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गणतंत्र दिवस पर विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की झांकियां दिखाई जाएंगी, जानें इस बार की थीम

नई दिल्ली: आगामी गणतंत्र दिवस परेड में झांकियों के प्रदर्शन का विषय ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ है। वहीं इस बार 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर झांकियां प्रस्तुत करने के लिए 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का चयन किया गया है। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को दी। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का चयन हुआ है, उनमें- आंध्र प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, दादर नागर हवेली और दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल का नाम है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, इसके अलावा, 2025 के गणतंत्र दिवस समारोह के लिए केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों और विभागों का भी चयन किया गया है।

ये रहेगी इस बार की थीम

बयान में कहा गया है, ‘‘हर साल राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और केंद्र सरकार के मंत्रालय/विभाग गणतंत्र दिवस समारोह (आरडीसी) के हिस्से के रूप में कर्तव्य पथ पर अपनी झांकियां प्रदर्शित करते हैं। आरडीसी-2025 के लिए झांकियों का विषय ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ तय किया गया है।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को, चाहे उनका चयन कर्तव्य पथ के लिए हो या ना हो, लाल किले में भारत पर्व (26-31 जनवरी) के दौरान अपनी झांकी प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।’’ मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि झांकी गणतंत्र दिवस परेड के महत्वपूर्ण घटकों में से एक होती हैं। बयान में कहा गया है कि परेड की कुल अवधि में झांकियों के लिए आवंटित समय के कारण, “विशेषज्ञ समिति द्वारा झांकियों का चयन किया जाता है।’’

कैसे होता है चयन

बयान में कहा गया है, ‘‘विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों द्वारा प्रस्तुत झांकी के विचारों का मूल्यांकन करते समय, वैचारिक विशिष्टता एवं नवीनता, स्पष्ट, संप्रेषणीय संदेश के साथ रचनात्मक अभिव्यक्ति, सूक्ष्मता के साथ-साथ प्रत्यक्षता का संयोजन, प्रत्येक झांकी में विरासत तथा विकास के बीच संतुलन, दोहराव वाले विचारों का बहिष्कार, रंग, रूप, बनावट, प्रवाह, लय, अनुपात व संतुलन जैसे विवरणों पर विशेष ध्यान, भव्य पैमाने का एक सुव्यवस्थित सौंदर्य अनुभव सुनिश्चित करना जैसे प्रमुख पहलुओं को चयन के लिए ध्यान में रखा गया।’’ बयान में कहा गया है कि वर्ष की शुरुआत से ही रक्षा मंत्रालय द्वारा झांकी से संबंधित विभिन्न गतिविधियों पर निर्णय लेने के लिए ‘‘परामर्श प्रक्रिया’’ अपनाई गई है।

अप्रैल 2024 में हुई बैठक

बयान में कहा गया है, ‘‘झांकी की गुणवत्ता में सुधार पर विचार-विमर्श के लिए अप्रैल 2024 में वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर एक बैठक आयोजित की गई थी। इसके माध्यम से प्राप्त विभिन्न सुझावों को प्रक्रिया में शामिल किया गया है। झांकी के लिए विषय-वस्तु भी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त सुझावों के आधार पर तय की गई थी।’’ मंत्रालय ने बयान में कहा कि गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने हेतु झांकियों के चयन के उद्देश्य से एक सुस्थापित प्रणाली मौजूद है, जिसके अनुसार रक्षा मंत्रालय सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों से झांकियों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करता है। बयान में कहा गया है, ‘‘विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों से प्राप्त झांकियों के प्रस्तावों का मूल्यांकन विशेषज्ञ समिति की बैठकों की एक श्रृंखला में किया जाता है, जिसमें कला, संस्कृति, चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, वास्तुकला, नृत्यकला आदि क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होते हैं।’’

मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘संपूर्ण चयन प्रक्रिया सशक्त, निष्पक्ष, पारदर्शी, योग्यता पर आधारित और किसी भी पूर्वाग्रह से मुक्त है। चयनित झांकियां भारत की विविध शक्तियों और इसकी निरंतर विकसित होती सांस्कृतिक समावेशिता को प्रदर्शित करेंगी, जो गौरवशाली भविष्य की ओर अग्रसर है, तथा विश्व दर्शकों के सामने ‘स्वर्णिम भारत – विरासत और विकास’ को प्रदर्शित करेंगी।’’

पाकिस्तान: कोर्ट ने इमरान खान और बुशरा बीबी के खिलाफ अल-कादिर मामले में फैसले को टाल दिया

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की एक अदालत ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी के खिलाफ 19 करोड़ पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में अपना फैसला छह जनवरी तक के लिए टाल दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक अदालत के न्यायाधीश नासिर जावेद राणा ने बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली थी, लेकिन उन्होंने फैसला सोमवार के लिए सुरक्षित रख लिया था।

‘सर्दियों की छुट्टियां आ रही हैं’

हालांकि, सोमवार को सुनवाई की अध्यक्षता करते हुए राणा ने कहा कि फैसला नहीं सुनाया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘फैसला आज नहीं सुनाया जाएगा। सर्दियों की छुट्टियां आ रही हैं और उच्च न्यायालय में कार्यवाही भी चल रही है।’’ अदालतें आधिकारिक तौर पर 24 दिसंबर से एक जनवरी तक शीतकालीन अवकाश पर रहेंगी। फैसला छह जनवरी को सुनाया जाएगा।

2023 में दर्ज किया गया था मामला

पाकिस्तान के राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने दिसंबर 2023 में खान (72), उनकी पत्नी बुशरा बीबी (50) और छह अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसमें उन पर राष्ट्रीय कोष को 19 करोड़ पाउंड (50 अरब पाकिस्तानी रुपये) का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। खान और बीबी पर मुकदमा चलाया गया है, क्योंकि मामले में आरोपी एक कारोबारी समेत अन्य सभी लोग देश से बाहर हैं

प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल के निधन पर राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने शोक व्यक्त किया

नई दिल्ली: मशहूर फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल का सोमवार शाम 6.30 बजे निधन हो गया। उन्होंने 90 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। इस मौके पर तमाम बॉलीवुड हस्तियों और राजनेताओं ने शोक जताया है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी ने भी बेनेगल के निधन पर दुख जताया है। बेनेगल को 1970 और 1980 के दशक में ‘अंकुर’, ‘निशांत’ और ‘मंथन’ जैसी फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा में समानांतर सिनेमा की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने क्या कहा?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘श्याम बेनेगल का निधन भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के एक गौरवशाली अध्याय का अंत है। उन्होंने एक नए तरह का सिनेमा शुरू किया और कई क्लासिक फिल्में तैयार कीं। एक सच्ची संस्था, उन्होंने कई अभिनेताओं और कलाकारों को तैयार किया। उनके असाधारण योगदान को दादा साहब फाल्के पुरस्कार और पद्म भूषण सहित कई पुरस्कारों के रूप में मान्यता मिली। उनके परिवार के सदस्यों और उनके अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।’

पीएम मोदी ने क्या कहा?

पीएम मोदी ने कहा, ‘श्री श्याम बेनेगल जी के निधन पर गहरा दुख हुआ, जिनकी कहानी कहने का भारतीय सिनेमा पर गहरा प्रभाव पड़ा। उनके कार्यों की विभिन्न क्षेत्रों के लोगों द्वारा प्रशंसा की जाती रहेगी। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं। ॐ शांति।’

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा, ‘यह दुखद अवसर है कि प्रसिद्ध निर्देशक श्याम बेनेगल का निधन हो गया। उन्होंने समानांतर सिनेमा को सबसे आगे लाया। उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। भारतीय सिनेमा के लिए उनकी सेवा अतुलनीय है और उनका जाना एक युग का अंत है।’ मैं दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।’

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बयान आया सामने

एकनाथ शिंदे ने कहा कि भारतीय फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक श्याम बेनेगल का निधन। आम आदमी के संघर्षों और सवालों को फिल्मों के जरिए पेश करने वाले दिग्गज निर्देशक पद्मश्री श्याम बेनेगल के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा खालीपन आ गया है। उन्होंने अपनी फिल्मों में जो कहानियां और मुद्दे प्रस्तुत किए वे विचारोत्तेजक और स्तब्ध कर देने वाले थे। वरिष्ठ फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल के निधन से फिल्म उद्योग ने सामाजिक मुद्दों पर प्रभावी टिप्पणी करने वाले एक कलाकार को खो दिया है।

नवीन पटनायक ने भी जताया दुख

ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने भी श्याम बेनेगल के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय सिनेमा का ‘अगुआ’ बताया। पटनायक ने कहा कि उनकी संवेदनाएं बेनेगल के परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के साथ हैं।

वैश्विक संघर्षों के बीच, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र अगले साल अपनी 80वीं वर्षगांठ पूरी कर रहा है। इस बीच भारत इस बात पर जोर दिया है कि वर्तमान एवं भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने में संगठन की ‘प्रासंगिकता’ बनाए रखने के लिए इसमें सुधार करना जरूरी है। इस साल दुनियाभर के नेताओं ने वैश्विक शासन में बदलाव और सतत कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी समझौतों पर हस्ताक्षर किए। जब विश्व के नेता सितंबर में महासभा के उच्च स्तरीय 79वें सत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एकत्र हुए, तो उन्होंने ऐतिहासिक ‘भविष्य की संधि’ को सर्वसम्मति से अपनाया। इस दस्तावेज में शांति और सुरक्षा, सतत विकास से लेकर जलवायु परिवर्तन, डिजिटल सहयोग, मानवाधिकार, लैंगिक मामलों, युवा एवं भावी पीढ़ियों तथा वैश्विक शासन में परिवर्तन से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।

स्पष्ट है भारत का रुख 

सुरक्षा परिषद की स्थायी एवं अस्थायी श्रेणियों में विस्तार समेत इसमें सुधार के लिए वर्षों से किए जा रहे प्रयासों में भारत अग्रणी रहा है। भारत का कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की परिषद 21वीं सदी के उद्देश्यों के लिए उपयुक्त नहीं है और यह समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती। भारत ने इस बात को रेखांकित किया है कि वह परिषद में स्थायी स्थान का सही मायनों में हकदार है।

पीएम मोदी ने कही थी ये बात 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के ‘भविष्य के शिखर सम्मेलन’ में अपने संबोधन के दौरान कहा था, ‘‘सुधार प्रासंगिकता की कुंजी है वैश्विक कार्रवाई वैश्विक महत्वाकांक्षा से मेल खानी चाहिए।’’ संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से मोदी ने ऐसे समय में परिवर्तन का आह्वान किया, जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध एवं आतंकवाद, जलवायु संकट, आर्थिक असमानता और महिलाओं के अधिकारों पर हमलों समेत कई संघर्षों से जूझ रही है। इन वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत ने समाधान तक पहुंचने और संघर्षों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति की लगातार वकालत की है।

एस जयशंकर ने क्या कहा था?

सितंबर में महासभा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर के संबोधन ने भारत के एक मजबूत रुख को दर्शाया। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि पड़ोसी देश की ‘‘सीमा-पार आतंकवाद की नीति’’ कभी सफल नहीं होगी और उसे अपने ‘‘कृत्यों के परिणामों का निश्चित तौर पर सामना करना होगा।’’

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘यह ज्ञात तथ्य है कि 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसे समस्या-समाधान तंत्र की आवश्यकता है जो अधिक प्रभावी और समावेशी हो। हम अपनी पुरानी पीढ़ियों के लिए बनाए गए तंत्र से अपनी भावी पीढ़ियों के लिए उपयुक्त भविष्य नहीं बना सकते।’’ गुटेरेस ने कहा कि आज जो ज्वलंत मुद्दे हैं, उनमें से कई की कल्पना 1945 में संयुक्त राष्ट्र के बहुपक्षीय ढांचे के निर्माण के समय नहीं की गई थी। शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने की संयुक्त राष्ट्र की क्षमता सवालों के घेरे में हैं।

यह भी जानें

इस बीच यहां यह भी बता दें कि, पाकिस्तान एक जनवरी 2025 से दो साल के कार्यकाल के लिए गैर-स्थायी सदस्य के रूप में सुरक्षा परिषद में शामिल होगा। इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तान अपने इस कार्यकाल का उपयोग जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाने के लिए करेगा। विश्व निकाय को 2025 में डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में पुनः वापसी के कारण भी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप को संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करने के लिए जाना जाता है।

बांग्लादेश ने भारत से औपचारिक रूप से अनुरोध किया, शेख हसीना की वापसी की मांग की

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखा है। इस पत्र में बांग्लादेश ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने यानी प्रत्यर्पण की मांग की है। बांग्लादेश में अंतरिम सरकार में शेख हसीना के खिलाफ कई मामलों केस दर्ज किया गया है। बता दें कि अगस्त महीने के आखिर में बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद शेख हसीना भारत चली आई थीं। हालांकि, अभी इस बात पर मुहर नहीं लगी है कि उन्होंने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दिया है या नहीं।

राजनयिक संदेश भेजा गया

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी है कि उसने शेख हसीना को ढाका वापस भेजने के लिए एक राजनयिक संदेश भेजा है। बांग्लादेश की अंतरिम ससकार में विदेश मंत्री तौहीद हुसैन ने कहा- ‘‘हमने भारत सरकार को एक राजनयिक संदेश भेजा है, जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश में न्यायिक प्रक्रिया के लिए उन्हें (हसीना) वापस ढाका भेजा जाए।’’

बांग्लादेश ने दी प्रत्यर्पण संधि की दलील

इससे पहले बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के सलाहकार जहांगीर आलम ने भी जानकारी दी है कि उनके कार्यालय की ओर से भी विदेश मंत्रालय को अपदस्थ प्रधानमंत्री हसीना के प्रत्यर्पण के लिए पत्र भेजा गया है। इसकी प्रक्रिया जारी है। गृह मंत्रालय के सलाहकार जहांगीर आलम दावा किया है कि ढाका और नयी दिल्ली के बीच प्रत्यर्पण संधि पहले से ही मौजूद है। इस संधि के तहत शेख हसीना को बांग्लादेश वापस लाया जा सकता है।

भारत में रह रही हैं शेख हसीना

बीते अगस्त महीने में बांग्लादेश में बड़े स्तर पर प्रदर्शन और हिंसा के बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 5 अगस्त देश छोड़ दिया था। वह तभी से भारत में निर्वासन में रह रही हैं। शेख हसीना और उनकी सरकार के मंत्रियों पर मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोप लगाए गए हैं और गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं।