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महाकुंभ-2025: श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार ने किए विशेष इंतजाम

महाकुंभ-2025, हरित महाकुम्भ 2025: महाकुम्भ में पुराने वृक्षों और वन्य जीवों का होगा संरक्षण, चलाया जाएगा रेस्क्यू ऑपरेशन
हरित महाकुम्भ 2025: महाकुम्भ में पुराने वृक्षों और वन्य जीवों का होगा संरक्षण, चलाया जाएगा रेस्क्यू ऑपरेशन
महाकुंभ-2025, हरित महाकुम्भ 2025: महाकुम्भ में पुराने वृक्षों और वन्य जीवों का होगा संरक्षण, चलाया जाएगा रेस्क्यू ऑपरेशन
  • 04 जोन में 107 बीटों के रक्षक करेंगे 45 करोड़ श्रद्धालुओं की सुरक्षा
  • 10 कंपनी पीएसी, एसडीआरएफ, एनडीआरफ और 141 सुरक्षाकर्मी के अलावा 700 नावों पर तैनात रहेंगे रक्षक
  • चिकित्सक और जन औषधि केंद्रों से युक्त बनाए जा रहे आधुनिक वाटर कंट्रोल रूम
  • जल पुलिस ने तैरते थाने और चौकियों के साथ प्लान किए 16 सब कंट्रोल रूम
  • थर्मो-प्लास्टिक के फ्लोटिंग ब्लाक्स को जोड़कर बनाई जा रही बैरिकेडिंग, तैनात रहेंगे पुलिस कर्मी
  • सौर ऊर्जा का प्रयोग कर रिफ्लेक्टिव रिवर लाइन बनाई जा रही है, जिससे नाविक लेन का उल्लघंन नहीं कर पाएंगे
  • नावों के टकराने की नहीं रहेगी किसी प्रकार की कोई आशंका

प्रयागराज/लखनऊ , 15 नवम्बर 2024: महाकुंभ 2025 को सनातन धर्म का सबसे बड़ा आयोजन बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार हर आपात स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है। दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखते हुए 45 करोड़ लोगों की सुरक्षा का पूरा प्लान तैयार कर लिया गया है। इसके लिए जल पुलिस के लिहाज से चार जोन का सुरक्षा घेरा बनाया गया है। जिसमें बाकायदा 107 बीटों में बंटे सुरक्षा कर्मी देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की हिफाजत के लिए मौके पर तैनात रहेंगे। यहां कुल 10 कंपनी पीएसी, एसडीआरएफ, एनडीआरफ और 141 सुरक्षाकर्मियों के अलावा 700 नावों पर रक्षक तैनात किए जा रहे हैं। इनके साथ स्वास्थ्य कर्मियों की कई टीमें मिलकर काम कर रही हैं।

107 बीटों पर तैनात रहेंगे सुरक्षा कर्मी

आईजी पीएसी पूर्वी जोन डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि महाकुंभ में 10 कंपनी पीएसी देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहेगी। महाकुंभ के दौरान यहां प्रयागराज में देश-विदेश से करीब 45 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। संगम में स्नान करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा का विशेष इंतजाम किया गया है। जिसमें सुरक्षा कर्मियों को 107 बीटों में बांटा गया है। यही नहीं स्नानार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने पाए इसके लिए बाकायदा चिकित्सक और जन औषधि केंद्रों से युक्त आधुनिक वाटर कंट्रोल रूम बनाए जा रहे हैं। जल पुलिस अलग से थाने और चौकियों के साथ 16 सब कंट्रोल रूम बनाने की तैयारी में लगी है। जिससे पलक झपकते ही श्रद्धालुओं को हर सुविधा मुहैया कराई जा सके।

