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महाकुंभ मेले के आयोजन और प्रबंधन में मानवीय पुरुषार्थ के साथ मशीन और आधुनिक तकनीक का हुआ महत्तम उपयोग : ए.के. शर्मा

महाकुंभ मेले के आयोजन और प्रबंधन में मानवीय पुरुषार्थ के साथ मशीन और आधुनिक तकनीक का हुआ महत्तम उपयोग : ए.के. शर्मा
महाकुंभ मेले के आयोजन और प्रबंधन में मानवीय पुरुषार्थ के साथ मशीन और आधुनिक तकनीक का हुआ महत्तम उपयोग : ए.के. शर्मा
महाकुंभ मेले के आयोजन और प्रबंधन में मानवीय पुरुषार्थ के साथ मशीन और आधुनिक तकनीक का हुआ महत्तम उपयोग : ए.के. शर्मा
  • प्रयागराज महाकुंभ 2025 में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया गया है।
  • ऊर्जा विभाग ने बिजली के खंभों की जीआईएस मैपिंग कर उनकी भौगोलिक स्थिति को चिन्हित किया है।
  • प्रत्येक खंभे को एक संख्या दी गई है, जिससे खंभे की लोकेशन स्पष्ट होती है।
  • खंभों पर लगाए गए क्यूआर (QR) कोड से तीर्थयात्री अपनी समस्या दर्ज कर सकते हैं, जिससे प्रशासन तुरंत सहायता प्रदान कर सके।
  • बिजली के खंभों पर लगी लाइटें तीर्थयात्रियों को मेले में रास्ता दिखाने में मदद करेंगी।

लखनऊ। 13 जनवरी 2025: प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 2025 आधुनिक तकनीक और मशीनों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इस महाकुंभ मेले के आयोजन और प्रबंधन में न केवल मानवीय पुरुषार्थ का बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों का भी अधिकतम उपयोग किया गया है। ऊर्जा विभाग ने तीर्थयात्रियों की सहायता के लिए एक अनोखा नवाचार किया है, जो मेले की सुरक्षा और सुविधा को और अधिक सशक्त बनाता है।

ऊर्जा विभाग का अनोखा नवाचार:

ऊर्जा विभाग ने महाकुंभ मेले में बिजली के खंभों का विशेष प्रबंधन किया है। इन खंभों की जीआईएस मैपिंग कर उनकी भौगोलिक स्थिति को चिन्हित किया गया है। प्रत्येक खंभे को एक संख्या दी गई है, जो उस पर अंकित है। यह संख्या न केवल खंभे की लोकेशन को स्पष्ट करती है बल्कि इसे पुलिस या प्रशासनिक सहायता के लिए भी उपयोग में लाया जा सकता है।

यदि कोई तीर्थयात्री अपने परिवार से बिछड़ जाता है या किसी समस्या में फंस जाता है, तो वह नजदीकी सहायता काउंटर या हेल्पलाइन पर खंभे की संख्या और अपनी समस्या बताकर तुरंत सहायता प्राप्त कर सकता है।

इसके अतिरिक्त, प्रत्येक खंभे पर एक क्यूआर (QR) कोड भी लगाया गया है। तीर्थयात्री इसे अपने स्मार्टफोन से स्कैन कर सकते हैं, जिससे एक छोटा सा फॉर्म खुल जाएगा। इस फॉर्म में वे अपना नाम, फोन नंबर और समस्या दर्ज कर सकते हैं। सबमिट करने के बाद प्रशासनिक अधिकारी तीर्थयात्री तक पहुँचकर उसकी मदद करेंगे।

बिजली के खंभों पर लगी लाइटें मेले में रास्ता दिखाने में भी सहायक होंगी। तीर्थयात्रियों को इस सुविधा का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

महाकुम्भ 2025 का प्रथम अमृत स्नान: 1 करोड़ 65 लाख लोगों ने पहले दिन किया अमृत स्नान, 44 घाटों पर हुआ स्नान, हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए, NSG कमांडो रख रहे नजर, जानें परम्परा का पालन करते हुए कौन सा अखाड़ा किस समय करेगा अमृत स्नान?

महाकुम्भ 2025 का प्रथम अमृत स्नान: 1 करोड़ 65 लाख लोगों ने पहले दिन किया अमृत स्नान, 44 घाटों पर हुआ स्नान, हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए, NSG कमांडो रख रहे नजर, जानें परम्परा का पालन करते हुए कौन सा अखाड़ा किस समय करेगा अमृत स्नान?
महाकुम्भ 2025 का प्रथम अमृत स्नान: 1 करोड़ 65 लाख लोगों ने पहले दिन किया अमृत स्नान, 44 घाटों पर हुआ स्नान, हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए, NSG कमांडो रख रहे नजर, जानें परम्परा का पालन करते हुए कौन सा अखाड़ा किस समय करेगा अमृत स्नान?
महाकुम्भ 2025 का प्रथम अमृत स्नान: 1 करोड़ 65 लाख लोगों ने पहले दिन किया अमृत स्नान, 44 घाटों पर हुआ स्नान, हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए, NSG कमांडो रख रहे नजर, जानें परम्परा का पालन करते हुए कौन सा अखाड़ा किस समय करेगा अमृत स्नान?
  • महाकुम्भ के पहले अमृत स्नान की महाकुम्भ प्रशासन ने की सभी तैयारियां पूरी।
  • महाकुंभ में 1.65 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।
  • महाकुंभ 144 साल में दुर्लभ खगोलीय संयोग में हो रहा है।
  • यह वही संयोग है, जो समुद्र मंथन के दौरान बना था।
  • अखाड़ों के अमृत स्नान में पूर्व परंपरा का होगा पालन, सुबह 6.15 पर होगा महाकुंभ का प्रथम अखाड़े का स्नान।
  • परम्परा का पालन करते हुए श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी करेगा सबसे पहले अमृत स्नान, सबसे आखिर में श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल।

महाकुम्भ नगर, 13 जनवरी 2025: प्रयागराज महाकुंभ की भव्य शुरुआत हो चुकी है। पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के सकुशल समापन के बाद अब सभी को प्रतीक्षा है महाकुम्भ के महा स्नान यानी शाही स्नान की जिसे इस बार नाम मिला है अमृत स्नान का। महाकुम्भ मेला प्रशासन की तरफ से पूर्व की मान्यताओं का पूरी तरह अनुसरण करते हुए सनातन धर्म के 13 अखाड़ों को अमृत स्नान में स्नान क्रम भी जारी किया गया है। सभी अखाड़ों को इसकी जानकारी दे दी गई है।

सबसे पहले अमृत स्नान करेगा महानिर्वाणी अखाड़ा

महाकुम्भ मेला 2025 में अखाड़ों के परम्परागत पूर्व से निर्धारित कम के अनुसार अमृत स्नान की तिथियों और उनके स्नान क्रम की सूचना अखाड़ों को मिल चुकी है। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के सचिव महंत आचार्य देवेंद्र सिंह शास्त्री बताते हैं कि अखाड़ों के अमृत स्नान की तिथि , क्रम और समय की जानकारी आ चुकी है। मकर संक्रान्ति दिनांक 14 जनवरी को
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी सबसे पहले अमृत स्नान करेगा जिसके साथ श्री शम्भू पंचायती अटल अखाड़ा भी होगा ।
यह अखाड़ा 5.15 पर शिविर से प्रस्थान करेगा और 6.15 पर घाट पहुंचेगा। इसे 40 मिनट का समय स्नान के लिए दिया गया है । यह 6.55 पर घाट से वापस शिविर के लिए रवाना होगा और 7.55 पर शिविर पहुंचेगा।

अन्य अखाड़ों के लिए भी आवंटित हुई समय सूची

दूसरे स्थान पर श्री तपोनिधि पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा, एवं श्री पंचायती अखाड़ा आनन्द अमृत स्नान करेगा। इसका शिविर से प्रस्थान का समय 06.05,घाट पर आगमन का समय 07.05,स्नान का समय 40 मिनट, घाट से प्रस्थान का समय 7.45 शिविर में आगमन का समय 8.45 रहेगा।
तीसरे स्थान पर तीन संन्यासी अखाड़े अमृत स्नान करेंगे। जिसमें श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा एवं श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा तथा श्री पंचाग्नि अखाड़ा शामिल हैं । इसका शिविर से प्रस्थान का समय 07.00.घाट पर आगमन का समय 08.00,स्नान का समय 40 मिनट, घाट से प्रस्थान का समय 8.40 शिविर में आगमन का समय 9.40 होगा।।

बैरागी अखाड़ों के लिए भी जारी हुई समय सूची

तीन बैरागी अखाड़ों में सबसे पहले अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाडा 09.40 पर शिविर से चलेगा, 10.40 पर घट पहुंचेगा और 30 मिनट स्नान के बाद 11.10 पर घाट से रवाना होकर 12.10 पर शिविर पहुंच जाएगा। इसी क्रम मेंअखिल भारतीय श्री पंच दिगम्बर अनी अखाडा 10.20 पर शिविर से निकलेगा, 11.20 पर घाट पहुंचना , 50 मिनट स्नान के बाद 12.10 पर घाट से रवाना होकर 13.10 पर शिविर वापस आ जाएगा। इसी तरह अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा 11.20 पर शिविर से चलेगा 12.20 पर घाट पहुंचेगा। 30 मिनट स्नान के बाद 12.50 पर वहां से वापस 13.50 पर शिविर आ जायेगा।

अन्य अखाड़ों की समय सूची
शेष बचे तीन अखाड़ों में उदासीन से जुड़े अखाड़े आते हैं। इसमें उदासीन श्री पंचायती नया उदासीन अखाडा 12.15 पर अपने शिविर से रवाना होकर 13.15 पर घाट पहुंचेगा और 55 मिनट स्नान करने के बाद 14.10 पर घाट से रवाना होकर 15.10 पर शिविर पहुंच जाएगा। इसके बाद श्री पंचायती अखाड़ा, नया उदासीन, निर्वाण की बारी है जो 13.20
बजे शिविर से उठेगा और 14.20 पर घाट पहुंचेगा। यहां एक घंटे स्नान के बाद 15.20 पर घाट से रवाना होकर 16.20 पर शिविर आ जायेगा। सबसे आखिर में अमृत स्नान करेगा श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा । यह अखाड़ा 14.40 पर शिविर से चलेगा और 15.40 पर घाट पहुंचेगा। चालीस मिनट स्नान करने के बाद 16.20 पर घाट से रवाना होकर 17.20 पर शिविर आ जायेगा। यह व्यवस्था मकर संक्रांति और बसंत पंचमी के अमृत स्नान के लिए जारी हुई है।

हॉलीवुड की शान लॉस एंजेलिस में आग का तांडव: जंगल की आग ने अब तक 24 लोगों की जान ली और 1,000 से अधिक घरों को नष्ट किया, भीषण आग पर अब पिंक लिक्विड से काबू पाने की कोशिश, भारत के विशेषज्ञ से जानें इसके फायदे और नुकसान

लॉस एंजेलिस में आग का तांडव: जंगल की आग ने अब तक 24 लोगों की जान ली और 1,000 से अधिक घरों को नष्ट किया, भीषण आग पर पिंक लिक्विड से काबू पाने की कोशिश, विशेषज्ञों से जानें इसके फायदे और नुकसान
लॉस एंजेलिस में आग का तांडव: जंगल की आग ने अब तक 24 लोगों की जान ली और 1,000 से अधिक घरों को नष्ट किया, भीषण आग पर पिंक लिक्विड से काबू पाने की कोशिश, विशेषज्ञों से जानें इसके फायदे और नुकसान
लॉस एंजेलिस में आग का तांडव: जंगल की आग ने अब तक 24 लोगों की जान ली और 1,000 से अधिक घरों को नष्ट किया, भीषण आग पर पिंक लिक्विड से काबू पाने की कोशिश, विशेषज्ञों से जानें इसके फायदे और नुकसान
  • पिंक लिक्विड एक विशेष फायर रिटार्डेंट है जो आग के फैलाव को धीमा करता है और अग्निशमन कर्मियों को समय देता है।
  • पिंक लिक्विड का छिड़काव हेलीकॉप्टरों और विमानों के माध्यम से किया जाता है, जो आग के प्रभावित क्षेत्रों में इसे स्प्रे करते हैं।
  • इस रसायन के कुछ नुकसान भी हैं, जैसे जल स्रोतों और वन्यजीवों के लिए हानिकारक प्रभाव।
  • पिंक लिक्विड आग पर काबू पाने में मदद करता है, लेकिन इसे अन्य अग्निशमन तकनीकों के साथ मिलाकर ही प्रभावी माना जा सकता है।

लॉस एंजेलिस/नई दिल्ली/लखनऊ, 13 जनवरी 2025: एक तरफ जहां लॉस एंजेलिस (एलए) की पहचान हॉलीवुड, सांस्कृतिक विविधता, प्रमुख पर्यटन स्थलों, खेल और मनोरंजन, आर्थिक केंद्र, और प्राकृतिक सौंदर्य से होती है। हॉलीवुड इसे समूचे विश्व की फिल्म और मनोरंजन उद्योग की राजधानी बनाता है। डिज़्नीलैंड, हॉलीवुड साइन, और सैंटा मोनिका बीच जैसे यहाँ के स्थान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, साथ ही एलए प्रमुख खेल टीमों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केंद्र भी है। इसके अलावा, यह फिल्म निर्माण, तकनीकी स्टार्टअप्स, और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र है। मालिबू और सैन गेब्रियल पर्वत जैसे प्राकृतिक स्थलों की सुंदरता इसे और भी खास बनाती है।

वहीं दूसरी तरफ आज उसी लॉस एंजेलिस के जंगलों में लगी भीषण आग ने न केवल लोगों के जीवन को संकट में डाला है, बल्कि संपत्ति का भारी नुकसान भी किया है। यहाँ आग से अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है, और 1,000 से अधिक घर पूरी तरह से जलकर राख हो चुके हैं। इस आग की भयावहता के कारण करीब 12,000 से अधिक इमारतें नष्ट हो चुकी हैं और 150,000 से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। आग की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए, लॉस एंजेलिस में अग्निशमन दल ने आग पर काबू पाने के लिए “पिंक लिक्विड” नामक एक विशेष फायर रिटार्डेंट का उपयोग करना शुरू किया है, जिससे आग के फैलाव को धीमा किया जा रहा है और आग पर नियंत्रण पाने में मदद मिल रही है।

प्रख्यात पर्यावरणविद से जानें, पिंक लिक्विड क्या है और कैसे काम करता है?

मूलतः उत्तरप्रदेश के हमीरपुर निवासी जाने-माने पर्यावरणविद सुशील द्विवेदी के मुताबिक ‘पिंक लिक्विड’ एक रासायनिक मिश्रण है, जो खासतौर पर जंगलों में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए तैयार किया गया है। डॉ. द्विवेदी के अनुसार, फ़ॉस-चेक एक अग्निरोधी पदार्थ है, जिसे आग बुझाने के लिए पेड़-पौधों पर छिड़का जाता है। यह अमोनियम पॉलीफ़ॉस्फ़ेट जैसे साल्ट से बना होता है और पेड़ों पर एक परत बनाकर ऑक्सीजन की सप्लाई को काट देता है। इसके फैलने से आग के तीव्रता में कमी आती है और अग्निशमन दल को आग को नियंत्रित करने का समय मिलता है। हालांकि, फ़ॉस-चेक का इस्तेमाल विवादास्पद है, क्योंकि इसका इंसानों और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है। 2024 में यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफ़ोर्निया के शोध में पाया गया कि इसमें क्रोमियम और कैडमियम जैसी जहरीली धातुएं होती हैं, जो कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियां पैदा कर सकती हैं। यह रसायन जल स्रोतों में पहुंचकर जलीय जीवों के लिए भी घातक हो सकता है। साथ ही, इसकी प्रभावशीलता इलाके और मौसम जैसी पर्यावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण जटिल हो गई हैं।

उन्होंने बताया कि लॉस एंजेलिस में पिंक लिक्विड का उपयोग क्यों जरूरी हुआ?

पर्यावरणविद के मुताबिक लॉस एंजेलिस और कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में आग लगना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार की आग ने अभूतपूर्व तबाही मचाई है। तेज हवाओं और शुष्क मौसम के कारण आग ने तीव्र गति से फैलना शुरू किया। सूखे पेड़ और पौधे आग को और भी तेज बढ़ाने में मदद कर रहे थे। इन परिस्थितियों में पारंपरिक अग्निशमन तरीकों से आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया, और इसलिए पिंक लिक्विड का इस्तेमाल एक प्रभावी समाधान के रूप में किया गया। पिंक लिक्विड ने आग के फैलाव को धीमा किया और अग्निशमन कर्मियों को आग पर काबू पाने का समय दिया।

विशेषज्ञ से जानें, पिंक लिक्विड के फायदे और नुकसान

आगे उन्होंने बताया कि पिंक लिक्विड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आग के फैलाव को रोकने और उसे नियंत्रित करने में मदद करता है। यह रसायन अग्निशमन दल को समय देता है, जिससे वे आग पर काबू पाने के लिए अन्य तकनीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, पिंक लिक्विड का छिड़काव बड़े क्षेत्र में जल्दी और प्रभावी रूप से किया जा सकता है, जिससे आग के फैलने से पहले ही उसे धीमा किया जा सकता है।

हालांकि, पिंक लिक्विड के कुछ नुकसान भी हैं। अत्यधिक इस्तेमाल से यह जल स्रोतों और वन्यजीवों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा, यह महंगा होता है और इसे बड़े पैमाने पर छिड़कने के लिए पर्याप्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है। इसके पर्यावरणीय प्रभाव पर भी चर्चा की जा रही है, क्योंकि यह रसायन दीर्घकालिक रूप से पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

क्या पिंक लिक्विड से आग पर काबू पाया जा सकता है?

पिंक लिक्विड ने आग पर काबू पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन यह केवल आग के फैलाव को धीमा करने में मदद करता है, आग को पूरी तरह से बुझाने में नहीं। पिंक लिक्विड का इस्तेमाल अग्निशमन कर्मियों को समय देने और आग के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, ताकि वे पानी और अन्य उपकरणों का उपयोग कर सकें। इस प्रक्रिया में पिंक लिक्विड एक सहायक उपकरण के रूप में कार्य करता है, लेकिन इसे अकेले आग को पूरी तरह से बुझाने के लिए नहीं इस्तेमाल किया जा सकता।

भविष्य में नुकसान और आग पर काबू पाने की उम्मीद

लॉस एंजेलिस में आग की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है, और अगर आग पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया, तो और अधिक नुकसान हो सकता है। इससे वायु गुणवत्ता में गिरावट, वन्यजीवों का विस्थापन, और पारिस्थितिकी तंत्र का असंतुलन हो सकता है। हालांकि, पिंक लिक्विड का प्रभावी उपयोग आग के फैलाव को धीमा करने में मदद कर रहा है, लेकिन इसका पूरा प्रभाव आग पर काबू पाने में कितना मददगार होगा, यह भविष्य में देखा जाएगा।

अंत में, पिंक लिक्विड का इस्तेमाल आग को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है, लेकिन इसे अन्य अग्निशमन तकनीकों के साथ मिलाकर ही पूरी तरह से प्रभावी माना जा सकता है। लॉस एंजेलिस के जंगलों में आग के फैलाव को रोकने के लिए यह एक सहायक समाधान हो सकता है, लेकिन आग को पूरी तरह से बुझाने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता होगी।

महाकुम्भ 2025: सोशल मीडिया पर नंबर वन ट्रेंड बना #एकताकामहाकुम्भ

महाकुम्भ 2025: सोशल मीडिया पर नंबर वन ट्रेंड बना #एकताकामहाकुम्भ
महाकुम्भ 2025: सोशल मीडिया पर नंबर वन ट्रेंड बना #एकताकामहाकुम्भ
महाकुम्भ 2025: सोशल मीडिया पर नंबर वन ट्रेंड बना #एकताकामहाकुम्भ
  • महाकुम्भ के पहले दिन पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर सोशल मीडिया पर छाया एकता का महाकुम्भ हैशटैग
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हजारों लोगों ने #एकताकामहाकुम्भ का उपयोग कर किया पोस्ट
  • पीएम मोदी और सीएम योगी ने इस महाकुम्भ को सबसे पहले बताया था एकता का महाकुम्भ

महाकुम्भ नगर, 13 जनवरी 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीर्थराज प्रयागराज में आयोजित हो रहे महाकुम्भ को एकता का महाकुम्भ करार दिया है। पीएम मोदी और सीएम योगी के इस कथन को सोशल मीडिया में भी खूब सराहा जा रहा है। सोमवार को महाकुम्भ के पहले दिन पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एकता का महाकुम्भ हैशटैग टॉप ट्रेंड में शुमार हो गया। सोमवार की सुबह से ही लोगों ने एक्स पर #एकताकामहाकुम्भ को लेकर अपने विचार प्रकट करने शुरू कर दिए और देखते ही देखते पहले यह हैशटैग टॉप ट्रेंड्स में शुमार हुआ और दोपहर को नंबर वन पर ट्रेंड करने लगा।

दिन भर टॉप ट्रेंड्स में शुमार रहा #एकताकामहाकुम्भ

पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ शुरू हुए महाकुम्भ को लेकर सुबह से ही सोशल मीडिया पर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। बड़ी संख्या में यूजर्स महाकुम्भ के वीडियोज, फोटोज और सूचनाएं अन्य लोगों तक पहुंचा रहे थे। यूजर्स कई हैशटैग के जरिए महाकुम्भ पर चर्चा कर रहे थे, जिसमें #एकताकामहाकुम्भ भी एक था। हालांकि, देखते ही देखते यह हैशटैग सबकी पसंद बन गया और शाम साढ़े तीन बजे तक करीब 70 हजार यूजर्स ने इस हैशटैग का उपयोग करते हुए महाकुम्भ में भारी भीड़, संगम स्नान और सनातन आस्था को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रतिक्रिया देने वालों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सम्मिलित रहे। सीएम योगी द्वारा हैशटैग का उपयोग करने के बाद इस पर प्रतिक्रिया देने वालों की बाढ़ आ गई और देखते ही देखते यह हैशटैग नंबर वन पर पहुंच गया।

बड़े नेताओं और संस्थानों ने भी किया हैशटैग का उपयोग

अमेठी की पूर्व सांसद और भाजपा की नेता स्मृति ईरानी, भारत सरकार के हैंडल MyGovIndia,नमामि गंगे, गोरखपुर के सांसद रवि किशन, यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, संदीप सिंह समेत प्रमुख लोगो और संस्थाओं की ओर से भी इस हैशटैग का उपयोग किया गया। उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी और सीएम योगी ने इस महाकुम्भ को एकता का महाकुम्भ कहा था। सीएम योगी ने हाल ही में पत्रकार वार्ता में कहा था कि जो लोग सनातन आस्था का सम्मान नहीं करते हैं, उन्हें महाकुम्भ में आकर देखना चाहिए कि यहां पंत, जाति और संप्रदाय का कोई भेदभाव नहीं है। यहां सब एक हैं और सब सनातन हैं।

कई और हैशटैग भी हुए ट्रेंड्स में शुमार

एकताकामहाकुम्भ के साथ ही महाकुम्भ को लेकर पूरे दिन कई और भी हैशटैग वायरल होते रहे। इनमें #MahaKumbh2025, #पौष पूर्णिमा, #पवित्र संगम, #प्रथम अमृत और #संगम जैसे हैशटैग शामिल रहे। इन सभी हैशटैग के माध्यम से सोशल मीडिया यूजर्स ने महाकुम्भ को लेकर अपनी श्रद्धा का भाव प्रकट किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई व शुभकामनाएं दीं, जिन्होंने इस महाकुम्भ को भव्य और दिव्य बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

स्वास्थ उपाय: चिलब्लेन्स का इलाज: सर्दी से उंगलियां हो जाएं नीली, तो इन उपायों को अपनाएं और जल्दी पाएं राहत।

सर्दियों में मौसम में हम सभी को कई तरह की समस्याएं होती हैं। इन्हीं समस्याओं में एक है पैरों की उंगलियों में सूजन हो। ठंड की वजह से उंगलियों में खुजली होने लगती है और यह लाल और नीली पड़ जाती है। बता दें कि ऐसी स्थिति तब होती है, हाथों-पैरों में ब्लड की पर्याप्त आपूर्ति न हो सके। लेकिन इसमें घबराने वाली बात नहीं है। अगर सर्दियों में आपके साथ भी यह समस्या होती है, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एक्सपर्ट द्वारा बताए गए कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अपनाकर आप इस समस्या से बच सकते हैं।

चिलब्लेन्स से कैसे पाएं राहत

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो इस समस्या के होने पर आपको ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। आपको अपनी डाइट में अखरोट और फ्लैक्स सीड्स को शामिल करना चाहिए। क्योंकि यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और ब्लड की आपूर्ति को बेहतर होती है। इससे हाथों और पैरों में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से होता है।

इसके साथ ही आपको आयरन से भरपूर फूड आइटम जैसे- चुकंदर और पालक जैसी सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करता चाहिए। इससे बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। क्योंकि जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो ब्लड सर्कुलेशन में बाधा आती है। इससे पैरों में सूजन और रंग में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

चिलब्लेन्स की समस्या से बचने के लिए आपको हल्दी वाला दूध पीना चाहिए। हल्दी में इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो दर्द और सूजन से राहत देने का काम करते हैं। हल्दी वाला दूध पीने से शरीर को अंदर से गर्मी मिलती है और यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है।

सर्दियों में मौसम में यह जरूरी होता है कि आप खुद को ठंड से बचाकर रखें। आपको अपने हाथों और पैरों को भी ठंड से बचाकर रखना चाहिए। सर्दियों में आप हाथ-पैरों को गर्म रखने के लिए गर्म दस्ताने और मोजे आदि पहनें। जिससे उंगलियों में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है।

शरीर को अंदर से गर्म रखने के लिए आप नियमित रूप से कुछ शारीरिक गतिविधियां कर सकते हैं। जैसे पैदल चलना, दौड़ना या फिर हल्की एक्सरसाइज करना। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।

आप हाथों और पैरों को ठंड से बचाने के लिए हल्की मालिश कर सकते हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और नसों का खिंचाव भी कम होता है।