इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीरिया पर एक बार फिर से हमला कर दिया है. वहीं, अमेरिका के व्हाइट हाउस और कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने सीरिया पर इजरायली हमले को लेकर निराशा जताई है. एक्सियोज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने नेतन्याहू के इस कदम को अप्रत्याशित और आक्रामक करार दिया है. साथ ही उन्होंने इसकी आलोचना भी की है.
नेतन्याहू की क्षेत्रीय नीतियों से परेशान है ट्रंप प्रशासन- अमेरिकी अधिकारी
छह अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से एक्सियोज ने कहा कि अमेरिका का ट्रंप प्रशासन बेंजामिन नेतन्याहू की क्षेत्रीय नीतियों को लेकर काफी ज्यादा परेशान था. हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के इस कदम को लेकर सार्वजनिक तौर पर आलोचना नहीं की है. पिछले हफ्ते ही अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और सीरिया के बीच युद्धविराम हुआ था, जिसके कारण दोनों देशों के बीच तनाव में भी कमी आई थी.
हर वक्त बमबारी करने में जुटे हैं नेतन्याहू- अमेरिकी अधिकारी
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि बीबी पागलों की तरह बर्ताव कर रहे हैं. वह हर वक्त हर जगह बस बमबारी करने में लगे हुए हैं. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की जारी कोशिशें कमजोर पड़ सकती है.
वहीं, एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने गाजा में एक चर्च के ऊपर इजरायल की ओर से की गई बमबारी का जिक्र किया. उन्होंने कहा, “गाजा में चर्च पर हुए हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद प्रधानमंत्री नेतन्याहू को फोन किया था और इस हमले को लेकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा.”
इजरायल ने सीरियाई सेना के काफिले पर किया था हमला
हालांकि, सीरिया के साथ हाल ही में हुए संघर्ष को लेकर इजरायल ने जो प्रतिक्रिया दी, उससे वह तनाव का एक विषय बन गया. सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, मंगलवार (15 जुलाई, 2025) को इजरायल की सेना ने सुवेदा की ओर बढ़ रही सीरियाई आर्मी के टैंकों के एक काफिले पर हमला कर दिया था. इजरायल ने यह हमला पिछले शनिवार (12 जुलाई, 2025) को ड्रूज मिलिशिया और बेडौइन जनजातीय लोगों के बीच हुए झड़पों के बाद किया. ड्रूज और बेडौइन के इस संघर्ष में कथित तौर पर 700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार को दो चौंकाने वाले कदम उठाए. पहली ओर उन्होंने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए शांति वार्ता पर सहमति जताई, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपने आधिकारिक आवास क्रेमलिन में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के परमाणु सलाहकार अली लारीजानी से एक अघोषित बैठक की. यह बैठक पहले से तय नहीं थी, और अचानक हुई.
पुतिन की शांति वार्ता की पेशकश को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांत करने की रणनीति माना जा रहा है, जो लगातार रूस पर दबाव बनाए हुए हैं. लेकिन, लारीजानी से गुप्त बैठक कर पुतिन ने अमेरिका के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी है.
रूस-ईरान रिश्ते रूस और ईरान के धार्मिक नेतृत्व के बीच हमेशा सौहार्दपूर्ण रिश्ते रहे हैं. मॉस्को लगातार तेहरान का समर्थन करता रहा है. हालांकि, जब हाल में 12 दिन तक चला इजरायल-ईरान युद्ध हुआ और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए, तब रूस ने सैन्य रूप से हस्तक्षेप नहीं किया. बावजूद इसके, उसने पहले और बाद में कूटनीतिक समर्थन दिया.
मध्य पूर्व और परमाणु संकट पर चर्चा क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बताया कि यह एक अघोषित बैठक थी, जिसमें अली लारीजानी ने पुतिन के साथ “मध्य पूर्व और ईरानी परमाणु कार्यक्रम की बिगड़ती स्थिति” पर अपना आकलन साझा किया. पुतिन और लारीजानी के बीच क्षेत्र में शांति और ईरानी परमाणु कार्यक्रम के राजनीतिक समाधान पर भी चर्चा हुई.
यूरोपीय देशों के साथ बातचीत की योजना एक जर्मन राजनयिक सूत्र के अनुसार, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी आने वाले दिनों में ईरान के साथ उसके परमाणु कार्यक्रम पर फिर से बातचीत करने की योजना बना रहे हैं. ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने भी एक अनाम सूत्र के हवाले से पुष्टि की है कि तेहरान इस प्रस्ताव पर सहमत हो गया है.
अमेरिका की मीडिया रिपोर्ट पर रूस की आपत्ति पिछले हफ्ते रूस ने अमेरिकी समाचार एजेंसी Axios की उस रिपोर्ट की आलोचना की थी, जिसमें कहा गया था कि पुतिन ने ईरान को अमेरिका के साथ समझौते के लिए राजी किया था, जिससे ईरान यूरेनियम संवर्धन रोक देगा. ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वह परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता.
रूस और ईरान की नौसेना का संयुक्त अभ्यास इस पूरे घटनाक्रम के बीच रूस और ईरान सोमवार 21 जुलाई से कैस्पियन सागर में तीन दिवसीय नौसैनिक अभ्यास CASAREX 2025 शुरू करने जा रहे हैं. यह खोज और बचाव पर आधारित अभ्यास है. इसमें दोनों देशों की नौसेनाओं के साथ-साथ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सदस्य भी भाग लेंगे.
मृणाल ठाकुर अब एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं, क्योंकि वो जल्द ही अजय देवगन की फिल्म सन ऑफ सरदार 2 में नजर आने वाली हैं. यह फिल्म करीब 150 करोड़ रुपये के बजट में बनी है और इसे साल की सबसे चर्चित फिल्मों में गिना जा रहा है.
मृणाल इस फिल्म में लीड रोल में हैं और ऐसा माना जा रहा है कि ये फिल्म उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.
टीवी सीरियल से की थी शुरुआत
मृणाल ठाकुर का सफर आसान नहीं था. उन्होंने एक्टिंग की शुरुआत टीवी सीरियल ‘मुझसे कुछ कहती ये खामोशियां’ से की थी. लेकिन उन्हें असली पहचान जी टीवी सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ से मिली थी. उस शो में उन्होंने बुलबुल नाम का किरदार निभाया था, जिसकी दर्शकों ने खूब तारीफ भी की थी. उन्होंने फिर यहां से एक्टिंग को बारीकी से सीखा और फिर धीरे-धीरे अपना रास्ता फिल्मों की ओर मोड़ लिया.
टीवी से शुरुआत करने वाली मृणाल ठाकुर अब फिल्मों में अपनी अच्छी खासी पहचान बना चुकी हैं. उन्होंने बिना किसी फिल्मी बैग्राउंड के अपने दम पर इस मुकाम को हासिल किया है और आज ये बॉलीवुड की जानी मानी एक्ट्रेसेस की लिस्ट में हैं. तो चलिए इसी बात पर अब बात करें इनकी उन फिल्मों की जिसमें इनके किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया.
सीता रमम
तेलुगू फिल्म सीता रमम मृणाल की पहली साउथ फिल्म थी. इस फिल्म में उन्होंने सीता और राजकुमारी नूरजहां का डबल रोल किया था. फिल्म में उनकी एक्टिंग और अंदाज को दर्शकों ने खूब पसंद किया.
सिर्फ 30 करोड़ के छोटे से बजट में बनी इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर सैक्निल्क के मुताबिक, 94.28 करोड़ रुपये की कमाई की थी. साल 2022 में आई इस फिल्म से उन्हें साउथ में भी एक मजबूत पहचान मिली.
सुपर 30
बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने ‘सुपर 30’ से एंट्री की थी, जिसमें वह ऋतिक रोशन के लव इंट्रेस्ट के रोल में दिखी थी. उनका रोल इस फिल्म में भले ही छोटा क्यों न हो पर काफी पसंद किया गया था. फिल्म ने वर्ल्डवाइड 146.94 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की थी. इस फिल्म से उन्हें एक अलग ही पहचान मिली .
हाय नन्ना
हाय नन्ना तेलुगू की एक बेहतरीन फिल्म है, जिसमें मृणाल ने एक्टर नानी के साथ काम किया. इस फिल्म में उन्होंने एक मां और प्रेमिका दोनों के जज्बातों को बड़े ही खूबसूरती से पेश किया . इस फिल्म में उनकी सादगी और एक्सप्रेशन दोनों को ही दर्शकों ने खूब पसंद किया. अब इस फिल्म की वर्ल्डवाइड कमाई की बात करें, तो इस फिल्म ने सैक्निल्क के मुताबिक कुल 76.35 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था.
अब फैंस की नजरें इनकी आने वाली फिल्म सन ऑफ सरदार 2 पर हैं. अगर ये फिल्म 150 करोड़ के बजट में बनी है, तो इसे किसी भी हाल में अपने बजट से ज्यादा की कमाई करनी होगी. इस फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. इस फिल्म में अजय देवगन, मृणाल ठाकुर, रवि किशन जैसे सितारे नजर आने वाले हैं. ये फिल्म 1 अगस्त 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है.
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के 128वें शिविर में जन समस्याओं को मिला समाधान का मंच
शिक्षा, सेवा और सशक्तिकरण : अर्जुनगंज मंडल कार्यालय पर लगा 128वां जन सुनवाई शिविर
“79 वां गर्ल्स यूथ क्लब और ‘गांव की शान’ सम्मान: बेटियों और प्रतिभाओं के लिए समर्पित दिखा राजेश्वर विज़न”
“तारा शक्ति रसोई से संवाद शिविर तक: जनभागीदारी की मिसाल बना सरोजनीनगर”
“हर रविवार गावों में पहुँच रहा नेतृत्व: डॉ. राजेश्वर सिंह का अभियान बना लोक कल्याण का प्रतीक”
लखनऊ: रविवार को भाजपा अर्जुनगंज मंडल के अध्यक्ष मोहित तिवारी के कार्यालय पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के 128वें ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ विशेष शिविर का आयोजन किया गया। यह अभियान डॉ. राजेश्वर सिंह के जन प्रतिनिधित्व की उस सोच को दर्शाता है, जहाँ शासन की योजनाएं और जनता की ज़रूरतें एक सीधी रेखा में जुड़ती हैं।शिविर के दौरान क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा बताई गयी पेंशन, सड़क निर्माण, जल निकासी व सिलाई मशीन जैसी आजीविका-संवर्धन की मांगों को प्राथमिकता के साथ दर्ज किया गया। उपस्थित प्रतिनिधियों द्वारा इन विषयों पर शीघ्र निराकरण का भरोसा भी दिया गया।
गाँव की शान: प्रतिभा को मंच, युवाओं का सम्मान
‘गांव की शान’ पहल के अंतर्गत शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सार्वजनिक मंच से सम्मानित कर ज्ञान की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया। इंटरमीडिएट परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने वाले 2 मेधावियों सम्भवी दीक्षित (77.4%) और प्रिंस चौरसिया (62.6%) तथा हाई स्कूल में परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने वाले प्रथम लोधी (72.33%) और हर्षिता निर्मल (71.83%) को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मनित और प्रोत्साहित किया गया। यह सम्मान न केवल छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बना, बल्कि शिक्षा के प्रति सामुदायिक जागरूकता को भी विस्तार मिला।
79वां गर्ल्स यूथ क्लब: बेटियों के खेल जीवन की नई पहल
खेलों में बेटियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दूरदर्शी सोच के तहत, शिविर के दौरान 79 वें गर्ल्स यूथ क्लब का गठन किया गया। इस अवसर पर प्रतिभागी युवतियों को वॉलीबॉल, फुटबॉल, कैरम आदि इंडोर व आउटडोर खेल सामग्री प्रदान की गई जो महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ स्वास्थ्य और नेतृत्व विकास का भी संकेत है।
जनसंवाद की गरिमा में सहभागी बने समर्पित जनप्रतिनिधि
इस आयोजन के साथ ही क्षेत्र के प्रबुद्धजनों पूर्व मंडल अध्यक्ष सुशील कुमार गुप्ता, अरविन्द दीक्षित, सद्गुरु शरण रावत, रमापति तिवारी, गुड्डू तिवारी, रंजीत सिंह, दिवाकर सिंह जी, राम गुलाम, छेदा लाल निर्मल, दिलीप तिवारी, तुषार सिंह, राजन मिश्रा एवं अन्य गणमान्यों को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
तारा शक्ति रसोई: सेवा, संतृप्ति और सहयोग का संगमf
इस जन संवाद शिविर में आए सभी नागरिकों और अतिथियों के लिए तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई के माध्यम से ताजा, पौष्टिक और शुद्ध भोजन की व्यवस्था की गई, जो विगत 2 वर्षों से सतत रूप से संचालित है। यह पहल सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा संस्कार की मिसाल है।
गौरतलब है कि विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा प्रत्येक रविवार को आयोजित ‘आपका विधायक, आपके द्वार’ अभियान न केवल प्रशासनिक उत्तरदायित्व को धरातल पर साकार करता है, बल्कि शिक्षा, खेल, सेवा और संवाद को भी एक सूत्र में पिरोता है। महिपाल खेड़ा का यह आयोजन इस विचार का सशक्त उदाहरण है कि जब नेतृत्व की सोच जन सरोकारों से जुड़ती है, तो हर ग्राम एक जागरूक समाज की ओर अग्रसर होता है।
लखनऊ, 20 जुलाई 2025 | उत्तर प्रदेश में हाल ही में सामने आए अवैध धर्मांतरण के मामलों ने न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया है। छांगुर बाबा धर्मांतरण गिरोह और आगरा में ISIS लिंक्ड कन्वर्ज़न मॉड्यूल के खुलासे के बाद समाज में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं। इन गंभीर घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरोजनीनगर के भाजपा विधायक एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. राजेश्वर सिंह ने केंद्र सरकार से एक सशक्त, सर्वमान्य और कठोर “केंद्रीय धर्मांतरण विरोधी अधिनियम” बनाने की मांग की है।
डॉ. सिंह ने स्पष्ट कहा, “अब धर्मांतरण धार्मिक स्वतंत्रता का विषय नहीं रहा। यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा, बेटियों की अस्मिता और सामाजिक संरचना पर सीधा आक्रमण है। इसे सहन नहीं किया जा सकता।”
धर्मांतरण का राष्ट्रविरोधी चेहरा उजागर
डॉ. सिंह ने अपनी बात रखते हुए दो प्रमुख घटनाओं का उल्लेख किया:
छांगुर बाबा गिरोह – जिसने अब तक लगभग 5000 हिन्दू लड़कियों का धर्मांतरण करवा कर करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा किया। जातिगत मूल्य निर्धारण के आधार पर धर्मांतरण की दर तय की जाती थी।
आगरा ISIS कन्वर्ज़न मॉड्यूल – जिसमें दो बहनों को जबरन कोलकाता ले जाया गया, बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस ने “मिशन अस्मिता” के तहत उन्हें मुक्त कराया और 10 धर्मांतरण एजेंटों को गिरफ्तार किया। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित, वैचारिक और विदेशी फंडिंग से पोषित राष्ट्रविरोधी नेटवर्क है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाए ये गंभीर सवाल:
जब हजारों बेटियाँ धर्मांतरण का शिकार होती हैं, तब तथाकथित सेक्युलर दल चुप क्यों रहते हैं?
क्या उनका वोटबैंक, राष्ट्रहित से ऊपर है?
क्या यह चुप्पी आतंकवाद की मौन सहमति नहीं है?
अवैध धर्मांतरण – एक सुनियोजित खतरा
डॉ. सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का धर्म बदलने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि:
संस्कृति का उन्मूलन
परिवारों का विघटन
बेटियों की अस्मिता का शोषण
आतंकवाद के लिए वैचारिक जमीन तैयार करना
विदेशी फंडिंग और एजेंसियों का दखल
इन सभी बिंदुओं पर उन्होंने सरकार और समाज को जागरूक करते हुए कहा कि यदि अभी भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका प्रभाव दीर्घकालिक और गंभीर होगा।
केंद्रीय विधि मंत्री को पत्र: कठोर कानून की मांग
डॉ. सिंह ने केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को एक विस्तृत पत्र लिखकर केंद्रीय धर्मांतरण विरोधी अधिनियम (Central Anti-Conversion Act) लागू करने की मांग की। उन्होंने इस कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधानों का सुझाव दिया:
डॉ. सिंह के प्रस्तावित कानून की मुख्य बातें:
1️⃣ स्पष्ट परिभाषा और श्रेणीकरण:
जबरन, प्रलोभन, धोखाधड़ी, विवाह आधारित और विदेशी फंडिंग से प्रेरित धर्मांतरण को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाए।
संगठित धर्मांतरण को मानसिक एवं वैचारिक आतंकवाद माना जाए।
2️⃣ कड़ा दंड:
मास कन्वर्ज़न नेटवर्क चलाने वालों को आजीवन कारावास।
बिचौलियों और एजेंटों को 7 से 10 वर्ष तक की सख्त सजा।
3️⃣ सुरक्षा और निगरानी तंत्र:
हर धर्मांतरण से पहले और बाद में संबंधित व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित घोषणा देनी होगी।
विवाह आधारित धर्मांतरण के मामलों में न्यायिक जांच अनिवार्य की जाए।
एक राष्ट्रीय धर्मांतरण विरोधी प्राधिकरण की स्थापना की जाए जो संगठनों, फंडिंग और नेटवर्क की निगरानी करे।
NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) को आतंक और विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों की जांच का अधिकार दिया जाए।
4️⃣ पीड़ितों की रक्षा और पुनर्वास:
पीड़ित बेटियों के लिए फास्ट-ट्रैक कानूनी सहायता, सुरक्षा, और पुनर्वास योजनाएं लागू हों।
सोशल मीडिया पर कट्टरपंथ फैलाने वाले अकाउंट्स को तुरंत बंद किया जाए।
5️⃣ NGO और विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण:
FCRA कानून के तहत उन NGO पर प्रतिबंध लगाया जाए जो धर्मांतरण में संलिप्त हों।
सभी धार्मिक संस्थाओं की ऑडिटिंग अनिवार्य की जाए और उनकी विदेशी फंडिंग की नियमित जांच हो।
राजनीति से ऊपर राष्ट्रनीति की आवश्यकता
डॉ. सिंह ने कहा, “यह विषय राजनीति से ऊपर राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा है। जब राष्ट्र की बेटियों की अस्मिता पर हमला हो, तब चुप रहना अपराध है। हमें वोटबैंक की नहीं, राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि भारत को एक राष्ट्र, एक कानून के सिद्धांत पर चलते हुए, एक ऐसा केंद्रीय कानून लाना चाहिए जो पूरे देश में लागू हो और हर प्रकार के धर्मांतरण षड्यंत्र पर पूर्ण विराम लगाए।
डॉ. राजेश्वर सिंह की यह मांग आज के समय में केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय अस्तित्व की सुरक्षा का आह्वान है। जब धर्मांतरण एक औजार बन जाए और बेटियाँ उसकी शिकार, तब चुप रहना कायरता है। अब आवश्यकता है कि भारत एक सशक्त कानून बनाकर यह स्पष्ट संदेश दे — “धर्मांतरण के नाम पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
रिपोर्ट: True News UP ब्यूरो संपर्क: info@truenewsup.com वेबसाइट: www.truenewsup.com