रिफ्लेक्टिव रिवर लाइन का नहीं किया जा सकेगा उल्लंघन: उन्होंने बताया कि कोई अनहोनी न होने पाए, इसके लिए थर्मो-प्लास्टिक के फ्लोटिंग ब्लाक्स को जोड़कर बैरिकेडिंग बनाई जा रही है, जिस पर 24 घंटे पुलिस कर्मी तैनात किए जाएंगे। स्नान के दौरान नावों के टकराने की कोई आशंका नहीं रहेगी, इसके भी पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं। जिसके तहत सौर ऊर्जा का प्रयोग कर रिफ्लेक्टिव रिवर लाइन बनाई जा रही है। जिसकी वजह से कोई भी नाविक लेन का उल्लघंन नहीं कर पाएगा।

चार जोन का सुरक्षा चक्र

महाकुंभ के दौरान देश-विदेश से प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार ने विशेष इंतजाम किए हैं। इसके तहत जल पुलिस को चार जोन में बांटकर सुरक्षा घेरा बनाया गया है।

पहला जोन (संगम क्षेत्र)
पहला संगम का घेरा रहेगा, जिसमें 25 बीट में 290 पीएससी, एसडीआरएफ, एनडीआरफ, 8 पीएससी गोताखोर, 30 सुरक्षाकर्मी, 18 प्राइवेट गोताखोर, 26 होमगार्ड, 27 मोटर बोट और 113 नाव सुरक्षा इंतजाम में लगाए गए हैं।

दूसरा जोन (बरगद घाट)
दूसरा बरगद घाट का घेरा रहेगा। इस दूसरे जोन में 28 बीट में 33 सुरक्षाकर्मी, 100 पीएसी व एनडीआरएफ एसडीआरएफ, 50 होमगार्ड, 40 पीएससी गोताखोर, 50 प्राइवेट गोताखोर, 24 मोटर बोट और 77 नाव रहेंगी।

तीसरा जोन (संगम क्षेत्र से दुर्वासा)
तीसरा जोन संगम क्षेत्र से दुर्वासा का होगा। इस तीसरे जोन में 16 बीट के अंतर्गत 21 सुरक्षाकर्मी, 68 पीएसी व एसडीआरएफ, एनडीआरफ, 16 प्राइवेट गोताखोर, 28 होमगार्ड, 8 मोटर बोट और 99 नाव सुरक्षा के लिए उपलब्ध रहेगी।

चौथा जोन (संगम क्षेत्र से फाफामऊ)
चौथा जोन 38 बीटों वाला रहेगा, जिसमें 50 सुरक्षाकर्मी और पीएसी, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ 210, 14 पीएससी गोताखोर, 19 प्राइवेट गोताखोर, 64 होमगार्ड, 33 मोटर बोट और 311 नाव रहेंगी।

कृषि को उद्यम से जोड़कर बढ़ाई जाए किसानों की आयः योगी आदित्यनाथ

  • सीएम योगी ने कृषि एवं प्रौद्योगिकी के महाकुंभ ‘कृषि भारत 2024’ का उद्घाटन करते हुए कही यह बात
  • कंट्री पार्टनर नीदरलैंड्स के साथ 2 एमओयू पर हस्ताक्षर, अनुभवों को साझा करने समेत कई विषयों पर मिलेगा लाभ
  • सीएम योगी ने कार्यक्रम से पूर्व नीदरलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक में भी लिया हिस्सा
  • सीएम योगी ने राज्यों तथा दुनिया के देशों को कृषि की बेस्ट प्रैक्टिसेस व एक्सपीरियंस को साझा करने और उनसे लाभान्वित होने का किया आह्वान
  • पिछले 10 वर्षों में सूदखोरी के चंगुल से मुक्त करके स्वावलंबन की दिशा में बढ़े हैं देश के किसानः सीएम योगी
  • सीएम योगी ने कृषि क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक, डिजिटल एग्रीकल्चर के विकास के साथ ही नेचुरल फार्मिंग को बढ़ाने पर भी दिया जोर
कृषि भारत 2024

लखनऊ, 15 नवंबर 2024: किसानों को सूदखोरी के चंगुल से मुक्त करके स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर कर सकें, इस दिशा में ढेर सारे प्रयास देश में 10 वर्षों के अंदर हुए। अभी भी बेहतरी की गुंजाइश है। बेहतर तकनीक का उपयोग करते हुए हम कैसे कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ा सकते हैं इस पर फोकस करना होगा। देश के अंदर अलग-अलग राज्यों के अपने अनुभव होंगे, अलग अलग एग्रीकल्चरल क्लाइमेटिक जोन के अनुसार देश के विभिन्न क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रगति की, विश्व में भी विषम परिस्थितियों के बीच ऐसा हुआ है। ऐसे में, अगर बेस्ट प्रैक्टिसेस को शेयर करते हैं तो बहुत कुछ हम लोग एक-दूसरे से सीख सकते हैं।

यह बातें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कृषि भारत 2024 कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में कही। कृषि व प्रौद्योगिकी के इस 4 दिनी महाकुंभ का आयोजन वृंदावन योजना मैदान में किया जा रहा है। उन्होंने कृषि को उद्यमिता से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर फोकस किया। कार्यक्रम से पूर्व सीएम योगी ने कंट्री पार्टनर नीदरलैंड्स के साथ द्विपक्षीय बैठक में भी हिस्सा लिया जिसमें नीदरलैंड्स के उप कृषि मंत्री जैन कीस गोएट, नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स की उपस्थिति में प्रतिनिधि मंडल संग बैठक की। उत्तर प्रदेश सरकार और नीदरलैंड्स के बीच 2 एमओयू भी साइन किए गए हैं और प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉल्स का सीएम योगी ने आवलोकन भी किया। 20,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में कृषि भारत प्रदर्शनी का आयोजन हो रहा है जहां कृषि के सतत विकास व नवाचार को किया शोकेस किया जा रहा है। कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उपकरण व कृषि सेवाओं और प्रौद्योगिकी से जुड़ी अन्य सेवाओं इस प्रदर्शनी में 250 से ज्यादा प्रदर्शक व 1 लाख से अधिक कृषक और आगंतुक कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराएंगे। कृषि भारत का आयोजन सीआईआई द्वारा किया जा रहा है जो विश्व स्तरीय कृषि प्रौद्योगिकी प्रगति के प्रदर्शन के लिए राज्य तथा राष्ट्रीय पवेलियन के तौर पर कार्य करेगा

प्रदेश वासियों को दीं शुभकामनाएं, सीआईआई का जताया आभार

4 दिनी कृषि भारत कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सीएम योगी ने प्रदेश वासियों को श्री गुरु नानक देव जी के 555वें प्रकाश पर्व, कार्तिक पूर्णिमा और धरती आबा और जनजातीय गौरव के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा के 150वें जन्मदिवस पर शुभकामनाएं दीं। सीएम योगी ने सीआईआई का धन्यवाद करते हुए कहा कि वर्ष 2000 से सीआईआई एग्रोटेक का भारत में आयोजन कर रहा है। पहली बार यह आयोजन चंडीगढ़ से हटकर उत्तर प्रदेश में आयोजित हो रहा है जो कि काफी मायने रखता है। उत्तर प्रदेश में सीआईआई के साथ मिलकर नीदरलैंड्स पार्टनर कंट्री के रूप में और ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूगांडा, स्पेन, यूके जैसे देशों की सहभागिता के साथ ही कृषि से जुड़े हुए एक्सपर्ट्स व स्टेकहोल्डर्स भी इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं।

3 से 4 गुना कृषि प्रोडक्शन बढ़ाने का है यूपी में पोटेंशियलः सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारत की सबसे बड़ी आबादी भारत में निवास करती है। यह 17 प्रतिशत यानी 25 करोड़ है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि का प्रदेश में केवल 11 प्रतिशत है, मगर हमारा कृषि उत्पादन देश के कुल एग्रीकल्चरल प्रोडक्शन का 20 प्रतिशत है, जो कि हमारे उत्तम जल संसाधन और उर्वरा भूमि ताकत को दर्शाता है। इसमें अभी भी बहुत संभावनाएं हैं। वर्तमान में हमें डिजिटल एग्रीकल्चर व टेक्नोलॉजी के माध्यम से जो उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है उसे हम तीन से चार गुना बढ़ा सकते हैं।

