिद्म होता है, जो दिन में तेज और रात में धीमा पड़ जाता है. चूहों पर किए गए कई स्टडीज में पाया गया कि अगर खास क्लॉक जीन जैसे Per1 और Per2 हटा दिए जाएं, तो पॉटी का रिद्म पूरी तरह बिगड़ जाता है. इसके अलावा, सुबह उठकर खाना खाने से गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स एक्टिव होता है, जो कोलन को सिग्नल देता है कि वह कंटेंट को आगे बढ़ाए. इन्हीं कारणों से सुबह पॉटी आना इस बात का संकेत है कि आपकी बॉडी और गट क्लॉक एक-दूसरे के साथ तालमेल में काम कर रही हैं.

शाम को पॉटी आने का क्या मतलब?

अगर किसी व्यक्ति की पॉटी रोज शाम को ही आती है, तो इसका मतलब हो सकता है कि उसकी बॉडी क्लॉक शिफ्ट हो गई है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि रात के समय कोलन का मूवमेंट काफी धीमा हो जाता है. अगर पाचन गतिविधि शाम को तेज होने लगती है, तो इसके पीछे लेट-नाइट खाना, शिफ्ट वर्क, या अनियमित नींद जैसी चीजें हो सकती हैं. खाना भी शरीर की इंटरनल क्लॉक को सेट करने वाला बड़ा संकेत होता है, इसलिए देर से खाने की आदत गट की रिद्म को बिगाड़ देती है. इसका मतलब है, शाम को पॉटी आना सिर्फ लेट डाइजेशन नहीं, बल्कि मेटाबॉलिक रिद्म के गड़बड़ होने का संकेत भी हो सकता है.

पॉटी टाइमिंग और मेटाबॉलिज्म का कनेक्शन

इंटेस्टाइन और मेटाबॉलिज्म दोनों ही बॉडी क्लॉक से जुड़े हैं. अगर नींद, खाना या रूटीन गड़बड़ हो जाए, तो इससे न सिर्फ कोलन की गति बदलती है, बल्कि शरीर में शुगर कंट्रोल, फैट मेटाबॉलिज्म जैसे काम भी प्रभावित होते हैं. इसी वजह से नियमित सुबह की पॉटी अक्सर एक सिंक्रोनाइज्ड मेटाबॉलिस्म का संकेत होती है, जबकि शाम या अनियमित टाइमिंग किसी रिद्म शिफ्ट की ओर इशारा कर सकती है.

कब यह टाइमिंग चिंता का कारण?

अगर अचानक पॉटी का समय बदल जाए, और इसके साथ दर्द, खून, वजन घटना या लगातार पेट फूलना जैसी दिक्कतें शुरू हो जाएं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. सर्कैडियन रिद्म में गड़बड़ी IBS या फंक्शनल कॉन्स्टिपेशन जैसी समस्याओं से भी जुड़ी मानी जाती है. कुछ दिनों तक टाइमिंग नोट करने से समस्या समझने में मदद मिलती है और सही समय पर डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

“मौत की सजा के ऐलान के बाद यूनुस सरकार ने भारत से शेख हसीना को बांग्लादेश लौटाने की मांग की”

बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने सोमवार को पूर्व पीएम शेख हसीना को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई. कोर्ट ने शेख हसीना के दो सहयोगियों पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन के खिलाफ भी फैसला सुनाया. बांग्लादेश ने द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को तुरंत ढाका को सौंपने का अनुरोध किया.

भारत को लेकर क्या बोला बांग्लादेश?

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के संबंध में बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल की ओर से दिए गए फैसले पर ध्यान दिया है. कोर्ट ने फरार अभियुक्त शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को जुलाई नरसंहार के लिए दोषी पाया और सजा सुनाई है. मानवता के खिलाफ अपराधों के दोषी इन लोगों को अगर कोई देश शरण देता है तो बहुत ही अमित्रतापूर्ण कार्य होगा और न्याय की अवहेलना मानी जाएगी.”

‘शेख हसीना को वापस भेजे भारत’

बांग्लादेश ने कहा कि हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि वह इन दोनों दोषियों को बिना किसी देरी के तुरंत बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंप दें. इस दौरान यूनुस सरकार ने 2013 के प्रत्यर्पण संधि का भी जिक्र किया दिया. इसमें कहा गया कि दोनों देशों के बीच मौजूदा प्रत्यर्पण संधि के अनुसार दोषियों को बांग्लादेश को सौंपना भारत का अनिवार्य कर्तव्य भी है.

तख्तापलट के बाद भारत आईं शेख हसीना

साल 2024 में स्वतंत्रता संग्राम में शामिल सैनिकों के बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की घोषणा को लेकर शेख हसीना सरकार को छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा, जिसने धीरे-धीरे देशव्यापी आंदोलन का रूप अख्तियार कर लिया. प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी, जिसके चलते शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और भारत भागने के लिए मजबूर होना पड़ा.

शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने आईसीटी का पुनर्गठन किया, जिसने 2024 में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर हसीना और अन्य पर मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाया.

“एक्सपर्ट्स का दावा है कि शेख हसीना की सजा अमेरिका-पाकिस्तान के एजेंडे से जुड़ी है और मौजूदा नेतृत्व पूरी तरह कठपुतली बन चुका है.”

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है. भारत में निर्वासन में रह रहीं हसीना को 5 में से दो मामलों में फांसी और बाकी मामलों में आजीवन कारावास मिला है. उन्होंने फैसले को राजनीतिक साजिश बताते हुए इसे ‘फर्जी अदालत’ का निर्णय कहा है. इसी फैसले के बाद अब कई विशेषज्ञ इसे बांग्लादेश की राजनीति नहीं, बल्कि ‘अंतरराष्ट्रीय गेम’ का हिस्सा बता रहे हैं.

क्या है शेख हसीना का मामला?
ICT ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, मौतों और दमन के लिए सीधे शेख हसीना को जिम्मेदार माना. कोर्ट का कहना है कि उस समय ड्रोन, हेलिकॉप्टर और घातक हथियारों का इस्तेमाल उनके निर्देश पर हुआ, जिससे 1,400 लोगों की मौत और करीब 24,000 लोग घायल हुए. अदालत ने हसीना को इन घटनाओं का ‘मास्टरमाइंड’ कहकर फांसी की सजा सुनाई.

एक्सपर्ट्स बोले- यह फैसला ‘राजनीतिक बदला’
कई विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिकों ने फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रभावित है और हसीना को सफाई का मौका भी नहीं दिया गया. रक्षा विश्लेषक डॉ. ब्रह्म चेलानी ने ICT को ‘कंगारू कोर्ट’ करार देते हुए कहा कि यह फैसला न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध है. उन्होंने कहा कि अवामी लीग को पहले ही बैन किया गया है और अंतरिम सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के लिए न्यायिक व्यवस्था का इस्तेमाल कर रही है

भारत के खिलाफ अमेरिका-पाकिस्तान का गेम?
रिटायर्ड मेजर जनरल और रक्षा विशेषज्ञ संजय मेस्टन ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अमेरिका और पाकिस्तान का एजेंडा काम कर रहा है. उनके मुताबिक, ये दोनों देश बांग्लादेश को भारत-विरोधी इस्लामिक ढांचे में ढालना चाहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में लोकतंत्र को योजनाबद्ध रूप से कमजोर किया जा रहा है.

पूर्व राजनयिकों ने भी फैसले पर उठाए सवाल
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने भी कोर्ट के फैसले को अवैध बताया. उनका कहना है कि 1,400 मौतों के आंकड़े का कोई आधिकारिक आधार नहीं दिया गया और न ही पीड़ितों की पहचान बताई गई. उन्होंने कहा कि यह फैसला इतनी जल्दी सुनाया गया कि यह न्यायिक प्रक्रिया से अधिक राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित लगता है. पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार ने भी कहा कि यह फैसला पहले से तय था क्योंकि ट्रिब्यूनल के सभी सदस्य वर्तमान अंतरिम सरकार के भरोसेमंद लोग हैं.

भारत की पूर्व हाई कमिश्नर रीवा गांगुली दास ने कहा कि हालात को बेहद सावधानी से देखने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि फैसले के बाद दो बुलडोजर ढाका के 32 धनमंडी की ओर बढ़ते दिखे, जहां शेख मुजीबुर रहमान की हत्या हुई थी. उन्होंने सवाल उठाया कि ये बुलडोज़र कौन लोग ला रहे हैं और क्यों उस जगह को निशाना बनाया जा रहा है.उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हिंसा और आगजनी की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे हालात बहुत खतरनाक हो गए हैं. भारत को अपने पड़ोस की इस स्थिति पर कड़ी नजर रखनी होगी.

यूनुस भी तो वही काम कर रहे!
फैसले से पहले ही ढाका में हिंसा, क्रूड बम हमलों और तनाव की स्थिति बनी हुई थी. इसके बीच अंतरिम सरकार ने सुरक्षा बलों को ‘देखते ही गोली मारने’ के आदेश दिए, जिसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जिस आरोप में हसीना को सजा दी गई, वही कार्रवाई अभी की सरकार खुद कर रही है.

Travel Tips:प्री-वेडिंग शूट को unforgettable बनाना चाहते हैं? भारत के इन टॉप 3 डेस्टिनेशन्स पर करें प्लान — आपकी हर तस्वीर होगी वायरल!

जिंदगी में शादी एक बार होती है, हर कोई अपनी शादी को बेहद खास बनाना चाहता है। शादी का मौका हर किसी के लिए खास होता है। ऐसे में कपल्स अपनी शादी के हर एक पल को यादगार बनाने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं। परिवार वाले भी शादी के ग्रेंड बनाने के लिए तमाम प्लानिंग करते हैं। इन दिनों प्री-वेडिंग शूट कपल्स में काफी ट्रेंड में है। इस मौके पर कपल्स अपनी खूबसूरत तस्वीरों से हर एक मूमेंट को कैप्टर करना चाहते हैं। प्री-वेडिंग शूट के लिए खास लोकेशन होना भी बेहद जरुरी है, जिससे आपकी हर एक तस्वीरें अट्रैक्टिव दिखें। अगर आप भी बहुत जल्दी शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं,तो आप प्री-वेडिंग शूट के लिए इन बेहतरीन लोकेशन का चयन कर सकते हैं। इसे लेख में हम आपको 3 बेहतरीन डेस्टिनेशन बताने जा रहे हैं, जहां आप प्री-वेडिंग शूट करा सकते हैं।

ताजमहल का महताब बाग

प्री-वेडिंग शूट की बारी आती है, तो ज्यादातर लोगों के मन में मोहब्बत की नगरी में प्री-वेडिंग शूट कराने का ख्याल जरुर आता होगा। आगरा में स्थित ताजमहल के ठीक पीछे स्थित महताब बाग बेस्ट लोकेशन है। इस जगह पर तस्वीरें बेहद ही प्यारी आती है, वहीं फोटो के बैकग्राउंड में ताज महल बेहद शानदार लगता है। इसलिए प्री-वेडिंग शूट के लिए यह बेस्ट लोकेशन है। प्रकृति के बीच सूर्योदय और सूर्यास्त के मौके पर पार्टनर संग फोटोज काफी रोमांटिक आती हैं।

उदयपुर का सिटी पैलेस

सिटी ऑफ लेक्स उदयपुर प्री-वेडिंग के लिए एक परफेक्ट लोकेशन में से एक है। इस शहर का सिटी पैलेस बेहद ही सुंदर है। यहां पर आपको फोटोशूट के लिए कई खूबसूरत लोकेशन मिल जाएंगी। उदयपुर रॉयल डेस्टिनेशन के लिए जाना जाता है।  उदपुर का सिटी पैलेस में पुराने महल के दरवाजे, खिड़कियां शूट को एक रॉयल लुक देता है। लेकिन इस जगह पर शूट के लिए आपको पैसे देने होंगे।

कलंगुट बीच, गोवा

वैसे तो गोवा में कई खूबसूरत बीच हैं। हालांकि, कलंगुट बीच प्री-वेडिंग शूट के लिए सबसे बेस्ट है। बता दें कि, इस जगह को ‘समुद्र तटों की रानी’ कहा जाता है। कलंगुट बीच पर सूर्योदय के समय फोटोशूट के लिए बेहतरीन है। यहां पर समुद्र की लहरों के बीच पार्टनर संग रोमांटिक तस्वीरों का शूट करा सकते हैं। यहां पर आपको प्राकृतिक सौदर्य का अनुभव देखने को जरुर मिलेगा।