जौनपुर/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय असलहा तस्करी में संलिप्त शातिर अपराधी देवा प्रजापति को गिरफ्तार किया है। देवा प्रजापति पर आरोप है कि वह महाराष्ट्र के तस्करों को उत्तर प्रदेश से अवैध हथियारों की सप्लाई करता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कई अहम खुलासे किए हैं।
मामले का पंजीकरण और प्रारंभिक जांच
थाना वसई, जिला थाणे (महाराष्ट्र) में 24 जुलाई 2024 को पंजीकृत केस संख्या 174/2024 के तहत धारा 3/25(1)(बी) आर्म्स एक्ट और 37(1)/135 महाराष्ट्र पुलिस एक्ट के अंतर्गत अवैध हथियार तस्करी का मामला दर्ज किया गया था। इस केस में गिरोह का एक अन्य सदस्य, जावेद खान, मीरा-भयंदर वसई-विरार पुलिस द्वारा पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। जावेद खान की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में यह जानकारी सामने आई थी कि उत्तर प्रदेश से देवा प्रजापति नाम का व्यक्ति महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों में असलहा तस्करी कर रहा है।
गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण
नाम: देवा प्रजापति
पिता का नाम: अजय प्रजापति
पता: नेवादा मुफलिसपुर, थाना बदलापुर, जिला जौनपुर, उत्तर प्रदेश
गिरफ्तारी का स्थान: उसरा बाजार के पास, थाना बदलापुर, जनपद जौनपुर
गिरफ्तारी की तिथि: 27 अक्टूबर 2024
बरामदगी:
एक 9 एमएम पिस्टल
दो जिंदा कारतूस (9 एमएम)
एक मोबाइल फोन
गिरफ्तारी की कार्यवाही
महाराष्ट्र पुलिस की अपील पर उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा इस मामले में तेजी से कार्रवाई की गई। इसके लिए एसटीएफ वाराणसी इकाई के निरीक्षक अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। एसटीएफ को जौनपुर में विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली कि वांछित असलहा तस्कर देवा प्रजापति उसरा बाजार इलाके में मौजूद है। सूचना मिलते ही एसटीएफ और मीरा-भयंदर वसई-विरार पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके में पहुंचकर देवा प्रजापति को धर दबोचा। उसके पास से एक 9 एमएम पिस्टल, दो जिंदा कारतूस, और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया।
देवा प्रजापति का असलहा तस्करी नेटवर्क
पूछताछ के दौरान देवा प्रजापति ने बताया कि उसका एक व्यापक असलहा तस्करी नेटवर्क है। वह उत्तर प्रदेश के जौनपुर के स्थानीय तस्करों के साथ मिलकर महाराष्ट्र में हथियारों की सप्लाई करता था। इस गिरोह में नीरज मौर्या, अमित निषाद और दीपक निषाद सहित अन्य लोग शामिल थे, जो जौनपुर और आस-पास के जिलों से असलहा खरीदकर महाराष्ट्र भेजते थे। देवा प्रजापति ने बताया कि वे प्रति असलहा 50-60 हजार रुपये में महाराष्ट्र के तस्करों को बेचते थे। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह पहले भी कई बार मुम्बई में असलहा सप्लाई कर चुका है।
पहले से गिरोह के अन्य सदस्य गिरफ्तार
देवा प्रजापति की गिरफ्तारी से पहले, इस गिरोह के अन्य सदस्य भी महाराष्ट्र पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं। इनमें गिरोह का एक महत्वपूर्ण सदस्य, जावेद खान, भी शामिल है, जिसे जुलाई में गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में आठ अन्य असलहों के साथ गिरोह के पांच सदस्यों को भी गिरफ्तार किया है।
अगली कार्यवाही और ट्रांजिट रिमांड
देवा प्रजापति को जौनपुर की अदालत में प्रस्तुत कर ट्रांजिट रिमांड की विधिक कार्यवाही शुरू की गई है, ताकि उसे महाराष्ट्र पुलिस को सौंपा जा सके। इस मामले में एसटीएफ ने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया और महाराष्ट्र पुलिस के साथ मिलकर एक बड़े तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये, आवास, बच्चों की निःशुल्क शिक्षा व शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने का दिया निर्देश
बीकेटी विधायक योगेश शुक्ल व पार्षद शैलेंद्र वर्मा संग मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे परिवारीजन
सीएम से मुलाकात के बाद संतुष्ट हुए परिजन, सीएम ने दिया आश्वासन- जांच के बाद दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई
लखनऊ, 28 अक्टूबर 2024: पुलिस कस्टडी में कारोबारी मोहित पांडेय की मौत के बाद सोमवार को उनके परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से अपना दर्द बयां किया। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये, आवास, बच्चों की निःशुल्क शिक्षा व शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने का निर्देश दिया। सीएम योगी ने पीड़ित परिवारीजनों को आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। किसी भी सूरत में दोषी बख्शे नहीं जाएंगे।
सीएम ने पीड़ित परिवार को दी दस लाख रुपये की आर्थिक मदद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर सोमवार सुबह मोहित पांडेय की मां तपेश्वरी देवी, पत्नी व बच्चे पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष अपना दर्द रखा। सीएम ने मोहित के परिजनों को दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। साथ ही आवास, बच्चों की निःशुल्क शिक्षा समेत शासन की समस्त योजनाओं का लाभ दिलाने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री से मिलकर संतुष्ट हुए मोहित के परिजन
सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के उपरांत कारोबारी स्मृतिशेष मोहित पांडेय के परिजन संतुष्ट दिखे। मोहित की मां तपेश्वरी देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी से मिलकर हम संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं होगी। जांच के उपरांत जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। मुलाकात के दौरान बख्शी का तालाब विधायक योगेश कुमार शुक्ल, पार्षद शैलेंद्र वर्मा भी मौजूद रहे।
लखनऊ/नई दिल्ली: भारत में दिवाली और अन्य प्रमुख त्योहारों के दौरान पटाखों का उपयोग पारंपरिक रूप से एक उत्सव का हिस्सा रहा है। पॉप पटाखे, जो छोटे और हल्के होते हैं, देश में सबसे अधिक बिकने वाले पटाखों में शामिल हैं। इनकी सरल डिजाइन और सस्ती कीमत ने इन्हें बच्चों और युवाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया है। मुख्य रूप से तमिलनाडु के शिवकाशी में इनका उत्पादन किया जाता है, जहां लगभग 90% पटाखों का निर्माण होता है। इस खबर में हम पॉप पटाखों की कीमत, निर्माण प्रक्रिया, उत्पादन का महत्व, और शेयर बाजार पर इसके प्रभाव के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत विवरण देंगे।
1. पॉप पटाखों की विशेषताएँ और कीमत पॉप पटाखे छोटे कागज के पैकेट होते हैं, जिनमें बारूद या फुलझड़ी पाउडर भरा होता है। इन्हें जमीन पर फेंकने पर हल्की आवाज होती है और कभी-कभी इनमें छोटी चमक भी होती है। अन्य पटाखों की तुलना में ये बहुत कम प्रदूषणकारी होते हैं और इनकी आवाज भी हल्की होती है, इसलिए ये बच्चों और कुछ स्थानों पर पटाखा प्रतिबंधों वाले क्षेत्रों में भी स्वीकार्य हैं।
इनकी कीमत आमतौर पर ₹10 से ₹50 तक होती है, जो कि इसके ब्रांड, गुणवत्ता, और पैकेजिंग पर निर्भर करती है। बड़े पैकेट या अधिक ब्रांडेड कंपनियों के उत्पाद की कीमत थोड़ी अधिक हो सकती है। दिवाली के दौरान मांग में वृद्धि होने पर इनकी कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, लेकिन सामान्यत: ये किफायती होते हैं।
2. शिवकाशी: भारत का पटाखा उत्पादन केंद्र तमिलनाडु का शिवकाशी शहर भारत में पटाखों के निर्माण का केंद्र है, जहाँ से देश के 90% से अधिक पटाखों की आपूर्ति होती है। यह शहर भारत का सबसे बड़ा पटाखा उत्पादन केंद्र है, और इसकी पहचान ‘पायरो टेक्निक्स का हब’ के रूप में की जाती है। शिवकाशी में पटाखा उद्योग लगभग एक शताब्दी पुराना है और यहां हजारों कारखाने स्थित हैं।
यहां पटाखा उत्पादन का क्षेत्रीय महत्व भी है, क्योंकि शिवकाशी में पटाखा उद्योग के साथ-साथ फुलझड़ी, रॉकेट, और अन्य प्रकार के आतिशबाजी उत्पाद भी बनाए जाते हैं। इन उत्पादों का बाजार न केवल स्थानीय है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तारित है।
3. पॉप पटाखों का निर्माण प्रक्रिया पॉप पटाखों का निर्माण एक विशेष प्रक्रिया के तहत किया जाता है। इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से निम्नलिखित चरण शामिल हैं:
रसायनों का मिश्रण: पॉप पटाखों में बारूद या फुलझड़ी पाउडर का उपयोग किया जाता है। इसे सावधानी से मिक्स किया जाता है ताकि यह सुरक्षित रूप से छोटे पैकेटों में भरने के लिए तैयार हो सके। इस मिश्रण में सल्फर, नाइट्रेट, और कार्बन जैसे रसायन शामिल होते हैं।
पाउच में भराई: पॉप पटाखों के छोटे कागजी पाउच बनाए जाते हैं, जिनमें बारूद का यह मिश्रण भरा जाता है। यह काम कुशल कामगारों द्वारा सावधानीपूर्वक किया जाता है ताकि विस्फोट या दुर्घटना की संभावना न हो।
पैकेजिंग: पॉप पटाखों के पाउच को छोटे-छोटे पैकेटों में रखा जाता है। इन पैकेटों में अक्सर आकर्षक पैकेजिंग होती है, जो उपभोक्ताओं को आकर्षित करने में मदद करती है।
शिवकाशी में इस काम में हजारों कुशल कारीगर और श्रमिक कार्यरत हैं, जो कि सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इन उत्पादों का निर्माण करते हैं। पॉप पटाखे छोटे, हल्के और सुरक्षित होते हैं, जो बच्चों के लिए उपयुक्त होते हैं, और इसके कारण इनकी मांग हमेशा बनी रहती है।
4. दिवाली और अन्य त्योहारों के समय मांग में वृद्धि भारत में दिवाली का त्योहार पटाखों का प्रमुख सीजन है। इस समय पॉप पटाखों की मांग में भारी वृद्धि होती है, क्योंकि लोग त्योहारों पर खुशियों का इज़हार करने के लिए पटाखों का उपयोग करते हैं। इस दौरान शिवकाशी में पटाखा उत्पादन कारखानों में दिन-रात काम होता है और पूरा माहौल उत्सवपूर्ण हो जाता है।
दिवाली के समय पॉप पटाखों की उच्च मांग से न केवल छोटे व्यापारियों को लाभ होता है, बल्कि अन्य उद्योगों, जैसे कि कागज, रसायन, और पैकेजिंग कंपनियों को भी बढ़ावा मिलता है। इस समय पर हुई बिक्री का असर शेयर बाजार पर भी देखा जाता है। इस मांग के कारण कच्चे माल की मांग बढ़ती है और उन उद्योगों में निवेश में तेजी आती है।
5. शेयर बाजार पर पॉप पटाखों का प्रभाव पटाखों की उच्च मांग का प्रभाव शेयर बाजार में रसायन, पेपर, और पैकेजिंग क्षेत्र की कंपनियों पर सकारात्मक रूप से पड़ता है। जिन कंपनियों का कारोबार रसायन, बारूद और अन्य कच्चे माल पर निर्भर करता है, उन्हें इस सीजन में अच्छी वृद्धि देखने को मिलती है। उदाहरण के लिए, हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बन जैसी कंपनियां, जो विभिन्न रसायनों का उत्पादन करती हैं, को इस दौरान लाभ होता है।
इसके अलावा, पेपर और पैकेजिंग कंपनियां भी इस समय अपने शेयर में वृद्धि देखती हैं क्योंकि पटाखों की पैकेजिंग में कागज का व्यापक उपयोग होता है। दिवाली के दौरान इन उद्योगों की मांग में वृद्धि के कारण इन कंपनियों के शेयर मूल्य में वृद्धि होती है, जो निवेशकों के लिए लाभकारी साबित होती है।
6. पर्यावरणीय प्रभाव और ग्रीन पटाखों की बढ़ती मांग हालांकि पॉप पटाखे अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम प्रदूषणकारी होते हैं, लेकिन अन्य पटाखों की तरह इनमें भी प्रदूषण की समस्या बनी रहती है। पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ने के साथ ही सरकार ने कई राज्यों में पटाखों पर प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम विशेषकर दिल्ली, मुंबई, और अन्य बड़े शहरों में प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए हैं।
वर्तमान में ग्रीन पटाखों का विकल्प सामने आया है, जो पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30-40% कम प्रदूषण करते हैं। शिवकाशी में भी ग्रीन पटाखों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे इस उद्योग को नए तरीके से बढ़ावा दिया जा सके।
ग्रीन पटाखों के बढ़ते रुझान से प्रदूषण में कमी लाने में मदद मिल रही है, लेकिन पारंपरिक पटाखा उद्योग के छोटे और मध्यम उद्योगों को इसका नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई कामगारों और कारीगरों की आजीविका पटाखा उत्पादन पर निर्भर करती है, और इन पर प्रतिबंध से इनका रोजगार प्रभावित होता है।
7. सरकार द्वारा सुरक्षा और नियामक उपाय सरकार ने पटाखों के निर्माण और बिक्री पर कई सुरक्षा और नियामक उपाय लागू किए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी दिल्ली और NCR क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के सुरक्षा मानकों के अनुसार पटाखों का निर्माण करना अनिवार्य है।
इसके अतिरिक्त, कई राज्य सरकारों ने दुकानों और गोदामों में सुरक्षित पटाखा भंडारण की प्रक्रिया के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन सभी नियमों का पालन करने से उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और प्रदूषणमुक्त बनती है।
8. पॉप पटाखों के उत्पादन का आर्थिक योगदान भारत में पॉप पटाखों का उत्पादन अर्थव्यवस्था में योगदान देता है, विशेषकर तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में। शिवकाशी जैसे छोटे शहरों में पटाखा उद्योग ने हज़ारों लोगों को रोजगार प्रदान किया है। इससे जुड़े कुशल कारीगरों, कामगारों, और छोटे व्यापारियों के लिए यह मुख्य आय का स्रोत है।
भारत में पॉप पटाखों का उत्पादन, उनकी कीमत, निर्माण प्रक्रिया और शेयर बाजार पर प्रभाव दिखाता है कि यह उद्योग न केवल देश की सांस्कृतिक विरासत में शामिल है बल्कि आर्थिक योगदान भी करता है। दिवाली के समय इसकी मांग में वृद्धि से विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। ग्रीन पटाखों की बढ़ती मांग और पर्यावरणीय जागरूकता के कारण इस उद्योग में बदलाव हो रहे हैं, लेकिन इसे नई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है
भारत में पटाखा उद्योग के समक्ष सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के अवसर बनाए रखने के लिए आवश्यक नियामक बदलावों की आवश्यकता है। इस उद्योग की वृद्धि और इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, सरकार और संबंधित अधिकारियों को इसके विकास और पर्यावरणीय प्रभाव को संतुलित करना होगा।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने 4 मेधावियों को बांटी साइकिल, मेधावी सम्मान पाकर दूसरों को कर रहे हैं प्रेरित
सौसीर खेड़ा में आयोजित हुआ 93वाँ “आपके विधायक-आपके द्वार” जनसुनवाई शिविर, विधायक की टीम ने जानीं ग्रामीणों की समस्याएं
डॉ. राजेश्वर सिंह ने सौसीर खेड़ा में 47वाँ गर्ल्स यूथ क्लब स्थापित करवाकर उपलब्ध कराया खेल संसाधन, कहा खिलाड़ी होते हैं देश के सर्वश्रेष्ठ नागरिक
लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा निरंतर संचालित ‘आपका विधायक-आपके द्वार’ जनसुनवाई शिविर आयोजन की पहल समर्पण, विश्वास और जनसेवा की अनोखी मिसाल बन गई है। इसी क्रम में रविवार को 93 वें आपका विधायक-आपके द्वार जनसुनवाई शिविर के अंतर्गत विधायक की टीम ग्राम पंचायत परवर पूरब के सौसीर खेड़ा पहुंची।
गांववासियों के साथ विधायक की टीम ने संवाद किया और उनकी समस्याएं जानीं, ग्रामीणों ने स्ट्रीट लाइट के 47 आवेदन, विधवा पेंशन के 4 आवेदन, आवास योजना के 4 आवेदन सहित कुल 73 सुझावों, आवश्यकताओं से अवगत कराया। गांववासियों द्वारा प्राप्त सभी 73 जनसमस्याओं का गंभीरतापूर्वक अवलोकन कर उनके प्रभावी निस्तारण का प्रयास किया गया, शिकायतकर्ताओं के घर जाकर वस्तुस्थिति का अवलोकन किया गया।
मेधावियों को सम्मानित करने से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, अन्य शिक्षार्थियों को परिश्रम की प्रेरणा मिलती है, सौसीर खेड़ा गांव के 4 मेधावियों, हाईस्कूल परीक्षा में 81.33% अंक पाने वाली आस्था पाल तथा इंटरमीडिएट परीक्षा में 72.4% अंक पाने वाली श्रद्धा पाल, 70.8% अंक पाने वाले सर्वेश कुमार एवं अजय कुमार को साइकिल प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ गांव के प्रबुद्ध नागरिक सुरेश, पंचम, राम आसरे, श्रीराम, प्रेम चंद्र मिश्रा, अनिल तिवारी, ग्राम प्रधान रामफल, राम सनेही, बूथ अध्यक्ष राम गुलाम, होरी लाल, राम दुलारी, विष्णुदेयी, छोटू, मुन्नी, शकुंतला और मायावती को विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की ओर से सम्मानित किया गया।खेल युवाओं में निर्णयशक्ति का विकास करते हैं, उन्हें अनुशासित बनाते हैं।
“आपका विधायक-आपके द्वार” जनसुनवाई शिविर के दौरान ग्राम पंचायत परवर पूरब के सौसीर खेड़ा में 47वें गर्ल्स यूथ क्लब का गठन कर इंडोर और आउटडोर गेम्स फुटबॉल, वालीबॉल, कैरम आदि की किट प्रदान की गईं। शिविर के दौरान सभी उपस्थित ग्रामवासियों को सरोजनीनगर की पहचान बन चुकी, 467 दिनों से निरंतर संचालित ताराशक्ति रसोई के माध्यम से ताजा पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया।
उत्तर प्रदेश पंख करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम के तहत 156 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण लखनऊ में संपन्न हुआ।
यह कार्यक्रम समग्र शिक्षा उत्तर प्रदेश और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें सभी 75 जिलों के मास्टर ट्रेनर्स शामिल थे।
मास्टर ट्रेनर्स अपने जिलों के नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे प्रदेश के 9 लाख बच्चे लाभान्वित होंगे।
कार्यशाला में करियर हब, करियर क्लब, साईकोमेट्रिक टेस्ट और अभिभावक बैठक जैसी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम के अंतर्गत करियर मेलों, विशेषज्ञों से संवाद, और पंख पोर्टल के माध्यम से करियर विकल्पों और छात्रवृत्तियों की जानकारी दी जाएगी।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में ‘उत्तर प्रदेश पंख’ करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु डिस्ट्रिक्ट नोडल/मास्टर ट्रेनर (MT) का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों में आवश्यक ज्ञान और कौशल का विकास करना है, जिससे वे विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के आधार पर सही करियर चुनने के लिए मार्गदर्शन कर सकें, साथ ही अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल कर सकें।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम लखनऊ में यूनिसेफ उत्तर प्रदेश और समग्र शिक्षा (माध्यमिक) उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमे 75 जिलों से चयनित 156 मास्टर ट्रेनर्स (हर जिले से दो मास्टर ट्रेनर्स) को प्रशिक्षित किया गया है।
प्रक्षिणार्थियों को संबोधित करते हुए विष्णुकांत पांडेय अडिशनल स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर समग्र शिक्षा (माध्यमिक) ने कहा कि यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को भविष्य में सही करियर चुनने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शिक्षकों को अपने विषय के साथ-साथ शिक्षण पेशे में हो रहे नवाचारों से लगातार खुद को अपडेट करते रहना चाहिए, तभी हम विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर सकेंगे। नई शिक्षा नीति में कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिन्हें समझना और अपनाना आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हम अपने मोबाइल को समय-समय पर अपडेट करते हैं, वैसे ही शिक्षकों को भी नवीनतम जानकारियों और नीतियों से अपडेट रहना चाहिए, ताकि वे विद्यार्थियों के लिए एक प्रभावी मार्गदर्शक बन सकें।
यूनिसेफ़ उत्तरप्रदेश के चीफ (कार्यकारी) डॉ. अमित मेहरोत्रा ने कहा कि करिअर गाइडन्स के क्षेत्र में नित नए आयाम जुडते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में किसी एक व्यक्ति या संस्था के लिए सभी क्षेत्रों की आवश्यक जानकारी रखना संभव नहीं होता है। प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी शिक्षक मिलकर एक ऐसा मंच तैयार करें जिसमें हम समय-समय पर हम नए आयामों व अवसरों को जोड़ते जाएँ और बच्चों को बताएं।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सहायक निदेशक प्रतिमा सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग का मुख्य कार्य पढ़ाई-लिखाई से संबंधित है, परंतु दुर्भाग्यवश हम खुद पढ़ाई लिखाई से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि हमें अपने रुचि के विषयों पर रोज कुछ न कुछ पढ़ना चाहिए और छात्रों के हित में कार्य करना चाहिए।
यूनिसेफ के शिक्षा अधिकारी श्री रवि राज दयाल कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सभी मास्टर ट्रेनर्स यह सुनिश्चित करेंगे कि जिलों में यह प्रशिक्षण उच्च गुणवत्ता का हो और विद्यालयों के नोडल शिक्षक बच्चों के साथ मिलकर कार्यक्रम के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करें। कार्यशाला में करियर मार्गदर्शन पर विशेषज्ञ सागर आनंद ने करियर काउंसलिंग की प्रक्रिया और उसकी महत्वपूर्ण बातों पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही, विक्रमशिला संस्था की ओर से सोमा चौधरी, रश्मि झा और अन्य प्रशिक्षकों ने करियर हब, करियर क्लब, साईकोमेट्रिक टेस्ट और शिक्षक-अभिभावक बैठक जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की ।
प्रशिक्षण के दौरान SWOT विश्लेषण के जरिए शिक्षकों को करियर गाइडेंस कार्यक्रम की ताकत (Strengths), कमजोरियां (Weaknesses), अवसर (Opportunities) और चुनौतियां (Threats) को समझने का तरीका व इसके साथ ही, व्यक्तिगत प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के बारे में जानकारी दी गई, ताकि वे अधिक प्रभावी तरीके से अपने कार्य में दक्ष बन सकें और विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।
कार्यक्रम के तहत विद्यालय स्तर पर करियर हब की स्थापना, करियर क्लब का गठन, शिक्षक-अभिभावक बैठकों का आयोजन, करियर मेलों का आयोजन, विशेषज्ञों के साथ संवाद सत्र, औद्योगिक, व्यवसायिक और शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण, पंख पोर्टल के माध्यम से करियर विकल्प, छात्रवृत्तियां, परीक्षाओं और कॉलेजों की जानकारी, और वेबिनार के जरिए करियर विकल्पों तथा परीक्षाओं आदि की जानकारी दी गई।
राज्य स्तर पर सम्पन्न इस प्रशिक्षण के पश्चात मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जनपदों के सभी सरकारी माध्यमिक विद्यालयों के नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। साथ ही, वे जिलों के अधिकारियों और नोडल शिक्षकों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करेंगे कि जिले के सभी विद्यालयों में करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम की गतिविधियाँ प्रभावी रूप से संचालित हो रही हैं।
नोडल शिक्षक इस कार्यक्रम के प्रमुख स्तंभ हैं और अपने विद्यालयों में वे विद्यार्थियों को नियमित रूप से करियर परामर्श प्रदान करना, करियर योजना बनाने में उनकी मदद करना, स्कूलों में साप्ताहिक/पाक्षिक करियर क्लब गतिविधियों का आयोजन करना, विद्यालय में करियर हब की स्थापना करना आदि सुनिश्चित करेंगे।
कार्यशाला में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर सभी 75 जिलों में अध्यापकों का प्रशिक्षण करेंगे जिससे 9 लाख विद्यार्थी लाभान्वित होंगे । बच्चों को दी जा रही करियर जानकारी में लगभग 500 विकल्पों की जानकारी शामिल है।
कार्यशाला की सफलता पूर्वक क्रियान्वयन में डॉ. राजेश मिश्रा, उमा मिश्रा, बबीता मेहरोत्रा, सत्यवीर सिंह, सोनी सिंह, हरि त्रिपाठी, योगेन्द्र शुक्ला, शिवेंद्र सिंह और अमित पाण्डेय का विशेष योगदान रहा। कार्यशाला में सभी प्रशिक्षकों ने करियर मार्गदर्शन को अपने-अपने जनपदों एवं विद्यालयों में सफलतापूर्वक लागू करने और छात्रों को सही दिशा में मार्गदर्शन देने की प्रतिबद्धता जताई।