भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भूकंप की वजह से लोगों को घरों से निकल कर बाहर आना पड़ा। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक शनिवार की सुबह 5 बजकर 16 मिनट पर अफगानिस्तान में भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.7 दर्ज की गई। वहीं इस भूकंप का केंद्र काबुल के पास था। भूकंप का असर अफगानिस्तान के अलावा पाकिस्तान के भी कई इलाकों में महसूस किया गया। फिलहाल इस भूकंप की वजह से किसी नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन सुबह-सुबह भूकंप आने की वजह से लोगों में दहशत का माहौल है।
इससे पहले भारत से सीमा साझा करने वाले देश म्यांमार में शुक्रवार को एक के बाद एक भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। इसमें सबसे शक्तिशाली भूकंप 7.7 की तीव्रता का रहा। म्यांमार में भूकंप का केंद्र मांडले शहर के पास था। इस भूकंप की वजह से म्यांमार में 694 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 1700 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आ रही है। वहीं मौतों और घायलों का आंकड़ा अभी और भी बढ़ सकता है। इस भूकंप में म्यांमार की कई इमारतों, पुल और बांध को नुकसान हुआ है।
थाईलैंड समेत कई देशों तक असर
म्यांमार में आए इस शक्तिशाली भूकंप का असर थाईलैंड तक देखने को मिला। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी भूकंप की वजह से काफी नुकसान हुआ है। यहां एक निर्माणाधीन इमारत देखते ही देखते धराशाई हो गई, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं भूकंप के बाद लोग ऊंची इमारतों से निकल कर सड़कों पर खड़े दिखाई दिए। इसके अलावा बांग्लादेश और पूर्वोत्तर भारत के भी कई राज्यों में भूकंप के घटके महसूस किए गए। शुक्रवार की आधी रात को भी म्यामांर में 4.2 की तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया।
म्यांमार में शुक्रवार को आए शक्तिशाली भूकंप की वजह से भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में भारत ने सहायता के तौर पर म्यांमार को 15 टन राहत सामग्री भेजी है। सूत्रों ने बताया कि हिंडन में मौजूद भारत वायुसेना के स्टेशन हिंडन से भारतीय वायुसेना (आईएएफ) सी-130जे विमान में सवार होकर म्यांमार को राहत सामग्री भेजी गई। सूत्रों के अनुसार, राहत पैकेज में टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, हाइजीन किट, सोलर लैंप, जनरेटर सेट और पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, सीरिंज, दस्ताने और पट्टियां जैसी आवश्यक जीचें शामिल हैं।
बता दें कि म्यांमार में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। इससे न सिर्फ म्यांमार बल्कि थाईलैंड में भी काफी नुकसान हुआ है। वहीं भूकंप के बाद से लोगों में दहशत का माहौल है। एक तरफ जहां दिन भर म्यांमार में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए तो वहीं रात में भी 11 बजकर 56 मिनट पर 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार इस भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी, जिससे यह आफ्टरशॉक के लिए अतिसंवेदनशील माना जा रहा है। इसके सेंटर म्यांमार के शहर मांडले के पास रहा। म्यांमार में भूकंप से करीब 694 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है, जबकि 1700 से अधिक लोग घायल हैं। वहीं मौतों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।
थाईलैंड में भी दिखा असर
इससे पहले दिन में म्यांमार में कई भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसमें रिक्टर स्केल पर 7.7 की तीव्रता का एक बड़ा भूकंप भी शामिल था। इसके कुछ मिनट बाद ही 6.4 और फिर 4.9 की तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया। ये भूकंप शुक्रवार की सुबह 11:50 बजे (स्थानीय समयानुसार) आया। ये शक्तिशाली भूकंप बैंकॉक और थाईलैंड के कई हिस्सों में महसूस किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों की रिपोर्ट और स्थानीय मीडिया के अनुसार बैंकॉक में हिलती हुई इमारतों से सैकड़ों लोग बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में भूकंप की तीव्रता के कारण स्विमिंग पूल से पानी निकलता हुआ दिखाया गया।
