नई दिल्ली:
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। उन्होंने अमेरिका की सैन्य क्षमता, परमाणु ताकत और वैश्विक सुरक्षा को लेकर कई अहम बातें कहीं।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास अत्याधुनिक सैन्य संसाधन मौजूद हैं और उन्होंने विशेष तौर पर अमेरिकी रक्षा क्षमताओं का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ रणनीतिक फैसलों ने क्षेत्रीय हालात को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि कुछ सैन्य कार्रवाइयां सफल नहीं होतीं तो हालात अलग हो सकते थे। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनका उद्देश्य संघर्ष नहीं बल्कि नियंत्रण और स्थिरता बनाए रखना है।
चीन को लेकर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और अन्य बड़े देशों की तुलना में चीन की परमाणु क्षमता अभी अलग स्तर पर है, लेकिन उसकी प्रगति तेज गति से हो रही है। उन्होंने अनुमान जताया कि आने वाले वर्षों में चीन अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमता को और मजबूत कर सकता है।
साथ ही ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों को सीमित करने या कम करने के लिए भविष्य में किसी बड़े समझौते की जरूरत पर भी बात की। उनका कहना था कि दुनिया में अत्यधिक विनाशकारी हथियारों की संख्या को लेकर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए देशों के बीच संवाद और समझौते की भूमिका अहम है। हालांकि उन्होंने यह संकेत भी दिया कि किसी भी समझौते के पालन को लेकर अमेरिका अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं पर नजर बनाए रखेगा।
दुनिया में फिलहाल कुछ ही देशों के पास परमाणु हथियार हैं और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में इन देशों की भूमिका लगातार चर्चा का विषय बनी रहती है।


































