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लखनऊ के दो दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को 5 लाख सहायता व नौकरी देने की मांग, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने लिखा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने राजधानी के दो दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग उठाई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद तथा एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का अनुरोध किया है।

लोकतंत्र के प्रहरियों की सुरक्षा का मुद्दा

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी होते हैं। वे सच के लिए जीते हैं और समाज के हित में संघर्ष करते हैं। ऐसे में जब किसी पत्रकार का असमय निधन हो जाता है, तो उसके परिवार को असुरक्षित नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की आवाज सुरक्षित रहेगी, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा।

किन पत्रकारों के लिए उठाई मांग

विधायक ने जिन दो पत्रकारों के परिजनों के लिए सहायता की मांग की है, उनमें वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय विधि सिंह और मोहम्मद इरफान शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, विधि सिंह का निधन 21 फरवरी को हृदयाघात से हुआ था। वे अपने पीछे पत्नी रोहिणी और एक पुत्री को छोड़ गए हैं।

वहीं, मोहम्मद इरफान का 23 फरवरी को ब्रेन हैमरेज के कारण निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी नूरी बेगम और दो नाबालिग पुत्र हैं। दोनों परिवारों पर अचानक आए इस दुख ने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।

पत्रकारों के लिए पेंशन व सामाजिक सुरक्षा की वकालत

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि वे पत्रकारों के लिए पेंशन व्यवस्था और बेहतर सामाजिक सुरक्षा बीमा कवर सुनिश्चित कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका मानना है कि पत्रकारों को भी संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिएl

गाजियाबाद में एक्स-मुस्लिम सलीम वास्तिक पर जानलेवा हमला, हिंदू संगठनों में आक्रोश

लखनऊ/गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के में शुक्रवार को एक्स-मुस्लिम कार्यकर्ता सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले के बाद प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। घटना के विरोध में विभिन्न हिंदू संगठनों ने कड़ी निंदा करते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

दफ्तर में घुसकर किया हमला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को कुछ हमलावरों ने सलीम वास्तिक के कार्यालय में घुसकर उन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने गर्दन और पेट पर कई वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

हिंदू संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया

के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह हमला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की और कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।

कुछ संगठनों ने आरोपियों के एनकाउंटर की भी मांग की है, जबकि अन्य ने निष्पक्ष और त्वरित जांच की आवश्यकता पर बल दिया है।

सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर विवाद

जानकारी के अनुसार, सलीम वास्तिक पूर्व में मुस्लिम धर्म से जुड़े रहे हैं, लेकिन बाद में उन्होंने धर्म परिवर्तन कर अपने विचार सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने शुरू किए। वे “Salim Vastik 0007” नाम से एक यूट्यूब चैनल संचालित करते थे, जहां वे इस्लाम से जुड़ी प्रथाओं और विचारधाराओं पर आलोचनात्मक वीडियो साझा करते थे।

प्रारंभिक चर्चा में यह सामने आया है कि उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर कुछ कट्टरपंथी तत्वों में नाराजगी थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से हमले के पीछे किसी विशेष कारण की पुष्टि नहीं की है।

सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर सवाल

इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश के विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और जल्द ही विस्तृत जानकारी साझा करने की बात कही है।

लखनऊ के सरोजनीनगर में विकास, विश्वास और विजन की नई परिभाषा: भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह बने जनसेवा के पर्याय

  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनी नगर विधानसभा में जनसेवा को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़ी अनेक योजनाएं संचालित की हुई हैं।
  • ‘आपका विधायक-आपके द्वार’ कार्यक्रम के माध्यम से वे सीधे गांव-गांव पहुंचकर जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं।
  • वृद्धजनों को श्रीराम मंदिर अयोध्या दर्शन और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में सहयोग जैसे मानवीय प्रयासों से उन्होंने जनमानस का विश्वास मजबूत किया है।
  • विधानसभा क्षेत्र में संजय दत्त की उपस्थिति और यो यो हनी सिंह के लाइव कंसर्ट जैसे आयोजनों से युवाओं को सकारात्मक मंच प्रदान किया गया।
  • पूर्व प्रवर्तन निदेशालय संयुक्त निदेशक और उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी रहे डॉ. सिंह की ईमानदार, कर्मठ और बौद्धिक नेता की छवि लगातार सशक्त हो रही है।

लखनऊ, 28 फरवरी 2026 : उत्तर प्रदेश की राजनीति में सरोजिनी नगर विधानसभा क्षेत्र आज एक ऐसे जनप्रतिनिधि के कारण विशेष पहचान बना चुका है, जिन्होंने प्रशासनिक अनुभव, बौद्धिक क्षमता और ईमानदार छवि को जनसेवा के साथ जोड़ा है। भारतीय जनता पार्टी से विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने यह साबित किया है कि राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का सशक्त उपकरण भी हो सकती है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) में संयुक्त निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सख्त और निष्पक्ष छवि स्थापित करने वाले डॉ. सिंह ने सेवा अवधि के 12 वर्ष शेष रहते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और सक्रिय राजनीति के माध्यम से सीधे जनता की सेवा का मार्ग चुना। इससे पहले वे उत्तर प्रदेश पुलिस में भी अपनी कर्तव्यनिष्ठ भूमिका निभा चुके हैं।

आज सरोजिनी नगर में उनकी लोकप्रियता का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसकी वजह केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उनका जमीनी क्रियान्वयन और जनता से सीधा संवाद है।

“आपका विधायक – आपके द्वार”: लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर सशक्त करने की पहल

डॉ. राजेश्वर सिंह की सबसे प्रभावशाली पहल ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ कार्यक्रम है। इस पहल के माध्यम से वे गांव-गांव जाकर स्वयं जनसुनवाई करते हैं। यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि समाधान केंद्रित व्यवस्था है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली, पेयजल, पेंशन, आवास, बिजली और राजस्व से जुड़े मामलों को मौके पर सुनकर संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं।

हाल ही में एक गांव में आयोजित शिविर में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। वृद्धजन, महिलाएं, युवा और किसान अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कई मामलों में तत्काल समाधान हुआ, जबकि शेष मामलों की समयबद्ध निगरानी की व्यवस्था की गई। इस कार्यक्रम ने आमजन के मन में यह विश्वास पैदा किया है कि उनका विधायक केवल चुनावी समय में नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।

शिक्षा के क्षेत्र में दूरदर्शी सोच और ठोस पहल

डॉ. राजेश्वर सिंह का मानना है कि किसी भी क्षेत्र का वास्तविक विकास शिक्षा से शुरू होता है। उन्होंने मेधावी छात्रों के सम्मान, छात्रवृत्ति सहयोग और जरूरतमंद विद्यार्थियों की फीस सहायता जैसी पहलें शुरू की हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मार्गदर्शन सत्र और करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया गया है। कई विद्यालयों में पुस्तक वितरण और शैक्षणिक सामग्री सहायता कार्यक्रम भी संचालित किए गए। उनका प्रयास है कि सरोजिनी नगर का कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।

वृद्धजनों के सम्मान का अनूठा उदाहरण: अयोध्या श्रीराम मंदिर दर्शन

डॉ. राजेश्वर सिंह ने विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों को अयोध्या स्थित के दर्शन कराने की पहल की। यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सम्मान और संवेदना का प्रतीक है। कई बुजुर्ग जो आर्थिक या शारीरिक कारणों से यात्रा नहीं कर पाते थे, उन्हें निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की गई। इस पहल ने क्षेत्र में भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत किया है और वृद्धजनों के प्रति सम्मान की नई मिसाल पेश की है।

युवा शक्ति को सकारात्मक मंच: सांस्कृतिक और प्रेरणादायक आयोजन

सरोजिनी नगर में युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए डॉ. सिंह ने सांस्कृतिक और प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन कराया। हाल ही में प्रख्यात अभिनेता की उपस्थिति ने क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। इससे पूर्व युवाओं की पसंद का लाइव कंसर्ट आयोजित किया गया, जिसमें हजारों युवाओं ने भाग लिया।

इन आयोजनों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि यह संदेश देना था कि सरोजिनी नगर युवा ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और सकारात्मक वातावरण का केंद्र बन रहा है।

पर्यावरण संरक्षण और ‘नेट ज़ीरो’ की दिशा में कदम

डॉ. राजेश्वर सिंह पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सक्रिय हैं। वृक्षारोपण अभियान, प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र की पहल और ‘नेट ज़ीरो’ विजन के तहत जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। उनका मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

हर वर्ग के लिए समावेशी दृष्टिकोण

किसान, व्यापारी, महिलाएं, युवा और वरिष्ठ नागरिक — हर वर्ग के लिए अलग-अलग योजनाओं और संवाद मंचों की व्यवस्था की गई है। महिला समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने, किसानों की समस्याओं के समाधान और व्यापारियों की सुविधा के लिए निरंतर संवाद जारी है।

प्रशासनिक अनुभव और बौद्धिक नेतृत्व

प्रवर्तन निदेशालय में संयुक्त निदेशक के रूप में कार्य करते हुए डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर जटिल मामलों को संभाला। इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा के दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया। यह अनुभव उन्हें प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही की समझ प्रदान करता है।

राजनीति में आने से पहले की उनकी सशक्त पृष्ठभूमि उन्हें एक बौद्धिक और नीति-निर्माण की समझ रखने वाले नेता के रूप में स्थापित करती है। वे योजनाओं की घोषणा के साथ-साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर देते हैं।

जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता और विश्वास

सरोजिनी नगर में आज डॉ. राजेश्वर सिंह की पहचान एक ऐसे विधायक के रूप में है जो उपलब्ध है, संवेदनशील है और परिणाम देने में विश्वास रखता है। नियमित क्षेत्र भ्रमण, जनसुनवाई, सोशल मीडिया संवाद और व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से वे जनता से जुड़े रहते हैं।

उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही स्पष्ट दिखाई देती है। यही कारण है कि क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है और लोग उन्हें एक ईमानदार, कर्मठ और दूरदर्शी नेता के रूप में देखते हैं।

विकास, विश्वास और विजन का संगम

सरोजिनी नगर में डॉ. राजेश्वर सिंह की कार्यशैली यह दर्शाती है कि यदि जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अनुभव, बौद्धिक क्षमता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करे तो क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन संभव है।

जनसंपर्क, शिक्षा, युवाओं का सशक्तिकरण, वृद्धजनों का सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक जागरूकता — इन सभी पहलुओं को समाहित करते हुए उन्होंने एक समावेशी विकास मॉडल प्रस्तुत किया है।

सरोजिनी नगर की जनता के बीच उनकी छवि एक ऐसे जननेता की है जो न केवल विकास के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि हर व्यक्ति को साथ लेकर आगे बढ़ने में विश्वास रखता है। यही कारण है कि उनका नाम आज क्षेत्र में विश्वास और जनसेवा का पर्याय बन चुका है।

इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला : तेहरान में कई धमाके

तेहरान/तेल अवीव। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इज़रायल ने ईरान के खिलाफ बड़ा जवाबी हमला शुरू कर दिया है। ईरान की राजधानी तेहरान में एक के बाद एक कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेहरान के कई हिस्सों में जोरदार विस्फोट हुए और आसमान में धुएं का गुबार उठता देखा गया। हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और संवेदनशील इलाकों को घेर लिया गया है।

उधर इज़रायल ने भी अपने यहां आपात स्थिति घोषित कर दी है। देशभर में सायरन बजाए जा रहे हैं और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तथा घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है। इज़रायली रक्षा बल (IDF) ने आधिकारिक बयान जारी कर लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

सूत्रों के मुताबिक इज़रायल ने तेहरान में मिसाइल और रॉकेट के जरिए हमला किया है। हालांकि नुकसान और हताहतों की संख्या को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इज़रायल के रक्षा मंत्री ने हमले की जानकारी देते हुए कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर की गई है।

दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द काबू में नहीं आए तो क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।

बड़ी खबर: लखनऊ के गुडंबा में विद्युत मरम्मत के दौरान करंट से  संविदा कर्मी की मौत, विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल

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लखनऊ। राजधानी के गुडंबा क्षेत्र में विद्युत विभाग की कथित लापरवाही एक संविदा कर्मी की जान पर भारी पड़ गई। देर रात विद्युत पोल पर मरम्मत कार्य के दौरान करंट लगने से 45 वर्षीय कर्मी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है, वहीं विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

रात 1:30 बजे हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27/28 फरवरी 2026 की रात लगभग 1:30 बजे जगरानी अस्पताल मुख्य मार्ग पर विद्युत पोल पर मरम्मत कार्य चल रहा था। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से 45 वर्षीय परशुराम की मौके पर ही मृत्यु हो गई। मृतक कल्याणपुर-गुडंबा क्षेत्र में विद्युत विभाग में संविदा कर्मी के रूप में कार्यरत थे और लंबे समय से लाइन मरम्मत व रखरखाव का कार्य कर रहे थे।

सूचना पर पहुंची पुलिस, पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव

घटना की जानकारी सुबह लगभग 5 बजे मृतक के भाई मोहन द्वारा थाना सैरपुर में लिखित रूप से दी गई। सूचना मिलते ही गुडंबा पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार, मामले में विधिक कार्यवाही प्रचलित है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल क्षेत्र में शांति व्यवस्था सामान्य बताई गई है।

सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या मरम्मत कार्य से पूर्व संबंधित विद्युत लाइन को पूरी तरह से बंद कराया गया था? क्या मृतक को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण—जैसे इंसुलेटेड दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य सुरक्षा संसाधन—उपलब्ध कराए गए थे?

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि संविदा कर्मियों से अक्सर रात के समय जोखिम भरे कार्य कराए जाते हैं, जबकि सुरक्षा संसाधनों और निगरानी में कमी की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। यदि जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है तो यह विभागीय जवाबदेही का गंभीर मामला होगा।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक परशुराम चार भाइयों में एक थे। उनके परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा है। घर के कमाऊ सदस्य की अचानक मृत्यु से परिवार आर्थिक संकट में आ गया है। परिजनों ने विभाग से उचित मुआवजे, आश्रित को नौकरी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

परिवार का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही पालन किया जाता, तो यह हादसा टाला जा सकता था।

जिम्मेदारी कौन लेगा?

यह हादसा एक बार फिर संविदा कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। क्या संविदा कर्मियों की जान की कीमत इतनी सस्ती है? क्या बिजली विभाग इस मौत की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी स्वीकार करेगा?

अब देखना यह होगा कि प्रशासन पीड़ित परिवार को कितनी शीघ्र राहत देता है और विभागीय स्तर पर जांच के बाद क्या ठोस कार्रवाई की जाती है। राजधानी में हुई यह घटना न केवल एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि कार्यस्थल सुरक्षा के मुद्दे पर एक बड़ा चेतावनी संकेत भी है।