पीएम मोदी ने जताई चिंता
इससे पहले पीएम मोदी ने एक पोस्ट में शुक्रवार को म्यांमार और थाईलैंड में भीषण भूंकप के कारण उत्पन्न स्थिति पर चिंता जताई। पीएम मोदी ने कहा कि इस घड़ी में भारत दोनों देशों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप के मद्देनजर पैदा हुई स्थिति से चिंतित हूं। सभी की सुरक्षा और भलाई के लिए प्रार्थना करता हूं। भारत हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।’
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद के लिए समय निकाल पाना काफी मुश्किल हो गया है। ऐसे में लोगों को तरह-तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। वहीं हाई ब्लड प्रेशर की समस्या आम हो चुकी है। हर दूसरा व्यक्ति हाइपरटेंशन से परेशान है। इसकी वजह से स्ट्रोक या हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में हाई बीपी की समस्या को कंट्रोल में रखने के लिए दवाओं के साथ-साथ सही खानपान की भी जरूरत होती है।
हालांकि कुछ खास बीजों को अपनी डाइट में शामिल करके आप नेचुरल तरीके से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है। बता दें कि अगर आप अपनी डाइट में चिया और अलसी के बीजों को शामिल करते हैं, तो हाई बीपी को कंट्रोल कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि अलसी और चिया सीड्स किस तरह से बीपी को कंट्रोल कर सकते हैं।
अलसी के बीज
अलसी के बीजों में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो धमनियों को मजबूत बनाने में सहायता करता है। इसके सेवन से ब्लड फ्लो बेहतर होता है और फाइबर कोलेस्ट्रॉल को सुधारता है। वहीं इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट ब्लड प्रेशर को कम करता है। इसके साथ ही इसमें मौजूद मैग्नीशियम और पोटेशियम हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर करता है। अलसी के बीजों में पाया जाने वाला पोटेशियम रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करता है।
चिया सीड्स
चिया सीड्स में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते हैं। इसमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करता है। साथ ही यह ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है। चिया सीड्स में मौजूद पोटेशियम शरीर में सोडियम का बैलेंस बनाए रखता है, जिससे बीपी कंट्रोल में रहता है। फाइबर कोलेस्ट्रॉल कम होता है और इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड प्रेशर को नेचुरली कम करने में मदद करता है।
ऐसे करें सेवन
आप इन बीजों को रोस्ट करके खा सकते हैं।
चिया और अलसी के बीजों को स्मूदी में मिलाकर पिएं।
सलाद पर छिड़क कर खाएं।
सूप या सलाद में भी आप इन बीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ देश का एक प्रमुख और बेहद खूबसूरत राज्य है। साल 2000 में यह राज्य मध्यप्रदेश से अलग होकर बना था। इसको देश का 26वां राज्य माना जाता है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर है। छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक, प्राकृतिक विविधता और पारंपरिक इतिहास के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है, जो जंगलों से घिरा है और लोकप्रिय हॉलिडे डेस्टिनेशन के रूप में विकसित हो रहा है।
छत्तीसगढ़ में स्थित मैनपाट, बर्नवापारा वन्यजीव अभयारण्य, चित्रकूट, रायपुर और भिलाई जैसी फेमस जगहों को एक्सप्लोर करने के लिए हर महीने हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ में मौजूद सरगुजा एक ऐसी अद्भुत और खूबसूरत जगह है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सरगुजा की खासियत और पास में स्थित कुछ खूबसूरत जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं।
सरगुजा
सरगुजा छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख जिला है, जिसका मुख्यालय अंबिकापुर है। यह राज्य के उत्तरी भाग में स्थित है। इसके अलावा यह झारखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा की सीमा के काफी करीब है। सरगुजा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 327 किमी दूर है
सरगुजा का इतिहास
सरगुजा अपनी खूबसूरती के अलावा इतिहास के बारे में भी जाना जाता है। इसलिए आपको सरगुजा का इतिहास जानना बहुत जरूरी है। रामायण काल में इस स्थान को दंडकारण्य के नाम से जाना जाता था। तो वहीं कई अन्य लोगों का मानना है कि इसको पहले डांडोर के नाम से भी जाना जाता था।
एक अन्य मिथक के मुताबिक मौर्य वंश के आगमन से पहले यह क्षेत्र नंदा वंश के भगवान नंदा वंश के अधीन था। इस क्षेत्र में कई नक्काशी और पुरातन अवशेषों को भी देखा जा सकता है।
इस जगह की खासियत
सरगुजा के बारे में बताया जाता है कि यह जिले का करीब आधे से अधिक हिस्सा जंगलों से घिर है। इसकी सीमा पर ओडिशा, झारखंड और उत्तर प्रदेश है।
सरगुजा के बारे में बताया जाता है कि यहां के जंगलों में पांडो और कोरवा जैसी आदिवासी जनजातियां रहती हैं। यहां का शांत और शुद्ध वातावरण पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है। पर्यटक यहां पर सुकून के पल बिताने के लिए पहुंचते हैं।
क्यों है इतना खास
पर्यटकों के लिए यह जगह जन्नत मानी जाती है। जो पर्यटक प्रकृति से प्रेम करते हैं, उनके लिए यह जगह स्वर्ग से कम नहीं है। आप यहां पर ऊंचे-ऊंचे पहाड़, हरियाली, झील-झरने और लुभावने दृश्यों को देखकर खुशी से झूम उठेंगे।
सरगुजा अपनी खूबसूरती के अलावा एडवेंचर एक्टिविटी के लिए भी जाना जाता है। यहां पर आप हाईकिंग, ट्रैकिंग और कैंपिग आदि का लुत्फ उठा सकते हैं।
घूमने की बेस्ट जगहें
बता दें कि सरगुजा में ऐसी कई हसीन और शानदार जगहें मौजूद हैं, जिन्हें आपको एक्सप्लोर करना चाहिए। आप यहां पर तिब्बत मंदिर, टाइगर पॉइंट, चेंद्रा वॉटरफॉल, महामाया मंदिर, रामगढ़ पहाड़, दुर्गा मंदिर और फिश पॉइंट जैसी धार्मिक और बेहद खूबसूरत जगहें एक्सप्लोर कर सकते हैं।
एनवायरमेंट वॉरियर्स 3.0: पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूत करने के लिए एफआरएच मुस्तफाबाद में हुआ भव्य आयोजन, वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना और भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प दोहराया
इंटरस्कूल क्विज व डिबेट प्रतियोगिता के विजेताओं को नगद पुरस्कार और तीन छात्रों को लैपटॉप प्रदान किए गए
वन एवं पर्यावरण मंत्री ने प्राइड ऑफ तराई और प्राइड ऑफ पीलीभीत अवार्ड से किया विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह और वन मंत्री अरुण सक्सेना ने 2 सोलर वाटर होल्स और डिजिटल सशक्तिकरण केंद्र का किया लोकार्पण
जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों पर डॉ. राजेश्वर सिंह का संदेश – ‘अब नहीं तो कभी नहीं’
पीलीभीत: वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुस्तफाबाद फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में विशेष कार्यक्रम ‘एनवायरमेंट वॉरियर्स 3.0’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन माँ पीताम्बरा और अम्बालिका फाउंडेशन के सहयोग से संचालित ‘एनवायरमेंट वॉरियर्स’ संस्था द्वारा किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना और सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इंटरस्कूल क्विज और डिबेट प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाया शानदार प्रदर्शन
इस कार्यक्रम के अंतर्गत 10 स्थानीय इंटर कॉलेजों के छात्रों के बीच इंटरस्कूल क्विज और डिबेट प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में सेंट अलोइसुस कॉलेज और लिटिल एंजेल स्कूल की टीमों ने प्रथम स्थान प्राप्त कर ₹20,000 की पुरस्कार राशि जीती। द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली लिटिल एंजेल स्कूल व बेन हर पब्लिक स्कूल की टीमों को ₹10,000 और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली मॉडल बालिका इंटर कॉलेज व गोस्वामी मॉम्स प्राइड इंटर कॉलेज की टीमों को ₹5,000 की राशि दी गई।
साथ ही, प्रत्येक प्रतियोगिता के 10 प्रतिभागियों को ₹1000 की सांत्वना राशि प्रदान की गई। इसके अलावा, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा पर्यावरण से संबंधित प्रश्नों का सही उत्तर देने वाले तीन मेधावी छात्रों – समर्थ शुक्ला, प्रियांशी गंगवार और दिव्यांशी पाल को लैपटॉप प्रदान कर सम्मानित किया गया।
प्राइड ऑफ तराई और प्राइड ऑफ पीलीभीत अवार्ड से विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री द्वारा ‘प्राइड ऑफ पीलीभीत’ और ‘प्राइड ऑफ तराई’ अवार्ड प्रदान किए गए। सामाजिक एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले पीलीभीत के राजीव श्रीवास्तव, अमन श्रीवास्तव, ज़ीशान अली, श्याम बिहारी और मुख्तियार को ‘प्राइड ऑफ पीलीभीत’ सम्मान से नवाजा गया। वहीं, मनीष मल्होत्रा, डॉ. पियूष अग्रवाल, डॉ. छवि सहोता, पी.सी. मिश्रा, अतुल सिंह और राजीव अग्रवाल को ‘प्राइड ऑफ तराई’ अवार्ड से सम्मानित किया गया।
सोलर वाटर होल्स और डिजिटल सशक्तिकरण केंद्र का लोकार्पण
इस अवसर पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह और वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने पीलीभीत वन क्षेत्र में वन्य जीव संरक्षण के लिए दो सोलर वाटर होल्स का उद्घाटन किया। इसके अलावा, प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी में एक स्मार्ट क्लास और ‘रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं सशक्तिकरण केंद्र’ का भी लोकार्पण किया गया। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 10 सिलाई मशीनें प्रदान कर तारा शक्ति केंद्र की भी शुरुआत की गई।
वन संरक्षण के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप जरूरी – डॉ. राजेश्वर सिंह
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि औद्योगिक क्रांति के बाद से वैश्विक तापमान में 1.2°C की वृद्धि हुई है, और यदि यह 1.5°C तक पहुंचा तो मुंबई जैसे तटीय शहर जलमग्न हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ‘2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक हो सकती है, अगर हमने अभी सख्त कदम नहीं उठाए।’ उन्होंने युवाओं को सतत विकास, सौर ऊर्जा और डिजिटल शिक्षा अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वन मंत्री डॉ. अरुण सक्सेना के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यूपी में अब तक 2 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण किए गए हैं, जिससे वन क्षेत्र में 559.19 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है।
वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने की संस्था के प्रयासों की सराहना
वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने ‘एनवायरमेंट वॉरियर्स’ संस्था की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के अभियानों से वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के विकास और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जनसहभागिता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशेष अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अनुराधा वेनुरु, रेरा अपीलीय अधिकरण के सदस्य रामेश्वर सिंह, जिला वन अधिकारी मनीष सिंह, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक विजय सिंह, भरत कुमार, एडवोकेट निखिल शर्मा, अंबिकेश्वर पांडेय, डॉ. श्वेता मिश्रा, अजय गुप्ता, सिद्धार्थ हरीश सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
‘एनवायरमेंट वॉरियर्स 3.0’ अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाई बल्कि वन्यजीव संरक्षण, डिजिटल शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया। यह पहल भविष्य में पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।