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लोकभारती की प्रांत बैठक बुंदेलखंड के राठ नगर में संपन्न, प्रमुख समाजसेवी और राजनीतिक हस्तियाँ उपस्थित

लोकभारती की प्रांत बैठक बुंदेलखंड के राठ नगर में संपन्न, प्रमुख समाजसेवी और राजनीतिक हस्तियाँ उपस्थित
लोकभारती की प्रांत बैठक बुंदेलखंड के राठ नगर में संपन्न, प्रमुख समाजसेवी और राजनीतिक हस्तियाँ उपस्थित
लोकभारती की प्रांत बैठक बुंदेलखंड के राठ नगर में संपन्न, प्रमुख समाजसेवी और राजनीतिक हस्तियाँ उपस्थित
  • लोकभारती की प्रांत बैठक बुंदेलखंड के राठ नगर में आयोजित की गई, जिसमें प्रमुख समाजसेवी और राजनीतिक हस्तियाँ उपस्थित हुईं।
  • कार्यकम की अध्यक्षता कामतानाथपीठ चित्रकूट के पूज्य महंत श्री मदनगोपाल दास जी महाराज ने की, और पद्मश्री उमाशंकर पांडेय जी ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • जैविक और प्राकृतिक खेती पर विशेष चर्चा की गई, जिसमें 50 से अधिक किसान भाइयों ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए।
  • कार्यक्रम की व्यवस्था में श्री बसंत नगायच जी, श्री दिनेश सोनी जी और अन्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • इस कार्यक्रम का संचालन और आभार श्री मुकेश बुधौलिया जी ने किया, जिन्होंने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक समाप्त किया।

हमीरपुर/लखनऊ, 30 दिसम्बर 2024: लोकभारती की प्रांत बैठक का आयोजन 28 दिसंबर 2024 को बुंदेलखंड के राठ नगर में किया गया। इस बैठक में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख हस्तियाँ शामिल हुईं। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कार, शिक्षा, और कृषि के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ लोकभारती के कार्यों को बल देना था। बैठक में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने समाज की बेहतरी के लिए अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता और मुख्य अतिथि बैठक की अध्यक्षता कामतानाथपीठ चित्रकूट के महंत मदनगोपाल दास ने की, जिन्होंने अपने आशीर्वचन में समाज के विकास के लिए परिश्रम और संघर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया। इस मौके पर पद्मश्री से सम्मानित उमाशंकर पांडेय ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए, विशेष रूप से भारतीय संस्कृति और परंपराओं के महत्व पर चर्चा की।

लोकभारती के सह संगठन मंत्री गोपाल मोहन उपाध्याय और उपाध्यक्ष आचार्य रवींद्र ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। उनके द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई। केंद्रीय कार्यालय से सौरभ सिंह, बाबा बालक नाथ (सदस्य पिछड़ा वर्ग आयोग), और प्रोफेसर शिव शंकर ने भी बैठक में योगदान दिया। इन सभी नेताओं ने सभा में मौजूद लोगों को समाज के हित में काम करने के लिए प्रेरित किया।

किसानों की सहभागिता बैठक में विशेष रूप से किसानों की उपस्थिति को महत्व दिया गया। राठ और आस-पास के गाँवों से लगभग 50 किसान भाई इस कार्यक्रम में शामिल हुए। ये किसान जैविक या प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और उन्होंने अपनी खेती से जुड़ी चुनौतियों और सफलता की कहानियाँ साझा की। इस पहल का उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना और किसानों को कृषि के प्राकृतिक तरीकों के प्रति जागरूक करना था।

कृषि के संदर्भ में कौशल मुखिया, जो जैविक खेती के समर्थक हैं, ने किसानों को जैविक उत्पादों की बिक्री और उनके लाभों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें और रासायनिक उर्वरकों से बचने की कोशिश करें। इस प्रकार की चर्चा से किसानों को खेती के नए तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

समाजसेवियों और अन्य सहभागियों की उपस्थिति बैठक में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित थे। गायत्री परिवार से चंद्रशेखर मिश्रा और लक्षमण लाल त्रिपाठी, नगर विकास मंच से डॉक्टर हरिओम नगायच और महेश सोनी, लायंस क्लब से अजय अग्रवाल, दीपक मिश्रा, और कई अन्य समाजसेवी इस कार्यक्रम में उपस्थित हुए। इसके अलावा, व्यापारी मंडल, जेसीज, और अन्य स्थानीय संगठन जैसे व्यापार मंडल से के. जी. अग्रवाल और सुरेश खेवरिया ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

कार्यक्रम की व्यवस्था और संचालन कार्यक्रम की व्यवस्था में बसंत नगायच, दिनेश सोनी, मधुकर राव, कृष्ण दत्त पालिया और मुकेश बुधौलिया की प्रमुख भूमिका रही। इन सभी ने कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलाने के लिए कड़ी मेहनत की। मुकेश बुधौलिया ने कार्यक्रम का संचालन किया और सभी का आभार व्यक्त किया।

आभार और निष्कर्ष कार्यक्रम के अंत में मुकेश बुधौलिया ने सभी उपस्थित व्यक्तियों और आयोजकों का धन्यवाद किया और इस बात पर जोर दिया कि लोकभारती की कार्यप्रणाली समाज के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकभारती का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सामाजिक बदलाव को प्रोत्साहित करना है।

इस कार्यक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि लोकभारती के प्रयासों से समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है, और यदि हम सभी मिलकर काम करें तो भारत को समृद्ध और मजबूत बना सकते हैं। बैठक में मौजूद सभी व्यक्तियों ने अपने विचारों से इस विचारधारा को और प्रोत्साहित किया।

महाकुम्भ 2025: कौशाम्बी प्रेसिडेंसी स्कूल भीटी में कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों ने पेंटिंग के माध्यम से महाकुंभ की भव्यता का चित्रण

महाकुम्भ 2025: कौशाम्बी प्रेसिडेंसी स्कूल भीटी में कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों ने पेंटिंग के माध्यम से महाकुंभ की भव्यता का चित्रण
महाकुम्भ 2025: कौशाम्बी प्रेसिडेंसी स्कूल भीटी में कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों ने पेंटिंग के माध्यम से महाकुंभ की भव्यता का चित्रण
महाकुम्भ 2025: कौशाम्बी प्रेसिडेंसी स्कूल भीटी में कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों ने पेंटिंग के माध्यम से महाकुंभ की भव्यता का चित्रण
  • कौशाम्बी प्रेसिडेंसी स्कूल भीटी में कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों ने पेंटिंग के माध्यम से महाकुंभ का चित्रण किया।
  • छात्रों ने महाकुंभ के धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को अपने चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया।
  • विद्यालय के चेयरमैन संजय कुमार गुप्ता ने छात्रों की रचनात्मकता की सराहना की और इसे भारतीय संस्कृति का प्रतीक बताया।
  • डायरेक्टर श्रीमती सीमा पवार ने इस कला-गतिविधि के महत्व पर जोर दिया, जो छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक है।
  • शिक्षकों ने छात्रों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ बच्चों को नए दृष्टिकोण से सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।

कौशांबी/लखनऊ, 30 दिसम्बर 2024: कौशाम्बी प्रेसिडेंसी स्कूल भीटी में सोमवार को एक विशेष कला-प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों ने पेंटिंग के माध्यम से प्रयागराज के विश्वप्रसिद्ध महाकुंभ का भव्य चित्रण किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों में रचनात्मकता का विकास करना और उन्हें भारतीय संस्कृति के महान पर्व महाकुंभ से जोड़ना था। यह आयोजन स्कूल के शिक्षा के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए सांस्कृतिक जागरूकता और कला के प्रति रुचि को भी बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम था।

कार्यक्रम में छात्रों ने महाकुंभ के विभिन्न पहलुओं को अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से दर्शाया। उनकी पेंटिंग्स में प्रयागराज के संगम के दृश्य, गंगा आरती की भव्यता, नागा साधुओं की छवियां, श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना, आस्था, और समर्पण के अद्भुत दृश्य प्रमुख रूप से देखे गए। इन चित्रों के माध्यम से छात्रों ने महाकुंभ के धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बाखूबी प्रदर्शित किया। छात्रों ने कला के माध्यम से न केवल अपनी कल्पनाशक्ति को उकेरा, बल्कि महाकुंभ की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को पूरी दुनिया तक पहुँचाने का प्रयास किया।

महाकुंभ भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है, जो हर बार विश्वभर से लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से छात्रों को अपनी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को समझने और सम्मानित करने का अवसर मिलता है। छात्रों ने पेंटिंग के माध्यम से महाकुंभ के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को गहराई से चित्रित किया, जो सभी उपस्थित लोगों के लिए एक यादगार अनुभव बन गया।

इस आयोजन की शुरुआत में विद्यालय के चेयरमैन और निवर्तमान विधायक संजय कुमार गुप्ता ने छात्रों की रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा, “महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति का अद्भुत प्रतीक है। यह आयोजन छात्रों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। इस तरह की गतिविधियाँ छात्रों को अपनी कला को निखारने और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने में मदद करती हैं।” संजय कुमार गुप्ता ने इस आयोजन को सफल बताते हुए विद्यालय के प्रयासों की भी सराहना की, जो छात्रों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्यरत रहते हैं।

विद्यालय की डायरेक्टर श्रीमती सीमा पवार ने इस कला-गतिविधि के महत्व को बताते हुए कहा, “इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल छात्रों के मानसिक और कलात्मक विकास में सहायक होती हैं, बल्कि उन्हें अपने देश की सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराती हैं। महाकुंभ के भव्यता और धार्मिक महत्व को चित्रित करते हुए, छात्रों ने कला के माध्यम से अपनी सोच और समझ को प्रस्तुत किया। हमारा विद्यालय सदैव इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयासरत रहेगा।”

कार्यक्रम में छात्रों ने अपने अनुभवों को साझा किया और बताया कि इस गतिविधि ने उन्हें महाकुंभ के महत्व को और गहराई से समझने का मौका दिया। उन्होंने महसूस किया कि कला के माध्यम से अपने विचारों को व्यक्त करना एक बहुत ही प्रभावी तरीका है। छात्रों ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद प्रेरणादायक था और उन्होंने कला के माध्यम से अपनी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को समझा और महसूस किया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षकों ने भी छात्रों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों को उनके शैक्षणिक जीवन से बाहर जाकर सोचने और नए दृष्टिकोण से अपनी प्रतिभाओं को निखारने का अवसर देती हैं। इसके साथ ही, छात्रों को यह सिखने को मिलता है कि वे अपनी कला के माध्यम से किसी भी सांस्कृतिक या धार्मिक विषय को गहराई से समझ सकते हैं और उसका अभिव्यक्तिकरण कर सकते हैं। शिक्षकों ने छात्रों की रचनात्मकता और कला में गहरी रुचि को लेकर उन्हें बधाई दी और कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ छात्रों के मानसिक विकास के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक समझ को भी मजबूत करती हैं।

विद्यालय ने इस सफल आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों और आयोजकों को बधाई दी और कहा कि ऐसे आयोजनों से छात्रों में रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव विकसित होता है। भविष्य में भी कौशाम्बी प्रेसिडेंसी स्कूल भीटी इस तरह के सांस्कृतिक और कला आधारित कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, जो छात्रों को उनकी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने और अपने कला कौशल को निखारने का अवसर प्रदान करेंगे।

प्रदेश भर में 01 से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह आयोजित किया जायेगा- परिवहन आयुक्त

प्रदेश भर में 01 से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह आयोजित किया जायेगा- परिवहन आयुक्त
प्रदेश भर में 01 से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह आयोजित किया जायेगा- परिवहन आयुक्त
प्रदेश भर में 01 से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह आयोजित किया जायेगा- परिवहन आयुक्त
  • उत्तर प्रदेश में 01 जनवरी से 31 जनवरी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का आयोजन किया जाएगा।
  • सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जिलावार लक्ष्य निर्धारित किये जाएंगे।
  • सड़क इंजीनियरिंग कारकों पर कार्रवाई की जाएगी और सड़क सुरक्षा का ऑडिट कराया जाएगा।
  • जन जागरूकता के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ सार्वजनिक समारोह और डिजिटल अभियान आयोजित होंगे।
  • शराब पीकर गाड़ी चलाने, तेज गति और गलत दिशा में गाड़ी चलाने के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान चलाया जाएगा।

लखनऊ, 30 दिसम्बर 2024: उत्तर प्रदेश सरकार ने 01 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2025 तक पूरे राज्य में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस दौरान राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और जन जागरूकता बढ़ाई जा सके।

परिवहन आयुक्त चंद्रभूषण सिंह ने इस सम्बन्ध में जानकारी दी कि शासन ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों और परिवहन विभाग को निर्देशित किया है कि वे सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या को कम करने के लिए समेकित प्रयास करें। इसके तहत, प्रत्येक जिले में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिलावार लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे।

इसके अलावा, सड़क इंजीनियरिंग कारकों, जैसे अवैध मीडियन गैप, जंक्शन पर ट्रैफिक प्रबंधन की कमी और समुचित प्रकाश व्यवस्था की कमी पर कार्रवाई की जाएगी। राज्य की प्रमुख सड़कों पर सड़क इंजीनियरिंग ऑडिट भी कराया जाएगा।

राज्य में सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों को शामिल कर एक प्रभावशाली अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत लोगों को तेज गति से गाड़ी चलाने, शराब पीकर गाड़ी चलाने, गलत दिशा में गाड़ी चलाने और सुरक्षा उपकरणों के उपयोग के खतरों के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके लिए एक डिजिटल अभियान भी चलाने का प्रस्ताव है।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत विशेष रूप से शराब पीकर गाड़ी चलाने, तेज गति से गाड़ी चलाने, गलत दिशा में गाड़ी चलाने और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग न करने के खिलाफ पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के बाद, जिन जिलों ने इस माह में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, उन्हें सम्मानित किया जाएगा।

2024 की योगी सरकार की बेसिक शिक्षा में की उपलब्धियाँ

basic education
basic education
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  • आरटीई के अंतर्गत 6-14 आयु वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा का प्रबंध
  • 1,65,544 गरीब बच्चों को गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त विद्यालयों में सीटें आवंटित
  • ₹1200 प्रति छात्र डीबीटी के माध्यम से कक्षा 1 से 8 तक के सभी बच्चों को निःशुल्क यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी उपलब्ध कराया गया
  • शिक्षा के प्रति जागरूकता और सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए आमजन के लिए जागरूकता कार्यक्रम
  • केजीबीवी का उच्चीकरण, डिजिटल लर्निंग के विस्तार, दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रावधान और खेलकूद को बढ़ावा देने के कदम

लखनऊ, 30 दिसंबर 2024: उत्तर प्रदेश सरकार ने 2024 में बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए हैं, जो बच्चों की शिक्षा के लिए एक नया युग शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, प्रदेश ने निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत 6-14 आयु वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इस पहल के तहत 1,65,544 गरीब बच्चों को गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों में सीटें आवंटित की गईं और उन्हें ₹1200 प्रति छात्र की राशि डीबीटी के माध्यम से दी गई, ताकि वे निःशुल्क यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी प्राप्त कर सकें।

इसके अलावा, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उच्चीकरण, डिजिटल लर्निंग का विस्तार, दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रावधान और खेलकूद को बढ़ावा देने जैसे कदमों ने प्रदेश में बेसिक शिक्षा को नई दिशा दी है।

इस बार, सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के समग्र विकास के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिनमें शारदा कार्यक्रम, निपुण आकलन परीक्षण, स्मार्ट क्लासेस और डिजिटल शिक्षा के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया गया है। इसके साथ ही, दिव्यांग बच्चों के लिए ‘समर्थ’ ऐप और विशेष सहायक उपकरणों का वितरण किया गया है।

इन प्रयासों से शिक्षा के प्रति समाज में जागरूकता और सहभागिता को बढ़ावा मिला है और सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर बच्चा, चाहे वह किसी भी वर्ग से हो, अपनी शिक्षा पूरी कर सके और उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हो।

सरकार की यह पहल परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के भविष्य को सुदृढ़ बनाने में सहायक है। इसके साथ ही, समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता और सहभागिता को भी बढ़ावा दिया गया है। योगी सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के साथ-साथ स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लास, शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल साधनों के माध्यम से बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए ठोस प्रयास किए हैं।

आइए, जानते हैं कि 2024 में योगी सरकार के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा में कैसे मील के पत्थर स्थापित किए गए।

निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE)

    • निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत 6-14 वर्ष के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था।
    • शैक्षिक सत्र 2024-25 में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत 1,65,544 बच्चों को गैर-सहायित मान्यता प्राप्त विद्यालयों में सीट आवंटित किए गए।
    • समस्त राजकीय, परिषदीय एवं सहायतित विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1-8 तक समस्त बालक/बालिकाओं को निःशुल्क पाठ्यपुस्तक एवं कार्यपुस्तिका वितरण किया गया।

    शैक्षिक सामग्रियां और सुविधाएं

      • राजकीय, परिषदीय एवं सहायतित विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1-8 तक के समस्त छात्र-छात्राओं को निःशुल्क यूनिफार्म, जूता मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग एवं स्टेशनरी क्रय करने हेतु उनके अभिभावकों के खाते में धनराशि ₹1200/- डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित किए गए।
      • बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रति प्राथमिक विद्यालय ₹5000/- और प्रति उच्च प्राथमिक विद्यालय ₹10,000/- की दर से खेलकूद सामग्री क्रय करने हेतु धनराशि का प्रावधान किया गया।
      • प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों एवं शिक्षा मित्रों का हिंदी एवं गणित तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का डिजिटल लिटरेसी एवं अंग्रेजी विषय पर आधारित शिक्षक प्रशिक्षण का आयोजन।

      विशेष कार्यक्रम और योजनाएं

        • प्रदेश में शारदा कार्यक्रम के अंतर्गत/हाउसहोल्ड सर्वे के माध्यम से चिन्हित एवं नामांकित आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था।
        • प्रदेश में समग्र शिक्षा के अंतर्गत 1772 पायलट फेज के 60 उच्च प्राथमिक/कम्पोजिट विद्यालयों और पीएम श्री योजना के अंतर्गत 570 उच्च प्राथमिक/कम्पोजिट विद्यालयों में लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम संचालित करने हेतु 04 दिवसीय अध्यापक प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
        • परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों का निपुण लक्ष्य/लर्निंग आउटकम पर आधारित निपुण आकलन परीक्षण का आयोजन हुआ।

        सुविधाएं और आधारभूत संरचना

          • 1350 नए अतिरिक्त कक्षाकक्षों की व्यवस्था हुई।
          • 123 जर्जर उच्च प्राथमिक विद्यालयों का पुनर्निर्माण गतिमान है।
          • 354 विद्यालयों में वृहद मरम्मत का कार्य किया गया।
          • 145 ब्लॉक/नगर संसाधन केंद्रों की वृहद मरम्मत हेतु वित्त पोषण।
          • 09 ब्लॉक/नगर संसाधन केंद्रों के पुनर्निर्माण हेतु वित्त पोषण।
          • 746 आवासीय कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में बालिकाओं हेतु निःशुल्क आवासीय शिक्षा की व्यवस्था।
          • 680 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 6 से 12 तक उच्चीकरण।

          शिक्षक प्रशिक्षण और क्षमता संवर्धन

            • सभी परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों/प्रभारी प्रधानाध्यापकों को दिव्यांगता विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन।
            • प्रत्येक माह न्याय पंचायत स्तर पर एजेंडा आधारित बैठकें।
            • शिक्षकों की क्षमता संवर्धन एवं पीयर लर्निंग हेतु प्रत्येक माह न्याय पंचायत स्तर पर एजेंडा आधारित बैठकें।
            • 880 विकासखंडों में आईसीटी लैब की स्थापना।

            समावेशी शिक्षा और दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रबंध

              • 6-14 आयु वर्ग के समस्त दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापरक समावेशी शिक्षा के लिए ‘समर्थ‘ मोबाइल बेस्ड ऐप एवं पोर्टल के माध्यम से अनुश्रवण की व्यवस्था।
              • दिव्यांग बच्चों के लिए ब्रेल पाठ्यपुस्तकें, विस्तारित पाठ्यपुस्तकें, एस्कॉर्ट अलाउंस, स्टाइपेंड, सहायक उपस्कर/उपकरणों का वितरण।
              • दिव्यांग बच्चों का शैक्षिक भ्रमण एवं अभिभावकों की ब्लॉक स्तर पर काउंसलिंग का आयोजन।

              डिजिटल लर्निंग और शिक्षक संसाधन

                • दीक्षा एवं रीड एलांग ऐप के माध्यम से बच्चों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के उपयोगार्थ डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा दिया।
                • 16,000 से अधिक डिजिटल शैक्षणिक सामग्री विभाग द्वारा अपलोड कराई गई।
                • परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के 2,09,863 शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए।
                • 18,381 परिषदीय उच्च प्राथमिक/कम्पोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए गए।

                सामुदायिक सहभागिता और प्रगति

                  • प्रदेश के समस्त विद्यालयों में अभिभावक-अध्यापक बैठकों का संचालन।
                  • प्रदेश के समस्त विकास खंडों में ग्राम प्रधानों एवं स्थानीय प्राधिकारी सदस्यों का 01 दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

                  आधिकारिक एवं प्रशासनिक निगरानी

                    • प्रदेश के कुल विद्यालयों के 20 प्रतिशत विद्यालयों के सोशल ऑडिट हेतु 05 विश्वविद्यालयों को आबद्ध किया गया।
                    • निपुण भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन एवं विभिन्न गतिविधियों/कार्यक्रमों का डेटा आधारित अनुश्रवण किए जाने के लिए विद्या समीक्षा केंद्र की स्थापना की गई।

                    श्रीराम कथा का पंचम दिवस: पवित्र को भी पवित्र बना देते हैं भगवान- स्वामिश्री राघवाचार्य

                    श्रीराम कथा का पंचम दिवस: पवित्र को भी पवित्र बना देते हैं भगवान- स्वामिश्री राघवाचार्य
                    श्रीराम कथा का पंचम दिवस: पवित्र को भी पवित्र बना देते हैं भगवान- स्वामिश्री राघवाचार्य
                    श्रीराम कथा का पंचम दिवस: पवित्र को भी पवित्र बना देते हैं भगवान- स्वामिश्री राघवाचार्य
                    • सत्संग ईश्वर की कृपा से ही प्राप्त होता है
                    • महिलाओं की तीन श्रेणियां हैं अधवा, सधवा और विधवा
                    • मोतीमहल में श्रीराम कथा का पांचवा दिन

                    लखनऊ, 30 दिसम्बर 2024: भगवान के श्रीचरणों तक पहुंचने का सबसे सशक्त माध्यम होता है सत्संग। जीवात्मा सत्संग से चलकर ही भगवान के चरणों तक पहुंचता है। सत्संग से जब निष्पृहता प्राप्त होती है, तब सद्गुरु की तलाश होती है और पूर्ण समर्पण के फलस्वरुप सद्गुरु ईश्वर तक पहुंचने का माध्यम बनते हैं।

                    यह बात आज संध्याकाल मोतीमहल लॉन में चल रही श्रीराम कथा के पंचम दिवस श्रीरामलला सदन अयोध्याधाम के पीठाधीश्वर स्वामिश्री राघवाचार्य जी महाराज ने कही। वह विभिन्न अंचलों से हजारों की संख्या में पधारे ज्ञान-जिज्ञासुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान की अहेतुकी कृपा से ही मनुष्य को सत्संग का सौभाग्य प्राप्त होता है। वस्तुतः सत्संग भगवान की कृपा से ही व्यक्ति को मिल पाता है। पूर्वकृत कर्म पाप और पुण्य दोनों ही बन्धन के कारण हैं। पाप और पुण्य के धुल जाने पर जीव निरंजन हो जाता है। और, यह काम साधु सत्संग से ही सम्भव होता है।

                    स्वामी राघवाचार्य महाराज ने महिलाओं की तीन श्रेणियां बताईं और कहा कि अधवा, सधवा और विधवा यह नारियों की तीन श्रेणियां होती हैं। धव का अर्थ होता है पति। अधवा वह है जिसका विवाह नहीं हुआ। पति सहित दाम्पत्य जीवन वाली स्त्री को सधवा कहते हैं और पति के नहीं रहने पर स्त्री को विधवा कहा जाता है। उन्होंने नारी-मात्र को देवी दृष्टि से देखने की प्रेरणा पुरुष समुदाय को दी। उन्होंने महापुरुषों के क्रोध को भी वरदान बताया और कहा कि यदि गौतम ऋषि अहिल्या को श्राप नहीं देते तो उन्हें राम कहां मिलते।

                    कथा संयोजक संजीव पाण्डेय ने बताया आज राजधानी लखनऊ सहित पड़ोसी जनपदों के कथा जिज्ञासु भारी संख्या में उपस्थित रहे। आज के यजमान का दायित्व उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अरविन्द सिंह गोप ने उठाया। श्री सतीश अवस्थी,जितेन्द्र सिंह जीतू एवं अनुराग यादव अन्नू सुनील कुमार यादव * जज साहब* ने व्यास पूजन कर रामायण की आरती की तथा डॉ एल पी मिश्र, पूर्व मंत्री एवं सांसद कुसुम राय, मनोज द्विवेदी महामंत्री अवध बार, अमरेश पाल सिंह महामंत्री सेंट्रल बार ने माल्यार्पण कर व्यास जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।
                    मंच समन्वयक डॉक्टर सप्तर्षि मिश्र ने बताया कि दो जनवरी को सन्त सम्मेलन, यज्ञ – हवन पूजन तथा महाप्रसाद के साथ श्रीराम कथा महोत्सव को विश्राम दिया जाएगा।