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कानपुर: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में वास्तुशास्त्र में नए कोर्स की शुरुआत, भारतीय प्राच्य विद्या को मिलेगा नया शैक्षणिक और रोजगारपरक स्वरूप, यहाँ जानें पूरी खबर

कानपुर: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में वास्तुशास्त्र में नए कोर्स की शुरुआत, भारतीय प्राच्य विद्या को मिलेगा नया शैक्षणिक और रोजगारपरक स्वरूप, यहाँ जानें पूरी खबर
कानपुर: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में वास्तुशास्त्र में नए कोर्स की शुरुआत, भारतीय प्राच्य विद्या को मिलेगा नया शैक्षणिक और रोजगारपरक स्वरूप, यहाँ जानें पूरी खबर
कानपुर: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में वास्तुशास्त्र में नए कोर्स की शुरुआत, भारतीय प्राच्य विद्या को मिलेगा नया शैक्षणिक और रोजगारपरक स्वरूप, यहाँ जानें पूरी खबर
  • सीएसजेएमयू में पीजी डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र कोर्स की शुरुआत सत्र 2025-26 से होगी।
  • किसी भी स्नातक डिग्री वाले व्यक्ति को 45% अंकों के साथ प्रवेश की पात्रता होगी।
  • कोर्स में थ्योरी के साथ फील्ड प्रैक्टिकल और वास्तु सलाह की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
  • वास्तुशास्त्र, ज्योतिर्विज्ञान और कर्मकांड कोर्स रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।
  • दीन दयाल शोध केंद्र भारतीय प्राच्य विद्या को आधुनिक शिक्षा प्रणाली में जोड़ रहा है।

कानपुर: भारतीय प्राच्य ज्ञान परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित करने की दिशा में देश में जहां केंद्र और राज्य सरकारें अनेक योजनाएं चला रही हैं, वहीं छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और ठोस पहल करते हुए अपने पं. दीन दयाल उपाध्याय शोध केंद्र के माध्यम से ऐसे शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को विस्तार दे रहा है, जो न केवल हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बनाए रखते हैं, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी खोलते हैं।

इसी कड़ी में विश्वविद्यालय सत्र 2025-26 से एक नया कोर्स “पीजी डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र” प्रारंभ करने जा रहा है, जो उन युवाओं और विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर होगा, जो वास्तु के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं या इसमें रुचि रखते हैं।

क्या है पीजी डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र कोर्स?

यह कोर्स वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों, उनके व्यवहारिक प्रयोग, नक्शा विश्लेषण, ऊर्जा संतुलन, गृह निर्माण के दिशानुसार उपाय और आधुनिक वास्तु सलाह जैसे विषयों पर केंद्रित होगा। इसमें केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि मैदानी प्रशिक्षण और केस स्टडी आधारित शिक्षा दी जाएगी, जिससे विद्यार्थी वास्तु विशेषज्ञ के रूप में विकसित हो सकें।

कोर्स की प्रमुख जानकारी इस प्रकार है:

  • कोर्स नाम: पीजी डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र
  • अवधि: 1 वर्ष (2 सेमेस्टर)
  • फीस: ₹11,200/-
  • सीटें: कुल 30
  • योग्यता: किसी भी विषय में स्नातक (45% अंक अनिवार्य)
  • प्रवेश आयु सीमा: नहीं है – किसी भी उम्र के व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं

भारतीय परंपरा को समर्पित शोध केंद्र का योगदान

पं. दीन दयाल उपाध्याय शोध केंद्र के निदेशक प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने बताया कि विश्वविद्यालय का यह केंद्र पहले से ही भारतीय प्राच्य विद्या को बढ़ावा देने के लिए एमए ज्योतिर्विज्ञान और पीजी डिप्लोमा इन कर्मकांड जैसे पाठ्यक्रमों का संचालन कर रहा है, जिन्हें छात्रों से बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है। अब इन पाठ्यक्रमों की श्रृंखला में वास्तुशास्त्र को भी शामिल किया गया है, जिससे युवाओं को स्वरोजगार का सशक्त साधन प्राप्त होगा।

वास्तुशास्त्र से रोजगार का सुनहरा अवसर

शोध केंद्र के सहायक निदेशक डॉ. दिवाकर अवस्थी ने बताया कि आज के युग में लोग अपने घर, दफ्तर, दुकान या फ्लैट निर्माण से पहले वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक समझते हैं। वास्तु में पारंगत विद्यार्थी इस कोर्स को करने के बाद स्वयं का कंसल्टेंसी कार्यालय, ऑनलाइन सलाह केंद्र या वास्तु विश्लेषण सेवा शुरू कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि ठीक इसी तरह एमए ज्योतिर्विज्ञान करने वाले छात्र ज्योतिष परामर्श केंद्र स्थापित कर सकते हैं और पीजी डिप्लोमा इन कर्मकांड पूरा करने वाले पुरोहित सेवाएं देकर धार्मिक आयोजनों में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

शोध केंद्र द्वारा संचालित अन्य पाठ्यक्रम

1. एमए ज्योतिर्विज्ञान

  • सीटें: 50
  • फीस: ₹10,200/-
  • अवधि: 2 वर्ष (4 सेमेस्टर)
  • योग्यता: किसी भी विषय में स्नातक (45% अंक)

2. पीजी डिप्लोमा इन कर्मकांड

  • सीटें: 50
  • फीस: ₹9,200/-
  • अवधि: 1 वर्ष (2 सेमेस्टर)
  • योग्यता: इंटरमीडिएट पास (45% अंक)

प्राचीन ज्ञान को आधुनिक रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल

यह कोर्स उन लोगों के लिए भी उपयोगी है जो हिन्दू वास्तुशास्त्र में न केवल आस्था रखते हैं, बल्कि इसके व्यावसायिक पक्ष को भी पहचानते हैं। कोर्स की कोई उम्र सीमा नहीं है, जिससे विभिन्न वर्गों के लोग इसमें प्रवेश ले सकते हैं – छात्र, गृहिणी, सेवा निवृत्त कर्मचारी या कोई भी इच्छुक व्यक्ति।

शोध केंद्र का यह प्रयास ‘भारतीय ज्ञान परंपरा को जीवंत बनाए रखने’ और ‘आधुनिक संदर्भ में उपयोगी और व्यावसायिक बनाने’ की दिशा में एक सशक्त कदम है। आने वाले वर्षों में ऐसे पाठ्यक्रमों की मांग और लोकप्रियता निश्चित रूप से और बढ़ेगी।

मॉरिशस के राष्ट्रपति ने किया ‘यादों की रियास’ का लोकार्पण: डॉ. अंजना सिंह सेंगर के ग़ज़ल संग्रह को अंतरराष्ट्रीय सम्मान

मॉरिशस के राष्ट्रपति ने किया 'यादों की रियास' का लोकार्पण: डॉ. अंजना सिंह सेंगर के ग़ज़ल संग्रह को अंतरराष्ट्रीय सम्मानमॉरिशस के राष्ट्रपति ने किया 'यादों की रियास' का लोकार्पण: डॉ. अंजना सिंह सेंगर के ग़ज़ल संग्रह को अंतरराष्ट्रीय सम्मानमॉरिशस के राष्ट्रपति ने किया 'यादों की रियास' का लोकार्पण: डॉ. अंजना सिंह सेंगर के ग़ज़ल संग्रह को अंतरराष्ट्रीय सम्मान
मॉरिशस के राष्ट्रपति ने किया 'यादों की रियास' का लोकार्पण: डॉ. अंजना सिंह सेंगर के ग़ज़ल संग्रह को अंतरराष्ट्रीय सम्मान
मॉरिशस के राष्ट्रपति ने किया 'यादों की रियास' का लोकार्पण: डॉ. अंजना सिंह सेंगर के ग़ज़ल संग्रह को अंतरराष्ट्रीय सम्मानमॉरिशस के राष्ट्रपति ने किया 'यादों की रियास' का लोकार्पण: डॉ. अंजना सिंह सेंगर के ग़ज़ल संग्रह को अंतरराष्ट्रीय सम्मानमॉरिशस के राष्ट्रपति ने किया 'यादों की रियास' का लोकार्पण: डॉ. अंजना सिंह सेंगर के ग़ज़ल संग्रह को अंतरराष्ट्रीय सम्मान
  • डॉ. अंजना सिंह सेंगर की ग़ज़ल पुस्तक ‘यादों की रियास’ का लोकार्पण मॉरिशस के राष्ट्रपति ने किया।
  • विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस समारोह में डॉ. सेंगर को किया गया आमंत्रित।
  • राष्ट्रपति ने डॉ. सेंगर को प्रमाण पत्र देकर किया सम्मानित और निरंतर लेखन का दिया संदेश।
  • विश्व हिंदी सचिवालय ग़ज़ल लेखन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित करेगा विशेष कार्यशाला।
  • डॉ. सेंगर को अब तक 60 से अधिक सम्मान मिल चुके हैं, उन्होंने सात साहित्यिक पुस्तकों का लेखन किया है।

