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बांग्लादेश T20 टीम में बड़ा बदलाव, इस खिलाड़ी को सौंपी गई कप्तानी की जिम्मेदारी

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 04 मई को एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने लिटन दास को बांग्लादेश की टी-20 टीम का नया कप्तान नियुक्त किया है। लिटन दास 2026 में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप तक टीम के कप्तान बने रहेंगे। वह नजमुल हुसैन शांतो की जगह लेंगे, जिन्होंने व्यस्त शेड्यूल को देखते हुए सभी फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ दी थी। मेहदी हसन मिराज को टी-20 टीम का उपकप्तान बनाया गया है।

लिटन दास की बात करें तो उन्होंने पिछले साल दिसंबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज में टीम की अगुवाई की थी, जिसके बाद बोर्ड ने अब ये फैसला लिया है। इसके साथ ही बोर्ड ने UAE और पाकिस्तान के खिलाफ आगामी टी-20 सीरीज के लिए टीम का ऐलान भी किया।

लिटन दास को कप्तान बनाने के बाद BCB अध्यक्ष ने दिया बड़ा बयान

लिटन दास अब UAE और पाकिस्तान के खिलाफ होने वाली आगामी टी-20 सीरीज में बांग्लादेश टीम की कमान संभालेंगे। लिटन को कप्तान बनाने के बाद BCB क्रिकेट संचालन के अध्यक्ष नजमुल आबेदीन ने कहा कि उनको लंबी योजना के तहत कप्तान चुना गया है। वह अगले साल होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप तक टीम की कमान संभालेंगे। उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें ये जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि बांग्लादेश के पास मौजूदा सेटअप में ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी नहीं हैं। उनका मानना ​​है कि लिटन में कप्तानी करने की क्षमता है। वह आने वाले समय में टीम के सबसे बहुमूल्य खिलाड़ी बन सकते हैं।

लिटन दास का इंटरनेशनल करियर

लिटन के इंटरनेशनल करियर की बात करें तो उन्होंने 48 टेस्ट क्रिकेट मैचों में 34.00 की औसत से 2,788 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 4 शतक और 17 अर्धशतक लगाए। वहीं वनडे में उन्होंने 94 मैचों में 30.22 की औसत से 2,569 रन बनाए हैं। इसमें 5 शतक और 12 अर्धशतक शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने 95 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 22.44 की औसत और 2,476 की औसत से 2,020 रन अपने नाम किए हैं। इस फॉर्मेट में उन्होंने 11 अर्धशतक लगाए हैं। लिटन ने अब तक एक टेस्ट, सात वनडे और चार टी20 मैचों में बांग्लादेश की कप्तानी की है।

UAE और पाकिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए बांग्लादेश का स्क्वॉड

लिटन दास (कप्तान), तंजीद हसन, परवेज हुसैन इमोन, सौम्य सरकार, नजमुल हुसैन शांतो, तौहीद हृदोय, शमीम हुसैन, जैकर अली, रिशाद हुसैन, महेदी हसन, तनवीर इस्लाम, मुस्तफिजुर रहमान, हसन महमूद, तंजीम साकिब, नाहिद राणा, शोरिफुल इस्लाम

खेसारी लाल यादव का जलवा, नए गाने ने 24 घंटे में बटोरे 8 मिलियन व्यूज

भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव अक्सर ही अपनी फिल्मों और गानों को लेकर वायरल रहते हैं। अब एक बार फिर खेसारी लाल यादव ने कमाल कर दिया है। खेसारी का गाना महज 24 घंटे में 8 मिलियन से ज्यादा व्यूज हासिल करने में सफल रहा है। इतना ही नहीं इस गाने ने पूरे दिनभर से यूट्यूब के ट्रेंड्स में अपनी जगह बनाई हुई है। इस गाने को टी-सीरीज ने बनाया है और इसे बीते रोज रिलीज किया गया था। इस गाने का नाम है ‘शाम है धुआं-धुआं’ और यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है।

खेसारी ने ही दी आवाज और किया जोरदार डांस

बता दें कि इस गाने को खेसारी लाल यादव ने खुद ही स्रष्टि के साथ मिलकर गाया है। खेसारी की आवाज में आया ये गाना भोजपुरी फैन्स को काफी पसंद आ रहा है। हालांकि भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री की दिलचस्पी के हिसाब से ये गाना एडल्ट्री की तरफ झुका है लेकिन भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए ये कोई बड़ी बात नहीं है। यहां इस तरह के गाने खूब सुने जाते हैं और पसंद किए जाते हैं। अब ये गाना शाम है धुआं धुआं भी लगातार छाया हुआ है। इस गाने को अपनी आवाज देने वाले सिंगर खेसारी लाल यादव ने ही इसमें धमाकेदार डांस भी दिखाया है। अब ये गाना छाया हुआ है।

पहले भी कमाल कर चुके हैं खेसारी लाल यादव

बता दें कि खेसारी लाल यादव भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री के चमकते हुए सितारे हैं। इनके गाने कई साल बाद भी लोगों को पसंद आते हैं और वायरल रहते हैं। बीते 8 साल पहले रिलीज हुआ खेसारी लाल यादव का गाना आज भी यूट्यूब पर खूब पसंद किया जाता है। इस गाने में खेसारी लाल यादव के साथ मधु शर्मा धमाकेदार डांस करते नजर आ रही हैं। इस गाने का टाइटल है ‘लहे लहे माला ये राजा’ और इस गाने को खुद खेसारी लाल यादव ने अपनी आवाज दी है। साथ ही खेसारी का साथ देने के लिए इस गाने में इंदू सोनाली को चुना गया था। आज भी इन दोनों की आवाज से सजा ये गाना फैन्स को काफी पसंद आता है। गाने के म्यूजिक डायरेक्टर अविनाश ढा रहे थे। साथ ही फिल्म को असलम शेख ने डायरेक्ट किया था।  ये गाना आज भी यू्ट्यूब पर खूब सुना जाता है।

गौतम बुद्ध से जुड़ी विरासत की होगी नीलामी, जानें उत्तर प्रदेश में मिले ये पवित्र रत्न क्यों हैं बेहद खास

गौतम बुद्ध से जुड़े बेहद खास रत्नों की नीलामी बुधवार को हांगकांग के सोथबी में होने जा रही है। बुद्ध के पार्थिव अवशेषों से जुड़े इन चमचमाते रत्नों को आधुनिक युग की सबसे आश्चर्यजनक पुरातात्विक खोजों में से एक माना गया है। ये रत्न 1898 में यूपी के एक धूल भरे टीले में मिले थे। इन्हें 100 साल से भी ज्यादा समय से एक निजी ब्रिटिश संग्रहालय में रखा गया था। अब इन रत्नों को खरीदने के लिए बड़ी बोलियां लग सकती हैं।

इन रत्नों में लगभग 1,800 मोती, माणिक, पुखराज, नीलम और पैटर्न वाली सोने की चादरें शामिल हैं। इन्हें पहली बार उत्तर प्रदेश में बुद्ध के जन्मस्थान के पास एक ईंट के कमरे के अंदर देखा गया था। इन रत्नों के साथ गौतम बुद्ध की अस्थियों वाला कलश भी मिला था। इसके बाद पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हुई थी। सोथबी एशिया के अध्यक्ष और एशियाई कला के विश्वव्यापी प्रमुख निकोलस चाउ का मानना ​​है कि यह “अब तक की सबसे असाधारण पुरातात्विक खोजों में से एक है।”

नीलामी पर सवाल उठा रहे विशेषज्ञ

इन अनमोल रत्नों की नीलामी से पहले कई लोग इन्हें खरीदने की योजना बना रहे हैं और यह नीलामी काफी चर्चा में है, लेकिन बीबीसी की खबर के अनुसार कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पवित्र इतिहास से जुड़े खजाने की नीलामी सही नहीं है। खासकर तब, जब ये रत्न भारत के इतिहास से इतने करीब से जुड़े हैं। 1898 में, एक अंग्रेज एस्टेट मैनेजर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने लुम्बिनी के ठीक दक्षिण में पिपरहवा में एक स्तूप की खुदाई की थी। माना जाता है कि यहीं गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। इस खुदाई में लगभग 2,000 साल पुराने अवशेष मिले थे।

इतिहासकार इस बात से सहमत हैं कि ये अवशेष बुद्ध के शाक्य वंश के वंशजों और दुनिया भर में बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों की विरासत हैं। 1998 की खुदाई में मिले अवशेषों को थाईलैंड, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों में बांटा गया था, जहां उन्हें आज भी पूजा जाता है। दिल्ली के कला इतिहासकार नमन आहूजा ने कहा “क्या बुद्ध के अवशेष एक ऐसी चीज हैं, जिन्हें कला के काम की तरह बाजार में बेचा जा सकता है? और चूंकि वे कला के काम नहीं हैं, तो विक्रेता को उन्हें नीलाम करने का नैतिक अधिकार कैसे है?

नीलामीकर्ता का बयान

विलियम के परपोते क्रिस पेप्पे ने बताया कि परिवार ने अवशेषों को दान करने पर विचार किया, लेकिन सभी विकल्पों में समस्याएं थीं और नीलामी इन अवशेषों को बौद्धों को हस्तांतरित करने का सबसे उचित और पारदर्शी तरीका लगा। लंदन के सोआस विश्वविद्यालय के एशले थॉम्पसन और क्यूरेटर कॉनन चेओंग, दोनों दक्षिण पूर्व एशियाई कला के विशेषज्ञ हैं। एक संयुक्त बयान में उन्होंने कहा “बिक्री से जुड़े अन्य नैतिक सवाल हैं- क्या मानव अवशेषों को बेचा जाना चाहिए? क्या मानव अवशेष बेचे जा सकते हैं? और कौन तय करेगा कि कौन से अवशेष मानव अवशेष हैं या नहीं? दुनिया भर के कई बौद्ध अनुयायियों के लिए, बिक्री पर रखे गए रत्न हड्डियों और राख का अभिन्न अंग हैं।”

नीलामी का विरोध कर रहे बौद्ध नेता

अवशेषों की बिक्री ने बौद्ध नेताओं के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। लंदन स्थित ब्रिटिश महाबोधि सोसाइटी के अमल अबेयावर्धने ने कहा, “बुद्ध हमें दूसरों की संपत्ति बिना अनुमति के नहीं लेने की शिक्षा देते हैं। ऐतिहासिक अभिलेखों से पता चलता है कि शाक्यमुनि कबीले को इन अवशेषों की कस्टडी दी गई थी, क्योंकि बुद्ध उनके समुदाय से निकले थे। उनकी इच्छा थी कि इन अवशेषों को इन रत्नों जैसे आभूषणों के साथ संरक्षित किया जाए, ताकि बुद्ध के अनुयायी उन्हें हमेशा पूज सकें।”

‘मजबूत मंडल, अपराजेय कमल’: सरोजनीनगर मंडल सम्मेलन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने दिया कार्यकर्ताओं को राष्ट्र निर्माण का मंत्र, आतंकी हमले पर जताई चिंता, बोले: देश की आंतरिक एकता ही सबसे बड़ी ताकत

‘मजबूत मंडल, अपराजेय कमल’: सरोजनीनगर मंडल सम्मेलन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने दिया कार्यकर्ताओं को राष्ट्र निर्माण का मंत्र, आतंकी हमले पर जताई चिंता, बोले: देश की आंतरिक एकता ही सबसे बड़ी ताकत
‘मजबूत मंडल, अपराजेय कमल’: सरोजनीनगर मंडल सम्मेलन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने दिया कार्यकर्ताओं को राष्ट्र निर्माण का मंत्र, आतंकी हमले पर जताई चिंता, बोले: देश की आंतरिक एकता ही सबसे बड़ी ताकत
‘मजबूत मंडल, अपराजेय कमल’: सरोजनीनगर मंडल सम्मेलन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने दिया कार्यकर्ताओं को राष्ट्र निर्माण का मंत्र, आतंकी हमले पर जताई चिंता, बोले: देश की आंतरिक एकता ही सबसे बड़ी ताकत
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने कार्यकर्ताओं को राष्ट्र दृष्टि से कार्य करने का आह्वान किया।
  • सरोजनीनगर में SCR बोर्ड सहित कई मेगा प्रोजेक्ट्स की सौगात दी गई।
  • विपक्ष पर जातिवादी राजनीति और दलित विरोधी नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला।
  • जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले पर चिंता जताते हुए आंतरिक एकता की जरूरत बताई।
  • ‘तारा शक्ति केंद्र’ का लोकार्पण कर महिला सशक्तिकरण को दिया नया आयाम।

लखनऊ (सरोजनीनगर), 5 मई 2025: सरोजनीनगर विधानसभा में जनसेवा के लिए समर्पित जनप्रतिनिधि व भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोमवार को ‘सरोजनीनगर मंडल पदाधिकारी सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया। यह कार्यक्रम बंथरा स्थित होटल पारस आर इन में सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सम्मेलन में डॉ. सिंह ने कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर राष्ट्र हित, विकास और विचारधारा को जनता तक पहुँचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में भाजपा लखनऊ जिलाध्यक्ष विजय मौर्या, पूर्व सांसद रीना चौधरी, ब्लॉक प्रमुख सुनील रावत, मंडल अध्यक्ष विवेक राजपूत समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधन दिया।

विकास और राष्ट्र दृष्टि का पाठ पढ़ाते डॉ. राजेश्वर सिंह

अपने संबोधन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता सिर्फ बूथ तक सीमित न रहें, बल्कि प्रदेश और केंद्र सरकार द्वारा कराए जा रहे योजनाबद्ध विकास को समग्र दृष्टिकोण से समझें और जनसामान्य तक पहुँचाएं। उन्होंने कहा:

“अब कार्यकर्ताओं को केवल बूथ नहीं, राष्ट्र दृष्टि से काम करना होगा। विपक्ष के दुष्प्रचार का सामना तथ्यों से करें और योजनाओं की जानकारी देकर जनता को जागरूक करें।”

सरोजनीनगर को दिलाई राष्ट्रीय पहचान: विकास की सौगातों की श्रृंखला

डॉ. सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर में एक के बाद एक बड़ी परियोजनाएं आ रही हैं, जिससे यह क्षेत्र देश के नक्शे पर विकास के केंद्र के रूप में उभर रहा है। प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं:

  • अशोक लीलैंड ईवी प्लांट
  • अमौसी एयरपोर्ट टर्मिनल का विस्तार
  • नेवल वॉर मेमोरियल और राज्य आपदा प्रबंधन भवन
  • देश का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर (वृंदावन योजना)
  • फोरेंसिक इंस्टीट्यूट एवं ऐरोसिटी प्रोजेक्ट

उन्होंने बताया कि सरोजनीनगर में अब तक 1212 सोलर लाइट्स लगाई गई हैं, डिजिटल शिक्षा केंद्र, युवा सशक्तिकरण केंद्र और खेलकूद को बढ़ावा देने वाली ‘सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग’ जैसे कार्यक्रम जारी हैं।

एनसीआर की तर्ज पर एससीआर – राज्य राजधानी क्षेत्र के विकास की नई परिकल्पना

डॉ. सिंह ने खुलासा किया कि उन्होंने वर्ष 2022 में ‘स्टेट कैपिटल रीजन (SCR)’ के गठन का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा था, जिसे अब कैबिनेट से स्वीकृति मिल चुकी है। SCR बोर्ड के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री हैं और इसके माध्यम से लखनऊ समेत आस-पास के क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा रहा है।

पीडीए की राजनीति पर करारा प्रहार: सामान्य वर्ग की उपेक्षा पर उठाए सवाल

विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के उस बयान और मूर्ति पर आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने खुद को बाबा साहेब अंबेडकर के समकक्ष दिखाने का प्रयास किया। डॉ. सिंह ने कहा: “बाबा साहेब ने करोड़ों लोगों को शिक्षा, अधिकार और सम्मान दिया, लेकिन सपा सिर्फ दिखावा करती है। जिनकी सरकार में रामबाई अंबेडकर जिले का नाम बदल दिया गया, वे आज दलितों के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि सपा द्वारा दलितों को मिलने वाले सरकारी टेंडर में आरक्षण समाप्त करना, गेस्ट हाउस कांड जैसे प्रकरण, और माफियाओं को संरक्षण देना इस बात का प्रमाण है कि उनका एजेंडा केवल वोट बैंक है।

देश की आंतरिक एकता ही सबसे बड़ी ताकत – आतंकी हमले पर जताई चिंता

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा:

“अब देश में टालने वाली सरकार नहीं है। मोदी जी मुंहतोड़ जवाब देंगे, और पड़ोसी देश भी यह अच्छी तरह समझ चुके हैं। लेकिन हमें आंतरिक रूप से एकजुट रहना होगा – यही हमारी असली ताकत है।”

भाजपा कार्यकर्ता बनें योजनाओं के संवाहक: जिलाध्यक्ष का संबोधन

भाजपा लखनऊ जिलाध्यक्ष विजय मौर्या ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सभी मंडल पदाधिकारियों को सरोजनीनगर और लखनऊ जनपद में हुई प्रगति की सटीक जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा:

“जनता योजनाओं को तभी सराहेगी जब हम उन्हें सही और तथ्यात्मक जानकारी देंगे। इसके लिए हर कार्यकर्ता को प्रशिक्षित और जागरूक रहना होगा।”

महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल: ‘तारा शक्ति केंद्र’ का लोकार्पण

सम्मेलन के दौरान डॉ. सिंह ने ‘तारा शक्ति केंद्र, बरौली’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने संचालिका वंदना चौरसिया और उनकी टीम को शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा चार प्रमुख स्वयं सहायता समूहों की संचालिकाओं — प्रेमलता यादव, तस्कीन बानो, शशि सिंह और मानसी रावत — को प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सम्मेलन में उपस्थित प्रमुख चेहरे

इस अवसर पर भाजपा जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह, बंथरा नगर पंचायत प्रतिनिधि रंजीत रावत, गंगाराम भारती, राजकुमार सिंह, राजेश सिंह, अशु शुक्ला, रेनू सिंह, पवन मिश्रा, अमित तिवारी, मनोज सिंह, शिवकुमार सिंह ‘चच्चू’, पार्षद के. एन. सिंह, लवकुश रावत, विनोद मौर्या, चंदर सिंह, कृपाशंकर शुक्ला और सुभाष पासी सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में सरोजनीनगर न केवल विकास की दृष्टि से, बल्कि राजनीतिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में भी एक नई भूमिका निभा रहा है। यह सम्मेलन कार्यकर्ताओं के लिए न केवल एक प्रशिक्षण सत्र था, बल्कि एक नई सोच की शुरुआत भ

वृद्धजनों की सेवा को समर्पित सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की संपन्न हुई 41वीं “रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा”, अंदपुर देव से अयोध्या तक गूंजा रामभक्ति का जयघोष

  • तीर्थ, तप और त्याग की मिसाल बनी ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा
  • श्रवण कुमार की परंपरा को युगानुकूल रूप दे रहे हैं विधायक राजेश्वर सिंह

लखनऊ: भारतीय संस्कृति के संरक्षण, आस्था के सम्मान और वृद्धजनों की सेवा को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी मानने वाले सरोजनीनगर के लोकप्रिय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की आत्मीय पहल ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ निरंतर जनसेवा और संस्कार के नए प्रतिमान स्थापित कर रही है। शनिवार को इसकी 41वीं निःशुल्क बस सेवा ग्राम अंदपुर देव से अयोध्या के लिए रवाना हुई, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं को रामलला के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

यह यात्रा मात्र एक तीर्थ नहीं, बल्कि संस्कार और सेवा का यज्ञ है, जिसे डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने संकल्प से संभव बनाया है। बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने हेतु निःशुल्क तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत अब तक हजारों वरिष्ठ नागरिकों, माताओं और बहनों को अयोध्या धाम लाया ले जाया जा चुका है।

41वीं यात्रा के शुभारंभ पर विधायक की टीम के सदस्यों ने श्रद्धालुओं को विधिपूर्वक पटका पहनाकर स्वागत किया। हनुमान चालीसा के पाठ और भजन-कीर्तन के बीच जब रामरथ ने अंदपुर देव से अयोध्या की ओर प्रस्थान किया, तब श्रद्धा का भाव पूरे वातावरण में व्याप्त हो गया। यात्रा के दौरान सेवा में तैनात वालंटियर्स ने हर वृद्धजन की व्यक्तिगत ज़रूरतों का पूरा ध्यान रखा, चाहे वह भोजन की व्यवस्था हो या स्वास्थ्य की देखभाल। अयोध्या पहुंचकर श्रद्धालुओं ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, हनुमान गढ़ी, सरयू तट सहित अनेक धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। मंदिर तक पहुंचने के लिए बैटरी रिक्शा की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे बुजुर्गों को कोई कष्ट न हो। वापसी में श्रीमद्भगवद्गीता की प्रति देकर इस यात्रा को एक आध्यात्मिक पूर्णता प्रदान की गई।

भावुक श्रद्धालुओं ने इस पुनीत अवसर को जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह यात्रा एक सपने के सच होने जैसा था, एक ऐसा अनुभव जो शायद उनके जीवन में पहली बार मिला। इस विषय में डॉ. राजेश्वर सिंह का मानना है कि “वृद्धजनों की सेवा करना हमारे संस्कारों की आत्मा है। उनकी तीर्थयात्रा के सपनों को साकार करना मेरा सौभाग्य है। उनका आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।