भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच लगातार बेहतर हो रही है। प्राथमिक स्तर पर इलाज की व्यवस्था मजबूत हुई है और स्वास्थ्य बीमा का दायरा भी पहले के मुकाबले बढ़ा है। इसके बावजूद मधुमेह, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गैर-संचारी बीमारियां देश के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतों में बदलाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता वजन इन बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में समय रहते बीमारी की पहचान और उसकी रोकथाम पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा डायबिटीज का बोझ
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में पुरुषों और महिलाओं दोनों में मधुमेह का प्रसार बढ़ा है। 2015-16 की तुलना में 2019-21 से 2022-24 के बीच पुरुषों में यह आंकड़ा करीब 15.6 प्रतिशत से बढ़कर 20.9 प्रतिशत हो गया।
इसी अवधि में महिलाओं में मधुमेह का स्तर 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव केवल स्वास्थ्य से जुड़ा आंकड़ा नहीं है, बल्कि देश में बदलती जीवनशैली की ओर भी संकेत करता है।
कम शारीरिक मेहनत, असंतुलित खानपान, बढ़ता वजन और शहरी जीवनशैली मधुमेह के खतरे को बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं।
बढ़ते वजन ने भी बढ़ाई चिंता
भारत में डायबिटीज के साथ अधिक वजन और मोटापे की समस्या भी तेजी से सामने आ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं में अधिक वजन और मोटापे का स्तर 24 प्रतिशत से बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गया है।
वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.3 प्रतिशत तक पहुंचा है। इससे पता चलता है कि मोटापा अब केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।
मोटापे में चीन की स्थिति कैसी है?
वयस्क मोटापे के कुछ आंकड़ों की तुलना करें तो चीन की स्थिति भारत से अधिक दिखाई देती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चीन में वयस्क मोटापे का स्तर करीब 8.3 प्रतिशत, जबकि भारत में लगभग 7.3 प्रतिशत बताया गया है।
हालांकि, भारत का आंकड़ा चीन से थोड़ा कम है, लेकिन देश में बढ़ते मोटापे की रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है। अधिक वजन और मोटापा आगे चलकर डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर में भी चुनौती
उच्च रक्तचाप के आंकड़ों में भारत में पुरुषों और महिलाओं के बीच अलग-अलग रुझान देखने को मिले हैं।
पुरुषों में हाई ब्लड प्रेशर का स्तर करीब 21.3 प्रतिशत से बढ़कर 22.1 प्रतिशत हुआ, जबकि महिलाओं में यह 24 प्रतिशत से घटकर 19.4 प्रतिशत बताया गया है।
भारत की तुलना में चीन में मोटापे और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा बोझ कई परिस्थितियों में अधिक दिखाई देता है। इसके बावजूद भारत में इन बीमारियों का बढ़ता प्रभाव स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
इलाज से ज्यादा जरूरी बीमारी की रोकथाम
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि बीमारी को शुरुआती स्तर पर रोकना भी है। इसके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच को बढ़ावा देना जरूरी है।
समय-समय पर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन की जांच, संतुलित खानपान, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2024 के अंत तक भारत में 1.7 करोड़ से अधिक हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज मरीज उपचार व्यवस्था से जुड़े थे। हालांकि, लंबे समय तक नियमित देखभाल और बीमारी की प्रभावी निगरानी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारत और चीन दोनों के सामने चुनौती
भारत और चीन दोनों ही गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ से जूझ रहे हैं। चीन में कुछ जोखिम कारकों का स्तर भारत से ज्यादा है, लेकिन भारत में डायबिटीज और अधिक वजन से जुड़ी स्थिति तेजी से बदल रही है।
ऐसे में बीमारी गंभीर रूप लेने के बाद इलाज कराने के बजाय शुरुआत से ही सावधानी बरतना ज्यादा जरूरी है। बेहतर खानपान, नियमित व्यायाम, वजन पर नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना आने वाले समय में बीमारी के बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।


































