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अभिषेक बच्चन के साथ राहुल द्रविड़ और स्टीव वॉ क्यों पहुंचे नीदरलैंड्स? सामने आया खास कनेक्शन

नई दिल्ली: 2026 पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान भारत और नीदरलैंड्स के बीच खेले गए मुकाबले में बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन भी स्टेडियम में मौजूद रहे। शनिवार को नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन स्थित वैगनर हॉकी स्टेडियम में हुए इस मुकाबले को देखने के लिए अभिषेक के साथ क्रिकेट की दुनिया के दो बड़े नाम राहुल द्रविड़ और स्टीव वॉ भी पहुंचे थे।

तीनों की मौजूदगी ने फैंस का ध्यान खींचा। हालांकि, उनका नीदरलैंड्स पहुंचना सिर्फ हॉकी मुकाबले से जुड़ा नहीं था। इसके पीछे क्रिकेट से जुड़ी एक खास वजह भी थी।

यूरोपीय टी20 लीग से जुड़ा है कनेक्शन

अभिषेक बच्चन, राहुल द्रविड़ और स्टीव वॉ इन दिनों नीदरलैंड्स में यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग 2026 से जुड़े कार्यक्रमों के सिलसिले में पहुंचे हैं।

इस क्रिकेट लीग का उद्देश्य यूरोप में क्रिकेट को लोकप्रिय बनाना और वहां इस खेल को मजबूत आधार देना है। अभिषेक बच्चन इस प्रतियोगिता से बतौर सह-मालिक जुड़े हुए हैं।

लीग का आयोजन 26 अगस्त से शुरू होने वाला है। टूर्नामेंट का पहला मुकाबला रॉटरडैम डॉकर्स और एम्स्टर्डम फ्लेम्स के बीच खेला जाएगा। प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला 20 सितंबर को प्रस्तावित है।

इसी दौरान तीनों दिग्गजों ने हॉकी वर्ल्ड कप का मुकाबला देखने के लिए स्टेडियम का रुख किया।

भारत को नीदरलैंड्स ने 3-1 से हराया

हॉकी वर्ल्ड कप में भारत और मेजबान नीदरलैंड्स के बीच मुकाबला काफी अहम माना जा रहा था। सेमीफाइनल की दौड़ में आगे बढ़ने के लिहाज से टीम इंडिया के लिए यह मैच महत्वपूर्ण था।

हालांकि, भारतीय टीम को मुकाबले में 3-1 से हार का सामना करना पड़ा। शुरुआती दो क्वार्टर में दोनों टीमों की ओर से कोई गोल नहीं हुआ और मुकाबला बराबरी पर रहा।

तीसरे क्वार्टर में नीदरलैंड्स ने गोल करके बढ़त हासिल की। इसके बाद आखिरी क्वार्टर में मेजबान टीम ने दो और गोल दागकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली।

भारत की ओर से कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने 52वें मिनट में गोल किया, लेकिन यह टीम को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।

हार के बाद अभिषेक ने टीम का बढ़ाया हौसला

मुकाबले के बाद अभिषेक बच्चन ने भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह टीम के लिए अच्छा दिन नहीं रहा, लेकिन खिलाड़ियों ने पूरी कोशिश की।

अभिषेक ने नीदरलैंड्स को जीत की बधाई देते हुए भारतीय टीम पर गर्व जताया। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कप्तान हरमनप्रीत सिंह से बातचीत की थी।

अभिनेता के मुताबिक, टीम में कुछ खिलाड़ियों को चोट की समस्या भी हुई, जिसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा। इसके बावजूद हरमनप्रीत ने गोल करके टीम को मुकाबले में वापस लाने की कोशिश की।

पहली बार हॉकी वर्ल्ड कप का मुकाबला देखने पहुंचे अभिषेक

अभिषेक बच्चन ने बताया कि वह पहली बार हॉकी वर्ल्ड कप का मुकाबला देखने के लिए स्टेडियम पहुंचे थे। उन्होंने इस अनुभव को रोमांचक बताया।

अभिषेक का हॉकी के प्रति जुड़ाव पहले भी देखने को मिला है और खेलों में उनकी दिलचस्पी किसी से छिपी नहीं है। लेकिन इस बार उनकी स्टेडियम मौजूदगी इसलिए भी खास रही क्योंकि उनके साथ भारतीय क्रिकेट के दिग्गज राहुल द्रविड़ और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ भी मौजूद थे।

हॉकी वर्ल्ड कप के बीच इन क्रिकेट और बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी ने खेल प्रेमियों के बीच काफी चर्चा बटोरी।

Health News:बार-बार पेशाब रोकने की आदत पड़ सकती है भारी, शरीर में हो सकती हैं ये परेशानियां

कई बार काम की व्यस्तता, लंबा सफर, स्कूल-कॉलेज या आसपास साफ-सुथरा टॉयलेट उपलब्ध न होने के कारण लोग पेशाब की इच्छा को कुछ समय के लिए टाल देते हैं। कभी-कभार ऐसा होना आम है, लेकिन अगर लंबे समय तक पेशाब रोकना रोजमर्रा की आदत बन जाए तो यूरिनरी सिस्टम पर इसका असर पड़ सकता है।

पेशाब शरीर से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने का प्राकृतिक तरीका है। किडनी खून को फिल्टर करके पेशाब बनाती है, जो ब्लैडर में जमा होता है। जब ब्लैडर भरने लगता है तो शरीर टॉयलेट जाने का संकेत देता है। इस संकेत को बार-बार नजरअंदाज करना सही आदत नहीं मानी जाती।

UTI का बढ़ सकता है जोखिम

लगातार पेशाब रोकने से ब्लैडर में पेशाब ज्यादा समय तक जमा रह सकता है। कुछ परिस्थितियों में इससे बैक्टीरिया के बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI का खतरा बढ़ सकता है।

UTI होने पर पेशाब करते समय जलन, दर्द, बार-बार पेशाब आने की इच्छा, निचले पेट में असहजता या पेशाब के दौरान परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

ब्लैडर पर पड़ सकता है दबाव

पेशाब को लंबे समय तक रोकने पर ब्लैडर जरूरत से ज्यादा फैल सकता है। अगर कोई व्यक्ति लगातार पेशाब की इच्छा को दबाता रहे, तो कुछ मामलों में ब्लैडर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।

इससे भविष्य में पेशाब करने के तरीके या ब्लैडर को पूरी तरह खाली करने में परेशानी महसूस हो सकती है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है।

ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का एहसास

कुछ लोगों को पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस हो सकता है कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है। इसके बाद थोड़ी देर में दोबारा पेशाब की इच्छा हो सकती है या टॉयलेट जाने के बावजूद पर्याप्त पेशाब न निकलने की शिकायत हो सकती है।

अगर ऐसी समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे केवल पेशाब रोकने की आदत से जोड़कर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके पीछे अन्य यूरिनरी समस्याएं भी हो सकती हैं।

पानी कम पीना समाधान नहीं

कुछ लोग बार-बार टॉयलेट जाने से बचने के लिए पानी कम पीने लगते हैं। ऐसा करना सही तरीका नहीं है। शरीर को अपनी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त पानी मिलना जरूरी है।

जब पेशाब की इच्छा हो तो संभव हो तो ज्यादा देर तक रोकने के बजाय समय पर टॉयलेट जाना बेहतर है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

अगर पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द, पेशाब में खून, पेशाब करने में लगातार परेशानी, तेज पेट या कमर दर्द या बार-बार UTI जैसी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

ध्यान रखें: कभी-कभार पेशाब रोक लेना आमतौर पर बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन इसे नियमित आदत बनाना ठीक नहीं है। शरीर के प्राकृतिक संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर टॉयलेट जाना बेहतर है।

गाजा में ताजा इजरायली हमले में दो की मौत, 4 साल का बच्चा भी शामिल; 7 लोग घायल

गाजा में युद्धविराम के बावजूद हिंसा पूरी तरह थमती नजर नहीं आ रही है। ताजा हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि सात अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में एक चार साल का बच्चा भी शामिल है।

फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, मध्य गाजा के अलग-अलग इलाकों में हमले हुए। स्थानीय लोगों ने बताया कि जवायदा इलाके में एक इमारत को निशाना बनाया गया, जिससे आसपास के क्षेत्र में मलबा फैल गया। राहत एवं स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, मलबे और छर्रों की चपेट में आने से कई लोग घायल हुए।

घायलों में चार वर्षीय मोहम्मद अब्देल सलाम ताहा भी शामिल था। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

नुसेइरात शरणार्थी शिविर में भी हमला

गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों ने नुसेइरात शरणार्थी शिविर में एक अन्य हवाई हमले की जानकारी भी दी है। ताजा घटनाओं के बाद इलाके में रहने वाले लोगों के बीच डर और चिंता का माहौल बना हुआ है।

विस्थापित फिलिस्तीनियों का कहना है कि जमीन पर उन्हें युद्धविराम का प्रभाव महसूस नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि आम लोग संघर्ष खत्म होने और सुरक्षित माहौल में सामान्य जिंदगी जीने की उम्मीद कर रहे हैं।

युद्धविराम के बावजूद जारी हैं हमले

गाजा में युद्धविराम के बाद भी इजरायली सैन्य कार्रवाई पूरी तरह बंद नहीं हुई है। इजरायली सेना का कहना है कि उसके अभियान का उद्देश्य हमास और अन्य सशस्त्र समूहों से जुड़े खतरों को रोकना है।

वहीं, फिलिस्तीनी पक्ष लगातार इन कार्रवाइयों को युद्धविराम का उल्लंघन बता रहा है। ताजा हमलों ने संघर्ष समाप्त करने की कोशिशों और युद्धविराम की प्रभावशीलता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इजरायली सेना ने हमास नेता को मारने का दावा किया

इजरायली सेना ने दावा किया है कि उसने देर अल-बलाह इलाके में हमास के वरिष्ठ सदस्य शरीफ अल हसनत को निशाना बनाकर मार गिराया है। सेना के मुताबिक, वह हमास के भूमिगत ढांचे को दोबारा मजबूत करने की कोशिशों में शामिल था।

दूसरी ओर, हमास का आरोप है कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा में संघर्ष खत्म करने की योजना को नुकसान पहुंचा रही है। इस योजना में इजरायली सैनिकों की वापसी और हमास के निरस्त्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल हैं।

गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद से भी बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों की जान गई है। दूसरी तरफ इजरायल ने अपने सैनिकों के मारे जाने की जानकारी दी है।

वेस्ट बैंक में भी तनाव बरकरार

गाजा के साथ-साथ वेस्ट बैंक में भी हिंसा और जमीन से जुड़े विवाद लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। इस क्षेत्र में करीब 30 लाख फिलिस्तीनी और लगभग 5 लाख इजरायली बस्तियों में रहने वाले लोग हैं।

संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानती हैं। हालांकि, इजरायल इस दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं करता और क्षेत्र के साथ अपने ऐतिहासिक व धार्मिक संबंधों का हवाला देता रहा है।

गाजा में ताजा घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि युद्धविराम को प्रभावी बनाने और लंबे समय तक शांति कायम करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

गिनी में कचरे का पहाड़ भरभराकर गिरा, 22 लोगों की मौत; मलबे में जिंदगी की तलाश जारी

कोनाक्री: गिनी की राजधानी कोनाक्री में रविवार तड़के हुए एक बड़े भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी। शहर के दार एस सलाम इलाके में स्थित एक बड़े कचरा डंपिंग स्थल का हिस्सा अचानक धंस गया, जिसकी चपेट में आसपास बने कई अस्थायी घर आ गए। हादसे में कम से कम 22 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।

घटना के बाद राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी और लोग दबे हो सकते हैं।

तेज बारिश के बाद धंसा कचरे का पहाड़

बताया जा रहा है कि हादसा रविवार सुबह करीब 3 बजे हुआ। उस समय कोनाक्री में तेज बारिश हो रही थी। बारिश के कारण लैंडफिल में जमा कचरे का विशाल ढेर अस्थिर हो गया और उसका एक बड़ा हिस्सा नीचे की ओर खिसक गया।

कचरे और मिट्टी के साथ मलबा आसपास के इलाके में फैल गया। लैंडफिल के पास बनी झोपड़ियां और दूसरे अस्थायी ठिकाने इसकी चपेट में आ गए। अचानक हुई इस घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

मलबे में अभी भी लोगों की तलाश

हादसे की सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंच गए। राहतकर्मी मलबे को हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। बचाव अभियान के दौरान स्थानीय लोग भी राहत टीमों की मदद कर रहे हैं।

हादसे से पहले बंद होना था लैंडफिल

इस घटना से जुड़ी एक अहम जानकारी भी सामने आई है। सैनिटेशन अधिकारियों के मुताबिक, दार एस सलाम का यह लैंडफिल रविवार को ही बंद किया जाना प्रस्तावित था।

इलाके में रहने वाले लोगों को पहले ही वहां से हटने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद कई परिवार अपने ठिकाने छोड़कर दूसरी जगह चले भी गए थे। हालांकि, हादसे के वक्त भी बड़ी संख्या में लोग लैंडफिल के आसपास रह रहे थे।

बाकी परिवारों को सुरक्षित जगह ले जाने की तैयारी

हादसे के बाद प्रशासन ने लैंडफिल के आसपास रहने वाले बाकी परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की बात कही है।

गिनी के क्षेत्रीय प्रशासन एवं विकेंद्रीकरण मंत्रालय की मंत्री डिएनाबू टुरे ने घटनास्थल का दौरा किया और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का भरोसा दिया।

प्रशासन का कहना है कि इलाके में अब बचे हुए परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी और उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

लैंडफिल के आसपास रहना बना बड़ा खतरा

दार एस सलाम में लंबे समय से कचरा जमा होने के कारण यहां बड़ी मात्रा में कचरे का ढेर बन गया था। इसके आसपास रहने वाले परिवारों के लिए यह इलाका पहले से ही जोखिम वाला माना जाता था।

भारी बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया और आखिरकार कचरे का बड़ा हिस्सा खिसकने से यह दर्दनाक हादसा हो गया। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और प्रशासन मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश में जुटा हुआ है।

Health Update:डायबिटीज और मोटापा बढ़ा रहे भारत की चिंता, चीन के मुकाबले कैसी है स्थिति?

भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच लगातार बेहतर हो रही है। प्राथमिक स्तर पर इलाज की व्यवस्था मजबूत हुई है और स्वास्थ्य बीमा का दायरा भी पहले के मुकाबले बढ़ा है। इसके बावजूद मधुमेह, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गैर-संचारी बीमारियां देश के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतों में बदलाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता वजन इन बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में समय रहते बीमारी की पहचान और उसकी रोकथाम पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है।

भारत में तेजी से बढ़ रहा डायबिटीज का बोझ

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में पुरुषों और महिलाओं दोनों में मधुमेह का प्रसार बढ़ा है। 2015-16 की तुलना में 2019-21 से 2022-24 के बीच पुरुषों में यह आंकड़ा करीब 15.6 प्रतिशत से बढ़कर 20.9 प्रतिशत हो गया।

इसी अवधि में महिलाओं में मधुमेह का स्तर 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव केवल स्वास्थ्य से जुड़ा आंकड़ा नहीं है, बल्कि देश में बदलती जीवनशैली की ओर भी संकेत करता है।

कम शारीरिक मेहनत, असंतुलित खानपान, बढ़ता वजन और शहरी जीवनशैली मधुमेह के खतरे को बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं।

बढ़ते वजन ने भी बढ़ाई चिंता

भारत में डायबिटीज के साथ अधिक वजन और मोटापे की समस्या भी तेजी से सामने आ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं में अधिक वजन और मोटापे का स्तर 24 प्रतिशत से बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गया है।

वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.3 प्रतिशत तक पहुंचा है। इससे पता चलता है कि मोटापा अब केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।

मोटापे में चीन की स्थिति कैसी है?

वयस्क मोटापे के कुछ आंकड़ों की तुलना करें तो चीन की स्थिति भारत से अधिक दिखाई देती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चीन में वयस्क मोटापे का स्तर करीब 8.3 प्रतिशत, जबकि भारत में लगभग 7.3 प्रतिशत बताया गया है।

हालांकि, भारत का आंकड़ा चीन से थोड़ा कम है, लेकिन देश में बढ़ते मोटापे की रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है। अधिक वजन और मोटापा आगे चलकर डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर में भी चुनौती

उच्च रक्तचाप के आंकड़ों में भारत में पुरुषों और महिलाओं के बीच अलग-अलग रुझान देखने को मिले हैं।

पुरुषों में हाई ब्लड प्रेशर का स्तर करीब 21.3 प्रतिशत से बढ़कर 22.1 प्रतिशत हुआ, जबकि महिलाओं में यह 24 प्रतिशत से घटकर 19.4 प्रतिशत बताया गया है।

भारत की तुलना में चीन में मोटापे और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा बोझ कई परिस्थितियों में अधिक दिखाई देता है। इसके बावजूद भारत में इन बीमारियों का बढ़ता प्रभाव स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।

इलाज से ज्यादा जरूरी बीमारी की रोकथाम

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि बीमारी को शुरुआती स्तर पर रोकना भी है। इसके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच को बढ़ावा देना जरूरी है।

समय-समय पर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन की जांच, संतुलित खानपान, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2024 के अंत तक भारत में 1.7 करोड़ से अधिक हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज मरीज उपचार व्यवस्था से जुड़े थे। हालांकि, लंबे समय तक नियमित देखभाल और बीमारी की प्रभावी निगरानी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

भारत और चीन दोनों के सामने चुनौती

भारत और चीन दोनों ही गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ से जूझ रहे हैं। चीन में कुछ जोखिम कारकों का स्तर भारत से ज्यादा है, लेकिन भारत में डायबिटीज और अधिक वजन से जुड़ी स्थिति तेजी से बदल रही है।

ऐसे में बीमारी गंभीर रूप लेने के बाद इलाज कराने के बजाय शुरुआत से ही सावधानी बरतना ज्यादा जरूरी है। बेहतर खानपान, नियमित व्यायाम, वजन पर नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना आने वाले समय में बीमारी के बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।