Home Blog Page 1193

टीम इंडिया ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ लिखा नया इतिहास, सीरीज 3-1 से अपने नाम की।

सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ चार मैचों की टी20 सीरीज के आखिरी मुकाबले को 135 रनों से अपने नाम करने के साथ इस सीरीज को 3-1 से अपने नाम करने में कामयाब रही। जोहान्सबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में खेले गए इस टी20 सीरीज के आखिरी मुकाबले में टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था, जिसमें संजू सैमसन और तिलक वर्मा के बल्ले से बेहतरीन नाबाद शतकीय पारी देखने को मिली और टीम इंडिया 20 ओवर्स में एक विकेट के नुकसान पर 283 रन बनाने में कामयाब रहे। वहीं अफ्रीकी टीम टारगेट का पीछा करते हुए 18.2 ओवर्स में 148 रन बनाकर सिमट गई। गेंदबाजी में भारतीय टीम के लिए अर्शदीप सिंह ने सबसे ज्यादा 3 विकेट हासिल किए।

साउथ अफ्रीका की टी20 इंटरनेशनल में सबसे बड़ी हार

एडेन मारक्रम की कप्तानी में इस टी20 सीरीज में साउथ अफ्रीकी टीम का बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में ही काफी खराब प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें सीरीज के आखिरी मुकाबले में जहां अफ्रीकी टीम के गेंदबाजों की खूब कुटाई देखने को मिली जिसमें टीम इंडिया 283 के स्कोर तक पहुंचने में कामयाब रही वहीं टारगेट का पीछा करते हुए वह सिर्फ 148 रन ही बनाने में कामयाब रहे, जिसमें उनकी शुरुआत ही बेहद खराब देखने को मिली। अफ्रीका ने अपने शुरुआती चार विकेट सिर्फ 10 रनों के स्कोर पर ही गंवा दिए थे। साउथ अफ्रीका की ये टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी हार है। इससे पहले उन्हें पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 111 रनों की हार का सामना करना पड़ा था। वहीं भारत की ये टी20 इंटरनेशनल में अब तक रनों के अंतर के मामले में तीसरी सबसे बड़ी जीत है।

सैमसन और तिलक बल्ले से तो चक्रवर्ती गेंदबाजी में रहे सबसे आगे

इस टी20 सीरीज में टीम इंडिया की तरफ से बल्लेबाजी में जहां संजू सैमसन और तिलक वर्मा का कमाल देखने को मिला तो वहीं गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती अपना प्रभाव दिखाने में कामयाब रहे। तिलक के बल्ले से इस सीरीज में चार पारियों में 140 के औसत से 280 रन देखने को मिले तो वहीं संजू भी 72 के औसत से 216 रन इस सीरीज में बनाने में कामयाब रहे। इसके अलावा गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती ने चार मैचों में 11.50 के औसत से कुल 12 विकेट अपने नाम किए जबकि अर्शदीप सिंह भी 8 विकेट लेने में कामयाब रहे।

माउंट आबू और मेहसाणा में महसूस किए गए भूकंप के झटके, जानें रिक्टर स्केल पर दर्ज हुई तीव्रता।

गुजरात के मेहसाणा और राजस्थान के माउंट आबू में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए है। जानकारी के मुताबिक रात 10 बजकर 15 मिनट पर इन दोनों जगहों पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी से मिली जानकारी के मुताबिक रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.2 मापी गई है।

भूकंप के झटके महसूस होते ही लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम रहने के चलते किसी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। बता दें कि इससे पहले 10 नवंबर को भी माउंट आबू में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर आए भूकंप से इलाके में दहशत का मौहल देखा गया।

क्यों आता है भूकंप

भूकंप आने की वजह पर अगर गौर करें तो यह धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है, जिन्‍हें इनर कोर, आउटर कोर, मैन्‍टल और क्रस्ट कहा जाता है। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहा जता है। ये 50 किलोमीटर की मोटी परतें होती हैं, जिन्हें टैक्‍टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैक्‍टोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं, घूमती रहती हैं, खिसकती रहती हैं। ये प्‍लेट्स अमूमन हर साल करीब 4-5 मिमी तक अपने स्थान से खिसक जाती हैं। ये क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इस क्रम में कभी कोई प्लेट दूसरी प्लेट के निकट जाती है तो कोई दूर हो जाती है। इस दौरान कभी-कभी ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकरा जाती हैं। ऐसे में ही भूकंप आता है और धरती हिल जाती है। ये प्लेटें सतह से करीब 30-50 किमी तक नीचे हैं।

भूंकप का केंद्र और तीव्रता

भूकंप का केंद्र वह जगह होती है, जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा महसूस होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती है, इसका प्रभाव कम होता जाता है। इसकी तीव्रता का मापक रिक्टर स्केल होता है। रिक्‍टर स्‍केल पर यदि 7 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर की तरफ होती है तो प्रभाव क्षेत्र कम होता है। भूकंप की जितनी गहराई में आता है, सतह पर उसकी तीव्रता भी उतनी ही कम महसूस की जाती है।

नोएडा में बैंक का फर्जी मैसेज दिखाकर करता था कार की ठगी: आरसी मिलते ही कार बेचकर हो जाता था फरार, लग्जरी कारों को ही बनाता था निशाना – नोएडा न्यूज़।

नोएडा पुलिस की गिरफ्त में बैंक का फर्जी एसएमएस दिखाकर लग्जरी कार लेने वाला आरोपी।

नोएडा में फर्जी भुगतान का मैसेज दिखाकर लग्जरी कार लेने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इसकी पहचान राजदेब हुई है। हाल ही में इसने टाटा मोटर्स से एक टाटा सफारी कार ऐसे एक फर्जी ट्रांजैक्शन का मैसेज दिखाकर ली थी। जिसे दिल्ली में एक व्यक्ति को 12 लाख

.

26 लाख का दिखाया फर्जी मैसेज

डीसीपी राम बदन सिंह ने बताया कि सेक्टर-5 में सागर मोटर्स है। 10 अगस्त 2023 में आरोपी राजदेब और उसकी पत्नी कोमल देब के साथ वहां गया। उसने 11 हजार रुपए ऑनलाइन देकर टाटा सफारी कार बुक कराई। इसके बाद डिलीवरी के समय राजदेब व उसकी पत्नी कोयल देब ने अपने यस बैंक के खाते का चैक सागर मोटर्स के नाम काटा। ये चैक 26 लाख रुपए का था। पेमेंट होने से पहले ही उसने बैंक में फोन कर चैक को वापस करा लिया। एक फर्जी मैसेज बनाकर सागर मोटर्स के खाते में 26 लाख का भुगतान दिखाया। साथ ही टाटा सफारी कार की डिलीवरी ले ली।

जांच पड़ताल में निकला फर्जी

सागर मोटर्स ने जांच पड़ताल करने पर पता चला कि जो चैक सागर मोटर्स के पक्ष में दिया गया था। वह क्लियर नहीं हुआ है। जो मैसेज अपने फोन में एजेंसी को दिखाया गया था वह भी फर्जी है। चैक क्लियरिंग होने के संबंध में कुछ समय के लिए टाटा मोटर्स के बैंक अकाउंट में रुपये का भुगतान प्रदर्शित हुआ। जिसका फायदा उठाकर ही गाड़ी की डिलीवरी प्राप्त कर ली गई। कार दिल्ली में ललित कुमार दीक्षित नाम के व्यक्ति को रुपये 12 लाख में बेच दी। दिल्ली में भी ऐसे खरीदी कार

राजदेब ने पूछताछ में बताया कि उसके द्वारा इसी प्रकार राणा मोटर्स नोएडा व गैलेक्सी टोयोटा नजफगढ़ रोड मोतीनगर दिल्ली से भी ग्रान्ड विटारा कीमत करीब रुपए 22 लाख व टोयोटा हाई लक्स कीमत करीब 30 लाख रुपए धोखाधड़ी कर कार ली थी। वहां भी फर्जी तरीके से चैक दिया गया और ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए रुपए का भुगतान अकाउंट में दिखाकर डिलीवरी ली गई ।

आरसी कैंसिल न हो इसके लिए देता था आश्वासन उसने बताया गया कि ऐसा करने पर जब एजेंसी द्वारा उसको भुगतान के लिए कहा जाता है। तो वह आरसी मिलने तक पैसे देने के लिए मौखिक व लिखित रूप से आश्वस्त करता है। ताकि एजेंसी आरसी कैंसिल करने के लिए आरटीओ को शिकायत न करे। आरसी जारी होने के बाद वह जल्दी ही गाड़ियों को बेचकर फरार हो जाता था।

नए शहर में जमीन अधिग्रहण आपसी सहमति से होगा: पहले चरण में 3165 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की योजना, सेटलाइट इमेज का हो रहा उपयोग, सहमति मिलते ही दिया जाएगा मुआवजा – नोएडा न्यूज़।

नोएडा प्राधिकरण केबोर्ड रूम में डीएनजीआईआर को लेकर बैठक करते प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम व अन्य अधिकारी।

न्यू नोएडा के लिए जमीन अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। यहां आपसी सहमति के आधार पर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए सेट लाइट सर्वे किया जा रहा है। जिसमें सभी फेज की इमेज ली जा रही है। इसी निर्माण के अनुसार ही आबादी की जमीन का निर्धारण किया जाएग

.

बुलंदशहर के गांव से शुरू होगा अधिग्रहण

प्राधिकरण ने बताया कि न्यू नोएडा के पहले फेज में 3165 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। इसके लिए 1000 करोड़ रुपए रिजर्व किए गए है। अधिग्रहण की प्रक्रिया बुलंदशहर की ओर से की जाएगी। न्यू नोएडा के लिए बुलंदशहर के ही अधिकांश गांव है। इसके लिए वहां के प्रशासन से बातचीत की जा रही है। जितने किसानों से आपसी सहमति के आधार पर बात होती जाएगी। उतना पैसा प्राधिकरण अपनी ओर से बुलंदशहर प्रशासन को देता रहेगा। एक साथ 1000 करोड़ रुपए नहीं दिए जाएंगे।

मास्टर प्लान के निर्माण से पहले से तत्कालीन सीईओ के साथ एमओयू साइन हुए थे।

विकास के नक्शों को किया सुपर इंपोज

विचार ये भी किया जा रहा है कि यदि फेज-1 में फेज-2 की जमीन भी है तो उसका अधिग्रहण भी किया जाए। ताकि बाद में कोई दिक्कत न हो। हालांकि इसको लेकर शासन स्तर पर बातचीत की जाएगी। ये अधिग्रहण सैटलाइट इमेज के आधार पर होगा। इसी इमेज पर ही विकास के नक्शों को सुपरइंपोज किया जाएगा। इसके बाद फाइल ड्राइंग तैयार होगी। जिससे यहां डेवलपमेंट के काम शुरू किए जाएंगे।

न्यू नोएडा का मास्टर प्लान व अप्रूव नक्शा

209.11 वर्गकिमी में बसेगा नया शहर न्यू नोएडा 209.11 वर्गकिमी में यानी 20 हजार 911.29 हेक्टेयर में बसाया जाएगा। इस मास्टर प्लान को चार फेज में पूरा किया जाएगा। 2023-27 तक इसके 3165 हेक्टेयर को विकसित किया जाएगा। इसी तरह 2027 से 2032 तक 3798 हेक्टेयर एरिया को विकसित किया जाएगा। इसके बाद 2032-37 तक 5908 हेक्टेयर और अंत में 2037-41 तक 8230 हेक्टेयर जमीन को विकसित करने का प्लान है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण नीति क्या होगी। इसके लिए शासन स्तर पर गाइड लाइन जारी की जाएगी।

6 लाख की आबादी 209 वर्ग किमी में न्यू नोएडा को बसाया जाना है। डीएनजीआईआर मास्टर प्लान 2041 में 40 प्रतिशत भू उपयोग औद्योगिक , 13 प्रतिशत आवासीय और ग्रीन एरिया व रीक्रिएशन एक्टिविटी के लिए 18 प्रतिशत प्रावधान किया गया है। डीएनजीआईआर को गौतमबुद्ध नगर के 20 और बुलंदशहर के 60 गांवों को मिलाकर बनाया गया है। इस शहर की आबादी 6 लाख के आसपास होगी।

सेक्टर-6 स्थित नोएडा प्राधिकरण का ऑफिस

इस शहर का मास्टर प्लान के अनुसार क्या किया गया ब्रेकअप

लैंड यूजहेक्टेयर
रेजिडेंशियल2810.54
कमर्शियल849.97
पीएसपी इंस्टीट्यूशनल1739.93
फैसिलिटी / यूटिलिटी195.97
इंडस्ट्री8420
ग्रीन पार्क1792.26
ग्रीन बेल्ट एंड बफर1432.73
रिक्रेशनल530.22
वाटर बॉडी122.77
ट्रैफिक और ट्रांसपोटेशन2963.61

Baby Health Care: बच्चा सिर्फ भूख की वजह से ही नहीं, बल्कि इन कारणों से भी चूसता है उंगली, जानें डॉक्टरों की राय।

नवजात बच्चे अक्सर अपने मुंह में उंगली डाल लेते हैं। उंगलियां मुंह में चूंसना एक साधारण प्रक्रिया है। जब नवजात बच्चे अपने मुंह में उंगली डालते हैं, तो पेरेंट्स को ऐसा लगता है कि उनको भूख लगी ही और उसको दूध पिलाने लगती हैं। नए पेरेंट्स बच्चे की उंगली चूसने का मतलब बच्चे के भूख से लगाते हैं, तो रुक जाइए। क्योंकि सिर्फ भूख लगने पर ही नहीं बल्कि अन्य कई कारणों से भी बच्चे उंगलियां चूसने लगते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको नवजात शिशु के उंगलियां चूसने के कारण बताने जा रहे हैं।

बच्चे क्यों चूसते हैं उंगली

हर 2-3 महीने के बाद नवजात बच्चे इस दुनिया को समझने के लिए अपनी इंद्रियों का इस्तेमाल करने का प्रयास करते हैं। बता दें कि नवजात बच्चे के उंगलियां चूसने के निम्न वजह हो सकते हैं।

स्वाद और बनावट का अनुभव

नवजात बच्चे द्वारा उंगलियों को चूसना और अपने आसपास की चीजों को मुंह में लेना, यह जानने का एक तरीका होता है कि उनके आसपास क्या होता है। यह बच्चे का तरीका होता है उनको उस स्थिति में क्या करना चाहिए। बच्चों का उंगलियां चूसना उनके शारीरिक और मानसिक विकास का हिस्सा है। यह प्रक्रिया उनको चीजों के स्वाद और बनावट का अनुभव कराता है।

दांत निकलना

बता दें कि जब नवजात बच्चा 3-4 महीने का होता है, तो उसके दांत निकलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। ऐसे में बच्चे के मसूड़ों में खुजली और दर्द होने लगता है। इस स्थिति में बच्चे उंगली चूसने या चबाने लगते हैं। उंगली चूसने से बच्चे के मसूड़ों पर दबाव पड़ता है और उनको दर्द से राहत मिलती है।

शांति महसूस करना

कई बच्चे मानसिक तौर पर उंगलियां चूसने में काफी शांति महसूस करते हैं। ऐसा तब होता है, जब वह असहज या तनाव महसूस करते हैं। बच्चों द्वारा यह प्रक्रिया उनका भावनात्मक रूप से तनाव कम करने में सक्षम होते हैं।

कहीं भूख तो वजह नहीं

अगर नवजात बच्चा भूख की वजह से उंगलियां चूस रहा है, तो इसके साथ ही होठों को थपथपाना, मुट्ठियों को चूसना और रोने जैसी कई एक साथ काम करने की कोशिश करेगा। अगर आपका बच्चा उंगलियां चूसने के साथ यह सारी हरकतें करता है, तो यह भूख का संकेत है। इसका मतलब है कि उसे दूध पिलाने की जरूरत है।