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दिसंबर में गोवा ट्रिप पर जाने से पहले, जान लीजिए इस पर कितना खर्च आ सकता है

मौज-मस्ती करने के लिए गोवा से बेहतर क्या ही जगह हो सकती है। दिसंबर के महीने में काफी ठंड पड़ती है लेकिन इस दौरान गोवा जाने का प्लान भी सबसे बढ़िया रहता है। समुद्र किनारे बैठ कर ठंडी हवाओं का मजा लेना बहुत सुकून देता है। यहां पर कई सुंदर बीचेज मौजूद है। गोवा में कैलंगुट बीच काफी मशहूर है। इस बीच पर आपको वाटर फॉल, आकर्षित नजारे और कई एडवेंचर एक्टिवीटीज भी कर सकते है। दिसंबर और जनवरी के महीने में लोग गोवा जाने की काफी प्लानिंग करते हैं। ऐसे में आपको जान लेना चाहिए कि इस महीने में गोवा जाने पर कितना खर्च होगा।

महंगी हो जाती है कई चीजें

गोवा में दिसंबर-जनवरी के महीने में काफी रौनक देखने को मिलती है। इस दौरान हर एक बीच में काफी सजावट होती है और जगह-जगह पार्टियों का आयोजन होता है। इस समय हर चीज का रेट दोगुना हो जाता है। रेंट पर स्कूटी आम दिनों में 200-250 होती है और वहीं, दिसंबर महीने में 500 से भी ज्यादा के किराए पर मिलती है। होटल के कमरों का चार्ज भी काफी ज्यादा हो जाता है। 2000 हजार में कमरे मिलते, जबकि नॉर्मल 1000 रुपये मिल जाते हैं।

कितना होगा खर्च

गोवा में घूमने के लिए 5 से 10 हजार में भी घूम सकते हैं, लेकिन ये शुरुआती खर्चा है। हालांकि, गोवा का बेसिक खर्च 20 से 30 हजार तक हो सकता है। वहीं, आप दिसबंर-जनवरी के महीने में गोवा जाते हैं तो आपका खर्चा बढकर 50 से 80 हजार दो लोगों का हो सकता है। इतने रुपये में आप गोवा में एक्टिविटीज का मजा ले सकते हैं। बता दें कि यह खर्च 3 रात 4 दिन का है।

“कंगुवा” ने पहले ही दिन जोरदार शुरुआत की, सूर्या की 350 करोड़ बजट की फिल्म ने की शानदार कमाई

तमिल सुपरस्टार सूर्या की फिल्म ‘कंगुवा’ गुरुवार यानी 14 नवंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज कर दी गई है। फिल्म को लेकर लोगों के बीच पहले से ही काफी उत्साह था। फिल्म के ट्रेलर और टीजर ने लोगों में पहले ही जोश भर दिया था। अब फिल्म की रिलीज के बाद भी ये उत्साह बरकरार है और इसका नतीजा ही सिनेमाघरों में पहले दिन देखने को मिला है। वर्किंग डे होने के बावजूद भी फिल्म ने पहले दिन मोटी कमाई की है। फिल्म को देखने के लिए लोगों की अच्छी भीड़ सिनेमाघरों में पहुंची। फिल्म में सुर्या के अलावा बॉबी देओल और दिशा पाटनी लीड रोल में हैं। वैसे कहा जा रहा है कि ये फिल्म पूरी तरह से सूर्या की कहानी है। अब आते हैं ‘कंगुवा’ की कमाई पर और बताते हैं कि ओपनिंग डे पर ही फिल्म का प्रदर्शन कैसा रहा है।

पहले दिन ही हुई इतनी कमाई

सूर्या सिर्फ दक्षिण भारत में ही नहीं बल्कि हिंदी बेल्ट में भी काफी पॉपुलर हैं और इसका असर फिल्म की कमाई से पता चल रहा है। बीते दिन रिलीज हुई ‘कंगुवा’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाका किया है। ये फिल्म क्लीन बोल्ड नहीं हुई बल्कि इसने लंबा छक्का जड़ा है। अर्ली एस्टीमेट के अनुसार फिल्म ने 22 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। इस कमाई में थोड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। 350 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म को 5 भाषाओं में रिलीज किया गया है, जिसमें तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी शामिल हैं। सभी भाषाओं में इसे 2डी और 3डी दोनों में रिलीज किया गया है।

5 भाषाओं में मिले कितने दर्शक

गौर करें तो इस फिल्म को 2डी और 3डी, दोनों ही मोड में सबसे ज्यादा तेलुगु दर्शक मिले हैं। कुल तमिल सीट ऑक्यूपेंसी में 37.25 प्रतिशत सीट भरी थीं। ये सूर्या की पॉपुलेरिटी का ही असर है। अपने क्षेत्र में उन्होंने सबसे ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया है। इसके अलावा हिंदी ऑक्यूपेंसी में 11.47% सीटें भरी थीं। तेलुगु में इस फिल्म को देखने वालों की सबसे ज्यादा भीड़ थी। 58.12% प्रतिशत सीट ऑक्यूपेंसी रही। कन्नड़ में 15.49 प्रतिशत और मलयालम में इसे 21.78 प्रतिशत सीट ऑक्यूपेंसी रही है। ये सभी आंकड़े फिल्मों की कमाई से जुड़े डेटा जारी करने वाली साइट sacnilk के आधार पर हैं।

फिल्म से जुड़ी जानकारी

बता दें, इस फिल्म का निर्देशन शिवा ने किया है और इसका निर्माण स्टूडियो ग्रीन और यूवी क्रिएशंस ने किया है। ‘कंगुवा’ में सूर्या, दिशा पटानी, बॉबी देओल और योगी बाबू मुख्य भूमिकाओं में हैं। बात करें फिल्म के कलेक्शन की तो आने वाले दिनों में इसकी कमाई बढ़ेगी। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

DRDO के पिनाका रॉकेट लॉन्चर का सफल परीक्षण, एक साथ कई लक्ष्यों पर रॉकेट दागे गए

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने गाइडेड पिनाका हथियार प्रणाली की टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह टेस्टिंग प्रोविजनल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (PSQR) वैलिडेशन ट्रायल का हिस्सा थी। फ्लाइट टेस्टिंग तीन चरणों में विभिन्न फील्ड फायरिंग रेंज में की गई। इन परीक्षणों के दौरान, बड़े पैमाने पर रॉकेटों का टेस्ट किया गया। इस दौरान PSQR स्टैंडर्ड जैसे कि रेंज, सटीकता, स्थिरता और सैल्वो मोड (सैल्वो तोपखाने या आग्नेयास्त्रों का एक साथ प्रयोग है जिसमें लक्ष्य को भेदने के लिए तोपों से गोलीबारी शामिल है) में कई लक्ष्यों पर फायर रेट का आकलन किया गया। लॉन्चर उत्पादन एजेंसियों द्वारा अपग्रेड किए गए दो इन-सर्विस पिनाका लॉन्चरों से प्रत्येक उत्पादन एजेंसी के बारह (12) रॉकेटों का परीक्षण किया गया है।

पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए सटीक हमला करने वाला संस्करण पूरी तरह से स्वदेशी हथियार प्रणाली है, जिसे आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने रिसर्च सेंटर इमारत, रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला और प्रूफ एंड एक्सपेरीमेंटल एस्टेब्लिशमेंट के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया है। इसमें गोला-बारूद के लिए म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड और इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड और पिनाका लॉन्चर और बैटरी कमांड पोस्ट के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और लार्सन एंड टूब्रो ने योगदान दिया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रणाली के सफल पीएसक्यूआर सत्यापन परीक्षणों के लिए डीआरडीओ और भारतीय सेना की सराहना की है और कहा है कि इस निर्देशित पिनाका हथियार प्रणाली को शामिल करने से सशस्त्र बलों की तोपखाने की मारक क्षमता में और वृद्धि होगी।

क्या है पिनाका रॉकेट लॉन्चर?

पिनाका रॉकेट अत्याधुनिक दिशासूचक प्रणाली से लैस है, जिसके कारण यह सटीकता से लक्ष्य की पहचान कर उसपर निशाना साधता है। पुणे स्थित डीआरडीओ प्रयोगशाला, आयुध अनुसंधान एवं विकास स्थापना (एआरडीई) और हाई एनर्जी मैटेरियल रिसर्च लेबोरेटरी ने इसका डिजाइन और इसे विकसित किया है। पिनाका रॉकेट की शुरुआती रेंज करीब 37 किलोमीटर थी, जिसे बढ़ाकर 45 किलोमीटर से ज्यादा किया जा चुका है। पिनाका हथियार प्रणाली के जरिए एक साथ कई जगहों पर रॉकेट दागे जा सकते हैं। पिनाका सटीक निशाने की पहचान करता है और वहीं रॉकेट दागता है।

Pine Nuts Benefits: डायबिटीज और वेट लॉस के लिए सफेद मेवा है प्रभावी, जानें इसका सही सेवन कैसे करें

नट्स यानी सूखे मेवों को सुपरफूड्स कहा जाता है। क्योंकि इनमें तमाम पोषक तत्व पाए जाते हैं। बादाम, काजू, पिस्‍ता, किशमिश, अखरोट और अंजीर आदि में प्रोटीन, मिनर, मैग्नेशियम, विटामिन, कॉपर, फॉलिक ऐसिड, बी-कॉम्प्लेक्स, जिंक आदि पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। लेकिन इससे भी ज्यादा सफेद मेवे सबसे ज्यादा फायदेमंद होते हैं। आम भाषा में इसको चिलगोजा कहा जाता है।

हालांकि काजू-बादाम की तरह यह हर घर में नहीं पाया जाता है, क्योंकि यह बहुत महंगा होता है। यह मेवा एक फल का बीज होता है, जो भूरे रंग का होता है। यह बीज सफेद रंग के लंबे आकार के होते हैं। आप भूनकर, स्मूदी या फिर सैलेड में डालकर इसका सेवन कर सकते हैं। इनका सेवन करने से मोटापा, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल आदि की बीमारी नहीं होती है। साथ ही यह हमारे दिमाग को भी मजबूत बनाने के काम करता है। तो आइए जानते हैं इस मेवे का इस्तेमाल कितना फायदेमंद होता है।

वेट लॉस में फायदेमंद

पाइन नट्स में पाए जाने वाले फैटी एसिड वेट मैनेज के लिए अच्छा माना जाता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं, जो हमारे पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं। हालांकि नट्स में हाई कैलोरी पाई जाती है, लेकिन इसका सेवन करने से वेट नहीं बढ़ता है।

बढ़ाता है ब्रेन की ताकत

पाइन नट्स ने ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो दिमाग को तेज करता है। साथ ही यह डिमेंशिया और अवसादग्रस्त लक्षणों के जोखिम को भी कम करने में सहायक होता है। पाइन नट्स में 31.4 मिलीग्राम ओमेगा 3 पाया जाता है। महिलाओं को रोजाना 1.1 ग्राम और पुरुषों को 1.6 ग्राम ओमेगा-3 का सेवन करना चाहिए।

ब्लड शुगर लेवल में सुधार

एक स्टडी की मानें, तो सफेद मेवे का सेवन करने से शुगर लेवल में गिरावट आती है। अगर आप कार्ब युक्‍त भोजन छोड़कर असंतृप्त वसा जैसे कि पाइन नट्स का सेवन करते हैं, तो यह ब्लड शुगर लेवल पर अच्छा प्रभाव दिखेगा। वहीं रोजाना 28 ग्राम पाइन नट्स का सेवन करने से 109% मैंगनीज प्रदान करता है। जो डायबिटीज के खतरे को कम करता है।

भारत और UAE के रिश्तों के नए युग की शुरुआत पीएम मोदी की यात्रा से हुई: जयशंकर

दुबई/लखनऊ : भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच फिनटेक, नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर प्रकाश डालते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। यहां सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (मानद विश्वविद्यालय) परिसर के उद्घाटन के अवसर पर जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई की पहली यात्रा ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की नई शुरुआत की।

नए युग में हैं भारत-यूएई संबंध

जयशंकर ने कहा, “भारत-यूएई संबंध आज सही मायनों में नए युग में हैं। जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2015 में ऐतिहासिक यात्रा हुई थी जो सदी की पहली यात्रा थी, और उसी तरह से हमारी व्यापक आर्थिक साझेदारी भी ऐतिहासिक स्तर पर है।” जयशंकर ने कहा कि दुबई में सिम्बायोसिस परिसर का उद्घाटन एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जो भारत और यूएई के बीच बढ़ते शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को दर्शाता है।

‘भारत को तैयार रहने की है जरूरत’

विदेश मंत्री ने कहा, “भारत को आज वैश्विक कार्यस्थल के लिए तैयार होने की आवश्यकता है। साथ ही, उसे चिप्स, ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी’, स्वच्छ और हरित प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष और सड़कों के युग के लिए भी तैयार रहना होगा।” जयशंकर ने कहा कि भारत को इन संभावनाओं के विकास को पर्यावरण अनुकूल और बाजार अनुकूल बनाकर प्रबंधित करना होगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से हमें विश्व के साथ तालमेल बिठाने और राष्ट्रीय संभावनाओं को आगे बढ़ाने की विशेष क्षमता मिलेगी।