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लखनऊ: प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना, उत्तर प्रदेश में क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना: उत्तर प्रदेश में क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना: उत्तर प्रदेश में क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना: उत्तर प्रदेश में क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण
  • उत्तर प्रदेश में 14 इन्क्यूबेशन सेंटर और कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना, कुल लागत 47 करोड़ रुपये।
  • 15,000 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए परियोजनाओं के माध्यम से सहायता।
  • 10,000 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए 30 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत।
  • 46,897 उद्यमियों का पंजीकरण और 13,933 परियोजनाओं को बैंकों द्वारा ऋण स्वीकृत।
  • योजना के तहत 1,500 करोड़ रुपये का निवेश और 1 लाख लोगों को रोजगार।

    लखनऊ, 22 दिसंबर 2024: उत्तर प्रदेश में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने और राज्य में अधिक से अधिक इकाइयों की स्थापना के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत उत्तर प्रदेश में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, जो राज्य के उद्यमियों, खासकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।

    योजना के तहत भारत सरकार द्वारा निर्धारित 14 इन्क्यूबेशन सेंटर और कॉमन फैसिलिटी सेंटर उत्तर प्रदेश में स्थापित किए गए हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत 47 करोड़ रुपये है, जिसमें प्लांट और मशीनरी की आपूर्ति शामिल है। इन केंद्रों के माध्यम से लगभग 15,000 महिलाओं को परोक्ष और अपरोक्ष रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

    महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल: उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10,000 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कार्यशील पूंजी और छोटे औजारों की खरीद के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और राज्य शहरी आजीविका मिशन के तहत 30 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। यह कदम ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

    उद्यमियों के लिए ऋण और पंजीकरण: प्रधानमंत्री एफएमई योजना के एमआईएस वेब पोर्टल पर अब तक 46,897 उद्यमियों का पंजीकरण हो चुका है। पंजीकरण के बाद, 32,176 आवेदनों को पोर्टल पर प्राप्त किया गया, जिनमें से 13,933 परियोजनाओं को बैंकों द्वारा ऋण स्वीकृत किया गया है। इन स्वीकृत इकाइयों को 3 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की अनुदान राशि प्रदान की गई है।

    योजना का निवेश और रोजगार पर प्रभाव: इस योजना के तहत अब तक लगभग 1,500 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप लगभग 1 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। यह योजना न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर उद्यमशीलता को भी बढ़ावा दे रही है।

    प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना उत्तर प्रदेश में एक सफल उदाहरण प्रस्तुत कर रही है, जहां महिलाओं और उद्यमियों को सशक्त बनाकर आर्थिक विकास को गति दी जा रही है। सरकार द्वारा की गई यह पहल न केवल राज्य के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को नया आयाम दे रही है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने का भी प्रयास कर रही है।

    उत्तरप्रदेश: अटल बिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी पर दिव्य कला समागम का आयोजन, राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप करेंगे कार्यक्रम का उद्घाटन

    अटल बिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी पर दिव्य कला समागम का आयोजन
    अटल बिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी पर दिव्य कला समागम का आयोजन
    अटल बिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी पर दिव्य कला समागम का आयोजन
    • भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में 23 से 25 दिसंबर 2024 तक अयोध्या में दिव्य कला समागम का आयोजन किया जाएगा।
    • उत्तर प्रदेश के दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
    • दिव्यांगजन नृत्य, संगीत, रंगमंच और कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
    • दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी और प्रेरणादायक साहित्य के लिए पुस्तक गैलरी भी शामिल होगी।
    • आयोजन में फन जोन और फूड जोन विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे।

    अयोध्या/लखनऊ, 21 दिसंबर 2024: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी (1924-2018) के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजनों की कलात्मक प्रतिभा को सम्मानित करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “दिव्य कला समागम” का आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष आयोजन 23 से 25 दिसंबर 2024 तक अयोध्या के कामता प्रसाद सुंदरलाल साकेत महाविद्यालय में संपन्न होगा। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप इस कार्यक्रम का उद्घाटन 23 दिसंबर को करेंगे।

    “दिव्य कला समागम” का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी कलात्मकता और सृजनशीलता का प्रदर्शन कर सकें। इस तीन दिवसीय महोत्सव में विविध सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी होगी। यह प्रदर्शनी उनके कौशल और मेहनत का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करेगी।

    सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आकर्षण:

    इस आयोजन में नृत्य, संगीत, रंगमंच, कवि सम्मेलन और रंगोली जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दिव्यांगजन अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य न केवल दर्शकों का मनोरंजन करना है, बल्कि दिव्यांगजनों की असाधारण क्षमताओं को समाज के समक्ष लाना है। कार्यक्रम में पुस्तक गैलरी भी होगी, जिसमें प्रेरणादायक साहित्य और दिव्यांगजनों से संबंधित विशेष सामग्री का प्रदर्शन किया जाएगा।

    फन जोन और फूड जोन:

    कार्यक्रम में मनोरंजन और खानपान के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। ‘फन जोन’ में बच्चों और बड़ों दोनों के लिए मनोरंजन के अनोखे साधन उपलब्ध होंगे। वहीं, ‘फूड जोन’ में स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया जा सकेगा। यह क्षेत्र न केवल स्वाद का अनुभव प्रदान करेगा, बल्कि लोगों को एक आनंदमय वातावरण का हिस्सा बनने का अवसर देगा।

    दिव्यांगजनों की पहचान को सशक्त बनाना:

    दिव्य कला समागम का उद्देश्य दिव्यांगजनों के जीवन में आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की भावना को बढ़ावा देना है। यह आयोजन उनके द्वारा निर्मित उत्पादों, उनकी कलात्मकता और सांस्कृतिक योगदान को समाज में व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास है।

    आयोजन के प्रमुख आकर्षण:

    • दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित उत्कृष्ट उत्पादों की प्रदर्शनी।
    • नृत्य, संगीत, रंगमंच, कवि सम्मेलन और रंगोली जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां।
    • प्रेरणादायक साहित्य के लिए पुस्तक गैलरी।
    • मनोरंजन के लिए फन जोन और खानपान के लिए फूड जोन।
    • दिव्यांगजनों की कलात्मकता और प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का अनूठा प्रयास।

    आयोजन की जानकारी:

    • तिथि: 23 से 25 दिसंबर 2024।
    • स्थान: कामता प्रसाद सुंदरलाल साकेत महाविद्यालय, अयोध्या।
    • मुख्य अतिथि: नरेंद्र कश्यप, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री।

    अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के इस ऐतिहासिक अवसर पर दिव्यांगजनों की कला और कौशल को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना न केवल उनकी प्रतिभा का सम्मान है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि दिव्यांगजन भी समान रूप से हर क्षेत्र में योगदान देने में सक्षम हैं।

    केजीएमयू का एलुमनाई तंत्र: वैश्विक नेटवर्किंग की दिशा में बड़ा कदम

    केजीएमयू का एलुमनाई तंत्र: वैश्विक नेटवर्किंग की दिशा में बड़ा कदम
    केजीएमयू का एलुमनाई तंत्र: वैश्विक नेटवर्किंग की दिशा में बड़ा कदम
    केजीएमयू का एलुमनाई तंत्र: वैश्विक नेटवर्किंग की दिशा में बड़ा कदम

    लखनऊ, 21 दिसम्बर 2024: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ, ने अपने 120वें स्थापना दिवस पर एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एलुमनाई नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। विश्वविद्यालय की इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर में फैले अपने पूर्व छात्रों को एक मंच पर संगठित करना है। माननीय कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने समय-समय पर केजीएमयू को एलुमनाई नेटवर्किंग पर ध्यान केंद्रित करने और एक मजबूत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन

    120वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केजीएमयू की एलुमनाई दुनियाभर में फैली हुई है। इसे संगठित करने से विश्वविद्यालय के विकास और संरचनात्मक कार्यों में योगदान मिल सकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एक सशक्त एलुमनाई नेटवर्क विश्वविद्यालय को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला सकता है।

    एलुमनाई सम्मेलन और कुलपति की अपील

    पिछले वर्ष, केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने एक अंतरराष्ट्रीय एलुमनाई सम्मेलन के दौरान पूर्व छात्रों से अपील की थी कि वे विश्वविद्यालय के विकास में सहयोग दें। इस अपील के परिणामस्वरूप एलुमनाई से धन संग्रह और सहयोग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रो. नित्यानंद ने इसे एक मजबूत तंत्र का आधार बताते हुए कहा कि यह नेटवर्क न केवल विश्वविद्यालय बल्कि छात्रों और समाज के लिए भी एक नया आयाम स्थापित करेगा।

    एलुमनाई वेबसाइट: डिजिटल युग का कदम

    एलुमनाई नेटवर्क को संगठित और मजबूत करने के लिए केजीएमयू ने अपनी एलुमनाई वेबसाइट लॉन्च की है। इस वेबसाइट को ट्रंक सॉल्यूशन के निदेशक श्री स्वप्निल ने विकसित किया है।

    वेबसाइट की मुख्य विशेषताएं:

    1. पंजीकरण और नेटवर्क निर्माण: वेबसाइट पर एलुमनाई का पंजीकरण कर एक संगठित नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
    2. बैच मीट्स का आयोजन: विभिन्न बैच मीट्स के लिए यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का काम करेगा।
    3. ऑनलाइन कार्यक्रम: ऑनलाइन सेमिनार, व्याख्यान, और चर्चाओं के आयोजन के लिए सुविधाएं।
    4. अनुदान प्राप्त करना: विश्वविद्यालय के विकास के लिए एलुमनाई से अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया।
    5. प्लेसमेंट और कैंपस सिलेक्शन: छात्रों को प्लेसमेंट और कैंपस सिलेक्शन में मदद।
    6. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: छात्रों के लिए नौकरी के अवसरों को बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग।

    वेबसाइट का डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा और इसे केवल पंजीकृत सदस्यों द्वारा ही एक्सेस किया जा सकेगा।

    प्रारंभिक अनुदान और योगदान

    एलुमनाई नेटवर्किंग और अनुदान के प्रयासों ने सकारात्मक परिणाम देना शुरू कर दिया है। माननीय राज्य मंत्री श्री अरुण सक्सेना ने 1.5 लाख रुपये की धनराशि का योगदान दिया है। इसके साथ ही, 1978 बैच के डॉ. हर्ष शर्मा और डॉ. देवेंद्र सोनी ने एक-एक लाख रुपये का सहयोग किया है।

    भविष्य की योजनाएं

    वर्ष 2026 में एक अंतरराष्ट्रीय एलुमनाई सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है। इस सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर केजीएमयू की एलुमनाई को जोड़ना और विश्वविद्यालय के विकास के लिए नए रास्ते तलाशना है।

    केजीएमयू का यह प्रयास न केवल अपने पूर्व छात्रों के साथ संबंध मजबूत करेगा बल्कि विश्वविद्यालय के विकास और छात्रों के भविष्य निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पहल आने वाले समय में वृहद रूप लेगी और केजीएमयू को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक साबित होगी।

    लोक संस्कृति सम्मान 2024: लोक संस्कृति के ध्वजवाहकों का भव्य सम्मान समारोह

    लोक संस्कृति सम्मान 2024: लोक संस्कृति के ध्वजवाहकों का भव्य सम्मान समारोह
    लोक संस्कृति सम्मान 2024: लोक संस्कृति के ध्वजवाहकों का भव्य सम्मान समारोह
    लोक संस्कृति सम्मान 2024: लोक संस्कृति के ध्वजवाहकों का भव्य सम्मान समारोह
    • 11 विभूतियों को सम्मान: लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा 2024 में 11 प्रमुख हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
    • कार्यक्रम का उद्देश्य: लोक कला, भाषा और संस्कृति का संरक्षण और प्रचार।
    • कार्यक्रम की तारीखें: 28 और 29 दिसंबर, 2024।
    • स्थान: अलीगंज, लखनऊ।
    • लोक भाषाओं पर ध्यान: अवधी, भोजपुरी, ब्रज, बुंदेली, कन्नौजी, कुमाऊंनी और गढ़वाली पर विशेष चर्चा।

    लखनऊ, 21 दिसम्बर 2024: लोक संस्कृति शोध संस्थान ने अपने वार्षिक सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2024 के पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की है। रविवार को आयोजित बैठक के बाद संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि इस वर्ष 11 प्रतिष्ठित हस्तियों को लोक संस्कृति सम्मान प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने लोक संस्कृति के संरक्षण, संवर्द्धन और प्रचार-प्रसार में अतुलनीय योगदान दिया है।

    इस वर्ष सम्मानित होने वाले प्रमुख नामों में लखनऊ विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. कैलाश देवी सिंह और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल मिश्र शामिल हैं। इन सम्मानित विभूतियों के साथ ही अन्य 9 विशिष्ट व्यक्तियों को भी उनके कार्यों के लिए विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा।

    सम्मान समारोह का आयोजन और उद्देश्य

    लोक संस्कृति शोध संस्थान का यह कार्यक्रम 28 और 29 दिसंबर को लखनऊ के अलीगंज स्थित कमर्शियल पॉकेट ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य लोकभाषाओं, लोक साहित्य और क्षेत्रीय लोकजीवन की समृद्ध परंपरा को बढ़ावा देना है। इस दौरान अवधी, भोजपुरी, ब्रज, बुंदेली, कन्नौजी, कुमाऊंनी और गढ़वाली जैसी भाषाओं पर गहन चर्चा होगी। साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी, जो लोक संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को उजागर करेंगी।

    सुधा द्विवेदी ने बताया कि यह सम्मान उन लोगों को दिया जाता है जो अपने क्षेत्र में लोक कला और संस्कृति को संरक्षित रखते हुए समाज को प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा, “यह आयोजन न केवल लोक संस्कृति के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम है बल्कि नई पीढ़ी को इसकी समृद्ध धरोहर से परिचित कराने का प्रयास भी है।”

    सम्मान पाने वाली विभूतियां और उनकी श्रेणियां

    1. प्रो. कमला श्रीवास्तव स्मृति लोक संस्कृति सम्मान: रत्ना शुक्ला।
    2. पद्मश्री डॉ. योगेश प्रवीन स्मृति लोक संस्कृति सम्मान: डॉ. विनीत सिन्हा।
    3. आरती पांडेय स्मृति लोक संस्कृति सम्मान: गीता शुक्ला।
    4. प्रभा श्रीवास्तव स्मृति लोक संस्कृति सम्मान: उमा त्रिगुणायत।
    5. शोभा देवी स्मृति लोक संस्कृति सम्मान: ज्योति किरन रतन।
    6. रमावती देवी स्मृति लोक संस्कृति सम्मान: मंजू श्रीवास्तव।
    7. सावित्री देवी स्मृति लोक संस्कृति सम्मान: सीमा अग्रवाल।
    8. जे.पी. लम्बोदर स्मृति लोक संस्कृति सम्मान: डॉ. अनिल मिश्र।
    9. सीताराम तिवारी स्मृति लोक संस्कृति सम्मान: सर्वेश माथुर।
    10. पद्मश्री डॉ. विद्याविंदु सिंह लोक संस्कृति ध्वजवाहक सम्मान: प्रो. कैलाश देवी सिंह।
    11. डॉ. रामबहादुर मिश्र लोक संस्कृति ध्वजवाहक सम्मान: सौरभ कुमार कमल।

    लोक विमर्श के विशेष आकर्षण

    इस आयोजन का मुख्य आकर्षण विभिन्न भाषाओं और उनकी संस्कृति पर आधारित परिचर्चाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। यह कार्यक्रम लोक संस्कृति के ध्वजवाहकों के कार्यों को सम्मानित करने के साथ-साथ भविष्य में इसके संवर्द्धन और प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरणा देने का मंच बनेगा।

    ग्राम चौपालों में 04 लाख 46 हजार से अधिक समस्याओं का निस्तारण

    ग्राम चौपालों में 04 लाख 46 हजार से अधिक समस्याओं/प्रकरणों का किया गया निस्तारण
    ग्राम चौपालों में 04 लाख 46 हजार से अधिक समस्याओं/प्रकरणों का किया गया निस्तारण
    ग्राम चौपालों में 04 लाख 46 हजार से अधिक समस्याओं/प्रकरणों का किया गया निस्तारण

    लखनऊ, 21 दिसंबर 2024: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित ग्राम चौपालों ने अब तक अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है। उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में, प्रत्येक शुक्रवार को प्रदेश के प्रत्येक विकास खंड की दो ग्राम पंचायतों में “गांव की समस्या – गांव में समाधान” अवधारणा के तहत ग्राम चौपालों का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रयास ग्रामीण जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने का महत्वपूर्ण जरिया बन गया है।

    शुक्रवार, 20 दिसंबर 2024 को, उत्तर प्रदेश की 1412 ग्राम पंचायतों में ग्राम चौपालों का आयोजन किया गया। इन चौपालों में कुल 4002 समस्याओं का निस्तारण पंचायत स्तर पर ही किया गया।  इन बैठकों में 3455 ब्लॉक स्तरीय अधिकारी और 6400 ग्राम स्तरीय कर्मचारी उपस्थित रहे, जबकि 80,000 से अधिक ग्रामीणों ने इसमें सहभागिता की।

    ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त श्री जी.एस. प्रियदर्शी ने जानकारी दी कि जनवरी 2023 से अब तक 1,16,000 से अधिक ग्राम चौपालों का आयोजन किया गया है। इन चौपालों में 79 लाख 86 हजार से अधिक ग्रामीण शामिल हुए और कुल 4,46,000 से अधिक समस्याओं का निस्तारण किया गया है। इन चौपालों के जरिए व्यक्तिगत और सार्वजनिक समस्याओं को सुलझाने के साथ-साथ गांवों में सफाई और विकास कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

    ग्राम चौपालों की प्रमुख उपलब्धियां:

    1. ग्राम चौपालों की संख्या: जनवरी 2023 से अब तक 1,16,000 से अधिक ग्राम चौपालों का सफल आयोजन।
    2. समस्याओं का निस्तारण: 4,46,000 से अधिक ग्रामीण समस्याओं का समाधान किया गया।
    3. शुक्रवार आयोजन: केवल 20 दिसंबर को ही 1412 ग्राम पंचायतों में चौपालों का आयोजन।
    4. सहभागिता: अब तक 79 लाख 86 हजार ग्रामीणों ने चौपालों में भाग लिया।
    5. अधिकारियों की भूमिका: हर चौपाल में ब्लॉक और ग्राम स्तरीय अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी।

    सरकार की योजनाओं को नई गति

    ग्राम चौपालों के माध्यम से प्रदेश सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है। इन चौपालों में सार्वजनिक और व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।  उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने अधिकारियों को इन चौपालों के विधिवत आयोजन सुनिश्चित करने और गांवों में सफाई और जागरूकता पर फोकस बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।