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Latest Sports News :ICC नॉकआउट में ऑस्ट्रेलिया पर भारत की जीत का लंबा इंतजार, 5000 से ज्यादा दिनों बाद तोड़ा सिलसिला

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को पटखनी देकर भारत फाइनल में पहुंच चुका है। टीम ने टूर्नामेंट के इतिहास में लगातार तीसरी बार फाइनल में जगह बनाई है। इस मुकाबले में टीम इंडिया ने 48.1 ओवरों में 265 रनों के लक्ष्य का पीछा कर 4 विकेट से जीत दर्ज की। भारत की इस जीत में विराट कोहली की भूमिका काफी अहम रही।

दुबई में 4 मार्च 2025 को मिली जीत ने काफी हद तक भारतीय फैंस और टीम के उन जख्मों को भर दिया है, जो उन्हें 19 नवंबर 2023 को वर्ल्ड कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद मिली थी। बता दें, भारत ने पूरे 5094 दिनों बाद ऑस्ट्रेलिया को आईसीसी टूर्नामेंट के नॉकआउट मुकाबलों में शिकस्त दी है। आइए आपको बताते हैं कि, ऐसा आखिरी बार कब हुआ था।

आखिरी बार 2011 में हुआ था ऐसा

भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के सेमीफाइनल से पहले आईसीसी टूर्नामेंट्स के नॉकआउट मुकाबलों में ऑस्ट्रेलिया को आखिरी बार 2011 में शिकस्त दी थी। टीम ने वनडे वर्ल्ड कप 2011 के क्वार्टर-फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से मात दी थी। इसके बाद फिर भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे वर्ल्ड कप 2015 के सेमीफाइनल में 95 रन से हार मिली थी। उसके बाद वनडे वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल में 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। वहीं वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2023 के फाइनल में भी ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 209 रनों से हराया था।

रोहित शर्मा ने अपने नाम किया एक और खास रिकॉर्ड

सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराते ही रोहित चारों मेंस आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाले पहले कप्तान बन गए। इससे पहले उनकी कप्तानी में भारत ने 2023 में आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप और वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल खेला था। वहीं, रोहित की कप्तानी में ही भारत ने 2024 में टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में खेला था और साउथ अफ्रीका को हराकर आईसीसी ट्रॉफी के सूखे को खत्म किया था।

Israel & Hamas War :नेतन्याहू के देश में ऐसा कैसे?’ – इजरायल की संसद में जोरदार हंगामा, सांसदों के बीच हाथापाई, देखें वीडियो

इजरायल और हमास के बीच छिड़े युद्ध को लेकर हमास के हमले की जांच की मांग लंबे समय से की जा रही है। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू जहां कल तक खुद इसके पक्ष में थे लेकिन ऐसा लगता है कि नेतन्याहू इस हमले की जांच को टालने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी मांग को लेकर अब इजरायली जनता ने मोर्चा खोल दिया है और वह सड़क से संसद तक पहुंच रही है। इजरायल की संसद में सोमवार को भीड़ ने जमकर हंगामा कर दिया और इस दौरान खूब लात घूंसे चले। संसद में लोग चर्चा करना चाहते थे।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संसद में संबोधन से पहले सात अक्टूबर के बंधकों और पीड़ितों के परिजनों और इजरायली संसद जिन्हें नेसेड गार्ड कहा जाता है, दोनों के बीच जबरदस्त झड़पें हुईं। यह झड़प तब शुरू हुई जब पीड़ितों और बंधकों के परिजन संसद में घुसने की कोशिश कर रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारी संसद के अंदर प्रवेश घुस गए और नेतन्याहू का विरोध करते हुए उन्हें पीठ दिखाई।

देखें वीडियो

गार्डों ने प्रदर्शनकारियों को रोकते हुए कहा कि अंदर सिर्फ 10 लोग ही जा सकते हैं, मगर बंधकों और पीड़ितों के परिवार अपनी बात पर अड़े रहे। इस बीच तकरार इतनी बढ़ गई कि सुरक्षाकर्मियों ने परिजनों को अतिथि दीर्घा से दूर धकेलने की कोशिश की, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। गार्ड और परिजनों के बीच झड़पों के दौरान दो लोग घायल हो गए।

नेतन्याहू ने जांच से किया इनकार, विदेश मंत्री ने कही ये बात

इजरायली संसद ने पहले ही जानकारी दी थी कि सोमवार के विशेष सत्र में कम से कम 40 लोग मौजूद होंगे। हालांकि, हालात इतने खराब हो गए कि लोगों को कथित रूप से एंट्री नहीं दी गई, और वे संसद के भीतर जबरदस्ती घुसने की कोशिश करने लगे। नेसेट के अध्यक्ष ने इस मामले में गार्डों के बल प्रयोग की जांच के निर्देश दिए हैं। पीएम नेतन्याहू ने स्टेट कमिशन की मांग ठुकरा दी है। हालांकि, विदेश मंत्री  ने नेतन्याहू से असहमति जाहिर करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ऐसी किसी भी जांच का समर्थन करेगी।

यह दुर्भाग्यपूर्ण, अब वक्त आ गया – ट्रंप संग हुई नोकझोंक पर जेलेंस्की ने चुप्पी तोड़ी

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ‘ओवल ऑफिस’ में हुई नोकझोंक ‘अफसोसजनक’ है। ‘अब चीजों को सही करने का समय आ गया है।’ जेलेंस्की की टिप्पणी ‘व्हाइट हाउस द्वारा यूक्रेन को सैन्य सहायता पर रोक लगाने की घोषणा के कुछ घंटों बाद आई है।

बैठक उस तरह नहीं हुई, जैसी होनी चाहिए- जेलेंस्की

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘ शुक्रवार को वाशिंगटन में व्हाइट हाउस में हमारी बैठक उस तरह नहीं हुई जैसी होनी चाहिए थी।’ उन्होंने लिखा, ‘ यह अफसोस की बात है कि ऐसा हुआ। अब समय आ गया है कि हम सब कुछ ठीक करें। हम चाहते हैं कि भविष्य में सहयोग और संवाद रचनात्मक हो।’

दुर्लभ खनिजों पर समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन अपने दुर्लभ खनिजों पर समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है, जिसकी मांग ट्रंप प्रशासन ने की थी। उन्होंने कहा, ‘खनिजों और सुरक्षा पर समझौते के संबंध में यूक्रेन किसी भी समय और किसी भी सुविधाजनक प्रारूप में इस पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है।’

मुझे उम्मीद यह प्रभावी रूप से करेगा काम- जेलेंस्की

इसके साथ ही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, ‘हम इस समझौते को अधिक सुरक्षा और ठोस सुरक्षा गारंटी की दिशा में एक कदम के रूप में देखते हैं। मुझे वास्तव में उम्मीद है कि यह प्रभावी रूप से काम करेगा।’

अमेरिका ने यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता रोकी

वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को दी जाने वाली सभी अमेरिकी सैन्य सहायता की आपूर्ति को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। ट्रंप का यह निर्णय अमेरिका के राष्ट्रपति के कार्यालय ‘ओवल ऑफिस’ में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ एक अभूतपूर्व टकराव के बाद सामने आया है।

बड़ी खबर: अंसल प्रोजेक्ट्स में धोखाधड़ी पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने सीएम योगी को पत्र लिखकर की सख्त कार्रवाई की मांग, भाजपा विधायक ने गृह खरीददारों की शिकायतों पर सख्त कदम उठाते हुए अंसल प्रोजेक्ट्स की उच्च स्तरीय जांच की अपील की

बड़ी खबर: अंसल प्रोजेक्ट्स में धोखाधड़ी पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने सीएम योगी को पत्र लिखकर की सख्त कार्रवाई की मांग, भाजपा विधायक ने गृह खरीददारों की शिकायतों पर सख्त कदम उठाते हुए अंसल प्रोजेक्ट्स की उच्च स्तरीय जांच की अपील की
बड़ी खबर: अंसल प्रोजेक्ट्स में धोखाधड़ी पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने सीएम योगी को पत्र लिखकर की सख्त कार्रवाई की मांग, भाजपा विधायक ने गृह खरीददारों की शिकायतों पर सख्त कदम उठाते हुए अंसल प्रोजेक्ट्स की उच्च स्तरीय जांच की अपील की
बड़ी खबर: अंसल प्रोजेक्ट्स में धोखाधड़ी पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने सीएम योगी को पत्र लिखकर की सख्त कार्रवाई की मांग, भाजपा विधायक ने गृह खरीददारों की शिकायतों पर सख्त कदम उठाते हुए अंसल प्रोजेक्ट्स की उच्च स्तरीय जांच की अपील की

✅ अंसल प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले हजारों गृह खरीदार धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं।
✅ एलडीए, रेरा और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
✅ डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
✅ विधायक ने दोषियों पर कार्रवाई के लिए विजिलेंस जांच, पुलिस कार्रवाई और रेरा मामलों के शीघ्र निपटारे की अपील की है।
✅ अगर त्वरित समाधान नहीं हुआ, तो हजारों निवेशकों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था से उठ सकता है।

लखनऊ: सरोजनीनगर के भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अंसल प्रोजेक्ट्स में हुई धोखाधड़ी, निवेशकों के साथ हुए अन्याय और एलडीए (लखनऊ विकास प्राधिकरण) की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में क्या कहा डॉ. राजेश्वर सिंह ने?

विधायक डॉ. सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता के चलते रियल एस्टेट धोखाधड़ी के मामलों में न्याय की उम्मीद जगी है। उन्होंने अंसल प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामलों की विस्तृत जानकारी देते हुए गृह खरीदारों को न्याय दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अंसल समूह की परियोजनाओं में निवेश करने वाले हजारों खरीदारों को धोखे का सामना करना पड़ा है, क्योंकि कंपनी ने अपने वादों को पूरा नहीं किया।

डॉ. सिंह ने पत्र में उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में अंसल प्रोजेक्ट्स को लेकर दिए गए वक्तव्य ने जनता का विश्वास बढ़ाया है। उन्होंने अपील की कि सरकार को इस प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों को सजा दिलानी चाहिए।

अंसल प्रोजेक्ट्स में धोखाधड़ी: क्या हैं मुख्य आरोप?

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पत्र में अंसल समूह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि गृह खरीदारों को सुनियोजित तरीके से गुमराह किया गया, जिससे हजारों निर्दोष नागरिक अपने जीवनभर की पूंजी गवां बैठे। उन्होंने निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं को उठाया:

🔹 एलडीए द्वारा मंजूरी के बावजूद अंसल समूह पर भारी बकाया राशि थी।
🔹 अंसल ने समय पर कब्जा (Possession) नहीं दिया और घटिया गुणवत्ता का निर्माण किया।
🔹 कई प्रोजेक्ट्स में मूल रूप से वादा की गई सुविधाएँ भी नहीं दी गईं।
🔹 रेरा (RERA) के आदेशों की अनदेखी की गई और मामलों के समाधान में जानबूझकर देरी की गई।
🔹 गृह खरीदारों द्वारा पुलिस में की गई शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
🔹 एलडीए के अधिकारियों की मिलीभगत से अंसल को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
🔹 निवेशकों को गुमराह कर गलत दस्तावेजों के आधार पर प्रॉपर्टी बेची गई।

डॉ. राजेश्वर सिंह की 8 प्रमुख मांगें

विधायक ने मुख्यमंत्री से इस पूरे प्रकरण की गहन जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में 8 मुख्य बिंदु उठाए हैं:

1️⃣ अंसल प्रोजेक्ट्स की एलडीए मंजूरी और बकाया राशि की जांच:

एलडीए ने अंसल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, जबकि कंपनी पर भारी बकाया था, जिससे मंजूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। डॉ. सिंह ने इस पूरी प्रक्रिया की गहन जांच और एलडीए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

2️⃣ गृह खरीदारों की शिकायतों की विस्तृत सूची:

डॉ. सिंह ने एलडीए को निर्देशित करने का अनुरोध किया कि अंसल गृह खरीदारों की सभी शिकायतों की सूची तैयार की जाए और अब तक उन पर क्या कार्रवाई हुई है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट बनाई जाए।

3️⃣ गृह खरीदारों के हितों की रक्षा हेतु एलडीए की कार्ययोजना:

एलडीए को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गृह खरीदारों को उनके अधिकारों के अनुसार न्याय मिले। इसके लिए एक कार्ययोजना तैयार की जाए और इसमें त्वरित समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाए।

4️⃣ पुलिस में दर्ज शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई:

लखनऊ पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि गृह खरीदारों द्वारा दर्ज सभी मामलों की समीक्षा कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

5️⃣ लखनऊ पुलिस में लंबित मामलों की स्थिति पर अपडेट:

अंसल से जुड़े लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट करने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

6️⃣ रेरा (RERA) में लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की मांग:

डॉ. सिंह ने कहा कि रेरा में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं, जिनका समाधान तेज़ी से किया जाए।

7️⃣ रेरा के आदेशों की अनदेखी की जांच:

अगर अंसल समूह ने रेरा के आदेशों की अनदेखी की है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

8️⃣ एलडीए बोर्ड की भूमिका की जांच:

एलडीए की मंजूरी प्रक्रिया और बोर्ड की भूमिका की पारदर्शिता की जांच की जानी चाहिए, ताकि लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर किया जा सके।

विधायक ने विजिलेंस जांच की मांग की

डॉ. सिंह ने सीएम योगी से अनुरोध किया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी विजिलेंस जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की पारदर्शी कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए दोषियों को जवाबदेह ठहराना आवश्यक है।

क्या होगी सरकार की अगली कार्रवाई?

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं और क्या अंसल प्रोजेक्ट्स में हुई गड़बड़ियों पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।

👉 गृह खरीदारों को न्याय दिलाने के लिए क्या सरकार कोई ठोस निर्णय लेगी?
👉 क्या प्रशासन इस घोटाले में शामिल अधिकारियों पर सख्त कदम उठाएगा?
👉 क्या उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में एक मिसाल कायम करेगी?

आने वाले दिनों में इस मामले पर सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

सपा विधायक अबू आजमी के बयान पर भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया तीखा हमला, बोले- औरंगजेब की क्रूरता का समर्थन क्यों? समाजवादी पार्टी चुप क्यों, क्या सपा उसकी विचारधारा से सहमत है?

  • सपा विधायक अबू आजमी के बयान पर भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जताई कड़ी आपत्ति।
  • उन्होंने औरंगजेब को इतिहास का क्रूरतम शासक बताया।
  • सपा से सवाल किया कि क्या वह भी इस विचारधारा का समर्थन करती है?
  • अगर समाजवादी पार्टी चुप रहती है, तो यह मौन सहमति मानी जाएगी।
  • हिंदू आस्था और बलिदानियों के अपमान पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी द्वारा औरंगजेब के बचाव में दिए गए बयान पर भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि औरंगजेब का बचाव करना उन लाखों बलिदानियों का अपमान है, जिन्होंने धर्म, राष्ट्र और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी से सवाल किया कि क्या पार्टी भी औरंगजेब की विभाजनकारी और कट्टरपंथी सोच का समर्थन करती है? उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी इस बयान से खुद को अलग नहीं करती और अबू आज़मी पर कार्रवाई नहीं करती, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि पार्टी भी वही मानसिकता रखती है जो औरंगजेब की थी।

औरंगजेब – क्रूरता और अन्याय का प्रतीक

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि औरंगजेब न केवल क्रूर, कट्टर और तानाशाह था, बल्कि उसने धर्म और समाज को तोड़ने का प्रयास किया। अपने पिता शाहजहां को कैद कर दिया। अपने भाई दारा शिकोह की हत्या करवाई। काशी विश्वनाथ, सोमनाथ सहित सैकड़ों मंदिर ध्वस्त करवाए। हिंदुओं पर जजिया कर लगाया और उनके त्योहारों पर प्रतिबंध लगाया। गुरु तेग बहादुर जी की निर्ममता से हत्या करवाई। गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबजादों को निर्दयता से शहीद किया। छत्रपति संभाजी महाराज जी को यातनाएं देकर मौत के घाट उतार दिया।

“ऐसे क्रूर शासक का बचाव करना देश के इतिहास, धर्म और बलिदानियों का सीधा अपमान है।”

सपा अबू आज़मी पर कार्रवाई करे या स्वीकार करे कि वह औरंगजेब की विचारधारा का समर्थन करती है – डॉ. सिंह

भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी से सीधा सवाल किया कि –

👉 क्या हिंदू आस्था का अपमान करना समाजवादी पार्टी की विचारधारा है?
👉 क्या सपा अबू आज़मी के बयान से सहमत है?
👉 अगर नहीं, तो अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी अबू आज़मी पर कोई कार्रवाई नहीं करती, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वह भी औरंगजेब की मानसिकता का समर्थन करती है।

समाज को तोड़ने वाली विचारधारा को नहीं किया जाएगा स्वीकार

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत की संस्कृति सनातन परंपरा, भाईचारे और बलिदान की गाथा से जुड़ी हुई है। यहां ऐसे किसी भी व्यक्ति या विचारधारा के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता, जो समाज को बांटने और हिंदू आस्था पर चोट करने का काम करे।

“समाजवादी पार्टी को अबू आजमी के बयान पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी, अन्यथा यह माना जाएगा कि वह भी औरंगजेब के विचारों की समर्थक है।