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एक्सप्लेनर: इमरान खान ने सेना से क्यों बदला रुख? समझिए आसिम मुनीर के बढ़ते प्रभाव की पूरी कहानी

पाकिस्तान की राजनीति में इमरान खान और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव एक बार फिर चर्चा में है। जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान के करीबी सहयोगी जुल्फिकार बुखारी ने संकेत दिया है कि अगर इमरान जेल से बाहर आते हैं तो वह सेना के साथ सीधा टकराव बढ़ाने के बजाय देश के हित को प्राथमिकता दे सकते हैं।

बुखारी के बयान को पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके मुताबिक, इमरान खान रिहाई के बाद ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे देश की स्थिति और खराब हो। उन्होंने सैन्य नेतृत्व के साथ टकराव से बचने और राजनीतिक तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया।

क्या इमरान खान ने सेना के सामने रुख नरम किया है?

इसे सीधे तौर पर इमरान खान का ‘सरेंडर’ कहना जल्दबाजी होगी। PTI की ओर से सामने आया संकेत ज्यादा राजनीतिक समझौते और तनाव कम करने की कोशिश की ओर इशारा करता है।

2022 में सत्ता से हटने के बाद से इमरान खान और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के संबंध बेहद खराब रहे हैं। 2023 के बाद उनके खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज हुए और उनकी पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई हुई।

ऐसे माहौल में अगर PTI अब सेना के साथ सीधी भिड़ंत से बचने की बात कर रही है, तो इसके पीछे राजनीतिक और संगठनात्मक दबाव दोनों हो सकते हैं।

इमरान खान के लिए टकराव कम करना क्यों जरूरी हो सकता है?

1. कानूनी मामलों का दबाव

इमरान खान लंबे समय से जेल में हैं और उनके खिलाफ कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में सैन्य नेतृत्व के साथ सार्वजनिक टकराव को और बढ़ाना उनके लिए राजनीतिक तथा कानूनी मुश्किलें बढ़ा सकता है।

इसलिए बातचीत का रास्ता खोलना PTI के लिए व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

2. पार्टी संगठन पर लगातार दबाव

इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद PTI को कई स्तरों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। नेताओं की गिरफ्तारियां, मुकदमे और राजनीतिक गतिविधियों पर दबाव ने पार्टी के संगठन को प्रभावित किया है।

ऐसे में सेना के साथ तनाव कम होने से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए राजनीतिक गतिविधियों की गुंजाइश बढ़ सकती है।

3. देश की आर्थिक स्थिति

पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में राजनीतिक और सैन्य संस्थानों के बीच लगातार संघर्ष देश की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

PTI की ओर से ‘देश पहले’ वाला संदेश इसी राजनीतिक परिस्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।

4. पर्दे के पीछे बातचीत की संभावना

सार्वजनिक बयान में नरमी आने से दोनों पक्षों के बीच बैकचैनल बातचीत की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

अगर PTI और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच संवाद शुरू होता है तो इसका इस्तेमाल इमरान खान की रिहाई, पार्टी के राजनीतिक भविष्य और आगामी राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए किया जा सकता है।

क्या जनरल आसिम मुनीर प्रधानमंत्री जितने ताकतवर हैं?

यह कहना कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख के पास प्रधानमंत्री के बिल्कुल बराबर संवैधानिक शक्तियां हैं, सही नहीं होगा। पाकिस्तान का संविधान प्रधानमंत्री को सरकार का प्रमुख बनाता है, जबकि सेना प्रमुख सैन्य संस्थान का नेतृत्व करते हैं।

हालांकि पाकिस्तान की राजनीति में सेना का प्रभाव लंबे समय से काफी महत्वपूर्ण रहा है। इसी वजह से सेना प्रमुख का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव कई बार उनके संवैधानिक पद की सीमाओं से कहीं व्यापक माना जाता है।

सेना का आर्थिक फैसलों में बढ़ता प्रभाव

पाकिस्तान में स्पेशल इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन काउंसिल (SIFC) जैसे संस्थागत तंत्रों के जरिए आर्थिक और निवेश संबंधी मामलों में सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका बढ़ी है।

विदेशी निवेश आकर्षित करने, बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने और निवेश से जुड़ी बाधाओं को दूर करने में सेना की भागीदारी ने उसके प्रभाव को आर्थिक क्षेत्र तक पहुंचाया है।

हालांकि इसे प्रधानमंत्री के बराबर औपचारिक संवैधानिक अधिकार के रूप में देखना सही नहीं होगा।

सुरक्षा और खुफिया तंत्र में सेना की बड़ी भूमिका

पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और रणनीतिक मामलों में सेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। देश की सुरक्षा व्यवस्था में इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) जैसी संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है।

इसी कारण सेना प्रमुख का प्रभाव केवल सैन्य मामलों तक सीमित नहीं माना जाता। सुरक्षा और रणनीतिक नीतियों में उनकी भूमिका पाकिस्तान की राजनीति में भी बड़ा असर डाल सकती है।

विदेश नीति में भी सेना का प्रभाव

पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीति में सेना का प्रभाव ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहा है। चीन के साथ रणनीतिक संबंध, CPEC, अमेरिका के साथ रिश्ते तथा सऊदी अरब और खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग जैसे मामलों में सैन्य नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

इसका एक कारण यह भी है कि पाकिस्तान की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के कई महत्वपूर्ण मुद्दे सीधे सैन्य रणनीति से जुड़े हुए हैं।

सेना और प्रधानमंत्री के बीच असली अंतर क्या है?

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के पास सरकार चलाने, मंत्रिमंडल का नेतृत्व करने और प्रशासनिक नीतियां तय करने की संवैधानिक जिम्मेदारी होती है। दूसरी तरफ सेना प्रमुख का औपचारिक क्षेत्र सैन्य कमान से जुड़ा है।

लेकिन पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में सेना का प्रभाव इतना मजबूत रहा है कि कई मौकों पर सैन्य नेतृत्व ने राजनीतिक फैसलों पर भी निर्णायक असर डाला है।

इसी वजह से इमरान खान और जनरल आसिम मुनीर के बीच संबंधों को केवल प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के सामान्य संस्थागत रिश्ते के रूप में नहीं देखा जाता।

आगे क्या हो सकता है?

PTI की ओर से टकराव कम करने का संकेत अगर वास्तविक राजनीतिक रणनीति में बदलता है, तो पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इमरान खान स्वयं अपने करीबी सहयोगी के इस रुख से किस हद तक सहमत हैं। इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक समझौते की दिशा में एक संकेत के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा।

आने वाले समय में यह साफ होगा कि PTI और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच संवाद की कोई वास्तविक शुरुआत होती है या दोनों पक्षों के बीच पुराना टकराव फिर से तेज हो जाता है।

बांग्लादेश के हालात पर सजीब वाजेद की चेतावनी, भारत की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने देश की मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर दावे किए हैं। करीब दो साल पहले सत्ता से बाहर होने और देश छोड़ने के बाद शेख हसीना पहली बार सार्वजनिक मंच पर नजर आईं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया।

इसी कार्यक्रम में सजीब वाजेद जॉय ने बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे ‘दूसरा पाकिस्तान’ बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हो रहे बदलावों का असर केवल वहां तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के लिए भी यह चिंता का विषय हो सकता है।

पहली बार सार्वजनिक संबोधन में शेख हसीना ने लगाए आरोप

नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया के कार्यक्रम में वीडियो लिंक के जरिए शामिल हुईं शेख हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश में कुछ ऐसे लोगों को जेल से रिहा किया गया है, जिन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था।

सत्ता परिवर्तन के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन बताया गया। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा परिस्थितियों पर कई आरोप लगाए और अपने शासनकाल के बाद हुए बदलावों पर सवाल खड़े किए।

जॉय ने भारत के लिए भी बताया चिंता का विषय

शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने कहा कि उनके अनुसार बांग्लादेश जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वह भारत के लिए भी चिंता का कारण होना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली व्यवस्था में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। जॉय ने यह भी दावा किया कि देश धीरे-धीरे एक ऐसे रास्ते पर जा रहा है जहां राज्य व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।

हालांकि, ये सभी दावे जॉय और शेख हसीना की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इनके संबंध में स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग दावों के स्तर पर आवश्यक है।

2024 के आंदोलन में हुई मौतों को लेकर सवाल

जॉय ने जुलाई-अगस्त 2024 के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और बांग्लादेश सरकार की ओर से बताए गए आंकड़ों में अंतर का उल्लेख किया।

उनका दावा था कि अलग-अलग स्रोतों में मृतकों की संख्या अलग बताई गई है और सरकार को इस अंतर को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने सत्ता परिवर्तन के बाद हुई हिंसा की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग भी की।

जॉय ने पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपों और ऐसे मामलों में कथित कानूनी संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए।

2004 के ग्रेनेड हमले का भी जिक्र

कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक और खुफिया अधिकारी अमीनुल हक पोलाश ने 21 अगस्त 2004 को ढाका में अवामी लीग की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले का उल्लेख किया।

इस हमले में 24 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। हमले का निशाना तत्कालीन विपक्षी नेता शेख हसीना और अवामी लीग के अन्य नेता थे।

उन्होंने अपने बयान में आशंका जताई कि बांग्लादेश में कट्टरपंथी और उग्रवादी गतिविधियों का खतरा दोबारा बढ़ सकता है।

चटगांव हथियार बरामदगी मामले का मुद्दा उठा

पूर्व खुफिया अधिकारी ने चटगांव हथियार बरामदगी मामले का भी जिक्र किया। अप्रैल 2004 में चटगांव बंदरगाह पर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी मात्रा में हथियार जब्त किए थे।

जांच के दौरान यह आरोप सामने आया था कि हथियारों की खेप को भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सक्रिय उग्रवादी संगठन ULFA तक पहुंचाया जाना था।

इस मामले को लेकर बांग्लादेश में लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली और कई लोगों को आरोपी बनाया गया।

मामले में बाद में हुई कानूनी कार्रवाई

शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के सत्ता में लौटने के बाद इस हथियार बरामदगी मामले की जांच को आगे बढ़ाया गया। 2018 में बांग्लादेश की अदालत ने तत्कालीन गृह राज्यमंत्री लुत्फोज्जमान बाबर समेत कई आरोपियों को मामले में दोषी ठहराया था और बाबर को मौत की सजा सुनाई गई थी।

बाद में इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और जनवरी 2025 में हाई कोर्ट ने बाबर को बरी कर दिया। इसके साथ ही उनके खिलाफ मौत की सजा भी समाप्त हो गई।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बांग्लादेश की स्थिति?

भारत और बांग्लादेश के बीच भौगोलिक निकटता, सीमा सुरक्षा, व्यापार और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े रणनीतिक हितों के कारण बांग्लादेश में होने वाले राजनीतिक बदलावों का भारत पर सीधा असर पड़ सकता है।

इसी वजह से जॉय की ओर से बांग्लादेश में बढ़ते कथित कट्टरपंथ और अस्थिरता को लेकर जताई गई चिंता को भारत के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति और इन आरोपों की वास्तविकता को लेकर स्वतंत्र स्रोतों और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

Health Update:सिर्फ खांसी और सांस फूलने को न करें नजरअंदाज, जांच में सामने आई दिल की गंभीर बीमारी

लगातार खांसी, जल्दी थकान या थोड़ी सी मेहनत के बाद सांस फूलना अक्सर सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई बार लोग इन लक्षणों को मौसम में बदलाव, एलर्जी, संक्रमण या कमजोरी से जोड़कर देखते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यही संकेत दिल से जुड़ी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं।

ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां करीब एक महीने से लगातार खांसी से परेशान व्यक्ति को शुरुआत में सामान्य समस्या लग रही थी। दवाएं लेने के बावजूद जब आराम नहीं मिला और धीरे-धीरे सांस फूलने के साथ ऑक्सीजन का स्तर भी कम होने लगा, तो उन्होंने अस्पताल में जांच कराई। जांच के दौरान पता चला कि समस्या फेफड़ों से ज्यादा दिल से जुड़ी हुई थी।

कई लक्षण एक साथ दिखे

अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज को लगातार खांसी के अलावा सांस लेने में परेशानी, थकान और दिल की धड़कन तेज होने जैसी शिकायतें भी थीं। शुरुआत में इन लक्षणों को अलग-अलग कारणों से जोड़ना आसान था।

थकान को व्यस्त दिनचर्या, तेज धड़कन को तनाव और सांस फूलने को कमजोरी या खांसी का असर माना जा सकता है। लेकिन जब सभी लक्षणों को एक साथ देखा गया तो डॉक्टरों को हृदय संबंधी समस्या की आशंका हुई।

हार्ट इमेजिंग और अन्य जांचों के बाद पता चला कि मरीज के एओर्टिक और माइट्रल दोनों वाल्व काफी संकरे हो चुके थे।

वाल्व संकुचित होने पर क्या होता है?

दिल में चार वाल्व होते हैं, जिनका काम रक्त को सही दिशा में आगे बढ़ाना होता है। इनमें माइट्रल वाल्व बाएं एट्रियम से बाएं वेंट्रिकल की ओर रक्त के प्रवाह में मदद करता है, जबकि एओर्टिक वाल्व बाएं वेंट्रिकल से शरीर की मुख्य धमनी एओर्टा तक रक्त पहुंचने का रास्ता खोलता है।

जब इनमें से किसी वाल्व का रास्ता संकरा हो जाता है तो इसे वाल्व स्टेनोसिस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में रक्त को आगे भेजने के लिए हृदय को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

इस मामले में दो प्रमुख वाल्व प्रभावित होने के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था।

रूमेटिक हार्ट डिजीज भी हो सकती है वजह

भारत में हार्ट वाल्व की बीमारी के पीछे रूमेटिक हार्ट डिजीज एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। यह आमतौर पर बचपन में हुए स्ट्रेप्टोकोकल गले के संक्रमण के बाद विकसित होने वाली समस्या से जुड़ी होती है, खासकर जब इसका उचित इलाज न हो।

इसके अलावा बढ़ती उम्र और कुछ अन्य हृदय संबंधी स्थितियां भी वाल्व को प्रभावित कर सकती हैं। वाल्व की बीमारी का कारण व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री और जांच के आधार पर ही निर्धारित किया जाता है।

दिल की बीमारी में खांसी क्यों हो सकती है?

वाल्व के संकुचित होने पर हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे हृदय के कुछ हिस्सों और फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ सकता है।

कुछ मामलों में फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप सांस फूलना, थकान, लगातार खांसी और ऑक्सीजन का स्तर कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

यानी खांसी दिखाई देने वाला लक्षण हो सकती है, जबकि वास्तविक समस्या हृदय में मौजूद हो सकती है।

दोनों वाल्व बदलने की जरूरत पड़ी

जांच में दोनों वाल्व गंभीर रूप से संकुचित पाए जाने के बाद डॉक्टरों ने डबल-वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह दी। ऑपरेशन के दौरान दोनों खराब वाल्व को बदल दिया गया।

डॉक्टरों के सामने मैकेनिकल और बायोलॉजिकल वाल्व में से विकल्प चुनने की स्थिति थी। मरीज की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए बायोलॉजिकल वाल्व लगाने का फैसला किया गया।

मैकेनिकल और बायोलॉजिकल वाल्व के बाद दवाओं और फॉलो-अप की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। इसलिए वाल्व का चुनाव मरीज की उम्र, स्वास्थ्य, रक्तस्राव के जोखिम और अन्य मेडिकल परिस्थितियों के आधार पर विशेषज्ञ तय करते हैं।

इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें

अगर लगातार खांसी के साथ सांस फूलना, सीने में परेशानी, असामान्य थकान, तेज या अनियमित धड़कन, पैरों में सूजन या ऑक्सीजन स्तर में कमी जैसी समस्या दिखाई दे रही है, तो इसे केवल सामान्य खांसी या कमजोरी मानकर लंबे समय तक टालना ठीक नहीं है।

खासकर लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ते जाएं तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर बीमारी की पहचान होने से उचित इलाज की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे किसी व्यक्ति के लिए मेडिकल निदान या उपचार की सलाह न माना जाए। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर या कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लें।

सिंगापुर में भारतीय कारोबारी पर दिवालियापन की कार्रवाई, 407 कर्मचारियों की सैलरी फंसी

सिंगापुर में एक भारतीय मूल के कारोबारी को दिवालिया घोषित किए जाने का मामला सामने आया है। कारोबारी की कई कंपनियों में काम करने वाले 400 से अधिक प्रवासी कर्मचारियों की मजदूरी बकाया होने की शिकायतें सामने आई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, रामू पलानी वेलु के खिलाफ 13 अगस्त को दिवालियापन का आदेश जारी किया गया।

रामू सिंगापुर के स्थायी निवासी बताए जाते हैं और कई कंपनियों में निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। उनकी कंपनियां एयर-कंडीशनिंग, प्लंबिंग और बिल्डिंग सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं। इनमें KPA Engineering, SK Industries और VVR Plant Engineering जैसी कंपनियां शामिल हैं।

कुल 407 कर्मचारियों की ओर से बकाप्राइवेट पार्ट और पर्सनल हाइजीन का रखें खास ख्याल, इन बातों को न करें नजरअंदाज

** Personal Hygiene Tips:** जब ग्रूमिंग या स्किन केयर की बात आती है तो हम सभी ही अपनी ग्रूमिंग और चेहरे के लिए काफी पैसा खर्च करते हैं और कई प्रकार के प्रोडक्ट्स का भी उपयोग करते हैं पर जितना जरूरी मानते हैं और अपनी स्किन के बाकी हिस्सों का ध्यान रखते हैं उतना ही जरूरी है कि प्राइवेट पार्ट/ पर्सनल हाइजीन का भी ख्याल रखा जाए क्योंकि इससे पसीना, गंदगी और बैक्टीरिया जमा होने से रोक सकते हैं.

पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखना क्यों है जरूरी?

पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखना सेहत के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि सही देखभाल न करने से इन्फेक्शन, जलन, बदबू और कई तरह की परेशानियां का सामना करना पड़ सकता है. खासकर महिलाओं में गलत सफाई के तरीकों, जैसे वजाइनल डूशिंग या केमिकल वाले साबुन के इस्तेमाल करने से प्राकृतिक पीएच संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे बार-बार इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है.

वहीं, पुरुषों में अगर फोरस्किन के नीचे सफाई न हो तो वहां गंदगी जमा होकर संक्रमण की वजह बन जाती है. इसके अलावा सही हाइजीन न रखने से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, जो दर्दनाक होने के साथ-साथ बार-बार हो सकती हैं यह शुरुआत में तो छोटी पर बार बार होने पर बड़ी समस्या का कारण बन जाती है.

प्राइवेट पार्ट और पर्सनल हाइजीन कैसे रखें ध्यान?

महिलाओं को केवल बाहरी सफाई की जरूरत है. हाइजीन का ध्यान रखने के लिए उन्हें सिर्फ वल्वा यानी बाहरी हिस्से को गुनगुने पानी या हल्के बिना खुशबू वाले साबुन से साफ करना चाहिए और अगर आप टिशू पप्पर का उपयोग करती है तो टॉयलेट के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर पोंछना चाहिए. वहीं, पीरियड्स में पैड हर 4-6 घंटे में और टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप निर्देशों के अनुसार बदलें, जिससे आपको किसी प्रकार के इन्फेक्शन का खतरा न हो.

वहीं, पुरुषों को भी रोजाना प्राइवेट पार्ट धोना चाहिए और फोरस्किन को धीरे से पीछे करके अंदर का हिस्सा साफ करने के बाद अच्छी तरह सुखाना चाहिए. दोनों को ही सूती अंडरवियर पहनना और रोजाना बदलना चाहिए, वर्कआउट या तैराकी के बाद गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक नहीं रहना चाहिए, उससे रेसेज व अन्य बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है और शारीरिक संबंध के बाद पेशाब करना भी जरूरी है. यह यूटीआई से बचाव में मददगार साबित होता है. अगर फिर भी कोई असामान्य लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

या वेतन को लेकर दावे किए गए हैं। इनमें भारतीय नागरिकों समेत दूसरे देशों के प्रवासी कामगार भी शामिल हैं। कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें दो महीने से अधिक समय तक वेतन नहीं मिला।

2025 में सामने आया था वेतन विवाद

मामला 2025 में उस समय सामने आया, जब KPA Engineering के पांच कर्मचारियों ने अपनी बकाया सैलरी को लेकर Tripartite Alliance for Dispute Management से संपर्क किया।

इन शुरुआती मामलों को कुछ ही समय में सुलझा लिया गया और संबंधित कर्मचारियों को उनका भुगतान मिल गया। लेकिन इसके बाद मई और जून में कंपनी के चार अन्य कर्मचारियों ने भी वेतन नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई।

इसके बाद कर्मचारियों की संख्या बढ़ती गई और मामला प्रशासन के सामने गंभीर रूप से उठने लगा।

100 से ज्यादा कर्मचारी मंत्रालय के कार्यालय पहुंचे

22 जून को 100 से ज्यादा कर्मचारी अपनी शिकायत लेकर सिंगापुर के Ministry of Manpower (MOM) के बेंडमीर स्थित कार्यालय पहुंचे।

इस समय तक अधिकारियों को कंपनी के कर्मचारियों से जुड़े वेतन विवाद और नौकरी समाप्त किए जाने से संबंधित मामलों की जानकारी मिल चुकी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 8 जून को नौकरी से हटाए जाने के नोटिस से प्रभावित कर्मचारियों के भुगतान संबंधी दावों पर भी प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।

बड़ी संख्या में कर्मचारियों के MOM पहुंचने से पहले ही अधिकारी कंपनी के निदेशकों से संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे।

कारोबारी ने खुद दिवालियापन के लिए किया आवेदन

वेतन विवाद बढ़ने के दौरान रामू पलानी वेलु के सिंगापुर से बाहर होने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि वह 26 जून को वापस सिंगापुर लौटे और बाद में मंत्रालय की जांच में सहयोग करने लगे।

सिंगापुर के कानून मंत्रालय के Insolvency Office के रिकॉर्ड के अनुसार, रामू ने 9 जुलाई को खुद दिवालियापन के लिए आवेदन किया था। इसके बाद 13 अगस्त को उनके खिलाफ दिवालियापन आदेश जारी किया गया।

वेतन न देने पर हो सकती है सजा

सिंगापुर में कर्मचारियों को वेतन नहीं देना गंभीर श्रम उल्लंघन माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, दोष साबित होने पर नियोक्ता को प्रत्येक आरोप के लिए 3,000 से 15,000 सिंगापुर डॉलर तक का जुर्माना और छह महीने तक की जेल का सामना करना पड़ सकता है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सिंगापुर में प्रवासी कामगारों के वेतन और रोजगार अधिकारों को लेकर नियमों के पालन पर लगातार जोर दिया जाता है।

फिलहाल मामले में बकाया वेतन के दावों, कंपनियों की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों को भुगतान की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।

Health Update:प्राइवेट पार्ट की साफ-सफाई से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान, छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी

पर्सनल हाइजीन का मतलब सिर्फ चेहरे, बालों या शरीर की सामान्य सफाई तक सीमित नहीं है। शरीर के संवेदनशील हिस्सों की साफ-सफाई भी उतनी ही जरूरी है। प्राइवेट पार्ट में पसीना और नमी ज्यादा समय तक बनी रहने पर असहजता, जलन, बदबू और कुछ संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए रोजमर्रा की स्वच्छता में निजी अंगों की उचित देखभाल को भी शामिल करना चाहिए। हालांकि, जरूरत से ज्यादा सफाई या तेज केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी नुकसान पहुंचा सकता है।

महिलाओं को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

महिलाओं के लिए सामान्य तौर पर बाहरी हिस्से यानी वल्वा की सफाई पर्याप्त होती है। इसे साफ करने के लिए सामान्य पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि साबुन इस्तेमाल करना हो तो हल्का और बिना खुशबू वाला उत्पाद बेहतर विकल्प हो सकता है।

वेजाइनल डूशिंग या अंदरूनी हिस्से को बार-बार केमिकल वाले प्रोडक्ट से साफ करने से बचना चाहिए। इससे प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है और जलन या संक्रमण की समस्या पैदा हो सकती है।

टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद सफाई करते समय आगे से पीछे की ओर पोंछना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

पीरियड्स के दौरान सफाई और भी जरूरी

मासिक धर्म के दौरान हाइजीन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पैड को लंबे समय तक न पहनें और उसे इस्तेमाल किए जा रहे उत्पाद के निर्देशों तथा जरूरत के अनुसार समय पर बदलें।

टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करते समय निर्माता द्वारा दिए गए निर्देशों और अधिकतम उपयोग अवधि का पालन करना जरूरी है।

पुरुष भी इन बातों को न करें नजरअंदाज

पुरुषों को भी रोजाना प्राइवेट पार्ट की सामान्य सफाई करनी चाहिए। जिन पुरुषों में फोरस्किन होती है, उन्हें उसे धीरे से पीछे करके नीचे के हिस्से को पानी से साफ करना चाहिए और बाद में अच्छी तरह सुखाना चाहिए।

सफाई के दौरान बहुत ज्यादा रगड़ने या तेज केमिकल वाले उत्पादों का इस्तेमाल करने से त्वचा में जलन हो सकती है।

अंडरवियर और कपड़ों की सफाई पर ध्यान दें

पर्सनल हाइजीन में कपड़ों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। रोजाना साफ अंडरवियर पहनना चाहिए और पसीना आने के बाद कपड़े बदल लेना बेहतर है।

व्यायाम या तैराकी के बाद लंबे समय तक गीले कपड़े पहनकर न रहें। लगातार नमी और गर्म वातावरण त्वचा में जलन और दूसरी समस्याओं का कारण बन सकता है।

आरामदायक और हवा आने-जाने वाले कपड़े पहनना भी उपयोगी हो सकता है।

सेक्स के बाद भी रखें स्वच्छता का ध्यान

यौन संबंध के बाद पेशाब करना कुछ लोगों में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही दोनों पार्टनर अपनी सामान्य व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें।

अगर बार-बार जलन, खुजली, असामान्य डिस्चार्ज, तेज बदबू, घाव, दर्द या पेशाब करते समय जलन जैसी समस्या हो रही है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। ऐसे लक्षणों के पीछे संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, इसलिए डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी जानकारी के लिए है। इसे डॉक्टर की सलाह या किसी बीमारी के इलाज का विकल्प न मानें। लगातार या असामान्य लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।