लखनऊ/पोर्ट लुईस (मॉरिशस):लखनऊ की चर्चित साहित्यकार डॉ. अंजना सिंह सेंगर के ग़ज़ल संग्रह ‘यादों की रियास’ का भव्य लोकार्पण मॉरिशस के राष्ट्रपति श्री धरमवीर गोकुल (GCSSK) द्वारा किया गया। यह लोकार्पण विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित एक प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन के दौरान हुआ।

इस समारोह में भारत सहित कई देशों के नामचीन साहित्यकार, राजनयिक, और हिंदीप्रेमी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान डॉ. अंजना सिंह सेंगर को वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया, और उनके साहित्यिक योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित कर प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

राष्ट्रपति ने की ग़ज़लों की सराहना, दिया संदेश – “लेखन की धारा को कभी रोकना मत”

मॉरिशस के राष्ट्रपति धरमवीर गोकुल ने अपने संबोधन में कहा कि गीत और ग़ज़ल ही वह माध्यम हैं जिनके जरिए हिंदी भाषा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबके हृदय तक पहुंचती है। उन्होंने कहा, “इनमें मानवीय संवेदनाओं का अनमोल संगम होता है, जो हमें आत्मिक रूप से जोड़ता है।”

डॉ. सेंगर के संग्रह ‘यादों की रियास’ की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, “आपको कभी रुकना नहीं है, आपको निरंतर इस साहित्यिक यात्रा को आगे बढ़ाना है। हिंदी ग़ज़लें केवल कविता नहीं, संवेदनाओं की जीवंत प्रस्तुति होती हैं।”

ग़ज़ल विधा को बढ़ावा देने की घोषणा, कार्यशाला होगी आयोजित

विश्व हिंदी सचिवालय की महासचिव डॉ. माधुरी रामधारी ने घोषणा की कि डॉ. अंजना के इस संग्रह से प्रेरणा लेकर, संस्था ग़ज़ल लेखन पर केंद्रित एक विशेष कार्यशाला का आयोजन करेगी। इस कार्यशाला में युवा लेखकों को ग़ज़ल की बुनियादी शैलियों और तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि “डॉ. अंजना सिंह सेंगर का साहित्य हृदय को छूने वाला और आत्मा को शांति देने वाला है। उनकी ग़ज़लें एक अलग ही भावभूमि का निर्माण करती हैं।”

60 से अधिक सम्मान, सात पुस्तकों की लेखिका हैं डॉ. अंजना सिंह सेंगर

डॉ. अंजना सिंह सेंगर, जिन्होंने केंद्र सरकार की सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर पूरी तरह साहित्य को समर्पित किया, अब तक सात पुस्तकों का लेखन कर चुकी हैं। उन्हें देश-विदेश में 60 से अधिक साहित्यिक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

इससे पूर्व, उनके ग़ज़ल संग्रह “अगर तुम मुझसे कह देते” को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिष्ठित ‘फिराक गोरखपुरी सम्मान’ से भी नवाजा गया है।

समारोह में बोलते हुए डॉ. सेंगर ने कहा, “हिंदी ग़ज़ल एक साहित्यिक धारा नहीं, संवेदनाओं का विशाल समुंदर है। यह यात्रा आने वाले समय में और भी गहराई और ऊँचाई दोनों पाएगी।”

Hip Replacement: लखनऊ में बीकेटी स्थित राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय में हुआ पहला सफल कूल्हा प्रत्यारोपण: बाराबंकी निवासी 67 वर्षीय मरीज को मिला नया जीवन

Hip Replacement: लखनऊ में बीकेटी स्थित राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय में हुआ पहला सफल कूल्हा प्रत्यारोपण: बाराबंकी निवासी 67 वर्षीय मरीज को मिला नया जीवन
Hip Replacement: लखनऊ में बीकेटी स्थित राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय में हुआ पहला सफल कूल्हा प्रत्यारोपण: बाराबंकी निवासी 67 वर्षीय मरीज को मिला नया जीवन
Hip Replacement: लखनऊ में बीकेटी स्थित राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय में हुआ पहला सफल कूल्हा प्रत्यारोपण: बाराबंकी निवासी 67 वर्षीय मरीज को मिला नया जीवन
  • आरएसएम हॉस्पिटल में पहली बार सफल कूल्हा प्रत्यारोपण किया गया।
  • बाराबंकी निवासी 67 वर्षीय कल्लू पांडेय के दाहिने कूल्हे का हुआ ऑपरेशन।
  • डॉ. अशोक कुमार और उनकी टीम ने बाईपोलर कूल्हा प्रत्यारोपण कर मरीज को राहत दी।
  • मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके शर्मा के नेतृत्व में अस्पताल में लगातार बेहतर हो रही सुविधाएं।
  • समाजसेवी नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने चिकित्सक टीम को ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दी बधाई।

लखनऊ, बख्शी का तालाब : स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए, बख्शी का तालाब स्थित राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय (RSM Hospital) में शुक्रवार को पहला सफल कूल्हा प्रत्यारोपण (Hip Replacement) किया गया। यह ऑपरेशन न केवल अस्पताल के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि यह दर्शाता है कि अब राजधानी के ग्रामीण क्षेत्र में भी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बाराबंकी के बुजुर्ग को मिला नई ज़िंदगी का सहारा

यह प्रत्यारोपण बाराबंकी जनपद के ग्राम कोढ़वा निवासी 67 वर्षीय बुजुर्ग कल्लू पांडेय पर किया गया। उन्हें दाहिने कूल्हे में गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद परिजन उन्हें तत्काल आरएसएम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। यहां हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने प्राथमिक जांच की, जिसमें रेडियोलॉजी रिपोर्ट में दाहिने कूल्हे के फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। मरीज को बाईपोलर कूल्हा प्रत्यारोपण (Bipolar Hip Replacement) की सलाह दी गई।

परिजनों की सहमति के बाद डॉ. अशोक कुमार, डॉ. यूएस लाल और डॉ. सुमित महराज की विशेषज्ञ टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया। एनस्थीसिया विभाग के डॉ. अंशु व डॉ. फहीम ने सफलतापूर्वक बेहोशी की प्रक्रिया संभाली। घंटों चले इस ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर है और स्वास्थ्य में तेज़ी से सुधार हो रहा है।

पहली बार हुआ कूल्हा प्रत्यारोपण, चिकित्सा अधीक्षक ने दी जानकारी

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वी.के. शर्मा ने बताया कि यह आरएसएम हॉस्पिटल में किया गया पहला कूल्हा प्रत्यारोपण है, जो पूरी तरह से सफल रहा। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पिछले कुछ महीनों में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हुआ है, जिससे मरीजों का भरोसा और संख्या दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डॉ. शर्मा के अनुसार, बीते माह ओपीडी मरीजों की संख्या में लगभग 34% और पैथोलॉजी जांचों में 22% की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। आने वाले समय में इस संख्या को और बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है ताकि न केवल लखनऊ बल्कि आस-पास के जनपदों – जैसे सीतापुर, लखीमपुर, बहराइच, बाराबंकी, सुल्तानपुर, उन्नाव और हरदोई – से आने वाले मरीजों को भी बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।

योगक्षेम ट्रस्ट ने दी बधाई, चिकित्सालय के कायाकल्प की सराहना

रामेश्वरी जगदीश योगक्षेम ट्रस्ट के अध्यक्ष और वरिष्ठ समाजसेवी नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने चिकित्सक टीम को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों से आरएसएम हॉस्पिटल का कायाकल्प जिस तेज़ी से हुआ है, वह सराहनीय है। डॉ. वी.के. शर्मा के नेतृत्व में चिकित्सालय में कई ऐतिहासिक कार्य सम्पन्न हुए हैं।

श्री चौहान ने कहा कि अस्पताल की युवा व समर्पित चिकित्सक टीम द्वारा सैकड़ों गंभीर मरीजों का इलाज सफलतापूर्वक किया जा रहा है, जो लखनऊ सहित प्रदेश के कई अन्य जिलों से आते हैं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी व उन्नत सर्जरी संभव है और मरीजों को इलाज के लिए महानगरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा।

राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय ने इस सफल कूल्हा प्रत्यारोपण के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बीच भी समर्पित चिकित्सा कर्मियों की टीम असंभव को संभव बना सकती है। यह न केवल क्षेत्रीय जनता के लिए राहत का संदेश है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक बदलाव का संकेत भी है।


संपर्क: शिवसागर सिंह चौहान
True News Up – लखनऊ ब्यूरो
ईमेल: info@truenewsup.com
फोन: +917379041257

“कोई भूखा न सोए” का संकल्प : सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल ‘तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई’ बनी मानवता का प्रतीक

"कोई भूखा न सोए" का संकल्प : सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल 'तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई' बनी मानवता का प्रतीक
"कोई भूखा न सोए" का संकल्प : सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल 'तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई' बनी मानवता का प्रतीक
"कोई भूखा न सोए" का संकल्प : सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल 'तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई' बनी मानवता का प्रतीक
  • सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा संचालित ‘तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई’ जरूरतमंदों को रोज़ाना गरम व पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रही है।
  • यह रसोई सिर्फ भोजन का स्थान नहीं, बल्कि समाज में करुणा और सेवा का जीवंत उदाहरण बन चुकी है।
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने इसे राजनीति नहीं, बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बताया है।
  • स्थानीय युवाओं, महिलाओं और समाजसेवियों की भागीदारी से रसोई का संचालन अनुशासन व आत्मीयता के साथ हो रहा है।
  • भविष्य में इस मॉडल को तकनीकी और संगठनात्मक विस्तार के साथ अन्य क्षेत्रों में लागू करने की योजना है।

लखनऊ, 20 जून 2025 | True News Up ब्यूरो: सरोजनीनगर क्षेत्र में इन दिनों एक शांत लेकिन क्रांतिकारी बदलाव देखा जा रहा है—यह बदलाव है भूख पर मानवता की विजय का।
इस परिवर्तन की अगुवाई कर रहे हैं क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, जिनकी सोच और सेवा की भावना ने जन्म दिया है एक अभिनव पहल — ‘तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई’, जो जरूरतमंदों के लिए हर दिन गरम, स्वादिष्ट और सम्मानपूर्वक भोजन उपलब्ध करवा रही है।

सेवा नहीं, संस्कार है यह रसोई

‘तारा शक्ति रसोई’ केवल भोजन देने का केंद्र नहीं है, यह उस विचारधारा का विस्तार है जो मानती है कि “गरीब की थाली खाली नहीं होनी चाहिए”।
डॉ. राजेश्वर सिंह की यह रसोई हर दिन दोपहर और शाम को उन लोगों के लिए गरम भोजन परोसती है जो समाज की व्यस्त दिनचर्या में अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं — जैसे रिक्शा चालक, मजदूर, बेसहारा महिलाएं, दिव्यांगजन, वृद्ध नागरिक और निराश्रित।

“मानवता सबसे बड़ा धर्म है”: डॉ. राजेश्वर सिंह

रसोई के संचालन में न केवल संगठनात्मक कुशलता झलकती है, बल्कि उसमें समर्पण और करुणा भी दिखाई देती है।
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्वयं इस पहल को खड़ा किया, निगरानी रखी और इसका दायरा बढ़ाया।
उनका कहना है:

“राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता नहीं, सेवा होना चाहिए। तारा शक्ति रसोई मेरे लिए एक परियोजना नहीं, बल्कि समाज के प्रति मेरी जिम्मेदारी है। जब एक भूखा व्यक्ति मुस्कुराता है, वहीं से मेरी सफलता शुरू होती है।”

भोजन नहीं, सम्मान मिलता है यहां

रसोई में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और अनुशासन इसे सामान्य लंगर या दान की रसोई से अलग बनाते हैं।
दाल, चावल, ताजी सब्जी, चपाती और कभी-कभी मिठाई — यह पूरा भोजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि पौष्टिक और सम्मानजनक ढंग से दिया जाता है।
यहां कोई “भिखारी” नहीं, बल्कि हर आगंतुक “अतिथि” की तरह देखा जाता है।

स्वयंसेवकों की प्रेरक भूमिका

इस रसोई की आत्मा हैं वो स्थानीय युवा, महिलाएं और समाजसेवी, जो निःस्वार्थ सेवा में लगे हैं।
सुबह से ही रसोई में हलचल शुरू हो जाती है — रोटियां बनती हैं, सब्जियां कटती हैं, बर्तन मांजे जाते हैं और फिर समय पर भोजन वितरण होता है।
हर कार्यकर्ता इस बात से परिचालित होता है कि वे किसी “कार्यक्रम” में नहीं, बल्कि “संवेदनाओं की साधना” में लगे हैं।

जन-सहभागिता से बना एक आदर्श मॉडल

इस रसोई में स्थानीय व्यापारियों, किसानों और आम नागरिकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
कोई अनाज देता है, कोई सब्जी, तो कोई समय। इस रसोई ने समाज के सभी वर्गों को एक उद्देश्य से जोड़ दिया है — “एक भी भूखा न रहे”।

भविष्य की योजना: तकनीक से सेवा तक

डॉ. राजेश्वर सिंह इस मॉडल को और अधिक संगठित करने के लिए तकनीकी पहल भी कर रहे हैं — जैसे डिजिटल लाभार्थी ट्रैकिंग, भोजन की गुणवत्ता ऑडिटिंग और जनसहभागिता पोर्टल।
उनका सपना है कि तारा शक्ति रसोई केवल सरोजनीनगर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी प्रेरणा बने।

भूख पर जीत, सेवा से शांति

‘तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई’ आज केवल एक समाजसेवी पहल नहीं, बल्कि भूख के विरुद्ध एक मौन क्रांति बन चुकी है।
यह एक विधायक के कार्यालय से निकली सेवा नहीं, बल्कि एक समाज के अंतर्मन से निकला बदलाव है।
यह साबित करता है कि जब राजनीति, सेवा और संवेदना के साथ चलती है- तब परिवर्तन निश्चित होता है।

Canada on Khalistani Extremism: कनाडा ने खालिस्तानियों को माना उग्रवादी, लेकिन भारत पर लगाए गंभीर आरोप

कनाडा ने पहली बार माना कि खालिस्तानी उनकी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ हिंसा फैलाने और साजिश रचने के लिए कर रहे हैं. संसद को सौंपी गई वार्षिक रिपोर्ट में कनाडा की खुफिया एजेंसी (CSIS) बताया कि खालिस्तानी कनाडा का इस्तेमाल भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, धन जुटाने या प्लान बनाने के रूप में कर रहे हैं. हालांकि उसने भारत पर हस्तक्षेप और जासूसी का भी आरोप लगाया है.

कनाडा ने भारत पर लगा दिए ये गंभीर आरोप

CSIS ने कहा कि 1980 के दशक से ही कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों (CBKE) ने हिंसक तरीके से पंजाब में एक स्वतंत्र सिख राज्य बनाने के लिए अभियान चलाया है. इस रिपोर्ट में कहा गया, “भारतीय अधिकारी जिनमें उनके कनाडा स्थित प्रॉक्सी एजेंट भी शामिल हैं, वे कई तरह की गतिविधियों में शामिल हैं. उनका उद्देश्य कनाडाई समुदायों और राजनेताओं को प्रभावित करना है.”

इन देशों को बताया कनाडा के लिए खतरा

इसमें दावा किया गया है कि जब ये गतिविधियां भ्रामक, गुप्त या धमकी देने वाली होती हैं, तो उन्हें विदेशी हस्तक्षेप माना जाता है. भारत पहले से ही कनाडाई अधिकारियों की ओर से लगाए जाने वाले इस तरह के आरोपों को खारिज करता रहा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कनाडा के लिए सबसे बड़ा खुफिया खतरा चीन है. रिपोर्ट में इसके अलावा पाकिस्तान, रूस और ईरान का भी नाम लिया गया है.

कनाडा में भारतीय विदेशी हस्तक्षेप को बढ़ावा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हरदीप सिंह निज्जर मामले से भारत सरकार और आपराधिक नेटवर्क के बीच संबंधों का पता चला है. इसमें कहा गया कि खालिस्तानी उग्रवाद कनाडा में भारतीय विदेशी हस्तक्षेप गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है. भारत ने निज्जर की मौत में अपनी संलिप्तता से साफ इनकार किया है और कनाडा की ओर से लगाए गए हस्तक्षेप के आरोपों को भी खारिज किया है.

निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच बिगड़ गए हालात

साल 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के संबंधों में तीखी तनातनी देखी गई थी. कनाडाई अधिकारियों ने इस हत्या को भारतीय सरकार के हस्तक्षेप से जोड़ा, जिसका भारत ने खंडन करते हुए इन आरोपों को बेतुका और निराधार बताया था. भारत ने इसके जवाब में कनाडा पर खालिस्तानी चरमपंथियों को पनाह देने और उनकी गतिविधियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया