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महाकुंभ 2025: महाकुंभ के पहले आरंभ हुई प्रयाग के अधिष्ठाता देवता भगवान श्री माधव के द्वादश स्वरूपों की परिक्रमा यात्रा

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  • श्री अनंत माधव से शुरू हुई पांच दिवसीय परिक्रमा यात्रा का श्री चक्र माधव में होगा समापन
  • पंचकोसी परिक्रमा के बाद द्वादश माधव की परिक्रमा यात्रा को भी पुनः आरंभ करने में मिला योगी सरकार का सहयोग
  • उपेक्षित पड़ी प्रयागराज की पौराणिक विरासत द्वादश माधव के मंदिरों का 12 करोड़ की लागत से हो रहा है कायाकल्प
  • महाकुंभ आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक के प्रयाग की पौराणिक मंदिरों की भव्य श्रृंखला का कर सकेंगे दर्शन
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प्रयागराज/लखनऊ , 11 नवम्बर2024: कुंभ नगरी प्रयागराज की पहचान उसके धार्मिक , आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप से है। धार्मिक क्षेत्र होने की वजह से विभिन्न धार्मिक और पौराणिक परंपराओं के प्रचलन के लिए भी इसे जाना जाता रहा है । विभिन्न धार्मिक परिक्रमा भी इसी में सम्मिलित हैं जो समय के साथ पीछे छूट गई। प्रदेश की योगी सरकार के सहयोग और प्रेरणा से ये पुनः आरंभ हुई हैं। द्वादश माधव की परिक्रमा यात्रा भी इसी का हिस्सा है जिसकी शुरुआत देवोत्थान एकादशी से हुई है।

आरम्भ हुई प्रयाग के अधिष्ठाता देवता श्री द्वादश माधव की परिक्रमा यात्रा

कुंभ नगरी प्रयागराज पौराणिक मंदिरों का शहर है । इन मंदिरों में भी द्वादश माधव कुम्भ नगरी की आध्यात्मिक पहचान है। इन्ही द्वादश माधव में एक श्री वेणी माधव को प्रयाग के नगर देवता के रूप में मान्यता है। इस पहचान को स्थापित करने के देवोत्थान एकादशी से द्वादश माधव परिक्रमा की शुरुआत की गई । प्रयागराज के अनंत माधव के पौराणिक मंदिर से इसकी शुरुआत हुई जिसमें विभिन्न माधवों के प्रमुख और अखाड़ों के संत शामिल हुए। श्री अनंत माधव के महंत आदित्या नन्द जी का कहना है कि श्री अनंत माधव से शुरू हुई यह परिक्रमा यात्रा विभिन्न माधव होते है श्री चक्र माधव अरैल में समापन होगा । इस पांच दिवसीय यात्रा में सभी द्वादश माधव के मंदिरों में अनुष्ठान और आरती का आयोजन किया जायेगा। परिक्रमा यात्रा में शामिल हुए अग्नि अखाड़े के संत और मंदिर व्यवस्थापक महंत बीरेंद्रानंद ने बताया कि लंबे समय से यह परिक्रमा यात्रा बंद पड़ी थी लेकिन उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद जैसे औरंगजेब के जमाने से बंद पड़ी प्रयागराज की पंच कोशी परिक्रमा की शुरुआत हुई वैसे ही उन्हीं की प्रेरणा से द्वादश माधव परिक्रमा यात्रा भी आरंभ हुई है।