केमिकल फर्टिलाइजर पर कम हो निर्भरता, नेचुरल फार्मिंग को मिले प्रश्रय

कृषि की लागत को कम करना और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ ही केमिकल फर्टिलाइजर पर निर्धरता को घटाकर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने पर सीएम योगी ने फोकस किया। उन्होंने कहा कि किसानों को इसके बारे में जागरूक करना, बीज को बाजार में पहुंचाने की सुलभता, किसान को उपलब्ध कराने और कृषि को उद्यमिता से जोड़ते हुए एक व्यापक बदलाव की गुंजाइश है। सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हमने किसानों के हित के लिए अनेक कदम उठाए हैं। मृदा परीक्षण, कृषि बीमा, कृषि सिंचाई के साथ ही देश के अंदर 12 करोड़ अन्नदाता किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि नीदरलैंड्स की राजदूत ने यूपी के अपने पिछले दौरे पर इन मुद्दों पर चर्चा की थी। यूपी और नीदरलैंड्स के बीच इसी से संबंधित दो महत्वपूर्ण एमओयू हुए हैं। गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट के अलावा बी2बी एमओयू भी हुए हैं।

कार्यक्रम में सीएम योगी के साथ ही कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, मत्स्य पालन मंत्री डॉ.संजय कुमार निषाद, कृषि विपणन व खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह, सीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार सिंह, सीआईआई के वरिष्ठ अधिकारी, इनवेस्ट यूपी के सीईओ अभिशेक प्रकाश, एसीईओ व एलडीए के वीसी प्रथमेश कुमार समेत नीदरलैंड्स के उप कृषि मंत्री जैन कीस गोएट, नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स की प्रमुख उपस्थिति में प्रतिनिधि मंडल, कृषि उत्पादन आयुक्त मोनिका गर्ग, सीआईआई के अध्यक्ष व आईटीसी लिमिटेड के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक संजीव पुरी, तथा उन्य देशों से आए हुए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

द्विपक्षीय बैठक में सीएम योगी ने डिजिटल एग्रीकल्चर पर किया फोकस

उद्घाटन सत्र से पहले सीएम योगी ने नीदरलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में हिस्सा लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश 25 करोड़ जनसंख्या के साथ ही सबसे उर्वरा भूमि और सबसे अच्छा जलसंसाधन वाला राज्य भी है। उत्तर प्रदेश में एग्रीकल्चर, हॉर्टीकल्चर, डेयरी और फिशरी के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम लोगों ने अच्छे प्रयास किए हैं, मगर अभी इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए असीम संभावनाएं हैं। नीदरलैंड्स जैसे देशों के साथ इस शासन के अनुरूप आगे बढ़ते हैं तो उससे हमें अपने कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। यूपी में केंद्र व राज्य मिलकर 6 कृषि विश्वविद्यालयों का हम संचालन कर रहे हैं, हर जिले में हमारे कृषि विज्ञान केंद्र भी हैं, जो किसानों को आधुनिक बीज व तकनीक उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। सीएम योगी ने आगे कहा कि यूपी के एग्रीकल्चर फिशरी, हॉर्टीकल्चर, एनिमल हस्बैंड्री तथा डेयरी सेक्टर में तीन से चार गुना अधिक प्रोडक्शन हम कर सकेंगे। उनके अनुसार, हमें हमारे किसानों के लिए अच्छी, किफायती व सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी को लेकर नीदरलैंड्स का अनुभव प्राप्त हो रहा है। एग्रीकल्चर व हॉर्टीकल्चर के क्षेत्र में केमिकल पेस्टिसाइड से इतर नेचुरल फार्मिंग को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं, इस पर जोर देना होगा।

नीदरलैंड्स के उप कृषि मंत्री जैन कीस गोएट

नीदरलैंड्स को अपनी एग्रीकल्चरल एबिलिटी और कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल के लिए जाना जाता है। भारत-नीदरलैंड्स में पार्टनरशिप व समन्वय के जरिए सभी चुनौतियों से निपटा जा सकता है। भारत का कृषि क्षेत्र उपलब्धियों और असीम संभावनाओं से भरा हुआ है जिसमें सहभाग करना हमारे लिए गर्व का विषय है। पूरी दुनिया में क्लाइमेटिक चेंज समेत कई चुनौतियां हैं जिनके समाधान की जरूरत है। हम अपनी एक्सपर्टीज शेयर करने के साथ ही भारत के अनुभव से काफी कुछ सीख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री, सूर्य प्रताप शाही का बयान

सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए कृषि भारत 2024 के रूप में एक शानदार प्रयास किया गया है। महाकुंभ 2025 के पहले आज सीएम योगी के मार्गदर्शन में कृषि और प्रौद्योगिकी के महाकुंभ का आयोजन हो रहा है, जो प्रदेश व देश में कृषि उत्पादन को बढ़ाने व प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा।

सीआईआई के अध्यक्ष व आईटीसी लिमिटेड के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक संजीव पुरी का बयान

पहली बार एग्रोटेक का आयोजन लखनऊ में हो रहा है। यूपी एग्रीकल्चर का नया पावरहाउस है। सीएम योगी ने एग्रीकल्चर को एक नई दिशा दिखाई है। भारत के कृषि क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। मॉडर्न टेक्नोलॉजी पर फोकस इस दिशा में सहायक सिद्ध हो रहा है। सस्टेनेबिलिटी की दिशा में भी उत्तम प्रयास किया गया है। 250 मिलियन टन से बढ़कर भारत आज 330 मिलियन टन उपज कर रहा है, मगर इसमें वृद्धि का अभी और पोटेंशियल है।

सम्राट हर्षवर्धन: भारत के महान योद्धा, विद्वान और सम्राट की प्रेरणादायक कहानी

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  • सम्राट हर्षवर्धन का जन्म हरियाणा के थानेश्वर में पिता प्रभाकर वर्मन और माता यशोमति के घर हुआ था
  • 26 वर्ष की आयु में 606 ईस्वी में हर्षवर्धन को सिंहासन पर बैठाया गया, और उनका शासनकाल 647 ईस्वी तक चला।
  • हर्षवर्धन न केवल एक कुशल योद्धा और राजनीतिज्ञ थे, बल्कि उन्होंने नागानंद, रत्नावली, और प्रियदर्शिका जैसे साहित्यिक ग्रंथों की रचना भी की
  • हर्षवर्धन के वंश को पुष्पभूति वंश कहा जाता था, जिसे जनरल कनिंघम ने अपने शोध में बैंस राजपूत वंश के रूप में पहचाना है।
  • हर्षवर्धन ने कन्नौज को अपने साम्राज्य की राजधानी बनाया, और यह सांस्कृतिक और राजनीतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ।

लखनऊ: सम्राट हर्षवर्धन बैंस का जन्म हरियाणा के थानेश्वर में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रभाकर वर्मन और माता का नाम यशोमति था। हर्षवर्धन के जन्म की सटीक तिथि का उल्लेख इतिहास में नहीं मिलता है, लेकिन उनके राज्याभिषेक के समय उनकी आयु 26 वर्ष थी, जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि उनका जन्म लगभग 580 ईस्वी में हुआ होगा। हर्षवर्धन का शासनकाल 606 ईस्वी से 647 ईस्वी तक चला, जिसमें उन्होंने उत्तरी भारत के एक विशाल क्षेत्र पर शासन किया।

कन्नौज का राजा बनने की कहानी

हर्षवर्धन तीन भाई-बहनों में से एक थे। उनके बड़े भाई का नाम राज्यवर्धन द्वितीय और बहन का नाम राज्यश्री था। राज्यश्री का विवाह कन्नौज के राजा ग्रहवर्मन से हुआ था। लेकिन, जब पूर्वी मालवा के शासक देवगुप्त ने कन्नौज पर आक्रमण करके राजा ग्रहवर्मन की हत्या कर दी और राज्यश्री को बंदी बना लिया, तब राज्य में संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना के बाद राज्यवर्धन ने थानेश्वर से कन्नौज जाकर देवगुप्त को पराजित किया, लेकिन शशांक गौड़ की साजिश के तहत उनकी हत्या कर दी गई।

इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद, थानेश्वर के मंत्री परिषद ने हर्षवर्धन को 26 वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठा दिया। हर्षवर्धन ने कन्नौज की गद्दी पर अधिकार प्राप्त किया और अपने परिवार के खिलाफ किए गए अन्याय का प्रतिशोध लेने का संकल्प लिया। उन्होंने अपनी बहन राज्यश्री को विंध्याचल के जंगलों से मुक्त कराया, जहाँ वह बंदी जीवन व्यतीत कर रही थीं।

कुशल शासक और सांस्कृतिक संरक्षक

सम्राट हर्षवर्धन न केवल एक वीर योद्धा और राजनीतिज्ञ थे, बल्कि एक विद्वान और लेखक भी थे। उनके दरबार में विद्वानों और रचनाकारों को विशेष सम्मान दिया जाता था। हर्षवर्धन ने तीन प्रसिद्ध नाटकों— नागानंद, रत्नावली, और प्रियदर्शिका की रचना की थी। इन नाटकों में सामाजिक जीवन, मानवीय संबंधों और धार्मिक सहिष्णुता का चित्रण किया गया है।

हर्षवर्धन के दरबार के प्रमुख कवि बाणभट्ट थे, जिन्होंने हर्षचरित्र और कादंबरी जैसे महत्त्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। बाणभट्ट की रचनाओं में हर्षवर्धन के शासनकाल और उनकी महानता का वर्णन मिलता है, जिससे सम्राट की कुशलता और न्यायप्रियता का प्रमाण मिलता है।

राजवंश की पहचान और धार्मिक दृष्टिकोण

सम्राट हर्षवर्धन के वंश को पुष्पभूति वंश के नाम से भी जाना जाता है। यह एक शैव राजवंश था, जिसका मूल संस्थापक पुष्पभूति थे। हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान दो महत्वपूर्ण ताम्रपत्र— मधुबन और बंसखेड़ा ताम्रपत्र— प्राप्त हुए, जिनसे उनके वंश और शासन की पुष्टि होती है। भारतीय पुरातत्व विभाग के पहले प्रमुख जनरल कनिंघम ने मधुबन ताम्रपत्र का विश्लेषण करते हुए हर्षवर्धन के वंश को बैंस राजपूत राजवंश के रूप में पहचाना।

हालांकि, कुछ इतिहासकारों ने हर्षवर्धन के बौद्ध होने का उल्लेख किया है, लेकिन इसके स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। हर्षवर्धन ने प्रयागराज में महाकुंभ में स्नान के पश्चात् अपना संपूर्ण राजकोष दान कर दिया था, जो यह दर्शाता है कि वे हिंदू धर्म के अनुयायी थे और महाकुंभ के धार्मिक महत्व को समझते थे।

मौखरी वंश के साथ संबंध

हर्षवर्धन की बहन राज्यश्री का विवाह मौखरी वंश के नरवर्धन से हुआ था, जो एक प्राचीन क्षत्रिय कुल था। मौखरी वंश का उल्लेख प्राचीन शास्त्रों में अग्नि उपासक के रूप में मिलता है। यह संबंध हर्षवर्धन के राज्य की सामरिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत करता है और उनके परिवार को एक समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ता है।

राजनीतिक चुनौतियाँ और विजय

राज्यवर्धन की हत्या के बाद, हर्षवर्धन ने देवगुप्त और शशांक गौड़ के विरुद्ध अभियान छेड़ा और अपनी बहन राज्यश्री को मुक्त कराया। इसके बाद, कन्नौज के मंत्री परिषद ने राज्यश्री के कहने पर हर्षवर्धन को कन्नौज का राजा नियुक्त कर दिया। हर्षवर्धन के नेतृत्व में, कन्नौज एक महत्वपूर्ण साम्राज्य बन गया और भारत की राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।

सम्राट हर्षवर्धन का योगदान और विरासत

सम्राट हर्षवर्धन ने अपने शासनकाल में कला, साहित्य, और धर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने बौद्ध धर्म का समर्थन किया, लेकिन साथ ही हिंदू धर्म और अन्य धार्मिक परंपराओं के प्रति भी सहिष्णुता का भाव रखा। हर्षवर्धन की धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समृद्धि ने उनके शासनकाल को भारतीय इतिहास का एक सुनहरा अध्याय बना दिया। उनके द्वारा स्थापित कन्नौज, उस समय का सांस्कृतिक और राजनीतिक केंद्र बन गया था।

सम्राट हर्षवर्धन भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक शासक थे। उन्होंने अपने शासनकाल में राजनीतिक स्थिरता, सांस्कृतिक उन्नति, और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया। उनकी प्रशासनिक नीतियाँ, साहित्यिक कृतियाँ, और महान परोपकारी कार्य उनके व्यक्तित्व और शासनकाल की महानता को दर्शाते हैं। सम्राट हर्षवर्धन बैंस का जीवन और उनकी उपलब्धियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेंगी।

गोरखपुर में प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टर्स पर सख्त कार्रवाई: 2516 बकायेदारों को 15 दिनों में भुगतान का अल्टीमेटम, अन्यथा बैंक खाते सीज किए जाएंगे

गोरखपुर में नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स के बड़े डिफॉल्टर्स पर कड़ा रुख अपना लिया है। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश पर 2516 बड़े डिफॉल्टर्स की लिस्ट तैयार की गई है, जो लंबे समय से टैक्स पेंडिंग रखे हुए हैं। इन सभी डिफॉल्टर्स को जल्द ही नोटिस

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पहले ही दिया गया था डिस्काउंट का ऑप्शन नगर आयुक्त ने बताया कि फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए सभी टैक्सपेयर्स को प्रॉपर्टी टैक्स के बिल्स पहले ही भेजे जा चुके हैं, और 30 सितंबर तक पेमेंट पर डिस्काउंट भी दिया गया था। इसके बावजूद, कई बड़े डिफॉल्टर्स ने अभी तक पेमेंट नहीं किया है। इस संबंध में नगर निगम ने कई बार पर्सनल कॉन्टैक्ट किया, कैंप्स लगाए और रिमाइंडर भेजे, लेकिन कुछ लोग अब भी पेमेंट करने से बच रहे हैं।

जोन-वाइज तैयार की जा रही है डिफॉल्टर्स की लिस्ट सभी जोनल अफसरों को अपने-अपने जोन में डिफॉल्टर्स की डीटेल्ड लिस्ट बनाने का आदेश दिया गया है। इस पहले फेज की लिस्ट में 2516 बड़े डिफॉल्टर्स हैं, जिनमें कुछ गवर्नमेंट प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं। अफसरों को कहा गया है कि लिस्ट को वेरिफाई करें ताकि कोई भी व्यक्ति जिसने पहले ही पेमेंट कर दिया है, गलती से लिस्ट में ना रह जाए।

डिफॉल्टर्स के लिए लास्ट वॉर्निंग नगर आयुक्त ने सभी जोनल अफसरों को निर्देश दिए हैं कि एक हफ्ते के अंदर सभी डिफॉल्टर्स को डिमांड नोटिस भेजा जाए। गवर्नमेंट प्रॉपर्टीज के लिए अलग से फाइल तैयार करने के भी आदेश दिए गए हैं। साथ ही, डेप्युटी नगर आयुक्त और चीफ टैक्स अससमेंट ऑफिसर को डेली इस कैंपेन की प्रोग्रेस को मॉनिटर करने का निर्देश दिया गया है ताकि जल्द से जल्द रिवेन्यू कलेक्शन पूरा किया जा सके और नगर निगम की फाइनेंशियल पोजीशन मजबूत हो सके।

हाईकोर्ट ने कहा – वकील जांच एजेंसियों से सीधे संपर्क नहीं कर सकते: जमानत याचिका के जवाब के लिए ईडी को अनुस्मारक ईमेल भेजने पर वकीलों की तीखी आलोचना की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मनी लांड्रिंग (धन शोधन) के एक केस में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि “कोई वकील अपने मुवक्किल के साथ अपनी पहचान नहीं बता सकता। वह जांच अधिकारी आदि जैसी एजेंसियों से सीधे बातचीत नहीं कर सकता, जब तक कि अदालत द्वारा ऐसा आदेश

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हाईकोर्ट ने धन शोधन के एक मामले में एक आरोपी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील को जमानत याचिका लंबित रहने के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से सीधे संवाद करने के लिए फटकार लगाई।

यद्यपि कोर्ट ने एसवीओजीएल ऑयल गैस एंड एनर्जी लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक, आरोपी पदम सिंघी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामले में जमानत दे दी ।

आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने ईडी के जांच अधिकारी (आईओ) को दो ईमेल भेजे थे, जिसमें उनसे मामले में देरी से बचने के लिए अदालत के आदेश के अनुसार जमानत मामले में जवाब दाखिल करने का अनुरोध किया गया था।

अधिवक्ता के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई

न्यायमूर्ति समित गोपाल ने पद्म सिंधी बनाम प्रवर्तन निदेशालय के केस में अधिवक्ता के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि जवाब दाखिल करने के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है, तो सही उपाय यही है कि पीठ को सूचित किया जाए।

अदालत ने कहा, ” ई-मेल भेजकर अधिकारियों को अदालत के आदेश की याद दिलाना और उनसे इसका अनुपालन करने का अनुरोध करना इस मामले में उपस्थित वकीलों के कर्तव्यों के दायर में नहीं है। इस संबंध में न्यायालय ने अधिवक्ताओं के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के व्यावसायिक आचरण नियमों का भी उल्लेख किया।

नियमों में कहा गया है कि “कोई भी वकील किसी भी तरह से विवाद के विषय पर किसी भी पक्ष के साथ संवाद या बातचीत नहीं करेगा, सिवाय उस वकील के माध्यम से।”

वकीलों की कार्रवाई उचित नहीं थी

न्यायालय ने कहा कि वकीलों की कार्रवाई उचित नहीं थी और इसकी सराहना नहीं की जा सकती, क्योंकि जांच एजेंसी का प्रतिनिधित्व पहले दिन से ही वकीलों द्वारा किया गया था। हाईकोर्ट ने आरोपी के वकीलों के खिलाफ टिप्पणी प्रवर्तन निदेशालय के वकीलों की आपत्ति पर की।

कोर्ट ने कहा कि वकील का काम न्यायालय की सहायता करना है और आदेश का पालन न करने की शिकायत के मामले में, उचित प्रक्रिया यह है कि पीठ को इसकी जानकारी दी जाए।

वकीलों के संवाद से संबंधित मुद्दा ईडी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील द्वारा उठाया गया था, जिन्होंने जांच एजेंसी के साथ सीधे बातचीत करने के लिए आरोपी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील की योग्यता पर सवाल उठाया गया था। हालांकि, कोर्ट ने वकीलों का स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया।