Home Blog Page 558

संजू सैमसन ने IPL में राजस्थान रॉयल्स के लिए इतिहास रचते हुए यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले खिलाड़ी बने

राजस्थान रॉयल्स की टीम ने आईपीएल 2025 के सीजन में अपने सफर का अंत जीत के साथ किया। इस सीजन टीम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक देखने को मिला जिसमें वह लीग स्टेज के 14 मुकाबलों में से सिर्फ चार मैचों को ही जीतने में कामयाब हो सके। चेन्नई सुपर किंग्स की टीम के खिलाफ राजस्थान रॉयल्स की टीम ने अपना आखिरी लीग स्टेज का मुकाबला खेला जिसमें वह 6 विकेट से जीत हासिल करने में सफल रहे। इस मैच में राजस्थान टीम के कप्तान संजू सैमसन बल्ले से एक बड़ा कारनामा भी करने में कामयाब रहे, जिससे इससे पहले आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए कोई भी खिलाड़ी करने में कामयाब नहीं हो सका था।

संजू सैमसन ने राजस्थान रॉयल्स से खेलते हुए 4000 रन पूरे करने वाले बने पहले खिलाड़ी

आईपीएल में अब तक काफी कम ही ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने एक टीम के लिए काफी लंबे समय तक खेला है, जिसमें एक नाम संजू सैमसन का भी शामिल है, जो राजस्थान रॉयल्स टीम के अहम प्लेयर्स में से एक हैं। सैमसन के बल्ले से चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच में 31 गेंदों में 41 रनों की पारी देखने को मिली थी, जिसके दम पर वह राजस्थान रॉयल्स के लिए आईपीएल में खेलते हुए 4000 रनों का आंकड़ा पूरा करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। संजू अब तक राजस्थान के लिए आईपीएल में कुल 149 मुकाबले खेल चुके हैं, जिसमें उन्होंने 31.70 के औसत से कुल 4027 रन बनाएं हैं और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 141.24 का देखने को मिला है। संजू के बल्ले से 2 शतकीय और 23 अर्धशतकीय पारियां भी देखने को मिली हैं।

आईपीएल 2025 का सीजन में नहीं चला संजू का बल्ला

संजू सैमसन के लिए आईपीएल का 18वां सीजन कुछ खास नहीं रहा जिसमें एक तरफ जहां वह फिटनेस की समस्या से जूझते हुए नजर आए तो वहीं कुल 9 मुकाबलों में ही मैदान पर बल्लेबाजी करने उतरे, जिसमें वह 35.63 के औसत से 285 रन बनाने में कामयाब रहे और सिर्फ एकबार 50 से अधिक का स्कोर बना सके। सैमसन के अभी तक के उनके आईपीएल करियर को देखा जाए तो उन्होंने 175 मैचों में 30.68 के औसत से कुल 4663 रन बनाएं हैं जिसमें वह 3 शतक और 26 अर्धशतकीय पारियां खेलने में कामयाब रहे।

‘हेरा फेरी 3’ से बाहर होने पर परेश रावल को उठाना पड़ा भारी नुकसान, अक्षय कुमार के प्रोडक्शन हाउस ने किया 25 करोड़ रुपये का मुकदमा

‘हेरा फेरी’, एक कल्ट कॉमेडी क्लासिक है। ये फिल्म इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई है, क्योंकि इसकी तीसरी किस्त की शूटिंग जोर-शोर से शुरू हो चुकी है। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इंटरनेट पर कई तरह की अफवाहें और कयास लगाए जा रहे हैं। ताजा अपडेट के अनुसार अक्षय कुमार की कंपनी केप ऑफ गुड फिल्म्स ने अभिनेता परेश रावल पर 25 करोड़ रुपये का मुकदमा दर्ज किया है, क्योंकि उन्होंने फिल्म की शूटिंग के दौरान ही अचानक इसे छोड़ दिया। एक्टर ने इसका ऐलान खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल पर किया है।

परेश ने किया ये ट्वीट

परेश रावल ने ट्वीट कर कहा, ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ‘हेरा फेरी 3′ से मेरा हटना किसी भी तरह के क्रिएटिव मतभेद की वजह से नहीं है। मैं दोहराता हूं कि फिल्म मेकर के साथ मेरे किसी भी प्रकार के रचनात्मक मतभेद नहीं हैं। मुझे श्री प्रियदर्शन जी (निर्देशक) के प्रति अत्यधिक प्रेम, सम्मान और विश्वास है।’ उनके इस बयान से यह साफ हो जाता है कि उनके जाने के पीछे किसी रचनात्मक मतभेद की बात नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब परेश रावल ने इतने सालों तक एक ऐसे किरदार को निभाया जो दर्शकों के दिलों में बस गया है तो उन्होंने अचानक इस फ्रेंचाइजी को क्यों छोड़ा?