द्वादश माधव के मंदिरों के कायाकल्प से मिला जन सहयोग

महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र कुंभ क्षेत्र के अलावा प्रयागराज के प्राचीन मंदिर भी हैं जिनके साथ यहां की पौराणिक मान्यता जुड़ी हुई है। मंदिरों के इस समूह में द्वादश माधव मंदिर समूह सर्वप्रथम है जिनकी मूल संरचना को संरक्षित रखते हुए उनका कायाकल्प का कार्य योगी सरकार कर रही है। कुल 12.34 करोड़ की लागत से इन प्राचीन पौराणिक मंदिरों को नव्य स्वरूप दिया जा रहा है। जिससे यह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे। द्वादश माधव परिक्रमा यात्रा इन पौराणिक मंदिरों को जन मानस से पुनः जोड़ने का एक माध्यम बनेगी। श्री चक्र माधव के प्रमुख महंत अवधेश दास जी महराज का कहना है कि योगी सरकार ने उपेक्षित पड़ी पौराणिक विरासतों को नए सिरे से संयोजित किया है। द्वादश माधव के हर मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए 22 लाख से अधिक का सहयोग सरकार से मिला है। मंदिरों में थीम पर आधारित प्रवेश द्वार, म्यूरल्स, सत्संग भवन, फ्लोरिंग, पेय जल की व्यवस्था, बाउंड्री वॉल और ग्रीनरी का विकास किया गया है। जिससे जर्जर हो चुके प्राचीन महत्वपूर्ण मंदिर अब अपने भव्य स्वरूप में आ गए हैं।

उत्तरप्रदेश के कृषि मंत्री ने की खेत तालाब योजना की समीक्षा

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लखनऊ: 11 नवम्बर, 2024: उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा सोमवार को कृषि निदेशालय में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक, वर्षा जल संचयन की खेत तालाब योजना, पं0 दीनदयाल किसान समृद्धि योजना के अंतर्गत बीहड़ सुधार के कार्यों की समीक्षा की गयी।

समीक्षा के दौरान कृषि मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक की परियोजना को भूमि संरक्षण की पं0 दीनदयाल योजना, खेत तालाब योजना तथा आरएडी योजना के साथ समन्वित उपचार कर जल संचयन, मृदा संरक्षण, अजीविका संवर्द्धन एवं प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूक कर माडल वाटरशेड में अनुकरण कर जलागम विकास किया जाए।

उन्होंने सभी योजनाओं के लक्ष्य को तेजी से भौतिक प्रगति के निर्देश दिये, जिससे किसानों को किसी प्रकार की सिंचाई समस्या का सामना न करना पड़े तथा उनके खेतों का उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाई जा सके। इस योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर की स्थापना हेतु उद्यान विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर शीघ्रता से तकनीकी स्वीकृति एवं त्रिपक्षीय अनुबंध के निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि खेत तालाब खोद चुके सभी लाभार्थियों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा भूमि संरक्षण अधिकारी के माध्यम से एक सप्ताह के अंदर की जाए।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: देवेंद्र फडणवीस समेत भाजपा प्रत्याशियों के लिए जनसभा करेंगे सीएम योगी

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  • मंगलवार को महाराष्ट्र के चुनावी दौरे पर रहेंगे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
  • सीएम योगी एनडीए प्रत्याशियों के पक्ष में तीन जनसभाओं को करेंगे संबोधित
  • तीसरी जनसभा में संयुक्त रूप से कई प्रत्याशियों के लिए मांगेंगे वोट

लखनऊ, 11 नवंबर2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को महाराष्ट्र के चुनावी दौरे पर रहेंगे। वे यहां तीन जनसभाओं को संबोधित करेंगे। वे यहां महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस के लिए भी वोट की अपील करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके पहले छह नवंबर को भी महाराष्ट्र में जनसभा कर चुके हैं।

सीएम योगी मंगलवार को पहली जनसभा अचलपुर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी प्रवीण तायडे के लिए करेंगे। सीएम योगी की दूसरी जनसभा अकोला पश्चिम विधानसभा प्रत्याशी के लिए होगी। भारतीय जनता पार्टी ने यहां से विजय कमलकिशोर अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतारा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तीसरी जनसभा संयुक्त रूप से होगी। सीएम योगी यहां उप मुख्यमंत्री व नागपुर दक्षिण पश्चिम से भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र फडणवीस, नागपुर दक्षिण से मोहन गोपाल राव माते, नागपुर पूर्व से कृष्णा पंचम खोपडे, नागपुर मध्य से प्रवीण प्रभाकरराव दटके व नागपुर उत्तर से डॉ. मिलिंद माने के पक्ष में जनता से वोट देने की अपील करेंगे।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एक्शन मोड पर: केजीएमयू के प्रकरण का लिया संज्ञान, बैठाई जांच, होगी कार्रवाई लेकिन HIMS व शेखर अस्पताल व उसके असल संचालक डॉ. एके सचान का मामला अब भी ठंडे बस्ते में

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  • सीएमओ केडी अस्पताल की भूमिका की करेंगे जांच
  • अन्य जिलों के प्रकरणों पर भी सख्त हुए उप मुख्यमंत्री, कहा- लापरवाही बर्दाश्त नहीं
  • लेकिन मेडिकल कॉलेज के ही एक नामी डॉक्टर ए. के. सचान के कारनामों पर भी दीजिए ध्यान
  • हिन्द इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (HIMS) व शेखर हॉस्पिटल संचालित करने वाले बेनामी संपत्ति के अकूत स्वामी डॉक्टर आमोद कुमार सचान नहीं तो यही कर रहे

लखनऊ: 11 नवम्बर 2024: किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ईएनटी विभाग के रेजिडेंट डॉ. रमेश कुमार द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस करने के प्रकरण को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने गंभीरता से लिया है। डिप्टी सीएम ने मरीज की मौत और प्राइवेट प्रैक्टिस प्रकरण की जांच के आदेश दिये हैं।
केजीएमयू ईएनटी विभाग के डॉ. रमेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने प्राईवेट प्रैक्टिस एवं इलाज के दौरान खदरा स्थित केडी अस्पताल में मरीज को भर्ती कराया था। इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु हो गई थी। इस प्रकरण का डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से संस्थान, विभाग तथा सरकार की छवि धूमिल होती है। प्रकरण की जांच के निर्देश देते हुए उन्होंने सीएमओ को खदरा स्थित केडी अस्पताल की भूमिका एवं वहां की व्यवस्थाओं को परखने के लिए भी कहा है। एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट प्रेषित करनी है।

पूर्व स्टोनो के प्रकरण पर मांगी रिपोर्ट

सिप्सा के पूर्व स्टेनो राजेन्द्र कुमार जोशी द्वारा आत्महत्या के प्रकरण पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट तलब की है।
मीडिया में पूर्व स्टोनो राजेंद्र कुमार जोशी को अफसरों द्वारा प्रताड़ित किए जाने की खबर प्रकाशित हुई थी। डिप्टी सीएम ने कार्यकारी निदेशक, राज्य परिवार नियोजन सेवा नवाचार परियोजना एजेन्सी (सिफ़्सा) को उक्त प्रकरण की रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।

प्राइवेट सेंटर पर एक्सरे कराने की होगी जांच

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में प्राइवेट सेंटर पर एक्सरे कराने एवं अन्य कतिपय अनियमितताओं के संबंध में प्रकाशित समाचार का डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने संज्ञान लिया है। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को इस संबंध में प्रभावी कार्रवाई करने एवं स्पष्टीकरण सहित एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों को उच्चस्तरीय निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

चिकित्सक के खिलाफ जांच

जिला चिकित्सालय, गोरखपुर में तैनात रेडियोलॉजिस्ट/कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार के विरुद्ध लगातार भ्रष्टाचार किए जाने, गलत तरीके से मेडिकोलीगल करने एवं अन्य कतिपय गंभीर शिकायतें प्राप्त होने पर उनके खिलाफ जांच बैठाई गई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, उप मुख्य चिकित्साधिकारी/उपजिला क्षय रोग अधिकारी, हमीरपुर डॉ. दीपक मणि नायक द्वारा स्वास्थ्य संबंधित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में रुचि न लेने, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अव्हेलना करने की प्रारंभिक जांच जिलाधिकारी द्वारा कराई गई थी। जांच में दोषी पाए जाने पर डीएम द्वारा शासन को अवगत कराया गया है। चिकित्साधिकारी के विरुद्ध प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य को भी जांच कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

तो फिर मेडिकल कॉलेज में तैनात HIMS व शेखर अस्पताल के असल मालिक डॉ ए. के. सचान पर क्यों मेहरबान

डॉ. आमोद कुमार सचान, जो केजीएमयू में फार्माकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष और शेखर हॉस्पिटल के मालिक हैं, का नाम हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के कारण विवादों में आया है। सात महीने से अधिक समय तक चली इस जांच में उनके बैंक खातों में 50 करोड़ से अधिक के ट्रांजैक्शन और आय से अधिक संपत्ति के मामले सामने आए हैं। इसके बावजूद, वे अब भी मेडिकल कॉलेज में अपनी नौकरी जारी रखे हुए हैं और रिटायरमेंट तक यह स्थिति बनी रह सकती है, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा विभिन्न मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा रही है, ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि डॉ. सचान पर किसका संरक्षण है या उनके खिलाफ अब तक निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाए गए हैं । गौरतलब है कि केजीएमयू के प्रोफेसर और शेखर हॉस्पिटल के मालिक, वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बेनामी संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित जांच का सामना कर रहे हैं। इस जांच के बावजूद वे अपनी पदस्थिति को बनाए हुए हैं, जो कई सवाल खड़े करता है कि इस परिस्थिति में उन्हें कौन सा संरक्षण प्राप्त है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा अन्य मामलों में त्वरित कार्रवाई के बीच, यह समझना आवश्यक है कि डॉ. सचान पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।

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महाकुंभ-2025: मेला क्षेत्र में पहली बार रिचार्जेबल बल्ब का किया जाएगा उपयोग

महाकुम्भ 2025: नए साल पर 'स्टेटस' सिंबल बना महाकुम्भ
महाकुम्भ 2025: नए साल पर 'स्टेटस' सिंबल बना महाकुम्भ
महाकुम्भ 2025: नए साल पर 'स्टेटस' सिंबल बना महाकुम्भ
  • 40 हजार से ज्यादा रिचार्जेबल लाइट्स से रौशन होगा महाकुंभ
  • लाइट जाने की स्थिति में भी मेला क्षेत्र और कैंप्स में नहीं होगी जीरो लाइट की स्थिति
  • नॉर्मल एलईडी बल्ब के साथ कैंप्स में रिचार्जेबल बल्ब का भी किया जाएगा इस्तेमाल
  • पूरे मेला क्षेत्र में कैंप्स के अंदर 40 से 45 हजार रिचार्जेबल बल्ब लगाने की है योजना
  • कैंप्स के बाहर 2 हजार सोलर हाईब्रिड लाइट्स का भी किया जा रहा है उपयोग

प्रयागराज/लखनऊ, 11 नवंबर2024: इस बार महाकुंभ की भव्यता और दिव्यता में रौशनी का भी महत्वपूर्ण योगदान होगा। महाकुंभ के दौरान शाम के समय मेला क्षेत्र की चमचमाती रौशनी गंगा और यमुना की कलकल बहती निर्मल धारा को और भी अलौकिक रूप प्रदान करेगी। इस अलौकिक दृश्य को श्रद्धालु बिना किसी बाधा के अपनी आंखों से निहार सकें, इसके लिए योगी सरकार इस बार अनूठी पहल करने जा रही है। पहली बार पूरे मेला क्षेत्र को 24×7 रौशन बनाए रखने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में 40 हजार से अधिक रिचार्जेबल लाइट्स (रिचार्जेबल बल्ब) का उपयोग किया जा रहा है। ये बल्ब खुद को रिचार्ज करते हैं और बिजली जाने पर भी रौशनी देते रहते हैं। इससे यदि किसी फॉल्ट या अन्य वजह से अचानक बिजली चली जाती है तो भी ये बल्ब कभी अंधेरा नहीं होने देते। महाकुंभ ही नहीं, उत्तर प्रदेश में पहली बार इस तरह की लाइट्स का उपयोग किसी बड़े आयोजन में होने जा रहा है।

नहीं होगी जीरो लाइट की स्थिति

मेला क्षेत्र में विद्युत विभाग के प्रभारी अधिशासी अभियंता अनूप कुमार सिन्हा ने बताया कि जो विद्युत संयोजन हम लोग कैंप्स में देंगे उसमें हमने इस बार नॉर्मल एलईडी बल्ब के साथ ही रिचार्जेबल बल्ब भी उपयोग में लाने का निर्णय लिया है। इस बार पूरे मेला क्षेत्र में हमें साढ़े चार लाख कनेक्शन देने हैं तो उसके 1/10 के आसपास यानी 40 से 45 हजार के बीच रिचार्जेबल बल्ब भी लगाए जाएंगे। रिचार्जेबल बल्ब में इनबिल्ट बैटरी होती है, जो लाइट चालू रहने पर चार्ज होती रहती है. बिजली जाने पर, ये बैटरी ही बल्ब को रोशन रखती है। इसका लाभ ये होगा कि यदि किसी कैंप में 5-6 बल्ब लगे हैं और किसी कारण से लाइट चली गई तो एक रिचार्जेबल बल्ब भी जलता रहेगा तो जीरो लाइट या अंधेरे की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। उन्होंने बताया कि हमने बैकअप लाइट की भी व्यवस्था की है, जिसके लिए जेनसेट वगैरह का उपयोग व्यापक पैमाने पर होगा, जहां हम सप्लाई को एक से दो मिनट में रिस्टोर कर लेंगे। लेकिन इस एक से दो मिनट के बीच में भी हमारा प्रयास जीरो लाइट्स की स्थिति उत्पन्न नहीं होने देना है।

पहली बार महाकुंभ में होगा उपयोग

उन्होंने बताया कि ये रिचार्जेबल लाइट्स नॉर्मल बल्ब के साथ ही लगाई जाएंगी। नॉर्मल बल्ब की तरह ही इनकी भी रोशनी होगी। हालांकि यदि किसी वजह से लाइट जाती है तो बाकी बल्ब ऑफ हो जाएंगे, लेकिन यह बल्ब काम करता रहेगा। उन्होंने बताया कि विद्युत विभाग की जो परियोजनाएं महाकुंभ मेला क्षेत्र में चल रही हैं, उसी में से इन बल्ब के लिए फंड की व्यवस्था की जाएगी। अमूमन एक रिचार्जेबल बल्ब की कीमत लगभग 600 से 700 के बीच होती है। ऐसे में 45 हजार बल्ब लगाने पर इसमें करीब 2.7 करोड़ रुपए का खर्च आने की संभावना है। हालांकि, बल्ब की संख्या कैंप्स की संख्या के अनुपात में घट और बढ़ भी सकती है। उन्होंने बताया कि रिचार्जेबल बल्ब का कांसेप्ट अभी एक-दो साल पहले ही आया है। अभी यह प्रयोग प्रदेश के अंदर किसी बड़े मेले या बड़े आयोजन में नहीं किया गया है। पहली बार महाकुंभ में इसका उपयोग किया जा रहा है।

2 हजार सोलर हाईब्रिड लाइट्स का भी होगा उपयोग

मेला क्षेत्र में स्थापित कैंप्स ही नहीं, बल्कि कैंप्स के बाहर भी लाइट जाने पर अंधेरा न हो, इसकी पुख्ता व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि कैंप्स के बाहर हम 67 हजार नॉर्मल लाइट्स की व्यवस्था कर रहे हैं और इसके भी बैकअप के लिए हमने 2 हजार सोलर हाईब्रिड लाइट्स की व्यवस्था की है। सोलर हाईब्रिड लाइट्स ऐसी लाइट्स होती हैं जो लाइट जाने पर भी लगातार काम करती रहेगी। इसमें बैटरी का बैकअप है जो सूर्य की किरणों से चार्ज होती है। लाइट जाने की स्थिति में यह बैट्री के माध्यम से रोशनी देती है। ये दो हजार सोलर हाईब्रिड लाइट्स भी जीरो लाइट्स की आशंका को खत्म करने के लिए उपयोग में लाई जा रही हैं।