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भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर सऊदी प्रिंस सलमान का पहला बयान, कहा- ‘उम्मीद है कि…’

भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों तक चली सैन्य झड़प के बाद फिलहाल शांति का माहौल है। आपको बता दें कि भारत के सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाकर कुछ ही देर में पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। इसके बाद पाकिस्तान के अनुरोध पर भारत ने सीजफायर की बात मान ली। दुनियाभर के देशों ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर पर खुशी जाहिर की है। वहीं, अब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी पहली बार भारत-पाक सीजफायर पर बयान जारी किया है।

क्या बोले प्रिंस सलमान?

सऊदी अरब की सरकारी एजेंसी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, रियाद में खाड़ी सहयोग परिषद की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य नेताओं को संबोधित करते हुए क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के हवाले से कहा- ‘‘हम पाकिस्तान और भारत के बीच संघर्ष विराम सहमति का स्वागत करते हैं। उम्मीद uw कि इससे दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और शांति बहाल करने में मदद मिलेगी।’’

कैसे हुआ सीजफायर?

बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों को मार डाला था। भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। इसके बाद से पाकिस्तान ने भारतके जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात तक लगातार मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट से हमला किया है। हालांकि, भारतीय सेना ने एयर डिफेंस की मदद से पाकिस्तान के सभी प्रयासों को विफल कर दिया है। इसके बाद भारत ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी वायुसेना के 11 एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड और कंट्रोल सेंटर और रडार स्थलों समेत कई प्रमुख पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया था। भारत के डर से पाकिस्तान घुटनों पर आ गया और शांति की अपील करने लगा जिसके बाद दोनों देशों के बीच 10 मई को सीजफायर हुआ।

‘अनुपमा’ को कुत्ते ने काटा था? रुपाली गांगुली ने खुद सामने रखी सच्चाई।

टीवी की मशहूर एक्ट्रेस रुपाली गांगुली घर-घर में पहचानी जाती हैं। इन्हें सीरियल ‘अनुपमा’ में उनकी दमदार भूमिका के लिए जाना जाता है। हाल ही में एक अफवाह को लेकर सोशल मीडिया पर भावुक और नाराज नजर आईं। कुछ ऑनलाइन रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्हें अनुपमा के सेट पर एक कुत्ते ने काट लिया है। इस खबर के फैलते ही उन्हें लगातार कॉल्स और मैसेज आने लगे, जिससे परेशान होकर उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो साझा किया और झूठी खबरों पर अपनी नाराजगी जाहिर की। एक्ट्रेस ने इस वीडियो में साफ किया कि उन्हें किसी भी कुत्ते ने नहीं काटा है और उनके बारे में झूठी अफवाह फैलाई जा रही है।

रुपाली ने लगाई फेक खबर फैलाने वालों को लताड़

रुपाली कहती हैं, ‘कुत्ते ने नहीं काटा, ये अब तक की सबसे भयानक अफवाह है।’ वीडियो की शुरुआत में रुपाली ने साफ कहा कि यह पूरी तरह से झूठी और डरावनी खबर है कि उन्हें किसी कुत्ते ने काटा है। उन्होंने अपने सभी प्यारे ‘बच्चों’ राधा, रिमझिम, घुंघरू, गॉगल, कॉफी, जादू, डिस्को, डायना, लंबूजी और मदन की झलकियां वीडियो में दिखाईं। ये सभी अनुपमा के सेट पर पालतू डॉग्स हैं। उन्होंने कहा कि वह न सिर्फ इन जानवरों का ध्यान रखती हैं बल्कि बंदरों को भी खुद हाथ से खाना खिलाती हैं। रूपाली ने वीडियो में भावुक होते हुए कहा, ‘कम से कम इतनी कर्टसी तो होना चाहिए कि लिखने से पहले पूछ लिया जाए।’ उन्होंने बिना पुष्टि के उनके और उनके पालतू जानवरों के बारे में झूठी खबरें फैलाने वालों को आड़े हाथों लिया और कहा कि बेजुबानों को तो बख्श दो।

