श्रीलंका के उत्तरी प्रांत में कराईनगर ‘बोटयार्ड’ (वह स्थान, जहां नाव खड़ी की जाती है) को विकसित करने के लिए भारत 29 करोड़ श्रीलंकाई रुपये की आर्थिक मदद देगा। भारतीय उच्चायोग ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। इस परियोजना में वित्त, योजना और आर्थिक विकास मंत्रालय के अंतर्गत निगमित तथा मत्स्य पालन, जलीय और महासागर संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत संचालित सी-नोर फाउंडेशन लिमिटेड के कराईनगर ‘बोटयार्ड’ के पुनर्वास की परिकल्पना की गई है।
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भारतीय उच्चायोग ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘16 दिसंबर को श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा और भारत में श्रीलंका के तत्कालीन उच्चायुक्त क्षेनुका धीरेनी सेनेविरत्ने द्वारा इस संबंध में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए और उनका आदान-प्रदान किया गया। ’’ इस परियोजना में संयंत्र,उपकरण, सामग्री, सेवाओं आदि की स्थापना सहित निर्माण कार्य और खरीद शामिल होगी।
मछुआरों को मिलेगी बड़ी मदद
विज्ञप्ति के मुताबिक, पूर्ण रूप से चालू हो जाने पर पुनर्निर्मित ‘बोटयार्ड’ स्थानीय मछुआरों के लिए आजीविका के अवसरों में वृद्धि करेगा, ‘बोटयार्ड’ के आसपास छोटे प्रतिष्ठानों के माध्यम से क्षेत्र में रोजगार के अधिक मौके पैदा करेगा और गुणवत्ता वाले मत्स्य उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाने में मददगार साबित होगा। भारतीय उच्चायोग ने कहा कि श्रीलंका के साथ पांच अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के विकास सहयोग के साथ, भारत ने श्रीलंका के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में जन-केंद्रित विकास सहायता पहल की है।
पाकिस्तानी सेना ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने नौ मई 2023 को सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में शामिल 19 दोषियों की दया याचिकाएं स्वीकार कर ली हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के समर्थकों ने भ्रष्टाचार के एक मामले में उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए नौ मई 2023 को रावलपिंडी में सेना मुख्यालय और फैसलाबाद में आईएसआई भवन सहित कई सैन्य प्रतिष्ठानों पर कथित तौर पर हमला किया था।
सैन्य अदालतों ने सुनाई थी सजा
हिंसा के बाद देश भर में की गई छापेमारी में सैकड़ों संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। 100 से अधिक नागरिकों के मामले सैन्य अदालत में सुनवाई के लिए भेजे गए क्योंकि वो सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले में शामिल थे। दिसंबर में सैन्य अदालतों ने हिंसा में भूमिका के लिए 85 नागरिकों को दो से दस साल तक की जेल की सजा सुनाई थी।
औपचारिकताएं पूरी होने के बाद होगी रिहाई
सेना ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि नौ मई की घटना के दोषियों को सजा की घोषणा के बाद, उन्होंने अपील करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया है और अपनी सजा में दया और छूट की मांग की है। बयान के मुताबिक, 67 दोषियों ने अपनी दया याचिकाएं दी हैं, और 48 याचिकाओं पर अपील अदालतों में कार्रवाई की गई है, जबकि 19 दोषियों की याचिकाएं कानून के मुताबिक मानवीय आधार पर स्वीकार की गई हैं। फौज ने कहा कि शेष दोषियों की दया याचिकाओं पर कानूनी प्रक्रिया के बाद समय पर निर्णय लिया जाएगा। सेना ने कहा कि जिन लोगों की दया अपील स्वीकार कर ली गई है, उन्हें औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिहा कर दिया जाएगा।
भारत का पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश अपना इतिहास बदल देना चाहता है। इसी क्रम में बांग्लादेश में नई पाठ्यपुस्तकें जारी की गई हैं। इन पुस्तकों में बताया गया है कि जियाउर रहमान ने 1971 में देश की आजादी का ऐलान किया था। अब तक की पुस्तकों में इसका श्रेय बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान को दिया जाता रहा है। मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई है।‘डेली स्टार’ समाचार पत्र की खबर में कहा गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक छात्रों की नई पाठ्यपुस्तकों में कई बदलाव किए गए हैं।
हटाई गई ‘राष्ट्रपिता’ की उपाधि
पाठ्यपुस्तकों में मुजीबुर्रहमान के लिए ‘राष्ट्रपिता’ की उपाधि भी हटा दी गई है। खबर में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एकेएम रियाजुल हसन के हवाले से कहा गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2025 के लिए नई पाठ्यपुस्तकों में उल्लेख होगा कि “26 मार्च 1971 को जियाउर रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की थी और 27 मार्च को उन्होंने बंगबंधु की ओर से स्वतंत्रता का एक और ऐलान किया।”
लेखक व शोधकर्ता ने क्या कहा
खबर के अनुसार पाठ्यपुस्तकों में परिवर्तन की प्रक्रिया में शामिल रहे लेखक व शोधकर्ता राखल राहा ने कहा कि उन्होंने पाठ्यपुस्तकों को “अतिशयोक्तिपूर्ण, थोपे गए इतिहास” से मुक्त करने का प्रयास किया है। पाठ्यपुस्तकों को संशोधित करने वालों ने पाया कि यह तथ्य-आधारित जानकारी नहीं थी कि शेख मुजीबुर्रहमान ने पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ्तार किए जाने के दौरान वायरलेस संदेश (स्वतंत्रता की घोषणा के बारे में) भेजा था, और इसलिए उन्होंने इसे हटाने का फैसला किया।
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खबर में कहा गया है कि इससे पहले कक्षा एक से 10 तक की पाठ्य पुस्तकों में स्वतंत्रता की घोषणा किसने की, इसकी जानकारी सत्ता में रहने वाली पार्टी के अनुसार बदली जाती रही है। अवामी लीग के समर्थकों के बीच व्यापक रूप से यह माना जाता है कि मुजीबुर्रहमान ने यह घोषणा की थी और सेना में मेजर रहे जियाउर रहमान ने मुजीब के निर्देश पर केवल घोषणा पढ़ी थी। रहमान बाद में मुक्ति संग्राम के सेक्टर कमांडर बने थे।
नोटों से हटी शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर
इससे पहले, बांग्लादेश ने पुराने नोटों को प्रचलन से बाहर करके अपनी कागजी मुद्रा से शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया था। यह कदम पांच अगस्त को मुजीबुर्रहमान की बेटी शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद उठाया गया था। हसीना के भारत जाने के बाद मुजीबुर्रहमान की प्रतिमाओं और तस्वीरों को निशाना बनाया गया था। अंतरिम सरकार ने मुजीबुर्रहमान की हत्या की बरसी पर 15 अगस्त के लिए घोषित राष्ट्रीय अवकाश भी रद्द कर दिया था।
स्वस्थ रहने के लिए हमें रोजाना पोषक तत्वों की जरूरत होती है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट सभी लोगों को डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए, जिससे शरीर के लिए जरूरी ज्यादातर तत्वों की पूर्ति किया जा सके। डाइट एक्सपर्ट के अनुसार, हमारी सेहत के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी पोषक तत्व है, यह मांसपेशियों के निर्माण से लेकर, स्किन, बाल और नाखूनों को हेल्दी और मजबूत बनाए रखने की इसमें अहम भूमिका होती है। तो क्या आप रोजाना प्रोटीन वाली चीजों का रोजाना सेवन कर रहे हैं।
प्रोटीन हमारे शरीर के समग्र कामकाज के लिए जरूरी होता है। यह ऊतकों के निर्माण और मरम्मत, एंजाइम और हार्मोन का उत्पादन करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। स्किन, बालों और नाखूनों को मजबूत रखने और टूटने से बचाने के लिए प्रोटीन वाली चीजें बहुत जरूरी है। ऐसे में आपके शरीर में कहीं प्रोटीन की कमी तो नहीं है और इसका पता कैसे लगाया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं रोजाना कितनी मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना चाहिए और यह आपके शरीर के लिए कितना जरूरी है।
रोजाना कितनी मात्रा में जरूरी है प्रोटीन
अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक वयस्कों को रोजाना शरीर के वजन के हिसाब से प्रति किलोग्राम 0.8 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। जैसे अगर किसी व्यक्ति का वजन 75 किलोग्राम है, तो उसको रोजाना 60 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। क्योंकि शरीर में प्रोटीन की कमी होने पर शरीर की संरचना में भी बदलाव होने लगता है। अगर इसमें सुधार नहीं किया जाए, तो यह हड्डियों की समस्या, लिवर की बीमारी औऱ बच्चे के विकास को भी प्रभावित कर सकती है।
कमजोर तो नहीं आपकी इम्युनिटी
शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने के लिए विटामिन सी और डी को सबसे ज्यादा जरूरी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में प्रोटीन की कमी होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर हो सकता है। शरीर में प्रोटीन की कमी होने पर संक्रमण का जोखिम और इस संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा भी हो सकता है। पशुओं पर किए गए एक रिसर्च के मुताबिक सिर्फ 2 फीसदी प्रोटीन वाली डाइट की तुलना में 18 फीसदी प्रोटीन लेने वाले पशुओं में संक्रामक रोगों के होने का जोखिम कम होता है।
मांसपेशियों की कमजोरी और थकान रहना
मांसपेशियों को हेल्दी और मजबूत बनाए रखने के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। अगर आप पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं लेते हैं, तो आपका शरीर प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए मांसपेशियों के ऊतकों को ब्रेक डाउन करना शुरूकर देता है। वहीं शरीर में लंबे समय तक प्रोटीन की कमी होने पर मांसपेशियों की क्षति और कमजोरी बढ़ने लगती है। ऐसे में आपको दैनिक कार्य जैसे- सीढ़ियां चढ़ने और चीजों को उठाने में समस्या होने लगती है। शरीर में एनर्जी की कमी होना प्रोटीन की कमी की ओर इशारा करती है।
त्वचा और नाखून की संबंधी समस्या
बता दें कि बाल, नाखून और त्वचा मुख्य रूप से प्रोटीन से बने होते हैं और जब आपकी डाइट में प्रोटीन की कमी होती है, तो आपके बाल पतले होने लगते हैं। साथ ही हेयर फॉल होने लगता है। शरीर में प्रोटीन की कमी होने पर नाखून भंगुर और स्किन ड्राई व पपड़ीदार होने लगती है। ऐसा होना स्पष्ट रूप से इस ओर संकेत करता है कि आपकी बॉडी में हेल्दी ऊतकों को बनाएं रखने के लिए जरूरी बिल्डिंग ब्लॉक की कमी है। स्किन और नाखून संबंधी समस्याएं शरीर में प्रोटीन की कमी की वजह से हो सकती हैं।
सेवानिवृत्ति के अगले ही दिन मिली बड़ी जिम्मेदारी: जानिए कौन हैं UPSSSC के नए अध्यक्ष एस.एन.साबत?
31 दिसंबर 2024 को डीजी पद से रिटायर होने वाले डॉ. एसएन साबत को अगले दिन UPSSSC के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
1990 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे डॉ. साबत ने कई जिलों में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उनके नेतृत्व में आयोग की रुकी हुई भर्तियों में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
UPSSSC प्रदेश में ग्रुप बी, सी और डी की भर्तियों के लिए प्रमुख संस्था है, जिसकी साख सुधारने की जिम्मेदारी डॉ. साबत को सौंपी गई है।
डॉ. साबत की सख्त कार्यशैली और तेज फैसले लेने की क्षमता युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में अहम साबित होगी।
लखनऊ: 31 दिसंबर 2024 को पुलिस महानिदेशक (डीजी) पद से रिटायर हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. एसएन साबत को अगले ही दिन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन्हें इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी है, जिसे प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति लाने के लिए अहम माना जा रहा है।
डॉ. एसएन साबत – अनुशासन, कार्यकुशलता और 34 वर्षों का अनुभव
डॉ. एसएन साबत 1990 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी रहे हैं। अपने 34 साल लंबे करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। लखनऊ जोन के आईजी रहते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू किया। इसके अलावा, वे अयोध्या और वाराणसी में एएसपी और आगरा, जालौन, मिर्जापुर, फतेहपुर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में कार्य कर चुके हैं।
प्रभावशाली कार्यकाल: उनके कार्यकाल में लखनऊ जोन में कानून व्यवस्था के क्षेत्र में ऐसा रिकॉर्ड बना जिसकी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। डॉ. साबत की पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में है जो किसी भी समस्या का समाधान फौरन निकालने के लिए जाने जाते हैं। वे शिकायतों और फाइलों को लंबित नहीं रखते थे और जरूरत पड़ने पर फोन के माध्यम से सीधे हस्तक्षेप कर मामलों का निपटारा करते थे।
सम्मान और प्रशंसा: हाल ही में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी डॉ. साबत के कार्यों की सराहना की और उन्हें उनके बेहतरीन योगदान के लिए सम्मानित किया था।
क्यों अहम है UPSSSC अध्यक्ष का पद?
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के अध्यक्ष का पद प्रदेश में ग्रुप बी, सी और डी की सरकारी भर्तियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्व अध्यक्ष आईएएस प्रवीण कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद लंबे समय से खाली था। इस दौरान आयोग की कई परीक्षाएं रुकी हुई थीं और कुछ कोर्ट में लंबित थीं।
विपक्ष लगातार सरकार पर आरोप लगाता रहा कि भर्ती प्रक्रिया में देरी और अनियमितताओं के कारण युवाओं को नौकरियों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में आयोग का नेतृत्व संभालने के लिए एक अनुभवी और भरोसेमंद व्यक्ति की जरूरत थी, जो डॉ. एसएन साबत के रूप में पूरी होती दिख रही है।
UPSSSC– प्रदेश में सरकारी भर्तियों की रीढ़
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की स्थापना नवंबर 1988 में हुई थी, और 2014 में इसे नए अधिनियम के तहत पुनर्गठित किया गया। यह आयोग मुख्य रूप से ग्रुप सी और ग्रुप डी के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया का संचालन करता है।
आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से हजारों युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलती हैं। प्रारंभिक परीक्षा से लेकर मुख्य परीक्षा तक की प्रक्रिया का संचालन UPSSSC करता है।
भर्ती प्रक्रिया: • प्रारंभिक परीक्षा (PET) • मुख्य परीक्षा • साक्षात्कार और कौशल परीक्षा
हाल ही में आयोग की कई परीक्षाओं में गड़बड़ियों की खबरें सामने आईं थीं, जिससे यूपीएसएसएससी की छवि प्रभावित हुई थी। इस स्थिति को सुधारने के लिए डॉ. साबत जैसे सख्त और अनुशासनप्रिय अधिकारी की नियुक्ति को सरकार का अहम कदम माना जा रहा है।
डॉ. एसएन साबत से क्या हैं उम्मीदें?
डॉ. साबत की नियुक्ति के बाद आयोग से जुड़े युवाओं और अभ्यर्थियों को यह उम्मीद है कि लंबित भर्तियों में तेजी आएगी और भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।
प्रमुख जिम्मेदारियां: • रुकी हुई भर्तियों को जल्द से जल्द पूरा करना। • भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना। • परीक्षा में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को रोकना। • परीक्षा प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना।
युवा उम्मीदवारों के लिए राहत
डॉ. साबत की सख्त कार्यशैली और तेज फैसले लेने की क्षमता युवाओं के लिए राहत लेकर आ सकती है। उनकी नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को तेज करने और युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है।
डॉ. एसएन साबत का UPSSSC अध्यक्ष पद पर नियुक्त होना उत्तर प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया में एक नए और सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उनकी कार्यशैली और अनुभव के चलते आयोग की साख बढ़ेगी और सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षा देने वाले लाखों युवाओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा।