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Health Tips:फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए रोजाना करें ये योगासन, संतान प्राप्ति में होगी मदद

वर्तमान समय में फर्टिलिटी एक बड़ी समस्या है। खास बात यह है कि महिला और पुरुषों दोनों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। अगर आप इस समस्या से प्रभावित हैं, तो इससे कपल के मां-बाप बनने के सपने में दिक्कतें आ सकती हैं। हालांकि फर्टिलिटी की समस्या को कम करने में योग सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका नियमित रूप से अभ्यास करने से गर्भ धारण की संभावना बढ़ सकती है।

असरदार हैं ये योगासन

सेतुबंधासन

इस आसन का अभ्यास करने से फर्टिलिटी में सुधार होता है। वहीं यह प्रजनन अंगों में ब्लड फ्लो को बढ़ाता है और फर्टिलिटी की समस्या दूर होती है। सेतुबंधासन का अभ्यास करने से डिप्रेशन, तनाव और थकान आदि के लक्षणों को भी कम करता है।

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन मांसपेशियों को स्ट्रेच करने के साथ फर्टिलिटी में भी सुधार हो सकता है। साथ ही यह स्ट्रेस को मैनेज करने में काफी प्रभावी होता है। यह योगासन महिला और पुरुष को बांझपन की समस्या से छुटकारा दिलाने वाला है।

बटरफ्लाई

बटरफ्लाई आसन भी फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। इस आसन का नियमित अभ्यास करने से प्रसव के दौरान होने वाला दर्द भी कम होता है और शरीर में भी लचीलापन आता है।

बालासन

फर्टिलिटी की समस्या को हल करने के लिए बालासन का अभ्यास करना चाहिए। नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से हमारे शरीर का ब्लड फ्लो बढ़ता है और शरीर को लाभ मिलता है। फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए भी इस आसन का अभ्यास करना चाहिए। वहीं पीठ, घुटनों, कूल्हों और जांघों को भी मजबूत बनाने का काम करता है।

Travel Tips:ओडिशा की प्राचीन विरासत में शामिल हैं उदयगिरी और खंडगिरी की गुफाएँ

ओडिशा राज्य के भुवनेश्वर शहर के निकट स्थित उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ प्राचीन भारतीय कला, संस्कृति और धार्मिकता का अद्भुत उदाहरण हैं। ये गुफाएँ न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि शिल्पकला और वास्तुकला के दृष्टिकोण से भी अत्यधिक मूल्यवान हैं। उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ जैन धर्म से संबंधित हैं और ये गुफाएँ 2,000 साल पुरानी मानी जाती हैं। इन गुफाओं को देखकर हम प्राचीन भारत की धार्मिक आस्थाओं और उनकी जीवनशैली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं का इतिहास

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ मुख्य रूप से जैन साधुओं द्वारा 1st शताब्दी ईसा पूर्व में बनाई गई थीं। इन गुफाओं का निर्माण शासक कुमारगुप्त I के शासनकाल में हुआ था, जो गुप्त साम्राज्य के सम्राट थे। यह गुफाएँ उनके द्वारा प्रोत्साहित किए गए धार्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के तहत बनाई गई थीं। उदयगिरी का नाम ‘उदय’ यानी सूर्योदय से जुड़ा हुआ है, जबकि खंडगिरी का अर्थ है ‘खंडित पर्वत’, जो यहाँ की पर्वत श्रृंखलाओं की विशेषता को दर्शाता है।

उदयगिरी गुफाएँ

उदयगिरी गुफाएँ पहाड़ी की ऊपरी चोटी पर स्थित हैं और यहाँ कुल 18 गुफाएँ हैं। इन गुफाओं में से कुछ का उपयोग ध्यान, पूजा, और साधना के लिए किया जाता था, जबकि अन्य गुफाएँ विश्राम स्थल के रूप में बनायीं गई थीं। यहाँ की गुफाओं में जैन धर्म से संबंधित चित्रकला और मूर्तिकला का अद्भुत उदाहरण देखने को मिलता है।

उदयगिरी की गुफाओं में प्रमुख गुफा हाथी गुफा है, जिसका नाम यहाँ की हाथी के आकार की मूर्ति के कारण पड़ा। इसके अलावा, गांधार गुफा भी प्रसिद्ध है, जहां एक बड़ी मूर्ति और शिलालेख पाए जाते हैं। ये गुफाएँ जैन साधुओं द्वारा ध्यान और तपस्या के लिए इस्तेमाल की जाती थीं। यहाँ की दीवारों और छतों पर उकेरी गई मूर्तियाँ और चित्र आज भी उस समय के कला और शिल्प कौशल की गवाही देती हैं।

खंडगिरी गुफाएँ

खंडगिरी गुफाएँ उदयगिरी के पास स्थित हैं और यहाँ कुल 15 गुफाएँ हैं। इन गुफाओं का आकार उदयगिरी की गुफाओं से थोड़ा अलग है, और इनका निर्माण भी जैन साधुओं द्वारा ध्यान और पूजा के उद्देश्य से किया गया था। खंडगिरी गुफाओं की दीवारों पर जैन धर्म के अनुयायियों के जीवन और उनके अनुशासन की छवियाँ उकेरी गई हैं।

खंडगिरी की एक प्रसिद्ध गुफा रानी गुफा है, जिसे शाही गुफा भी कहा जाता है। यह गुफा अपनी सुंदर वास्तुकला के लिए जानी जाती है। इसमें एक शाही परिवार की मूर्तियाँ और चित्रकला देखने को मिलती हैं। यहाँ की अन्य गुफाओं में साधारण साधुओं के चित्र और मूर्तियाँ हैं जो उनके जीवन की गाथाएँ बयान करती हैं।

शिल्पकला और मूर्तिकला

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियाँ और चित्र शिल्पकला और मूर्तिकला का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। यहाँ पर जैन धर्म से संबंधित कई दृश्य और भगवान महावीर की मूर्तियाँ, जो कि जैन धर्म के प्रमुख तीर्थंकर हैं, देखने को मिलती हैं। गुफाओं में शिलालेख भी पाए जाते हैं, जो उस समय की धार्मिक और सांस्कृतिक जीवनशैली के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।

इन गुफाओं की शिल्पकला में रचनात्मकता और सूक्ष्मता दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, उदयगिरी की “हाथी गुफा” में उकेरी गई हाथी की मूर्ति और खंडगिरी की “रानी गुफा” में शाही सजावट इसकी विशेषता हैं।

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं का धार्मिक महत्व

इन गुफाओं का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है, खासकर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए। इन गुफाओं में ध्यान और साधना के लिए विशेष स्थान बनाए गए थे। यहाँ की मूर्तियाँ और चित्र जैन धर्म के अनुयायियों के जीवन और उनकी आस्थाओं को व्यक्त करते हैं। इन गुफाओं के माध्यम से हम जैन धर्म के इतिहास, विचारधारा और आस्था को समझ सकते हैं।

पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण स्थल

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख स्थल हैं। ये गुफाएँ ऐतिहासिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हैं और यहां हर साल पर्यटक आते हैं। इन गुफाओं के आसपास की पहाड़ी पर चढ़ाई करके पर्यटक अद्भुत दृश्य का आनंद ले सकते हैं। गुफाओं में घुसते समय आपको प्राचीन भारतीय वास्तुकला, शिल्पकला और जैन धर्म की महिमा का अनुभव होता है।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच है, जब मौसम ठंडा और सुखद रहता है। गर्मियों में यहाँ का तापमान बढ़ सकता है, जिससे यात्रा में असुविधा हो सकती है।

उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएँ ओडिशा की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा हैं। इन गुफाओं का स्थापत्य, मूर्तिकला, और शिल्पकला भारतीय संस्कृति और कला के महत्व को दर्शाता है। यह स्थल न केवल जैन धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि हर इतिहास प्रेमी और कला प्रेमी के लिए एक अद्भुत स्थल है। अगर आप भारतीय इतिहास, संस्कृति और धर्म में रुचि रखते हैं, तो उदयगिरी और खंडगिरी गुफाओं की यात्रा आपके लिए एक अद्वितीय अनुभव साबित होगी।

टोक्यो:चावल को लेकर विवादित बयान देने के बाद जापान के कृषि मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा

 जापान के कृषि मंत्री तकु एतो ने चावल को लेकर दिए गए एक विवादित बयान के कारण बुधवार को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। एतो ने हाल ही में कहा था कि उन्हें कभी चावल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि उनके समर्थक उन्हें चावल गिफ्ट में देते रहते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया जब जापान में चावल की कमी और कीमतों में बेतहाशा वृद्धि ने आम जनता को परेशान कर रखा है। एतो के इस बयान को लेकर जनता में जनता में जबरदस्त गुस्सा देखने को मिल रहा था, जिसके बाद उन पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया।

एतो ने कहा- अपना चावल खुद खरीदता हूं

एतो ने बुधवार को प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। एतो ने प्रधानमंत्री कार्यालय में इस्तीफा सौंपने के बाद पत्रकारों से कहा, ‘जब उपभोक्ता चावल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, तब मैंने बेहद अनुचित टिप्पणी की। मुझे लगा कि सरकार को चावल की कीमतों की चुनौतियों से निपटने की जरूरत है, ऐसे में मेरे लिए प्रमुख के रूप में बने रहना उचित नहीं है।’ एतो ने लोगों से माफी मांगी और अपना बयान वापस ले लिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद चावल खरीदते हैं और उपहार में मिले चावल पर निर्भर नहीं हैं।

सरकार के लिए झटका है एतो का इस्तीफा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एतो के उत्तराधिकारी लोकप्रिय पूर्व पर्यावरण मंत्री शिंजिरो कोइजूमी होंगे। यह घटना इशिबा की अल्पमत सरकार के लिए एक और झटका साबित हो सकती है, जो पहले ही जन समर्थन खो रही है। विपक्षी दलों ने धमकी दी थी कि यदि एतो बुधवार दोपहर तक स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देते, तो उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाएगा। बता दें कि चावल जापान की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और खानपान का अभिन्न हिस्सा है। यह न केवल जापानियों का मुख्य भोजन है, बल्कि उनकी परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों में भी इसका विशेष स्थान है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है चावल

जापान में चावल को समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है, और इसे शिंतो धर्म में देवताओं को चढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। जापानी भोजन जैसे सुशी, ओनिगिरी और मोची में चावल की अहम भूमिका होती है। चावल की खेती जापान में सदियों से की जाती रही है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। ऐसे में चावल की कमी और महंगाई जनता के लिए संवेदनशील मुद्दा है। पिछले कुछ महीनों में जापान में चावल की बढ़ती कीमतों ने जनता की कमर तोड़ रखी है, और उन्हें दूसरे विकल्पों की तरफ देखना पड़ रहा है।

कप्तान संजू सैमसन ने इस युवा खिलाड़ी को भारतीय क्रिकेट का सुनहरा भविष्य करार दिया

राजस्थान रॉयल्स ने 20 मई को अपने आखिरी आईपीएल मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को 6 विकेट से हराकर टूर्नामेंट का समापन जीत के साथ किया। इस मैच में वैभव सूर्यवंशी ने 33 गेंदों पर 57 रनों की शानदार पारी खेली और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 188 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे राजस्थान ने 17.1 ओवर में 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस जीत के बाद राजस्थान रॉयल्स ने 13 मैचों में 8 अंकों के साथ 10 टीमों की तालिका में 9वां स्थान हासिल किया। दूसरी तरफ, चेन्नई की टीम 12 मैचों में 8 अंक के साथ सबसे नीचे 10वें पायदान पर है। अब चेन्नई को अपने आखिरी मैच में गुजरात टाइटंस को बड़े अंतर से हराना होगा, तभी वह अंतिम स्थान से ऊपर उठ पाएगी।

कप्तान ने युवा खिलाड़ियों की तारीफ की

राजस्थान रॉयल्स के कप्तान ने मैच के बाद कहा कि हमने इस बार ठान लिया था कि अपनी कमजोरियों को अनदेखा नहीं करेंगे। इसी वजह से लक्ष्य का पीछा करने का फैसला किया। जोफ्रा आर्चर और संदीप शर्मा की गैरमौजूदगी में युवा गेंदबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और योजना के मुताबिक गेंदबाज़ी की।

उन्होंने बताया कि आकाश लगातार मेहनत कर रहे हैं और उन्होंने शेन बॉन्ड के साथ भी काफी करीब से काम किया है। कप्तान ने मौजूदा सीजन को चुनौतीपूर्ण बताया और कहा कि कई मौकों पर मैच का अंतर इतना कम रहा कि हार-जीत का फैसला कर पाना मुश्किल था।

वैभव सूर्यवंशी शानदार खिलाड़ी

कप्तान ने वैभव सूर्यवंशी की तारीफ करते हुए कहा कि वैभव ने जयपुर में जो शतक लगाया था, वो बेमिसाल था। वो लेग साइड में भी अच्छी बल्लेबाजी करते हैं और स्लो डिलीवरी को कवर के ऊपर से खेलने का हौंसला रखते हैं। आज भी उन्होंने मिडिल ओवर्स में बेहतरीन बैटिंग की और हर गेंद पर शॉट नहीं मारा, जो उनकी समझदारी को दिखाता है। वह भारतीय क्रिकेट का सुनहरा भविष्य हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड’ के निर्माण की घोषणा की

दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक देशों के बीच वर्तमान समय में जंग या फिर तनाव का माहौल जारी है। रूस-यूक्रेन जंग, इजरायल-हमास जंग या फिर भारत-पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुई सैन्य झड़प में एयर डिफेंस सिस्टम या मिसाइल डिफेंस सिस्टम की काफी चर्चा रही है। इस बीच अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी देश के लिए नया मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने इसे ‘गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड’ नाम दिया है। बता दें कि एयर डिफेंस सिस्टम किसी भी मिसाइल, ड्रोन और एयरक्राफ्ट आदि से देश की रक्षा करती है।

रोनाल्ड रीगन ने जताई थी इच्छा- ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी घोषणा करते हुए नए मिसाइल डिफेंस सिस्टम को बनाने के प्लान के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा- “हम गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड के बारे में ऐतिहासिक घोषणा कर रहे हैं। यह कुछ ऐसा है जो हम चाहते हैं। अमेरिका के 40वें राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन इसे कई साल पहले चाहते थे, लेकिन उनके पास तकनीक नहीं थी। लेकिन यह कुछ ऐसा है जो हमारे पास होगा।”

ट्रंप ने चुनाव कैंपेन में किया था वादा 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह गोल्डन मिसाइल डिफेंस शील्ड को हम हाई लेवल पर प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा- चुनाव कैंपेन के दौरान मैंने अमेरिका की जनता से ये वादा किया था कि मैं अपने देश को विदेशी मिसाइल हमले के खतरे से बचाने के लिए अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस शील्ड का निर्माण करूंगा। आज हम यही कर रहे हैं।”

175 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट

गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड को बनाने की लागत 175 अरब डॉलर की रखी गई है। इस मिसाइल डिफेंस शील्ड का मकसद चीन और रूस द्वारा उत्पन्न खतरों से अमेरिका की रक्षा करना है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात का खुलासा कर दिया है कि उन्होंने इस मिसाइल डिफेंस के अंतिम डिजाइन को चुन लिया है। इस प्रोजेक्ट का प्रमुख अमेरिकी अंतरिक्ष सेना के जनरल माइकल गुएटलीन को बनाया गया है।

कब तक बनेगा, क्या होगी खूबी?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड को जनवरी 2029 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। बता दें कि तब उनका कार्यकाल खत्म होने वाला होगा। ट्रंप ने कहा है कि गोल्डन डोम हमारी मातृभूमि की रक्षा करेगा। उन सभी को हवा में ही मार गिराया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस मिसाइल डिफेंस की सफलता दर 100% के बहुत करीब है। गोल्डन डोम देश की ओर आने वाली मिसाइलों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और उन्हें रोकने के लिए सैकड़ों सैटेलाइट पर निर्भर हो सकता है। दुश्मन की मिसाइलों को टारगेट करने के लिए इसमें निगरानी सैटेलाइट और इंटरसेप्टर सैटेलाइट दोनों होने की उम्मीद है। इसे हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स, क्रूज मिसाइलों और एआई से लैस ड्रोनों को रोकने के लिए बनाया जा रहा है।