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ODOP UP: हर साल बहराइच की 50 हजार टन हल्दी खरीदेंगे योगगुरु स्वामी रामदेव

ODOP UP: हर साल बहराइच की 50 हजार टन हल्दी खरीदेंगे योगगुरु स्वामी रामदेव
ODOP UP: हर साल बहराइच की 50 हजार टन हल्दी खरीदेंगे योगगुरु स्वामी रामदेव
ODOP UP: हर साल बहराइच की 50 हजार टन हल्दी खरीदेंगे योगगुरु स्वामी रामदेव
  • सीएम योगी की ओडीओपी मुहिम का दिखा असर, किसानों को होगा ज्यादा मुनाफा।
  • बहराइच की हल्दी का आयुर्वेदिक दवाओं में होगा इस्तेमाल, विश्वपटल पर मिलेगी पहचान।
  • सीएम योगी के निर्देश पर की गई पहल, डीएम बहराइच की मौजूदगी में तीन एफपीओ और स्वामी रामदेव की कंपनी के बीच हुआ करार।
  • बहराइच के मिहिंपुरवा में होती है हल्दी की खेती, उच्च क्वालिटी के लिए प्रसिद्ध है यहां की हल्दी।

लखनऊ, 30 दिसंबर 2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडेक्ट (ओडीओपी) योजना का असर लगातार दिख रहा है। अन्नदाता किसानों के लिए सीएम योगी के प्रयासों का ही नतीजा है कि योगगुरु स्वामी रामदेव बहराइच की हल्दी खरीदने के लिए आगे आए हैं। इसका इस्तेमाल वे आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में करेंगे। बता दें कि बहराइच की हल्दी की गुणवत्ता काफी अच्छी होती है, इस कारण इसकी डिमांड भी काफी रहती है। यही वजह है कि योगगुरु की कंपनी और बहराइच के तीन एफपीओ के बीच एमओयू साइन किया गया है।

बहराइच के तीन एफपीओ और योगगुरु की कंपनी के बीच हुआ एमओयू
बहराइच की जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरुप जिले के उत्पादों को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने और अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं। इसके तहत बहराइच में 86 कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किये गये हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि सीएम योगी के निर्देश पर हल्दी और अन्नदाताओं को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए योगगुरु स्वामी रामदेव की कंपनी के साथ बहराइच की तीन एफपीओ के बीच एमओयू साइन किया गया है। यह एमओयू बहराइच की 3 एफपीओ प्रत्युष बायोएनर्जी फॉर्मर प्रोड्‌यूसर कंपनी लिमिटेड, वीरांगना लक्ष्मीबाई महिला किसान निर्माता कंपनी लिमिटेड और सीएससी राज किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड ने साइन किया है। हरिद्वार में हुए एमओयू में योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, बहराइच जिलाधिकारी मोनिका रानी, उप कृषि निदेशक टीपी शाही, सीएससी राज किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड मिहिंपुरवा के निदेशक अखिलेश सिंह आदि मौजूद रहे।

हर साल 50 हजार टन हल्दी खरीदेंगे स्वामी रामदेव
जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बताया कि बहराइच का मिहिंपुरवा क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ भूमि और अनुकूल जलवायु होने के कारण कृषि के लिए काफी उपयुक्त है। यही वजह है कि यहां हल्दी, जिमीकन्द और हरी सब्जियों की काफी अधिक मात्रा में खेती की जाती है। इसे कई राज्यों के साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी भेजा जाता है। इसके बावजूद अन्नदाताओं को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। इसे देखते हुए अन्नदाताओं की आय बढ़ाने के लिए प्रति वर्ष 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगभग 2000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 45-50 हजार टन हल्दी के विक्रय/विपणन स्वामी रामदेव की कंपनी से कराया गया है। उप कृषि निदेशक टीपी शाही ने बताया कि एफपीओ के 1,880 पुरुष किसान तथा 975 महिला किसान हल्दी उत्पादन से जुड़े हैं। इसी तरह यहां 150 हेक्टेयर में जिमीकन्द की खेती की जा रही है, जिसमें 30-35 टन प्रति हेक्टेयर में कुल 5,250 टन जिमीकन्द का उत्पादन हो रहा है। स्थानीय और राष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग अधिक है। इसी प्रकार लगभग 600 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में हरी सब्जियों की भी यहां खेती हो रही है।

प्रयागराज की 150 साल पुरानी धरोहर का होगा जीर्णोद्धार, महाकुंभ में दिखेगा नया स्वरूप

प्रयागराज की 150 साल पुरानी धरोहर का होगा जीर्णोद्धार, महाकुंभ में दिखेगा नया स्वरूप
प्रयागराज की 150 साल पुरानी धरोहर का होगा जीर्णोद्धार, महाकुंभ में दिखेगा नया स्वरूप
प्रयागराज की 150 साल पुरानी धरोहर का होगा जीर्णोद्धार, महाकुंभ में दिखेगा नया स्वरूप
  • प्रयागराज नगर निगम के 150 साल पुराने भवन का 9 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
  • भवन के निर्माण में पारंपरिक सामग्री जैसे गुड़, दाल, चूना, और बेलगिरी का उपयोग किया जा रहा है।
  • महाकुंभ 2025 से पहले भवन को संरक्षित कर नया स्वरूप दिया जाएगा।
  • फसाड लाइटिंग और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक से भवन को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया जाएगा।
  • योगी सरकार द्वारा प्रयागराज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने का प्रयास जारी है।

    प्रयागराज, 30 दिसम्बर 2024: महाकुंभ, भारत की सनातनी परंपराओं और संस्कृति का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। जनवरी 2025 में प्रयागराज में आयोजित होने वाले इस भव्य महापर्व को अद्वितीय बनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। योगी सरकार ने इस आयोजन को दिव्य और भव्य स्वरूप देने के साथ-साथ प्रयागराज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन का भी बीड़ा उठाया है। इसी क्रम में प्रयागराज नगर निगम के 150 साल पुराने भवन का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जो महाकुंभ में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बनेगा।

    नगर निगम का ऐतिहासिक भवन: एक धरोहर

    प्रयागराज नगर निगम का यह भवन 1865 के आसपास ब्रिटिश काल में ‘ग्रेट नॉर्दर्न’ होटल के रूप में बनाया गया था। बाद में इसे प्रशासनिक भवन में बदल दिया गया और फिर नगर निगम कार्यालय के रूप में उपयोग किया गया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह भवन बुद्धिजीवियों की बैठक का प्रमुख स्थान था। इस भवन में स्वतंत्रता से जुड़े कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए।
    दिसंबर 2020 में इस भवन की एक छत गिरने के बाद इसे गिराकर नया भवन बनाने का विचार किया गया। लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), एमएनआईटी प्रयागराज और आईआईटी मुंबई जैसे संस्थानों के परामर्श के बाद इस ऐतिहासिक इमारत को संरक्षित करने का निर्णय लिया गया। अब 9 करोड़ रुपये की लागत से इस भवन का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

    पारंपरिक सामग्री से किया जा रहा है निर्माण

    यह भवन पर्यावरण-अनुकूल पारंपरिक सामग्रियों से बनाया गया था। उसी तर्ज पर इसके जीर्णोद्धार के लिए भी पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

    • भवन के निर्माण में गुड़, उड़द की दाल, मेथी, बेलगिरी, चूना और सुरखी जैसी सामग्रियों का उपयोग हो रहा है।
    • इन सामग्रियों को मध्य प्रदेश के कटनी और अन्य राज्यों से मंगवाया गया है।
    • सीमेंट, बालू, और टाइलों जैसी आधुनिक सामग्रियों को हटाकर इसे इसके मूल स्वरूप में वापस लाने का प्रयास हो रहा है।

    पारंपरिक सामग्रियों के उपयोग से यह भवन गर्मी में ठंडा रहेगा और ठंड में गर्म। यह तरीका पर्यावरण के अनुकूल है और इससे एयर कंडीशनिंग की जरूरत भी कम होगी।

    भवन में होंगे ये बदलाव

    • फसाड लाइटिंग का उपयोग: जीर्णोद्धार के बाद इस भवन में आकर्षक रोशनी लगाई जाएगी, जो रात में इसकी भव्यता को और बढ़ाएगी।
    • पुराने स्वरूप की बहाली: आधुनिक मरम्मत के दौरान लगाए गए सीमेंट प्लास्टर, टाइलें, और अन्य चीजें हटा दी जाएंगी।
    • म्यूजियम की झलक: इस भवन में पहले प्रयागराज म्यूजियम हुआ करता था, जिसके साक्ष्य अब भी यहां मौजूद हैं। इन्हें संरक्षित किया जाएगा।

