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‘बाहुबली’ और ‘KGF’ को मात दे चुकी हैं इन 5 भोजपुरी फिल्मों की शानदार रेटिंग।

फिल्मी दुनिया में भोजपुरी इंडस्ट्री की इमेज कोई खासा अच्छी नहीं है। अपने दोअर्थी गानों और सतही कलाकारों की कला ने भोजपुरी इंडस्ट्री की इमेज को काफी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि भोजपुरी में कुछ ऐसी भी फिल्में हैं जिनकी रेटिंग ‘बाहुबली’ और ‘केजीएफ’ से भी ज्यादा है। आईएमडीबी पर बाहुबलि को 8 और केजीएफ को 8.2 की रेटिंग दी गई है। हम आपको बताते हैं भोजपुरी इंडस्ट्री की ऐसी 5 फिल्में जिनकी रेटिंग इन दोनों ही सुपरहिट फिल्मों से कहीं आगे है।

1-‘रानी बेटी राज करेगी’: भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के डायरेक्टर अजीत कुमार शर्मा की 2021 में रिलीज हुई फिल्म ‘रानी बेटी राज करेगी’ लोगों को खूब पसंद आई थी। फिल्म को आईएमडीबी पर 9.8 की रेटिंग दी गई है। इस फिल्म में संजना पांडे, संकेत पाठक और नीलू सिंह ने लीड किरदार निभाए थे।

2-‘आशिकी’: साल 2022 में रिलीज हुई फिल्म ‘आशिकी’ में खेसारी लाल यादव ने लीड रोल निभाया था। ये फिल्म लोगों के बीच खूब पॉपुलर रही थी। फिल्म को पराग पाटिल ने डायरेक्ट किया था। खेसारी लाल यादव के साथ फिल्म में आम्रपाली दुबे और श्याम ने अहम किरदार निभाए थे। फिल्म को आईएमडीबी पर 9.5 रेटिंग दी गई है। ये रेटिंग बाहुबली और केजीएफ से भी ज्यादा है।

3-‘प्यार किया तो निभाना’: साल 2021 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्यार किया तो निभाना’ में भी खेसारी लाल यादव ने गर्दा उड़ाया था। फिल् को रजनीश मिश्रा ने डायरेक्ट किया था। फिल्म में खेसारी के साथ काजल रघवानी और मुनीर ल्याती अहम किरदारों में नजर आए थे। इस फिल्म को भी आईएमडीबी पर 9.5 की रेटिंग दी गई है। फिल्म की कहानी लवस्टोरी है जो लोगों को काफी पसंद आई थी।

4-‘नाच बैजू नाच’: साल 2022 में रिलीज हुई फिल्म ‘नाच बैजू नाच’ को लाल विजय सहदेव ने डायरेक्ट किया था। इस फिल्म में दिनेश लाल यादव, नीतू पांडे और रवि झंकाल को अहम किरदारों में कास्ट किया गया था। फिल्म को आईएमडीबी पर 9.5 की रेटिंग मिली हुई है। फिल्म की कहानी भी एक डांसर की थी। इस कहानी को लोगो ने खूब पसंद किया था।

5-‘राजा की आएगी बारात’: डायरेक्टर लाल बाबू पांडे की फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ 2021 में रिलीज हुई थी। फिल्म में खेसारी लाल यादव, सुदीक्षा झा और संयुक्ता रॉय अहम किरदारों में नजर आए थे। ये फिल्म लोगं को काफी पसंद आई थी। फिल्म को आईएमडीबी पर 9.4 की रेटिंग दी गई है।

ढाई साल से टीम इंडिया से बाहर रहे स्टार खिलाड़ी को सौंपी गई कप्तानी, श्रेयस बने उपकप्तान।

भारतीय क्रिकेट टीम इस समय ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी खेलने में व्यस्त है। टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच की तैयारी में जुटी है। टीम इंडिया के जो खिलाड़ी इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं, वो घरेलू क्रिकेट में लगातार हाथ आजमा रहे हैं। ऐसा ही एक खिलाड़ी है जो लगभग 3 साल से टीम इंडिया से बाहर चल रहा है लेकिन घरेलू क्रिकेट में लगातार खेल रहा है। अब इस खिलाड़ी को अचानक टीम का कप्तान भी बना दिया गया है। ये खिलाड़ी है मयंक अग्रवाल जो लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं।

मयंक अग्रवाल ने मार्च 2022 में टीम इंडिया के लिए अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था। तब से ही वह टीम इंडिया में वापसी की कोशिश में लगे हुए हैं। इस बीच मयंक अग्रवाल को उनकी घरेलू टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया गया है। मयंक अग्रवाल को 21 दिसंबर से पांच जनवरी 2025 तक अहमदाबाद में होने वाली विजय हजारे ट्रॉफी वनडे क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए 12 दिसंबर को कर्नाटक का कप्तान नियुक्त किया गया। श्रेयस गोपाल को उपकप्तान बनाया गया है। मयंक सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2024-25 में बल्ले से कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सके। कर्नाटक की ओर से 7 मैचों में उनके बल्ले से 179 रन निकले जिसमें सिर्फ 1 अर्धशतक शामिल था। इस दौरान उनका औसत 25.57 और स्ट्राइक रेट 150 से ज्यादा का रहा।

सैयद मुश्ताक में टीम रही फेल

मयंक अग्रवाल की अगुआई में कर्नाटक की टीम मौजूदा सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के नॉकआउट में जगह बनाने में नाकाम रही। कर्नाटक अपने अभियान की शुरुआत 21 दिसंबर को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मुंबई के खिलाफ करेगा। ग्रुप सी में कर्नाटक और मुंबई के अलावा पुडुचेरी, पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, सौराष्ट्र, हैदराबाद और नागालैंड को रखा गया है।

विजय हजारे ट्रॉफी वनडे क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए कर्नाट की टीम इस प्रकार है: मयंक अग्रवाल (कप्तान), श्रेयस गोपाल, एस निकिन जोस, केवी अनीश, आर स्मरण, केएल श्रीजीत, अभिनव मनोहर, हार्दिक राज, विशाक विजयकुमार, वासुकी कौशिक, विद्याधर पाटिल, किशन बेदारे, अभिलाष शेट्टी , मनोज भंडागे, प्रवीण दुबे और लवनीथ सिसोदिया।

इजरायल ने सीरिया पर हमले क्यों किए? बड़ी वजह सामने आई, जानें इससे क्या हासिल हुआ।

Israel Attack Syria: इजरायल की सेना ने कहा है कि उसने सीरिया में रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर पिछले 48 घंटों में 400 से अधिक हमले किए हैं। यह हमला सीरियाई विद्रोहियों द्वारा राष्ट्रपति बशर अल-असद को अपदस्थ किए जाने के कुछ दिनों बाद किया गया है। इजरायल का कहना है कि उसने सीरिया की रणनीतिक सैन्य संपत्तियों का लगभग 70 से 80 फीसदी हिस्सा नष्ट कर दिया है।

इजरायली सेना का बयान

सेना ने एक बयान में कहा, “पिछले 48 घंटों के भीतर, IDF (इजरायल रक्षा बलों) ने सीरिया में अधिकांश रणनीतिक हथियारों के भंडार पर हमला किया, जिससे वो आतंकवादी तत्वों के हाथों में पड़ने से बच गए।” सेना ने कहा, “80 से 190 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली समुद्र से समुद्र में मार करने वाली दर्जनों मिसाइलें नष्ट कर दी गई हैं। प्रत्येक मिसाइल में भारी मात्रा में विस्फोटक थे, जिससे क्षेत्र में नागरिक और सैन्य समुद्री जहाजों को खतरा पैदा हो गया था।”

इजरायल लगातार करता रहा है हमले

सेना ने कहा हमलों के दौरान, “स्कड मिसाइल, क्रूज मिसाइल, सतह से समुद्र, सतह से हवा और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल, यूएवी, लड़ाकू जेट, हमलावर हेलीकॉप्टर, रडार, टैंक, हैंगर और कई रणनीतिक संपत्तियों को निष्प्रभावी कर दिया गया है।” वैसे देखा जाए तो 2011 में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल ने सीरिया में सैकड़ों हमले किए हैं।

जानें क्या बोले नेतन्याहू?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है है कि बशर अल-असद का पतन “मध्य पूर्व में एक ऐतिहासिक दिन” था। उन्होंने कहा यह “ईरान की बुराई की धुरी में, एक केंद्रीय कड़ी” का पतन था। उन्होंने कहा है कि ये घटनाएं “ईरान और हिजबुल्लाह, असद के मुख्य समर्थकों पर हमारे द्वारा किए गए प्रहारों का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।”

पिता ऑस्कर विजेता और बॉलीवुड के किंग हैं, फिर भी बेटी ने अपनी कड़ी मेहनत से खुद की अलग पहचान बनाई।

बॉलीवुड में 10 से ज्यादा बेहतरीन फिल्मों से लोगों का दिल जीतने वाली डायरेक्टर मेघना गुलजार आज 51 साल की हो गई हैं। मेघना गुलजार ने ‘सैम बहादुर’, ‘छपाक’, ‘राजी’ और ‘गिल्टी’ जैसी शानदार फिल्में बनाने वाली मेघना गुलजार को जन्मदिन पर बॉलीवुड के तमाम सितारों समेत फैन्स ने जन्मदिन की बधाई दी है। मेघना गुलजार के पिता संपूर्ण सिंह कालरा (गुलजार) एक दिग्गज राइटर और डायरेक्टर हैं। गुलजार भी अपनी फिल्म स्लम डॉग मिलेनियर के गाने के लिए ऑस्कर अवॉर्ड जीत चुके हैं। दिग्गज डायरेक्टर के पिता की बेटी होने के बाद भी मेघना गुलजार ने अपने दम पर बॉलीवुड में नाम कमाया है।

