लगातार खांसी, जल्दी थकान या थोड़ी सी मेहनत के बाद सांस फूलना अक्सर सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई बार लोग इन लक्षणों को मौसम में बदलाव, एलर्जी, संक्रमण या कमजोरी से जोड़कर देखते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यही संकेत दिल से जुड़ी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं।
ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां करीब एक महीने से लगातार खांसी से परेशान व्यक्ति को शुरुआत में सामान्य समस्या लग रही थी। दवाएं लेने के बावजूद जब आराम नहीं मिला और धीरे-धीरे सांस फूलने के साथ ऑक्सीजन का स्तर भी कम होने लगा, तो उन्होंने अस्पताल में जांच कराई। जांच के दौरान पता चला कि समस्या फेफड़ों से ज्यादा दिल से जुड़ी हुई थी।
कई लक्षण एक साथ दिखे
अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज को लगातार खांसी के अलावा सांस लेने में परेशानी, थकान और दिल की धड़कन तेज होने जैसी शिकायतें भी थीं। शुरुआत में इन लक्षणों को अलग-अलग कारणों से जोड़ना आसान था।
थकान को व्यस्त दिनचर्या, तेज धड़कन को तनाव और सांस फूलने को कमजोरी या खांसी का असर माना जा सकता है। लेकिन जब सभी लक्षणों को एक साथ देखा गया तो डॉक्टरों को हृदय संबंधी समस्या की आशंका हुई।
हार्ट इमेजिंग और अन्य जांचों के बाद पता चला कि मरीज के एओर्टिक और माइट्रल दोनों वाल्व काफी संकरे हो चुके थे।
वाल्व संकुचित होने पर क्या होता है?
दिल में चार वाल्व होते हैं, जिनका काम रक्त को सही दिशा में आगे बढ़ाना होता है। इनमें माइट्रल वाल्व बाएं एट्रियम से बाएं वेंट्रिकल की ओर रक्त के प्रवाह में मदद करता है, जबकि एओर्टिक वाल्व बाएं वेंट्रिकल से शरीर की मुख्य धमनी एओर्टा तक रक्त पहुंचने का रास्ता खोलता है।
जब इनमें से किसी वाल्व का रास्ता संकरा हो जाता है तो इसे वाल्व स्टेनोसिस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में रक्त को आगे भेजने के लिए हृदय को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
इस मामले में दो प्रमुख वाल्व प्रभावित होने के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था।
रूमेटिक हार्ट डिजीज भी हो सकती है वजह
भारत में हार्ट वाल्व की बीमारी के पीछे रूमेटिक हार्ट डिजीज एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। यह आमतौर पर बचपन में हुए स्ट्रेप्टोकोकल गले के संक्रमण के बाद विकसित होने वाली समस्या से जुड़ी होती है, खासकर जब इसका उचित इलाज न हो।
इसके अलावा बढ़ती उम्र और कुछ अन्य हृदय संबंधी स्थितियां भी वाल्व को प्रभावित कर सकती हैं। वाल्व की बीमारी का कारण व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री और जांच के आधार पर ही निर्धारित किया जाता है।
दिल की बीमारी में खांसी क्यों हो सकती है?
वाल्व के संकुचित होने पर हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे हृदय के कुछ हिस्सों और फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ सकता है।
कुछ मामलों में फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप सांस फूलना, थकान, लगातार खांसी और ऑक्सीजन का स्तर कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
यानी खांसी दिखाई देने वाला लक्षण हो सकती है, जबकि वास्तविक समस्या हृदय में मौजूद हो सकती है।
दोनों वाल्व बदलने की जरूरत पड़ी
जांच में दोनों वाल्व गंभीर रूप से संकुचित पाए जाने के बाद डॉक्टरों ने डबल-वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह दी। ऑपरेशन के दौरान दोनों खराब वाल्व को बदल दिया गया।
डॉक्टरों के सामने मैकेनिकल और बायोलॉजिकल वाल्व में से विकल्प चुनने की स्थिति थी। मरीज की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए बायोलॉजिकल वाल्व लगाने का फैसला किया गया।
मैकेनिकल और बायोलॉजिकल वाल्व के बाद दवाओं और फॉलो-अप की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। इसलिए वाल्व का चुनाव मरीज की उम्र, स्वास्थ्य, रक्तस्राव के जोखिम और अन्य मेडिकल परिस्थितियों के आधार पर विशेषज्ञ तय करते हैं।
इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें
अगर लगातार खांसी के साथ सांस फूलना, सीने में परेशानी, असामान्य थकान, तेज या अनियमित धड़कन, पैरों में सूजन या ऑक्सीजन स्तर में कमी जैसी समस्या दिखाई दे रही है, तो इसे केवल सामान्य खांसी या कमजोरी मानकर लंबे समय तक टालना ठीक नहीं है।
खासकर लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ते जाएं तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर बीमारी की पहचान होने से उचित इलाज की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे किसी व्यक्ति के लिए मेडिकल निदान या उपचार की सलाह न माना जाए। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर या कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लें।


































