वाशिंगटन: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध में जनहानि होने पर अफसोस जताते हुए कहा है कि उनका प्रशासन इस युद्ध को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। ट्रंप ने साथ ही कहा कि उनका प्रशासन पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए भी काम करेगा। उन्होंने बृहस्पतिवार को ‘अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के लिए अपने ‘मार-ए-लागो एस्टेट’ आवास में आयोजित एक समारोह में कहा, ‘‘हम पश्चिम एशिया (में शांति) के लिए काम कर रहे हैं और हम रूस और यूक्रेन पर बहुत मेहनत करेंगे। इसे रोकना होगा।’’
‘युद्ध रोकने की दिशा में करेंगे काम’
ट्रंप ने पांच नवंबर को देश में हुए राष्ट्रपति पद के चुनावों में उनकी शानदार जीत के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से उपस्थित होकर पहला बड़ा भाषण देते हुए कहा, ‘‘रूस और यूक्रेन को रुकना होगा। मैंने एक रिपोर्ट देखी। पिछले तीन दिन में हजारों लोग मारे गए। कई हजार लोग मारे गए। वो सैनिक थे। चाहे वो (मारे गए लोग) सैनिक हों या शहरों में बैठे लोग हों, हम इस (युद्ध रोकने पर) दिशा में काम करेंगे।’’ नव-निर्वाचित राष्ट्रपति ने कई बार कहा है कि उनकी प्राथमिकता युद्ध को समाप्त करना, यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सहायता के रूप में हो रही अमेरिकी संसाधनों की बर्बादी को रोकना है।
‘ट्रंप ने पुतिन के बारे में की हैं सकारात्मक बातें’
इस बीच ट्रंप के पिछले कार्यकाल में उप सहायक के रूप में कार्य कर चुकीं लीसा कर्टिस ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध को इस तरह से समाप्त करने की आवश्यकता है जिससे अन्य देशों को अपने पड़ोसियों पर अवैध रूप से आक्रमण करने के लिए प्रोत्साहन ना मिले। कर्टिस ने कहा, ‘‘(नवनिर्वाचित) राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के अन्य पूर्व राष्ट्रपतियों की तुलना में (रूस के) राष्ट्रपति (व्लादिमीर) पुतिन के बारे में अधिक सकारात्मक बातें की हैं। उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को समाप्त करने की कोशिश करने की भी बात की है। हमें अभी यह नहीं पता है कि वह ऐसा किस तरह करेंगे।’’
‘रूस फिर ऐसा ना करे’
कर्टिस ने ‘पीटीआई’ से साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैं बस इतना ही कहूंगी कि इसे इस तरह से किया जाना चाहिए कि रूस को अपने किए कार्यों के कुछ परिणाम भुगतने पड़ें।’’ उन्होंने कहा कि यह काम इस तरह से किया जाना चाहिए कि रूस दो या तीन साल बाद फिर यही काम करने की कोशिश ना करे।
पत्नी को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किए जाने को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एक अहम टिप्पणी सामने आई है। हाई कोर्ट ने तलाक के वास्ते 33 वर्षीय एक महिला की अर्जी मंजूर करते हुए कहा है कि पति द्वारा पत्नी को नौकरी छोड़ने और उसे पति की मर्जी एवं तौर-तरीके के मुताबिक रहने के लिए मजबूर किया जाना क्रूरता की श्रेणी में आता है। केंद्र सरकार के एक उपक्रम में प्रबंधक के रूप में इंदौर में पदस्थ महिला ने फैमिली कोर्ट में यह आरोप लगाते हुए पति के खिलाफ तलाक का आवेदन दिया था कि वह उसे नौकरी छोड़कर भोपाल में अपने साथ रहने के लिए मानसिक तौर पर परेशान कर रहा है। फैमिली कोर्ट ने महिला की यह अर्जी खारिज कर दी थी। जिसके बाद महिला ने फैमिली कोर्ट के इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट ने और क्या कहा?
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी की बेंच ने कानूनी पहलुओं पर गौर करते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और महिला की तलाक की अर्जी मंजूर कर ली। बेंच ने 13 नवंबर को सुनाए फैसले में कहा,“पति या पत्नी एक साथ रहना चाहते हैं या नहीं, यह उनकी इच्छा है। पति या पत्नी में से कोई भी दूसरे पक्ष को नौकरी नहीं करने या जीवनसाथी की पसंद के अनुसार कोई नौकरी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।’’ हाई कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में पति ने पत्नी पर दबाव डाला कि वह अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दे। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को नौकरी छोड़ने और उसे पति की इच्छा एवं तौर-तरीके के अनुसार रहने के लिए मजबूर किया जाना क्रूरता की श्रेणी में आता है।
जानें क्या है पूरा मामला
महिला के वकील राघवेंद्र सिंह रघुवंशी ने कहा,‘‘2014 में विवाह के बाद मेरी पक्षकार (मुवक्किल) और उसका पति भोपाल में रहकर सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। 2017 में मेरी पक्षकार को एक सरकारी उपक्रम में नौकरी मिल गई, लेकिन उसके पति को कोई रोजगार नहीं मिल पाने से उसके अहंकार को ठेस पहुंचने लगी।’’ उन्होंने कहा कि उनकी पक्षकार का पति इंदौर में प्रबंधक के रूप में पदस्थ पत्नी को कथित तौर पर परेशान करने लगा और उस पर दबाव डालने लगा कि वह अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर उसके साथ भोपाल में रहे।
रघुवंशी के मुताबिक महिला के पति ने उससे कहा कि जब तब उसे कोई रोजगार नहीं मिल जाता, वह भी कोई नौकरी न करे। उन्होंने कहा,‘‘पति की इस बात के लिए पत्नी के तैयार नहीं होने के कारण दम्पति में मतभेद बढ़ने लगे। पति की मानसिक प्रताड़ना से परेशान महिला ने आखिरकार तलाक का मन बना लिया।’’
झांसी (उत्तर प्रदेश): झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार रात को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। मेडिकल कॉलेज के स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (SNCU) में आग लगने से 10 नवजात शिशुओं की मौत हो गई। घटना के दौरान 54 बच्चे वार्ड में भर्ती थे, जिनमें से 39 बच्चों को बड़ी मुश्किल से सुरक्षित निकाला जा सका। हादसा रात करीब 10:30 बजे हुआ, जब ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई और पूरे वार्ड में तेजी से फैल गई।
इस भयावह घटना ने न केवल परिजनों के दिलों को तोड़ दिया है बल्कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का क्रम: कैसे हुआ हादसा?
हादसे की शुरुआत NICU वार्ड के ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में स्पार्किंग से हुई। इसके बाद एक धमाके के साथ आग भड़क उठी। इस वार्ड में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को रखा जाता था, जिनकी हालत पहले से ही नाजुक थी।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) सचिन माहोर ने बताया कि, “आग बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन ऑक्सीजन सप्लाई के कारण आग तेजी से फैल गई।”
अस्पताल में मौजूद फायर अलार्म सिस्टम ने काम नहीं किया। इसकी वजह से आग लगने का समय पर पता नहीं चल सका और रेस्क्यू में देरी हुई।
रेस्क्यू ऑपरेशन: जीवन बचाने की जद्दोजहद
घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की 6 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। अस्पताल स्टाफ और दमकल कर्मियों ने खिड़कियां तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला। हालांकि, वार्ड के अंदर तक पहुंचने में आग और धुएं ने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी।
NICU में मौजूद 54 बच्चों में से:
• 39 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया।
•10 बच्चों की जान चली गई।
• 16 बच्चों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
• 7 बच्चों को निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया।
