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देश के साधु संतों से माफी मांगें मल्लिकार्जुन खरगे : डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

  • सीएम योगी पर कांग्रेस अध्यक्ष के विवादित बयान ने पकड़ा तूल, संतों और नेताओं ने किया पलटवार
  • डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने व्यक्त की तीखी प्रतिक्रिया
  • अखिल भारतीय संत समिति ने भी खरगे के बयान की निंदा की, तत्काल माफी मांगने के लिए कहा

लखनऊ, 11 नवंबर2024: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दिया गया विवादित बयान अब राजनीति और धार्मिक हलकों में गर्मा गया है। खरगे ने योगी आदित्यनाथ के गेरुआ वस्त्र को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी, जिसपर भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों के साथ ही संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दरअसल, मल्लिकार्जुन खरगे ने झारखंड में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और संतों को लेकर कहा था कि कई साधु अब राजनेता बन गए हैं और वे गेरुआ कपड़े पहनकर समाज में नफरत फैला रहे हैं और लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। मल्लिकार्जुन खरगे का ये बयान अब एक विवाद का रूप ले चुका है और इसे लेकर भाजपा और संत समाज की ओर से तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है। मल्लिकार्जुन खरगे पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लग रहा है।

भाजपा और सहयोगी दलों ने की तीखी आलोचना

भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने भी खरगे के बयान पर हमला बोला है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इसे कांग्रेस की पुरानी मानसिकता करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास हमेशा से झूठ बोलने और समाज में दरार डालने का रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी हिन्दू धर्म और सनातन संस्कृति का सम्मान नहीं किया। कांग्रेस पार्टी की तुलना मुगल आक्रांताओं से करते हुए ब्रजेश पाठक ने तत्काल माफी मांगने के लिए कहा। वहीं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास बांटकर सत्ता हासिल करने का है। कांग्रेस ने पिछड़े, दलित और मुस्लिम समुदायों को धोखा दिया है। सत्ता में रहते हुए इस पार्टी ने कभी शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और किसानों के हित पर ध्यान नहीं दिया। बिना वजह की बयानबाजी करके ये केवल चर्चा में बने रहना चाहते हैं।

संत समाज की कड़ी प्रतिक्रिया

खरगे के बयान पर संत समाज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि खरगे का बयान घटिया और निंदनीय है। उन्होंने कांग्रेस को चेतावनी दी कि अगर वह हिन्दू धर्म और सनातन संस्कृति पर हमले करना बंद नहीं करती, तो संत समाज इसका कड़ा प्रतिकार करेगा। स्वामी जितेन्द्रानंद ने ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी को ऑल इंडिया चर्च कमेटी बताते हुए कहा कि वह हिन्दू और सनातन धर्म पर प्रहार करना छोड़ दें अन्यथा संत समाज कड़ा प्रतिकार करेगी। वहीं अयोध्या के संत स्वामी करपात्री जी महाराज ने भी खरगे के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के नाम में ‘खड़ग’ होता है, जिसका काम होता है बांटना और काटना, जबकि योगी आदित्यनाथ का नाम ‘योग’ से जुड़ा है, जिसका मतलब होता है जोड़ना। स्वामी करपात्री जी ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा हिन्दू धर्म पर हमला करने वालों का समर्थन किया है।

गांवों में हुए विकास कार्यों की ड्रोन से निगरानी करा रही योगी सरकार, तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

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  • सीएम योगी के प्रयासों से ग्रामीण विकास में पारदर्शिता के नया दौर में पहुंचा उत्तर प्रदेश
  • ग्रामीण विकास में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी नवाचार का सहारा ले रही योगी सरकार
  • ग्राम पंचायतों में योजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक गांव में होगा ड्रोन से निरीक्षण
  • योगी सरकार का स्थानीय अधिकारियों को ड्रोन टीम के साथ योजनाओं की समीक्षा में सहयोग का निर्देश
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ ग्रामीण रोजगार व विकास को प्रोत्साहन देने में जुटी योगी सरकार

लखनऊ, 11 नवंबर 2024: योगी सरकार प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर लगातार आगे बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि प्रदेश के गांवों में हो रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच के लिए अब योगी सरकार ड्रोन तकनीक का सहारा ले रही है। गांवों में बन रहे आवास, पेयजल की सुविधा, सिंचाई से संबंधित कार्य, सड़क निर्माण, खेल के मैदान का निर्माण और पौधरोपण जैसी महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी के लिए सीएम योगी ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पूरे प्रदेश में इन कार्यों व मनरेगा से संबंधित कार्यों का सत्यापन करने के लिए जिला मुख्यालय पर टीमे लगाई गई हैं, जरूरत के हिसाब से इन टीमों की संख्या में बढ़ोत्तरी भी की जा सकती है। योगी सरकार के इस कदम से जहां ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी, वहीं अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। सरकार का मानना है कि इस प्रकार के तकनीकी प्रयोग से न केवल विकास कार्यों में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी मदद मिलेगी।

ड्रोन करेगा अब ग्रामीण विकास के कार्यों की जांच

केंद्र की मोदी सरकार के साथ विकास कार्यों में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही योगी सरकार का भी प्रदेश में तकनीकी के इस्तेमाल पर विशेष बल है। इसी के मद्देनजर प्रदेश में मनरेगा योजनांतर्गत किये गये कार्यों की ड्रोन तकनीकी से निरंतर निगरानी और निरीक्षण का कार्य जारी है। योगी सरकार ने इसके लिए जिलेवार निरीक्षण का निर्दश दिया है। सीएम योगी के नेतृत्व व निर्देशन में ग्राम्य विकास विभाग की ग्रामोन्मुखी योजनाओं का क्रियान्वयन जहां बेहतर तरीके से किया जा रहा है, वहीं योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में कहीं घालमेल न होने पाये, इसके लिए सतत् रूप से निगरानी किये जाने की व्यवस्था की गयी है। विकास कार्यों की ड्रोन तकनीक से वीडियोग्राफी/ फोटोग्राफी कर निगरानी का कार्य निरंतर जारी है। राज्य मुख्यालय स्तर पर तैनात टीमों द्वारा जनपदों में जाकर कार्यों की निरंतर ड्रोन तकनीक से वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी का कार्य किया जा रहा है। ड्रोन तकनीक से विकास कार्यों की निगरानी और निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जनता तक पहुंचे और कार्यों की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी न हो।

तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

योगी सरकार इसके लिए वित्त वर्ष 2023-24 में हुए विकास कार्यों का निरीक्षण करा रही है। प्रदेश के गांवों में हो रहे विकास कार्यों के निरीक्षण के बाद जिन जिलों में कार्य तय मानक के अनुसार नहीं हुए हैं, उन जिलों के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सरकार ने जिलों से संबंधित अधिकारियों को राज्य स्तरीय ड्रोन टीम का पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। इसके तहत मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह ड्रोन टीम को सहयोग प्रदान करने के लिए अधीनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाना सुनिश्चित करें। इस काम में राज्य मुख्यालय स्तर पर तैनात टीमों की संख्या में भी इजाफा किया गया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि टीमों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा कार्यस्थलों पर ड्रोन कैमरों की पहुंच को बढ़ाना है। जिससे कामों की पारदर्शिता और गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जा सके। इसका पहला सफल प्रयोग बांदा जनपद में किया जा चुका है।

ड्रोन तकनीक के प्रयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने जुटी योगी सरकार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से न केवल ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। पारदर्शिता और गुणवत्ता में सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार सृजन के अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि गांवों में चल रहे विकास कार्य सुचारू रूप से होते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच बढ़ाने से युवाओं के लिए नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

जस्टिस संजीव खन्ना बने भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश: ली राष्ट्रपति भवन में शपथ

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  • जस्टिस संजीव खन्ना ने भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में राष्ट्रपति भवन में शपथ ली, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथ दिलाई।
  • उन्होंने न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की जगह ली, जो 65 वर्ष की आयु पूरी करने पर सेवानिवृत्त हुए।
  • न्यायमूर्ति खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 तक रहेगा, जिसमें उन्हें न्यायपालिका की प्रक्रिया सुधारने और लंबित मामलों की संख्या घटाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
  • अपने करियर में, जस्टिस खन्ना ने कई महत्वपूर्ण मामलों का निर्णय लिया, जैसे चुनावी बॉन्ड योजना और अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण।
  • जस्टिस खन्ना के कार्यकाल से न्यायिक स्वतंत्रता और पारदर्शिता की ओर न्यायपालिका की नई दिशा और संतुलन की उम्मीद की जा रही है।

नई दिल्ली/लखनऊ, 11 नवंबर 2024 : आज भारत ने अपने न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा, जब न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने देश के 51वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। जस्टिस खन्ना ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का स्थान लिया, जो 65 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का न्यायिक सफर

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का जन्म 14 मई, 1960 को हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से की और अपने करियर की शुरुआत दिल्ली हाईकोर्ट में वकील के रूप में की थी। खन्ना ने 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला और कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले सुनाए। सुप्रीम कोर्ट में वे 2019 में न्यायाधीश नियुक्त हुए। उनके कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फैसलों ने देश की दिशा और दशा को प्रभावित किया, जिनमें चुनावी बॉन्ड योजना और अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण जैसे मामले शामिल हैं का महत्व राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह न केवल एक औपचारिक प्रक्रिया थी, बल्कि न्यायपालिका की महत्वपूर्णता को रेखांकित करने वाला एक अवसर भी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य प्रमुख नेताओं की उपस्थिति ने इस समारोह की गरिमा को बढ़ाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संजीव खन्ना को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई, जिसके बाद उन्होंने अधिकारिक रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण किया।

चीफ जस्टिस खन्ना को मिली चुनौतियाँ और संभावनाएँ

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 तक रहेगा। इस अवधि में उन्हें कई महत्वपूर्ण मुद्दों का सामना करना पड़ेगा। न्यायपालिका में लंबित मामलों की संख्या घटाना, न्यायिक प्रक्रियाओं में सुधार लाना और संविधान की रक्षा करना उनके प्रमुख लक्ष्य होंगे। उनका मुख्य न्यायाधीश के रूप में योगदान भारतीय कानून प्रणाली के लिए दिशा-निर्देश स्थापित करेगा।

न्यायमूर्ति खन्ना के आने से न्यायपालिका में संतुलन और न्याय की भावना को और सशक्त बनाने की उम्मीद है। उनकी न्यायिक दृष्टिकोण का बड़ा हिस्सा सामाजिक न्याय और पारदर्शिता पर केंद्रित रहा है, जिससे उनके कार्यकाल के दौरान न्यायपालिका की शक्ति और स्वायत्तता में वृद्धि की उम्मीद की जा रही है । न्यायमूर्ति खन्ना का अनुभव और उनकी सटीकता उन्हें एक कुशल मुख्य न्यायाधीश बनाएंगे। वे संवैधानिक मामलों और न्यायिक स्वतंत्रता की सुरक्षा में विशेष रुचि रखते हैं। उनके कार्यकाल के दौरान संभावित सुधारों और न्यायिक निष्पक्षता की दिशा में किए गए कदम न्यायपालिका को मजबूत करेंगे। जस्टिस संजीव खन्ना का मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करना भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उनका न्यायिक दृष्टिकोण, संवैधानिक विशेषज्ञता और सामाजिक मामलों पर जागरूकता उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में वे किस प्रकार भारतीय न्यायिक प्रणाली को नई दिशा में ले जाते हैं।

पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ की विदाई

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने लगभग एक साल तक मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहकर कई ऐतिहासिक फैसलों का नेतृत्व किया। उनकी न्यायिक पद्धति और संवेदनशीलता को व्यापक स्तर पर सराहा गया। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति खन्ना ने इस जिम्मेदारी को संभाला। चंद्रचूड़ के कार्यकाल में न्यायपालिका ने पारदर्शिता और संवैधानिकता को सर्वोपरि माना, जिससे भारतीय लोकतंत्र को मजबूत आधार मिला ।

जनता दर्शन: सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर मंदिर परिसर में पहुँचे पीड़ितों की समस्याएं सुनीं, योगी बोले- बिना चिंता कराइए उपचार, हॉस्पिटल का पैसा देगी सरकार

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  • जनता दर्शन में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मदद मांगने आए लोगों को मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा
  • गोरखनाथ मंदिर में 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री ने
  • अधिकारियों को दिए त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण के दिए निर्देश

गोरखपुर/लखनऊ , 11 नवंबर 2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग करने पहुंचे से लोगों को आत्मीय भरोसा दिया कि वह बिना चिंता किए अच्छे से अच्छे अस्पताल में इलाज कराएं। उपचार में जो भी धनराशि खर्च होगी, उसकी व्यवस्था सरकार करेगी। सीएम योगी ने इस दौरान अफसरों को निर्देशित किया कि जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है और उन्हें उपचार में आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, उनके स्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से पूरा कराकर शासन को उपलब्ध कराया जाए। हर जरूरतमंद को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार शाम विधानसभा उपचुनाव प्रचार करने के बाद गोरखपुर पहुंचे थे। गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास के बाद सोमवार पूर्वाह्न झारखंड विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने प्रातःकाल गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में करीब 150 लोगों से मुलाकात की। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों से एक-एक करके समस्याएं सुनीं और निस्तारण के लिए आश्वस्त करते हुए उनके प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को हस्तगत किए। उन्होंने सभी लोगों को आश्वस्त किया कि किसी को भी परेशान होने या घबराने होने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का समाधान कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जनता की समस्याओं पर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से ध्यान देकर उनका त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिपरक निस्तारण कराएं ताकि किसी को भी परेशान न होना पड़े। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील रवैया अपनाया जाए और उसकी समस्या का समाधान कर उसे संतुष्ट किया जाए। इसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कहीं कोई जमीन कब्जा या दबंगई कर रहा हो तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। पारिवारिक मामलों के निस्तारण में दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर संवाद करने को प्राथमिकता दी जाए।

जनता दर्शन में हर बार की तरह इस बार भी कई लोग गंभीर बीमारियों में इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने सभी को भरोसा दिया कि उनकी सरकार किसी भी जरूरतमंद के इलाज में धन की कमी को बाधक नहीं बनने देगी। विवेकाधीन कोष से मदद की जाएगी। इस दौरान एक महिला ने अपने परिजन का इलाज मेदांता अस्पताल में कराने के लिए अपनी आर्थिक तंगी का जिक्र किया। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे आत्मीय संबल देते हुए कहा, अस्पताल में भर्ती कराकर डॉक्टर से इस्टीमेट मंगवा लीजिए। परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, उपचार का पैसा सरकार देगी। मुख्यमंत्री ने सभी से आयुष्मान कार्ड के बारे में पूछा और अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनाया जाना सुनिश्चित किया जाए।

मंदिर की गोशाला में सीएम योगी ने की गोसेवा

गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। सोमवार प्रातःकाल गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने, अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर शीश नवाने के बाद वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मंदिर की गोशाला में पहुंचे। यहां उन्होंने कुछ समय बिताया और गोसेवा की। मुख्यमंत्री ने गोवंश को खूब दुलारने के बाद उन्हें गुड़ खिलाया और गोशाला के भी कार्यकर्ताओं को देखभाल के लिए जरूरी निर्देश दिए।

लखनऊ: गोमती नदी की स्वच्छता के लिए “अनुरागिनी संस्था” ने किया ‘गोमती स्वच्छता संकल्प’ कार्यक्रम

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  • कार्यक्रम की शुरुआत संकल्प समारोह से हुई, जिसमें स्वच्छता अभियानों के संकल्प लिए गए।
  • अनुरागिनी संस्था ने 28 वर्षों के अनुभव में सामाजिक सेवाओं में उल्लेखनीय कार्य किया है।
  • प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को और विशेष बना दिया।
  • डॉ. प्रवीण सिंह जादौन ने प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।
  • कार्यक्रम का समापन स्वच्छता का संकल्प लेकर हुआ, जिससे लोगों में जागरूकता बढ़ी।

    लखनऊ, 10 नवंबर 2024: सामाजिक कार्यों में 28 वर्षों का गौरवशाली इतिहास रखने वाली संस्था अनुरागिनी ने अपने सेवा सप्ताह के समापन अवसर पर रविवार को ‘गोमती स्वच्छता संकल्प’ कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य गोमती नदी किनारे सफाई करना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम में अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    • संस्था का सामाजिक योगदान: अनुरागिनी ने पिछले 28 वर्षों में स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
    • शुभारंभ समारोह और संकल्प: कार्यक्रम की शुरुआत संकल्प समारोह से हुई, जिसमें संस्था ने भविष्य में अधिक स्वच्छता अभियानों और जागरूकता कार्यक्रमों का वादा किया।
    • प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति: कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड के निदेशक हीरेंद्र मिश्रा, उत्तराखंड महापरिषद के महासचिव भारत सिंह बिष्ट, अवध विकास परिषद के अध्यक्ष अरविंद मिश्र समेत अन्य प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
    • प्लास्टिक प्रदूषण पर जागरूकता: उपस्थित लोगों ने संस्था के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण सिंह जादौन के नेतृत्व में प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करने का संकल्प लिया।
    • समापन और शपथ: कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थित लोगों द्वारा स्वच्छता का संकल्प लेने के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने खुद को और दूसरों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का वादा किया।

    अनुरागिनी संस्था ने ‘गोमती स्वच्छता संकल्प’ के तहत लखनऊ के झूलेलाल घाट पर सफाई अभियान चलाया। इस दौरान, स्वयंसेवकों ने गोमती किनारे से बिखरे हुए प्लास्टिक और अन्य कचरे को इकट्ठा कर उसे निर्धारित कचरा स्थल तक पहुंचाया।

    इस दौरान “अनुरागिनी संस्था” के अध्यक्ष डॉ.प्रवीण सिंह जादौन ने संदेश देते हुए कहा कि नदी और अन्य जल स्रोतों की स्वच्छता हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम सभी को इस दिशा में मिलकर काम करना होगा। नदी के प्रदूषण का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ता है और इसे नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है। संस्था के इस ‘गोमती स्वच्छता संकल्प’ का उद्देश्य न केवल नदी किनारे की सफाई करना था, बल्कि लोगों को इसके महत्व के प्रति जागरूक भी है। संस्था आने वाले समय में भी स्वच्छता अभियान चलाती रहेगी, ताकि पर्यावरण को सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके। संस्था ने 28 वर्षों के सामाजिक कार्यों में कई क्षेत्रों में काम किया है, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।