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दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यक्रम: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रेरणादायक भागीदारी और महत्वपूर्ण पहल

दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यक्रम: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रेरणादायक भागीदारी और महत्वपूर्ण पहल
दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यक्रम: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रेरणादायक भागीदारी और महत्वपूर्ण पहल
  • सरोजनीनगर में @CRC_Lucknow द्वारा आयोजित दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यक्रम में सहायक उपकरण वितरण और मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया।
  • भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “विकलांग” शब्द को बदलकर “दिव्यांग” किया गया, जिससे दिव्यांगजनों की दिव्यता और क्षमता को सम्मान मिला।
  • उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजन पेंशन ₹300 से बढ़ाकर ₹1000 की गई, और दिव्यांगजन कल्याण के लिए ₹1170 करोड़ का बजट आवंटित किया गया।
  • सरोजनीनगर में ₹60 लाख से अधिक के सहायक उपकरण वितरित किए गए, जिससे 1000 से अधिक दिव्यांगजनों को जीवन में सहायता मिली।

लखनऊ (सरोजनीनगर), 03 दिसम्बर 2024: मंगलवार को सरोजनीनगर में @CRC_Lucknow द्वारा आयोजित दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यक्रम एक अत्यंत प्रेरणादायक और हर्षित अनुभव था। इस आयोजन का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनके अधिकार और आत्मनिर्भरता की दिशा में मदद देना था, और कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी लोग इस उद्देश्य को लेकर एकजुट थे। दिव्यांगजनों के लिए यह आयोजन उनके संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज में योगदान को मान्यता देने का एक अद्वितीय अवसर था। कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रम और उनकी आत्मविश्वास से भरी मुस्कान ने सबको प्रेरित किया। उनका हौसला और जज़्बा यह दर्शाता है कि दिव्यांगजन अपने भीतर अद्वितीय क्षमता रखते हैं और किसी भी दीवार को सीढ़ी में बदलने की काबिलियत रखते हैं।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ

इस कार्यक्रम के दौरान दिव्यांगजन लाभार्थियों को सहायक उपकरण प्रदान किए गए, जो उनके दैनिक जीवन को सरल और सुगम बनाने के लिए आवश्यक थे। इसके साथ ही, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया। इन बच्चों की मेहनत और कड़ी संघर्ष ने उन्हें सफलता की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, और इस सम्मान ने उनके आत्मविश्वास को और भी मजबूत किया। इन प्रयासों ने दिव्यांगजनों को यह विश्वास दिलाया कि वे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उनके प्रयासों की सराहना की जाती है।

डॉ. राजेश्वर सिंह की भागीदारी: समाज के प्रति संवेदनशीलता

इस कार्यक्रम में लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा से जनप्रिय भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया। डॉ. सिंह का राजनीतिक करियर उनकी कार्यशैली और समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने दिव्यांगजनों, वृद्धजनों, और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए कई पहल की हैं। उनके प्रयासों से न केवल सरोजनीनगर बल्कि पूरे प्रदेश में एक सकारात्मक बदलाव आया है।

डॉ. राजेश्वर सिंह का मानना है कि दिव्यांगजन केवल शारीरिक रूप से सक्षम नहीं होते, बल्कि उनकी मानसिक और आत्मविश्वास की शक्ति भी उन्हें समाज में विशेष स्थान दिलाती है। दिव्यांगजन को सशक्त बनाने के लिए डॉ. सिंह ने हमेशा समाज में जागरूकता पैदा करने की कोशिश की है, और उनकी उपस्थिति इस कार्यक्रम में यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वह इस दिशा में निरंतर काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में सरोजनीनगर क्षेत्र में दिव्यांगजन कल्याण की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह की महत्वपूर्ण योजनाएँ

कार्यक्रम के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए मेरा लक्ष्य व प्रयास इस प्रकार हैं:

  • Social Security Cover: पेंशन में वृद्धि, पूर्ण और सुलभ छात्रवृत्ति, आसान रजिस्ट्रेशन और विभिन्न सरकारी योजनाओं में कंसेशन प्रदान करना।
  • Improved Health Facilities: दिव्यांगजनों के लिए बेहतर चिकित्सा सेवाएं और physiotherapy centers की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • Better Employment Opportunities: दिव्यांगजनों के लिए Skill Development कार्यक्रमों के माध्यम से नए रोजगार के अवसर पैदा करना, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

सरोजनीनगर में ₹60 लाख के सहायक उपकरण वितरण

कार्यक्रम के दौरान सरोजनीनगर में ₹60 लाख से अधिक के सहायक उपकरण वितरित किए गए, जिससे 1000 से अधिक दिव्यांग भाई-बहनों को उनके जीवन को सुगम बनाने में मदद मिली। इन उपकरणों से दिव्यांगजनों को अपने दैनिक कार्यों को आसान बनाने में मदद मिल रही है, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता में वृद्धि हो रही है। इस पहल के तहत दिव्यांगजनों को न केवल भौतिक सहायता मिल रही है, बल्कि यह उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से भी सशक्त बना रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश सरकार की पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगजनों के प्रति अपनी संवेदनशीलता को दर्शाते हुए “विकलांग” शब्द को बदलकर “दिव्यांग” शब्द को अपनाया, जिससे उनकी दिव्यता और क्षमता को सम्मान मिला। इस कदम ने समाज में दिव्यांगजनों को लेकर सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में RPWD एक्ट, 2016 के माध्यम से दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। इसमें Disabilities की श्रेणियों को 7 से बढ़ाकर 21 किया गया है, और शिक्षा में 5% और नौकरियों में 4% आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा, Accessible India Campaign के तहत सार्वजनिक स्थलों और परिवहन को दिव्यांगजनों के लिए सुगम बनाने का अभूतपूर्व कार्य किया गया है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दिव्यांगजन पेंशन को ₹300 से बढ़ाकर ₹1000 किया गया है। इसके साथ ही 3.05 लाख सहायक उपकरण और 8000 मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल्स वितरित की गई हैं। सरकार ने दिव्यांगजन कल्याण के लिए ₹1170 करोड़ का बजट आवंटित किया है, जो दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समाज में जागरूकता और सम्मान की आवश्यकता

समाज में दिव्यांगजनों के प्रति जागरूकता और सम्मान बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है। इस दिशा में किए गए प्रयासों से दिव्यांगजन न केवल अपनी पहचान बना रहे हैं, बल्कि समाज में अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। मेरी पूरी कोशिश यही है कि हर दिव्यांगजन को समान अवसर और सम्मान मिले, और उनके जीवन को आसान बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की ओर अग्रसर हैं। इस तरह के कार्यक्रम और पहलों से दिव्यांगजन न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। इस दिशा में किए गए कार्य निश्चित रूप से हमारे समाज को समृद्ध और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी को मिला रोचडेल पायनियर्स अवॉर्ड, डॉ. वर्गीज कुरियन के बाद दूसरा भारतीय सम्मानित

इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी को मिला रोचडेल पायनियर्स अवॉर्ड, डॉ. वर्गीज कुरियन के बाद दूसरा भारतीय सम्मानित
इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी को मिला रोचडेल पायनियर्स अवॉर्ड, डॉ. वर्गीज कुरियन के बाद दूसरा भारतीय सम्मानित
  • इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी को 2024 का रोचडेल पायनियर्स अवॉर्ड मिला।
  • डॉ. अवस्थी, डॉ. वर्गीज कुरियन के बाद इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले दूसरे भारतीय हैं।
  • यह पुरस्कार सहकारी क्षेत्र में नवाचार और वित्तीय स्थिरता में योगदान के लिए दिया गया।
  • इफको ने नैनो फर्टिलाइजर उत्पादों को विकसित कर 25 देशों में निर्यात करने की योजना बनाई है।
  • डॉ. अवस्थी ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘सहकारिता से समृद्धि’ दृष्टिकोण को मान्यता दी।
  • सहकार भारती पैक्स प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक एवं इफको आरजीबी सदस्य राजदत्त पाण्डेय सहित अन्य सहकारी जनों ने बधाई दी

नई दिल्ली/लखनऊ: इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी को 2024 का प्रतिष्ठित रोचडेल पायनियर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें सहकारी क्षेत्र में नवाचार और वित्तीय स्थिरता में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया। डॉ. अवस्थी, डॉ. वर्गीज कुरियन के बाद इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले दूसरे भारतीय हैं, जो भारतीय सहकारी आंदोलन के प्रति उनके समर्पण और योगदान को मान्यता देता है।

इस ऐतिहासिक समारोह का आयोजन नई दिल्ली में किया गया था, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहकारी संघ (ICA) के अध्यक्ष एरियल गुआर्को ने डॉ. अवस्थी को यह पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर इफको और केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में सहकारी आंदोलन को नई दिशा देने के लिए डॉ. अवस्थी की मेहनत को सराहा गया।

सहकारी आंदोलन के प्रति प्रतिबद्धता और योगदान

डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने 1976 में इफको से जुड़ने के बाद इसे भारत का सबसे बड़ा उर्वरक उत्पादक और वैश्विक स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) प्रति व्यक्ति के हिसाब से सबसे बड़ा सहकारी संगठन बना दिया। उनका नेतृत्व और दूरदृष्टि इफको को न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में सहकारी आंदोलन के क्षेत्र में अग्रणी बना चुकी है।

नैनो फर्टिलाइजर का विकास और वैश्विक विस्तार

डॉ. अवस्थी की अगुवाई में इफको ने नैनो फर्टिलाइजर जैसे अत्याधुनिक उत्पादों को विकसित किया है, जो कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति लेकर आए हैं। इफको अब तक 2.04 करोड़ नैनो यूरिया और 44 लाख नैनो डीएपी की बोतलें बेच चुका है। इसके साथ ही 80,000 से अधिक किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को प्रशिक्षित भी किया गया है। अब इफको 25 देशों में नैनो फर्टिलाइजर निर्यात करने की योजना बना रहा है, जिससे भारतीय सहकारी संगठन की वैश्विक उपस्थिति और मजबूत होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकारिता से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को मान्यता

इस सम्मान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकारिता से समृद्धि’ के दृष्टिकोण का प्रतीक माना जा रहा है। डॉ. अवस्थी ने इस मौके पर कहा कि यह पुरस्कार इफको की प्रतिबद्धता और सहकारी आंदोलन के प्रति हमारे योगदान का प्रतीक है। उन्होंने देशभर में सहकारी क्षेत्र के विस्तार के लिए किए गए प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

सहकार भारती और अन्य सहकारी संस्थाओं द्वारा बधाई

डॉ. अवस्थी को इस सम्मान पर सहकार भारती पैक्स प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक एवं इफको आरजीबी सदस्य राजदत्त पाण्डेय सहित अन्य सहकारी जनों ने बधाई दी और उन्हें शुभकामनाएं दी। इस सफलता को उन्होंने भारतीय सहकारी क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।

डॉ. उदय शंकर अवस्थी का रोचडेल पायनियर्स अवॉर्ड प्राप्त करना न केवल इफको के लिए बल्कि समग्र भारतीय सहकारी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका नेतृत्व और योगदान भारतीय कृषि, सहकारिता और वैश्विक बाजार में नए आयाम स्थापित कर रहा है। यह पुरस्कार उनके कार्यों की सराहना है और भविष्य में सहकारी आंदोलनों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरणा है।

ऊर्जा मंत्री ने मऊ में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का किया प्रचार-प्रसार

ऊर्जा मंत्री ने मऊ में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का किया प्रचार-प्रसार
ऊर्जा मंत्री ने मऊ में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का किया प्रचार-प्रसार
  • सौर ऊर्जा पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार हर घर को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • सौर ऊर्जा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रधानमंत्री ने एक राष्ट्रीय योजना शुरू की है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए सब्सिडी दे रही है।
  • सौर ऊर्जा से बिजली बिल कम होंगे और आर्थिक रूप से भी फायदा होगा।
  • योजना का लाभ लेने के लिए pmsuryaghar.gov.in पर आवेदन करें।

लखनऊ, 03 दिसम्बर 2024: उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मंगलवार को मऊ जिले में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का प्रचार-प्रसार किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सौर ऊर्जा के लाभों के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना था, ताकि आमजन इस योजना का लाभ उठाकर सौर ऊर्जा अपनाएं और अपने बिजली बिलों में कमी ला सकें।

ऊर्जा मंत्री ने इस अवसर पर कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने और हर घर तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने के लिए पीएम सूर्यघर योजना की शुरुआत की है। यह योजना राज्य को स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। सौर ऊर्जा न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी नागरिकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।”

मंत्री ने आगे बताया कि सरकार सोलर रूफटॉप लगाने के लिए सब्सिडी दे रही है, जिससे लोग अपने घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकते हैं। इससे बिजली के बिलों में कमी आएगी और लोग आर्थिक रूप से भी सशक्त बनेंगे। उन्होंने कहा कि योजना के तहत लोगों को आसान किस्तों पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है और साथ ही अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर आय अर्जित करने का भी अवसर मिलेगा।

श्री शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 13 फरवरी 2024 को पीएम सूर्यघर योजना की शुरुआत की थी और इसके तहत पूरे देश में एक करोड़ घरों को सोलर रूफटॉप से जोड़ा जाएगा। उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत 25 लाख घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाने हैं। उन्होंने बताया कि एक किलोवाट सोलर रूफटॉप के लिए 45 हजार रुपये, दो किलोवाट के लिए 90 हजार रुपये और तीन किलोवाट के लिए एक लाख आठ हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। योजना का लाभ लेने के लिए लोग नेशनल पोर्टल https://pmsuryaghar.gov.in/ पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों से मंत्री ने अपील की कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और सौर ऊर्जा को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने यह भी कहा कि नेडा (राष्ट्रीय नवाचार और विकास एजेंसी) के अधिकारियों द्वारा योजना का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है और सूर्य सखियों द्वारा गांव-गांव, घर-घर जाकर लोगों को सौर ऊर्जा के लाभों और इसे स्थापित करने के तरीके के बारे में बताया जा रहा है। कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया और सौर ऊर्जा को अपनाने के प्रति अपना उत्साह दिखाया।

उत्तरप्रदेश में राजस्व मामले: जौनपुर बना राजस्व वाद निस्तारण में प्रदेश का शीर्ष जिला, गाजीपुर और सुल्तानपुर भी अव्वल

जौनपुर बना राजस्व वाद निस्तारण में प्रदेश का शीर्ष जिला, गाजीपुर और सुल्तानपुर भी अव्वल
जौनपुर बना राजस्व वाद निस्तारण में प्रदेश का शीर्ष जिला, गाजीपुर और सुल्तानपुर भी अव्वल
  • जौनपुर ने प्रदेश में हासिल किया पहला स्थान।
  • गाजीपुर और सुल्तानपुर का भी शानदार प्रदर्शन।
  • मुख्यमंत्री योगी की मॉनीटरिंग से बढ़ी निस्तारण प्रक्रिया की रफ्तार।
  • लखीमपुर खीरी, हरदोई, और बलिया भी टॉप टेन में शामिल।
  • राजस्व परिषद की रिपोर्ट में निस्तारण मामलों की स्पष्ट प्रगति।

लखनऊ, 3 दिसंबर 2024: उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत राजस्व वादों के मामलों के निस्तारण में तेजी देखी जा रही है। उनकी कड़ी मॉनीटरिंग और निर्देशों का परिणाम यह है कि नवंबर माह की राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की रिपोर्ट में जौनपुर जिला प्रदेश भर में पहले स्थान पर रहा। गाजीपुर ने दूसरा और सुल्तानपुर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं लखीमपुर खीरी, हरदोई और बलिया जैसे जिलों ने भी शीर्ष दस में अपनी जगह बनाकर प्रशंसा बटोरी है।

मुख्यमंत्री योगी की पहल से दिखा सुधार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजस्व विवादों के निस्तारण को लेकर लगातार जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश देते रहे हैं। उनकी मंशा है कि जनता को समय पर न्याय मिल सके और प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा दिया जा सके। सीएम योगी खुद जिलावार मामलों की समीक्षा करते हैं और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने से नहीं चूकते। इस पहल का उद्देश्य न केवल न्यायिक प्रक्रिया को गति देना है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाना है।

जौनपुर ने रचा इतिहास, 250 मानक के सापेक्ष निपटाए 567 मामले

जौनपुर ने राजस्व मामलों के निस्तारण में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह के नेतृत्व में जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड ऑफ रेवन्यू द्वारा निर्धारित 250 मामलों के निस्तारण के मानक को पार करते हुए 567 मामलों का निपटारा किया। यह प्रदर्शन 226.80 प्रतिशत के अनुपात में है।

जौनपुर डीएम न्यायालय ने 30 मामलों के मानक के मुकाबले 121 मामलों का निस्तारण कर 403.33 प्रतिशत की उपलब्धि दर्ज की। वहीं, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ने 50 मामलों के लक्ष्य के मुकाबले 182 मामलों का निस्तारण कर 364 प्रतिशत का प्रदर्शन किया। इसी प्रकार अन्य अधिकारियों ने भी निर्धारित मानकों को पार करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

गाजीपुर और सुल्तानपुर ने भी मारी बाजी

गाजीपुर ने चार न्यायालयों के माध्यम से 190 मामलों के मानक के मुकाबले 251 मामलों का निस्तारण कर 132.11 प्रतिशत का प्रदर्शन किया और दूसरा स्थान प्राप्त किया। सुल्तानपुर के छह न्यायालयों ने 350 मामलों के मानक के मुकाबले 320 मामलों का निस्तारण कर 91.43 प्रतिशत का प्रदर्शन किया और तीसरे पायदान पर रहे।

लखीमपुर खीरी, हरदोई, और बलिया ने बनाई शीर्ष दस में जगह

लखीमपुर खीरी ने 197 मामलों का निस्तारण कर सातवां स्थान हासिल किया। जिलाधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल ने बताया कि प्रदेश के सबसे बड़े जिले के रूप में यहां सबसे अधिक राजस्व मामले दर्ज होते हैं। इसके बावजूद टीम की मेहनत और सीएम योगी के निर्देशों के कारण तेजी से निस्तारण हो रहा है।

हरदोई, बलिया, कुशीनगर और अन्य जिलों ने भी राजस्व विवादों के निस्तारण में महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया। कुशीनगर ने 208, बलिया ने 98, हरदोई ने 205, बस्ती ने 189, सहारनपुर ने 119, और मैनपुरी ने 136 मामलों का निस्तारण किया।

सीएम योगी का उद्देश्य और आगे की योजना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता है कि प्रदेश में न्यायिक प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया जाए। उनकी मंशा के अनुरूप अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मामलों के निस्तारण में और तेजी लाएं। राजस्व परिषद की रिपोर्ट के बाद जिलों में अधिकारियों के साथ विशेष बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें प्रदर्शन सुधारने के लिए नई रणनीतियां बनाई गईं।

