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डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाया बीड़ा : हर पात्र को मिले योजनाओं का लाभ, हर योजना पहुँचे अंतिम छोर तक, विकास कार्यशाला में बोले सरोजनीनगर विधायक- जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ही संभव है समग्र सशक्तिकरण

डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाया बीड़ा : हर पात्र को मिले योजनाओं का लाभ, हर योजना पहुँचे अंतिम छोर तक, विकास कार्यशाला में बोले सरोजनीनगर विधायक- जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ही संभव है समग्र सशक्तिकरण
डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाया बीड़ा : हर पात्र को मिले योजनाओं का लाभ, हर योजना पहुँचे अंतिम छोर तक, विकास कार्यशाला में बोले सरोजनीनगर विधायक- जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ही संभव है समग्र सशक्तिकरण
डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाया बीड़ा : हर पात्र को मिले योजनाओं का लाभ, हर योजना पहुँचे अंतिम छोर तक, विकास कार्यशाला में बोले सरोजनीनगर विधायक- जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ही संभव है समग्र सशक्तिकरण
  • सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर विकास भवन में जनकल्याणकारी कार्यशाला आयोजित।
  • विभिन्न विभागों की योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक पहुँचाने पर हुई व्यापक समीक्षा।
  • एक दर्जन से अधिक विभागों की प्रमुख योजनाओं पर हुआ सीधा संवाद व कार्ययोजना निर्धारण।
  • डॉ. सिंह ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को बताया क्रियान्वयन की सबसे अहम कड़ी।
  • कार्यशाला में मलिहाबाद विधायक जय देवी, CDO लखनऊ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी हुए शामिल।

लखनऊ: “मातृशक्ति, किसान, मज़दूर या नौजवान—हर वर्ग का समग्र सशक्तिकरण ही योगी सरकार की असली पहचान है।” इसी लक्ष्य को साकार करने के लिए बुधवार, 14 मई 2025 को विकास भवन, इन्दिरा नगर, लखनऊ में एक विशेष जनकल्याणकारी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला विगत 5 मई को वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक की अगली कड़ी थी, जिसमें सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जिले के समस्त जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सहभागिता से एक रणनीतिक कार्यशाला आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था।

विधायक की पहल पर पहली बार हुआ ऐसा आयोजन

यह पहली बार था जब किसी जनप्रतिनिधि द्वारा जिलास्तर पर इतने व्यापक दायरे में योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया गया। कार्यशाला का उद्देश्य स्पष्ट था—जनहितकारी योजनाएं सिर्फ कागज़ों में नहीं, जमीनी स्तर तक पहुँचें, और हर पात्र को उनका अधिकार मिले।

इस 3 घंटे की गहन कार्यशाला में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ उनके प्रभावशाली क्रियान्वयन के लिए ठोस रणनीति भी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा,

“यदि हम हर जनप्रतिनिधि को उसके क्षेत्र के हर पात्र व्यक्ति की सूची दें और उसे यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दें कि कोई वंचित न रहे, तो समग्र विकास संभव है।”

कई विभागों की योजनाओं पर हुआ गहन मंथन

कार्यशाला में करीब एक दर्जन विभागों से जुड़ी योजनाओं की बारीकी से समीक्षा की गई और यह सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई कि योजनाएं आवेदन से लेकर लाभ वितरण तक पूरी पारदर्शिता के साथ क्रियान्वित हों।
प्रमुख योजनाएं जिन पर चर्चा हुई, उनमें शामिल रहीं:

  • कृषि विभाग: पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम कुसुम योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि उत्पादक संगठन
  • सहकारिता विभाग: अल्पकालिक कृषि ऋण वितरण, उर्वरक वितरण योजना
  • समाज कल्याण विभाग: वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन, दिव्यांगजन सशक्तिकरण
  • श्रम विभाग: श्रमिकों के पंजीकरण और बीमा
  • रोजगार विभाग: स्वरोजगार योजनाएं, उद्यमिता विकास योजनाएं

विभागीय अधिकारियों से सीधी संवाद प्रक्रिया

कार्यशाला की विशेषता यह रही कि इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजना को विस्तार से रखा। इसके बाद विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने हर योजना के लिए जवाबदेही तय करने, समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण और निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

जनप्रतिनिधियों की सशक्त भूमिका पर विशेष बल

कार्यशाला में डॉ. राजेश्वर सिंह ने जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्र के हर गरीब, किसान, मज़दूर और जरूरतमंद को योजनाओं से जोड़ने का बीड़ा उठाएं। उन्होंने कहा,

“जब तक योजनाओं के लाभार्थी का चेहरा हमें ज्ञात नहीं होगा, तब तक हमारी ज़िम्मेदारी अधूरी है। शासन की हर योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे—यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

मलिहाबाद विधायक जय देवी सहित कई प्रतिनिधि हुए शामिल

इस कार्यशाला में मलिहाबाद विधायक जय देवी कौशल, मुख्य विकास अधिकारी लखनऊ, डॉ. राजेश्वर सिंह की टीम, अन्य विधायकों के प्रतिनिधिगण, तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित सुशासन की दिशा में मील का पत्थर बताया।

“सबका साथ, सबका विकास” को मिला नया आयाम

यह कार्यशाला सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि यह विकास और सुशासन के समन्वित मॉडल की मिसाल बनी। शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साझा प्रयास से “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” का मंत्र एक बार फिर जमीन पर उतरता दिखाई दिया।

वेपिंग भी स्मोकिंग जितना ही हानिकारक, हार्ट डिजीज का खतरा हो सकता है 4 गुना बढ़ना।

आप सभी ने वेपिंग के बारे में तो सुना ही होता। यह बैटरी से चलने वाले डिवाइस से निकलने वाले धुएं को सांस में लेने का प्रोसेस है। इसको वेप पेन या ई सिगरेट के नाम से भी जाना जाता है। यह सिगरेट पीने की तरह ही होता है। हालांकि इसमें तंबाकू नहीं जलाई जाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में युवा आबादी के बीच वेपिंग का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है। युवा अन्य तंबाकू प्रोडक्ट की तुलना में ई-सिगरेट या वेप्स का अधिक उपयोग करते हैं। वहीं कई लोग इसे स्मोकिंग से ज्यादा सेफ मानते हैं। लेकिन वेपिंग से भी व्यक्ति को ऑर्गन डैमेज, सांस लेने में समस्या और लत समेत कई गंभीर नुकसान होते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वेपिंग से होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं।

वेपिंग के नुकसान

वेपिंक को सिगरेट पीने की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है। लेकिन वेपिंग से कई तरह की सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

हार्ट को नुकसान

रेगुलर सिगरेट और ई-सिगरेट में निकोटीन प्राइमरी एजेंट पाया जाता है। जोकि अत्यधिक नशे की लत होती है। निकोटीन एक विषैला पदार्थ है। यह आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ाने का काम करता है। साथ ही एड्रेनालाईन को बढ़ाता है। जिससे हृदय की गति बढ़ जाती है और हार्ट अटैक पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

वेपिंग की लत

एक रिपोर्ट के मुताबिक ई-सिगरेट और रेगुलर सिगरेट दोनों में निकोटीन पाया जाता है। यह हेरोइन और कोकीन की तरह ही लत लगाने वाला हो सकता है।

ऑर्गन डैमेज

ई-सिगरेट या वेपिंग के इस्तेमाल से ऑर्गन डैमेज का खतरा भी हो सकता है। क्योंकि ई-लिक्विड में मौजूद निकोटीन और अन्य पदार्थ आपके फेफड़ों के अलावा दिल और मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इसमें मौजूद निकोटीन ब्रेन के विकास को भी नुकसान पहुंचा सकता है। यह ब्लड प्रेशर को भी बढ़ा सकता है। साथ ही यह आर्टरीज को संकीर्ण कर सकता है।

कैंसर

बता दें कि ई-लिक्विड में मौजूद तत्व कैंसर की वजह बनते हैं।

लंग डिजीज

वहीं कई अध्ययनों से पता चलता है कि ई-सिरगेट के इस्तेमाल से फेफड़ों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। इसके इस्तेमाल से अस्थमा का खतरा भी बढ़ सकता है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025: दो मार्गों से होती है यह पवित्र यात्रा, 29 जून से होगी शुरू

हिंदू धर्म में सनातल काल से कैलाश मानसरोवर की यात्रा एक पवित्र यात्रा मानी जाती रही है। जब भी यह यात्रा शुरू होती है, तो इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस साल भी 30 जून से कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू होने जा रही है। वहीं इससे पहले कोडिव 19 महामारी और भारत-चीन सीमा पर तनाव के कारण यह यात्रा बंद हो गई थी। लेकिन अब भारत सरकार द्वारा इस यात्रा को मंजूरी दे दी गई है। इस बार 30 जून से 25 अगस्त तक कैलाश मानसरोवर की यात्रा होगी। ऐसे में श्रद्धालु यात्रा का रजिस्ट्रेशन करवाने से पहले इस यात्रा का रूट जरूर चेक करते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कैलाश मानसरोवर की यात्रा रूट के बारे में बताने जा रहे हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा रूट

