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लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह ने सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल, जानें तेलंगाना सरकार की कार्यशैली को लेकर क्या कहा

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह ने सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह ने सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
  • हैदराबाद में पुष्पा 2 की स्क्रीनिंग के दौरान भीड़ प्रबंधन में भारी चूक से भगदड़ मची।
  • सरोजनीनगर के विधायक डॉक्टर राजेश्वर सिंह ने अभिनेता अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी को “अनुचित” बताया।
  • थिएटर में अतिरिक्त भीड़ को प्रवेश देने से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
  • तेलंगाना सरकार की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियां पूरी तरह असफल रहीं।
  • हाईकोर्ट ने अल्लू अर्जुन को जमानत दी, प्रशासन पर सवालिया निशान बने।

हैदराबाद/लखनऊ, 13 दिसंबर 2024: तेलुगु सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की बहुप्रतीक्षित फिल्म पुष्पा 2 की स्क्रीनिंग के दौरान भगदड़ और अव्यवस्था का मामला सामने आया, जिसने न केवल तेलंगाना सरकार की लापरवाही को उजागर किया, बल्कि अभिनेता की गिरफ्तारी पर भी सवाल खड़े किए। सरोजनीनगर से भाजपा के लोकप्रिय विधायक डॉक्टर राजेश्वर सिंह ने इस घटना को प्रशासनिक विफलता का नतीजा बताते हुए अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी को “अनुचित और अवैध” करार दिया।

डॉक्टर राजेश्वर सिंह ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय व्यक्त की और कहा कि अभिनेता को दोषी ठहराना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस की होती है, न कि किसी कलाकार की। इस घटना ने स्पष्ट रूप से तेलंगाना सरकार की अक्षमता को उजागर किया है।

घटना के मुख्य कारण और प्रशासनिक विफलताएं:

घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। हैदराबाद पुलिस को इस बड़े आयोजन की जानकारी होने के बावजूद, पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। थिएटर के अंदर भीड़ प्रबंधन असफल रहा, जिसके कारण भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई। अतिरिक्त लोगों को बिना उचित जांच के थिएटर में प्रवेश करने दिया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

विधायक राजेश्वर सिंह ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती आवश्यक थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। प्रशासन ने अपनी विफलता छिपाने के लिए अभिनेता अल्लू अर्जुन को गिरफ्तार किया, जो न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी सवालों के घेरे में है। हाईकोर्ट ने अभिनेता को जमानत दे दी है, लेकिन यह मामला तेलंगाना सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

तेलंगाना सरकार पर आरोप:

डॉक्टर राजेश्वर सिंह ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना उनकी अनुभवहीनता और अक्षमता का परिणाम है। उन्होंने बताया कि सरकार ने बड़े आयोजनों के लिए उचित व्यवस्था नहीं की और अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अभिनेता को बलि का बकरा बना दिया।

यह घटना न केवल एक फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान हुई अव्यवस्था तक सीमित है, बल्कि तेलंगाना सरकार और प्रशासन की विफलताओं का प्रतीक बन गई है। अभिनेता की गिरफ्तारी ने प्रशासन की कमजोरियों को और उजागर कर दिया है। न्यायालय ने अभिनेता को राहत दी है, लेकिन यह घटना दर्शाती है कि तेलंगाना सरकार सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रही है।

राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन: प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से विकसित भारत की दिशा में कदम

राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन: प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से विकसित भारत की दिशा में कदम
राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन: प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से विकसित भारत की दिशा में कदम
  • राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन: रिमोट सेंसिंग के माध्यम से सतत विकास की दिशा में उन्नति।
  • प्रमुख सचिव का संबोधन: तकनीक और प्रशासन के समन्वय से समाज का समग्र सशक्तीकरण।
  • प्रतिभागियों का सम्मान: विभिन्न श्रेणियों में नवाचार और उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार।
  • सतत विकास पर मंथन: नीति निर्माण में रिमोट सेंसिंग और डेटा इंटीग्रेशन की भूमिका पर चर्चा।
  • गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति: कार्यक्रम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों का योगदान।

लखनऊ : 13 दिसम्बर 2024: लखनऊ में आयोजित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संगोष्ठी “सतत भविष्य के लिए रिमोट सेंसिंग: विकसित भारत की ओर एक परिकल्पित मार्गदर्शन” का समापन उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव, पंधारी यादव के प्रेरणादायक संबोधन के साथ हुआ। श्री यादव ने इस संगोष्ठी में रिमोट सेंसिंग और आधुनिक तकनीकों की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन ही निर्णय समर्थन प्रणाली को सशक्त बना सकता है। उन्होंने कहा कि राजस्व, वन, और भूमि प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वैज्ञानिकों और प्रशासनिक तंत्र के बीच बेहतर समन्वय से राष्ट्र निर्माण को नई दिशा दी जा सकती है।

श्री यादव ने तकनीकी नवाचारों और अनुसंधान के प्रति भारतवासियों के स्वाभाविक उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि “सशक्त भारत का निर्माण समाज के समग्र सशक्तीकरण के बिना संभव नहीं है।” उन्होंने संगोष्ठी में भाग लेने वाले विद्वानों, अधिकारियों और प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की और “विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने के लिए तकनीकी सहयोग और नवाचार को आवश्यक बताया।

इस संगोष्ठी में कई प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। ओरल प्रेजेंटेशन (छात्र) श्रेणी में पवन कुमार ठाकुर, आदिति गोयल और भवनीत गुलाटी को पुरस्कृत किया गया, जबकि पोस्टर प्रेजेंटेशन (छात्र) श्रेणी में सोनी बोरा, रश्मि मलिक और कृति वाजपेयी को सम्मानित किया गया। प्रतिनिधि श्रेणी में ओरल प्रेजेंटेशन के लिए रवींद्र कुमार नायक, पी.आर. बेहड़ा और एस.एस. साहू, तथा पोस्टर प्रेजेंटेशन के लिए मीनाक्षी कुमार, देबब्रत मिश्रा और डॉ. शशांक त्रिपाठी को सम्मान प्राप्त हुआ। इन पुरस्कारों ने नवाचार और योगदान को मान्यता प्रदान की।

संगोष्ठी ने सतत विकास के लिए रिमोट सेंसिंग की असीम संभावनाओं पर गहन चर्चा का मंच प्रदान किया। इस दौरान उभरती प्रौद्योगिकियों, डेटा इंटीग्रेशन, और नीति निर्माण में इन तकनीकों की भूमिका पर व्यापक मंथन हुआ। विशेषज्ञ वक्ताओं और शोधकर्ताओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों को शासन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करने का प्रमुख साधन बताया। कार्यक्रम के समापन पर यह संकल्प लिया गया कि प्रौद्योगिकी और नवाचार “विकसित भारत” के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाने में ए.के. अग्रवाल (पूर्व निदेशक, आरएसएसी-यू.पी. एवं अध्यक्ष, आईएसआरएस-लखनऊ चैप्टर), डॉ. एस.पी. अग्रवाल (अध्यक्ष, आईएसआरएस एवं निदेशक, एनईएसएसी, शिलांग), डॉ. प्रवीण के ठाकुर (सचिव, आईएसआरएस), डॉ.अनुज कुमार शर्मा (एसोसिएट डीन, इनोवेशन एंड सोशल एंटरप्रेन्योरशिप, एकेटीयू, लखनऊ) और डॉ. एम.एस. यादव (वैज्ञानिक – ‘एसई’ और प्रमुख, एसआरडी, आरएसएसी-यूपी और सचिव, आईएसआरएस-लखनऊ चैप्टर) जैसी हस्तियों की उपस्थिति रही।

यह संगोष्ठी “विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने में प्रौद्योगिकी और प्रशासन के समन्वय की आवश्यकता को समझने और भविष्य की योजनाओं का खाका तैयार करने के लिए एक निर्णायक पहल साबित हुई।

पणजी में महाकुंभ-2025 का आमंत्रण: मंत्री दारा सिंह चौहान और रामकेश निषाद ने गोवा में किया रोड शो और प्रेस वार्ता