क्रॉप कटिंग के माध्यम खरीफ की फसलों की उत्पादकता पर योगी सरकार की पैनी नजर

क्रॉप कटिंग के माध्यम खरीफ की फसलों की उत्पादकता पर योगी सरकार की पैनी नजर
क्रॉप कटिंग के माध्यम खरीफ की फसलों की उत्पादकता पर योगी सरकार की पैनी नजर
  • क्रॉप कटिंग के माध्यम खरीफ के फसलों की उत्पादकता का आकलन कर रही योगी सरकार
  • सीसीई एग्री ऐप से अब तक हुए 2.45 लाख क्रॉप कटिंग प्रयोग, जीसीईएस ऐप से 11,374 प्रयोग पूरे
  • सीसीई एग्री ऐप से खरीफ के मौसम में 3 लाख प्रयोग का लक्ष्य
  • जीसीईएस ऐप द्वारा खरीफ की फसलों के लिए किए जाएंगे कुल 13654 क्रॉप कटिंग प्रयोग
  • क्रॉप कटिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत किसानों को मिलती है क्षतिपूर्ति
  • खरीफ में धान, मक्का, बाजरा, ज्वार समेत 10 फसलें हैं शामिल

लखनऊ, 03 दिसंबर 2024: किसानों के जीवन में आर्थिक स्थिरता लाने और उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार खरीफ फसलों की उत्पादकता का वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से आकलन कर रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत क्रॉप कटिंग प्रयोग (सीसीई) के माध्यम से उत्पादकता मापने और किसानों की क्षति का आकलन कर उन्हें समय पर बीमा लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है।

सीसीई एग्री ऐप से अब तक हुए 2.45 लाख क्रॉप कटिंग प्रयोग, जीसीईएस ऐप से 11,374 प्रयोग पूरे
इस साल खरीफ के मौसम में सीसीई एग्री ऐप के माध्यम से 3 लाख से अधिक क्रॉप कटिंग प्रयोग के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं जिसमें अब तक 2.45 लाख प्रयोग पूरे किए जा चुके हैं। यह कृषि उत्पादन में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अतिरिक्त, जीसीईएस ऐप के जरिए 13,654 क्रॉप कटिंग प्रयोग के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 11,374 प्रयोग पूरे हो चुके हैं। यह प्रक्रिया न केवल फसलों की उत्पादकता का आकलन करती है बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि फसल बीमा योजना के तहत किसानों को क्षतिपूर्ति जल्द और सटीक तरीके से प्राप्त हो।

आधुनिक तकनीकों के उपयोग से किसानों को हो रहा लाभ
सीसीई एग्री ऐप और जीसीईएस ऐप जैसे अत्याधुनिक उपकरण फसल कटाई प्रक्रिया को न केवल तेज बल्कि प्रभावी भी बनाते हैं। यह ऐप्स फसल की स्थिति, उत्पादन क्षमता और संभावित क्षति का सटीक डेटा उपलब्ध कराते हैं, जिससे बीमा कंपनियों को सही जानकारी मिलती है और किसानों को समय पर मुआवजा मिलना सुनिश्चित होता है।
खरीफ मौसम में 10 फसलों को इस योजना में शामिल किया गया है। जिसमें, धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, उर्द, मींग, तिल, मूंगफली,सोयबीन व अरहर शामिल हैं। क्रॉप कटिंग प्रयोगों के माध्यम से इन फसलों की उत्पादकता का सटीक आकलन किया जा रहा है। यह पहल न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बना रही है बल्कि कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में प्रदेश को अग्रणी बना रही है।

किसानों को खराब फसल की क्षतिपूर्ति प्राप्त करने में मददगार है यह प्रयोग
क्रॉप कटिंग या फसल कटाई के प्रयोग द्वारा फसल की औसत पैदावार निकाली जाती है। क्रॉप कटिंग आधार पर ही जनपदों के कृषि उत्पादन के आंकड़े तैयार करके शासन को भेजे जाते हैं। क्रॉप कटिंग के प्राप्त आंकड़ों के आधार पर फसल बीमा धारक किसान को नुकसान का मुआवजा दिया जाता है। कृषि विभाग सभी जनपदों के समस्त क्षेत्रों के क्रॉप कटिंग आंकड़ों का औसत निकालकर शासन को भेजता है। इसके आधार पर ही जनपद में विभिन्न फसलों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता का निर्धारण किया जाता है। योगी सरकार आंकड़ों की शुद्धता के लिए 15% अनिवार्य निरीक्षण के लिए जनपद में कृषि, राजस्व एवं विकास विभाग के अधिकारियों को नामित किया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत प्रदेश में इम्पैनल्ड बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधियों द्वारा भी 30% क्राप-कटिंग प्रयोगों का सह अवलोकन कराया जा रहा है।

क्रॉप कटिंग के जरिए प्राप्त आंकड़ों का उपयोग पीएमएफबीवाई के तहत सरकार प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति देती है। इस योजना के तहत, फसल क्षति होने पर किसानों को संबंधित बीमा कंपनियों से मुआवजा मिलता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए इन योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया है।

किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा क्रॉप कटिंग प्रयोग
प्रदेश में कृषि क्षेत्र पर बड़ी संख्या में लोगों की निर्भरता है। योगी सरकार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि फसलों की क्षति की स्थिति में किसान किसी भी आर्थिक संकट से बच सकें। इसके लिए संबंधित विभाग के कर्मचारियों द्वारा रैंडमली ऑनलाइन चयनित गांव के एक खेत में समबाहु त्रिभुज के प्रति 10 मीटर भुजा वाले क्षेत्र के अंतर्गत फसल की कटाई एवं उससे प्राप्त अनाज का वजन किया जाता है। उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदारों से क्रॉप कटिंग प्रयोगों के सम्पादन की समीक्षा की जाती है। क्रॉप कटिंग प्रयोगों का यह विस्तृत नेटवर्क न केवल किसानों को राहत प्रदान कर रहा है बल्कि कृषि उत्पादकता के उन्नयन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सहायक साबित हो रहा है।

योजनाओं में किसानों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित कर रही योगी सरकार
जन हितैषी और किसान केंद्रित योजनाओं में केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही योगी सरकार की इस पहल के तहत किसानों, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों के बीच तालमेल को बेहतर बनाया गया है। फसलों के उत्पादन और नुकसान के आंकड़े अब केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका डिजिटलीकरण किया गया है। यह प्रक्रिया योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने में सहायक है। सीसीई की पारंपरिक पद्धति उपज घटक पद्धति पर आधारित है जहां अध्ययन के तहत कुल क्षेत्र के यादृच्छिक नमूने के आधार पर विशिष्ट स्थानों का चयन किया जाता है। एक बार भूखंडों का चयन हो जाने के बाद, इन भूखंडों के एक भाग से उत्पादन काटा जाता है और बायोमास वजन, अनाज वजन, नमी और अन्य सांकेतिक कारकों जैसे कई मापदंडों के लिए विश्लेषण किया जाता है। इस अध्ययन से एकत्र किए गए डेटा को पूरे क्षेत्र में एक्सट्रपलेशन किया गया है और अध्ययन के तहत राज्य या क्षेत्र की औसत उपज का अनुमानित मूल्यांकन प्रदान करता है।

कृषि उत्पादकता के आकलन की यह प्रणाली किसानों और बीमा कंपनियों के बीच विश्वास को बढ़ावा दे रही है। आने वाले समय में, उत्तर प्रदेश की सरकार इस मॉडल को और भी मजबूत बनाने और कृषि क्षेत्र में तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। उत्तर प्रदेश में किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल कृषि क्षेत्र का विकास हो रहा है, बल्कि इससे राज्य के आर्थिक विकास को भी गति मिल रही है।