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लखनऊ एयरपोर्ट में CBRN आपदा प्रबंधन पर मेगा मॉक अभ्यास: एनडीआरएफ और अन्य संस्थाओं की संयुक्त पहल

लखनऊ एयरपोर्ट में CBRN आपदा प्रबंधन पर मेगा मॉक अभ्यास: एनडीआरएफ और अन्य संस्थाओं की संयुक्त पहललखनऊ एयरपोर्ट में CBRN आपदा प्रबंधन पर मेगा मॉक अभ्यास: एनडीआरएफ और अन्य संस्थाओं की संयुक्त पहल
लखनऊ एयरपोर्ट में CBRN आपदा प्रबंधन पर मेगा मॉक अभ्यास: एनडीआरएफ और अन्य संस्थाओं की संयुक्त पहललखनऊ एयरपोर्ट में CBRN आपदा प्रबंधन पर मेगा मॉक अभ्यास: एनडीआरएफ और अन्य संस्थाओं की संयुक्त पहल
  • चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट, लखनऊ में CBRN आपदा पर मेगा मॉक अभ्यास आयोजित किया गया।
  • अभ्यास में एनडीआरएफ, CISF, SDRF, जिला पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और DAE ने भाग लिया।
  • फ्लोरीन गैस रिसाव और रेडिएशन आपदा पर खोज, राहत और बचाव कार्य का प्रदर्शन किया गया।
  • अभ्यास का नेतृत्व एनडीआरएफ के निरीक्षक राम सिंह ने 35-सदस्यीय टीम के साथ किया।
  • अभ्यास का उद्देश्य आपसी समन्वय, प्रतिक्रिया तंत्र की समीक्षा, और जीवन रक्षा सुनिश्चित करना था।

    लखनऊ के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर आज CBRN (Chemical, Biological, Radiological, Nuclear) आपदा प्रबंधन पर एक मेगा मॉक अभ्यास का आयोजन किया गया। यह अभ्यास एनडीआरएफ (NDRF) के उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के कुशल निर्देशन में आयोजित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य CBRN आपदाओं के दौरान त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को परखना, और खोज, राहत व बचाव कार्यों में दक्षता बढ़ाना था।

    इस मॉक अभ्यास में फ्लोरीन गैस के रिसाव और रेडिएशन आपदा जैसे संभावित खतरनाक परिदृश्य पर काम किया गया। इस आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की 11वीं टीम, लखनऊ ने एयरपोर्ट फायर विभाग, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), जिला पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के साथ मिलकर काम किया।

    अभ्यास का नेतृत्व एनडीआरएफ के निरीक्षक राम सिंह ने किया, जिन्होंने लखनऊ क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र की 35-सदस्यीय टीम का मार्गदर्शन किया। इस मॉक अभ्यास में विभिन्न टीमों ने मिलकर घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने और आपात स्थिति को नियंत्रित करने की रणनीतियों का प्रदर्शन किया। निरीक्षक राम सिंह ने बताया कि इस प्रकार के अभ्यास से आपसी समन्वय और प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत बनाया जा सकता है। समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले ऐसे अभ्यास आपदा प्रबंधन की तैयारियों को बेहतर बनाते हैं और महत्वपूर्ण जीवन की रक्षा करने में सहायक होते हैं।

    इस आयोजन के दौरान CISF के कमांडेंट अजय सिंह, Y P गौतम (समन्वयक, DAE, नरौरा), एयरपोर्ट फायर विभाग के अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि, SDRF और अन्य संबंधित संस्थाओं के अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी एजेंसियों ने आपसी तालमेल के साथ कार्य करते हुए रेस्पॉन्स सिस्टम को परखा और इसमें सुधार के उपायों पर चर्चा की।

    मॉक अभ्यास का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य आपदा प्रबंधन की प्रक्रियाओं के दौरान सामने आने वाली कमियों की समीक्षा करना और उन्हें दूर करने के लिए रणनीतियां विकसित करना था। एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक श्री मनोज कुमार शर्मा ने इस अभ्यास की सफलता पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के प्रयास आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाते हैं। यह मेगा मॉक अभ्यास CBRN आपदाओं से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल थी, जो आपदा प्रबंधन एजेंसियों की तैयारियों और उनके बीच समन्वय को परखने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

    लखनऊ: सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की 9 वर्षीय छात्रा को ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस’ सम्मान, वजह जानकार आपको भी होगी प्रसन्नता

    सी.एम.एस. की 9 वर्षीय छात्रा को ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस’ सम्मान, वजह जानकार आपको भी होगी प्रसन्नता
    सी.एम.एस. की 9 वर्षीय छात्रा को ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस’ सम्मान, वजह जानकार आपको भी होगी प्रसन्नता
    सी.एम.एस. की 9 वर्षीय छात्रा को ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस’ सम्मान, वजह जानकार आपको भी होगी प्रसन्नता
    • सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, अलीगंज द्वितीय कैंपस की 9 वर्षीय छात्रा आर्यमा शुक्ला को ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस’ से नवाजा गया।
    • आर्यमा ने मात्र 2 घंटे 10 मिनट में संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता का सस्वर गायन कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
    • सम्मान समारोह में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति से ‘सर्वधर्म समभाव’ की भावना प्रबल हुई।
    • आर्यमा को श्रीमद्भगवद्गीता के 700 श्लोक, श्री राम सहस्त्रनाम, शिव तांडव, और अन्य श्लोक कंठस्थ हैं।
    • सी.एम.एस. संस्थापिका और प्रधानाचार्या ने आर्यमा को प्रेरणा स्रोत बताते हुए उसकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।

    लखनऊ, 26 दिसंबर: सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, अलीगंज द्वितीय कैंपस की नौ वर्षीय छात्रा आर्यमा शुक्ला ने अपनी अद्वितीय स्मरणशक्ति और धर्मग्रंथों के गहरे ज्ञान से सभी को प्रभावित करते हुए ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस’ सम्मान प्राप्त किया। इस उपलब्धि ने लखनऊ का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन किया है। विदित हो कि बहुमुखी प्रतिभा की धनी 9 वर्षीय सी.एम.एस. छात्रा आर्यमा शुक्ला ने संस्कृत भाषा के ज्ञान, अद्भुद स्मरणशक्ति व धर्मग्रंथो के वाचन में प्रवीणता अर्जित कर लखनऊ का गौरव सारे विश्व में बढ़ाया है। आर्यमा ने गीता जयन्ती के अवसर पर मात्र 2 घंटे 10 मिनट में सम्पूर्ण श्रीमद्भागवत् गीता का सस्वर गायन कर एक अनूठा कीर्तिमान अपने नाम किया है। इसी अभूतपूर्व उपलब्धि हेतु आर्यमा को आज ‘वर्ल्ड रिकार्ड ऑफ एक्सीलेन्स’ से नवाजा गया।

    गुरुवार को विद्यालय परिसर में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में आर्यमा शुक्ला को उसकी अद्भुद स्मरणशक्ति व धर्मग्रंथो के गहरे ज्ञान हेतु आज एक भव्य सम्मान समारोह में ‘वर्ल्ड रिकार्ड ऑफ एक्सीलेन्स’ से नवाजा गया। आज विद्यालय परिसर में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में वर्ल्ड रिकार्ड ऑफ एक्सीलेन्स, इंग्लैण्ड के प्रतिनिधि एवं भारत में वर्ल्ड रिकार्ड ऑफ एक्सीलेन्स के वाइस प्रेसीडेन्ट संजय पंजवानी एवं भारत सरकार में एजूकेटर व मेंटर शिवशंकर शुक्ला ने आर्यमा को मेडल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

    सर्वधर्म समभाव का अद्भुत नजारा

    इस समारोह में विभिन्न धर्मों के प्रख्यात प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने समारोह को ‘सर्वधर्म समभाव’ की भावना से ओतप्रोत कर दिया।

    • हिंदू धर्म: अरविंद शास्त्री जी, कथा व्यास, और डॉ. अनुराग पाठक।
    • जैन धर्म: डॉ. शैलेंद्र जैन।
    • मुस्लिम धर्म: मौलाना डॉ. कल्बे सिब्तेन नूरी, कब्वे हुसैन और नजमुल हसन रिजवी।

    सभी धर्मगुरुओं ने आर्यमा को आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    आर्यमा की उपलब्धियां

    आर्यमा ने मात्र 2 घंटे 10 मिनट में संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता का सस्वर गायन कर विश्व स्तर पर एक अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया।

    • उन्हें श्रीमद्भगवद्गीता के 700 श्लोक कंठस्थ हैं।
    • अन्य धार्मिक ग्रंथों जैसे श्री राम सहस्त्रनाम, महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम, और शिव तांडव के श्लोकों का भी गहरा ज्ञान है।
    • आर्यमा केवल श्लोकों का पाठ नहीं करतीं, बल्कि उनके अर्थ को भी भलीभांति समझती हैं।

    सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गांधी ने इस अवसर पर उपस्थित विभिन्न धर्मावलम्बियों व गणमान्य अतिथियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि आर्यमा की इस उपलब्धि पर सी.एम.एस. परिवार गौरवान्वित है। आर्यमा ने कम उम्र में ही ईश्वर के प्रति अपनी आस्था व समर्पण भाव से उच्च जीवन मूल्यों व संस्कारों का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। डा. गांधी ने विद्यालय के शिक्षकों का भी आभार व्यक्त किया जो छात्रों की रूचियों को पहचान कर उन्हें उनकी रूचि के क्षेत्रों में बढ़ावा देने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं।

    सी.एम.एस. अलीगंज द्वितीय कैम्पस की प्रधानाचार्या श्रीमती संविदा अधिकारी ने बताया कि आर्यमा को श्रीमद्भागवत गीता के सभी 18 अध्यायों के 700 श्लोक कंठस्थ हैं। इसके अलावा, श्री राम सहस्त्रनाम, महिषासुर मर्दिनी स्त्रोतम, शिव तांडव समेत संस्कृति के बहुतेरे श्लोक भी कंठस्थ हैं। खास बात यह है कि आर्यमा मात्र इन पवित्र श्लोकों के वाचन में ही अद्भुद नहीं है अपितु उनके अर्थ की भी गहरी समझ रखती है। वास्तव में, आर्यमा छात्रों व किशोरों के लिए आध्यात्मिक उन्नति व उच्च जीवन मूल्यों की प्रेरणास्रोत के रूप में उभरी है।

    आर्यमा शुक्ला की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान की महत्ता को भी विश्व पटल पर उजागर करती है।

    सहकारिता विभाग: नई दिल्ली में 10,000 बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी व मत्स्य सहकारी समितियों का शुभारंभ, लखनऊ में भी राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन

    अमित शाह ने नई दिल्ली में 10,000 बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी व मत्स्य सहकारी समितियों का शुभारंभ, लखनऊ में भी राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन
    अमित शाह ने नई दिल्ली में 10,000 बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी व मत्स्य सहकारी समितियों का शुभारंभ, लखनऊ में भी राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन
    अमित शाह ने नई दिल्ली में 10,000 बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी व मत्स्य सहकारी समितियों का शुभारंभ, लखनऊ में भी राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन
    • 10,000 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का शुभारंभ।
    • लखनऊ में राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन।
    • प्रधानमंत्री योजनाओं में सहकारिता का योगदान।
    • कृषि अवसंरचना निधि के तहत नवाचारों को बढ़ावा।
    • सहकार से समृद्धि का लक्ष्य और उसकी उपलब्धियाँ।

    नई दिल्ली/लखनऊ: सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में केन्द्रीय सहकारिता एवं गृहमंत्री श्री अमित शाह ने 10,000 नवगठित बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का शुभारंभ किया। यह भव्य आयोजन भारतरत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, एन.ए.एस.सी. कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़ बनाना और सहकार से समृद्धि के सपने को साकार करना है।

    इस अवसर पर केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल और नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की। सहकारिता मंत्रालय ने इस आयोजन में सहकारी समितियों को सशक्त करने के लिए अपनी पहलों और योजनाओं पर प्रस्तुति दी।

    कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ:

    • 10,000 सहकारी समितियों का शुभारंभ: ये समितियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में बहुउद्देशीय सेवाएँ प्रदान करेंगी।
    • सहकार से समृद्धि का उद्देश्य: ग्रामीण विकास, कृषि सुधार, और रोजगार सृजन के लिए सहकारी समितियों की भूमिका को सुदृढ़ किया जाएगा।
    • विशेष अतिथि: राजीव रंजन ने डेयरी और मत्स्य पालन के क्षेत्र में सहकारिता की अहमियत पर प्रकाश डाला।
    • समितियों को प्रमाण पत्र वितरित: चयनित समितियों को प्रमाण पत्र और माइक्रो एटीएम जैसे उपकरण वितरित किए गए।

    लखनऊ में राज्यस्तरीय कार्यक्रम

    लखनऊ में प्रदेश स्तर पर सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर की अध्यक्षता में सहकारिता मुख्यालय स्थित चौधरी चरण सिंह सभागार में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चयनित 40 से अधिक सहकारी समितियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

    कार्यक्रम में प्रमुख सचिव सहकारिता एम.पी. अग्रवाल, प्रमुख सचिव दुग्ध विकास के. रविन्द्र नायक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही।

    प्रमुख उपलब्धियाँ:

    1. बी-पैक्स समितियों को सम्मानित किया गया:
      • गोरखपुर से बी-पैक्स अलामचक।
      • वाराणसी से बी-पैक्स अहरक।
      • लखीमपुर खीरी से बी-पैक्स बहादुर नगर।
      • सीतापुर से बी-पैक्स कासिमपुर।
      • अमेठी से बी-पैक्स कुरंग।
    2. दुग्ध समितियों को प्रमाण पत्र वितरित:
      • गोंडा की दुग्ध समिति तेजपुर।
      • मेरठ की दुग्ध समिति इस्लामाबाद छिलौर।
      • लखनऊ की दुग्ध समिति माँदा (उदित खेड़ा)।
      • रायबरेली की ताजुद्दीनपुर दुग्ध समिति।
    3. मत्स्य समितियों को प्रोत्साहन:
      • हरदोई की 5 नवगठित समितियों को प्रमाण पत्र।
      • लखनऊ के मत्स्य उद्यमियों को भी सम्मानित किया गया।
    4. प्रधानमंत्री योजनाओं का समावेश:
      • प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान।
      • MSME और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 3 लाभार्थियों को प्रमाण पत्र।
    5. कृषि अवसंरचना निधि (AIF):
      • लखनऊ के श्री संजय बंसल को उनके बायो एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए सम्मानित किया गया।
      • इस प्रोजेक्ट में एग्रो वेस्ट से पेलेट और बायो ब्रिकेट का उत्पादन किया जाता है।

    महत्वपूर्ण तथ्य:

    • नैनो उर्वरक वितरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली समितियाँ (कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, और झाँसी) को भी पुरस्कृत किया गया।
    • सीएससी योजना के तहत आगरा के श्री नरेंद्र सिंह को उनके जनसेवा केंद्र के लिए प्रशंसा मिली।
    • सहकारी समितियों के माध्यम से 15.08 लाख रुपये का व्यवसाय और 4.58 लाख रुपये की आय अर्जित हुई।

    कार्यक्रम का समापन और धन्यवाद ज्ञापन:

    आयोजन के संयोजक सहकारिता आयुक्त एवं निबंधक श्री बी.एन. सिंह ने आगंतुकों का स्वागत किया और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। धन्यवाद प्रस्ताव श्री आनंद कुमार, प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ ने दिया।

    “बथुआ खाने से सेहत को मिलते हैं शानदार फायदे, वेट लॉस से लेकर इम्यूनिटी को मजबूत करने में है कारगर”

    सर्दी के सीजन में बथुआ के साग खूब खाया जाता है इसके कई फायदे और बथुआ का साग हेल्थ के लिए बहुत अच्छा है। बथुआ में कैल्शियम, लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम, सोडियम व जिंक जैसे मिनरल्स के साथ विटामिन ए, सी और बी भरपूर मात्रा में मौजूद होती हैं। इसलिए यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। आइए आपको बथुआ के सेवन से मिलने वाले फायदे बताते हैं।

    वेट लॉस में मददगार

    अगर आपको अपना वजन कम करना है तो सर्दियों में बथुआ के साग का सेवन जरुर करे। आप चाहे तो इसे उबालकर खा सकते है या फिर इसका सूप बनाकर पी सकते है। बथुआ वेट लॉस में कारगार साबित होता है। बथुआ में अधिक मात्रा मे फाइबर मौजूद होते है। इसके सेवन करने से पेट फुल रहता है और इसे बार-बार खाने से बचते हैं। बथुआ लो कैलोरी फूड है।

    डायबिटीज पेशेंट के लिए लाभदायक

    डायबिटीज मरीजों के लिए बथुआ किसी चमत्कार से कम नहीं है। दरअसल, इसके सेवन से शरीर का ब्लड शुगर लेवल सामान्य रहता है। आप बथुआ का साग दाल चावल के साथ खा सकते हैं। डायबिटीज कंट्रोल करने में ये साग कारगर है।

    मजबूत और स्वस्थ बाल

    दरअसल, बथुआ में प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है इसके साथ ही इसमें अन्य विटामिन और खनिज भी होते हैं। जिन लोगों को बाल झड़ने की समास्या है वह इसका सेवन जरूर करे। डाइट में रोजाना बथुआ का साग खाना चाहिए। इससे आपके बालों की जड़ें मजबूती होती हैं।

     मजबूत इम्यून सिस्टम

    बथुआ खाने से शरीर में इम्यूनिटी बूस्ट होती है। इसमें अमीनो एसिड, फाइबर और कई पोषक तत्व होते है। बथुआ साग का सेवन करने से आप कई बीमारियों से बच सकते है।

    आयरन की कमी दूर होती

    सर्दियों में बथुआ खाने से शरीर में खून की कमी नहीं होती है। बथुआ में आयरन और फोलिक एसिड पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करते हैं। खासतौर पर महिलाओं के लिए बथुआ का सेवन जरुर करना चाहिए। यह  महिलाओं के पीरियड्स की अनियमितता में भी आराम पहुंचाने में मदद कर सकते है।

    टी सिटी ऑफ इंडिया: चाय प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा है यह शहर, यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता दिल को खुशी से देगी भर

    अक्सर लोग सुबह की शुरूआत चाय की चुस्कियों के साथ करते हैं। तो वहीं कई लोगों की नींद चाय से खुलती है। किसी का दिन चाय के बिना अधूरा रहता है, तो कोई अखबार पढ़ते-पढ़ते चाय की चुस्कियां लेते हैं। गर्मियों से लेकर सर्दियों और मानसून हर मौसम में चाय पी जाती है। गर्मागर्म चाय के स्वाद से ही दिन भर की थकान छू मंतर हो जाती है। भारत में चाय जितनी ज्यादा पी जाती है, उतनी ही उत्पादन भी की जाती है। भारत सबसे ज्यादा चाय उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है।

    चाय के उत्पादन में भारत को दुनिया का सबसे बड़ा देश माना जाता है। यहां 80 फीसदी चाय घरेलू उपयोग के लिए और 20 फीसदी निर्यात किया जाता है। भारत में उत्तर से लेकर दक्षिण तक चाय का उत्पादन होता है। भारत के उत्तरी भाग में 83 फीसदी औऱ दक्षिण भारत में 17 फीसदी चाय उगाई जाती है। भारत में एक शहर ऐसा है, जिसको चाय का शहर कहा जाता है। ऐसे में अगर आप भी चाय के शौकीन हैं, तो आपको भी इस शहर के बारे में जरूर जानना चाहिए। साथ ही आप यहां पर घूमने का भी प्लान बना सकते हैं।

    चाय का शहर

    बता दें कि डिब्रूगढ़ भारत का एक ऐसा शहर है, जो चाय के बागानों के लिए फेमस है। यह शहर चाय उत्पादन का केंद्र है। यहां पर असमिया चाय की खेती बड़े पैमाने पर होती है। डिब्रूगढ़ से पूरी दुनिया में चाय निर्यात की जाती है। चाय का स्वाद, अनोखी सुगंध और गहराई के कारण यह अपने आप में अलग पहचान बनाती है।

    चाय का शहर डिब्रूगढ़

    भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित असम राज्य का खूबसूरत शहर डिब्रूगढ़ है। असम अपने वनस्पतियों, समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों और जीवों के लिए जाना जाता है। वहीं असम पूरी दुनिया में चाय के बागानों के लिए भी जाना जाता है।

    क्यों कहते हैं चाय की नगरी

    19वीं शताब्दी से असम की चाय का इतिहास जुड़ा है। उस दौरान ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां पर चाय की खेती शुरू की थी। फिर धीरे-धीरे असम चाय उद्योग का एक प्रमुख केंद्र बन गया और आज यह डिब्रूगढ़ चाय उत्पादन के लिए फेमस है। यहां पर चाय के बागान सिर्फ देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी फेमस है। असमिया चाय की पत्तियां अपने गहरे रंग, मजबूत स्वाद और एनर्जी देने वाले गुणों के लिए जानी जाती है। असम के डिब्रूगढ़ शहर को चाय का शहर भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर चाय का उत्पादन अधिक होता है।

    जानिए डिब्रूगढ़ की खासियत

    डिब्रूगढ़ की सबसे बड़ी खासियत यहां पर मौजूद चाय के बागान हैं। यहां के बागानों से उत्पादित होने वाली असमिया चाय की गुणवत्ता अद्वितीय होती है। यह चाय वैश्विक बाजार में एक विशेष स्थान रखती है। यह जगह सिर्फ चाय बागानों के लिए ही नहीं बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। यहां पर आपको खूबसूरत पहाड़ियां, हरे-भरे चाय के बागान और ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर बसा यह शहर अपने खूबसूरत वातावरण के लिए फेमस है।

    इस शहर की संस्कृति भी असमिया परंपराओं और त्योहारों से समृद्ध है। यहां के स्थानीय पर्व जैसे बिहू असम के लोक संगीत और नृत्य इसकी सांस्कृतिक धरोहरों को अधिक खास बनाते हैं।

    ऐसे पहुंचे डिब्रूगढ़

    डिब्रूगढ़ पहुंचने के लिए आप बस, ट्रेन और हवाई जहाज से यात्रा कर सकते हैं। यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा डिब्रूगढ़ से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मोहनबाड़ी एयरपोर्ट है। आपको दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी से नियमित फ्लाइट्स मिल जाएंगी।

    वहीं अगर आप ट्रेन से जाने की सोच रहे हैं, तो डिब्रूगढ़ में दो रेलवे स्टेशन हैं। एक डीबीआरजी और दूसरा डीबीआरटी है। डिब्रूगढ़ रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। दिल्ली से डिब्रूगढ़ के लिए 3 ट्रेनें चलती हैं।

    इसके अलावा आप सड़क मार्ग से भी डिब्रूगढ़ तक पहुंच सकते हैं। गुवाहाटी से डिब्रूगढ़ की दूरी करीब 450 किमी है। यहां आप बस या टैक्सी द्वारा आसानी से की जा सकती है।

    डिब्रूगढ़ के पर्यटन स्थल

    चाय के बागान

    बता दें कि यहां पर आप चाय के हरे-भरे बागानों का दौरा कर सकते हैं। वहीं चाय की खेती से जुड़ी प्रक्रियाओं को पास से देख सकते हैं।

    ब्रह्मपुत्र नदी

    डिब्रूगढ़ शहर ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर बसा है। साथ ही यह शहर जलविहार के लिए भी फेमस है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का अद्भुत नजारा देख सकते हैं।

    नामफाकाम मठ

    डिब्रूगढ़ के पास नामफाकाम नामक मठ प्रमुख बौद्ध धार्मिक स्थल है, यह स्थान अपने शांतिपूर्ण वातावरण के लिए भी जाना जाता है।