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Health News:दिल्ली में H1N1 का बढ़ता असर, 1,700 से ज्यादा मामलों की पुष्टि; जानें किन लोगों को ज्यादा खतरा

दिल्ली में मौसमी बीमारियों और इन्फ्लूएंजा के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। राजधानी में 2026 के दौरान अब तक इन्फ्लूएंजा-ए के 2,392 मामले सामने आने की जानकारी दी गई है। इनमें H1N1 के 1,777 मामले शामिल हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों और मौजूदा स्थिति की समीक्षा के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में बैठक भी हुई।

बैठक में अस्पतालों में उपलब्ध बेड, दवाइयां, डॉक्टर, जरूरी उपकरण और मरीजों की निगरानी व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। दिल्ली सरकार की ओर से बताया गया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।

इन्फ्लूएंजा के मामलों पर लगातार निगरानी

दिल्ली में सामने आए इन्फ्लूएंजा-ए के मामलों में H1N1 के अलावा अन्य प्रकार के संक्रमण भी शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, H1 के 37, H3 के 138 और अन्य श्रेणियों के 440 मामले दर्ज किए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों की पहचान और इलाज में देरी न हो, इसके लिए अस्पतालों और जिला स्तर के अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

ILI यानी इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी और SARI यानी गंभीर सांस संबंधी संक्रमण वाले मरीजों के मामलों पर भी नियमित नजर रखी जा रही है।

अस्पतालों में सुविधाओं को लेकर सरकार का क्या दावा?

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह के अनुसार, राजधानी के अस्पतालों में फिलहाल बेड, दवाइयों, डॉक्टरों और आवश्यक मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाज, मरीजों की स्थिति के अनुसार वर्गीकरण, वेंटिलेटर मैनेजमेंट, मास्क के इस्तेमाल और होम केयर से संबंधित दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।

स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों में गंभीर लक्षणों की पहचान और उनके फॉलो-अप को लेकर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की जा रही है।

डेंगू और मलेरिया पर भी नजर

H1N1 के साथ-साथ दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में अब तक डेंगू के 246, मलेरिया के 80 और चिकनगुनिया के 19 मामले सामने आए हैं।

राहत की बात यह है कि इन तीनों बीमारियों से अब तक किसी मौत की सूचना नहीं दी गई है।

91 हजार से ज्यादा घरों में मच्छरों की मौजूदगी

वेक्टर कंट्रोल अभियान के तहत स्थानीय निकायों की ओर से बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। अब तक करीब 2.38 करोड़ घरों का निरीक्षण किया गया है।

इस दौरान लगभग 3.20 लाख घरों में स्प्रे कराया गया, जबकि 91,217 घरों में मच्छरों की मौजूदगी पाई गई। नियमों के उल्लंघन को लेकर 74,591 नोटिस जारी किए गए और 6,724 मामलों में कार्रवाई की गई।

दिल्ली में बीमारी की निगरानी के लिए 35 सेंटिनल सर्विलांस अस्पताल भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा AIIMS और NCDC में एपेक्स रेफरल लैब तथा MAMC में मलेरिया रेफरेंस लैब की सुविधा उपलब्ध है।

H1N1 के लक्षण कैसे पहचानें?

H1N1 संक्रमण में सामान्य फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना और अत्यधिक थकान शामिल हो सकते हैं।

कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या भी हो सकती है। अगर बुखार या सांस संबंधी लक्षण लगातार बने रहें या स्थिति तेजी से बिगड़ती दिखाई दे, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में फ्लू के गंभीर होने का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। इसके अलावा डायबिटीज, हृदय रोग या लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को भी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में दर्द, लगातार बिगड़ती हालत, भ्रम या होंठों का नीला पड़ना जैसे गंभीर संकेत दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे डॉक्टर की सलाह या किसी बीमारी के व्यक्तिगत इलाज का विकल्प न मानें। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर योग्य चिकित्सक से जांच और सलाह जरूर लें।

Travel Tips: तुर्कमेनिस्तान के रेगिस्तान में जलता है रहस्यमयी गड्ढा, जानिए ‘Door to Hell’ की कहानी

दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जो अपनी अनोखी भौगोलिक परिस्थितियों और रहस्यमयी घटनाओं के कारण पर्यटकों का ध्यान खींचती हैं। ऐसी ही एक जगह तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में मौजूद है, जिसे आमतौर पर ‘Door to Hell’ यानी नरक का दरवाजा कहा जाता है।

यह विशाल आग का गड्ढा दरवेजे गांव के आसपास स्थित है। रात के समय इसके अंदर से निकलती लपटें दूर से ही दिखाई देती हैं, जिसके कारण यह जगह लंबे समय से लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

कैसे बना आग का यह विशाल गड्ढा?

इस जगह की कहानी 1971 से जुड़ी बताई जाती है। उस समय सोवियत संघ के भूवैज्ञानिक काराकुम क्षेत्र में प्राकृतिक गैस के भंडार की तलाश कर रहे थे।

खुदाई के दौरान जमीन का एक हिस्सा अचानक धंस गया। इसके बाद वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया और उसके भीतर से प्राकृतिक गैस बाहर निकलने लगी। गैस के फैलने से आसपास के वातावरण और लोगों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका जताई गई।

गैस को जलाने का लिया गया फैसला

गड्ढे से लगातार निकल रही गैस को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिकों ने उसमें आग लगाने का फैसला किया। उस समय उम्मीद की गई थी कि कुछ समय में गैस खत्म हो जाएगी और आग अपने आप बुझ जाएगी।

लेकिन अनुमान के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ। प्राकृतिक गैस का स्रोत अपेक्षा से अधिक बड़ा या लगातार सक्रिय रहा, जिसके चलते गड्ढे में आग लंबे समय तक जलती रही।

इसी वजह से यह स्थान धीरे-धीरे ‘नरक का दरवाजा’ नाम से मशहूर हो गया।

आखिर इतने साल बाद भी आग क्यों जल रही है?

इस जगह को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता इसी बात की रहती है कि आग इतनी लंबी अवधि तक कैसे जलती रही। इसका प्रमुख कारण जमीन के नीचे मौजूद प्राकृतिक गैस का लगातार रिसाव माना जाता है।

हालांकि इस आग के भविष्य को लेकर अलग-अलग समय पर कई अनुमान लगाए गए हैं। गैस का भंडार कम होने पर आग कमजोर या पूरी तरह खत्म हो सकती है, लेकिन इसे लेकर निश्चित समय बताना मुश्किल है।

आसपास के पर्यावरण पर भी चिंता

काराकुम रेगिस्तान में मौजूद इस आग को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी सामने आती रही हैं। प्राकृतिक गैस के लगातार जलने से वातावरण में गैसों का उत्सर्जन होता है और आसपास के क्षेत्र पर इसका असर पड़ सकता है।

तुर्कमेनिस्तान की सरकार भी इस गड्ढे को लेकर कई बार चिंता जता चुकी है और गैस के नुकसान को कम करने तथा आग को नियंत्रित करने के विकल्पों पर विचार किया गया है।

राष्ट्रपति ने भी किया था दौरा

इस रहस्यमयी जगह ने तुर्कमेनिस्तान के शीर्ष नेतृत्व का भी ध्यान खींचा है। पूर्व राष्ट्रपति कुरबानगुली बर्डीमुखामेदोव ने 2010 में इस क्षेत्र का दौरा किया था।

इस दौरान उन्होंने आग के कारण होने वाले संभावित पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त की थी। खास तौर पर आसपास मौजूद प्राकृतिक गैस संसाधनों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा हुई।

पर्यटकों के लिए क्यों खास है यह जगह?

‘नरक का दरवाजा’ तुर्कमेनिस्तान की सबसे चर्चित प्राकृतिक घटनाओं में गिना जाता है। विशाल रेगिस्तान के बीच रात के अंधेरे में जलता हुआ यह गड्ढा बेहद अलग दृश्य प्रस्तुत करता है।

हालांकि यहां जाने वाले यात्रियों को स्थानीय नियमों, मौसम, रेगिस्तानी परिस्थितियों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। यह कोई सामान्य पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि दुर्गम रेगिस्तानी क्षेत्र में स्थित एक प्राकृतिक गैस क्रेटर है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य यात्रा और ऐतिहासिक जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी विदेशी यात्रा की योजना बनाने से पहले संबंधित देश के मौजूदा प्रवेश नियम, स्थानीय प्रशासन के निर्देश और सुरक्षा संबंधी अपडेट जरूर जांच लें।

लखनऊ: सेंट्रल ज़ोन के हसनगंज थानांतर्गत निराला नगर के VVIP इलाके में खुलेआम अवैध खनन, जिम्मेदार विभाग बेखबर; बारिश में हादसे का खतरा

लखनऊ: राजधानी के VVIP इलाके निराला नगर में आबादी के बीच खुलेआम अवैध खनन का मामला सामने आया है। हसनगंज थाना क्षेत्र में महिंद्रा वर्कशॉप के ठीक बगल में बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई की जा रही है, लेकिन इतनी बड़ी गतिविधि के बावजूद जिम्मेदार विभागों की प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

सबसे गंभीर बात यह है कि बारिश के मौसम में आबादी के बीच हो रही इस गहरी खुदाई से हादसे का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने मिट्टी धंसने और किसी बड़ी अनहोनी की आशंका जताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

VVIP इलाके में अवैध खनन पर निगरानी व्यवस्था सवालों में

निराला नगर जैसे महत्वपूर्ण और घनी आबादी वाले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई होना अपने आप में प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से गतिविधि चलने के बावजूद संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं।

सवाल यह है कि जब आबादी के बीच खुलेआम अवैध खनन हो रहा है तो जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?

बारिश में बढ़ा खतरा

लगातार बारिश के बीच जमीन की बड़े पैमाने पर खुदाई लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आसपास आबादी होने के कारण किसी भी तरह की मिट्टी धंसने या संरचनात्मक नुकसान की स्थिति में गंभीर हादसा हो सकता है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मौके पर पहुंचकर अवैध खनन बंद कराया जाए, खुदाई की स्थिति का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

कार्रवाई का इंतजार

अब निगाहें लखनऊ प्रशासन, खनन विभाग और स्थानीय पुलिस पर हैं। सवाल सिर्फ अवैध खनन रोकने का नहीं, बल्कि यह भी है कि इतने संवेदनशील और VVIP क्षेत्र में यह गतिविधि आखिर इतनी देर तक कैसे चलती रही।

बारिश के बीच किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी होगी, ताकि निराला नगर में किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।

लखनऊ में सुशांत गोल्फ सिटी के 10 हजार से अधिक परिवारों के हित में डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रभावी पैरवी : CM योगी ने दिया शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन

लखनऊ, 21 अगस्त 2026: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर सुशांत गोल्फ सिटी समेत सुल्तानपुर रोड स्थित अंसल एपीआई की हाईटेक टाउनशिप से जुड़े हजारों होमबायर्स, आवंटियों, भू-स्वामियों और निवेशकों के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री ने सभी विषयों का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मुलाकात के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि इन परिवारों ने अपने जीवनभर की पूंजी लगाकर अपने घर खरीदे हैं। ऐसे में उनके आवासीय अधिकारों, निवेश और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुशांत गोल्फ सिटी के 10,000 से अधिक परिवारों समेत 31 गांवों में विकसित की जा रही हाईटेक टाउनशिप से जुड़े हजारों परिवारों के हितों की रक्षा के लिए वह पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

NCLT मामले में प्रभावी पैरवी की मांग

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अंसल एपीआई परियोजना से जुड़े CP(IB) No. 558/ND/2024 मामले में LDA द्वारा NCLT में तत्काल Interlocutory Application दाखिल कर प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उन्होंने परियोजना को अपने नियंत्रण में लेकर अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

उन्होंने Development Agreements, MOUs और UP Hi-Tech Township Policy के अनुरूप टाउनशिप का समबद्ध विकास और हैंडओवर सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।

अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराने पर जोर

विधायक ने कहा कि टाउनशिप में लंबित सड़क, सीवर, जलापूर्ति, विद्युत, ड्रेनेज, पार्क एवं अन्य सामुदायिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाना चाहिए। इसके लिए बंधक लगभग 25 प्रतिशत भूमि के सदुपयोग के साथ उपलब्ध Performance Guarantee और अन्य वैधानिक प्रावधानों का प्रभावी इस्तेमाल किए जाने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने LDA, आवास विभाग और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त निगरानी समिति गठित करने का भी अनुरोध किया, ताकि विकास कार्यों की नियमित समीक्षा हो और उनकी प्रगति समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी किया उल्लेख

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि होमबायर्स के हितों की रक्षा के लिए उन्होंने स्वयं NCLAT में प्रभावी पैरवी की है। उन्होंने बताया कि 7 जनवरी 2026 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 को बरकरार रखा। उन्होंने राज्य सरकार और LDA को NCLT, NCLAT तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आलोक में आवश्यक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक टाउनशिप या परियोजना की नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के घर, उनकी जीवनभर की पूंजी और उनके अधिकारों की रक्षा से जुड़ी है।

सुशांत गोल्फ सिटी की बिजली समस्या भी मुख्यमंत्री के सामने

बैठक में सुशांत गोल्फ सिटी के 10,000 से अधिक परिवारों की विद्युत आपूर्ति से जुड़ा विषय भी प्रमुखता से उठाया गया। डॉ. राजेश्वर सिंह ने विद्युत भार को 10 MVA से बढ़ाकर 23 MVA करने तथा ₹8.28 करोड़ के विलंब अधिभार को माफ करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति का यह विषय हजारों परिवारों के दैनिक जीवन और बुनियादी सुविधाओं से सीधे जुड़ा है, इसलिए इसका तत्काल समाधान आवश्यक है।

‘योगी मॉडल’ को बताया जनहित केंद्रित सुशासन की पहचान

डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि जनसमस्याओं को गंभीरता से सुनना, समाधान का संकल्प लेना और शीघ्र कार्रवाई के लिए दिशा देना ‘योगी मॉडल’ की पहचान है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा हजारों परिवारों से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों को गंभीरता से सुनकर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन देना प्रभावित परिवारों के लिए विश्वास और राहत का संदेश है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि “सरोजनीनगर परिवार” के प्रत्येक नागरिक के अधिकार, सम्मान, सुविधा और सुरक्षित भविष्य की रक्षा के लिए उनका प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

Health News: भोजन के बाद 10 मिनट की वॉक से मिल सकते हैं ये फायदे, जानें सही समय और तरीका

Health Tips: खाना खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर लेटने या लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने की आदत से बचना बेहतर माना जाता है। इसके बजाय भोजन के बाद कुछ मिनट हल्की चाल से चलना रोजमर्रा की एक अच्छी आदत हो सकती है। खासकर करीब 10 मिनट की हल्की वॉक खाने के बाद बढ़ने वाले ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।

भोजन करने के बाद शरीर में ग्लूकोज का स्तर स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। इस दौरान हल्की शारीरिक गतिविधि करने से मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल करने लगती हैं। यही वजह है कि भोजन के बाद थोड़ी देर पैदल चलना मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए उपयोगी माना जाता है।

हालांकि, केवल 10 मिनट की वॉक को वजन कम करने का तरीका समझना सही नहीं होगा। वजन प्रबंधन के लिए खानपान, कुल कैलोरी संतुलन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद जैसे कई कारकों पर ध्यान देना जरूरी है।

खाने के बाद 10 मिनट चलने के फायदे

1. ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद

भोजन के बाद हल्की वॉक करने से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और वे रक्त में मौजूद ग्लूकोज का इस्तेमाल करती हैं। इससे खाने के बाद ब्लड शुगर में होने वाली अचानक बढ़ोतरी को कम करने में मदद मिल सकती है।

2. छोटी वॉक भी हो सकती है उपयोगी

इसके लिए हमेशा लंबी एक्सरसाइज की जरूरत नहीं होती। शुरुआत में भोजन के बाद करीब 10 मिनट आरामदायक गति से चलना भी एक आसान विकल्प है। कुछ अध्ययनों में भोजन के बाद की छोटी अवधि की शारीरिक गतिविधि को ग्लूकोज रिस्पॉन्स में सुधार से जोड़ा गया है।

3. लंबे समय तक बैठे रहने से बचने में मदद

आजकल कई लोगों की दिनचर्या में लंबे समय तक बैठना शामिल है। भोजन के बाद थोड़ी देर चलने से लगातार बैठे रहने का समय टूटता है और शरीर को कुछ अतिरिक्त गतिविधि मिलती है। दिनभर में ऐसे छोटे-छोटे एक्टिविटी ब्रेक शारीरिक सक्रियता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

4. वजन प्रबंधन में अप्रत्यक्ष फायदा

वॉकिंग से रोजाना की कुल शारीरिक गतिविधि और ऊर्जा खर्च बढ़ सकता है। इसलिए इसे वजन प्रबंधन की व्यापक रणनीति का हिस्सा बनाया जा सकता है। लेकिन सिर्फ खाना खाने के बाद 10 मिनट चलने से अपने आप वजन कम होने की उम्मीद करना सही नहीं है।

वजन कम करने के लिए संतुलित आहार, उचित कैलोरी सेवन और नियमित शारीरिक गतिविधि पर लगातार ध्यान देना जरूरी है।

कैसी होनी चाहिए खाने के बाद की वॉक?

भोजन के बाद बहुत तेज गति से चलने के बजाय शुरुआत में हल्की से मध्यम गति रखना बेहतर है। इतनी गति रखें कि आप आराम से चल सकें और शरीर पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

शुरुआत के लिए 10 मिनट पर्याप्त हो सकते हैं। अगर शरीर सहज महसूस करे तो धीरे-धीरे वॉक की अवधि बढ़ाई जा सकती है।

क्या खाना खाने के तुरंत बाद लेटना चाहिए?

भोजन के बाद तुरंत बिस्तर पर लेटने के बजाय कुछ समय सामान्य रूप से सक्रिय रहना बेहतर विकल्प हो सकता है। खासकर जिन लोगों को खाना खाने के बाद भारीपन या एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है, उन्हें भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचने की सलाह दी जाती है।

ध्यान रखें: भोजन के बाद 10 मिनट की वॉक एक आसान और कम मेहनत वाली स्वस्थ आदत हो सकती है, लेकिन यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है। अगर आपको डायबिटीज या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी स्थिति के अनुसार शारीरिक गतिविधि की सलाह डॉक्टर से लेना बेहतर है।