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पीएम मोदी और जिनपिंग ने सीमा विवाद सुलझाने और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने में एकजुटता दिखाई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को भारत-चीन सीमा मुद्दे के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में काम करने पर सहमति जताई. उन्होंने वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में दोनों अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को स्वीकार करते हुए व्यापार और निवेश संबंधों को विस्तार देने का संकल्प भी लिया.

उत्तरी चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच यह बातचीत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की टैरिफ संबंधी नीति से वैश्विक अर्थव्यवस्था में पैदा हुई उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में हुई. दोनों नेताओं ने अपनी व्यापक बातचीत में मुख्य रूप से व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया.

मोदी ने सीमावर्ती इलाकों में शांति और सौहार्द के महत्व पर दिया जोर

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन संबंधों के लगातार विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और सौहार्द के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर बीजिंग के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.

भारत की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने और व्यापार घाटे में कमी लाने की प्रतिबद्धता जताई. उन्होंने आतंकवाद और बहुपक्षीय मंचों पर निष्पक्ष व्यापार जैसे द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों और चुनौतियों पर साझा आधार का विस्तार करने की सहमति व्यक्त की.

भारत-चीन का सहयोग 2.8 अरब लोगों की हितों से जुड़ा- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने वक्तव्य में कहा, ‘हमारा सहयोग दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हितों से जुड़ा है. इससे समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा.’ वहीं, विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपने बयान में कहा कि मोदी और शी जिनपिंग ने विश्व व्यापार को स्थिर करने में दोनों अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को स्वीकार किया और द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने और व्यापार घाटे में कमी लाने के लिए राजनीतिक और रणनीतिक रूप से आगे बढ़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया.

MEA ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन दोनों ही सामरिक स्वायत्तता चाहते हैं और उनके संबंधों को किसी तीसरे देश के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. दोनों नेताओं ने आतंकवाद और बहुपक्षीय मंचों पर निष्पक्ष व्यापार जैसे द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों और चुनौतियों पर साझा आधार को विस्तार देने को आवश्यक बताया.’

जिनपिंग के साथ बैठक के बाद क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में शी जिनपिंग के साथ अपनी बातचीत को फलदायी करार दिया. उन्होंने लिखा, ‘हमने रूस के कजान में अपनी पिछली बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों को मिली सकारात्मक गति की समीक्षा की. हमने माना कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखना अहम है. हमने आपसी सम्मान, हितों और संवेदनशीलता पर आधारित सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.’

भारत और चीन ने जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में बढ़ी तल्खी को दूर करने के लिए हाल के महीने में कई कदम उठाए हैं. मोदी दो देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में शनिवार (30 अगस्त, 2025) की शाम जापान से चीन के तियानजिन पहुंचे थे. यह सात साल से ज्यादा समय के बाद मोदी की चीन की पहली यात्रा है.

कजान में मुलाकात के बाद भारत-चीन सीमा पर कायम है शांति- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘पिछले साल अक्टूबर में कजान में उनकी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता का माहौल कायम है.’ वहीं, विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘दोनों नेताओं ने अक्टूबर में कजान में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों को मिली सकारात्मक गति और उसमें हो रही निरंतर प्रगति का स्वागत किया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश विकास साझेदार हैं, न कि प्रतिद्वंद्वी और उनके मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए.’

मंत्रालय ने कहा, ‘भारत, चीन और उनके 2.8 अरब लोगों के बीच आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता पर आधारित स्थिर संबंध और सहयोग दोनों देशों की वृद्धि और विकास के साथ-साथ 21वीं सदी के रुझानों के अनुरूप बहुध्रुवीय दुनिया और बहुध्रुवीय एशिया के लिए आवश्यक हैं.’ उसने कहा कि दोनों नेताओं ने पिछले साल (पूर्वी लद्दाख के विवादित बिंदुओं से) सैनिकों की सफल वापसी और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द की बहाली पर संतोष व्यक्त किया.

