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बहराइच के कारिकोट गांव को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय सम्मान : ग्रामीण पर्यटन में कारिकोट ने पेश की मिसाल, अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से मिलेगी प्रेरणा- जयवीर सिंह

  • कारिकोट गांव आईसीआरटी अवार्ड 2025 के लिए चयनित
  • 13 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में होगा पुरस्कार वितरण

लखनऊ : 18 अगस्त, 2025 : उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का कारिकोट गांव ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना चुका है। गांव का चयन इंडियन सबकांटिनेंटल रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म (आईसीआरटी) अवार्ड 2025 के लिए किया गया है। कारिकोट गांव को यह सम्मान 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में दिया जाएगा। यह जानकारी उप्र0 के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि कारिकोट गांव का चयन आईसीआरटी अवार्ड 2025 के लिए होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। भारत-नेपाल सीमा से सटे कारिकोट ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में मिसाल पेश की है। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग की पहल पर ग्रामीणों ने होमस्टे की शुरुआत की। साथ ही सीमा पर्यटन जैसे अभिनव पहल भी किए गए। इन प्रयासों से स्थानीय समुदायों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं को रोजगार मिला है। गांव की संस्कृति, खान-पान, हस्तशिल्प और लोक कलाओं को भी नई पहचान मिली है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आगामी 13 सितंबर को आयोजित होने वाले बीएलटीएम ट्रेड शो में भारत सहित उपमहाद्वीप की 17 संस्थाओं को रिस्पोंसिबल टूरिज्म सम्मान दिया जाएगा। इन संस्थाओं को वन टू वॉच, सिल्वर और गोल्ड श्रेणी में मान्यता दी जाएगी। मान्यता सूची में स्थान पाने वाली सभी संस्थाओं ने प्रमाणिकता, पुनरावृत्ति की क्षमता, नवाचार, प्रभाव, स्थिरता और जिम्मेदार पर्यटन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया है।

भारतीय उपमहाद्वीप जिम्मेदार पर्यटन पुरस्कारों के निर्णायक मंडल में प्रो0 हैरॉल्ड गुडविन शामिल हैं। गुडविन रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म पार्टनरशिप के प्रबंध निदेशक और आईसीआरटी ग्लोबल के संस्थापक हैं। साथ ही, मनीषा पांडे, प्रबंध निदेशक विलेज वेज़ और आईसीआरटी भारतीय उपमहाद्वीप की प्रतिनिधि तथा चार्मारी मेल्ज, निदेशक आईसीआरटी श्रीलंका सहित अन्य निर्णायक मंडल का हिस्सा रहे।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ग्रामीण पर्यटन को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि राज्य को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में भी नई पहचान दिलाई जाए। राज्य सरकार का मानना है कि गांव केवल कृषि और परंपराओं के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक भी हैं। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से इन विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने की योजना है।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कारिकोट उत्तर प्रदेश के अन्य गांवों के लिए ग्रामीण पर्यटन में प्रेरणास्त्रोत बनेगा। नेपाल की सीमा से सटे और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के करीब स्थित कारिकोट गांव ने सामुदायिक नेतृत्व के जरिए पर्यटन को नई दिशा दी है। थारू समुदाय सहित समाज के अन्य लोगों की भागीदारी क्षेत्र में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है। विश्वास है कि यह उपलब्धि प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगी।

प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि राज्य में ग्रामीण पर्यटन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति-2025 सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रूरल टूरिज्म को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कारिकोट गांव को मिला सम्मान विभागीय प्रयासों और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में सफलता का परिणाम है।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कुशीनगर में खाद की दुकानों पर मारे छापे : कालाबाजारी, जमाखोरी और ओवररेटिंग करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

कुशीनगर/लखनऊ, 17 अगस्त 2025। प्रदेश के किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने रविवार को कुशीनगर जनपद के विभिन्न स्थानों पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खाद की दुकानों पर छापेमारी कर कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक कीमत पर बिक्री की जांच की।

किसानों को राहत सुनिश्चित करने के निर्देश

निरीक्षण के बाद कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों को खाद की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। यदि कोई खाद व्यापारी या कृषि विभाग का अधिकारी किसानों को निर्धारित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने में लापरवाही करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि—