    महाकुंभ 2025 तक होगा तैयार

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि यह ऐतिहासिक भवन महाकुंभ से पहले अपने नए स्वरूप में तैयार हो जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु और पर्यटक इस धरोहर का दीदार कर सकेंगे।
    नगर आयुक्त चंद्र मोहन गर्ग ने कहा, “यह भवन प्रयागराज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इसके संरक्षण से न केवल नगर निगम का गौरव बढ़ेगा, बल्कि यह महाकुंभ में पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बनेगा।”

    योगी सरकार का धरोहर संरक्षण पर जोर

    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महाकुंभ को न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक अद्वितीय आयोजन बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार प्रयागराज की धरोहरों को संरक्षित करने और उन्हें पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
    नगर निगम भवन का जीर्णोद्धार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों और सांस्कृतिक संवर्धन का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

    यूपी के किसानों को केले से अतिरिक्त आय का अवसर

    यूपी के किसानों को केले से अतिरिक्त आय का अवसर
    यूपी के किसानों को केले से अतिरिक्त आय का अवसर
    यूपी के किसानों को केले से अतिरिक्त आय का अवसर
    • दस साल में केले का निर्यात दस गुना बढ़ा, 2013 में 2.7 करोड़ डॉलर से 2023-24 में 25.14 करोड़ डॉलर।
    • केला बना कुशीनगर का ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’, किसानों को मिल रहा अनुदान और प्रशिक्षण।
    • केंद्र का लक्ष्य: अगले दो-तीन वर्षों में केले का निर्यात बढ़ाकर 1 अरब डॉलर करना।
    • उत्तर प्रदेश के प्रमुख केला उत्पादक जिले: कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, और बाराबंकी।
    • योगी सरकार की पहल: 38,000 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान और बेहतर कनेक्टिविटी से किसानों को लाभ।

    लखनऊ, 30 दिसंबर 2024: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए केला अब सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि बढ़ते निर्यात और सरकारी योजनाओं के चलते आर्थिक उन्नति का साधन बनता जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की पहल के चलते उत्तर प्रदेश के केला उत्पादक किसानों को बढ़ते निर्यात से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में केले का निर्यात पिछले दस वर्षों में लगभग दस गुना बढ़ा है।

    योगी सरकार की ओर से केले को कुशीनगर का ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) घोषित करना और किसानों को अनुदान और प्रशिक्षण प्रदान करना, इसे और अधिक प्रोत्साहन दे रहा है। इस दिशा में राज्य की बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं यूपी के किसानों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मददगार साबित हो रही हैं।

    यूपी के केले की बढ़ती मांग

    उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और अवध क्षेत्र के कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, बाराबंकी जैसे जिलों में केले की खेती प्रमुखता से की जाती है। पिछले एक दशक में उन्नत तकनीकों और नई प्रजातियों के प्रयोग से खेती की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार हुआ है। यही कारण है कि यूपी के केले की मांग देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ नेपाल और अन्य देशों में भी बढ़ रही है।

    योगी सरकार द्वारा प्रति हेक्टेयर 38,000 रुपये का अनुदान और किसानों को केला प्रसंस्करण के लिए प्रशिक्षण देने जैसी योजनाएं इस क्षेत्र में किसानों की आय को कई गुना बढ़ा रही हैं।

    निर्यात में जबरदस्त वृद्धि

    केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2013 में भारत से केले का निर्यात मात्र 2.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर था, जो 2023-24 में बढ़कर 25.14 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया। अगले दो-तीन वर्षों में केले का निर्यात 1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

    भारत, जो कि विश्व का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है, वैश्विक निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल भारत का वैश्विक निर्यात में हिस्सा सिर्फ 1% है, लेकिन हेल्दी फूड की बढ़ती मांग को देखते हुए इसे बढ़ाने की प्रबल संभावना है।

    यूपी सरकार की पहल

    उत्तर प्रदेश में केले की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए योगी सरकार लगातार कदम उठा रही है।

    • केले को प्रसंस्कृत कर उत्पाद बनाने पर जोर: केला रेशे, तने के जूस और अन्य उत्पादों के निर्माण के लिए किसानों को प्रशिक्षण और बाजार में एक्सपोजर दिया जा रहा है।
    • बेहतर कनेक्टिविटी: एक्सप्रेसवे, रेल और एयर कनेक्टिविटी से लैंड लॉक्ड राज्य उत्तर प्रदेश वैश्विक बाजारों से जुड़ने में सक्षम हुआ है।
    • सरकारी अनुदान: प्रति हेक्टेयर खेती पर अनुदान और केले को ODOP के तहत प्रोत्साहन देने से किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है।

    भारत का केला: उत्पादन और वैश्विक महत्व

    भारत विश्व का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है, जिसकी वैश्विक उत्पादन में 30% हिस्सेदारी है। भारत में लगभग 9.61 लाख हेक्टेयर भूमि पर केले की खेती की जाती है, जिससे 3.5 करोड़ मीट्रिक टन उत्पादन होता है।

    हालांकि, वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी केवल 1% है। केंद्र सरकार द्वारा समुद्री मार्ग से फलों के निर्यात के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू किए जा रहे हैं, जिनमें केला भी शामिल है।

    यूपी के किसानों को लाभ

    उत्तर प्रदेश सरकार की पहल और केंद्र की योजनाओं का सबसे बड़ा लाभ यूपी के केला उत्पादक किसानों को होगा। कुशीनगर और आसपास के जिलों में केले की खेती में निवेश और तकनीकी सहायता किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही है।

    पतित को पावन बनाने का पर्व है महाकुंभ- प्रयागपुत्र राकेश कुमार शुक्ला

    पतित को पावन बनाने का पर्व है महाकुंभ- प्रयागपुत्र राकेश कुमार शुक्ला
    पतित को पावन बनाने का पर्व है महाकुंभ- प्रयागपुत्र राकेश कुमार शुक्ला
    पतित को पावन बनाने का पर्व है महाकुंभ- प्रयागपुत्र राकेश कुमार शुक्ला
    • महाकुंभ: अध्यात्म, संस्कृति और मानवता का संगम, पतित को पावन बनाने का पर्व।
    • महाकुंभ के चार आयाम: आध्यात्मिक परिकल्पना, प्रबंधन, अर्थव्यवस्था और वैश्विक भागीदारी।
    • सनातन धर्म का उद्देश्य: मानव मात्र का कल्याण और धर्म का वास्तविक स्वरूप।
    • डिजिटल डिटॉक्स का माध्यम: श्रद्धालुओं को रील से रियल जीवन की ओर प्रेरित करता है।
    • महाकुंभ 2025 की तैयारियां: भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर।

    प्रयागराज, 30 दिसंबर: महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति और मानवता का अद्वितीय संगम है। यह पर्व करीब डेढ़ माह तक चलता है और दुनिया भर से करोड़ों श्रद्धालु इसमें भाग लेने आते हैं। महाकुंभ अध्यात्म, संस्कृति और समाज का एक ऐसा मंच है, जहां मानवता के कल्याण का संदेश प्रसारित किया जाता है। प्रयागपुत्र राकेश कुमार शुक्ला, जो मेला विशेषज्ञ और 2019 कुंभ में केंद्र सरकार के विशेष सलाहकार रह चुके हैं, ने महाकुंभ के महत्व और इसकी मूल भावना पर विस्तार से चर्चा की।

    महाकुंभ का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व

    महाकुंभ मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत है। इसे केवल एक मेला मानना इसकी पवित्रता और महत्व को कमतर आंकने जैसा होगा। राकेश शुक्ला ने इसे “पतित को पावन बनाने का पर्व” बताया और कहा कि यह जीवन को पुनः आध्यात्मिकता और सत्य की ओर ले जाने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने महाकुंभ को डिजिटल डिटॉक्स का माध्यम बताते हुए कहा कि श्रद्धालु यहां रील की बजाय रियल जीवन जीने का अनुभव करते हैं। कल्पवास, ध्यान, तप, और सत्संग के माध्यम से यह पर्व आत्ममंथन का अद्भुत अवसर है।

    महाकुंभ के चार आयाम

    राकेश शुक्ला ने महाकुंभ को चार मुख्य हिस्सों में बांटते हुए इसे श्रद्धालुओं के लिए समझना आवश्यक बताया:

    1. आध्यात्मिक परिकल्पना: ऋषि-मुनियों और संतों के सत्संग एवं विचारों से शुरू होने वाला पर्व।
    2. प्रबंधन: श्रद्धालुओं और संतों के लिए कुशल और सुव्यवस्थित व्यवस्था।
    3. अर्थव्यवस्था: स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक उन्नति का साधन।
    4. वैश्विक भागीदारी: विदेशी श्रद्धालुओं और साधकों का आना, जिससे भारत की संस्कृति का प्रसार होता है।

    सनातन धर्म का उद्देश्य: मानव मात्र का कल्याण

    महाकुंभ सनातन वैदिक हिंदू धर्म का एक ऐसा आयोजन है, जिसका उद्देश्य केवल धार्मिकता नहीं, बल्कि मानवता का व्यापक कल्याण है। राकेश शुक्ला ने कहा कि संतों के संदेश से प्रेरित होकर समाज को यह समझना चाहिए कि व्यवसाय में धर्म होना चाहिए, न कि धर्म का व्यवसाय। यह पर्व अध्यात्म और सेवा का संदेश देता है।

    डिजिटल युग में रियल जीवन का अनुभव

    महाकुंभ को राकेश शुक्ला ने डिजिटल डिटॉक्स का अद्वितीय अवसर बताया। यहां श्रद्धालु तकनीक से दूर होकर प्रकृति, अध्यात्म और मानवता के करीब आते हैं। कल्पवास के माध्यम से श्रद्धालु जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने का प्रयास करते हैं।

    महाकुंभ 2025: आयोजन की तैयारियां जोरों पर

    महाकुंभ 2025 के आयोजन को लेकर प्रयागराज में तैयारियां जोरों पर हैं। यह आयोजन दुनिया भर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा और भारतीय संस्कृति के महत्व को वैश्विक स्तर पर उजागर करेगा। मेला प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की योजनाएं अभी से तैयार की जा रही हैं।

    संदेश: धर्म में व्यवसाय नहीं, व्यवसाय में धर्म हो

    राकेश शुक्ला ने महाकुंभ को “ईश्वरीय संविधान की शक्ति से संचालित पर्व” बताया और कहा कि यह मानवता के कल्याण का माध्यम है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे इस पर्व को केवल मेला न समझें, बल्कि इसकी पवित्रता और महत्व को आत्मसात करें।

    महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह मानवता की सांस्कृतिक धरोहर है। यह पर्व आध्यात्मिक शांति, पवित्रता और मानवता के अद्भुत संदेश को प्रसारित करता है। श्रद्धालु इस महापर्व में भाग लेकर जीवन के वास्तविक अर्थ और उद्देश्य को समझ सकते हैं।

    फतेहपुर में योगी सरकार की योजनाओं पर लग रहा पलीता: सीएचसी हरदों के पास त्रिलोचनपुर के “आस्था पॉली क्लीनिक” में झोलाछाप डॉक्टर का आतंक, बिना लाइसेंस कर रहा हॉस्पिटल का संचालन

    फतेहपुर में योगी सरकार की योजनाओं पर लग रहा पलीता: सीएचसी हरदों के पास त्रिलोचनपुर चौराहे के आस्था पॉलीक्लिनिक में झोलाछाप डॉक्टर का आतंक, बिना लाइसेंस के कर रहा हॉस्पिटल का संचालन
    फतेहपुर में योगी सरकार की योजनाओं पर लग रहा पलीता: सीएचसी हरदों के पास त्रिलोचनपुर चौराहे के आस्था पॉलीक्लिनिक में झोलाछाप डॉक्टर का आतंक, बिना लाइसेंस के कर रहा हॉस्पिटल का संचालन
    फतेहपुर में योगी सरकार की योजनाओं पर लग रहा पलीता: सीएचसी हरदों के पास त्रिलोचनपुर चौराहे के आस्था पॉलीक्लिनिक में झोलाछाप डॉक्टर का आतंक, बिना लाइसेंस के कर रहा हॉस्पिटल का संचालन
    • फतेहपुर के खागा तहसील क्षेत्र के त्रिलोचनपुर में “आस्था पॉली क्लीनिक” बिना लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के झोलाछाप डॉक्टर द्वारा संचालित।
    • मेडिकल गाइडलाइंस की अनदेखी: बिना किसी मेडिकल डिग्री के गंभीर बीमारियों का इलाज और अस्पताल का संचालन।
    • स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत: जनपद के स्वास्थ्य अधिकारियों की अनदेखी से अवैध पॉलीक्लिनिक निर्बाध रूप से चल रहा है।
    • डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से इस झोलाछाप डॉक्टर और अवैध पॉलीक्लिनिक के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद।
    • सरकारी योजनाओं को नुकसान: अवैध अस्पताल गरीबों के शोषण के साथ सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं की छवि धूमिल कर रहे हैं।

    फतेहपुर/लखनऊ, 30 दिसम्बर 2024: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है, वहीं भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए सख्त कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है और उन्हें सीधे जेल भेजा जा रहा है। बावजूद इसके, कुछ माफिया और झोलाछाप डॉक्टर अब भी बेखौफ होकर गरीबों का शोषण कर रहे हैं और सरकार की योजनाओं को विफल करने में जुटे हुए हैं।

    फतेहपुर जनपद के खागा तहसील क्षेत्र में हरदों के पास स्थित त्रिलोचनपुर पर संचालित “आस्था पॉली क्लीनिक” इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। यह प्राइवेट अस्पताल हरदो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस पॉलीक्लिनिक में बिना किसी रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से एक झोलाछाप डॉक्टर न केवल गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहा है, बल्कि वहां कई बेड लगाकर अस्पताल भी संचालित कर रहा है।

    मेडिकल गाइडलाइंस की खुलेआम अवहेलना

    उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की स्पष्ट गाइडलाइंस के बावजूद यह अवैध पॉलीक्लिनिक बेखौफ चल रहा है। इस झोलाछाप डॉक्टर की न तो कोई मेडिकल डिग्री है और न ही अस्पताल संचालन का कोई लाइसेंस। लेकिन फिर भी वह खुद को किसी एमबीबीएस डॉक्टर से कम नहीं समझता। दूर-दूर से आए मरीजों का इलाज कर उन्हें गुमराह करना और आर्थिक रूप से शोषित करना इस क्लिनिक की दिनचर्या बन चुकी है।

    स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत का खेल

    आस्था पॉलीक्लिनिक की अवैध गतिविधियों के पीछे जनपद स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत साफ नजर आती है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों की अनदेखी के कारण इस अवैध अस्पताल का संचालन निर्बाध रूप से जारी है। इस झोलाछाप डॉक्टर की गतिविधियों से स्थानीय लोग त्रस्त हैं, लेकिन जनपद स्तरीय अधिकारी आंख मूंदकर सो रहे हैं।

    डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की कार्रवाई का इंतजार

    उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक प्रदेश भर में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। वह कई जनपदों में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर चुके हैं। अब फतेहपुर जनपद के त्रिलोचनपुर को भी उनकी सक्रियता और हस्तक्षेप की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही डिप्टी सीएम की नजर इस अवैध पॉलीक्लिनिक पर पड़ेगी और कार्रवाई की जाएगी।

    सरकार की योजनाओं को पलीता

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य गरीबों को सस्ती और सुलभ चिकित्सा सेवा प्रदान करना है। लेकिन इस प्रकार के अवैध अस्पताल सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। त्रिलोचनपुर का यह पॉलीक्लिनिक सरकार की योजनाओं की छवि को धूमिल कर रहा है और आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ भी कर रहा है।

    फतेहपुर के त्रिलोचनपुर चौराहा के स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस अवैध पॉलीक्लिनिक को बंद नहीं किया गया, तो यह आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।

    फतेहपुर जनपद के खागा तहसील के अंतर्गत त्रिलोचनपुर पर संचालित आस्था पॉलीक्लिनिक के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को मिलकर इस अवैध पॉलीक्लिनिक को बंद कराना चाहिए और झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ जनता तक सही तरीके से पहुंचे।