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England vs Pakistan: 6,6,6… आखिरी ओवर में पाकिस्तान ने मचाया तूफान, इंग्लैंड को दिया 161 रन का टारगेट, हफीज ने जड़ा अर्धशतक

वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लेजेंड्स 2025 का आगाज हो गया है. इस लीग का पहला मैच इंग्लैंड चैंपियंस और पाकिस्तान चैंपियंस के बीच खेला जा रहा है. बर्मिंघम के एजबेस्टन में खेले जा रहे इस मैच में इंग्लैंड ने पहले टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया था. पाकिस्तान की टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी. इस मैच में पाकिस्तान ने स्टार क्रिकेटर शाहिद अफरीदी को नहीं खिलाया. कप्तान मोहम्मद हफीज के अर्धशतक और आमेर यामीन की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ने इंग्लैंड के सामने 161 रनों का लक्ष्य रखा है.

पाकिस्तान ने बनाए 160 रन

पाकिस्तान चैंपियंस के लिए ओपनिंग पर कामरान अकमल और शरजील खान बल्लेबाजी करने आए. पाकिस्तान ने शुरुआती दो विकेट 27 रन के स्कोर पर ही गंवा दिए. इस मैच में स्टार खिलाड़ी शोएब मलिक एक रन बनाकर ही आउट हो गए. लेकिन कप्तान मोहम्मद हफीज ने 34 गेंदों में 54 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली. इस पारी में हफीज ने 8 चौके मारे.

पाकिस्तान की पारी 150 रनों के अंदर समेट सकती थी, लेकिन आखिरी ओवर में सोहेल खान और आमेर यामीन की शानदार बल्लेबाजी ने 22 रन जोड़ दिए. 20वें ओवर की पहली गेंद पर सोहेल खान ने छक्का जड़ा. वहीं तीसरी और चौथी गेंद पर यामीन ने सिक्स मारे और टीम के स्कोर को 160 पर पहुंचा दिया.

इंग्लैंड की धाकड़ गेंदबाजी

इंग्लैंड ने पहली पारी के 19 ओवरों तक मैच को पूरी तरह से अपनी पकड़ में रखा. गेंदबाजों ने पाकिस्तान के 9 विकेट चटका दिए. इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा विकेट क्रिस ट्रेमलेट और लियम प्लंकेट ने लिए. इन दोनों गेंदबाजों ने 2-2 विकेट चटकाए. वहीं स्टुअर्ट मीकर, रयान साइडबॉटम, जेम्स विंस और दिमित्री मास्करेन्हास ने 1-1 विकेट लिया. अब इंग्लैंड को जीत के लिए 161 रनों के लक्ष्य का पीछा करना है.

शाहिद अफीरीदी को नहीं खिलाया

पाकिस्तान चैंपियंस ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच में अपने स्टार खिलाड़ी शाहिद अफरीदी को नहीं खिलाया. पाकिस्तान की प्लेइंग इलेवन से ये खिलाड़ी बाहर रहा.

दिल्ली से 400 किलोमीटर दूर यह हिल स्टेशन किसी जन्नत से कम नहीं, वीकेंड ट्रिप के लिए जरूर बनाएं प्लान

जब भी लोग हिल स्टेशन की बात करते हैं, तो शिमला, मसूरी और मनाली जैसे नाम जहन में आते हैं। लेकिन इन जगहों पर पर्यटकों की भीड़ होती है, ऐसे में अगर आप शांत और प्राकृतिक खूबसूरती की तलाश में हैं, तो हिमाचल प्रदेश की कम जानी-पहचानी लेकिन बेमिसाल जगह बरोट घाटी घूमने के लिए जा सकते हैं। दिल्ली से बरोट घाटी की दूरी करीब 400 किमी है। यह जगह इतनी शांत, हरी-भरी और सूरम्य है कि आप यहां पर पहुंचकर कहेंगे कि यह असली स्वर्ग है।

बरोट घाटी में बहुत शांति है और यहां का नजारा बेहद सुंदर, प्रकृति के करीब और झरनों की आवाज से भरी है। यहां पर इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सीमित है। जिससे आप रिलैक्स कर सकते हैं। यहां के सस्ते होमस्टे, सादगी भरे और हिमाचली संस्कृति से जुड़े होते हैं। आप सिर्फ दो दिन के वीकेंड ट्रिप पर हिमाचल प्रदेश के बरोट घाटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

कहां है बरोट घाटी

बता दें कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बरोट घाटी स्थित है। इसको ‘मिनी स्विटजरलैंड’ भी कहा जाता है। हालांकि यह एक ऑफबीट डेस्टिनेशन है। जो कि घने देवदार के जंगल, झरने, उहल नदी और ट्रेकिंग ट्रेल्स के लिए जाना जाता है। यहां पर घूमने के सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सर्दियों में अक्तूबर से नवंबर के बीच होता है।

ऐसे पहुंचे बरोट घाटी

राजधानी दिल्ली से बरोट घाटी की दूरी करीब 400-450 किमी है। हालांकि यहां पहुंचना सस्ता, आसान और एडवेंचर से भरा है। यहां आने के लिए ट्रेन या बस से पठानकोट या फिर जोगिंदरनगर तक जा सकते हैं। फिर आगे का रास्ता आपको टैक्सी से तय करना होगा।

सबसे पहले दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से एचआरटीसी की बस से जोगिंदर नगर पहुंचे। इसका किराया 800-900 रुपए हो सकता है। रात की बस लें, जिससे कि सुबह तक जोगिंदर नगर पहुंच जाएं। अब जोगिंदर नगर में पहुंचकर ब्रेकफास्ट करें और फिर बरोट घाटी के लिए स्थानीय बस से यात्रा करें। जोकि सुबह के समय आसानी से मिल जाती है। इसका किराया करीब 80 रुपए होगा। जोगिंदर नगर से बरोट घाटी की दूरी करीब 30 किमी है।

बरोट घाटी ट्रिप की योजना

ट्रिप के पहले दिन दोपहर तक जोगिंदर नगर पहुंचकर होम स्टे में फ्रेश होकर घूमने के लिए निकल जाएं। पहले दिन आप ब्रिटिश काल का डैम देखने के लिए जा सकते हैं। यह डैम अंग्रेजों के समय का बना है, जो आज भी अपनी सुंदरता और इंजीनियरिंग से चौंकाता है।

इसके बाद आप प्राकृतिक फव्वारा और आसपास के गांव की सैर करने जा सकते हैं। यहां पर छोटे-छोटे गांव, साफ हवा और पगडंडियों के बीच घूमना मन को शांति देता है। फिर वापस आकर होम स्टे में आराम करें।

यहां घूमें दूसरे दिन

अगले दिन सुबह जल्दी उठकर लापास जलप्रपात के लिए निकल जाएं। साथ ही यहां पर झरने के पास बैठकर चाय और मैगी का लुत्फ उठाना न भूलें। इसके अलावा पास का लापास गांव भी घूमें। जहां पर आपको अनोखा देसी हीटर देने को मिलेगा।

लापास गांव से लौटने के दौरान शॉर्टकट रास्ते से चोकड़ी बारोट वैली जाएं। यहां पर रास्ते में आपको घाटियां, घने देवदार के जंगल और एक बहती हुई जलधारा आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। नेचुरल फ्रीजर और ट्राउट फिश फार्म जैसे कई अनूठे नजारे आपकी इस ट्रिप को यादगार बना देंगे।

इस ट्रिप के दौरान बरोट की अनोखी विरासत के दीदार करना न भूलें। यहां पर एक ऐसी पुरानी कोठी डॉटर्स हाउस है, जिसको ब्रिटिश दौर में एक बेटी को उपहार दिया गया था। वर्तमान समय में यह कोठी टूरिस्ट होमस्टे में बदल चुकी है। आप चाहें तो यहां रुक भी सकते हैं।

Sports News:एक या दो नहीं, वेस्टइंडीज के 5 क्रिकेटर जल्द ले सकते हैं रिटायरमेंट, इस सूची में कप्तान का नाम भी शामिल

वेस्टइंडीज के विस्फोटक बल्लेबाज आंद्रे रसेल ने हाल ही में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला लिया है. रसेल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह देंगे. उनसे पहले वेस्टइंडीज के ताबड़तोड़ विकेटकीपर बल्लेबाज निकोलस पूरन इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं. पूरन ने सिर्फ 29 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहकर सभी को चौंका दिया. अब इन दो खिलाड़ियों के बाद वेस्टइंडीज के 5 और क्रिकेटर जल्द ही संन्यास ले सकते हैं.

वेस्टइंडीज के ये 5 क्रिकेटर भी ले सकते हैं संन्यास

    • आंद्रे फ्लेचर

वेस्टइंडीज के विस्फोटक बल्लेबाज आंद्रे फ्लेचर भी जल्द इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास कर सकते हैं. फ्लेचर 38 साल के हो गए हैं. वो वेस्टइंडीज की वनडे टीम से 2016 से ही बाहर चल रहे हैं. वहीं टी20 टीम से भी वो साल 2024 से बाहर हैं. फ्लेचर ने वेस्टइंडीज के लिए 25 वनडे और 60 टी20 मैच खेले हैं.

    • शिमरन हेटमायर

शिमरन हेटमायर का वेस्टइंडीज के लिए कुछ खास प्रदर्शन नहीं रहा है. हेटमायर ने वेस्टइंडीज के लिए आखिरी बार टेस्ट मैच साल 2019 में खेला था. वहीं वनडे में लगभग एक साल बाद उनकी टीम में वापसी हुई थी. लेकिन वो कुछ खास नहीं कर सके. टी20 में वेस्टइंडीज के लिए उनका कोई खास प्रदर्शन नहीं रहा है. हेटमायर ने 64 मैचों में सिर्फ 121.35 की स्ट्राइक रेट से 983 रन बनाए हैं.

    • जेसन होल्डर

जेसन होल्डर एक समय वेस्टइंडीज टीम के वनडे और टेस्ट टीम के कप्तान थे. लेकिन अब दोनों ही टीम से वो बाहर चल रहे हैं. वहीं टी20 क्रिकेट में वो खेलते हुए दिखते हैं. होल्डर किसी न किसी फॉर्मेट या तो फिर इंटरनेशनल क्रिकेट को ही अलविदा कह सकते हैं.

    • अकील हुसैन

अकील हुसैन वनडे टीम से लगभग दो साल से बाहर चल रहे हैं. वहीं उन्हें टेस्ट में कभी खेलने का मौका भी नहीं मिला है. ऐसे में वो इन दोनों फॉर्मेट से संन्यास ले सकते हैं. टी20 में भी उनका कुछ खास प्रदर्शन नहीं रहा है. उन्होंने 70 मैचों में सिर्फ 65 विकेट लिए हैं.

    • रोवमैन पॉवेल

वेस्टइंडीज टीम के पूर्व कप्तान रोवमैन पॉवेल वनडे क्रिकेट से दो साल से बाहर चल रहे हैं. वहीं टी20 क्रिकेट में भी उनसे कप्तानी छीन ली गई थी. पॉवेल को टेस्ट क्रिकेट में मौका भी नहीं मिला है. ऐसे में वो भी क्रिकेट के किसी न किसी फॉर्मेट से संन्यास ले सकते हैं.

‘डिग्री चाहिए तो खून दो’… छात्रों पर डाला गया दबाव, ताइवान में महिला कोच क्यों बनी ‘वैंपायर’?

ताइवान में एक महिला फुटबॉल कोच पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने छात्राओं को ग्रेजुएशन के जरूरी क्रेडिट्स के बदले 200 से ज्यादा बार खून देने के लिए मजबूर किया. इस सनसनीखेज मामले ने देशभर में आक्रोश फैला दिया है.

छात्रा ने किया खुलासा
नेशनल ताइवान नॉर्मल यूनिवर्सिटी (NTNU) की एक छात्रा ‘जियान’ ने सोशल मीडिया पर बताया कि कोच झोउ ताई-यिंग ने उन्हें कई बार दिन में तीन बार खून देने को मजबूर किया. सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खून लिया जाता था. जियान ने कहा, ‘आठवें दिन के बाद मेरी बाजुओं में नसें नहीं मिल रही थीं. कलाई पर कोशिश की गई, दर्द असहनीय था. छह बार फेल होने के बाद ही ब्लड निकाल सके.’ उन्होंने इसका वीडियो भी पोस्ट किया जिसमें वह रोती नजर आ रही हैं.

अन्य छात्राएं भी आईं सामने
एक अन्य छात्रा ने बताया कि कोच की बदसलूकी से तंग आकर उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ी. उसने कहा कि वो अपने पिता को कभी ये सच नहीं बता पाई और अब वो इस दुनिया में नहीं हैं. ‘शायद अगले जन्म में माफ कर पाऊं.’

कोच को हटाया गया, माफी मांगी
इस घटना के सामने आने के बाद, विश्वविद्यालय ने 13 जुलाई को घोषणा की कि झोउ को उनके प्रशासनिक और कोचिंग पदों से बर्खास्त कर दिया गया है और उन्हें किसी भी खेल टीम का नेतृत्व करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. झोउ से एक माफीनामा भी लिखवाया गया. उन्होंने लिखा, ‘मैं उन छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए दिल से माफी मांगती हूं. छात्रों को हुए भावनात्मक आघात के लिए मुझे गहरा पछतावा है और मैं आप सभी से क्षमा मांगती हूं.’ हालांकि, यह घोषणा और माफीनामा बाद में विश्वविद्यालय के सोशल मीडिया पेज से हटा दिए गए.

सवालों के घेरे में यूनिवर्सिटी और शिक्षा विभाग
स्थानीय शिक्षा विभाग ने यूनिवर्सिटी को सुधारात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है. लेकिन लोगों का कहना है कि सिर्फ कोच को हटाना काफी नहीं है. कई लोग पूछ रहे हैं- ‘आखिर ब्लड डोनेशन से किसको फायदा हो रहा था?’

अब ब्रिटेन में 16 साल की उम्र में मिल पाएगा मतदान का अधिकार, जानिए इस निर्णय के पीछे का कारण

ब्रिटिश सरकार ने गुरुवार (18 जुलाई, 2025) को एक बड़ी घोषणा की है. ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की है कि ब्रिटेन अब 16 और 17 साल की उम्र के युवाओं को भी चुनावों में अपना वोट डालने का अधिकार देगा. सरकार ने इस घोषणा को लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है. वहीं, कुछ विरोधियों ने सरकार के इस कदम को चुनावी संतुलन को बिगाड़ने की एक कोशिश करार दिया है.

बिट्रेन की जनसंख्या करीब 68 मिलियन (लगभग 6.8 करोड़) है, इसमें से 16 और 17 साल के युवाओं की कुल संख्या 1.6 मिलियन (16 लाख) से अधिक है. हालांकि, सरकार इस योजना को दशकों बाद मतदान अधिकारों के सबसे बड़े विस्तार के तौर पर देख रही है. इससे पहले ब्रिटेन में 50 साल से ज्यादा समय पहले राष्ट्रीय स्तर पर वोट देने की उम्र को 21 साल से घटाकर 18 साल करने का फैसला लिया गया था.

ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री एंजेला रेयनर ने इस घोषणा के प्रस्तावना में लिखा, “हमारी संस्थाओं और लोकतंत्र में घटता भरोसा अब एक गंभीर स्थिति बन चुका है, लेकिन यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस स्थिति में बदलाव करे और हमारे लोकतंत्र को फिर से जीवंत बनाए. ठीक वैसे ही जैसे हमारे पहले की पीढ़ियों ने किया है.”

ब्रिटिश सरकार की इस योजना में राजनीतिक दलों को विदेशी चंदा मिलने के नियमों को सख्त करना और वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाना शामिल है.

किन-किन देशों में 16 साल के युवा दे सकते हैं वोट?

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन 16 और 17 साल के युवाओं को मतदान का अधिकार देने वाला दुनिया का पहला देश नहीं होगा. दुनिया के ऐसे कई देश हैं, जहां 16 और 17 के युवाओं को मतदान करने का अधिकार दिया गया है. ऑस्ट्रिया, माल्टा और ब्राजील उन देशों में शामिल हैं, जहां 16 साल के युवा वोट दे सकते हैं, जबकि ग्रीस में मतदान करने की न्यूनतम आयु 17 साल निर्धारित की गई है.

हालांकि, दुनिया में कुछ ऐसे भी देश हैं, जहां 16 साल के युवाओं को सिर्फ कुछ विशेष चुनावों में भाग लेने का अधिकार दिया गया है, जैसे जर्मनी और बेल्जियम में. इन दो देशों में 16 साल के युवा यूरोपीय संसद के सदस्यों के चुनाव में मतदान कर सकते हैं, लेकिन उन्हें देश के संघीय चुनावों में वोट देने का अधिकार नहीं दिया गया है.