  • किसानों को अधिक कीमत पर खाद न बेची जाए।
  • जिन दुकानों पर खाद कम मात्रा में उपलब्ध है, वहां तत्काल खाद की आपूर्ति कराई जाए।
  • किसानों को कतई परेशान न होने दिया जाए।

विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक

कृषि मंत्री ने निरीक्षण भवन, पडरौना में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने निम्न बिंदुओं पर विस्तार से समीक्षा की—

  • जनपद में खाद की उपलब्धता और वितरण
  • ओवररेटिंग एवं टैगिंग
  • यूरिया की अप्रत्याशित खपत और बिक्री
  • खाद के डायवर्जन पर रोकथाम
  • प्रवर्तन टीम की कार्यवाही

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती गुंजन द्विवेदी सहित कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

छापेमारी के दौरान जिन दुकानों पर कार्रवाई हुई

श्री शाही ने कुशीनगर जिले में कई स्थानों पर छापेमारी की, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-

  • जय किसान जंक्शन, नेबुआ (नौरंगिया)
  • शंकर बीज भंडार, नेबुआ (रायगंज)
  • एग्री क्लीनिक एंड एग्री बिजनेस, नेबुआ (रायगंज)
  • प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, नेबुआ (रायगंज)
  • एग्री जंक्शन कृषि केंद्र, खड्डा कुशीनगर

किसानों को भरोसा

कृषि मंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार उनकी हर समस्या के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर किसानों का शोषण नहीं होने दिया जाएगा और इस प्रकार के औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

“Zepto- A Success Story”: दो दोस्तों की मेहनत और सफलता का संघर्षों से भरा सफर- 10 मिनट में ऑर्डर डिलीवर करने वाले Zepto के मालिकों की जोश से भरी हुई यह कहानी जरूर पढें और जानें इस बड़ी सफलता का राज

  • मुंबई के आदित पालीचा (ज. 2001) और बेंगलुरु के कैवल्य वोहरा (ज. 2003) ने मिलकर Zepto की नींव रखी।
  • Stanford University की पढ़ाई छोड़कर दोनों ने स्टार्टअप की राह चुनी।
  • पहला प्रयोग KiranaKart असफल रहा, लेकिन उसी अनुभव से Zepto का जन्म हुआ।
  • Zepto ने 10 मिनट ग्रॉसरी डिलीवरी मॉडल से क्विक कॉमर्स में क्रांति ला दी।
  • कुछ ही वर्षों में कंपनी यूनिकॉर्न बनी और दोनों दोस्त भारतीय युवाओं के लिए रोल मॉडल बन गए।

लखनऊ : शिवसागर सिंह चौहान – मुख्य सम्पादक – TRUE NEWS UP : कहते हैं कि किसी भी इंसान की सफलता की असली नींव उसके बचपन और शुरुआती अनुभवों में छिपी होती है। यही बात Zepto के संस्थापक आदित पालीचा और कैवल्य वोहरा की कहानी पर पूरी तरह लागू होती है।

आदित का जन्म 2001 में मुंबई में हुआ और उनका पालन-पोषण दुबई में हुआ, जहाँ से उन्होंने पढ़ाई के साथ नेतृत्व और सोचने का अलग नजरिया विकसित किया। वहीं, कैवल्य का जन्म 2003 में बेंगलुरु में हुआ और वे भी बचपन से ही टेक्नोलॉजी और प्रोग्रामिंग में गहरी रुचि रखते थे। दोनों की यह बुनियादी जिज्ञासा और मेहनत ही आगे चलकर उनकी सफलता का आधार बनी।

बचपन और शुरुआती जीवन

आदित पालीचा का जन्म 2001 में मुंबई में हुआ। हालांकि उनका पालन-पोषण दुबई में हुआ, जहाँ उनके परिवार ने नया ठिकाना बनाया। आदित बचपन से ही तेज दिमाग के छात्र माने जाते थे। उन्होंने GEMS Modern Academy से पढ़ाई की और यहाँ उन्होंने न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता दिखाई बल्कि नेतृत्व और टीमवर्क की क्षमता भी विकसित की। गणित और कंप्यूटर साइंस उनके पसंदीदा विषय रहे, और यही रुचि उन्हें भविष्य की राह दिखाने वाली थी।

दूसरी ओर, कैवल्य वोहरा का जन्म 15 मार्च 2003 को बेंगलुरु में हुआ। कुछ ही समय बाद उनका परिवार भी दुबई चला गया। उन्होंने Dubai College से शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उनका फोकस कंप्यूटर साइंस और प्रोग्रामिंग पर रहा। कैवल्य की रुचि टेक्नोलॉजी में इतनी गहरी थी कि वे किशोरावस्था से ही विभिन्न कोडिंग प्रोजेक्ट्स पर काम करने लगे थे।

दुबई में रहते हुए दोनों की पहचान आपसी नेटवर्किंग और साझा रुचियों के चलते हुई। धीरे-धीरे यह पहचान गहरी दोस्ती में बदल गई। दोनों के सपनों और जिज्ञासा में गहरा सामंजस्य था- नए प्रयोग करना, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके समस्याओं का समाधान खोजना और दुनिया में बदलाव लाने का सपना देखना।

स्टैनफोर्ड का सफर और बड़ा निर्णय

हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने अपनी मेहनत और योग्यता से दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक Stanford University में दाखिला लिया। यह किसी भी भारतीय परिवार के लिए गर्व का क्षण होता है।

स्टैनफोर्ड में दोनों कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे थे। यहाँ का वातावरण नवाचार और उद्यमिता से भरा हुआ था। Silicon Valley की हवा ही ऐसी है कि हर छात्र बड़े सपनों के साथ नई चीज़ें सोचता है। आदित और कैवल्य ने भी महसूस किया कि वे सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रह सकते।

फिर आया कोविड महामारी का समय। सारी कक्षाएँ ऑनलाइन हो गईं और अमेरिका जैसे देश में भी छात्र-जीवन सामान्य नहीं रह गया। इसी दौरान दोनों ने आत्ममंथन किया और निष्कर्ष निकाला कि उनकी असली चाहत कक्षाओं में बैठकर डिग्री पाना नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा और आइडिया को बिज़नेस बनाने में लगाना है।

यह निर्णय आसान नहीं था। स्टैनफोर्ड छोड़ना यानी उस डिग्री और प्रतिष्ठा को छोड़ना जिसे पाने का सपना हजारों छात्र देखते हैं। परिवारों ने भी चिंता जताई कि इतनी कम उम्र में इतना बड़ा रिस्क लेना कहीं गलत साबित न हो जाए। लेकिन आदित और कैवल्य ने दृढ़ निश्चय किया- “अगर कोशिश करनी है तो अभी करनी होगी।”

पहली कोशिश: KiranaKart और असफलता का अनुभव

भारत लौटने के बाद दोनों दोस्तों ने पहला प्रयोग किया- KiranaKart। इसका उद्देश्य था स्थानीय किराना दुकानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना और ग्राहकों तक तेज़ी से सामान पहुँचाना।

शुरुआत में यह विचार आकर्षक लगा। उन्हें Y Combinator जैसे निवेशक से शुरुआती फंडिंग भी मिली। बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में इस सेवा की टेस्टिंग शुरू हुई। लेकिन जल्द ही कई चुनौतियाँ सामने आईं।

  • छोटे दुकानदारों को डिजिटल सिस्टम अपनाने में दिक्कतें आईं।
  • डिलीवरी नेटवर्क उतना मजबूत नहीं था जितना ग्राहकों की उम्मीद थी।
  • ऑर्डर प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन में देरी होने लगी।
  • नतीजा यह हुआ कि ग्राहकों का भरोसा कमजोर पड़ा और धीरे-धीरे यह स्टार्टअप बंद करना पड़ा।

यह दोनों के लिए कड़वा अनुभव था, लेकिन यहीं से असली सीख भी मिली। उन्होंने महसूस किया कि किसी बिज़नेस की सफलता केवल आइडिया पर नहीं, बल्कि ग्राहकों की वास्तविक समस्या को समझकर उसे हल करने पर निर्भर करती है।

Zepto का जन्म: 10 मिनट डिलीवरी का वादा

KiranaKart के असफल होने के बावजूद दोनों दोस्तों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने अनुभव से सीखा और एक नया मॉडल सोचा। मार्च 2021 में Zepto का जन्म हुआ।

Zepto का वादा था- “ग्रॉसरी सिर्फ 10 मिनट में।” यह वादा सुनकर कई लोगों ने इसे मज़ाक समझा, लेकिन आदित और कैवल्य को विश्वास था कि टेक्नोलॉजी और सही रणनीति के सहारे यह संभव है।

उन्होंने डार्क स्टोर्स का मॉडल अपनाया। ये छोटे-छोटे वेयरहाउस होते हैं जो शहर के विभिन्न हिस्सों में ग्राहकों के करीब बनाए जाते हैं। हर डार्क स्टोर से एक तय दायरे में तेज़ डिलीवरी की जाती है।

इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि सामान पहले से ही स्टोर में स्टॉक रहता और डिलीवरी पार्टनर को केवल पैकेज उठाकर ग्राहक तक पहुँचना होता। इससे समय बहुत कम लगता और 10 मिनट का वादा पूरा करना संभव हुआ।

महामारी के दौर में जब लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे थे, Zepto एक राहत की तरह आया। दूध, ब्रेड, अंडे, दाल, तेल जैसी रोज़मर्रा की चीज़ें मिनटों में मिलना ग्राहकों के लिए बड़ी सुविधा साबित हुई।

निवेशकों का भरोसा और यूनिकॉर्न बनने का सफर

Zepto के मॉडल ने न केवल ग्राहकों का, बल्कि निवेशकों का भी ध्यान खींचा।

  • शुरुआती चरण में Y Combinator से फंडिंग मिली। इसके बाद Nexus Venture Partners, StepStone Group, और Glade Brook Capital जैसे बड़े नाम जुड़े।
  • 2022 और 2023 में कंपनी ने कई फंडिंग राउंड्स पूरे किए। हर दौर में Zepto की वैल्यूएशन तेजी से बढ़ती गई। 2023 में यह आधिकारिक तौर पर यूनिकॉर्न बन गया यानी कंपनी का मूल्य एक बिलियन डॉलर से अधिक हो गया।
  • 2024 तक इसकी वैल्यूएशन पाँच बिलियन डॉलर तक पहुँच गई और राजस्व 4,454 करोड़ रुपये का आँकड़ा पार कर गया। यह किसी भी भारतीय स्टार्टअप के लिए बेहद तेज़ प्रगति थी।
  • Zepto ने साबित किया कि अगर सही बिज़नेस मॉडल, टेक्नोलॉजी और ग्राहक-केंद्रित सोच हो, तो कम समय में भी चमत्कारिक सफलता हासिल की जा सकती है।

चुनौतियाँ और आलोचनाएँ

हर बड़ी सफलता के साथ आलोचनाएँ भी आती हैं। Zepto को भी इससे गुजरना पड़ा।

  • कंपनी पर आरोप लगा कि वह कर्मचारियों से लंबे समय तक काम कराती है और उन पर दबाव डालती है। कुछ शुरुआती सह-संस्थापकों के बीच हिस्सेदारी विवाद भी अदालत तक पहुँचा।
  • ग्राहकों ने भी कई बार शिकायत की कि ऐप पर डिस्काउंट और ऑफर्स को लेकर भ्रामक तरीकों (डार्क पैटर्न) का इस्तेमाल किया जाता है।
  • डिलीवरी पार्टनर्स ने सुरक्षा और उचित वेतन को लेकर चिंताएँ जताईं। कई बार 10 मिनट की डिलीवरी की दौड़ में सड़क हादसे की खबरें भी सामने आईं।
  • इन आलोचनाओं से Zepto की छवि को झटका लगा, लेकिन आदित और कैवल्य ने इन्हें सुधारने की कोशिश की। उन्होंने कर्मचारियों की नीतियों में बदलाव किए, सुरक्षा उपाय बढ़ाए और ग्राहकों की पारदर्शिता पर ध्यान दिया।

उपलब्धियाँ और सम्मान

Zepto आज भारत के क्विक कॉमर्स सेक्टर का सबसे प्रमुख नाम है।

  • 2023 और 2024 में आदित पालीचा और कैवल्य वोहरा दोनों को Hurun India की “Under 30” सूची में शामिल किया गया।
  • कैवल्य वोहरा भारत के सबसे युवा अरबपति माने जाते हैं।
  • Zepto को कई बिज़नेस अवॉर्ड्स और इनोवेशन अवॉर्ड्स भी मिल चुके हैं।
  • इन सब उपलब्धियों ने साबित कर दिया कि यह दोनों दोस्त भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में नई पीढ़ी के रोल मॉडल हैं।

जनता और ग्राहकों का नजरिया

ग्राहकों के लिए Zepto ने जीवन को आसान बनाया है। कामकाजी लोगों, छात्रों और गृहिणियों के लिए यह सबसे भरोसेमंद ऐप्स में से एक बन चुका है। कई लोग इसे सुविधा और समय बचाने के लिए सराहते हैं। खासकर मेट्रो शहरों में Zepto की लोकप्रियता बहुत अधिक है।

हालाँकि, कुछ ग्राहक अब भी मानते हैं कि कंपनी को अपने दाम और डिलीवरी चार्ज पर संतुलन बनाना चाहिए।

इस कहानी से मिलने वाला सबक

Zepto की यात्रा उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कुछ नया करना चाहते हैं। यह कहानी सिखाती है :

  • असफलता अंत नहीं, बल्कि नए अवसरों की शुरुआत है।
  • बड़े सपनों को सच करने के लिए जोखिम उठाना जरूरी है।
  • आलोचनाओं को सीख में बदलना ही असली उद्यमिता है।
  • उम्र सफलता की राह में बाधा नहीं है।

आदित और कैवल्य ने यह दिखा दिया कि अगर जुनून और आत्मविश्वास हो, तो दुनिया की कोई भी मंजिल पाना संभव है। आदित पालीचा और कैवल्य वोहरा की कहानी केवल Zepto की सफलता की कहानी नहीं है। यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए सबक है जो किसी आइडिया को लेकर बैठे हैं लेकिन डर या संकोच के कारण कदम आगे नहीं बढ़ा पाते। 2001 में मुंबई में जन्मे आदित और 2003 में बेंगलुरु में जन्मे कैवल्य ने दिखा दिया कि बड़े सपने देखने के लिए उम्र मायने नहीं रखती। आज Zepto लाखों घरों तक पहुँच चुका है, लेकिन इसकी असली पहचान यह है कि यह दो दोस्तों के साहस और सपनों का प्रतीक है।

CPL 2025: 57 गेंदों पर 14 चौकों और 6 छक्कों की मदद से ठोके 120 रन, इस बल्लेबाज की विस्फोटक पारी ने सबको चौंका दिया

कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) 2025 के चौथे मुकाबले में ट्रिनबागो नाइट राइडर्स के धाकड़ ओपनर कॉलिन मुनरो ने बल्ले से गजब का तूफान खड़ा कर दिया. 38 साल के इस बल्लेबाज ने ताबड़तोड़ शतक ठोकते हुए विपक्षी गेंदबाजों की जमकर खबर ली. मुनरो ने सिर्फ 57 गेंदों में 120 रन बना डाले, जिसमें 14 चौके और 6 छक्के शामिल रहे.

मुनरो का तूफानी अंदाज

सेंट किट्स एंड नेविस पैट्रियट्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, लेकिन शुरुआत से ही मुनरो ने उनका प्लान बिगाड़ दिया. उन्होंने एलेक्स हेल्स के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 9.1 ओवरों में 114 रन जोड़ दिए. हेल्स 27 गेंदों पर 47 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन तब तक नाइट राइडर्स का स्कोर तेजी से आगे बढ़ चुका था.

इसके बाद मुनरो ने कप्तान निकोलस पूरन के साथ 37 रन की साझेदारी की, लेकिन कप्तान पूरन  13 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. इसके बाद मुनरो ने किरोन पोलार्ड के साथ तीसरे विकेट के लिए 44 रन जोड़े, लेकिन पोलार्ड भी 19 रन बनाकर चलते बने. इस दौरान मुनरो ने महज 50 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया और छक्के के साथ माइलस्टोन हासिल कर महफिल लूट ली.

रनों की बारिश

मुनरो का बल्ला आखिरकार 19वें ओवर में जाकर थमा, जब जेसन होल्डर ने उन्हें आउट कर पवेलियन भेजा. लेकिन तब तक वह टीम को एक  स्थिति में पहुंचा चुके थे. बागो नाइट राइडर्स ने निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट पर 231 रन बनाए.पैट्रियट्स की ओर से जेसन होल्डर और वकार सलामखिल ने दो-दो विकेट लिए, जबकि डोमिनिक ड्रेक्स को एक सफलता मिली.

प्वाइंट्स टेबल पर असर

सेंट किट्स एंड नेविस पैट्रियट्स ने सीजन की शुरुआत एंटीगुआ एंड बारबुडा फाल्कन्स के खिलाफ जीत से की थी, लेकिन दूसरे मुकाबले में उन्हें गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने हराया.फिलहाल यह टीम प्वाइंट्स टेबल में दूसरे स्थान पर है.दूसरी ओर, ट्रिनबागो नाइट राइडर्स ने इस सीजन का अपना पहला मैच जीतकर धमाकेदार शुरुआत की है और अब उनका अगला मुकाबला एंटीगुआ एंड बारबुडा फाल्कन्स से होगा.

Sports News: दो भारतीय गेंदबाजों का जलवा, मिलकर झटके 9 विकेट, सुपरस्टार्स ने 46 रन से दर्ज की जीत

साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स ने रविवार को दिल्ली प्रीमियर लीग 2025 (डीपीएल) के 25वें मैच में पुरानी दिल्ली 6 के खिलाफ 46 रन से जीत दर्ज की. टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स की टीम को सलामी बल्लेबाजों ने शानदार शुरुआत दिलाई.

अंकुर कौशिक ने अनमोल शर्मा के साथ 6.4 ओवरों में 70 रन की साझेदारी की. अंकुर 17 गेंदों में 21 रन बनाकर पवेलियन लौटे. इसके बाद अनमोल शर्मा ने मोर्चा संभालते हुए टीम के स्कोर को आगे बढ़ाया.

अनमोल ने 37 गेंदों का सामना करते हुए 58 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से तीन छक्के और पांच चौके निकले. इनके अलावा कुंवर बिधूड़ी ने टीम के खाते में 22 रन का योगदान दिया, जबकि पांचाल ने 18 गेंदों में 31 रन बनाए.

विपक्षी टीम की ओर से रजनीश दादर और ललित यादव ने सर्वाधिक तीन-तीन विकेट झटके, जबकि आयुष सिंह के हाथ दो विकेट लगे.  इनके अलावा प्रदीप पाराशर ने एक शिकार किया. इसके जवाब में पुरानी दिल्ली 6 की टीम 20वें ओवर की अंतिम गेंद पर 138 के स्कोर पर सिमट गई,

टीम शुरुआत से ही लड़खड़ाती नजर आई. सात रन तक पुरानी दिल्ली ने तीन विकेट गंवा दिए थे. यहां से ललित यादव ने 28 गेंदों में 22 रन बनाते हुए टीम को संभालने की कोशिश की.

ललित यादव जब आउट हुए, उस समय तक टीम 74 के स्कोर तक सात विकेट गंवा चुकी थी. यहां से एकांश डोभाल ने रजनीश दादर के साथ आठवें विकेट के लिए 51 रन की साझेदारी की.

एकांश 42 गेंदों में 63 रन बनाकर आउट हुए. उनकी इस जुझारू पारी में तीन छक्के और सात चौके शामिल थे, लेकिन टीम जीत हासिल नहीं कर सकी.

विपक्षी टीम की ओर से सुमित बेनीवाल ने 19 रन देकर पांच विकेट चटकाए, जबकि अभिषेक खंडेलवाल ने चार विकेट अपने नाम किए. इनके अलावा अमन भारती ने एक शिकार किया. सुमित को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया.