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बाबा सिद्धीकी मर्डर केस के मुख्य आरोपी अनमोल बिश्नोई की मुश्किलें अमेरिका ने और बढ़ा दी हैं, जानें क्या है कारण।

बाबा सिद्धीकी हत्या मामले के साजिशकर्ता अनमोल बिश्नोई को अमेरिका ने देश से निकाला. यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका की डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने NCP नेता और पूर्व विधायक जीशान सिद्धीकी को बताया कि उनके पिता की हत्या के साजिशकर्ता अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से निकाल दिया. जीशान को किये गए ईमेल में अमेरिका ने बताया की उन्होंने 18 नवंबर को ही अनमोल बिश्नोई को अमेरिका की धरती से भगा दिया है.

यूएस इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के हत्थे चढ़ा अनमोल 

अमेरिका में लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई को फरवरी में हिरासत में लिया गया था. वह लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई है, जो अमेरिका में रहकर में छिपकर भारत में धड़ल्ले से आपराधित घटनाओं को अंजाम दे रहा था. वह यूएस इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के हत्थे चढ़ गया था.

NIA की मोस्टवांडेट लिस्ट में अनमोल बिश्नोई का नाम

अनमोल बिश्नोई भारतीय जांच एजेंसी NIA और मुंबई पुलिस की मोस्टवांटेड लिस्ट में है. फरवरी में मुंबई पुलिस ने बाबा सिद्दीकी की हत्या और एक्टर सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग के मामले में अनमोल बिश्नोई के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी. क्राइम ब्रांच ने इस मामले में कुल 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और इन सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. फर्जी पासपोर्ट पर वह भारत से फरार हुआ था. एनआईए ने भी अनमोल बिश्नोई को मोस्ट वांटेड बताया था और उस पर 10 लाख रुपये के इनाम रखा है.

मूसेवाला की हत्या के लिए दिया था हथियार

अनमोल बिश्नोई पर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या के लिए हथियार मुहैया कराने का भी आरोप है. लॉरेंस बिश्नोई के जेल में बंद होने के बाद से अनमोल गैंग के सदस्यों को हत्या और वसूली के निर्देश देता था. एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर 2024 को मुंबई के बांद्रा में उनके बेटे जीशान के ऑफिस के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली.

शेख हसीना को मौत की सजा के विरोध में बांग्लादेश में बंद, अवामी लीग का ऐलान—हड़ताल यूनुस सरकार के पतन तक चलेगी।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देश में स्थिति काफी बिगड़ गई थी, लेकिन अब मंगलवार को हालात बेहतर हैं. हालांकि, अवामी लीग ने देशव्यापी पूर्ण बंद का आह्वान किया है. सुरक्षा बल प्रमुख शहरों पर निगरानी रख रहे हैं.

सोमवार को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई थी. उन पर आरोप लगाया गया है कि पिछले साल बांग्लादेश में तख्तापलट के दौरान लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षाबलों ने ड्रोन और हेलीकॉप्टरों से गोलीबारी की. जस्टिस गुलाम मुर्तजा मोजुमदार की अध्यक्षता वाली बेंच ने 453 पेज के फैसले में शेख हसीना को उकसावे, हत्या का आदेश देने और अपराधों को रोकने में विफलता का दोषी करार दिया है.

फैसला आने के बाद किसी तरह की हिंसा की सूचना नहीं मिली, जबकि ढाका और अन्य प्रमुख शहरों में यातायात बेहद कम रहा और संभावित अशांति की आशंका के बीच लोगों की आवाजाही सीमित रही. ढाका के एक परिवहन ऑपरेटर ने कहा, ‘परिवहन व्यवस्था धीमी है, लोग घरों में रहना पसंद कर रहे हैं.’

कई कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में भी उपस्थिति कम रही. भारी हथियारों से लैस पुलिस, रैपिड एक्शन बटालियन और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों ने सरकारी इमारतों, पार्टी कार्यालयों और प्रमुख चौराहों के आसपास 24 घंटे गश्त जारी रखी. ढाका के कई हिस्सों में सुरक्षा घेरा बनाए रखा गया, जबकि बैरिकेड और चौकियों पर निगरानी जारी रही.