23 नॉमिनेशन और 5 अवॉर्ड जीत चुकी हैं मेघना गुलजार

मेघना गुलजार का जन्म आज ही के दिन 1973 में हुआ था। मेघना के पिता बॉलीवुड के दिग्गज राइटर और डायरेक्ट हैं। साथ ही मेघना की मां राखी गुलजार भी बॉलीवुड की टॉप हीरोइन रही हैं। मेघना गुलजार का बचपन फिल्मी माहौल में बीता और बड़े होकर अपने पिता की तरह राइटर-डायरेक्टर बनने का फैसला लिया। मेघना गुलजार ने अपने दम पर खूब संघर्ष किया और 2000 में शॉर्ट फिल्म ‘शाम से आंख में नमी है’ से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2002 में मेघना ने अपनी पहली फिल्म ‘फिलहाल’ डायरेक्ट की। इस फिल्म के बाद मेघना ने ‘गिल्टी’ और ‘राजी’ जैसी शानदार फिल्में बनाई हैं। मेघना गुलजार को ‘राजी’ फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी दिया गया था। मेघना गुलजार ने अपने करियर में 10 फिल्में बनाई हैं और 5 अवॉर्ड अपने नाम किए हैं।

सैम बहादुर से लूटी वाहवाही

मेघना गुलजार ने आखिरी फिल्म ‘सैम बहादुर’ डायरेक्ट की थी। इस फिल्म में विक्की कौशल लीड रोल में नजर आए थे। फिल्म की कहानी सैम बहादुर नाम के आर्मी अधिकारी की जिंदगी पर बनी थी। ये रियल लाइफ किरदार पर बनी ये फिल्म लोगों को खूब पसंद आई थी। मेघना के करियर की ये सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक साबित हुई। मेघना आज अपना 51वां जन्मदिन मना रही हैं। मेघना के जन्मदिन पर फैन्स ने उन्हें बधाई दी है।

महिला स्वास्थ्य: ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए 20 साल की उम्र के बाद इन लक्षणों पर अवश्य ध्यान दें।

आज के समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज आसान हो गया है। लेकिन अब भी इस गंभीर बीमारी के कारण मौत के मुंह में समाने वाले लोगों की संख्या लाखों में है। अध्ययनों के मुताबिक आनुवंशिक और बाहरी कारकों के संयोजन की वजह से कैंसर होता है। क्योंकि यह बीमारी सभी उम्र और सभी लिंग को प्रभावित करती है, इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट सभी लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की सलाह देते हैं।

बता दें कि पुरुषों-महिलाओं को कैंसर अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है। कई अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में कैंसर होने का खतरा अधिक रहता है। पुरुषों में कोलन, फेफड़े, स्किन और प्रोस्टेट के कैंसर होते हैं। तो वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर और इसके लक्षणों की कैसे पहचान की जा सकती है।

महिलाओं में कैंसर का खतरा

वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि महिलाओं में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले ब्रेस्ट कैंसर के रिपोर्ट किए जाते हैं। वैसे तो 50 से अधिक उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक होता है। लेकिन कई कारकों के चलते 20 साल की लड़कियां भी इस गंभीर बीमारी का शिकार हो रही हैं। ऐसे में महिलाओं को कम उम्र से ही ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम कारकों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।

ऐसे में आज हम आपको उन लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन पर समय रहते ध्यान देकर आप ब्रेस्ट कैंसर की पहचान कर सकती हैं। वहीं समय पर इलाज होने से इस कैंसर के ठीक हो जाने की भी संभावना बढ़ जाती हैं।

स्तन में गांठ

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो 20 साल से अधिक उम्र होने पर हर महिला को नियमित रूप से अपने स्तनों की खुद जांच करते रहना चाहिए। अगर इस दौरान स्तनों के आकार में किसी तरह का बदलाव या किसी तरह की गांठ महसूस होती है, तो आपको सतर्कता बरतने की जरूरत है। क्योंकि अधिकतर महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की शुरूआत में इन लक्षणों का अनुभव होता है। यदि कुछ समय तक इस तरह की समस्या बनी रहती है, तो आपको जल्द ही किसी एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।

स्तन में दर्द या डिस्चार्ज

बता दें कि स्तनों में दर्द होना या फिर निप्पलों से किसी प्रकार का डिस्चार्ज होते रहने पर भी आपको सतर्क हो जाना चाहिए।

अगर आपके स्तनों में लगातार दर्द महसूस होता रहता है, स्तनों में सिकुड़न या लालिमा है या फिर निप्पल में कोई असामान्य परिवर्तन नजर आता है। तो यह ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। जिन्हें आपको नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। वहीं कुछ मामलों में ब्रेस्ट कैंसर होने पर निप्पल से खूनी डिस्चार्ज भी हो सकता है। इस तरह के लक्षणों पर समय रहते ध्यान देने और इलाज की जरूरत होती है।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए वेट कंट्रोल में रखना जरूरी होता है, क्योंकि मोटापा ब्रेस्ट कैंसर के जोखिमों को बढ़ाता है।

रिसर्च से पता चलता है कि फिजिकल एक्टिविटी, रोजाना व्यायाम आदि के जरिए ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को 10% तक कम किया जा सकता है।

कई तरह के फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। फलों में एंटीकैंसर और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पाए जाते हैं, जो कैंसर से बचाव कर सकते हैं।

साथ ही धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर रखें। क्योंकि इसकी वजह से भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।