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रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा: विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का ‘रामरथ’ बना सामाजिक सहभागिता का मंच, 42वीं यात्रा बनीं श्रद्धा का सजीव सेतु, मातृशक्ति के संकल्पों की सारथी

  • ‘रामरथ’ श्रद्धा से व्यवस्था तक, सेवा से संस्कृति तक : डॉ. राजेश्वर सिंह का जन-जुड़ाव का अभिनव मॉड
  • सनातन मूल्यों की पुनर्स्थापना का संवेदनशील संकल्प : डॉ. सिंह की फ्री ‘रामरथ’ बस सेवा बनीं एक जनचेतना
  • रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा : आत्मबल, सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों से जुड़ाव का एक गूढ़ माध्यम

लखनऊ: “जहाँ भक्ति होती है, वहाँ व्यवस्था भी दिव्यता का रूप ले लेती है।” सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा नियमित संचालित ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ इसी भावना की जीवंत मिसाल है। सरोजनीनगर क्षेत्र में मातृशक्ति और बुजुर्ग जनों की आस्था को साधनों का सम्बल प्रदान कर रही यह निःशुल्क बस सेवा केवल एक तीर्थयात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि उन वंचितों के लिए एक नवसंकल्प भी है जिन्हें जीवन में कभी अयोध्या जाने का अवसर नहीं मिला।

सोमवार को सम्पन्न हुई 42वीं यात्रा में गहलवारा, दोना, पानखेड़ा और शिवरी के ताराशक्ति केंद्रों (सिलाई केंद्रों) से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को भव्य राम मंदिर, हनुमानगढ़ी, सरयू तट, राम की पौड़ी व अन्य पवित्र स्थलों के दर्शन कराए गए। इससे पूर्व की यात्राओं में वृद्धाश्रमों के बुजुर्गों सहित कई गांवों की असहाय माताओं और वयोवृद्ध नागरिकों को भी यह सौभाग्य प्राप्त हो चुका है।

सेवा, श्रद्धा और संस्कार की आदर्श परंपरा

यह निःशुल्क बस सेवा मातृशक्ति और वृद्धजनों के लिए केवल धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि आत्मबल, सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों से जुड़ाव का एक गूढ़ माध्यम बन चुकी है। प्रभु श्रीराम के आदर्शों के माध्यम से जीवन दर्शन को आत्मसात करने, आस्था से आत्मविकास की प्रेरणा प्राप्त करने और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ने की यह एक प्रेरक पहल है। यह यात्रा सेवा, श्रद्धा और संस्कार की आदर्श परंपरा भी है।

सेवा की पूर्ण व्यवस्था, श्रद्धा की शुद्ध भावना

इस दिव्य यात्रा को केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित सेवा-संकल्प सफल बनाता है। डॉ. राजेश्वर सिंह की ओर से यात्रा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं: घर से अयोध्या और वापस घर तक सम्पूर्ण यात्रा का निशुल्क प्रबंध, हर बस में प्रशिक्षित वालंटियर्स की उपस्थिति, यात्रा मार्ग में जलपान, प्रसाद और शुद्ध भोजन की समुचित व्यवस्था, अयोध्या में लोकल कन्वेंस हेतु बैटरी रिक्शा की व्यवस्था, प्रत्येक तीर्थयात्री को स्मृति चिन्ह व भक्ति सामग्री के साथ सम्मानपूर्वक विदाई।

एक जनप्रतिनिधि का संवेदनशील दृष्टिकोण:

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह मानते हैं कि “आस्था केवल आत्मिक ऊर्जा नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम है।” डॉ. सिंह की यह पहल न केवल जनसेवा का प्रतिमान है, बल्कि एक ऐसी स्थायी परंपरा है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक श्रद्धा और सम्मान पहुँचाने का कार्य कर रही है। उनका स्पष्ट मानना है,”भक्ति में शक्ति हो, शक्ति में संस्कार हो और संस्कारों से राष्ट्र निर्माण हो यही हमारी भावना, यही इस यात्रा का उद्देश्य है।”

डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा संचालित रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा केवल सरोजनीनगर से अयोध्या की ओर ही नहीं, बल्कि उस सामाजिक चेतना की ओर भी अग्रसर है, जहाँ हर व्यक्ति को न केवल धार्मिक अधिकार, बल्कि सांस्कृतिक भागीदारी का भी संपूर्ण अवसर मिले।

गुजरात टाइटंस ने जबरदस्त जीत के साथ इतिहास रचा, T20 क्रिकेट में यह कारनामा करने वाली बनी विश्व की केवल दूसरी टीम

इंडियन प्रीमियर लीग 2025 के 60वें मुकाबले में 18 मई को गुजरात टाइटंस ने धमाकेदार जीत दर्ज की। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मैच में गुजरात ने दिल्ली कैपिटल्स को 10 विकेट से मात दी और प्वाइंट्स टेबल में पहला स्थान हासिल करते हुए प्लेऑफ का टिकट कटाया। गुजरात ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। दिल्ली कैपिटल्स ने निर्धारित 20 ओवरों में 3 विकेट खोकर 199 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया। हालांकि, यह स्कोर गुजरात की बल्लेबाजी के सामने टिक नहीं सका।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात टाइटंस की सलामी जोड़ी ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। साई सुदर्शन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 61 गेंदों पर नाबाद 108 रनों की पारी खेली। उनके साथ कप्तान शुभमन गिल ने भी धमाल मचाते हुए 93 रन बनाए। दोनों ने मिलकर मात्र 19 ओवर में 205 रन ठोक डाले और टीम को एकतरफा जीत दिला दी। इस तरह गुजरात टाइटंस IPL के इतिहास में बिना एक भी विकेट गंवाए 200 प्लस टारगेट चेज करने वाली पहली टीम बन गई।

गुजरात टाइटंस का बड़ा कारनामा

बता दें, यह IPL में बिना विकेट खोए किसी भी टीम द्वारा सफलतापूर्वक हासिल किया गया सबसे बड़ा लक्ष्य है। इससे पहले सबसे बड़ा लक्ष्य 2017 में कोलकाता नाइट राइडर्स ने गुजरात लायंस के खिलाफ 184 रनों का हासिल किया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि गुजरात T20 क्रिकेट में बिना विकेट खोए 200 से ज्यादा का लक्ष्य हासिल करने वाली महज दूसरी टीम बन गई है। इससे पहले सिर्फ पाकिस्तान ने 2022 में कराची में इंग्लैंड के खिलाफ T20I में 200 रन का लक्ष्य हासिल किया था।

GT 2 – 0 DC

IPL 2025 में गुजरात टाइटंस और दिल्ली कैपिटल्स के बीच 2 मुकाबले खेले गए और दोनों ही मैचों में शुभमन गिल की टीम ने बाजी मारी। दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही मैचों में गुजरात ने 200 से ज्यादा रनों का लक्ष्य हासिल किया। IPL के एक सीजन में पहली बार ऐसा हुआ है जब एक टीम ने किसी टीम के खिलाफ दोनों मैचों में 200 से ज्यादा रनों का टारगेट चेज किया हो। T20 क्रिकेट में दूसरी बार ऐसा देखने को मिला है। इससे पहले केवल एक टीम बुल्गारिया ने 2022 में सर्बिया के खिलाफ T20 टूर्नामेंट (या सीरीज) में कई बार 200 से ज्यादा रनों का लक्ष्य हासिल करने का बड़ा कारनामा किया था।

Latest Sports News :पंजाब ने 10 साल बाद तोड़ा सूखे का सिलसिला, श्रेयस अय्यर ने रचा इतिहास, ऐसा करने वाले बने पहले कप्तान

गुजरात टाइटंस ने लोकेश राहुल के शतक पर पानी फेरते हुए 18 मई को अरुण जेटली स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स को 10 विकेट से रौंदकर न केवल पाइंट्स टेबल में टॉप पर कब्जा जमाया बल्कि प्लेऑफ के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। लगातार तीन जीत के साथ गुजरात टाइटंस के 12 मैच में 18 पाइंट हो गए हैं। गुजरात की जीत के साथ ही रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और पंजाब किंग्स भी प्लेऑफ में पहुंच गई। दोनों टीमों के अब 12 मैच में 17-17 पाइंट हो गए हैं।

इससे पहले पंजाब किंग्स की टीम राजस्थान रॉयल्स को 10 रन से हराकर प्लेऑफ के करीब पहुंच गई। इसके बाद गुजरात ने जैसे ही दिल्ली को हराया तो पंजाब ने प्लेऑफ का टिकट हासिल कर लिया। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में शानदार प्रदर्शन करते हुए पंजाब ने 10 साल बाद IPL प्लेऑफ में जगह बनाई। इससे पहले पंजाब की टीम साल 2014 में आखिरी बार प्लेऑफ में पहुंची थी। पंजाब अब तक सिर्फ 3 बार ही प्लेऑफ में पहुंची है। टीम ने पहली बार साल 2008 में प्लेऑफ तक का सफर तय किया था।

अय्यर के नाम हुआ अनोखा रिकॉर्ड

पंजाब किंग्स को प्लेऑफ में पहुंचाने के साथ ही कप्तान श्रेयस अय्यर ने कप्तानी में अनोखा रिकॉर्ड बना डाला। अय्यर प्लेऑफ में तीन अलग-अलग टीमों की अगुआई करने वाले पहले कप्तान बन गए हैं। IPL में इससे पहले ये बड़ा कारनामा कोई भी कप्तान नहीं कर पाया था। पंजाब से पहले अय्यर दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स को भी प्लेऑफ में पहुंचा चुके हैं।

उन्होंने अपनी कप्तानी में दिल्ली कैपिटल्स को IPL 2020 के फाइनल तक पहुंचाया था लेकिन टीम खिताब जीतने में नाकाम रही। पिछले सीजन उनकी कप्तानी में कोलकाता की टीम न केवल प्लेऑफ में पहुंची थी, बल्कि IPL का खिताब भी अपने नाम किया था। हालांकि, चैंपियन बनाने के बावजूद KKR ने अय्यर को रिटेन नहीं किया और फिर पंजाब किंग्स ने मेगा ऑक्शन में अय्यर को अपनी टीम में शामिल कर लिया। अब अय्यर के पास पंजाब को चैंपियन बनाने का शानदार मौका है। अगर ऐसा करने में वह सफल होते हैं, तो IPL में 2 टीमों को चैंपियन बनाने वाले पहले कप्तान बन सकते हैं। IPL के इतिहास में आज तक ऐसा देखने को नहीं मिला है।

पंजाब की नजर टॉप-2 पर 

IPL 2025 में अब पंजाब किंग्स के लीग स्टेज में 2 मुकाबले बचे हैं। टीम 24 मई को दिल्ली कैपिटल्स और फिर 26 मई को मुंबई इंडियंस से भिड़ेगी। इन दोनों मैचों में पंजाब की नजर जीत दर्ज करते हुए पाइंट्स टेबल में टॉप-2 में फिनिश करने की होगी।

”आपका विधायक-आपके द्वार”: सरोजनीनगर में जनता की चौखट पर जनप्रतिनिधि, 120 हफ़्तों से अनवरत चल रही सेवा यात्रा

  • संवाद से समाधान : जहाँ हर रविवार बना जन आकांक्षाओं का त्यौहार
  • हर रविवार की सुबह, एक नई उम्मीद : सरोजनीनगर में जनतंत्र को जीवंत बना रहे डॉ. राजेश्वर सिंह
  • 120 सप्ताह, अनवरत संवाद – जनता के विश्वास की जीत जनसुनवाई शिविर”

लखनऊ: सियासत के गलियारों में जहां वादे अक्सर खो जाते हैं, वहीं सरोजनी नगर में हर सप्ताह जनता की चौखट पर पहुँचने वाली एक परंपरा ने लोकतंत्र को नया जीवन दिया है। यह परंपरा है ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ जनसुनवाई शिविर की, जिसे सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में 120 सप्ताहों से निरंतर चलाया जा रहा है। इस रविवार काशीराम कॉलोनी, सदरौना में 120वें शिविर का आयोजन हुआ, जहाँ समस्याओं के समाधान, प्रतिभाओं के सम्मान और जनसेवा के संकल्प का फिर एक बार सशक्त मंच बना।

जन समस्याओं का समाधान

शिविर में पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, नाली निर्माण, विद्युत आपूर्ति, आयुष्मान कार्ड आदि से संबंधित लगभग 35 जनसमस्याएं दर्ज की गईं। इनमें से अधिकांश मामलों में तत्काल आवश्यक दस्तावेज भरवाकर प्रक्रियागत कार्यवाही आरंभ की गई, जबकि कुछ प्राथमिक समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया गया।

गाँव की शान – प्रतिभाओं का सम्मान

‘गाँव की शान’ पहल के तहत क्षेत्र के मेधावी छात्र-छात्राओं को मंच पर सम्मानित किया गया। इंटरमीडिएट परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर काजल (85%) और दिव्यांश (82%) तथा हाईस्कूल परीक्षा में नंदिनी शाह (85%) और हर्षित तिवारी (84%)को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।

जन सहभागिता की परंपरा

इस अभिनव पहल ने 120 सप्ताहों में यह सिद्ध किया है कि जब जनप्रतिनिधित्व केवल शासकीय दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व बन जाए, तब राजनीति जनभावनाओं का प्रतिबिंब बन जाती है।

सेवा में संवेदना : ‘तारा शक्ति निःशुल्क रसोई’

शिविर के दौरान उपस्थित क्षेत्रवासियों के लिए ‘तारा शक्ति निःशुल्क रसोई’ के माध्यम से स्वच्छ, ताज़ा और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई, जो सेवा और आत्मीयता का अनोखा संगम रहा।

ल्हासा: तिब्बत, बंगाल की खाड़ी और म्यांमार में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर दर्ज की गई इतनी तीव्रता

 तिब्बत, बंगाल की खाड़ी और म्यांमार में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। तिब्बत में 3.8 तीव्रता का भूकंप आया है। बंगाल की खाड़ी में 4.5 की तीव्रता का भूकंप आया है। वहीं म्यांमार में 3.9 की तीव्रता का भूकंप आया है।

हालांकि खबर लिखे जाने तक इस भूकंप से किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली है। गौरतलब है कि भूकंप पृथ्वी की सतह पर होने वाली हलचल या कंपन हैं, जो मुख्य रूप से टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण होते हैं।

भूकंप आने का कारण भी जानें

पृथ्वी की बाहरी परत (लिथोस्फीयर) कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी है। ये प्लेटें पृथ्वी के आंतरिक भाग (मैन्टल) पर तैरती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, दूर हटती हैं या एक-दूसरे के नीचे सरकती हैं, तो इससे तनाव उत्पन्न होता है। यह तनाव जब अचानक रिलीज होता है, तो भूकंप आता है।

जब टेक्टोनिक प्लेटों में तनाव रिलीज होता है, तो यह ऊर्जा भूकंपीय तरंगों (सिस्मिक वेव्स) के रूप में फैलती है। ये तरंगें पृथ्वी की सतह को हिलाती हैं, जिससे भूकंप का अनुभव होता है। भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) वह स्थान होता है, जो उस बिंदु के ठीक ऊपर होता है, जहां चट्टानें टूटती हैं।

भारत में भूकंप का खतरा कहां है?

भारत में हिमालय क्षेत्र और कुछ अन्य फॉल्ट लाइनों (जैसे कच्छ, पूर्वोत्तर भारत) के कारण भूकंप का खतरा अधिक है, क्योंकि भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। संक्षेप में, भूकंप प्राकृतिक और कभी-कभी मानव-प्रेरित प्रक्रियाओं का परिणाम हैं, जो पृथ्वी की आंतरिक गतिशीलता से जुड़े होते हैं।

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का अंदाजा कैसे लगा सकते हैं?

4 से 4.9 तीव्रता के भूकंप में घर में रखा सामान अपनी जगह से नीचे गिर सकता है। 5 से 5.9 तीव्रता के भूकंप में भारी सामान और फर्नीचर भी हिल सकता है। 6 से 6.9 में इमारत का बेस दरक सकता है। 7 से 7.9 में इमारतें गिर जाती हैं। 8 से 8.9 में सुनामी का खतरा होता है और ज्यादा तबाही मचती है। 9 या ज्यादा में सबसे भीषण तबाही होती है।