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‘ईरान के सुप्रीम लीडर की बची जान’, अली खामेनेई की हत्या की साजिश पर बोले डोनाल्ड ट्रंप।

ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (27 जून, 2025) को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को लेकर कहा कि हमने सर्वोच्च नेता को ‘बदसूरत और अपमानजनक मौत’ से बचाया.

रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले को लेकर कहा कि हमने उन्हें खत्म कर दिया. हम ही एकमात्र ऐसे लोग हैं जो ऐसा कर सकते थे और हमने इसके अलावा दो अन्य स्थलों को भी नष्ट कर दिया. हमने उन्हें खत्म कर दिया. यह बहुत ही बुरा इरादा था.

‘वे कभी भी इसे पूरा नहीं कर पाए’
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि और फिर से समय ही बताएगा, लेकिन मुझे विश्वास नहीं है कि वे (ईरान) जल्द ही परमाणु मामलों में वापस जाने वाले हैं. ट्रंप ने आगे कहा कि उन्होंने (ईरान ने) परमाणु ऊर्जा पर एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए और वे कभी भी इसे पूरा नहीं कर पाए.

ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान यूरेनियम को एनरिच करना जारी रखता है तो बिना किसी सवाल के हम फिर से बमबारी करेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर खुफिया जानकारी से संकेत मिलता है कि देश अभी भी परमाणु हथियार ग्रेड के लिए यूरेनियम को एनरिच करने में सक्षम है तो वह निश्चित रूप से फिर से ईरान पर हमले करेंगे.

‘अयातुल्ला अली खामेनेई को बहुत बुरी तरह से परास्त किया’ 
व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे जाने पर कि क्या वह पिछले सप्ताह के हमलों की तरह ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को समाप्त करने में सफल नहीं होने पर फिर से हवाई हमले करने पर विचार करेंगे, उन्होंने कहा कि बिना किसी सवाल के. बिल्कुल.

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल दोनों से शत्रुता के कारण ईरान के अयातुल्ला अली खामेनेई को बहुत बुरी तरह से परास्त किया गया और इसे समाप्त करने का यह सही समय है

लैंसडाउन के नजदीक की ये शानदार जगहें हैं घूमने के लिए परफेक्ट, एक बार जरूर करें एक्सप्लोर।

दिल्ली से करीब 275 किमी दूर स्थित लैंसडाउन उत्तराखंड का एक बेहद मनमोहक, खूबसूरत और शानदार हिल स्टेशन है। यह समुद्र तल से करीब 1 हजार मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। दिल्ली के आसपास होने के कारण दिल्ली एनसीआर के लोग लैंसडाउन घूमने तो जाते हैं। लेकिन यहां से कुछ ही किमी की दूरी पर स्थित गुमखाल जैसे हसीन और मनमोहक जगह को एक्सप्लोर करना भूल जाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको गुमखाल की खूबसूरती, खासियत और आसपास में स्थित कुछ बेहतरीन जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं। ऐसे में आप जून के महीने में यहां पर ठंडी-ठंडी हवाओं का लुत्फ उठाने पहुंच सकते हैं।

गुमखाल

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित गुमखाल एक सुंदर और शांत गांव है। यह गांव भिलंगना नदी के किनारे बसा हुआ है।

यह जगह लैंसडाउन से करीब 15 किमी दूर, हरिद्वार से करीब 104 किमी दूर, ऋषिकेश से 124 किमी दूर और दिल्ली एनसीआप से करीब 271 किमी दूर है।

गुमखाल की खासियत

पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित गुमखाल एक बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यहां पर देवदार के बड़े-बड़े पेड़, घास के मैदान, घने जंगल, प्राकृतिक सुंदरता और झील-झरने यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं।

समुद्र तल से करीब 1 हजार से भी अधिक मीटर की ऊंचाई पर गुमखाल स्थित है। जोकि पौड़ी गढ़वाल जिले का छिपा हुआ खजाना माना जाता है। वहीं गर्मियों में भी यहां पर अक्सर ठंडी-ठंडी हवाएं चलती रहती हैं।

पर्यटकों के लिए है खास

यहां का शांत और शुद्ध माहौल पर्यटकों को सुकून और शांति का माहौल देता है। खासकर ऋषिकेश या मसूरी की भीड़-भाड़ से बचने वाले पर्यटक यहां पर घूमने के लिए पहुंचते हैं।

गुमखाल अपनी खूबसूरती के अलावा एडवेंचर एक्टिविटी के लिए जाना जाता है। यहां की हसीन वादियों में ट्रेकिंग, हाइकिंग और कैंपिंग का भी लुत्फ उठा सकते हैं। आपको गुमखाल में कई ऐसे पॉइंट मिल जाएंगे, जहां पर आप शानदार और यादगार फोटोग्राफी कर सकते हैं।

आसपास घूमने की जगहें

गुमखाल के आसपास कई शानदार और खूबसूरत जगहें मौजूद हैं। आप यहां पर गुमखाल सनसेट, भैरव गढ़ी मंदिर और सनराइज पॉइंट को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इसके अलावा आप यहां पर सोलिया गांव, स्नो व्यू पॉइंट, कोटी गांव और खरेटी गांव को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं।

Ginger and Carrot Juice Benefits: एक कप में समाए सेहत के बेहतरीन फायदे

 हर सुबह की शुरुआत अगर ऊर्जा से भरी हो तो पूरा दिन तरोताजा और हेल्दी महसूस होता है. हम अक्सर हेल्थ ड्रिंक्स की तलाश में महंगे और मिलावटी विकल्पों की ओर भागते हैं, लेकिन क्या आपने कभी अपने किचन में रखे गाजर और अदरक को एक साथ मिलाकर पीने का सोचा है. ये दोनों ही सामग्री न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन हैं, बल्कि जब इनका रस मिलाया जाए, तो ये आपकी सेहत के लिए किसी आयुर्वेदिक टॉनिक से कम नहीं है. एक कप गाजर और अदरक का रस, रोज सुबह पीने से शरीर को न सिर्फ अंदर से पोषण मिलता है, बल्कि ये कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव करता है.

आंखों की रौशनी के लिए वरदान

गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन A में बदलता है, जो आंखों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है. अदरक में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आंखों की सूजन और थकान को कम करने में मदद करते हैं.

रोग प्रतिरोधक क्षमता को करे मजबूत

गाजर और अदरक दोनों ही इम्युनिटी बूस्ट करने वाले तत्वों से भरपूर हैं. अदरक का एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण शरीर को संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है, जबकि गाजर शरीर को अंदर से मज़बूत बनाता है.

दिल की सेहत का रखे ख्याल

इस रस में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं. अदरक खून के थक्के जमने से रोकता है, जबकि गाजर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है, जो दोनों ही दिल के लिए फायदेमंद हैं.

स्किन ग्लो और बालों में सुधार

गाजर और अदरक का रस स्किन के डिटॉक्स में मदद करता है. इससे पिंपल्स, दाग-धब्बे कम होते हैं और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है. इसमें मौजूद विटामिन C और A बालों की जड़ों को मजबूती देते हैं और हेयर फॉल कम करने में सहायक हैं.

वजन घटाने में भी असरदार

अगर आप वजन घटाने की कोशिश में हैं तो ये ड्रिंक आपके लिए मददगार हो सकता है. गाजर कम कैलोरी वाला होता है और अदरक मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे फैट तेजी से बर्न होता है.

पाचन तंत्र को करे बेहतर

अदरक जहां गैस, अपच और सूजन में राहत देता है, वहीं गाजर फाइबर से भरपूर होता है जो मल को साफ और पाचन को दुरुस्त करता है. सुबह खाली पेट इसका सेवन पेट के लिए वरदान है.

कैसे बनाएं गाजर-अदरक का रस?

2 मीडियम गाजर

1 इंच अदरक का टुकड़ा

1 कप पानी

नींबू और शहद (स्वाद अनुसार)

गाजर और अदरक को अच्छी तरह धोकर काट लें.
मिक्सी में थोड़ा पानी डालकर ब्लेंड करें.
छानकर रस निकालें और ऊपर से थोड़ा नींबू और शहद मिलाकर सेवन करें.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Yogasanas are Effective for Health: सूर्य नमस्कार से लेकर नौकासन तक, ये योगासन कफ दोष को संतुलित करने में होते हैं बेहद असरदार

आयुर्वेद के मुताबिक, शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. कफ, जो पृथ्वी और जल तत्वों से जुड़ा है, शरीर में स्थिरता और चिकनाई प्रदान करता है. लेकिन, असंतुलन होने पर यह कई समस्याओं की वजह भी बन सकता है. इससे आलस्य, बलगम और सर्दी-खांसी के साथ वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में कई योगासन कफ दोष को संतुलित करने में कारगर है.

नियमित योगासन करने से संतुलित होता है कफ दोष 

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आयुष मंत्रालय के मुताबिक, ये योगासन नियमित करने से कफ दोष संतुलित होता है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है. इन्हें खाली पेट और योग एक्सपर्ट की सलाह से करना चाहिए. एक्सपर्ट बताते हैं कि कफ दोष असंतुलन कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे दूर न किया जा सके. इस समस्या से पार पाने में कई योगासन प्रभावी हैं. इनमें सूर्य नमस्कार, उत्कटासन, उष्ट्रासन, धनुरासन, त्रिकोणासन, नौकासन, पवनमुक्तासन, मार्जरी-वत्सला, अधोमुख श्वानासन समेत अन्य योग शामिल हैं.

सूर्य नमस्कार 8 आसनों का समूह है, जो पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है. यह रक्त संचार को बेहतर करता है, बल्कि आलस्य कम करता है और फेफड़ों को मजबूत कर बलगम की समस्या को दूर करता है. उत्कटासन, जांघों और कूल्हों को मजबूती देता है. यह मेटाबॉलिज्म को भी तेज करता है, जिससे कफ के कारण होने वाली सुस्ती और भारीपन कम होता है.

उष्ट्रासन छाती को फैलाता है, जिससे श्वसन तंत्र मजबूत होता है. यह बलगम को कम करने और सांस लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मददगार है. इसके साथ ही त्रिकोणासन शरीर से कफ को निकालने में सहायक है. यह तनाव और चिंता को कम करता है, साथ ही पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है.

पेट की चर्बी घटाने और पाचन सुधारने में मददगार

धनुरासन छाती को फैलाता है और फेफड़ों को खोलता है, जिससे श्वसन संबंधी समस्याएं कम होती हैं. यह पेट की चर्बी घटाने और पाचन सुधारने में भी मदद करता है. वहीं, नौकासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन तंत्र को सक्रिय कर गैस और कब्ज की समस्या को दूर करता है. वहीं, पवनमुक्तासन शरीर में जमी गैस को निकालता है और कफ के कारण होने वाली पाचन समस्याओं को ठीक करता है.

वहीं, मार्जरी-वत्सला रीढ़ को लचीलापन देता है और श्वसन तंत्र को बेहतर बनाकर कफ को नियंत्रित करता है. अधोमुख श्वानासन रक्त संचार को बढ़ाता है, तनाव कम करता है और फेफड़ों को मजबूत कर कफ से राहत दिलाता है.

इसके अलावा, दिनचर्या में व्यायाम, सुबह-शाम वॉक करना, डांस जैसी गतिविधियों को शामिल कर रक्त संचार, गर्मी और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाकर कफ दोष को संतुलित करने में मदद मिलती है. इसके साथ ही एक्सपर्ट सही खानपान की भी सलाह देते हैं.

Travel Tips: दलमा वन्यजीव अभयारण्य है प्रकृति, रोमांच और जैव विविधता का अनोखा मेल

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में स्थित दलमा वन्यजीव अभयारण्य (Dalma Wildlife Sanctuary) प्रकृति प्रेमियों, साहसिक यात्रियों और वन्यजीव उत्साही लोगों के लिए एक आदर्श गंतव्य है। यह अभयारण्य जमशेदपुर से लगभग 10-15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और 195 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह क्षेत्र दलमा पहाड़ियों में स्थित है, जिनकी ऊँचाई समुद्र तल से 915 मीटर तक है।

जैव विविधता और वन्यजीव

दलमा अभयारण्य भारतीय हाथियों की महत्वपूर्ण आबादी के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा, यहाँ तेंदुआ, स्लॉथ भालू, भौंकने वाला हिरण, जंगली सूअर, चीतल, सांभर, भारतीय गौर, भारतीय पैंगोलिन, भारतीय साही, उड़ने वाली गिलहरी, भारतीय खरगोश और रीसस मकाक जैसे स्तनधारी पाए जाते हैं। पक्षियों में मोर, भारतीय रोलर, भारतीय पिट्टा, मालाबार पाइड हॉर्नबिल, क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल, ओरिएंटल हनी बज़र्ड, पीले पाँव वाला हरा कबूतर, व्हाइट-रम्प्ड शामा, ब्लैक ड्रोंगो, भारतीय पैराडाइज फ्लाईकैचर, भारतीय रॉबिन, ग्रेटर कूकल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल और चेंजेबल हॉक-ईगल प्रमुख हैं। सरीसृपों में भारतीय अजगर, किंग कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल वाइपर, भारतीय मॉनिटर लिज़र्ड, कॉमन इंडियन स्किंक, कॉमन इंडियन गिरगिट और भारतीय गार्डन लिज़र्ड शामिल हैं।

वनस्पति और प्राकृतिक सौंदर्य

अभयारण्य में मुख्यतः सूखी मिश्रित पर्णपाती वनस्पति पाई जाती है, जिसमें साल, महुआ, बांस, जामुन, आम, नीम, शीशम, अर्जुन, करंज, कदम और अन्य स्थानीय प्रजातियाँ शामिल हैं। दलमा पहाड़ियों की हरियाली और शांत वातावरण इसे ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षक बनाते हैं।

प्रमुख गतिविधियाँ

ट्रेकिंग और हाइकिंग: दलमा पहाड़ियों में ट्रेकिंग के लिए कई मार्ग हैं, जो 2500 फीट तक की ऊँचाई तक जाते हैं। इन मार्गों पर चलते हुए पर्यटक दलमा टॉप और शिव मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

पक्षी अवलोकन: यह अभयारण्य लगभग 300 प्रजातियों के पक्षियों का घर है, जो पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है।

प्रकृति व्याख्या केंद्र (NIC): मकुलाकोचा प्रवेश द्वार के पास स्थित यह केंद्र पर्यटकों को अभयारण्य की जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों की जानकारी प्रदान करता है।

कैसे पहुँचें

सड़क मार्ग: दलमा अभयारण्य NH-33 के पास स्थित है और जमशेदपुर से लगभग 10-15 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ तक पहुँचने के लिए निजी वाहन या टैक्सी का उपयोग किया जा सकता है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन टाटानगर जंक्शन है, जो अभयारण्य से लगभग 20-25 किलोमीटर दूर है।

वायु मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, रांची है, जो अभयारण्य से लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

यात्रा का सर्वोत्तम समय

दलमा अभयारण्य की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, जब मौसम सुखद और ठंडा होता है। मानसून के दौरान (जुलाई से सितंबर) यहाँ की हरियाली और जल स्रोतों की सुंदरता बढ़ जाती है, लेकिन भारी वर्षा के कारण फिसलन और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ हो सकती हैं।

यात्रा सुझाव

अभयारण्य में प्रवेश के लिए अनुमति आवश्यक हो सकती है; यात्रा से पहले स्थानीय अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करें।

अभयारण्य के अंदर फिसलन हो सकती है; उचित जूते पहनें और बच्चों पर विशेष ध्यान दें।

स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण का सम्मान करें; कचरा न फैलाएँ और वन्यजीवों को परेशान न करें।

दलमा वन्यजीव अभयारण्य न केवल झारखंड का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, बल्कि यह भारत के जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य का भी प्रतीक है। यदि आप प्रकृति, वन्यजीव और रोमांच का संगम अनुभव करना चाहते हैं, तो दलमा अभयारण्य की यात्रा अवश्य करें।