पणजी में महाकुंभ-2025 का आमंत्रण: मंत्री दारा सिंह चौहान और रामकेश निषाद ने गोवा में किया रोड शो और प्रेस वार्ता
पणजी में महाकुंभ-2025 का आमंत्रण: मंत्री दारा सिंह चौहान और रामकेश निषाद ने गोवा में किया रोड शो और प्रेस वार्ता
  • गोवा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से भेंटकर महाकुंभ-2025 के लिए आमंत्रित किया गया।
  • रोड शो और प्रेस वार्ता के जरिए गोवावासियों को महाकुंभ में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
  • महाकुंभ को हरित और स्वच्छ बनाने के साथ-साथ डिजिटल सुविधाओं जैसे स्मार्ट पार्किंग और सीसीटीवी निगरानी का प्रबंध।
  • महाकुंभ को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बताया गया।
  • मंत्रियों ने गोवावासियों से बड़ी संख्या में महाकुंभ में शामिल होने की अपील की।

    लखनऊ, 13 दिसंबर 2024: उत्तर प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान और जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने गोवा की राजधानी पणजी में महाकुंभ-2025 का प्रचार-प्रसार करते हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया। यह आयोजन 2025 में प्रयागराज में होने वाला है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है।

    मंत्रियों ने पणजी में गोवा के राज्यपाल पी0एस0 श्रीधरन पिल्लई और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने महाकुंभ में आने का व्यक्तिगत आमंत्रण दिया। साथ ही, गोवा के नागरिकों को महाकुंभ के महत्व और इसकी विशेषताओं से अवगत कराने के लिए रोड शो और प्रेस वार्ता का आयोजन किया।

    रोड शो में मंत्रीगणों ने महाकुंभ को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक आयोजन को स्वच्छ, हरित और डिजिटल रूप से अत्याधुनिक बनाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। स्मार्ट पार्किंग, सीसीटीवी आधारित निगरानी प्रणाली और डिजिटल खोया-पाया केंद्र जैसी सुविधाएं इस बार महाकुंभ को और भी विशेष बनाएंगी।

    मंत्रियों ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में महाकुंभ में भाग लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि महाकुंभ न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की चेतना का अद्वितीय पर्व भी है।

    महाकुंभ 2025 का औपचारिक निमंत्रण जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को सौंपा

    महाकुंभ 2025 का औपचारिक निमंत्रण जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को सौंपा
    महाकुंभ 2025 का औपचारिक निमंत्रण जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को सौंपा
    • उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रीगण ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा को महाकुंभ 2025 में आने का औपचारिक निमंत्रण सौंपा।
    • महाकुंभ 2025 का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में होगा, जिसमें 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है।
    • आयोजन में डिजिटल मैपिंग, स्मार्ट पार्किंग, स्वास्थ्य शिविर, और स्वच्छता प्रबंधन जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
    • सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध और जागरूकता अभियानों के माध्यम से स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
    • उपराज्यपाल ने निमंत्रण स्वीकार कर महाकुंभ को भारतीय संस्कृति की समृद्धता का प्रतीक बताया।

    लखनऊ : 13 दिसम्बर 2024: उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार और अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से शिष्टाचार भेंट कर प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण सौंपा। यह भेंट लखनऊ में सम्पन्न हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की इस ऐतिहासिक पहल की जानकारी साझा की गई।

    अनिल कुमार ने उपराज्यपाल को अवगत कराया कि यह आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित किया जाएगा। महाकुंभ न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान प्रदान करेगा। यह आयोजन मानवता के उच्चतम आदर्शों, आध्यात्मिकता, और सांस्कृतिक एकता को स्थापित करने का प्रयास है। आयोजन में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं, संतों, पर्यटकों और विभिन्न समुदायों के लोगों के भाग लेने की संभावना है।

    अनिल कुमार ने बताया कि महाकुंभ 2025 की तैयारियां अत्याधुनिक प्रबंधन और सतत विकास की अवधारणा पर आधारित होंगी। डिजिटल मैपिंग से कुंभ क्षेत्र को जोड़ा जाएगा ताकि तीर्थयात्रियों को मार्गदर्शन में सुविधा हो। 101 स्मार्ट पार्किंग स्थलों, 182 विशेष स्वास्थ्य शिविरों और 400 किलोमीटर से अधिक नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा। सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाकर साफ-सफाई सुनिश्चित की जाएगी।

    श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी और जागरूकता अभियान के माध्यम से इस आयोजन को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा। स्मार्ट टॉयलेट, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था और 24 घंटे उपलब्ध स्वच्छता सेवाओं को भी सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा, डिजिटल महाकुंभ के तहत आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाएगा, जिससे तीर्थयात्रियों को एक नया अनुभव मिलेगा।

    दानिश आज़ाद अंसारी ने महाकुंभ को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह आयोजन विभिन्न धर्मों, पंथों और जातियों के लोगों को भारतीय समाज की बहुलतावादी संस्कृति का अनुभव देगा।

    जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने इस पावन निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया और उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि महाकुंभ भारतीय संस्कृति की व्यापकता और समाज की एकता को विश्व मंच पर प्रदर्शित करने का अद्वितीय अवसर है।

    इस अवसर पर अनिल कुमार ने उपराज्यपाल से इस ऐतिहासिक आयोजन में अपनी उपस्थिति से इसकी गरिमा बढ़ाने का आग्रह किया। यह आयोजन न केवल भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा को उजागर करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसे नई पहचान भी प्रदान करेगा।

    उत्तरप्रदेश: उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की बैठक सम्पन्न

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की बैठक सम्पन्न
    उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की बैठक सम्पन्न
    • नैक मूल्यांकन और एनआईआरएफ रैंकिंग में सुधार हेतु वार्षिक योजना बनाने का निर्णय।
    • शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्देश।
    • चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन और “समर्थ पोर्टल” के उपयोग पर जोर।
    • प्रदेश में एकल प्रवेश प्रणाली लागू करने और यूजीसी स्वायत्त महाविद्यालय योजना को प्रोत्साहन।
    • निदेशक उच्च शिक्षा का कैंप कार्यालय लखनऊ में स्थापित करने का निर्णय।

    लखनऊ, 13 दिसंबर 2024: उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से गुरुवार को विधान परिषद सभाकक्ष संख्या-80 में राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (एस.एल.क्यू.ए.सी.) की पहली बैठक आयोजित की गई। इस ऐतिहासिक बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने की। बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी और प्रदेश के उच्च शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए नई नीतियों और योजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी शिक्षण संस्थान नैक मूल्यांकन और एनआईआरएफ रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करें। इसके लिए प्रत्येक संस्थान को वार्षिक योजना बनाने और इसे क्रियान्वित करने का निर्देश दिया गया। उच्च शिक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रकोष्ठ की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं, ताकि शिक्षा क्षेत्र में सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। साथ ही, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन कार्यशालाओं और नए शिक्षकों के लिए ऑफलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया।

    चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से राज्य के कॉलेजों के शोध प्रस्तावों को “समर्थ पोर्टल” के माध्यम से संचालित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए समयबद्ध कार्य योजना और टाइमलाइन जारी करने पर भी सहमति बनी। प्रदेश में एकल प्रवेश प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया, जिससे छात्र ऑनलाइन माध्यम से ही सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले सकेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश के अर्ह महाविद्यालयों को यूजीसी स्वायत्त महाविद्यालय योजना के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया। सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को वार्षिक गतिविधि योजना, शैक्षणिक कैलेंडर, और संस्थागत विकास योजना तैयार कर अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए। विश्वविद्यालयों की नियुक्ति समितियों में सरकार के प्रतिनिधित्व हेतु एक समिति गठित करने और निदेशक उच्च शिक्षा का कैंप कार्यालय लखनऊ में स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया।

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उच्च शिक्षा में हो रहे सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि हर छात्र को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा मिले। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं का क्रियान्वयन छात्र हितों को ध्यान में रखकर किया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जा सके।

    बैठक में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एम.पी. अग्रवाल ने प्रकोष्ठ के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों और उच्च शिक्षा मंत्री के निर्देशों के अनुपालन की प्रतिबद्धता व्यक्त की। विशेष सचिव उच्च शिक्षा शिपू गिरि ने बैठक की भूमिका प्रस्तुत करते हुए राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की आवश्यकता और इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा ने प्रकोष्ठ के एजेंडे का प्रस्तुतीकरण किया। बैठक का संचालन उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डॉ. दिनेश कुमार ने किया। निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. अमित भारद्वाज ने बैठक में शामिल सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।