बच्चों की तरह रखती हैं सेट के कुत्तों का ध्यान

रुपाली ने आगे कहा, ‘असल में कोई भी जानवर आपको तब तक नहीं काटेगा जब तक आप उसे नुकसान नहीं पहुंचाते। ये सारे आवारा नहीं, मेरे बच्चे हैं। आप उनके बारे में लिख रहे हैं, जो अपने लिए भी आवाज नहीं उठा सकते।’ रुपाली गांगुली ने बताया कि वह पांच साल की उम्र से ही सड़कों पर रहने वाले जानवरों की मदद कर रही हैं और कभी ऐसी किसी घटना का सामना नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वो आम तौर पर अपने बारे में लिखी बातों पर प्रतिक्रिया नहीं देतीं, लेकिन जब बात मासूम जानवरों की हो तो वह चुप नहीं रह सकतीं।

फैंस ने जताया समर्थन

वीडियो में रूपाली का भावुक और गुस्से से भरा अंदाज़ देखने के बाद फैंस ने उनका जमकर समर्थन किया। एक यूजर ने लिखा, ‘मैम, आप पर गर्व है, आपने हमारे प्यारे बच्चों के लिए बहुत अच्छा बोला।’ एक अन्य ने लिखा, ‘मीडिया आजकल अपनी मर्जी से कहानियां बनाता है, लेकिन आपने जो कहा वह बहुत जरूरी था।’ इस तरह के कई और कमेंट भी उनके पोस्ट पर देखने को मिल रहे हैं।

भारतीय सेना के एक अफसर ने नाना पाटेकर की फिल्म में अपनी क्षमता दिखाई और राजनीति में भी उनकी खूब प्रशंसा हुई।

साल 1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्रहार’ एक दमदार फिल्म थी, जिसमें भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखने को मिला। इसमें नाना पाटेकर, माधुरी दीक्षित और डिंपल कपाड़िया ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। इस फिल्म में एक्टिंग के साथ इसका निर्देशन भी नाना पाटेकर ने ही किया। इतना ही नहीं उन्होंने फिल्म की कहानी भी उन्होंने खुद ही लिखी। फिल्म में वह एक आर्मी ऑफिसर मेजर चौहान की भूमिका में नजर आए थे। ये किरदार एक ऐसे अधिकारी का था जो देश की सेवा करने के बाद समाज में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलता है। यह फिल्म सिर्फ एक भारतीय सेना की कहानी नहीं थी, बल्कि इसमें गहरे सामाजिक मुद्दों को उठाया गया था। यह भावनात्मक स्तर पर भी दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रही। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में एक अहम भूमिका में पूर्व सेना प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री भी नजर आए थे। ये कोई और नहीं बल्कि जनरल वीके सिंह थे

क्या था जनरल वीके सिंह का किरदार

हालांकि जनरल वीके सिंह पूरी फिल्म में नहीं दिखते, लेकिन एक महत्वपूर्ण दृश्य में उनकी मौजूदगी रही। इस सीन में सेना के अधिकारी एक टेबल मीटिंग के दौरान आतंकियों की योजना पर चर्चा कर रहे होते हैं। उस दृश्य में नाना पाटेकर और कर्नल वीके सिंह अपने वरिष्ठ अधिकारी से दिशा-निर्देश लेते नजर आते हैं। सीन के दौरान अधिकारी नाना पाटेकर को एक खास मिशन के लिए चुनता है और फिर वीके सिंह की ओर इशारा करते हुए कहता है, ‘हमें उस जगह की कुछ स्लाइड्स मिली हैं। कर्नल वीके सिंह आपको एक्सप्लेन करेंगे।’

