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‘द केरला स्टोरी 2’ की रफ्तार थमी, 32वें दिन महज 3 लाख की कमाई; ‘मर्दानी 3’ से थोड़ा ही पीछे

The Kerala Story 2 की बॉक्स ऑफिस रफ्तार अब धीमी पड़ती नजर आ रही है। फिल्म को शुरुआती हफ्तों में अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन Dhurandhar 2 की रिलीज के बाद इसकी कमाई पर साफ असर पड़ा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के 32वें दिन करीब 3 लाख रुपये का कलेक्शन किया। अब इसकी डेली कमाई 10 लाख से भी नीचे आ चुकी है, जिससे साफ है कि दर्शकों की संख्या कम हो रही है। हालांकि कुल कलेक्शन के मामले में फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

अब तक फिल्म लगभग 51.86 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन और करीब 60 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन कर चुकी है। करीब 28 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने लागत के मुकाबले अच्छा मुनाफा कमा लिया है और इसे फायदे वाली फिल्म माना जा रहा है।

वीक वाइज प्रदर्शन की बात करें तो फिल्म ने पहले हफ्ते में 22.9 करोड़, दूसरे हफ्ते में 16.97 करोड़ और तीसरे हफ्ते में 10.92 करोड़ की कमाई की। चौथे हफ्ते में कलेक्शन तेजी से गिरा और कुल मिलाकर 1 करोड़ से भी कम का बिजनेस हुआ। पिछले कुछ दिनों में इसकी रोजाना कमाई कुछ लाख रुपये तक सिमट गई है।

अब मुकाबला Mardaani 3 से है, जिसने करीब 52.99 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। दोनों फिल्मों के बीच अब सिर्फ लगभग 1.13 करोड़ रुपये का अंतर बचा है। हालांकि मौजूदा गिरती कमाई को देखते हुए ‘द केरला स्टोरी 2’ के लिए इस आंकड़े को पार करना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।

फिल्म में Urvashi Gupta, Aditi Bhatia और Aishwarya Ojha मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म अपने विषय को लेकर चर्चा और विवाद दोनों में रही, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर बजट के हिसाब से इसे सफल माना जा रहा है।

जलभराव से मुक्ति दिलाने में डॉ. राजेश्वर सिंह का संघर्ष रंग लाया : ₹176.65 करोड़ की ड्रेन परियोजना स्वीकृत

लखनऊ। सरोजनी नगर क्षेत्र में वर्षों से बनी जलभराव की गंभीर समस्या के समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। ₹1 अरब 76 करोड़ 65 लाख की लागत से किला मोहम्मदी ड्रेन रीमॉडलिंग परियोजना को स्वीकृति मिल गई है। इस बड़ी उपलब्धि के पीछे सरोजनी नगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का निरंतर संघर्ष, प्रयास और मजबूत संकल्प प्रमुख रूप से सामने आता है।

संकल्प से स्वीकृति तक का संघर्ष

डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनी नगर को जलभराव से मुक्त कराने का जो संकल्प लिया था, उसे पूरा करने के लिए उन्होंने केवल घोषणाएं नहीं कीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लगातार काम किया। क्षेत्र में जलभराव की समस्या को उन्होंने करीब से समझा और इसे प्राथमिकता में रखते हुए समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए।

उन्होंने सबसे पहले समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए विस्तृत अध्ययन कराया। जल निकासी व्यवस्था की खामियों को चिन्हित किया गया और विशेषज्ञों की टीम के साथ कई स्तरों पर चर्चा कर तकनीकी समाधान तैयार किया गया।

तकनीकी तैयारी और प्रशासनिक पैरवी

डॉ. सिंह ने इस परियोजना को केवल एक प्रस्ताव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे मंजूरी दिलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार पैरवी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उन्होंने सरोजिनी नगर की स्थिति को विस्तार से रखा और इस परियोजना की आवश्यकता को मजबूती से प्रस्तुत किया।

इसके बाद भी उन्होंने लगातार फॉलो-अप जारी रखा। विभागीय अधिकारियों से संवाद, फाइलों की प्रगति की निगरानी और हर स्तर पर समन्वय बनाकर उन्होंने इस परियोजना को मंजूरी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

2022 से लगातार प्रयास

23 अगस्त 2022 को सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में आयोजित जल प्रबंधन विचार गोष्ठी के दौरान इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा तय की गई थी। उसी समय से डॉ. राजेश्वर सिंह ने इसे अपनी प्राथमिकता बनाते हुए लगातार प्रयास जारी रखे। बीते वर्षों में उन्होंने इस परियोजना को धरातल पर लाने के लिए हर संभव कोशिश की।

जनसमस्या को जनआंदोलन बनाया

डॉ. सिंह ने जलभराव की समस्या को केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जनहित का बड़ा विषय बनाते हुए शासन स्तर तक प्रभावी ढंग से उठाया। क्षेत्रवासियों की पीड़ा को उन्होंने अपनी जिम्मेदारी मानते हुए हर मंच पर मजबूती से रखा।

अब मिलेगा स्थायी समाधान

अर्बन फ्लड कंट्रोल एवं स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज योजना के तहत किला मोहम्मदी ड्रेन की रीमॉडलिंग से सरोजिनी नगर क्षेत्र में जल निकासी की मजबूत और आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे आशियाना समेत आसपास के हजारों परिवारों को हर वर्ष होने वाली जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी।

जनता के विश्वास की जीत

यह परियोजना केवल एक विकास कार्य नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि के रूप में डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रतिबद्धता और संघर्ष का परिणाम है। उनके प्रयासों से अब सरोजिनी नगर के लोगों को एक स्थायी समाधान मिलने जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र के विकास की नई दिशा तय करेगा।

Travel Tips:मुंबई-पुणे के पास बसा Mini-Heaven: पंचगनी में बिताएं सुकून भरा वीकेंड

महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित पंचगनी एक खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। ‘पंचगनी’ का अर्थ है पाँच पहाड़ियों का समूह। सह्याद्रि पर्वतमाला की गोद में बसा यह स्थान अपनी हरियाली, ठंडी जलवायु और मनमोहक घाटियों के लिए जाना जाता है। मुंबई और पुणे के लोगों के लिए यह एक परफेक्ट वीकेंड डेस्टिनेशन है।

प्रमुख दर्शनीय स्थल:

1. टेबल लैंड
यह एशिया के सबसे बड़े ज्वालामुखीय पठारों में से एक है। यहां से चारों ओर फैली घाटियों का शानदार नजारा देखने को मिलता है। ट्रैकिंग और घुड़सवारी का आनंद भी लिया जा सकता है।

2. सिडनी पॉइंट
यहां से कृष्णा घाटी और धूम डैम का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह जगह बेहद आकर्षक हो जाती है।

3. पारसी पॉइंट
परिवार के साथ समय बिताने के लिए यह शांत और खूबसूरत स्थान आदर्श है। यहां से हरियाली से भरी घाटियां और बहती कृष्णा नदी का दृश्य देखने को मिलता है।

4. डेविल्स किचन
ये ऐतिहासिक गुफाएं पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। मान्यता है कि पांडव ने यहां कुछ समय बिताया था।

मौसम और घूमने का सही समय:
पंचगनी का मौसम सालभर सुहावना रहता है—

  • गर्मी (मार्च–जून): 20°C–35°C, घूमने के लिए अच्छा
  • मानसून (जुलाई–सितंबर): हरियाली और झरनों का शानदार नजारा
  • सर्दी (अक्टूबर–फरवरी): ठंडा और सबसे बेहतरीन समय

स्थानीय खासियत:
पंचगनी स्ट्रॉबेरी और रसभरी के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहां के ताजे फल, जैम और चॉकलेट पर्यटकों को खूब पसंद आते हैं।

कैसे पहुंचे?

  • सड़क मार्ग: मुंबई और पुणे से बस और टैक्सी आसानी से उपलब्ध
  • रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन वाथर
  • हवाई मार्ग: नजदीकी एयरपोर्ट पुणे में स्थित

अगर आप पहाड़ों की ठंडी हवा, हरियाली और शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो पंचगनी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यह जगह परिवार, दोस्तों और कपल्स के लिए परफेक्ट छुट्टी का ठिकाना है।

Health Update: 8 घंटे से ज्यादा बैठना बन सकता है खतरनाक, ये 8 आदतें तेजी से बढ़ा रहीं उम्र

आज के समय में हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने का ट्रेंड बढ़ा है, लेकिन कई ऐसी रोजमर्रा की आदतें हैं जो अनजाने में शरीर को अंदर से कमजोर कर रही हैं और एजिंग प्रोसेस को तेज कर देती हैं। उम्र बढ़ना सिर्फ बाहरी बदलाव नहीं, बल्कि सेल्स के स्तर पर भी होता है। आइए जानते हैं ऐसी 8 आदतों के बारे में जो समय से पहले बूढ़ा बना सकती हैं।

1. लंबे समय तक बैठे रहना
रोज 8 घंटे से ज्यादा बैठना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। रिसर्च के अनुसार, जो लोग ज्यादा देर तक बैठे रहते हैं और फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते, उनमें स्वास्थ्य जोखिम काफी बढ़ जाता है। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा होता है और शरीर जल्दी बूढ़ा होने लगता है।

2. नींद की कमी
कम नींद लेना शरीर के लिए बड़ा खतरा है। नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है, लेकिन पर्याप्त नींद न मिलने पर स्किन, इम्यून सिस्टम और याददाश्त पर बुरा असर पड़ता है।

3. लगातार तनाव में रहना
लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो त्वचा और दिल दोनों के लिए नुकसानदायक है। इससे झुर्रियां जल्दी आ सकती हैं और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।

4. ज्यादा स्क्रीन टाइम
मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल नींद के चक्र को बिगाड़ता है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट स्किन और आंखों पर असर डालती है, जिससे एजिंग तेज हो सकती है।

5. कम पानी पीना
डिहाइड्रेशन से त्वचा बेजान दिखने लगती है और शरीर के जरूरी फंक्शन धीमे हो जाते हैं। पर्याप्त पानी पीना शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।

6. ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड
अधिक शुगर का सेवन शरीर में ग्लाइकेशन प्रक्रिया को बढ़ाता है, जिससे त्वचा की लोच कम हो जाती है और झुर्रियां जल्दी आने लगती हैं।

7. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को नजरअंदाज करना
उम्र बढ़ने के साथ मसल्स कम होते हैं। अगर नियमित एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न की जाए तो शरीर जल्दी कमजोर और सुस्त हो सकता है।

8. सोशल कनेक्शन की कमी
अकेलापन और सामाजिक दूरी भी सेहत पर असर डालते हैं। रिसर्च के अनुसार, सामाजिक संबंधों की कमी से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।

Disclaimer:
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई आदत या रूटीन को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Travel Tips: शिमला के पास बसे 5 ‘जन्नत’ जैसे हिल स्टेशन, जहां मिलेगा सुकून और कम भीड़

गर्मियों में ठंडी और शांत जगहों की तलाश में अगर आप शिमला जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इसके आसपास कई खूबसूरत हिल स्टेशन मौजूद हैं। यहां आप कम भीड़ के बीच प्रकृति का भरपूर आनंद ले सकते हैं और अपनी ट्रिप को यादगार बना सकते हैं।

1. कुफरी
शिमला से लगभग 15 किमी दूर स्थित कुफरी एडवेंचर प्रेमियों के लिए शानदार जगह है। यहां ट्रेकिंग, नेचर वॉक और घुड़सवारी का मजा लिया जा सकता है। महासू पीक से बर्फ से ढके पहाड़ों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है।

2. नारकंडा
भीड़भाड़ से दूर सुकून की तलाश करने वालों के लिए नारकंडा बेहतरीन विकल्प है। यहां के सेब के बाग और घने जंगल इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं। हाटू पीक से हिमालय का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है।

3. चैल
चैल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। चैल पैलेस यहां का मुख्य आकर्षण है। साथ ही यहां दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट ग्राउंड भी स्थित है।

4. मशोबरा
नेचर और शांति के करीब समय बिताने के लिए मशोबरा एक आदर्श जगह है। यहां के शांत रास्ते, घने जंगल और ताजी हवा आपको पूरी तरह रिलैक्स कर देते हैं।

5. तत्तापानी
तत्तापानी अपने गर्म पानी के कुंड के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि यहां स्नान करने से स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। इसके अलावा यहां रिवर राफ्टिंग का रोमांच भी लिया जा सकता है।

अगर आप इस गर्मी में भीड़ से दूर सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो शिमला के आसपास की ये जगहें आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकती हैं।