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सीबीए लखनऊ को डॉ. राजेश्वर सिंह की सौगात : ₹2.5 लाख से बनेगी आधुनिक लाइब्रेरी, अधिवक्ताओं के लिए हेल्थ कवर की पहल, पार्किंग और बुनियादी सुविधाओं का आश्वासन

लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने गुरुवार को सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ (CBA) के पदाधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल से भेंट कर अधिवक्ताओं की समस्याओं और आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं को कई सौगातें दीं और भविष्य में और भी सहयोग का भरोसा दिलाया।

लाइब्रेरी के लिए ₹2.5 लाख की सहयोग राशि

बैठक में डॉ. सिंह ने बार एसोसिएशन को लाइब्रेरी की स्थापना हेतु ₹2.5 लाख की सहयोग राशि भेंट की। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही लाइब्रेरी को और आधुनिक स्वरूप देने के लिए एयर कंडीशनर और कंप्यूटर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

अधिवक्ताओं के लिए हेल्थ कवर और सुविधाएँ

विधायक ने कहा कि वे अधिवक्ताओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष अनुरोध करेंगे। इसके तहत प्रदेश के सभी अधिवक्ताओं को चिकित्सा लाभ (Health Cover) दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। साथ ही उन्होंने कचहरी परिसर के निकट पार्किंग व्यवस्था को सुदृढ़ कराने का भी भरोसा दिया।

“औपचारिक नहीं, आत्मीय संबंध” : डॉ. राजेश्वर सिंह

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए डॉ. सिंह ने लिखा-

“सरोजनीनगर का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ अधिवक्ता परिवार का सदस्य होने के नाते, मेरा संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मीय और पारिवारिक है। इसलिए उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को गहराई से समझता हूँ।”

प्रतिनिधि मंडल की उपस्थिति

इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल ने किया। प्रतिनिधि मंडल में उपाध्यक्ष आशीष शुक्ला, महामंत्री अवनीश दीक्षित ‘हनी’, कनिष्ठ उपाध्यक्ष सौरभ वर्मा एवं वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य सहदेव सिंह शामिल रहे।

Health Tips:कैंसर का इलाज ढूंढ लिया गया! यह नई थेरेपी ट्यूमर को सीधे खत्म करेगी, इम्यून सिस्टम की भी जरूरत नहीं होगी।

कैंसर के इलाज की दुनिया में जापानी वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जो आने वाले वर्षों में मेडिकल साइंस की दिशा बदल सकती है. ‌जापान एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक बैक्टीरिया आधारित थेरेपी विकसित की है, जो बिना इम्यून सिस्टम की मदद लिए सीधे कैंसर ट्यूमर को नष्ट कर सकती है. इसे एयूएन बैक्टीरिया कैंसर ट्रीटमेंट के नाम दिया गया है.

150 साल पुराने प्रयोग से नई खोज तक

कैंसर पर शोध करते हुए डॉक्टर ने सालों से इम्यून सिस्टम को हथियार बनाने की कोशिश करते आए हैं. ‌19वीं सदी के अंत में डॉक्टर विलियम कोली ने सबसे पहले यह प्रयोग किया, जिसे आधुनिक इम्यूनोथैरेपी का आधार माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीज इस थेरेपी से फायदा नहीं उठा पाते. इसी कमी को दूर करते हुए जेएआईएसटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक तैयार की है जो इम्यून सिस्टम पर निर्भर नहीं है और अपने आप कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती है.

कैसे काम करती है एयूएन थेरेपी

यह थेरेपी दो अलग-अलग बैक्टीरिया के मेल से तैयार की गई है.

    • A-gyo- यह ट्यूमर तक पहुंचकर सीधा कैंसर कोशिकाओं और उनकी रक्त वाहिकाओं पर हमला करता है.
    • UN-gyo-यह बैक्टीरिया A-gyo की गतिविधियों को नियंत्रित करता है ताकि संक्रमण फैलने की बजाय केवल ट्यूमर पर असर हो.

दिलचस्प बात यह है कि इंजेक्शन के समय दोनों बैक्टीरिया का अनुपात अलग होता है, करीब 3% A-gyo और 97% UN-gyo होता है, लेकिन जैसे ही यह ट्यूमर के अंदर पहुंचता है, अनुपात बदलकर लगभग 99% A-gyo का हो जाता है. इस बदलाव की वजह से ट्यूमर तेजी से नष्ट होता है जबकि साइंस साइड इफेक्ट्स पर भी नियंत्रण बना रहता है.

इम्यूनोथैरेपी से बड़ा फर्क

मौजूदा इम्यूनोथैरेपी जैसे कार्ट या चेकपॉइंट इनहिब‍िटर तभी असर करती है जब शरीर का इम्यून सिस्टम सक्रिय हो. इसके उलट एयूएन थेरेपी पूरी तरह इम्यून इंडिपेंडेंट है. प्रयोग में यह पाया गया है की कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मॉडल में भी ट्यूमर खत्म हो गया. इसके अलावा गंभीर दुष्प्रभाव जैसे साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम सामने नहीं आए. ‌वहीं बैक्टीरिया नियंत्रित तरीके से काम करते रहे. यानी यह थैरेपी उन मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकती है जिन्हें अब तक के इलाज से राहत नहीं मिली. रिसर्च का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर एजीरो मियाको ने बताया कि आने वाले वर्षों में इसका क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की तैयारी है. वैज्ञानिकों का लक्ष्य है कि अगले 6 सालों में यह तकनीक मरीजों तक पहुंच सके. इसके लिए एक स्टार्टअप बनाने की भी योजना है.

Health Tips:नाखूनों के रंग से छिपी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, जानें हर रंग किस बीमारी का संकेत देता है।

नाखून केवल खूबसूरती का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये हमारे शरीर की सेहत के लिए भी जरूरी संकेत जारी करता है. नाखूनों का रंग, बनावट और आकार हमारे शरीर की अंदरूनी स्थिति को दर्शाते हैं. आइए जानते हैं कि नाखूनों के विभिन्न रंगों से कौन-सी बीमारियों का संकेत मिलता है.

सफेद नाखून

सफेद नाखून लिवर की समस्याओं, जैसे पीलिया, का संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा, यह आयरन की कमी (एनीमिया) का भी संकेत देता है. यदि नाखूनों का सफेद होना लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है.

पीले नाखून

पीले नाखून फंगल इंफेक्शन या थायरॉइड की समस्याओं का संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा, यह विटामिन और मिनरल की कमी का भी संकेत हो सकता है. यदि नाखूनों का पीला होना बढ़े, तो विशेषज्ञ से जांच कराना चाहिए.

नीले नाखून

नीले नाखून शरीर में ऑक्सीजन की कमी या फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का संकेत देते हैं. यह गंभीर स्थिति हो सकती है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

काले या भूरे धब्बे

नाखूनों पर काले या भूरे धब्बे त्वचा कैंसर (मेलानोमा) का संकेत हो सकते हैं. यदि ये धब्बे बढ़ रहे हैं या आकार में बदल रहे हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.

लाल नाखून

नाखूनों का लाल होना शरीर में सूजन या इंफेक्शन का संकेत हो सकता है. यह रक्तचाप या हृदय से जुड़ी समस्याओं का भी संकेत देता है.

सफेद धब्बे

नाखूनों पर सफेद धब्बे कैल्शियम या जिंक की कमी का संकेत हो सकते हैं. यह सामान्यतः हानिरहित होते हैं, लेकिन यदि ये धब्बे बढ़ते हैं, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए.

नाखूनों की बनावट

नाखूनों की बनावट में बदलाव भी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकते हैं. जैसे, नाखूनों का चम्मच जैसा आकार (कोइलोनिचिया) आयरन की कमी का संकेत देता है. इसके अलावा, नाखूनों का मोटा होना या उभरा हुआ होना भी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है.

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉ. कलीम खान ने यूट्यूब पर अपने वीडियो में बताया कि नाखूनों में कोई भी असामान्य बदलाव शरीर में किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. वे सलाह देती हैं कि नाखूनों में रंग, आकार या बनावट में कोई भी बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें. समय पर पहचान और इलाज से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. नाखूनों के रंग और बनावट से हम अपनी सेहत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. यदि नाखूनों में कोई भी असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें. स्वस्थ नाखून स्वस्थ शरीर का संकेत हैं, और इनकी देखभाल से हम कई स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.  

अमेरिका के एक स्कूल में ताबड़तोड़ फायरिंग, 3 की मौत; सुरक्षाबलों ने शूटर को मार गिराया, ट्रंप को दी गई जानकारी

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में स्थित एनन्सिएशन कैथोलिक स्कूल में बुधवार  सुबह गोलीबारी हुई. इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हुए. एक अधिकारी ने बताया कि हमलावर भी मारे गए लोगों में शामिल है.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चे सुबह की प्रार्थना सभा में शामिल थे तभी गोलीबारी शुरू हो गई. यह स्कूल कैथोलिक चर्च से जुड़ा हुआ है और मिनियापोलिस के दक्षिण-पूर्वी आवासीय इलाके में स्थित है. जिस कैथोलिक स्कूल में गोलीबारी की गई, वहां प्री-स्कूल से लेकर 8वीं कक्षा तक के बच्चे पढ़ते हैं. यहां करीब 395 बच्चों ने दाखिला लिया हुआ है.

मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने घटना को भयानक बताया

मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने कहा कि हमारे बच्चों और शिक्षकों के लिए यह बहुत दर्दनाक है, जिनका स्कूल का पहला हफ्ता इस हिंसा से खराब हो गया. उन्होंने बच्चों और अध्यापकों के लिए प्रार्थना की. घटना के बाद पुलिस, FBI, फेडरल एजेंट्स और एम्बुलेंस तुरंत मौके पर पहुंची. स्कूल से जुड़े एक शख्स के मुताबिक, बच्चों को स्कूल से सुरक्षित निकाल लिया गया.

मिनियापोलिस के मेयर बोले- दर्द बयां करना मुश्किल

मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह घटना कल्पना से भी परे है. इस घटना की भयावहता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है. इन्हें किसी और के बच्चे मत समझिए. इसे अपने बच्चे की तरह समझिए. कई बच्चे मर चुके हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप को दी गई घटना की जानकारी 

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिनियापोलिस के  कैथोलिक स्कूल में हुई गोलीबारी की जानकारी दी गई है. उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस स्थिति पर नजर रखे हुए है. ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने एक पोस्ट में लिखा- ‘FBI तुरंत मौके पर पहुंच गई है और कार्रवाई कर रही है, इस घटना से जुड़े सभी लोगों के लिए प्रार्थना कर रहा हूं.’

शहर में 24 घंटे में कई गोलीबारी की घटना

यह गोलीबारी मिनियापोलिस शहर में पिछले 24 घंटों में हुई चौथी बड़ी हिंसक घटना है. इससे पहले मंगलवार  दोपहर एक हाई स्कूल के बाहर हुई गोलीबारी में एक शख्स की मौत हो गई थी और छह लोग घायल हुए थे. इसके कुछ घंटे बाद हुई अन्य दो घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई थी.

झारखंड की रहस्यमयी तैमारा घाटी: खूबसूरती के साथ छिपा खौफ, यहां जाते ही बदल जाता है मोबाइल का टाइम

झारखंड भारत का एक प्रमुख और खूबसूरत राज्य है। यह राज्य साल 2000 में बिहार से अलग होकर देश का 28वां राज्य बना था। आज झारखंड पूरे भारत का एक खनिज समृद्ध राज्य माना जाता है। झारखंड घने जंगलों, कोयला खदानों और बेहतरीन पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है। झारखंड की पतरानू घाटी, हुंडरू, टैगोर हिल और दशम वॉटरफॉल, नेतरहाट और तोपचांची झील जैसी खूबसूरत जगहों के बारे में हर कोई जानता है।

इन खूबसूरत जगहों के बीच तैमारा घाटी के बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है। तैमारा घाटी झारखंड में ‘मौत का हाइवे’ के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको तैमारा घाटी की डरावनी कहानियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

तैमारा घाटी

तैमारा घाटी एक डरावनी जगह मानी जाती है, जोकि रांची-जमशेदपुर हाईवे यानी एनएच-33 पर है। यह जगह राजधानी रांची से करीब 30 किमी की दूरी पर है। हाइवे पर होने के कारण तैमारा घाटी को ‘मौत का हाइवे’ के नाम से भी जानी जाती है। यह हाइवे घने जंगलों के बीच में है, जिसकी वजह से यह काफी डरावना लगता है।

तैमारा घाटी की घटनाएं

तैमारा घाटी की एक नहीं बल्कि कई घटनाएं प्रचलित हैं। यह घाटी देखने में तो काफी मनमोहक लगती है। लेकिन यह घाटी कई मौतों की गवाह भी बन चुकी है। बताया जाता है कि इस घाटी गुजरने पर टाइम और तारीख अपने आप बदल जाती है।

तैमारा घाटी को लेकर एक अन्य कहानी है कि जंगलों के बीच से जब गाड़ी गुजरती है, तो उस गाड़ी की स्पीड मीटर खुद ब खुद बदल जाती है। वहीं माना जाता है कि रात के समय इस घाटी से अजीबो-गरीब आवाजें आती रहती हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि डर के कारण लोग रात में अकेले इस घाटी से गुजरना नहीं चाहते हैं।

तैमारा घाटी की डरावनी कहानियां

इस घाटी की सबसे डरावनी कहानियों में फेमस कहानी मोबाइल में डेट और समय का बदल जाना है। कई लोगों का इस घाटी के बारे में मानना है कि जब कोई यहां से गुजरता है तो उसके मोबाइल में साल, डेट और समय अपने आप बदल जाता है।

ऐसा होने के पीछे लोग कुछ और कहानी भी बताते हैं। लोगों का मानना है कि तैमारा घाटी से कुछ ही दूरी पर मैग्नेटाइज्ड रॉक है। जिसकी वजह से यह समस्या होती है। वहीं एक अन्य कारण यह भी है कि इसी घाटी से कर्क रेखा गुजरती है, जिस वजह से यह समस्या होती है।

तैमारा घाटी घूमने जाते हैं पर्यटक

बता दें कि झारखंड की राजधानी रांची से करीब 30 किमी दूर स्थित तैमारा घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां पर भीषण गर्मी में भी ठंडी-ठंडी हवाएं चलती हैं। ऐसे में पर्यटक भी तैमारा घाटी घूमने के लिए पहुंचते हैं। मानसून के समय पर्यटक दूर-दूर से यहां पर लॉन्ग ड्राइव के लिए पहुंचते हैं। मानसून में इस घाटी की खूबसूरती देखने लायक होती है।