दमकल कर्मियों ने बताया कि, “वार्ड में एंट्री और एग्जिट का सिर्फ एक ही रास्ता था, जो पूरी तरह से धुएं से भर गया था। इसी वजह से अंदर फंसे बच्चों को बचाना बेहद मुश्किल हो गया।”
जांच और कार्रवाई: सरकार का सख्त रुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को लेकर गहरा शोक व्यक्त किया और तत्काल उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए।
जांच के लिए तीन स्तर बनाए गए:
1. स्वास्थ्य विभाग: प्रशासनिक स्तर पर जांच करेगा।
2. पुलिस प्रशासन: हादसे में दोषियों की पहचान करेगा।
3. मजिस्ट्रेट जांच: घटना के तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच होगी।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, “यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
आर्थिक सहायता और राहत उपाय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को ₹5-5 लाख और घायल बच्चों के परिजनों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
परिजनों का दर्द और अस्पताल प्रशासन पर आरोप
हादसे के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। और परिजनों द्वारा सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने अपने बच्चों की माँग की जा रही है जो कहीं कहीं बहुत ही मार्मिक पल है।
कुछ परिजनों के बयान:
• महोबा के एक परिजन ने कहा, “डॉक्टर और नर्स वार्ड छोड़कर भाग गए। अगर वे अपनी ड्यूटी पर होते, तो शायद हमारे बच्चे बच जाते।”
• एक अन्य दंपति ने कहा, “हम दवा लेने बाहर गए थे। जब तक लौटे, हमारा बच्चा आग की लपटों में फंस चुका था।”
आरोप: फायर अलार्म ने नहीं किया काम
सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल के फायर अलार्म सिस्टम का रखरखाव नहीं किया गया था। अगर अलार्म समय पर बज जाता, तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
NICU वार्ड की खामियां
• एक ही एंट्री और एग्जिट पॉइंट: अंदर की तरफ मौजूद क्रिटिकल केयर यूनिट में प्रवेश और निकासी के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था। आग और धुएं के कारण यह ब्लॉक हो गया।
• अग्नि सुरक्षा उपकरण: वार्ड में अग्नि सुरक्षा उपकरण तो थे, लेकिन उनका इस्तेमाल सही समय पर नहीं हुआ।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने स्वीकार किया कि, “फरवरी में अग्नि सुरक्षा ऑडिट और जून में मॉक ड्रिल की गई थी। इसके बावजूद यह हादसा हुआ।”
क्या कहती है शुरुआती जांच रिपोर्ट?
मुख्य बिंदु:
1. आग लगने का प्राथमिक कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया है।
2. ऑक्सीजन सप्लाई की वजह से आग तेजी से फैली।
3. फायर अलार्म सिस्टम और अग्निशमन यंत्रों का सही रखरखाव नहीं किया गया था।
अग्निशमन विभाग का बयान:
दमकल विभाग के अधिकारियों ने कहा, “यदि फायर अलार्म सिस्टम काम करता, तो घटना को बड़े स्तर पर टाला जा सकता था।”
प्रशासन और सरकार का पक्ष
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक:
• “यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम परिजनों के साथ हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों को सजा दी जाएगी।”
• “आग ऑक्सीजन के कारण तेजी से फैली, जिससे इसे बुझाने में काफी मुश्किल हुई।”
कमिश्नर विमल दुबे:
•“NICU के बाहर की तरफ मौजूद बच्चों को बचा लिया गया। अंदर की तरफ मौजूद क्रिटिकल केयर यूनिट में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।”
यह हादसा अस्पतालों में सुरक्षा उपायों की गंभीर कमी को उजागर करता है। झांसी की यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता की चेतावनी है।
आवश्यक कदम:
1. सभी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों का नियमित ऑडिट और रखरखाव अनिवार्य किया जाए।
2. फायर अलार्म सिस्टम की समय-समय पर जांच हो।
3. अस्पताल कर्मचारियों को आपातकालीन स्थितियों में प्रशिक्षण दिया जाए।
4. NICU जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश और निकासी के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाए जाएं।
यह हादसा एक दर्दनाक अनुभव है, लेकिन यह समाज और सरकार के लिए एक सबक भी है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
नमो घाट पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रज्ज्वलित किया पहला दीप
3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो और ग्रीन आतिशबाजी ने मोह लिया सबका मन
दशाश्वमेध घाट पर अमर जवान ज्योति के जरिए वीरों को दी गई श्रद्धांजलि, शौर्य का हुआ सम्मान
पांडेय घाट पर 51 हजार दीपों के जरिए काशी ने किया सीएम योगी के ‘बंटोगे तो कटोगे’ का समर्थन
जल, थल, नभ में रही कड़ी सुरक्षा, नो फ्लाई जोन में तब्दील रही काशी
गंगा आरती, महाआरती और लाखों दीपों से काशी की देव दीपावली हुई अलौकिक
सोशल मीडिया पर भी छाई काशी की देव दीपावली, #DevDeepawali2024 हैशटैग टॉप ट्रेंड में बना रहा
वाराणसी/लखनऊ , 15 नवंबर 2024: देव दीपावली के पावन अवसर पर काशी के घाटों पर दीपों की अविरल शृंखला ने पूरी दुनिया को आकर्षित कर दिया। क्षितिज में भगवान सूर्य जैसे ही अस्ताचल हुए, संपूर्ण विश्व के नाथ बाबा विश्वेश्वर की नगरी काशी दीपों की रोशनी से नहा उठी। उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर श्रृंखलाबद्ध दीपों ने अद्वितीय अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया। देव दीपावली का पहला दीप नमो घाट पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करकमलों से प्रज्वलित हुआ। इस दौरान नमो घाट पर भव्य आतिशबाजी भी हुई।
गंगा आरती और क्रूज़ पर मेहमानों का स्वागत
इसके उपरांत उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित अन्य मेहमानों ने क्रूज़ पर सवार होकर मां गंगा की महाआरती का दर्शन किया। इस दौरान नौका विहार करते समय पर्यटक भी अपने सीएम योगी सहित अन्य गणमान्य हस्तियों को पाकर खुशी से झूम उठे और हर-हर महादेव एवं जय श्रीराम के उद्घोष से उनका स्वागत किया। उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री समेत क्रूज़ पर सवार सभी गणमान्य लोगो ने हाथ हिलाकर और हाथ जोड़कर पर्यटकों का अभिवादन स्वीकार किया। वहीं चेत सिंह घाट पर 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो और गंगा पार रेत पर आतिशबाजी के भव्य दृश्य ने उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभी घाटों पर शंखनाद, घण्ट-घड़ियालों की ध्वनि में भव्य महाआरतिआं काशी की धरती पर देवताओं का स्वागत करती दिखीं।
51 हजार दीपों से सजा सीएम योगी का स्लोगन ‘बंटोगे तो कटोगे’, राष्ट्रवाद और अध्यात्म का संगम
काशी में इस बार की देव दीपावली अद्भुत नजारों से भरी रही। गंगा के घाटों पर लाखों दीपों की रौशनी ने आस्था और भक्ति का अनुपम संगम प्रस्तुत किया तो वहीं विशेष आकर्षण का केंद्र बना पांडेय घाट, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रसिद्ध नारा ‘बटोगे तो कटोगे’ 51 हजार दीपों से उकेरा गया। पांडेय घाट पर जलाए गए इन दीपों ने लोगों का ध्यान खींचा और चर्चाओं का विषय बन गया। लोगों ने इस कला के माध्यम से मुख्यमंत्री के संदेश की प्रशंसा की वहीं घाटों पर उमड़े श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत दृश्य को कैमरों में कैद कर अपने अनुभव साझा किए।
दशाश्वमेध घाट पर आयोजित महाआरती में धर्म के साथ-साथ राष्ट्रवाद का संदेश भी दिया गया। अमर जवान ज्योति की अनुकृति पर वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस वर्ष महाआरती कारगिल युद्ध के शहीदों को समर्पित रही और ‘भगीरथ शौर्य सम्मान’ के तहत वीर योद्धाओं को सम्मानित किया गया। 21 अर्चक व 42 देव कन्याओं रिद्धि सिद्धि के रूप में दशाश्वमेध घाट पर महाआरती की। शहर के छह प्रमुख स्थानों पर लगी एलईडी स्क्रीन पर दशाश्वमेध घाट की देव दीपावली की महाआरती का सजीव प्रसारण किया गया।
आकर्षण का केंद्र बना 3डी शो और ग्रीन आतिशबाजी, दीपों से रोशन हुए काशी के घाट और कुंड
पर्यटकों के लिए इस बार काशी के चेत सिंह घाट पर 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग शो का आयोजन किया गया, जिसमें काशी का धार्मिक इतिहास और गंगा अवतरण की कथा प्रस्तुत की गई। श्री काशी विश्वनाथ धाम के सामने गंगा पार रेत पर ग्रीन क्रैकर्स शो ने लोगों का दिल जीत लिया। घाटों और मंदिरों को आकर्षक विद्युत सजावट और तिरंगे स्पाइरल झालरों से सजाया गया था। इस वर्ष देव दीपावली पर 17 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जिसमें 12 लाख दीप योगी सरकार द्वारा और 3 लाख गाय के गोबर से बने दीपों का योगदान रहा। दीपों की अटूट श्रृंखला में जन सहभागिता की आहुति से कुल 21 लाख से अधिक दीपों ने देवताओं का स्वागत किया। काशी के घाटों, कुंडों, तालाबों और देवालयों और गंगा उस पार भी दीपों की अविरल श्रृंखला ने आकाशगंगा जैसी छटा बिखेरी। गंगा-गोमती तट, मार्कण्डेय महादेव और वरुणा नदी के तटों पर भी लाखों दीप जलाए गए। देव दीपावली पर काशी के सभी मंदिरों, घाटों पर फसाड लाइट, सड़क के विद्युत खंभों को भी आकर्षक तिरंगे स्पाइरल झालरों से सजाया गया।
फूलों से सजा श्री काशी विश्वनाथ धाम, कड़ी सुरक्षा और यातायात प्रबंधन
देव दीपावली के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई और धाम परिसर को फूलों से सजाया गया। बाबा के आंगन में दीपों की रोशनी ने इस स्थान को और भी दिव्य बना दिया। देव दीपावली के मौके पर वाराणसी को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया। सुरक्षा की दृष्टि से घाटों पर कड़ी निगरानी रखी गई, ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध था और सादे कपड़ों में महिला पुलिस और एंटी रोमियो स्क्वाड तैनात थे। गंगा में नाव संचालन के लिए दिशाओं के आधार पर लेन निर्धारित की गई, नाविकों को सुरक्षा के सख्त निर्देश दिए गए थे। एनडीआरएफ और जल पुलिस ने वाटर एम्बुलेंस और चिकित्सकीय उपकरणों के साथ तैनाती की थी। घाटों, नदी और सड़क पर सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, पार्किंग, इमर्जेंसी प्रबंधन, क्यूआरटी टीम, इंट्री एंड एग्जिट को लेकर पूरी तैयारी का खाका पहले तैयार किया गया था।
सोशल मीडिया पर भी छाई काशी की देव दीपावली
वाराणसी में शुक्रवार को मनाई गई देव दीपावली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लगातार ट्रेंड करती रही। हैशटैग #DevDeepawali2024 के जरिए यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे यह उत्सव वैश्विक ध्यान आकर्षित करने में सफल रहा। मोदी-योगी सरकार में काशी की देव दीपावली अब लोकल से ग्लोबल बन गई है। वाराणसी के 84 घाटों पर 17 लाख से अधिक दीये जलाए गए और भव्य आतिशबाजी ने रात को रोशन कर दिया, जिसे लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर साझा किया।
देव दीपावली पर इस वर्ष काशी की भव्यता ने न केवल देश बल्कि विदेशों से आए पर्यटकों का भी मन मोह लिया। परंपरा और आधुनिकता के संगम ने इस महोत्सव को अविस्मरणीय बना दिया। शिव नगरी काशी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीयता का ऐसा संगम किसी और स्थान पर नहीं देखा जा सकता।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘ग्रामश्री’ और ‘क्राफ्टरूट्स’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
हस्तशिल्पियों और कारीगरों के लिए एक विशेष विश्वविद्यालय की स्थापना की आवश्यकता पर बल।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कारीगरों की कला को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी।
प्रदर्शनी में स्टोन वर्क, काष्ठ कला, धातु की प्रतिमाएं, शॉल, साड़ियां और अन्य वस्त्र प्रदर्शित।
क्राफ्टरूट्स संस्था की 25 वर्षों की यात्रा और 77 प्रदर्शनी का विवरण।
लखनऊ, 15 नवम्बर, 2024: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज लखनऊ के कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी में ‘ग्रामश्री’ और ‘क्राफ्टरूट्स’ द्वारा आयोजित हैंडीक्राफ्ट प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर, उन्होंने हस्तशिल्पियों और कारीगरों के अद्वितीय योगदान को सराहते हुए कहा कि देश की प्रगति तभी संभव है जब बड़े लोग छोटे लोगों की उंगली पकड़कर उन्हें आगे बढ़ने में मदद करेंगे।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस अवसर पर महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज में उनकी बढ़ती भूमिका की चर्चा की। उन्होंने बताया कि देश की आधी आबादी, यानी महिलाएं, जब घरों से बाहर निकलकर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेंगी, तब देश की वास्तविक प्रगति होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण की सराहना की, जिसके तहत महिलाओं ने सशस्त्र बलों में विशेष स्थान हासिल किया है, जैसे कि सेना में विमानों का संचालन।
राज्यपाल ने हस्तशिल्पियों के योगदान की प्रशंसा करते हुए उनके लिए एक विशेष विश्वविद्यालय की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय उन अनपढ़ कारीगरों को भी नामांकन और प्रमाण-पत्र देने का अवसर देगा जो अपने हुनर के कारण पहचान बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को इन कारीगरों को डिजाइन और प्रशिक्षण देने का कार्य करना चाहिए ताकि उनके उत्पाद उच्च गुणवत्ता के बन सकें। राज्यपाल ने सुझाव दिया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिए गए गांवों में क्रियान्वित किया जाना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का संबोधन: उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस अवसर पर क्राफ्टरूट्स की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इन कारीगरों की मेहनत और शिल्पकला को हमें समझना चाहिए और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब विभिन्न राज्यों के लोग एक-दूसरे के साथ जुड़ेंगे और सहयोग करेंगे, तब यह संकल्पना साकार होगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्राफ्टरूट्स जैसे मंच से कारीगरों को अपनी कला के प्रदर्शन और विक्रय के लिए एक बेहतर अवसर मिलता है।
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ का वक्तव्य: प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने प्रदर्शनी के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन देश की विविध सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और उसे बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में देश के कोने-कोने से आए कारीगरों की कला और शिल्प देखने को मिलते हैं, जो पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
क्राफ्टरूट्स संस्था की अध्यक्ष अनारबेन पटेल का संबोधन: क्राफ्टरूट्स संस्था की अध्यक्ष अनारबेन पटेल ने संस्था के उद्देश्यों और पिछले 25 वर्षों में किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य कारीगरों को उनके उत्पादों का एक मंच प्रदान करना और उनकी कला का संरक्षण करना है। अब तक संस्था ने 77 से अधिक प्रदर्शनी आयोजित की हैं, जिनके माध्यम से अनेक कारीगरों को लाभ मिला है।
प्रदर्शनी का अवलोकन और विशेष आकर्षण: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदर्शनी का दौरा किया और विभिन्न स्टालों पर प्रदर्शित उत्पादों का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में काष्ठ कला, स्टोन वर्क, धातु की प्रतिमाएं, शॉल, साड़ियां और श्रृंगार सामग्री जैसी कलाकृतियां शामिल थीं। विशेष रूप से, स्टोन वर्क के उत्पाद इस बार के आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्हें आईआईटी कानपुर के सहयोग से कोर्स पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की मौजूदगी: इस अवसर पर सरोजनीनगर से जनप्रिय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कारीगरों के कार्यों की प्रशंसा की और उनकी कला को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। डॉ. सिंह ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन स्थानीय शिल्पकारों को न केवल मंच प्रदान करते हैं, बल्कि उनकी कला और संस्कृति को एक नई पहचान भी देते हैं। उनके उपस्थिति ने इस आयोजन को और महत्वपूर्ण बना दिया।
इस अवसर पर एक कविता का पाठ भी हुआ, जो क्राफ्टरूट्स संस्था के कार्यों की प्रशंसा में कुलदीप सिंह द्वारा रचित थी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान, समाजसेवी राजेश दयाल, अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, व्यापारी, और राजभवन के अधिकारी भी उपस्थित रहे।