नाना पाटेकर का दिया था पूरा साथ

यह सीन एक हाईजैकिंग की घटना को दर्शाता है, जिसमें आतंकवादी बच्चों को बंधक बनाकर हर घंटे एक बच्चे को मारने की धमकी देते हैं और इसके एवज में सरकार से मांगें रखते हैं। इस संकट से निपटने के लिए नाना पाटेकर और वीके सिंह की जोड़ी को चुना जाता है। फिल्म में जनरल वीके सिंह का नाम वीके सिंह ही रहा है। उनके ज्यादा डायलॉग नहीं है, लेकिन वो इस मिशन को नाना पाटेकर के साथ अंजाम देते नजर आते हैं। ‘प्रहार’ में नजर आए वीके सिंह के यंग सेना के अफसर थे। फिल्म में भले ही उनका रोल छोटा था, लेकिन वो पूरी तरह एक मैच्योर एक्टर लगे।

फिल्म में असली आर्मी अफसरों की भागीदारी

जब जनरल वीके सिंह से इस फिल्म में उनके अभिनय को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बताया था कि फिल्म के निर्माताओं को कुछ दृश्यों में वास्तविक सेना अधिकारियों की जरूरत थी, इसलिए उन्हें शामिल किया गया। नाना पाटेकर ने भी एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि फिल्म की प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए उन्होंने कई सीन्स में असली आर्मी अफसरों की मदद ली और इसी दौरान उनकी मुलाकात वीके सिंह से हुई और उनके साथ काम करने का मौका भी मिला। ‘प्रहार’ आज भी उन फिल्मों में गिनी जाती है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।

ब्रिटिश लेखक ने ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ करते हुए कहा कि पाकिस्तान चीन का प्रॉक्सी है।

पहलगाम आतंकवादी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर ब्रिटिश राजनीतिक टिप्पणीकार और लेखक डेविड वेंस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पाकिस्तान को सपोर्ट करने के लिए चीन की आलोचना की। उन्होंने बीजिंग पर आरोप लगाते हुए कहा, “चीन एशिया क्षेत्र में पाकिस्तान को प्रॉक्सी की तरह इस्तेमाल करता है। इसलिए चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत को सही समर्थन दिया जाए तो एशिया क्षेत्र में भारत चीन के खिलाफ पश्चिम के लिए एक मजबूत दीवार की तरह काम कर सकता है। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘चीन पाकिस्तान को प्रॉक्सी की तरह इस्तेमाल करता है, इसलिए उसपर भरोसा नहीं किया जा सकता। मुझे लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप को यह बात समझनी चाहिए।’

डेविड वेंस ने भारत को किया सपोर्ट

डेविड वेंस ने कहा, ‘यह और भी बेहतर होगा कि अगर डोनाल्ड ट्रंप इस बात को समझ जाएं कि अगर भारत को बेहतर सपोर्ट दिया गया तो भारत पश्चिम देशों के लिए चीन के खिलाफ एक मजबूत दीवार की तरह काम करेगा। पाकिस्तान के खिलाफ हम भारत को जितना समर्थन करेंगे, उतना ही बेहतर होगा, क्योंकि चीन का पाकिस्तान का काफी इंट्रेस्ट है। जो लोग भारत के हित के बारे में नहीं सोच रहे हैं, मैं मानता हूं वो पश्चिम के बारे में भी नहीं सोच रहे हैं।’ उन्होंने पाकिस्तान को सपोर्ट करने के लिए तुर्की की भी आलोचना की। उन्होंने अंकारा को समस्या खड़ा करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पक्ष में तुर्की द्वारा दिए जाने वाले एंटी इंडिया बयान की आलोचना की जानी चाहिए।

डेविड वेंस बोले- तुर्की और चीन में अंतर नहीं

वेंस ने कहा कि मुझे कोई आश्चर्य नहीं है। चीन भारत के लिए एक समस्या है और जैसा मैंने कहा कि पाकिस्तान के असफल देश है। मुझे लगता है कि तुर्की भी एक विवादास्पद देश है। तो इन सबके बाद मुझे कोई हैरानी नहीं हुई। एर्दोगान और चीन के बीच मैं ज्यादा अंतर नहीं कर पाता। वेंस ने इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर के लिए भी भारत को मजबूती के साथ समर्थन दिया। उन्होंने कहा यह पाकिस्तान लंबे समय से इसका इंताजर था, क्योंकि यह फैसला लेना जरूरी था। उन्होंने कहा कि यह होना जरूरी था और ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा है। पाकिस्तान एक असफल और आतंकवादी देश है। ऐसे में यह जरूरी है कि भारत द्वारा ऐसा कदम उठाया गया।

हिमालय की पुकार और डॉ. राजेश्वर सिंह की चेतावनी – अब नहीं चेते तो बर्फ से बाढ़ तक बर्बादी तय, ग्लेशियरों का विलुप्त होना, सभ्यता के लिए अंतिम अलार्म

हिमालय की पुकार और डॉ. राजेश्वर सिंह की चेतावनी – अब नहीं चेते तो बर्फ से बाढ़ तक बर्बादी तय, ग्लेशियरों का विलुप्त होना, सभ्यता के लिए अंतिम अलार्महिमालय की पुकार और डॉ. राजेश्वर सिंह की चेतावनी – अब नहीं चेते तो बर्फ से बाढ़ तक बर्बादी तय, ग्लेशियरों का विलुप्त होना, सभ्यता के लिए अंतिम अलार्म
हिमालय की पुकार और डॉ. राजेश्वर सिंह की चेतावनी – अब नहीं चेते तो बर्फ से बाढ़ तक बर्बादी तय, ग्लेशियरों का विलुप्त होना, सभ्यता के लिए अंतिम अलार्म
हिमालय की पुकार और डॉ. राजेश्वर सिंह की चेतावनी – अब नहीं चेते तो बर्फ से बाढ़ तक बर्बादी तय, ग्लेशियरों का विलुप्त होना, सभ्यता के लिए अंतिम अलार्महिमालय की पुकार और डॉ. राजेश्वर सिंह की चेतावनी – अब नहीं चेते तो बर्फ से बाढ़ तक बर्बादी तय, ग्लेशियरों का विलुप्त होना, सभ्यता के लिए अंतिम अलार्म
  • विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने ‘याला ग्लेशियर’ की समाप्ति को हिमालयी पर्यावरण संकट का प्रतीक बताया।
  • उन्होंने 54,000 ग्लेशियरों के संकट और 2 अरब जनसंख्या पर मंडराते खतरे को उजागर किया।
  • हिमालयी क्षेत्र में 65% तक बढ़ा ग्लेशियर पिघलाव, लेकिन केवल 7 ग्लेशियरों की हो रही निगरानी – डॉ. सिंह ने वैज्ञानिक लापरवाही पर चिंता जताई।
  • 426 ppm CO₂ स्तर को ‘बर्फ में अंतिम चेतावनी’ बताते हुए उन्होंने जलवायु न्याय और ठोस वैश्विक कार्रवाई की मांग की।
  • डॉ. सिंह ने 11 सूत्रीय कार्ययोजना प्रस्तुत कर कहा – अब नहीं चेते तो अगला नंबर भारत का हो सकता है।

लखनऊ: सरोजनीनगर से विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने एक भावप्रवण और चिंताजनक वक्तव्य जारी कर जलवायु संकट को लेकर जनमानस और नीति-निर्माताओं को आगाह किया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर साझा अपने संदेश में हिमालयी ग्लेशियरों के तीव्र पिघलाव को न केवल एक पारिस्थितिक संकट, बल्कि सभ्यता के लिए चेतावनी बताया।

नेपाल स्थित याला ग्लेशियर को एशिया का पहला ‘मृत’ घोषित ग्लेशियर बताते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल बर्फ का अंत नहीं, बल्कि आने वाले समय की भयावह झलक है। याला ग्लेशियर का आकार 1970 के दशक से अब तक 66% घट चुका है और यह 784 मीटर पीछे हट चुका है। यह स्थिति दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का विषय नहीं, वर्तमान का संकट बन चुका है।

हिमालय के आंसू: एक क्षेत्रीय नहीं, वैश्विक संकट
हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र, जहां 54,000 से अधिक ग्लेशियर हैं, आज असहनीय तापवृद्धि से जूझ रहा है। पिछले दो दशकों में यहां पिघलाव की गति 65% तक बढ़ गई है। इसके बावजूद, 3,500 किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में हर वर्ष केवल 7 ग्लेशियरों की निगरानी हो रही है, यह वैज्ञानिक प्रयासों की भयावह कमी को दर्शाता है।

हिमालय केवल भारत का नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की 2 अरब से अधिक आबादी का जल स्रोत है। गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु जैसी 10 प्रमुख नदियाँ इन्हीं ग्लेशियरों पर निर्भर हैं। ग्लेशियरों का लुप्त होना सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा उत्पादन और पारिस्थितिक तंत्र को असंतुलित कर देगा।

एक मौन पत्थर की साक्षी:
याला ग्लेशियर पर हाल ही में स्थापित स्मृति-शिला पर दर्ज है – 426 पीपीएम CO₂ (मई 2025), जो मानव इतिहास की सर्वाधिक चिंताजनक वायुमंडलीय सांद्रता में से एक है। डॉ. सिंह ने इसे “बर्फ में उकेरी अंतिम चेतावनी” बताते हुए कहा, “यह पत्थर केवल शोक का प्रतीक नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक उग्र संदेश है।”

बर्फ से बाढ़ तक – एक विनाशकारी चक्र
हिमालयी क्षेत्र में 1990 के दशक के बाद से ग्लेशियर झीलों की संख्या में 50% की वृद्धि दर्ज हुई है। इसके परिणामस्वरूप ग्लेशियर झील विस्फोट (GLOF) की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे भूटान (2017) और सिक्किम (2023) जैसे क्षेत्रों में जान-माल की भारी क्षति हुई।

भारत की पर्यावरणीय असुरक्षा:
भारत जलवायु जोखिमों के लिहाज़ से शीर्ष 10 देशों में शामिल है। विशेष रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे हिमालयी राज्य, जलवायु परिवर्तन की अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं। IPCC (अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल) ने स्पष्ट किया है कि यदि तापमान वृद्धि 1.5°C तक भी सीमित कर दी जाए, तब भी ग्लेशियरों की हानि को केवल धीमा किया जा सकता है, रोका नहीं जा सकता।

ग्लेशियरों के अंतिम संस्कार – एक मौन विद्रोह
2019 में आइसलैंड के OK ग्लेशियर, स्विट्ज़रलैंड के Pizol और Basòdino ग्लेशियर, तथा मैक्सिको के Ayoloco ग्लेशियर के लिए आयोजित पर्यावरणीय शोक सभाएं यह दर्शाती हैं कि अब प्रतीकों से आगे जाकर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

डॉ. राजेश्वर सिंह की 11 सूत्रीय कार्ययोजना:

  1. नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता दी जाए।
  2. वनों की रक्षा और वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाया जाए।
  3. उद्योगों, भवनों और यातायात में ऊर्जा दक्षता बढ़ाई जाए।
  4. सतत कृषि को बढ़ावा दिया जाए।
  5. कचरे के प्रबंधन में तीन सिद्धांत अपनाए जाएं: कम करो, पुनः उपयोग करो, पुनर्चक्रण करो
  6. युवाओं व समुदायों को जलवायु साक्षर बनाया जाए।
  7. भारत में ग्लेशियरों की वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत किया जाए
  8. GLOF जैसी आपदाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित की जाए।
  9. वैश्विक जलवायु संधियों में सक्रिय भागीदारी हो।
  10. जल संरक्षण को नीति में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
  11. 11. नीति निर्माण को प्रकृति केंद्रित बनाया जाए।

“हमें पता है संकट क्या है। हमें पता है समाधान क्या है। फिर भी यदि आज हम चुप हैं, तो आने वाली पीढ़ियों से विश्वासघात कर रहे हैं,” डॉ. सिंह ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों का उत्तरदायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे प्रकृति की पुकार को सुने, सक्रिय बनें और परिवर्तन के वाहक बनें।