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सीएम योगी ने बनाया यूपी को सबसे सुरक्षित, सबसे प्रगतिशील, असीमित संभावनाओं वाला ‘सर्वोत्तम प्रदेश’- डॉ.राजेश्वर सिंह

  • शुरू हुआ अनंत नगर (मोहान रोड) परियोजना का पंजीकरण, विधायक डॉ. सिंह ने सीएम योगी का जताया आभार
  • अनंतनगर आवासीय योजना का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा शुभारंभ लखनऊ को मिली अब तक की सबसे बड़ी हाईटेक रिहायशी परियोजना

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा 785 एकड़ में प्रस्तावित अनंत नगर (मोहान रोड) आवासीय योजना का पंजीकरण कार्य शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कर-कमलों द्वारा शुभारंभ किया गया। यह परियोजना न केवल लखनऊ की अब तक की सबसे बड़ी आवासीय योजना है, बल्कि उत्तर प्रदेश के समग्र विकास और शहरी विस्तार का एक नया अध्याय भी है। सीएम आवास पर आयोजित किस कार्यक्रम में सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह भी उपस्थित रहे।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए कहा: “6,500 करोड़ की लागत से तैयार की जा रही यह परियोजना 1.5 लाख से अधिक नागरिकों को आवासीय सुविधा प्रदान करेगी। योजना के अंतर्गत ईडब्लूएस और लो इनकम ग्रुप्स श्रेणियों के लिए 5,000 भवनों का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे लगभग 25,000 लोगों को लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 3,000 भवनों का निर्माण भी किया जाएगा। विधायक ने यह भी जोड़ा कि योजना के अंतर्गत 130 एकड़ क्षेत्र में हरित पार्क विकसित किया जाएगा, साथ ही 103 एकड़ भूमि में उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी एजुकेशन सिटी की स्थापना होगी। इस हाइ-टेक सिटी को इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेस वे और आउटर रिंग रोड जैसी कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है, जिससे यह एक आधुनिक और आत्मनिर्भर नगरी के रूप में उभरेगी।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और विजन की सराहना की :

विधायक डॉ. सिंह ने सीएम योगी की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की दूरदर्शी नीतियों के कारण लखनऊ आज सुरक्षा के दृष्टिकोण से देश में अग्रणी है, ईज ऑफ़ लिविंग रैंकिंग में पहले नंबर और देश का दूसरा सबसे खुशहाल शहर बन चुका है। लखनऊ, अब देशभर के लोगों का पसंदीदा आवासीय शहर बनता जा रहा है।

सरोजनीनगर विधान सभा क्षेत्र में 45 और लखनऊ में 20 साल बाद आई एलडीए की योजना :

डॉ. सिंह ने आगे जोड़ा करीब 45 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सरोजनीनगर क्षेत्र में आई यह योजना क्षेत्र के लोगों के लिए विकास का नया द्वार खोलने जा रही है। डॉ सिंह ने लखनऊ को सपनों का शहर और यूपी को सबसे सुरक्षित, सबसे प्रगतिशील, असीमित संभावनाओं वाला ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ बनाने के लिए सीएम योगी का आभार व्यक्त किया।

यूपी में सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली में जबरदस्त सुधार: उ.प्र. कोऑपरेटिव बैंक ने 2024-25 में अर्जित किया रिकॉर्ड ₹100.24 करोड़ का लाभ, डिपॉजिट और ऋण वितरण में भी ऐतिहासिक वृद्धि: सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साझा की जानकारी

यूपी में सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली में जबरदस्त सुधार: उ.प्र. कोऑपरेटिव बैंक ने 2024-25 में अर्जित किया रिकॉर्ड ₹100.24 करोड़ का लाभ, डिपॉजिट और ऋण वितरण में भी ऐतिहासिक वृद्धि: सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साझा की जानकारी
यूपी में सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली में जबरदस्त सुधार: उ.प्र. कोऑपरेटिव बैंक ने 2024-25 में अर्जित किया रिकॉर्ड ₹100.24 करोड़ का लाभ, डिपॉजिट और ऋण वितरण में भी ऐतिहासिक वृद्धि: सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साझा की जानकारी
यूपी में सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली में जबरदस्त सुधार: उ.प्र. कोऑपरेटिव बैंक ने 2024-25 में अर्जित किया रिकॉर्ड ₹100.24 करोड़ का लाभ, डिपॉजिट और ऋण वितरण में भी ऐतिहासिक वृद्धि: सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साझा की जानकारी
  • सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर बोले – “प्रदेश सरकार की नीतियों से सहकारी बैंकों को मजबूती, शिक्षित युवाओं को रोजगार मिलने में मदद”
  • 50 जिला सहकारी बैंकों ने भी अर्जित किया ₹162 करोड़ का लाभ
  • बैंक का नेटवर्थ 74% बढ़कर ₹1516.43 करोड़, डिपॉजिट 105% बढ़ा
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सहकारी क्षेत्र में आई मजबूत

लखनऊ, 3 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं। उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹100.24 करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है। इसी तरह, 50 जिला सहकारी बैंकों ने ₹162 करोड़ का मुनाफा कमाया, जो 2016-17 की तुलना में 118% की वृद्धि को दर्शाता है।

उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जे.पी.एस. राठौर ने उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक के मुख्यालय, महात्मा गांधी मार्ग, लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और सरकार की प्रभावी नीतियों के चलते सहकारी बैंकिंग सेक्टर में जबरदस्त सुधार हुआ है।

उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक की ऐतिहासिक उपलब्धियां

2016-17 से 2024-25 तक बैंक की ग्रोथ

वित्तीय वर्षशुद्ध लाभ (₹ करोड़)डिपॉजिट (₹ करोड़)ऋण वितरण (₹ करोड़)एनपीए (%)
2016-17₹32.82 करोड़₹6396.86 करोड़₹9189.92 करोड़5.70%
2021-22₹50.70 करोड़
2022-23₹60.76 करोड़
2023-24₹72.83 करोड़
2024-25₹100.24 करोड़₹13116.72 करोड़₹23061.51 करोड़2.70%
  • नेटवर्थ में 74% की बढ़ोतरी – 2016-17 में बैंक का नेटवर्थ ₹870.28 करोड़ था, जो 2024-25 में ₹1516.43 करोड़ तक पहुंच गया।
  • डिपॉजिट में 105% की वृद्धि – 2016-17 में बैंक का कुल डिपॉजिट ₹6396.86 करोड़ था, जो अब ₹13116.72 करोड़ हो गया।
  • ऋण वितरण में 150% की बढ़ोतरी – 2016-17 में कुल ऋण वितरण ₹9189.92 करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर ₹23061.51 करोड़ हो गया।
  • एनपीए में जबरदस्त कमी – 2016-17 में बैंक का एनपीए 5.70% था, जो अब घटकर 2.70% रह गया।

50 जिला सहकारी बैंकों की शानदार परफॉर्मेंस

उत्तर प्रदेश के 50 जिला सहकारी बैंकों ने भी इस वर्ष जबरदस्त प्रदर्शन किया है। 2024-25 में इन बैंकों ने ₹162 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो 2016-17 की तुलना में 118% अधिक है।

जिला सहकारी बैंकों की मुख्य उपलब्धियां

  • कुल व्यवसाय – 2016-17 में ₹28,349.14 करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर ₹40,442.84 करोड़ हो गया।
  • डिपॉजिट में 53.39% की वृद्धि – 2016-17 में ₹16,261.88 करोड़ था, जो 2024-25 में ₹24,942.84 करोड़ तक पहुंचा।
  • एनपीए में कमी – 2016-17 में 12.81% था, जो अब घटकर 5.22% रह गया।
  • धारा-11 का अनुपालन – 2016-17 में 16 बैंक धारा-11 के मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे, लेकिन अब सभी बैंक इस नियम का पालन कर रहे हैं।
  • लाभ में चलने वाले बैंकों की संख्या – 2016-17 में 39 बैंक लाभ में थे, जबकि अब 49 बैंक मुनाफे में चल रहे हैं।

रोजगार और स्वरोजगार के लिए बैंक की योजनाएं

उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक MSME ऋण योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, PM विश्वकर्मा योजना, PMFME योजना और मुख्यमंत्री युवा योजना जैसी योजनाओं के जरिए शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में मदद कर रहा है।

  • 2024-25 में MSME योजनाओं के तहत ₹24 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए गए।
  • मुख्यमंत्री द्वारा 75.68 करोड़ रुपए की डिविडेंड राशि का वितरण किया गया।
  • 15 जिला सहकारी बैंकों ने CGTMSE गारंटी कवर के लिए आवेदन किया, जिनमें से 4 को स्वीकृति मिल गई।

“सहकार से समृद्धि” योजना से सहकारिता को नया आयाम

भारत सरकार द्वारा 6 जुलाई 2021 को पृथक सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी संस्थाओं को अधिक व्यावसायिक और पारदर्शी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

  • “सहकार से समृद्धि” योजना के तहत पैक्स को बहुउद्देशीय बनाया गया।
  • उत्तर प्रदेश की सभी पैक्स में मॉडल बायलॉज लागू किए गए।
  • 7500 बी-पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता आएगी।
  • 328 समितियों में सोलर रूफटॉप की स्थापना का शुभारंभ हुआ।

सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर का बयान

उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जे.पी.एस. राठौर ने कहा कि “प्रदेश सरकार की नीतियों और योजनाओं से सहकारी बैंकों की स्थिति मजबूत हुई है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजित हो रहे हैं। हमारी सरकार सहकारिता क्षेत्र को और भी पारदर्शी और समृद्ध बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।”

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए कदमों से राज्य में सहकारी बैंकों की स्थिति में जबरदस्त सुधार हुआ है। इन बैंकों की बढ़ती संपत्ति, कम होता एनपीए, बढ़ते लाभ और नए रोजगार के अवसर प्रदेश के आर्थिक विकास को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

True News Up की विशेष रिपोर्ट

पर्यावरण संरक्षण और आग से बचाव पर सरोजनीनगर विधायक ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव: आग से विश्वभर में भारी नुकसान, सतर्कता और समाधान की आवश्यकता- डॉ. राजेश्वर सिंह

पर्यावरण संरक्षण और आग से बचाव पर सरोजनीनगर विधायक ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव: आग से विश्वभर में भारी नुकसान, सतर्कता और समाधान की आवश्यकता- डॉ. राजेश्वर सिंह
पर्यावरण संरक्षण और आग से बचाव पर सरोजनीनगर विधायक ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव: आग से विश्वभर में भारी नुकसान, सतर्कता और समाधान की आवश्यकता- डॉ. राजेश्वर सिंह
पर्यावरण संरक्षण और आग से बचाव पर सरोजनीनगर विधायक ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव: आग से विश्वभर में भारी नुकसान, सतर्कता और समाधान की आवश्यकता- डॉ. राजेश्वर सिंह
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि वैश्विक स्तर पर जंगल की आग से 2023 में 1.19 करोड़ हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई, जिससे भारी आर्थिक और पर्यावरणीय नुकसान हुआ।
  • 2001-2023 के दौरान 16.5 लाख हेक्टेयर वृक्ष आवरण नष्ट हुआ, 2023-24 में 2,03,544 फायर स्पॉट दर्ज किए गए, जिसमें उत्तराखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सबसे अधिक प्रभावित रहे।
  • जलवायु संरक्षण, वन संरक्षण, एआई आधारित आग पहचान प्रणाली, और अग्निशमन क्षमता बढ़ाने जैसे कदम आग से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।
  • उत्तर प्रदेश में 210 करोड़ पौधे लगाए गए, जिससे वन क्षेत्र 559.19 वर्ग किलोमीटर बढ़ा, और हरित ऊर्जा को बढ़ावा दिया गया।
  • रुद्राक्ष वृक्षारोपण, 50 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता, जल संरक्षण परियोजनाएं और प्लास्टिक मुक्त अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

लखनऊ: आग और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों पर चिंता व्यक्त करते हुए सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा किया। उन्होंने आग से होने वाले वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे नुकसान का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की चर्चा की।

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट कर विधायक ने लिखा आग विश्व भर और भारत में भारी नुकसान का कारण बन रही है। वैश्विक स्तर पर, 2023 में जंगल की आग ने 90 लाख हेक्टेयर वृक्ष आवरण को नष्ट किया, जबकि कुल आग से संबंधित हानि 1.19 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंची। आर्थिक रूप से, अमेरिका में जंगल की आग से सालाना 3.94 से 8.93 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है, जिसमें 2025 के लॉस एंजिल्स की आग से 2.50-2.75 लाख करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है।

विधायक ने आगे जोड़ा भारत में, 2001 से 2023 तक 16.5 लाख हेक्टेयर वृक्ष आवरण नष्ट हुआ, जिससे देश वैश्विक सूची में 45वें स्थान पर है। 2023-24 की गर्मियों में 2,03,544 फायर स्पॉट दर्ज किए गए, जो 2021-22 के 2,23,333 से कम हैं, फिर भी उत्तराखंड (21,033 घटनाएं), ओडिशा (20,973), और छत्तीसगढ़ (18,950) सबसे प्रभावित रहे। जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और मानवीय गतिविधियां इस संकट को बढ़ा रही हैं, जिससे मानव जीवन, पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

आग से होने वाली हानि को कम करने की रणनीतियां : आग लगने से होने वाली घटनाओं के प्रभाव को कम करने की रणनीतियों पका उल्लेख करते हुए विधायक ने आगे जोड़ा आग को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं, क्योंकि यह प्रकृति का हिस्सा है, लेकिन इसके प्रभाव को कम करना संभव है:

जलवायु संरक्षण: उत्सर्जन में कटौती और वृक्षारोपण से आग की तीव्रता घटाई जा सकती है।
रोकथाम: अपशिष्टों आदि के जलाने पर नियंत्रण, कृषि आग पर नियमन (भारत में 95% आग मानव-जनित), और वन संरक्षण।
तकनीक: बिजली ग्रिड का उन्नयन, एआई आधारित आग पहचान, और अग्नि-रोधी घर।
तैयारी: अग्निशमन क्षमता बढ़ाना, समुदायों को शिक्षित करना, और बीमा विस्तार।
सहयोग: वैश्विक और राष्ट्रीय डेटा (जैसे भारत का वन सर्वेक्षण) साझा कर बेहतर प्रबंधन।
पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण: सुरक्षित भविष्य की नींव

पर्यावरण संरक्षण के प्रभाव :
सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पोस्ट में उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को रेखांकित करते हुए लिखा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले आठ वर्षों में 210 करोड़ पौधे लगाए गए, जिससे राज्य में वन क्षेत्र 559.19 वर्ग किलोमीटर बढ़ा। राज्य के मुख्यमंत्री के संकल्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के अनुरूप सरोजनी नगर में वृक्षारोपण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरोजनीनगर में सतत विकास के लिए हरित पहल : विधायक डॉ. सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर किये अपने पोस्ट में जानकारी देते हुए लिखा :
वृक्षारोपण: रुद्राक्ष वृक्षारोपण महा अभियान के तहत 200 रुद्राक्ष पौधे लगाए गए, जिससे जैव-विविधता समृद्ध हुई।
हरित ऊर्जा: करीब 50 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की गई, साथ ही 1,000 से अधिक सौर स्ट्रीटलाइट और 125 से अधिक स्ट्रीट मास्ट लगाए गए।
इको फ्रेंडली अभियान: 25,000 से अधिक इको फ्रेंडली बैग छात्र- छात्राओं को वितरित किए गए, जिससे प्लास्टिक उपयोग कम हुआ।
जल संरक्षण: तीन तालाबों का विकास कर भूजल पुनर्भरण बढ़ाया गया। दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कार्यरत हैं, दो निर्माणाधीन हैं। तीन झीलों का विकास हुआ, एक और झील के विकास का कार्य प्रक्रियाधीन है।

अंत में सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने लिखा ये समर्पित पहल पर्यावरण संरक्षण, वनीकरण और स्थिरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को उजागर करती हैं, जो एक हरियाली भरे, स्वच्छ और अधिक फ्लेक्सिबल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

उत्तरप्रदेश में भीषण गर्मी और लू से बचाव हेतु प्रशासन सतर्क: प्रमुख सचिव राजस्व ने सभी जिलाधिकारियों को दिए जनता को जागरूक करने के निर्देश, प्रदेश में लू और हीटवेव से निपटने की तैयारी तेज

उत्तरप्रदेश में भीषण गर्मी और लू से बचाव हेतु प्रशासन सतर्क: प्रमुख सचिव राजस्व ने जनता को जागरूक करने के निर्देश, लू और हीटवेव से निपटने की तैयारी तेज, सभी जिलाधिकारियों को निर्देश
उत्तरप्रदेश में भीषण गर्मी और लू से बचाव हेतु प्रशासन सतर्क: प्रमुख सचिव राजस्व ने जनता को जागरूक करने के निर्देश, लू और हीटवेव से निपटने की तैयारी तेज, सभी जिलाधिकारियों को निर्देश
उत्तरप्रदेश में भीषण गर्मी और लू से बचाव हेतु प्रशासन सतर्क: प्रमुख सचिव राजस्व ने जनता को जागरूक करने के निर्देश, लू और हीटवेव से निपटने की तैयारी तेज, सभी जिलाधिकारियों को निर्देश
  • बिजली और पानी की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
  • हीटवेव के मद्देनजर सार्वजनिक स्थलों पर प्याऊ लगाने का अभियान चलेगा
  • अस्पतालों में लू से प्रभावित मरीजों के लिए दवाओं का समुचित भंडारण अनिवार्य
  • हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए छायादार स्थल विकसित किए जाएंगे
  • मजदूरों के लिए कार्य समय में राहत, स्कूलों का संचालन प्रातःकालीन सत्र में होगा

लखनऊ, 03 अप्रैल 2025 – उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और हीटवेव के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रमुख सचिव, राजस्व पी. गुरु प्रसाद ने गुरुवार को लाल बहादुर शास्त्री भवन (एनेक्सी) स्थित सभागार में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए कि भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए आमजन को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए

प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त मात्रा में पेयजल की व्यवस्था की जाए, जिससे किसी भी व्यक्ति को जल संकट का सामना न करना पड़े। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गर्मी और लू के चलते किसी भी बीमारी की स्थिति में चिकित्सा सुविधा तुरंत उपलब्ध कराई जाए

बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति के निर्देश

प्रमुख सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को बिजली और पानी की नियमित आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक बिजली कटौती से बचा जाए और गर्मी के दौरान पेयजल संकट न हो, यह सुनिश्चित किया जाए

मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार विशेष सतर्कता

उन्होंने कहा कि मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहेबुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के जिलों में विशेष निगरानी की जरूरत है, जहां पानी की समस्या गंभीर हो सकती है। इन क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाए और जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए इनकी निगरानी सुनिश्चित की जाए

प्याऊ, छायादार स्थल और श्रमिकों के लिए राहत उपाय

राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने निर्देश दिए कि हीटवेव के मद्देनजर सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगाने के लिए अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए अधिक से अधिक छायादार स्थल विकसित किए जाएं और श्रमिकों के कार्य समय में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक छूट दी जाए

अस्पतालों में विशेष इंतजाम और दवा भंडारण के निर्देश

राहत आयुक्त ने कहा कि अस्पतालों में हीटवेव के कारण अचानक भर्ती होने वाले मरीजों के लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध रहेंओआरएस पैकेट्स की व्यवस्था सभी स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनबाड़ी केंद्रों में की जाए। साथ ही, अस्पतालों में फायर सेफ्टी और अन्य आपातकालीन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए

अग्निशमन विभाग को किया गया अलर्ट

गर्मी के कारण शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए अग्निशमन विभाग को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। राहत आयुक्त ने कहा कि संभावित प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां पर्याप्त पेयजल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं

पशुओं के लिए भी जल और छाया की व्यवस्था

प्रशासन ने पशुपालन विभाग को निर्देश दिए हैं कि पशुशालाओं में भी पानी और छाया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि मवेशियों को भीषण गर्मी से बचाया जा सके।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी

बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व, राहत आयुक्त सहित सभी जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी और अन्य विभागों के 500 से अधिक अधिकारी शामिल हुए

प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आम जनता को भीषण गर्मी और लू से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं और सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं

इस एक्ट्रेस ने पति से अलग होने से किया था इनकार,7 साल बाद टूटी थी , आखिरकार मौत को लगाया गले।

70-80 के दशक में बॉलीवुड में कई अभिनेत्रियों ने एंट्री की। सब एक से बढ़कर एक खूबसूरत थीं। कई हीरोइनें उस दौर में ऐसी रहीं दो अपनी चमक बिखेरने में कामयाब रहीं। ऐसी ही एक अभिनेत्री के बारे में आज आपको बताएंगे। इन्होंने अपनी कमाल की एक्टिंग के दम पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं। फिल्मों के अलावा कई टीवी सीरियलों में भी काम किया और अपने एक्टिंग टैलेंट की बदौलत दर्शकों के दिलों को सालों तक जीतती रहीं। फिल्मी पर्दे पर ये शाहरुख खान की मां भी बनीं। करियर में सफलता हासिल करने वाली इस हसीना की पर्सनल लाइफ जरा भी आसान नहीं रही। जिंदगी में उतार-चढ़ाव देखते हुए उन्होंने 47 की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया। पति से अलग होने के बाद एक्ट्रेस ऐसी टूटी कि कैंसर से जंग लड़ने की हिम्मत भी खो दीं। अब कई सालों के बाद एक्ट्रेस के पति ने इस बारे में बात की है।

7 साल बाद टूटी थी शादी

हम जिस एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं ये कोई और नहीं बल्कि प्रिया तेंदुलकर हैं। 19 अक्टूबर 1954 को जन्मीं प्रिया तेंदुलकर का बचपन से ही आर्ट और कल्चर की ओर जुड़ाव था और होता भी क्यों न उनके पिता पद्मभूषण से सम्मानित जाने माने राइटर विजय तेंदुलकर थे। छोटी उम्र में ही प्रिया ने थिएटर में काम करना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्मों और टीवी सीरियल्स का रुख किया। फिल्मों में काम के दौरान ही प्रिया को एक्टर और राइटर करण राजदान से प्यार हो गया। 4 साल की डेटिंग के बाद दोनों ने शादी कर ली। सात साल तक ही दोनों की शादी चली और फिर तलाक हो गया। एक्ट्रेस ये तलाक कभी नहीं चाहती थीं। वो इससे टूट गई थीं। उन्होंने अपने पति से कई बार गुजारिश की थी कि वो तलाक न लें, लेकिन फिर भी पति की जिद पर तलाक हुआ और इसके बाद कैंसर से जूझते हुए प्रिया तेंदुलकर की 2002 में मौत हो गई।

इस वजह से हुए तलाक

अब सालों बाद इस बारे में उनके पति ने बात की है। गौर करने वाली बात है कि उन्होंने आज तक दूसरी शादी नहीं की। प्रिया तेंदुलकर के पति एक्टर और राइटर करण राजदान ने बताया, ‘कोर्टशिप और शादी को मिलाकर हम 11 साल तक साथ रहे। 1999 में हमारा तलाक हुआ। मेरी लाइफ का सबसे ट्रॉमेटिक पीरियड था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि हम साथ कैसे रहे। मैं मैच्योर-इम्मैच्योर जैसा भी था समझ नहीं पा रहा था, उसकी पोजेसिवनेस मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी। जब मैं भटकता नहीं भी था तो भी वो पोजेसिव तो थी। उसकी तरफ से वो प्यार था, लेकिन वो गाना है न बहुत ज्यादा प्यार भी अच्छा नहीं होता।’

नहीं चाहती थीं तलाक

इसी कड़ी में आगे बात करते हुए करण ने जीवन के और भी कई अनसुने पन्ने खोले और बताया, ‘तलाक के बाद उन्हें कैंसर का पता चला। मैं तलाक के बाद भी उनके इस मर्ज के बारे में जानता था, मुझे इस तरह से बताया जा रहा था कि वो ठीक हो रही हैं। मुझे फिर किसी और का फोन आया था कि वो नहीं रहीं। परिवार की ओर से कुछ हद तक गलत जानकारी दी गई, लेकिन अब गलत भी क्या कहें, शायद उन्हें लग रहा था कि वो ठीक हो जाएंगी। वो तलाक नहीं लेना चाहती थी, लेकिन मैं चाहता था, मैं समझ नहीं पा रहा था कि हम साथ कैसे रहेंगे। वो कैंसर से जूझ रही थी और उन्हें कैंसर किस तरह हुआ ये नहीं बताना चाहूं, लेकिन इस पर हमारे बहुत झगड़े भी होते थे।’

ऐसा रहा प्रिया का करियर

इस दौरान करण राजदान ने बताया कि वो प्रिया पर बायोपिक भी लिख चुके हैं, जिसे स्टार प्रवाह पर चलाने की बात भी हुई लेकिन नहीं बनी। इस बातचीत के दौरान करण इमोशनल हो गए और रो भी पड़े। उन्हें अलगवा का पछतावा रहा। बात करें प्रिया के करियर की तो एक्टिंग की दुनिया में आने से पहले उन्होंने 5 स्टार होटल में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी की। इसके बाद वो एक एयर होस्टेस बनीं। पार्ट टाइम मॉडलिंग करते हुए उन्हेंने फिल्मों में आने से पहले न्यूज रीडर की नौकरी की। फिल्म श्याम बेनेगल की फिल्म अंकुर (1974) से डेब्यू करने का मौका मिल। टीवी के पॉपुलर शो ‘रजनी’ और ‘हम पांच’ के लिए उन्हें जाना जाता है। त्रिमूर्ती में उन्होंने शाहरुख खान की मां का रोल भी प्ले किया। उनका झुकाव मराठी फिल्मों की और अधिक रहा और यही वजह है कि कई मराठी शोज और फिल्मों में वो नजर आईं।