मोदी और जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों के प्रति प्रतिबद्धता जताई- MEA

मंत्रालय ने कहा, ‘मोदी और शी जिनपिंग ने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा मुद्दे के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के प्रति प्रतिबद्धता जताई.’ उसने कहा, ‘दोनों नेताओं ने इस महीने की शुरुआत में दो विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों का जिक्र किया और उनके प्रयासों को आगे भी समर्थन देने पर सहमति व्यक्त की.’

मंत्रालय के मुताबिक, मोदी और शी जिनपिंग ने कैलाश मानसरोवर यात्रा और पर्यटक वीजा की बहाली के आधार पर सीधी उड़ानों और वीजा सुविधा के माध्यम से लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की.

उसने कहा, ‘आर्थिक और व्यापारिक संबंधों के सिलसिले में दोनों नेताओं ने विश्व व्यापार को स्थिर करने में अपनी-अपनी अर्थव्यवस्था की अहम भूमिका को स्वीकार किया. उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार करने और व्यापार घाटे में कमी लाने के लिए राजनीतिक और रणनीतिक रूप से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया.’

पीएम मोदी SCO की सफल अध्यक्षता के लिए जिनपिंग को दी बधाई

मोदी ने चीन की ओर से शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की सफलतापूर्वक अध्यक्षता किए जाने के लिए शी जिनपिंग को बधाई भी दी. उन्होंने चीनी राष्ट्रपति को 2026 में भारत में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित भी किया. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने निमंत्रण के लिए मोदी को धन्यवाद दिया और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन की पेशकश की.

मंत्रालय ने कहा, ‘मोदी ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य कै क्वी के साथ भी बैठक की. प्रधानमंत्री ने क्वी के साथ बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को लेकर अपना रुख साझा किया और दोनों नेताओं (मोदी और शी) के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए उनका समर्थन मांगा. बैठक में क्वी ने द्विपक्षीय आदान-प्रदान बढ़ाने और दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुरूप संबंधों को और बेहतर बनाने की चीनी पक्ष की इच्छा दोहराई.’

SCO समिट से पहले नेपाल के प्रधानमंत्री ओली भारत-चीन के किस फैसले से हुए नाराज़, जिनपिंग से की खास शिकायत – जानिए पूरा मामला।

नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने शनिवार  को लिपुलेख के जरिए सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने के भारत और चीन के समझौते पर कड़ी आपत्ति जताई. ओली ने दावा किया कि यह इलाका 1816 की सुगौधी संधि के तहत नेपाल के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है.

के. पी. ओली ने इस संबंध में सीधे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपने संदेश दिया. ओली ने शनिवार को तियानजिन में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान शी जिनपिंग से यह बात कही. नेपाली पीएम और चीनी राष्ट्रपति की यह बैठक तियानजिन में आयोजित 25वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन और SCO प्लस बैठक से ठीक पहले हुई.

नेपाल के विदेश सचिव ने बयान जारी कर साझा की जानकारी

नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है. उन्होंने कहा, ‘ओली ने शी जिनपिंग को याद दिलाया कि सुगौली संधि में महाकाली नदी को सीमा रेखा के रूप में तय किया गया था और नदी के पूर्व दिशा में स्थित सभी इलाकों को नेपाल का हिस्सा बताया गया है, जिसमें लिपुलेख भी शामिल है.’

राय ने कहा, ‘चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक में मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ओली ने लिपुलेख मुद्दे को भी उठाया. इस मामले में उन्होंने स्पष्ट किया कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक महाकाली नदी के पूर्व दिशा में पड़ने वाले सभी क्षेत्र नेपाल के हैं. ऐसे में चीन को लिपुलेख इलाके का व्यापार के लिए इस्तेमाल करने वाले इस समझौते का समर्थन नहीं करना चाहिए, क्योंकि नेपाल को इस भारत-चीन के बीच हुए इस समझौते पर आपत्ति है. यह स्पष्ट संदेश राष्ट्रपति शी जिनपिंग तक पहुंचाया गया.’

नेपाल PMO ने ओली के रुख को दोहराया

विदेश सचिव के अलावा, नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी पीएम के. पी. शर्मा ओली के इस रुख को दोहराते हुए नेपाल के पक्ष को स्पष्ट रूप से रखा. PMO ने अपने बयान में कहा, ‘राष्ट्रपति शी के साथ बैठक में पीएम ओली ने स्पष्ट रूप से लिपुलेख के नेपाली इलाके को व्यापार का रास्ता बनाने के भारत-चीन समझौते पर नेपाल की आपत्ति जताई.

भारत और चीन के समझौते के बाद फिर से उभरा विवाद

यह विवाद इस अगस्त महीने की शुरुआत में फिर से उभर कर सामने आया था, जब भारत और चीन ने नई दिल्ली में हुई बातचीत के दौरान नेपाल के दार्चुला जिले में स्थित लिपुलेख पास से व्यापार को फिर से खोलने पर सहमति जताई.

वहीं, चीन और भारत के इस समझौते के जवाब में नेपाली विदेश मंत्रालय ने 20 अगस्त को फिर से दोहराया कि नेपाल के आधिकारिक नक्शे में लिपिंयाधुरा, लिपुलेख और कालापानी उसके अभिन्न हिस्से हैं, जो नेपाल के संविधान में अंकित है. हालांकि, भारत के अपने रुख को बरकरार रखा है कि लिपुलेख पास से सीमा व्यापार 1954 से ही चला आ रहा है और यह पिछले कुछ सालों में सिर्फ कोरोना महामारी और कुछ अन्य कारणों की वजह से बाधित हुआ था. लेकिन अब भारत और चीन ने इसे फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है.

आतंकवाद से लेकर सीमा सुरक्षा तक, भारत और चीन ने इन अहम मुद्दों पर साझा सहमति बनाई – विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार  को चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की होने वाली वार्षिक शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद, सीमा विवाद और व्यापार सहित कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की.

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रविवार  को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में हुई चर्चा के बारे में जानकारी साझा की. विक्रम मिस्री ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमा पार आतंकवाद का जिक्र किया. उन्होंने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर बहुत स्पष्ट और सटीक तरीके से अपनी बात को रखा.

पीएम मोदी ने कहा, ‘चीन और भारत दोनों ही आतंकवाद के शिकार रहे हैं और भारत अब भी इससे लड़ रह है.’ आतंकवाद के मुद्दे को लेकर पीएम मोदी ने चीन से समर्थन की मांग की, जिस पर चीनी पक्ष ने विभिन्न तरीकों से अपना समर्थन देने की बात कही. इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखना संबंधों के समग्र विकास के लिए बीमा की तरह है. सीमा पर स्थिति किसी न किसी रूप में समग्र संबंधों पर प्रतिबिंबित होगी.

जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए दिए सुझाव- मिस्री

विदेश सचिव ने कहा, ‘मोदी और शी का मानना ​​था कि भारत और चीन के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने संबंधों के निरंतर और सुचारू विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द की आवश्यकता पर बल दिया. इसके अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के लिए चार सुझाव दिए. इस बात पर आम सहमति बनी कि स्थिर और सौहार्दपूर्ण भारत-चीन संबंध दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों को लाभांवित कर सकते हैं.’

लंबे समय के लिए द्विपक्षीय विकास पर साझा किया अपना-अपना नजरिया- MEA

विदेश मंत्रालय (MEA) ने बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों के अपने-अपने सिद्धांतों पर बात की, जिनसे भविष्य के कार्यों को दिशा देने में मदद मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों की दीर्घकालिक वृद्धि और विकास के लिए अपने नजरिए भी साझा किए.

MEA के बयान के मुतबिक, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कई वैश्विक मुद्दों और जारी चुनौतियों को लेकर भी चर्चा की. वहीं, इस दौरान टैरिफ पर बातचीत करते हुए दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा की. उन्होंने यह स्वीकार किया कि हमारे चारों ओर जो घटनाक्रम हो रहे हैं, उनसे कई चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं. दोनों नेताओं ने इस बात पर भी विचार किया कि इन बदलती चुनौतियों के बीच भारत और चीन के बीच बेहतर समझ कैसे विकसित की जाए और आपसी संबंधों को आगे कैसे बढ़ाया जाए.

अमेरिकी टैरिफ पर बड़ा विवाद: अपीलीय अदालत के टैरिफ हटाने के फैसले से भड़के डोनाल्ड ट्रंप, बोले – “टैरिफ हटे तो अमेरिका बर्बाद हो जाएगा”

  • अमेरिकी अदालत ने टैरिफ हटाने का दिया आदेश।
  • ट्रंप ने कहा – टैरिफ हटे तो अमेरिका कमजोर हो जाएगा।
  • सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की उम्मीद जताई।
  • लेबर डे पर “मेड इन अमेरिका” उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील।
  • राष्ट्रपति चुनाव से पहले टैरिफ विवाद ने बढ़ाया सियासी तापमान।

वॉशिंगटन : अमेरिका में व्यापार नीति और टैरिफ को लेकर एक बार फिर से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार को एक अपीलीय अदालत ने मौजूदा टैरिफ व्यवस्था को हटाने का आदेश दिया, जिसके बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले को “बेहद पक्षपातपूर्ण और राष्ट्रविरोधी” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ये टैरिफ हटा दिए गए तो इसका सीधा असर अमेरिकी किसानों, उद्योगपतियों और श्रमिकों पर पड़ेगा और देश “आर्थिक रूप से बर्बाद” हो जाएगा।

ट्रंप का बयान – “टैरिफ ही हैं अमेरिका की मजबूती का आधार”

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का सबसे बड़ा साधन हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी देश चाहे मित्र हों या शत्रु, वे लंबे समय से अमेरिका पर अनुचित व्यापारिक दबाव बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारी-भरकम ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) और अनुचित टैरिफ ने अमेरिकी कंपनियों को कमजोर कर दिया था।

ट्रंप ने कहा – “आज अदालत ने गलत निर्णय दिया है, लेकिन अमेरिका अंततः जीतेगा। अगर टैरिफ हटा दिए गए, तो यह हमारी अर्थव्यवस्था को कमजोर कर देगा और हमें विदेशी दबावों के सामने झुका देगा।”

“सुप्रीम कोर्ट करेगा हस्तक्षेप”

पूर्व राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल देगा और देश के हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में पहली बार अमेरिका ने टैरिफ का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया था और इसी से लाखों नौकरियाँ सुरक्षित हुईं।

ट्रंप ने कहा कि टैरिफ हटने पर अमेरिकी विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Sector), कृषि क्षेत्र और छोटे व्यवसाय सीधे प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

लेबर डे वीकेंड पर जनता से अपील

लेबर डे वीकेंड की शुरुआत पर ट्रंप ने अमेरिकी जनता से “मेड इन अमेरिका” उत्पादों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि टैरिफ न केवल स्थानीय कंपनियों को मजबूती देते हैं बल्कि श्रमिकों के हितों की रक्षा भी करते हैं।

उन्होंने कहा – “कई वर्षों तक हमारे नासमझ और लापरवाह राजनेताओं ने टैरिफ को हमारे खिलाफ इस्तेमाल होने दिया। लेकिन अब अमेरिका अपने ही हित में टैरिफ का इस्तेमाल करेगा और दुनिया को दिखाएगा कि हम अपने उद्योगों और श्रमिकों के लिए खड़े हैं।”

कब और क्यों लगाए गए थे टैरिफ

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल (2017–2021) के दौरान चीन और अन्य देशों से आयातित उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए थे। उनका मकसद बढ़ते व्यापार घाटे को कम करना, अमेरिकी उद्योगों को बचाना और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं के अनुचित व्यापारिक व्यवहार का जवाब देना था।

हालांकि इन टैरिफ को लेकर कई आलोचनाएँ भी हुईं। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ता है और महंगाई तेज होती है। वहीं, अदालत ने हाल ही में कहा कि कुछ टैरिफ “कानूनी दायरे से बाहर” और “असंवैधानिक” हैं। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने की पूरी संभावना है।

आने वाले समय की तस्वीर

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में टैरिफ का मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। ट्रंप इस मामले को जनता से जोड़ते हुए “मेड इन अमेरिका” कैंपेन को आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इस पर दोहरी मार का आरोप लगा रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और अमेरिकी व्यापार नीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

उनके एक गाने को 110 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया, जबकि अपने करियर की शुरुआत में वे शादियों में ही गाते थे।

‘कत्ल’, ‘अजुल’, ‘सिर्रा’, ‘लाहौर’ और ‘हाई रेटेड गबरू’ जैसे गाने आजकल जनरेशन ‘जी’ की प्लेलिस्ट में धूम मचा रहे हैं. इन गानों को मशहूर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा ने आवाज दी है, जिन्होंने अपनी जादुई आवाज और अनूठे अंदाज से पंजाबी और बॉलीवुड संगीत की दुनिया में एक खास मुकाम हासिल किया है. उनके गाने न सिर्फ युवाओं के दिलों पर राज करते हैं, बल्कि उनकी हर बीट पर थिरकने को मजबूर भी करते हैं.

गुरु रंधावा का असली नाम गुरशरणजोत सिंह रंधावा है और उनका जन्म 30 अगस्त 1991 को पंजाब के गुरदासपुर जिले में हुआ था. बताया जाता है कि गुरु को बचपन से ही म्यूजिक की ओर झुकाव था और जब वह स्कूल में पढ़ाई करते थे तो वहां सिंगिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया करते थे.

शादियों में गाते थे गुरु रंधावा

गुरु ने अपने करियर की शुरुआत छोटे-छोटे स्टेज शो और शादियों में सिंगिंग करके की. यहीं से उनका सिंगिंग सफर शुरू हुआ और 2012 में गुरु का पहला गाना ‘सेम गर्ल’ रिलीज हुआ, जिसमें उन्होंने सिंगर अर्जुन के साथ काम किया.

हालांकि, यह गाना ज्यादा सफल नहीं रहा. इसके बाद 2013 में उन्होंने अपनी पहली एल्बम ‘पेज वन’ रिलीज की, लेकिन असली सफलता 2015 में आए गाने ‘पटोला’ से मिली, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया. इस गाने को उन्होंने मशहूर रैपर बोहेमिया के साथ गाया. ऐसा बताया जाता है कि गुरशरणजोत सिंह रंधावा को ‘गुरु’ नाम रैपर बोहेमिया ने दिया, जिससे उनकी किस्मत भी बदल गई.

लाखों नहीं करोड़ों व्यूज मिलते हैं गुरु के गानों को

‘पटोला’ से मिली सफलता को गुरु रंधावा ने खुद पर हावी होने नहीं दिया और उन्होंने ‘लाहौर’, ‘हाई रेटेड गबरू’, ‘सूट’, ‘बन जा रानी’, ‘मेड इन इंडिया’, ‘ईशारे तेरे’, ‘तेरे ते’, ‘स्लोली स्लोली’ और ‘दारु वारगी’ जैसे मशहूर गाने गाए. उनके गाने ‘लाहौर’ को यूट्यूब पर 1.1 बिलियन से अधिक और ‘हाई रेटेड गबरू’ को 1.2 बिलियन से अधिक व्यूज मिले हैं. गुरु के कई गाने ऐसे हैं, जिन्हें 500 मिलियन से अधिक व्यूज यूट्यूब पर मिले हैं और आज भी शादियों और पार्टियों में जमकर बजते हैं.

पंजाबी गानों के जरिए सफलता का स्वाद चखने वाले गुरु ने 2017 में आई फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ के गाने ‘सूट सूट करदा’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया. इसके बाद उन्होंने ‘तुम्हारी सुलु’, ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘नवाबजादे’ और ‘ब्लैकमेल’ जैसी फिल्मों में भी गाने गाए.

हाल ही में, उनके गाने ‘अजुल’ को लेकर विवाद गरमाया हुआ है. उनके इस गाने में स्कूली लड़कियों की छवि को खराब करने का आरोप लगा है. इस विवाद के बीच यह गाना युवाओं की जुबान पर चढ़ा हुआ है और यूट्यूब पर इस गाने को 40 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं.