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Suryakumar Yadav: सूर्यकुमार यादव ने पूरा किया खास ‘शतक’, कीरोन पोलार्ड से मिला विशेष तोहफा

मुंबई इंडियंस की टीम को आईपीएल 2025 में लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 12 रनों से हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में मुंबई इंडियंस की टीम के लिए सूर्यकुमार यादव ने अच्छी बल्लेबाजी का नमूना पेश किया और अर्धशतक लगाया, लेकिन वह टीम को जीत नहीं दिला सके। मैच में उतरते ही सूर्या ने एक खास शतक पूरा किया। ये मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल में उनका 100वां मुकाबला था और उसमें ही उन्होंने फिफ्टी लगाई।

मुंबई के लिए 100 आईपीएल मैच खेलने वाले 8वें खिलाड़ी

सूर्यकुमार यादव मुंबई इंडियंस के लिए 100 या उससे ज्यादा IPL मैच खेलने वाले कुल आठवें खिलाड़ी बने हैं। उनसे पहले मुंबई के लिए रोहित शर्मा, कीरोन पोलार्ड, हरभजन सिंह, जसप्रीत बुमराह, लासिथ मलिंगा, अंबाती रायडू और हार्दिक पांड्या 100 से ज्यादा आईपीएल मैच खेल चुके हैं। मुंबई के लिए सबसे ज्यादा 215 आईपीएल मैच खेलने का रिकॉर्ड रोहित के नाम दर्ज हैं। वह इकलौते ऐसे प्लेयर हैं, जिन्होंने मुंबई के लिए 200 प्लस आईपीएल मैच खेले हैं।

पोलार्ड ने तोहफे में दी टी-शर्ट

मुंबई इंडियंस के 100 आईपीएल मैच खेलने पर बैटिंग कोच कीरोन पोलार्ड ने उन्हें एक खास टी-शर्ट तोहफे में दी है। जिस पर सूर्या दादा और 100 लिखा हुआ है। इसकी तस्वीर मुंबई इंडियंस फ्रेंचाइजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट की है।

मुंबई इंडियंस के लिए IPL में लगा चुके दो शतक

सूर्यकुमार यादव ने अभी तक मुंबई इंडियंस के लिए 100 आईपीएल मैचों में कुल 3157 रन बनाए हैं, जिसमें उनके बल्ले से दो शतक निकले हैं। वह टीम के साथ साल 2019 और 2020 में आईपीएल ट्रॉफी भी जीत चुके हैं। मुंबई से पहले सूर्या कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम का हिस्सा थे।

LSG के खिलाफ लगाया अर्धशतक

लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मैच में सूर्यकुमार यादव ने बेहतरीन बल्लेबाजी की। उन्होंने मौके की नजाकत को समझते हुए 43 गेंदों में 67 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और एक छक्का शामिल रहा। लेकिन वह आवेश खान की गेंद पर अब्दुल समद को कैच थमा बैठे और उनके आउट होते ही मुंबई इंडियंस की रन गति धीमी पड़ गई। इसके बाद उसे करीबी मुकाबले में 12 रनों से हार का मुंह देखना पड़ा।

बैंकॉक: पीएम मोदी ने यूनुस को सख्त संदेश देते हुए कहा, “बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा आपकी प्राथमिक जिम्मेदारी है”

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस के साथ पहली बार बैठक की। इस दौरान पीएम मोदी ने यूनुस को साफ शब्दों में बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं से उन्हें अवगत कराया। इतना ही नहीं पीएम मोदी ने यूनुस को हिदायत दी कि बांल्गादेशस को माहौल खराब करने वाली किसी भी बयानबाजी से बचा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बांग्लादेश की जिम्मेदारी है और इसे उन्हें निभाना होगा।

बता दें कि पीएम मोदी यहां ‘‘बंगाल की खाड़ी बहुक्षेत्रीय एवं तकनीकी सहयोग पहल (बिम्सटेक)’’ शिखर सम्मेलन से इतर करीब 40 मिनट की बैठक में एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति भारत के समर्थन को रेखांकित किया। बैठक में यूनुस ने अपदस्थ बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण और सीमा पर हत्याओं के मुद्दे भी उठाए। पिछले साल अगस्त में हसीना को अपदस्थ किये जाने के बाद मोदी और यूनुस के बीच यह पहली मुलाकात थी।

एस जयशंकर भी रहे मौजूद

इस बैठक में विदेश मंत्री एस.जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने यूनुस से कहा कि कानून का सख्ती से पालन तथा अवैध सीमा पार करने की रोकथाम, विशेषकर रात के समय, सीमा सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘बांग्लादेश ने शेख हसीना के संबंध में औपचारिक अनुरोध किया है। इस मामले पर मेरे लिए और कुछ कहना उचित नहीं होगा।’’

पीएम मोदी ने किया पोस्ट

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, ‘‘बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार श्री मोहम्मद यूनुस से मुलाकात की। भारत बांग्लादेश के साथ रचनात्मक और जन-केंद्रित संबंधों के लिए प्रतिबद्ध है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने बांग्लादेश में शांति, स्थिरता, समावेशिता और लोकतंत्र के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। अवैध सीमा पार करने की घटनाओं को रोकने के उपायों पर चर्चा की और हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भलाई के लिए हमारी गंभीर चिंता व्यक्त की।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने संबंधों के प्रति भारत के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया और कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग से लोगों को लाभ हुआ है। मिस्री ने यूनुस के साथ मोदी की बातचीत के बारे में बताया, ‘‘इसी भावना से उन्होंने प्रोफेसर यूनुस को व्यावहारिकता की भावना के आधार पर बांग्लादेश के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंध बनाने की भारत की इच्छा से अवगत कराया।’’

हिंदुओं की सुरक्षा पर कही ये बात

मोदी ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के मुद्दे पर कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और उनके खिलाफ अत्याचार के मामलों की गहन जांच करेगी। प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश द्वारा बिम्सटेक की अध्यक्षता संभालने पर यूनुस को बधाई दी तथा उम्मीद जताई कि मंच उनके नेतृत्व में क्षेत्रीय सहयोग को और आगे बढ़ाएगा। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, ‘‘नेताओं ने बिम्सटेक ढांचे के अंतर्गत क्षेत्रीय एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए परामर्श और सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के बीच आपसी हित के सभी मुद्दों को उनके दीर्घकालिक और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय संबंधों के आधार पर रचनात्मक चर्चा के माध्यम से समाधान किया जाएगा।

यूनुस ने दी पीएम मोदी को खास तस्वीर

यूनुस के ‘एक्स’ आधिकारिक हैंडल से मोदी के साथ बैठक के तुरंत बाद एक तस्वीर साझा की गई जिसमें अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रधानमंत्री मोदी को एक तस्वीर भेंट करते दिखाई दे रहे थे। इसके साथ किये गए ‘एक्स’ पोस्ट में कहा गया, ‘‘यह तस्वीर तीन जनवरी, 2015 को 102वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रोफेसर यूनुस को स्वर्ण पदक प्रदान करने की है।’’ पिछले साल छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के परिणामस्वरूप गत वर्ष पांच अगस्त को हसीना की 15 साल से अधिक समय से चल रही सरकार गिर गई थी। तीन दिन बाद, यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला। भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में तब से गिरावट देखी जा रही है, क्योंकि दिल्ली ने हिंदुओं को निशाना बनाकर की जाने वाली हिंसा और वहां कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों के उभार को लेकर चिंता जताई है।

पापुआ न्यू गिनी में आया भयंकर भूकंप, रिक्टर स्केल पर 6.9 तीव्रता दर्ज

पापुआ न्यू गिनी में शनिवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 6.9 आंकी गई। भूकंप के बाद सुनामी की तेजावनी जारी की गई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। यू.एस. जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, 6.9 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी रद्द कर दी गई है। भूकंप का केंद्र धरती की सतह से ज्यादा नीचे नहीं था। इस वजह से सुनामी का खतरा नहीं है।

यह भूकंप शनिवार की सुबह धरती की सतह से 10 किलोमीटर (6 मील) की गहराई पर प्रशांत द्वीप में आया। इसका केंद्र न्यू ब्रिटेन द्वीप पर किम्बे शहर से 194 किलोमीटर (120 मील) पूर्व में बीच समुद्र में था। प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने भूकंप के तुरंत बाद सुनामी का अलर्ट जारी किया, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया। अलर्ट में पापुआ न्यू गिनी के तट के कुछ हिस्सों में 1 से 3 मीटर की लहरों की चेतावनी दी गई थी। पास के सोलोमन द्वीप के लिए 0.3 मीटर की छोटी लहरों के बारे में जारी की गई चेतावनी को भी वापस ले लिया गया। नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। न्यू ब्रिटेन द्वीप पर 500,000 से ज्यादा लोग रहते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में भी सुनामी का खतरा नहीं

ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो ने कहा कि देश में सुनामी का कोई खतरा नहीं है, जो पापुआ न्यू गिनी का सबसे करीबी पड़ोसी है। न्यूजीलैंड के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई। पापुआ न्यू गिनी प्रशांत महासागर के चारों ओर भूकंपीय दोषों के चाप, प्रशांत “रिंग ऑफ फायर” पर स्थित है, जहां दुनिया के अधिकांश भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधि होती है।

क्या है रिंग ऑफ फायर?

प्रशांत महासागर के चारों ओर एक विशाल क्षेत्र को “रिंग ऑफ फायर” कहते हैं। यह क्षेत्र लगभग 40,000 किलोमीटर लंबा है और इसमें कई देशों की सीमाएं शामिल हैं, जैसे जापान, इंडोनेशिया, फिलीपींस, न्यूजीलैंड, चिली, पेरू, और संयुक्त राज्य अमेरिका का पश्चिमी तट। इसका नाम “रिंग ऑफ फायर” इसलिए पड़ा क्योंकि यहां दुनिया के सबसे अधिक सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंप क्षेत्र मौजूद हैं। यह पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों के किनारों पर स्थित है, जहां प्लेटों की गति के कारण ज्वालामुखी विस्फोट और भूकंपीय गतिविधियां बार-बार होती हैं। उदाहरण के लिए, यहां दुनिया के लगभग 75% सक्रिय ज्वालामुखी हैं और 90% से अधिक भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं।

कीव: यूक्रेन पर रूसी हमले में 16 लोगों की मौत, गुस्साए जेलेंस्की ने पुतिन को ठहराया जिम्मेदार

यूक्रेन के केंद्रीय शहर क्रीवी रीह पर शुक्रवार को रूसी मिसाइल हमले में छह बच्चों सहित कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। वहीं खार्किव में ड्रोन से भी हमले किए गए। ड्रोन हमले में पांच लोगों की मौत हो गई। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-“रूसी मिसाइल हमले के बाद क्रिवी रिह में बचाव अभियान अभी चल रहा है। अब तक, छह बच्चों सहित 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। खार्किव में, लक्षित रूसी ड्रोन हमले के बाद पूरे दिन बचाव प्रयास जारी रहे। छह “शाहेद” ड्रोन द्वारा जानबूझकर किया गया हमला। दुख की बात है कि पाँच लोग मारे गए। चौंतीस घायल हो गए। सभी परिवारों और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। खेरसॉन में – एक रूसी एफपीवी ड्रोन द्वारा एक और लक्षित हमला एक ऊर्जा सुविधा – खेरसॉन थर्मल पावर प्लांट पर हुआ।”

सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप

उन्होंने आगे कहा, “ये हमले आकस्मिक नहीं हो सकते – रूसियों को ठीक से पता है कि वे क्या कर रहे हैं। वे जानते हैं कि ये ऊर्जा सुविधाएँ हैं जिन्हें रूस द्वारा अमेरिकी पक्ष से किए गए वादे के तहत हमलों से बचाया जाना चाहिए। हर रूसी वादा मिसाइलों या ड्रोन, बम या तोपखाने के साथ टूट जाता है। कूटनीति का उनके लिए कोई मतलब नहीं है।” राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि युद्धविराम पहले ही हो सकता था, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बार-बार इसे अस्वीकार कर दिया है। “इसलिए दबाव की आवश्यकता है – रूस पर पर्याप्त दबाव हो। युद्धविराम पहले ही हो सकता था – यह पुतिन हैं जो इसे अस्वीकार करते हैं, यह मास्को है जिसने 11 मार्च से युद्धविराम से इनकार कर दिया है। यह वे लोग हैं, जो रूस में हैं, जो यह युद्ध चाहते हैं।’

इस बीच, 23 से 25 मार्च तक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने सऊदी अरब के रियाद में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडलों के साथ विशेषज्ञ-स्तरीय चर्चा की। ये द्विपक्षीय बैठकें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के साथ उच्च स्तरीय चर्चा के बाद हुईं। वार्ता मुख्य रूप से काला सागर में सुरक्षा, वाणिज्यिक समुद्री गतिविधि की सुरक्षा, ऊर्जा अवसंरचना संरक्षण और स्थायी शांति को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कूटनीतिक प्रयासों पर केंद्रित थी

मनकुलम (श्रीलंका): श्रीलंका बारूदी सुरंगों का गढ़ बन चुका है, और 2028 तक मुक्ति दिलाने का अमेरिकी संकल्प भी संकट में है।

थावराथनम पुष्पारानी ने दशकों से चले आ रहे अलगाववादी युद्ध में कभी श्रीलंका की सेना के खिलाफ तमिल विद्रोहियों के लिए अग्रिम मोर्चे पर लड़ाई लड़ी थी और बाद में उन्हीं युद्ध क्षेत्रों में उन्होंने, बिछाई गई बारूदी सुरंगों को साफ करने का काम किया। अब, अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा सहायता रोके जाने से श्रीलंका के बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान संकट में है जिससे पुष्पारानी जैसे हजारों लोगों की आजीविका पर अनिश्चितता छा गई है।

श्रीलंका ने 2017 में ओटावा संधि की अभिपुष्टि की थी जिसके अनुसार, 2028 तक द्वीप राष्ट्र को बारूदी सुरंगों से मुक्त होना है। पुष्पारानी के पति, पिता और दो भाई श्रीलंका के विद्रोही समूह ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम’ (लिट्टे) के लिए लड़ते हुए मारे गए और दो अन्य भाई-बहन लापता हैं। पूर्वी श्रीलंका में जन्मी पुष्पारानी स्कूल में पढ़ रही थीं, तभी 1983 में बहुसंख्यक सिंहलियों ने अल्पसंख्यक तमिलों के खिलाफ देशव्यापी अभियान छेड़ा। तब उनके परिवार को देश के उत्तरी हिस्से में जाना पड़ा।

जानें पूरा इतिहास

सिंहलियों के अभियान से उद्वेलित कई तमिल युवा तमिलों के लिए एक स्वतंत्र राज्य की लड़ाई की खातिर उग्रवादी संगठनों में शामिल हो गए। पुष्पारानी भी किशोरावस्था में ही लिट्टे में शामिल हो गईं। उन्होंने बताया ‘‘चूंकि मेरा पूरा परिवार संगठन के साथ था, इसलिए उन्होंने ही मेरी शादी तय की। मेरी बड़ी बेटी का जन्म 1990 में और छोटी बेटी का जन्म 1992 में हुआ। मेरे पति 1996 में युद्ध में मारे गए और मेरे बच्चों का पालन-पोषण संगठन द्वारा संचालित ‘सेनचोलाई’ घर में हुआ।’’ जब 2009 में लड़ाई समाप्त हुई तो वह अपने बच्चों से मिलीं और जीविका के लिए बारूदी सुरंग हटाने वाले समूहों के साथ काम करना शुरू कर दिया।

भारत-अमेरिका ने थामा श्रीलंका का हाथ

श्रीलंका में बारूदी सुरंग हटाने का अभियान संघर्ष विराम अवधि के दौरान 2002 में शुरू हुआ था और इस प्रयास का समर्थन करने वाले 11 देशों में अमेरिका सबसे बड़ा दानदाता रहा है। अमेरिका ने अब तक परियोजनाओं के लिए प्राप्त 25 करोड़ डॉलर के अनुदान में से लगभग 34 फीसदी का योगदान दिया है। सरकारी ‘नेशनल माइन एक्शन सेंटर’ के निदेशक एम.एम.नईमुद्दीन के अनुसार, पिछले वर्ष प्राप्त अनुदानों में अमेरिका का योगदान 45 फीसदी था। संघर्ष विराम के टूटने के कारण बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान कुछ वर्षों तक बाधित रहने के बावजूद जारी है। अब तक 20.5 लाख से अधिक हथियार, गोला-बारूद और बिना फटे आयुध को हटाया जा चुका है।

लैंडमाइन्स को हटाना चुनौती

कुल 254 वर्ग किलोमीटर भूमि से बारुदी सुरंग हटाई जानी थी और अब केवल 23 वर्ग किलोमीटर भूमि ही बची है। 2028 की समय सीमा तक इसे हासिल किया जा सकता है या नहीं, यह निरंतर वित्त पोषण पर निर्भर करेगा। नईमुद्दीन ने कहा कि सहायता निलंबन की घोषणा के बाद, श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने अपील की और अमेरिका ने समीक्षा तक अपने आवंटित धन के उपयोग की अनुमति दी, जिस पर एक मई को निर्णय होने की उम्मीद है। देश में बारूदी सुरंग हटाने वाले चार समूह सक्रिय हैं। इनमें से एक, ‘डेल्वन असिस्टेंस फॉर सोशल हार्मोनी’ के प्रमुख आनंद चंद्रसिरी ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि 24 जनवरी, 2025 से शुरू हुई 90-दिवसीय समीक्षा अवधि के पूरा होने पर अमेरिका सरकार की वित्तीय सहायता जारी रहेगी।’’ उन्होंने कहा ‘‘अन्यथा श्रीलंका के लिए 2027 के अंत तक लक्ष्य के अनुसार सुरंग-मुक्त स्थिति प्राप्त करने में गंभीर समस्या होगी।

15 साल पहले खत्म हुआ श्रीलंका का गृहयुद्ध

चार समूहों के कर्मचारियों के स्तर में भारी कमी अपरिहार्य होगी।’’ यहां लगभग 3,000 कर्मचारी हैं, जिनमें से अधिकतर नागरिक युद्ध से प्रभावित समुदायों से भर्ती किए गए हैं। नईमुद्दीन ने कहा कि अनिश्चितता के साथ, कुछ समूहों ने पहले ही अपने कर्मचारियों को हटाना शुरू कर दिया है। श्रीलंका का गृह युद्ध 2009 में समाप्त हुआ जब सरकारी सैनिकों ने विद्रोहियों का सफाया कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, संघर्ष में लगभग 100,000 लोग मारे गए। संघर्ष के दौरान नागरिक संपत्तियों को गहरा नुकसान हुआ। नुकसान की एक वजह बारुदी सुरंगें भी थीं।