अभिनेता अर्जुन कपूर ने अपना 41वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर उन्हें फैंस, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों की ओर से शुभकामनाएं मिलीं। इसी बीच उनकी बहन अंशुला कपूर ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
अंशुला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें अर्जुन कपूर के साथ उनके बचपन से लेकर बड़े होने तक की कई यादगार तस्वीरें शामिल थीं। वीडियो में भाई-बहन के रिश्ते के अलग-अलग पल देखने को मिले।
वीडियो के साथ अंशुला ने एक भावनात्मक संदेश भी लिखा। उन्होंने अर्जुन को अपना पहला दोस्त, बचपन का साथी, सुरक्षा का एहसास और हमेशा साथ खड़े रहने वाला व्यक्ति बताया। उन्होंने लिखा कि उनके जीवन के हर दौर में अर्जुन का साथ खास रहा है और वह इस रिश्ते को बेहद अहम मानती हैं।
अंशुला ने अपने संदेश में अर्जुन के लिए आने वाले समय की खुशियों, सुकून और सफलता की कामना भी की। उन्होंने भाई के सहयोग, देखभाल और हमेशा साथ देने के लिए आभार जताते हुए अपना प्यार व्यक्त किया।
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर फैंस के बीच चर्चा का विषय बनी रही और लोगों ने दोनों के रिश्ते की तारीफ की।
वहीं निजी जीवन की बात करें तो अंशुला कपूर भी जल्द अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करने वाली हैं। उनकी शादी की तैयारियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं और परिवार में उत्सव का माहौल बताया जा रहा है।
लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी “डिजिटल इंडिया” अभियान तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिजिटल उत्तर प्रदेश और आत्मनिर्भर भारत के विजन को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में सरोजनीनगर विधानसभा एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभर रही है। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा शुरू की गई “डिजिटल सरोजनीनगर” की अभिनव पहल आज क्षेत्र के हजारों युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में संचालित रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केन्द्र केवल कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल साक्षरता, रोजगारपरक कौशल और सुगम ई-गवर्नेंस सेवाओं के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। इन केन्द्रों का उद्देश्य डिजिटल तकनीक को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा नागरिकों को सरकारी सेवाएं उनके घर के निकट उपलब्ध कराना है।
17 केन्द्रों के माध्यम से मजबूत हो रहा ‘डिजिटल सरोजनीनगर’ का नेटवर्क
वर्तमान समय में सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न भागों में 17 रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केन्द्रों पर विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों के बच्चों और युवाओं को पूर्णतः निःशुल्क डिजिटल एवं कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभा की राह में बाधा न बन सके।
इन केन्द्रों में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक पर आधारित रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें DCA, ADCA, CCC, O-Level, Graphic Designing, Video Editing तथा 3D Animation जैसे कोर्स शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवा न केवल डिजिटल तकनीकों में दक्ष हो रहे हैं, बल्कि रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं।
1001 से अधिक युवा हुए प्रशिक्षित, 480 से अधिक विद्यार्थी वर्तमान में कर रहे अध्ययन
“डिजिटल सरोजनीनगर” अभियान की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 1,001 से अधिक छात्र-छात्राएं इन केन्द्रों से विभिन्न डिजिटल एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। वहीं वर्तमान में 480 से अधिक विद्यार्थी इन केन्द्रों में नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
यह पहल केवल कंप्यूटर शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल प्रदान कर उन्हें प्रतिस्पर्धी युग के अनुरूप तैयार करने का कार्य कर रही है। प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अनेक युवाओं ने निजी क्षेत्र, स्वरोजगार एवं फ्रीलांसिंग के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बनानी शुरू कर दी है।
ई-गवर्नेंस सेवाओं से हजारों नागरिकों को मिल रही राहत
डिजिटल शिक्षा के साथ-साथ इन केन्द्रों को जनसेवा का माध्यम भी बनाया गया है। वर्तमान में 17 केन्द्रों में से 7 केन्द्रों पर ई-गवर्नेंस सेवाएं संचालित की जा रही हैं, जहाँ अब तक 7,000 से अधिक नागरिक विभिन्न ऑनलाइन सरकारी सेवाओं का लाभ प्राप्त कर चुके हैं।
इन केन्द्रों के माध्यम से आय, जाति एवं निवास प्रमाण-पत्र, पेंशन आवेदन, छात्रवृत्ति, आधार से संबंधित सेवाएं तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के ऑनलाइन आवेदन जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिली है और समय तथा धन दोनों की बचत हो रही है। साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी एवं त्वरित तरीके से लोगों तक पहुँच रहा है।
डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम
डॉ. राजेश्वर सिंह की यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन की उस मूल भावना को साकार करती है, जिसमें तकनीक को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाकर विकास को समावेशी बनाया जाना है। सरोजनीनगर में डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और ई-गवर्नेंस सेवाओं का यह मॉडल ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल अंतर को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार डिजिटल कौशल विकास को बढ़ावा मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में सरोजनीनगर सूचना प्रौद्योगिकी आधारित रोजगार एवं डिजिटल नवाचार का एक महत्वपूर्ण केन्द्र बन सकता है।
“डिजिटल क्रांति तभी सफल होगी जब उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे” — डॉ. राजेश्वर सिंह
इस अवसर पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा—
“डिजिटल क्रांति तभी सफल होगी, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। हमारा उद्देश्य केवल कंप्यूटर शिक्षा देना नहीं, बल्कि सरोजनीनगर के प्रत्येक युवा को तकनीकी रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और रोजगार योग्य बनाना है। साथ ही प्रत्येक नागरिक तक सरकारी डिजिटल सेवाओं की सरल, पारदर्शी एवं त्वरित पहुँच सुनिश्चित करना भी हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘Digital India’ अभियान और मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के डिजिटल उत्तर प्रदेश के विजन को ‘डिजिटल सरोजनीनगर’ के माध्यम से धरातल पर उतारना हमारा संकल्प है।”
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में डिजिटल शिक्षा एवं ई-गवर्नेंस सेवाओं का यह अभियान और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। अधिक से अधिक युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ा जाएगा तथा डिजिटल सेवाओं का विस्तार क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक तक किया जाएगा, ताकि सरोजनीनगर का हर युवा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बन सके और प्रत्येक नागरिक को सरकारी सेवाओं का लाभ अपने ही क्षेत्र में सहज, सरल एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो सके।
डॉ. राजेश्वर सिंह की यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यदि जनप्रतिनिधि दूरदृष्टि, आधुनिक सोच और जनसेवा के संकल्प के साथ कार्य करें तो डिजिटल तकनीक केवल सुविधाओं का माध्यम नहीं रहती, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक सशक्तिकरण और सुशासन की मजबूत नींव बन जाती है। “डिजिटल सरोजनीनगर” इसी परिवर्तनकारी सोच का सशक्त उदाहरण बनकर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े एक स्वतंत्र जांच आयोग की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गाजा में जारी सैन्य अभियानों के दौरान बच्चों पर पड़ने वाला प्रभाव बेहद गंभीर बना हुआ है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सैन्य कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी नागरिक, खासकर बच्चे, प्रभावित हुए हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के संदर्भ में गंभीर चिंता का विषय बताया गया है।
रिपोर्ट में फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि पिछले कई महीनों के दौरान हुए हमलों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जिनमें बच्चों की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय बताई गई है। आयोग का कहना है कि बच्चों पर पड़ रहे असर और नागरिक क्षेत्रों में हो रही क्षति की विस्तृत जांच की जरूरत है।
यह रिपोर्ट पहले प्रकाशित उन अंतरराष्ट्रीय निष्कर्षों के बाद सामने आई है जिनमें गाजा संघर्ष के दौरान संभावित अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन की जांच की मांग की गई थी। इसी संदर्भ में इजरायल के कुछ शीर्ष अधिकारियों, जिनमें प्रधानमंत्री भी शामिल हैं, के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और राजनीतिक बहस जारी है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संघर्ष विराम के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं। आयोग के अनुसार, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत प्राथमिकता होनी चाहिए।
हालांकि, इजरायल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इजरायली पक्ष का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई सुरक्षा कारणों और हमास की गतिविधियों के जवाब में की जा रही है। साथ ही, उसने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
इजरायल का यह भी कहना है कि संघर्ष जारी रहने और सुरक्षा चिंताओं के कारण गाजा में कुछ प्रतिबंध लागू किए गए हैं। दूसरी ओर, मानवीय संगठनों का कहना है कि इन परिस्थितियों का असर आम नागरिकों के जीवन और पुनर्निर्माण प्रयासों पर पड़ रहा है।
गाजा की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है और आने वाले समय में जांच, कूटनीतिक प्रयासों और मानवीय सहायता को लेकर चर्चा तेज रहने की संभावना है।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान अभिनेता आर माधवन को कला क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वह अपने परिवार के साथ पहुंचे और उनके पारंपरिक लेकिन स्टाइलिश अंदाज ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
माधवन ने इस मौके पर नेवी ब्लू बंदगला-स्टाइल एथनिक लुक चुना, जिसे उन्होंने सिंपल लेकिन प्रीमियम एक्सेसरीज के साथ पूरा किया। हालांकि, उनके पूरे लुक में सबसे ज्यादा चर्चा उनकी कलाई पर दिखी लग्जरी घड़ी की रही।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अभिनेता ने टाइटन के नेबुला कलेक्शन की एक प्रीमियम और सीमित संस्करण वाली घड़ी पहनी थी। बताया जाता है कि इसकी अनुमानित कीमत करीब 40 लाख रुपये है। यह घड़ी 18 कैरेट रोज गोल्ड केस, पारंपरिक भारतीय डिजाइन प्रेरणा और आधुनिक वॉचमेकिंग तकनीक का मिश्रण मानी जाती है।
इस मॉडल की खासियत इसका विशेष डायल डिजाइन बताया जा रहा है, जिसकी प्रेरणा राजस्थान की पारंपरिक कला और ऐतिहासिक स्थापत्य शैली से ली गई है। हाथ से तैयार किए गए डिजाइन और सीमित उत्पादन के कारण इसे कलेक्टर्स के बीच खास माना जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस लिमिटेड एडिशन वॉच की दुनिया भर में केवल 10 यूनिट्स बनाई गई हैं, जिससे इसकी एक्सक्लूसिव वैल्यू और बढ़ जाती है।
वर्क फ्रंट की बात करें तो आर माधवन आने वाले समय में कई फिल्म प्रोजेक्ट्स में दिखाई देंगे। इनमें बड़े बैनर की फिल्मों के साथ अन्य नए प्रोजेक्ट भी शामिल हैं, जिनका दर्शकों को इंतजार है।
वर्क फ्रॉम होम और लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने की आदत ने कई लोगों की दिनचर्या बदल दी है। ऐसे में अक्सर लोग सुविधा के लिए लैपटॉप को गोद में रखकर घंटों काम करते रहते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत लंबे समय में शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
त्वचा पर गर्मी का असर लैपटॉप लगातार इस्तेमाल के दौरान गर्मी पैदा करता है। यदि इसे लंबे समय तक सीधे पैरों या गोद पर रखा जाए तो त्वचा पर गर्माहट, लालपन या जलन महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में लगातार गर्मी के संपर्क से त्वचा पर जालीनुमा निशान बनने जैसी स्थिति भी देखी गई है, जिसे आम भाषा में ‘टोस्टेड स्किन’ प्रभाव कहा जाता है।
गर्दन, पीठ और कंधों में दर्द बढ़ सकता है गोद में लैपटॉप रखकर काम करने पर शरीर का पोश्चर अक्सर बिगड़ जाता है। स्क्रीन देखने के लिए गर्दन नीचे झुकानी पड़ती है, जिससे गर्दन, कंधे और पीठ पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा करने से मांसपेशियों में तनाव और रीढ़ से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है।
रिप्रोडक्टिव हेल्थ को लेकर भी चर्चा कुछ अध्ययनों में लंबे समय तक अधिक गर्मी के संपर्क और पुरुषों की प्रजनन क्षमता के बीच संभावित संबंधों पर चर्चा की गई है। हालांकि इस विषय पर विशेषज्ञ सावधानी बरतने और अधिक स्पष्ट वैज्ञानिक निष्कर्षों की प्रतीक्षा की सलाह देते हैं।
हाथ और कलाई पर पड़ सकता है असर गोद में लैपटॉप रखने पर हाथ और कलाई का एंगल स्वाभाविक नहीं रहता। लंबे समय तक इसी स्थिति में टाइपिंग करने से दर्द, जकड़न या तनाव की समस्या हो सकती है।
कैसे करें बचाव?
लैपटॉप को सीधे गोद में रखने के बजाय टेबल, स्टैंड या लैपटॉप ट्रे का उपयोग करें।
हर 30–40 मिनट में छोटा ब्रेक लें।
बैठने की स्थिति समय-समय पर बदलें।
स्क्रीन को आंखों के स्तर के करीब रखें ताकि गर्दन पर दबाव कम पड़े।
काम के लिए ऐसी कुर्सी और सेटअप चुनें जो शरीर को सही सपोर्ट दे।
ध्यान रखें कि ये सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। यदि लंबे समय से दर्द, त्वचा में बदलाव या अन्य परेशानी महसूस हो रही है तो डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।