अवामी लीग ने सोमवार को सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में मंगलवार को देशव्यापी पूर्ण बंद का आह्वान किया था. पार्टी ने 19 से 21 नवंबर तक देशव्यापी प्रदर्शन, विरोध और प्रतिरोध का भी ऐलान किया है. बयान में कहा गया, ‘हमारा व्यवस्थित लोकतांत्रिक आंदोलन हत्यारे–फासीवादी (मुहम्मद) यूनुस की अवैध, असंवैधानिक सरकार के पतन और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की बहाली तक जारी रहेगा.’

अवामी लीग ने फैसले को राजनीति से प्रेरित, दुर्भावनापूर्ण, प्रतिशोधात्मक और विद्वेषपूर्ण बताया है. फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शेख हसीना ने आरोपों को पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि यह फैसला एक धांधली वाले न्यायाधिकरण ने सुनाया है, जिसे बिना जनादेश वाली, अलोकतांत्रिक सरकार चला रही है.

बडी खबर: सीएम योगी की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति पर बट्टा लगाते सरकारी कर्मचारी, कार्यालय बना बीयर बार लेकिन निर्देश की बावजूद जिम्मेदारों ने नहीं की कोई कार्रवाई

  • उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में सरकारी कार्यालय को ‘बीयर बार’ बनाने का सनसनीखेज मामला गंभीर: कार्रवाई रोकने में भाषा विभाग के अनुभाग अधिकारी की भूमिका उजागर
  • सरकारी कार्यालय में शराब सेवन का वीडियो वायरल- घटना ने उजागर किया अनुशासनहीनता का बड़ा मामला

रिपोर्ट: शिवसागर सिंह चौहान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में उस समय हड़कंप मच गया जब दो कर्मचारी- सहायक प्रधान सुरेन्द्र कुमार और वरिष्ठ सहायक श्यामकृष्ण सक्सेना- अपने ही सरकारी कार्यालय की कुर्सियों पर बैठकर और टेबल में रखकर खुलेआम बीयर पीते हुए वीडियो और फोटो में नजर आए। सरकारी दफ्तर जैसी पवित्र जगह को ‘बीयर बार’ की तरह इस्तेमाल करना केवल आचार संहिता का उल्लंघन नहीं, बल्कि सरकारी सेवा की गरिमा को ध्वस्त करने वाला गंभीर अपराध है। यह घटना बताती है कि संस्थान में लंबे समय से अनुशासन और जवाबदेही को नजरअंदाज किया जाता रहा है।

मामला पहुंचा सीएम कार्यालय तक- प्रमुख सचिव ने माना “गंभीर कदाचार”, तत्काल कार्रवाई के आदेश, अनुभाग अधिकारी स्तर में रुकी कार्रवाई

मामले की शिकायत जैसे ही मुख्यमंत्री कार्यालय पहुँची, इसे सामान्य अनुशासनहीनता नहीं माना गया। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री संजय प्रसाद ने इसे गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखते हुए त्वरित आदेश दिए कि दोषियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए। उन्होंने जांच रिपोर्ट भी प्राथमिकता के आधार पर मांगी। शासन के इस कदम से स्पष्ट था कि सरकार ऐसे मामलों पर किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं थी।

लेकिन कार्रवाई ठप- अभियोग फाइल रोककर बैठे रहे भाषा अनुभाग 4 के अनुभाग अधिकारी, बड़ी अनियमितता का खुलासा

सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भाषा अनुभाग-4 के अनुभाग अधिकारी जितेंद्र नाथ ने कार्रवाई की फाइल आगे बढ़ाने से रोक दी। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों को नजरअंदाज करते हुए उन्होंने न केवल पूरे प्रक्रिया को ठप कर दिया बल्कि ऐसा व्यवहार किया जैसे कोई गंभीर घटना हुई ही नहीं। यह लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम के भीतर अपराधियों को बचाने की कोशिश जैसा गंभीर कृत्य प्रतीत होता है। सरकारी आदेशों की अनदेखी करना खुद में दंडनीय अपराध है और यह विभागीय कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। लेकिन नाम ना लिखने की शर्त पर इस कार्यालय के जिम्मेदार ने बताया की क्योंकि उसे लापरवाही करने वाले व्यक्ति का प्रमोशन होने वाला है और वह स्वयं भाषा अनुभव कर के अनुभाग अधिकारी जितेंद्र नाथ जी के संपर्क में है इसीलिए प्रमोशन के पहले तो किसी भी प्रकार की कार्रवाई भूल ही जाइए भले ही वह आदेश किसी भी बड़े जिम्मेदार का क्यों ना हो।

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा हस्तक्षेप के बाद भी कार्रवाई नहीं- मामला और भी गहरा हुआ

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरोजनी नगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने भी प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। जब एक जनप्रतिनिधि खुद इस घटना को संवेदनशील मानकर हस्तक्षेप करता है, तब विभाग का सक्रिय होना अपेक्षित था।

गौरतलब है कि पत्र प्राप्ति के बाद बीती 14 नवंबर को प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री संजय प्रसाद द्वारा इसी मामले के संबंध में सरोजिनी नगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह के पत्र का जिक्र करते हुए प्रमुख सचिव, भाषा विभाग/निदेशक, हिन्दी संस्थान को कार्यालय में कतिपयकर्मियों द्वारा मद्यपान/अमर्यादित कृत्य करने के संबंध में यह निर्देश जारी किया गया है कि प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई कर अवगत कराने की अपेक्षा की गई थी परंतु पत्र जारी होने (14 नवंबर को पत्र जारी हुआ) के चार दिन बाद भी कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है जो कि कहीं ना कहीं बडी लापरवाही है। अब इतने संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई न होना कहीं न कहीं यह दर्शाता है कि या तो विभाग मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेना चाहता, या किसी स्तर पर दबाव के चलते मामला जानबूझकर रोका गया है, जिसका जिक्र ऊपर किया जा चुका है।

यह केवल शराब पीने की घटना नहीं- बल्कि अब दोषियों को बचाने का सुनियोजित प्रयास

कार्यालय में बैठकर शराब पीना जितना गंभीर अपराध है, उससे भी अधिक गंभीर है शासन द्वारा दिए गए आदेशों को ठंडे बस्ते में डालना। फाइल रोकना, जांच को कमजोर करना, और अपराध की गंभीरता कम करके दिखाना- ये सभी संकेत दर्शाते हैं कि कहीं न कहीं कुछ लोग पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में केवल शराब सेवन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि कार्रवाई रोकने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल- कार्रवाई आखिर किसके संरक्षण में अटकी?

इस मामले ने कई और भी चिंताजनक सवाल खड़े कर दिए हैं-

  • क्या अनुभाग अधिकारी किसी उच्च अधिकारी के संरक्षण में थे?
  • क्या जानबूझकर कार्रवाई को रोका गया?
  • क्या यह भ्रष्टाचार का मामला है?
  • किसके प्रभाव में आदेशों की अवहेलना हुई?
  • क्यों शिकायत और शासन आदेशों के बाद भी विभाग निष्क्रिय बना रहा?

इन सवालों का उत्तर निकलना शासन व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रतिष्ठा दोनों के लिए आवश्यक है।

डॉ. राजेश्वर सिंह की अगुवाई में सरोजनीनगर में उमड़ी एकता की अभूतपूर्व लहर: सरदार @150 एकता यात्रा’ सरोजनीनगर में गूंजे एक भारत, श्रेष्ठ भारत के नारे

  • 562 रियासतों को एक सूत्र में पिरोने का पटेल दृष्टिकोण – आज की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक: डॉ. राजेश्वर सिंह
  • साइबर, सामाजिक और सीमाई युद्ध, युवाओं को तीनों मोर्चों पर होना होगा तैयार: डॉ. राजेश्वर सिंह
  • युवा लाइबिलिटी नहीं, भारत की सबसे बड़ी एसेट हैं -अपनी स्किल, अपनी शक्ति पहचानें”: डॉ. राजेश्वर सिंह
  • एकता के विरुद्ध किसी भी ताकत को बर्दाश्त नहीं करेगी युवा पीढ़ी: डॉ. राजेश्वर सिंह का स्पष्ट संदेश
  • विकसित भारत @2047 सिर्फ सपना नहीं, यह युवाओं का राष्ट्रीय दायित्व है”: डॉ. राजेश्वर सिंह
  • नेहरु से अधिक योग्य थे सरदार पटेल, लन्दन में पढ़ाई के दौरान रहे थे गोल्ड मेडलिस्ट- संजय राय

लखनऊ: भारत की अखंडता के शिल्पी, भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को सरोजनीनगर में भव्य ‘सरदार @150 एकता यात्रा’ का आयोजन किया गया। यह ऐतिहासिक यात्रा स्कूटर इंडिया चौराहे से प्रारंभ होकर सैनिक इंटर कॉलेज ग्राउंड तक आयोजित हुई, जिसमें सैकड़ों नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। करीब ढाई किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में आम नागरिकों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और भाजपा कार्यकर्ताओं की व्यापक सहभागिता देखने को मिली। तिरंगा-झंडों, देशभक्ति गीतों और सरदार पटेल के संदेशों से वातावरण को राष्ट्रभाव की ऊर्जा से भर उठा। “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” और “सरदार पटेल अमर रहें” के नारों ने पूरे मार्ग को गूंजायमान कर दिया।

विधयाक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा आयोजित पदयात्रा के इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय राय, लखनऊ भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्या, भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी की उपस्थिति रही, जिन्होंने सरदार पटेल के आदर्शों और राष्ट्र को उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। पदयात्रा की समाप्ति पर बड़ी संख्या में मौजूद जन समूह को सम्बोधत करते हुए विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरदार पटेल को आधुनिक भारत का वास्तुकार बताते हुए कहा, जब देश आज़ाद हुआ तब 562 रियासतें थीं, हर एक का अपना संविधान और अपना झंडा था। सरदार पटेल के दृढ़ निश्चय और नीति-कौशल ने ही अखंड भारत की नींव रखी।

सरोजनीनगर विधायक ने हैदराबाद रियासत के विलय का उदाहरण देते हुए कहा, जब हैदराबाद रियासत भारत में शामिल होने को तैयार नहीं थी और रज़ाकारों का आतंक चरम पर था, तब सरदार पटेल लौह पुरुष के रूप में डटकर खड़े हुए। उनके नेतृत्व में 30,000 जवानों ने बिना एक भी गोली चलाए हैदराबाद का भारत में विलय कराया। सरदार पटेल ने भारतीय सिविल सर्विसेज की नीव भी रखी जिसे देश के ‘स्टील फ्रेम’ कहा जाता है। सरकारें बदलती रहेंगी, लेकिन देश का संचालन मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था से ही संभव है, यह उनकी दूरदर्शी सोच थी।

डॉ. सिंह ने भारत के सामने बाहरी और आंतरिक खतरों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा:

युवाओं ने भारत–पाक युद्ध, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और दोकलाम विवाद देखा है। भारत पर हमले इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि हमारे पूर्वजों ने देश को पुनः ‘सोने की चिड़िया’ बनाने की दिशा में अग्रसर किया है। मोदी जी ने जब पदभार संभाला, भारत 11वीं अर्थव्यवस्था था, आज हम चौथी अर्थव्यवस्था हैं। 2027 तक तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर हैं। विकसित भारत @2047 को पूरा करना युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है।

डॉ. सिंह ने जातिवाद, सामाजिक विभाजन और आतंकवाद पर चिंता जताते हुए कहा:

हम इतिहास की गलतियों से सीखें। मात्र 2 लाख अंग्रेज़ों ने हमें 200 वर्षों तक इसलिए शासित किया क्योंकि हम जाति, भाषा और प्रांतों में बंटे रहे। आज फिर कुछ शक्तियाँ समाज को बाँटने की कोशिश कर रही हैं, जातिवाद जहर है, इसे जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। उन्होंने साइबर युद्ध, सोशल मीडिया युद्ध और सीमा पर चल रही चुनौतियों का भी उल्लेख किया देश में प्रतिदिन 3,000 साइबर अटैक होते हैं। युवाओं को साइबर योद्धा, सामाजिक योद्धा और सीमाओं के रक्षक, तीनों बनना होगा। देश आपका है, समाज आपका है, भारत आपके कंधों पर आगे बढ़ेगा।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद महिलओं की प्रशंसा करते हुए डॉ. सिंह ने कहा, “मातृशक्ति के कारण ही भारत नई ऊँचाइयों को छू रहा है। यह उनकी क्षमता, समर्पण और नेतृत्व का ही परिणाम है कि आज देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल जी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी जैसी प्रेरक महिलाएँ राष्ट्र का नेतृत्व कर रही हैं। बच्चों और युवाओं को मातृशक्ति के त्याग और राष्ट्रभाव से प्रेरणा लेनी चाहिए।”

मुख्य अतिथि संजय राय का संबोधन:

मुख्य अतिथि ने विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा यात्रा के दौरान सरदार पटेल के चित्र को आगे रखने पर विशेष ध्यान दिया और कहा कि, अब से जो भी यात्राएं होंगी उनमें इस बात का ध्यान रखा जाएगा। संजय राय ने बताया की सरदार पटेल ने पढ़ाई के दौरान नौकरी भी की ताकि वे आलगे की पढ़ाई लन्दन से कर सकें, लेकिन उन्होंने बड़े भाई के आग्रह पर लन्दन जाने का विचार त्याग दिया और अपने वीजा पर बड़े भाई को लन्दन जाने दिया। सरदार पटेल लन्दन से पढ़ाई के दौरान गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले छात्र थे, ये सम्मान न गांधी जी को मिला न नेहरु को।

इस दौरान भाजपा नेता राजेश चौहान, शंकरी सिंह, रमा शंकर त्रिपाठी, आशू शुक्ला, राजेन्द्र बाजपेई, उमेश तिवारी, भुवनेंद्र सिंह ‘मुन्ना’, पीके मिश्रा, परविंदर सिंह, केके श्रीवास्तव, शिव बक्श सिंह, विवेक राजपूत, मोहित तिवारी, शिव शंकर विश्वकर्मा, विनोद मौर्या, मुकेश शर्मा, सौरभ सिंह ‘मोनू’, कौशलेन्द्र द्विवेदी, लवकुश रावत, हिमांशु अम्बेडकर, कमलेश सिंह, के. एन. सिंह, सुभाष पासी, संजय गुप्ता, धीरू पाण्डेय, अमन सिंह चौहान, संजीव मिश्रा, सुभम अवस्थी, नेहा सिंह, नीता दीक्षित, मधु सिंह, मनोज रावत, रजनीश गुप्ता व अन्य मौजूद रहे।

Travel Tips:“सर्दियों में ट्रेकिंग का परफेक्ट ठिकाना—हर की दून वैली। यहाँ मिलेगा सुकून और बर्फबारी का जादू, घूमने का प्लान जरूर बनाएं.”

भारत में घूमने के लिए जगहों की कमी नहीं है। कुछ लोगों को पहाड़ों पर घूमने का क्रेज होता है और कुछ लोगों को सुकून भरे बीच पसंद होते हैं। कई लोगों को सर्दियों के मौसम में ट्रैकिंग करना बेहद पसंद होता है। लोग ठंड के मौसम में स्नोफॉल, बर्फीले पहाड़, बर्फ की सफेद चादर से ढके रास्ते, सर्द हवाएं और शांत वातावरण मन को सुकून पहुंचाते हैं। अगर आप लाइफ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो आप उत्तराखंड की हर की दून घाटी जरुर जाएं।

कहां पर स्थित है हर की दून वैली?

आपको बता दें कि, हर दून एक ‘क्रेडल-शेप्ड’ यानी पालने जैसी वैली है, जो कि गोंविंद बल्लभ पंत नेशनल पार्क के बीच बसी हुई है। ये जगह समुद्र तल से करीब 3566 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और उत्तरकाशी जिले के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में आती है। चारों ओर बर्फ से ढकी चोटियां और शांत वातावरण किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

इस जगह से जुड़ी है पौराणिक कथा

यह वही स्थान माना जाता है, जहां पांडवों में सबसे बड़े युधिष्ठिर ने स्वर्गारोहिणी पर्वत से स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया था। इसी कारण इस घाटी को स्वर्ग का रास्ता भी कहा जाता है। रास्ते में पड़ने वाले ओसला, गंगाड़ और धातमीर जैसे गांवों को लगभग 3000 साल पुराना बताया जाता है। यहां के लोग आज भी अपनी पारंपरिक जीवनशैली में रचे-बसे हैं और आधुनिक तकनीक से काफी हद तक दूर रहते हैं।

हर दून की खासियत क्या है?

हर दून वैली में नेचर के हर रंग देखने को मिलते हैं। विंटर में यह जगह बर्फ से ढक जाती है। अगर आप भी बर्फीले ट्रैक का मजा लेना चाहते हैं, तो सर्दी का समय सबसे बेहतर है। यह जगह गोविंद पशु विहार वन्यजीव अभयारण्य के अंदर आती है। यहां पर ट्रैकिंगके दौरान पक्षी और जंगली जानवरों की झलक देखने को मिल जाएगी। यहां ट्रैक आसान बेहद ही आसान माना जाता है। जो भी नए ट्रैकर्स यहां पर जरुर जाएं। घने जंगल, थामसा नदी के किनारे और लकड़ी के पुराने पुलों से गुजरता हुआ ये ट्रैक आपको किसी फिल्म के सेट जैसा एहसास कराता है। 

कब जा सकते हैं हर की दून वैली?

यदि आप हर की दून वैली में ट्रैकिंग करना चाहती हैं, तो आप दिसंबर से मार्च तक समय बेस्ट होता है। इस दौरान बर्फ से ढके पहाड़ बहुत ही सुंदर लगते हैं। यहां नजर स्वर्ग से कम नहीं है। अगर आप  यहां जाने का प्लान बनाएंगे, तो इसके लिए आपको 6-7 दिन का समय लग सकता है। यहां ट्रैकिंग के अलावा, कैपिंग और फोटोग्राफी कर सकते हैं। 

कैसे पहुंचे 

– हवाइ मार्ग- अगर आप हर दून वैली जाना चाहते हैं, तो देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट सबसे पास है।

– रेल मार्ग- देहरादून रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग होकर पुरोला या तलुका गांव तक पहुंच सकती हैं, जो ट्रैक की शुरुआत का प्वाइंट है।

– सड़क मार्ग- उत्तराखंड के बड़े शहरों से बस या टैक्सी के जरिए पुरोला तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

हर की दून ट्रैवल टिप्स

– हर की दून ट्रेक भले ही आसान लग रहा हो में, लेकिन इसकी लंबी दूरी इसे थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना देती है। इसलिए ट्रेक पर जाने से पहले शरीर का फिट होना और हल्का-फुल्का वार्मअप करना जरूरी है। 

– अगर आपको अपना बैग उठाने में दिक्कत होती है, तो ट्रेकिंग सीजन में आसानी से उपलब्ध खच्चरों की मदद ले सकती हैं।

– इसके साथ ही, रास्ते में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए एक अनुभवी गाइड साथ रखना सबसे बेहतर रहता है, क्योंकि गाइड न सिर्फ रास्ता अच्छी तरह जानता है बल्कि आपको भटकने से भी बचाता है।