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SA vs PAK Cape Town Test: रिकेलटन और बावूमा के शतकों ने 11 साल पुराना इतिहास फिर से बनाया

 साउथ अफ्रीका और पाकिस्तान के बीच न्यूलैंड्स केपटाउन के मैदान पर 2 मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला खेला जा रहा है, जिसके पहले दिन का खेल पूरी तरह से मेजबान अफ्रीकी टीम के नाम रहा। साउथ अफ्रीका ने पहले दिन का खेल खत्म होने पर अपनी पहली पारी में 4 विकेट के नुकसान पर 316 रन बना लिए थे, जिसमें ओपनिंग बल्लेबाज रेयान रिकेलटन जहां 176 रन बनाकर नाबाद थे तो वहीं अफ्रीकी टीम के कप्तान तेंबा बावूमा के बल्ले से भी 106 रनों की बेहतरीन शतकीय पारी भी देखने को मिली। दोनों के इस शतक के चलते 11 साल के बाद न्यूलैंड्स के मैदान पर इतिहास को दोहराते हुए देखा गया।

बावूमा-रिकेलटन ने बने इस खास क्लब का हिस्सा

केपटाउन टेस्ट मैच के पहले दिन के खेल में साउथ अफ्रीका की टीम ने लंच के समय तक 72 के स्कोर पर अपने तीन विकेट गंवा दिए थे, जिसके बाद रेयान रिकेलटन और तेंबा बावूमा के बीच चौथे विकेट के लिए रिकॉर्ड 235 रनों की साझेदारी देखने को मिली। वहीं साल 2013 के बाद न्यूलैंड्स के मैदान पर ऐसा पहली बार देखने को मिला है जब टेस्ट मैच के पहले दिन के खेल में 2 बल्लेबाज शतकीय पारी खेलने में कामयाब हुए हैं। इससे पहले पाकिस्तान टीम के यूनिस खान और असद शफीक ने साल 2013 में इसी स्टेडियम में पहले दिन के खेल में शतक लगाया था, जिसमें यूनिस खान के बल्ले से 111 रन देखने को मिले थे तो वहीं असद शफीक ने नाबाद 111 रन बनाए थे।

तेंबा बावूमा घर पर एक सीजन में 500 प्लस टेस्ट रन बनाने वाले बने पांचवें अफ्रीकी कप्तान

अफ्रीकी टीम के कप्तान तेंबा बावूमा का इस बार घरेलू सीजन में बल्ला जमकर बोलता हुआ दिखाई दिया है जिसमें वह एक होम सीजन में साउथ अफ्रीका के लिए 500 प्लस रन बनाने वाले 5वें अफ्रीकी टीम के कप्तान बन गए हैं। बावूमा ने अब तक 72 के औसत से 504 रन बनाए हैं, जिसमें अभी और इजाफा होने की उम्मीद की जा सकती है। इस लिस्ट में पहले नंबर पर फाफ डू प्लेसिस का नाम है जिन्होंने साल 2017-18 के होम सीजन में कुल 600 रन बनाए थे। वहीं रिकेलटन और बावूमा के बीच हुई 235 रनों की साझेदारी ये साउथ अफ्रीका के लिए पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट में किसी भी विकेट के लिए चौथी सबसे बड़ी साझेदारी है।

काठमांडू:ऑक्सीजन के बिना 14 चोटियों पर चढ़कर इस पर्वतारोही ने इतिहास बनाया, अब मिला प्रतिष्ठित सम्मान

 जाने-माने नेपाली पर्वतारोही मिंगमा जी शेरपा को शुक्रवार को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अतिरिक्त ऑक्सीजन का उपयोग किए बिना 8,000 मीटर से अधिक ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़ने वाला पहला नेपाली पर्वतारोही बनकर इतिहास रचा था। मिंगमा (38) अक्टूबर में तिब्बत में शीशा पंगमा (8,027 मीटर ऊंची) चोटी पर अपराह्न लगभग चार बज कर छह मिनट पर पहुंचे और अतिरिक्त ऑक्सीजन के उपयोग के बिना 8,000 मीटर की 14 चोटियों पर चढ़ने वाले नेपाल के पहले पर्वतारोही बन गए।

2007 में एवरेस्ट पर की थी चढ़ाई

पर्यटन, संस्कृति एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री अरुण कुमार चौधरी ने शुक्रवार को काठमांडू में नेपाल पर्वतारोहण संघ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मिंगमा को सम्मानित किया। डोलखा जिले के रोलवालिंग ग्रामीण नगर पालिका में जन्मे मिंगमा ने पहली बार 2007 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर चढ़ाई की और चार अक्टूबर, 2024 को माउंट शीशा पंगमा (8,027 मीटर) पर चढ़कर अपना मिशन पूरा किया। पेशे से ‘माउंटेन गाइड’ मिंगमा छह बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ चुके हैं। वह नेपाल में पर्वतारोहण एजेंसी ‘इमैजिन नेपाल’ के मालिक भी हैं।

सरकार से की ये मांग

मिंगमा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ”पहाड़ी देश नेपाल का नागरिक होने के नाते, मैंने अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में अपने देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के 14 ऊंची चोटियों पर चढ़ने का साहस किया।” उन्होंने सरकार से आपात स्थिति का सामना करने वाले पर्वतारोहियों को बचाने के लिए सुविधाओं से लैस एक स्थायी बचाव दल बनाने का अनुरोध किया ताकि देश में पर्वतीय पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने कहा कि सुविधाओं से लैस बचाव दल की अनुपस्थिति में कई शेरपाओं की जान खतरे में पड़ जाती है।

चीन में मचा रहा HMPV वायरस हाहाकार , भारत पर इसका कितना होगा असर? NCDC ने बताई सच्चाई

कोरोना महामारी की तरह ही चीन में एक और वायरल का संक्रमण फैलने की खबर है। कई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के मामले बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया में दावा किया गया है कि वायरस तेजी से फैल रहा है, अस्पताल और शवदाहगृह भरे पड़े हैं। ऑनलाइन साझा किए गए वीडियो में भीड़भाड़ वाले अस्पताल दिखाई दे रहे हैं, जिसमें कुछ उपयोगकर्ता कह रहे हैं कि इन्फ्लूएंजा ए, एचएमपीवी, माइकोप्लाज्मा निमोनिया और कोविड-19 सहित कई वायरस फैल रहे हैं। हालांकि, चीन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

चीन में महामारी फैलने के दावों ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र का कहना है कि भारत के लोगों को इस बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। यहां हालात पूरी तरह से सामान्य हैं।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में है एनसीडीसी

आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) देश में श्वसन और मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों की बारीकी से निगरानी कर रहा है, और चीन में मानव मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के प्रकोप की हालिया रिपोर्टों के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम स्थिति की बारीकी से निगरानी करना जारी रखेंगे और उसी के अनुसार सूचना देंगे और अन्य बातों की पुष्टि करेंगे।”

भारत में चिंतित होने की जरूरत नहीं

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. अतुल गोयल ने कहा कि मानव मेटान्यूमोवायरस किसी भी अन्य श्वसन वायरस की तरह है जो सामान्य सर्दी का कारण बनता है, और यह युवा और बहुत बूढ़े लोगों में फ्लू जैसे लक्षण पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा “चीन में मानव मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के प्रकोप के बारे में खबरें चल रही हैं। हालांकि, हमने देश (भारत) में श्वसन प्रकोप के आंकड़ों का विश्लेषण किया है और दिसंबर 2024 के आंकड़ों में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है और हमारे किसी भी संस्थान से बड़ी संख्या में कोई मामले सामने नहीं आए हैं। वर्तमान स्थिति के बारे में चिंतित होने की कोई बात नहीं है।”

सर्दी से बचने के लिए सामान्य तरीके अपनाएं- डॉ. गोयल

डॉ. गोयल ने कहा, “वैसे भी, सर्दियों के दौरान श्वसन संक्रमण का प्रकोप बढ़ जाता है, जिसके लिए आमतौर पर हमारे अस्पताल आवश्यक आपूर्ति और बिस्तरों के साथ तैयार रहते हैं।” उन्होंने लोगों को श्वसन संक्रमण को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामान्य सावधानियों को अपनाने की सलाह दी, जिसका मतलब है कि अगर किसी को खांसी और जुकाम है तो उसे दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए ताकि संक्रमण न फैले। उन्होंने कहा कि लोगों को सर्दी होने पर दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए और सर्दी और बुखार के लिए सामान्य दवाएं लेनी चाहिए।

बीजिंग:चीनी सेना ने अपने सैनिकों को सलाह दी और AI को लेकर किया सतर्क ; जानें मुख्य बात

 चीनी सेना ने अपने सशस्त्र बलों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर बहुत ज्यादा निर्भर रहने के खिलाफ आगाह करते हुए कहा है कि एआई एक सहायक उपकरण होना चाहिए। चीनी सेना ने कहा है कि युद्ध के मैदान में सैनिकों को निर्णय लेना चाहिए ना कि इस तकनीक की मदद से फैसले करने चाहिए। चीनी सेना के आधिकारिक समाचार पत्र ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी डेली’ में नववर्ष की पूर्व संध्या पर प्रकाशित एक लेख में कहा गया है, “एआई तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन यह मानव बुद्धिमत्ता पर निर्भर उपकरण बना रहना चाहिए ताकि सैन्य निर्णय लेने में जवाबदेही, रचनात्मकता और रणनीतिक अनुकूलनशीलता सर्वोपरि रहे।”

लेख में और क्या कहा गया

लेख में कहा गया है कि सेना ने ऐसे मॉडल को प्राथमिकता दी है जिसके तहत “मानव योजना बनाता है और एआई उसे क्रियान्वित करता है।” लेख के अनुसार इन प्रौद्योगिकी का उपयोग कमांडरों द्वारा विकसित रणनीतियों को अंजाम देने लिए किया जाता है। लेख में कहा गया है कि एआई की एक और कमजोरी अपने स्वयं के कार्यों पर विचार करने या अपने निर्णयों की जिम्मेदारी लेने में असमर्थता है, जबकि सैनिक परिस्थितियों के हिसाब से अपनी योजनाओं के आधार पर फैसले लेते हैं।

यह भी जानें

हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर में कहा गया है कि सेना ऐसी संरचना को प्राथमिकता देती है, जिसके तहत मशीनें डेटा का विश्लेषण करती हैं, मार्गदर्शन प्रदान करती हैं और संभावित कार्रवाई का सुझाव देती हैं। हालांकि “एआई के कारण होने वाली गलतियों से बचाव के लिए अंतिम निर्णय सैनिकों की बुद्धिमत्ता पर निर्भर करता है।”

Health Tips: सर्दियों में गाजर का जूस पीने से मिलते हैं अद्भुत फायदे, त्वचा होती है स्वस्थ

विंटर सीजन में हम जितनी भी हेल्दी चीदें खाएंगे उतना ही आपकी सेहत मस्त रहेगी। सर्दी में गाजर का सेवन खूब किया जाता है। हर घर में गाजर की सब्जी, गाजर का अचार और गाजर का हलवा खूब बनता है। ऐसे में सलाद में भी गाजर का प्रयोग किया जाता है। सर्दियों में गाजर का जूस पीना काफी पौष्टिक माना जाता है। क्योंकि इसमें पोषक तत्वों का खजाना है।  आइए आपको बताते हैं विंटर में गाजर जूस पीने के फायदे।

हाइड्रेशन मिलता है

सर्दी के समय पानी पीना काफी कम हो जाता है जिससे डिहाइड्रेशन होने लगता है। गाजर के जूस पीने से हाइड्रेशन मिलता है।

पाचन में सहायक

सर्दियों में पाचन काफी स्लो हो जाता है। इस बजह से कब्ज की समस्या होने लगती है। ऐसे में आप गाजर जूस का सेवन करते हैं, तो आपको काफी राहत मिलेगी। क्योंकि, गाजर में सबसे ज्यादा फाइबर मिलती है।

बूस्ट इम्यूनिटी

इस मौसम में सर्दी जुकाम और फ्लू होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसलिए अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना बहुत जरूरी है। सर्दी में गाजर का जूस पीकर आप बीमारियों को दूर रख सकते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और बीटा-कैरोटीन का एक समृद्ध स्रोत है, जो शरीर में विटामिन ए दिलाता है। विटामिन ए प्रतिरक्षा कार्य को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ बनाएं रखता है

गाजर का जूस पीने से पोटेशियम की मात्रा होती है जो रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करती है और हाई बीवी को नियंत्रित करती है। इससे दिल भी हेल्दी रखता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो हमारे कार्डियोवैस्कुलर को अच्छा बनाता है।

वजन कंट्रोल होना

अगर आप अपने वजन को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो आप गाजर का जूस पी सकते हैं और इससे आपका पाचन भी ठीक होगा और वजन भी कम होगा। क्योंकि इसमें फाइबर मौजूद होती है। यह भूख को भी कंट्रोल करती है।