क्या है प्रोडक्शन हाउस का कहना

प्रोडक्शन हाउस से जुड़े एक करीबी सूत्र ने बताया, ‘परेश जी एक अनुभवी कलाकार हैं और हमने उनके साथ पहले भी कई प्रोजेक्ट्स में काम किया है। लेकिन उनका यह रवैया काफी अनप्रोफेशनल रहा और हम उनके स्तर के किसी कलाकार से ऐसा व्यवहार की उम्मीद नहीं कर रहे थे।’ उनके जाने के बाद प्रोडक्शन हाउस को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सख्त टाइमलाइन करोड़ों फैन्स की उम्मीदें और फिल्म के प्रति लगाव के बीच इस तरह की बाधा से न सिर्फ देरी हुई है बल्कि रचनात्मक चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। बाबूराव का किरदार लोगों के दिलों में खास जगह रखता है, और मेकर्स इस किरदार की आत्मा को खोना नहीं चाहते।

इस वजह से उठाया गया ये कदम

रिपोर्ट्स के मुताबिक मेकर्स कानूनी रास्ता नहीं अपनाना चाहते थे, लेकिन परेश रावल के अचानक पीछे हटने की वजह से उनके पास और कोई विकल्प नहीं बचा। परेश रावल ने फिल्म के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था, साइनिंग अमाउंट ले लिया था और उन्हें उनकी सामान्य फीस से भी ज़्यादा भुगतान किया गया था। निर्माता उनकी हर शर्त मान चुके थे और वह सभी जरूरी बैठकों का हिस्सा भी थे। लेकिन शूटिंग शुरू होने के बाद उन्होंने फिल्म छोड़ दी, जिससे मेकर्स को कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी। एक बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि परेश रावल ने फिल्म के लिए और अधिक पैसे की मांग की, जबकि पहले ही उन्हें मोटी रकम दी जा चुकी थी। अब देखना यह है कि मामला किस दिशा में जाता है, लेकिन फैंस बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं कि अक्षय कुमार, परेश रावल और सुनील शेट्टी की आइकोनिक तिकड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ दिखाई दें।

WHO के सदस्य देशों ने महामारी से निपटने के लिए ऐतिहासिक समझौते को दी हरी झंडी, जानिए इसका उद्देश्य क्या है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सदस्य देशों ने मंगलवार को औपचारिक रूप से सर्वसम्मति से दुनिया के पहले महामारी समझौते के पक्ष में वोटिंग की। संयुक्त राष्ट्र (UN) स्वास्थ्य निकाय ने एक बयान में इसकी घोषणा की। इस समझौते का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश भविष्य की महामारियों की प्रभावी रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए मिलकर काम करें।

समझौते का उद्देश्य क्या है?

    • कोरोना महामारी के दौरान इस आपदा समझौते की शुरुआत की गई थी और इसकी मंजूरी देने से पहले 3 साल से ज्यादा समय तक इसे अपनाने का प्रोसेस चला।
    • इस समझौते में महामारी की रोकथाम के लिए जो कमियां हैं, उन्हें दूर करने पर बात हुई।
    • WHO ने बयान में कहा कि ‘इस महत्वपूर्ण समझौते को डब्ल्यूएचओ संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अपनाया गया।
    • इसका उद्देश्य देशों, डब्ल्यूएचओ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और अन्य हितधारकों के बीच मजबूत सहयोग को बढ़ावा देना है ताकि महामारी को रोका जा सके।
    • भविष्य में महामारी संकट की स्थिति में बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

WHO के महानिदेशक क्या बोले?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनम घेब्रेसियस ने कहा, ”दुनिया भर की सरकारें अपने देशों और वैश्विक समुदाय को महामारी के खतरों से सुरक्षित बना रही हैं। मैं विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों को कोविड-19 के बाद भविष्य की महामारियों से दुनिया को बेहतर तरीके से बचाने के लिए एक साथ आने का संकल्प लेने के लिए बधाई देता हूं। इस वैश्विक समझौते को विकसित करने के लिए उनका काम यह सुनिश्चित करेगा कि देश अगली महामारी के खतरे को रोकने और उसका जवाब देने के लिए बेहतर, तेज और अधिक समान रूप से एक साथ काम करें।’

इस समझौते के तहत पैथोजन एक्सेस एंड बेनेफिट शेयरिंग सिस्टम (PABS) बनाया जाएगा। इसके लिए एक अंतरसरकारी कार्य समूह स्थापित किया जाएगा। इस पीएबीएस सिस्टम में फार्मा कंपनी भी शामिल की जाएंगी, ताकि महामारी की स्थिति में जल्द से जल्द वैक्सीन तैयार की जा सके।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाया बीड़ा : हर पात्र को मिले योजनाओं का लाभ, हर योजना पहुँचे अंतिम छोर तक, विकास कार्यशाला में बोले सरोजनीनगर विधायक- जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ही संभव है समग्र सशक्तिकरण

डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाया बीड़ा : हर पात्र को मिले योजनाओं का लाभ, हर योजना पहुँचे अंतिम छोर तक, विकास कार्यशाला में बोले सरोजनीनगर विधायक- जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ही संभव है समग्र सशक्तिकरण
डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाया बीड़ा : हर पात्र को मिले योजनाओं का लाभ, हर योजना पहुँचे अंतिम छोर तक, विकास कार्यशाला में बोले सरोजनीनगर विधायक- जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ही संभव है समग्र सशक्तिकरण
डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाया बीड़ा : हर पात्र को मिले योजनाओं का लाभ, हर योजना पहुँचे अंतिम छोर तक, विकास कार्यशाला में बोले सरोजनीनगर विधायक- जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ही संभव है समग्र सशक्तिकरण
  • सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर विकास भवन में जनकल्याणकारी कार्यशाला आयोजित।
  • विभिन्न विभागों की योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक पहुँचाने पर हुई व्यापक समीक्षा।
  • एक दर्जन से अधिक विभागों की प्रमुख योजनाओं पर हुआ सीधा संवाद व कार्ययोजना निर्धारण।
  • डॉ. सिंह ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को बताया क्रियान्वयन की सबसे अहम कड़ी।
  • कार्यशाला में मलिहाबाद विधायक जय देवी, CDO लखनऊ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी हुए शामिल।

लखनऊ: “मातृशक्ति, किसान, मज़दूर या नौजवान—हर वर्ग का समग्र सशक्तिकरण ही योगी सरकार की असली पहचान है।” इसी लक्ष्य को साकार करने के लिए बुधवार, 14 मई 2025 को विकास भवन, इन्दिरा नगर, लखनऊ में एक विशेष जनकल्याणकारी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला विगत 5 मई को वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक की अगली कड़ी थी, जिसमें सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जिले के समस्त जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सहभागिता से एक रणनीतिक कार्यशाला आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था।

विधायक की पहल पर पहली बार हुआ ऐसा आयोजन

यह पहली बार था जब किसी जनप्रतिनिधि द्वारा जिलास्तर पर इतने व्यापक दायरे में योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया गया। कार्यशाला का उद्देश्य स्पष्ट था—जनहितकारी योजनाएं सिर्फ कागज़ों में नहीं, जमीनी स्तर तक पहुँचें, और हर पात्र को उनका अधिकार मिले।

इस 3 घंटे की गहन कार्यशाला में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ उनके प्रभावशाली क्रियान्वयन के लिए ठोस रणनीति भी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा,

“यदि हम हर जनप्रतिनिधि को उसके क्षेत्र के हर पात्र व्यक्ति की सूची दें और उसे यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दें कि कोई वंचित न रहे, तो समग्र विकास संभव है।”

कई विभागों की योजनाओं पर हुआ गहन मंथन

कार्यशाला में करीब एक दर्जन विभागों से जुड़ी योजनाओं की बारीकी से समीक्षा की गई और यह सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई कि योजनाएं आवेदन से लेकर लाभ वितरण तक पूरी पारदर्शिता के साथ क्रियान्वित हों।
प्रमुख योजनाएं जिन पर चर्चा हुई, उनमें शामिल रहीं:

  • कृषि विभाग: पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम कुसुम योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि उत्पादक संगठन
  • सहकारिता विभाग: अल्पकालिक कृषि ऋण वितरण, उर्वरक वितरण योजना
  • समाज कल्याण विभाग: वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन, दिव्यांगजन सशक्तिकरण
  • श्रम विभाग: श्रमिकों के पंजीकरण और बीमा
  • रोजगार विभाग: स्वरोजगार योजनाएं, उद्यमिता विकास योजनाएं

विभागीय अधिकारियों से सीधी संवाद प्रक्रिया

कार्यशाला की विशेषता यह रही कि इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजना को विस्तार से रखा। इसके बाद विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने हर योजना के लिए जवाबदेही तय करने, समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण और निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

जनप्रतिनिधियों की सशक्त भूमिका पर विशेष बल

कार्यशाला में डॉ. राजेश्वर सिंह ने जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्र के हर गरीब, किसान, मज़दूर और जरूरतमंद को योजनाओं से जोड़ने का बीड़ा उठाएं। उन्होंने कहा,

“जब तक योजनाओं के लाभार्थी का चेहरा हमें ज्ञात नहीं होगा, तब तक हमारी ज़िम्मेदारी अधूरी है। शासन की हर योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे—यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

मलिहाबाद विधायक जय देवी सहित कई प्रतिनिधि हुए शामिल

इस कार्यशाला में मलिहाबाद विधायक जय देवी कौशल, मुख्य विकास अधिकारी लखनऊ, डॉ. राजेश्वर सिंह की टीम, अन्य विधायकों के प्रतिनिधिगण, तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित सुशासन की दिशा में मील का पत्थर बताया।

“सबका साथ, सबका विकास” को मिला नया आयाम

यह कार्यशाला सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि यह विकास और सुशासन के समन्वित मॉडल की मिसाल बनी। शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साझा प्रयास से “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” का मंत्र एक बार फिर जमीन पर उतरता दिखाई दिया।

वेपिंग भी स्मोकिंग जितना ही हानिकारक, हार्ट डिजीज का खतरा हो सकता है 4 गुना बढ़ना।

आप सभी ने वेपिंग के बारे में तो सुना ही होता। यह बैटरी से चलने वाले डिवाइस से निकलने वाले धुएं को सांस में लेने का प्रोसेस है। इसको वेप पेन या ई सिगरेट के नाम से भी जाना जाता है। यह सिगरेट पीने की तरह ही होता है। हालांकि इसमें तंबाकू नहीं जलाई जाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में युवा आबादी के बीच वेपिंग का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है। युवा अन्य तंबाकू प्रोडक्ट की तुलना में ई-सिगरेट या वेप्स का अधिक उपयोग करते हैं। वहीं कई लोग इसे स्मोकिंग से ज्यादा सेफ मानते हैं। लेकिन वेपिंग से भी व्यक्ति को ऑर्गन डैमेज, सांस लेने में समस्या और लत समेत कई गंभीर नुकसान होते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वेपिंग से होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं।

वेपिंग के नुकसान

वेपिंक को सिगरेट पीने की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है। लेकिन वेपिंग से कई तरह की सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

हार्ट को नुकसान

रेगुलर सिगरेट और ई-सिगरेट में निकोटीन प्राइमरी एजेंट पाया जाता है। जोकि अत्यधिक नशे की लत होती है। निकोटीन एक विषैला पदार्थ है। यह आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ाने का काम करता है। साथ ही एड्रेनालाईन को बढ़ाता है। जिससे हृदय की गति बढ़ जाती है और हार्ट अटैक पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

वेपिंग की लत

एक रिपोर्ट के मुताबिक ई-सिगरेट और रेगुलर सिगरेट दोनों में निकोटीन पाया जाता है। यह हेरोइन और कोकीन की तरह ही लत लगाने वाला हो सकता है।

ऑर्गन डैमेज

ई-सिगरेट या वेपिंग के इस्तेमाल से ऑर्गन डैमेज का खतरा भी हो सकता है। क्योंकि ई-लिक्विड में मौजूद निकोटीन और अन्य पदार्थ आपके फेफड़ों के अलावा दिल और मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इसमें मौजूद निकोटीन ब्रेन के विकास को भी नुकसान पहुंचा सकता है। यह ब्लड प्रेशर को भी बढ़ा सकता है। साथ ही यह आर्टरीज को संकीर्ण कर सकता है।

कैंसर

बता दें कि ई-लिक्विड में मौजूद तत्व कैंसर की वजह बनते हैं।

लंग डिजीज

वहीं कई अध्ययनों से पता चलता है कि ई-सिरगेट के इस्तेमाल से फेफड़ों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। इसके इस्तेमाल से अस्थमा का खतरा भी बढ़ सकता है।