अगर आप भी कैलाश मानसरोवर की यात्रा में शामिल होने का प्लान बना रहे हैं। तो बता दें कि भारत सरकार द्वारा इस यात्रा के दो रूट्स तय किए गए हैं। ऐसे में इस यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री इस पवित्र और प्रसिद्ध यात्रा को पूरा कर सकते हैं।

कैलाश मानसरोवर की यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और दूसरा सिक्किम के नाथुला दर्रे से होती है। इन दो रूट्स से आप भी इस यात्रा को पूरा कर सकते हैं।

लिपुलेख दर्रा

अगर आप उत्तराखंड से कैलाश मनसरोवर की यात्रा करना चाहते हैं। तो इस यात्रा की शुरूआत दिल्ली से होगी। दिल्ली में मेडिकल जांच कराने के बाद आपको अल्मोड़ा होते हुए धारचूला, बूढ़ी, गुंजी और लिपुलेख दर्रा जैसे पड़ाव को पार करते हुए दारचेन जाना होगा। फिर यहां से आप कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील का दर्शन कर पाएंगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लिपुलेख दर्रे से कैलाश मनसरोवर की यात्रा में करीब 24 से 25 दिन लगते हैं। वहीं इस यात्रा को शुरू करने से पहले दिल्ली में स्वास्थ्य की जांच की जाती है। वहीं करीब इसमें 4-5 दिन लगते हैं। यात्रा के हर पड़ाव पर 1-2 दिन स्टे करना होता है। इस मार्ग से सिर्फ 1000 यात्रियों को जाने की अनुमति मिलती है।

नाथुला दर्रा

लिपुलेख दर्रे के साथ ही आप सिक्किम के नाथुला दर्रे से कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर सकते हैं। इस रूट से यात्रा को पूरा करने में करीब 22 से 23 दिन का समय लगता है। इस रूट से यात्रा की शुरूआत दिल्ली से होती है।

आप दिल्ली में 4-5 दिनों तक मेडिकल चेकअप के बाद सिक्किम के गंगटोक जाना पड़ता है। गंगटोक से शेरथांग, लाजी और कंगमा होते हुए आपको दारचेन पहुंचना होगा। दारचेन में 1 रात स्टे करने के बाद अगले दिन कैलाश पर्वत और फिर मानसरोवर झील के दर्शन करें। फिर आपको वापस भी इसी रूट से दिल्ली आना होता है। हालांकि इस रूट से करीब 750 तीर्थ यात्रियों को जाने की परमिशन है।

जेलेंस्की के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से की दो घंटे लंबी बातचीत, क्या अब रुकेगा युद्ध?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के बीच सोमवार को  फ़ोन पर बातचीत 2 घंटे से ज़्यादा देर तक बातचीत हुई। रूस और युक्रेन के बीच जारी जंग के बीच व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के साथ सीधी बातचीत फिर से शुरू करने के ट्रम्प के प्रयासों के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। बातचीत में पुतिन ने कहा कि रूस युद्ध विराम सहित स्थायी शांति की दिशा में आगे के कदमों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। इससे पहले ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी बात की थी।

युद्ध विराम को लेकर हुई बात

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ दो घंटे से अधिक समय तक फोन पर बात की और इस बातचीत में इस्तांबुल में यूक्रेन के साथ संपर्कों की बहाली से संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष आम तौर पर सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं । रूस और यूक्रेन को ऐसे समझौते खोजने होंगे जो दोनों पक्षों के लिए उपयुक्त हों, समझौते होने पर यूक्रेन के साथ युद्धविराम संभव है। मास्को भविष्य की शांति वार्ता के लिए ज्ञापन पर कीव के साथ काम करने के लिए तैयार है, संकट के मूल कारणों को समाप्त किया जाना चाहिए।

ट्रंप ने जेलेंस्की से भी की थी बात

जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से बात करने से पहले कथित तौर पर ज़ेलेंस्की से बात की थी और बातचीत के बीच ट्रंप ने ज़ेलेंस्की से पूछा कि उन्हें पुतिन के साथ क्या चर्चा करनी चाहिए। ज़ेलेंस्की ने जवाब दिया कि ट्रंप को पुतिन पर 30 दिन के संघर्ष विराम को स्वीकार करने के लिए दबाव डालना चाहिए, भविष्य में पुतिन-ज़ेलेंस्की की बैठक के लिए सहमत होना चाहिए जिसमें ट्रंप शामिल हो सकते हैं, और दोहराना चाहिए कि अमेरिका कीव के इनपुट के बिना यूक्रेन के बारे में कोई निर्णय नहीं लेगा।

Indian Students Jobs: भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में रोजगार के अवसर घटे, खत्म हुआ विदेशों में पढ़ाई का ‘सुनहरा दौर’

अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में अब भारतीयों के लिए राह आसान नहीं होने वाली है। हाल के वर्षों में इन देशों में विदेशी छात्रों, विशेषकर भारतीय छात्रों के लिए नौकरी के अवसरों में भारी गिरावट देखी गई है। यहां नौकरी पाना अब आसान भी नहीं है, खासकर उन भारतीय छात्रों के लिए जो बेहतर अवसरों की तलाश में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और यूके जैसे देशों में जाने की योजना बना रहे हैं। गुरुग्राम स्थित उद्यमी राजेश साहनी, जीएसएफ एक्सेलरेटर के संस्थापक और सीईओ ने चेतावनी दी है कि अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए अब इन देशों में नौकरी के लिहाज से ‘हनीमून’ अवधि समाप्त हो रही है।

‘हनीमून खत्म हो गया है’

राजेश साहनी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में लिखा “अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए यूएसए, कनाडा और यूके में कोई नौकरी नहीं है। हनीमून खत्म हो गया है, माता-पिता को महंगी शिक्षा पर करोड़ों खर्च करने से पहले दो बार सोचना चाहिए।”

राजेश साहनी ने क्या कहा?

राजेश साहनी हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम) के पूर्व छात्र हैं और इनके पास लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से फेलोशिप है। उन्होंने कहा कि विदेश में कॉलेज से स्नातक करने और हाई सैलरी वाली नौकरी पाने का पुराना तरीका अब काम नहीं कर रहा है। साहनी ने कहा, “इंजीनियरिंग के छात्रों, खासकर IITians के पास एक आसान तरीका था, अमेरिका में मास्टर्स करें और $200K की शुरुआती तकनीकी नौकरी पाएं। यह तरीका अब काम नहीं करता है।”

लोगों ने दी प्रतिक्रिया

राजेश साहनी की सोशल मीडिया पोस्ट ने फॉलोअर्स के बीच बहस छेड़ दी, जिसमें एक वर्ग ने दावा किया कि साहनी सही हैं, जबकि अन्य ने कहा कि अगर आप प्रतिभाशाली हैं तो पर्याप्त अवसर हैं। एक ने कहा कि अब खेल साख से हटकर योग्यता पर आ गया है। जिन लोगों के पास कौशल है वो अब भी रास्ता खोज लेंगे।

इस वजह से छिड़ी बहस

यह घटनाक्रम अमेरिका स्थित टेक दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की ओर से वैश्विक स्तर पर लगभग 6,000 कर्मचारियों या अपने कार्यबल के 3 प्रतिशत को नौकरी से निकालने की पृष्ठभूमि में आया है, जिनमें से कई भारतीय पेशेवर हैं। इमिग्रेशन, एच-1बी वीजा और टैरिफ पर डोनाल्ड ट्रंप की हालिया कार्रवाई को ध्यान में रखें, तो भारतीय छात्रों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

यह भी जानें

देखने वाली बात यह भी है कि, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने हाल के वर्षों में अपने वीजा और प्रवास नीतियों को अधिक सख्त किया है। पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की अवधि में कटौती, H-1B और अन्य कार्य वीजा के नियमों में बदलाव और आव्रजन की सीमाओं ने विदेशी छात्रों के लिए नौकरी पाना कठिन बना दिया है। वैश्विक आर्थिक मंदी और बढ़ती बेरोजगारी के चलते ये देश अब अपने नागरिकों को नौकरियों में प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी छात्रों को नौकरी देने में कंपनियों को कानूनी और वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिससे वो हिचकिचाते हैं। तकनीकी क्षेत्र में ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण बहुत सी पारंपरिक नौकरियां खत्म हो रही हैं। कंपनियां अब विशेष कौशल की मांग करती हैं, जो हर छात्र के पास नहीं होता है।