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Sports News:छक्कों की बरसात! एशिया कप से पहले संजू सैमसन ने जड़ा एक और धमाकेदार अर्धशतक, फिर चला उनका तूफानी बल्ला।

संजू सैमसन की प्लेइंग इलेवन में जगह खतरे में है, सैमसन एशिया कप में टॉप ऑर्डर में नहीं खेल पाएंगे. एशिया कप से पहले कुछ ऐसी ही अफवाहों ने तूल पकड़ा हुआ है, लेकिन वो इन सब अफवाहों को गलत साबित कर रहे हैं. केरल क्रिकेट लीग 2025 में उनका बल्ला आग उगल रहा है, वो पिछली चार पारियों में एक शतक और 3 हाफ-सेंचुरी जड़ चुके हैं. अब उन्होंने एलिप्पी रिपल्स टीम के खिलाफ 83 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली है.

एलिप्पी रिपल्स की टीम ने पहले खेलते हुए 176 रन बनाए थे. जवाब में कोच्चि ब्लू टाइगर्स ने 10 गेंद शेष रहते 3 विकेट से इस मैच को जीत लिया. संजू सैमसन ने ओपनिंग करते हुए 41 गेंद में 83 रनों की तूफानी पारी खेली. इस धुआंधार पारी में उन्होंने 2 चौके और 9 छक्के लगाए. दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे, लेकिन सैमसन के 83 रनों ने कोच्चि टीम को 3 विकेट की अहम जीत दिलाने में बड़ा योगदान दिया.

पिछली चार पारियों में 355 रन

संजू सैमसन अब तक KCL 2025 सीजन में 6 पारियों में 368 रन बना चुके हैं, लेकिन पिछली चार पारियों में वो गेंदबाजों पर कहर बनकर टूटे हैं. सैमसन ने पिछली 4 पारियों में करीब 89 के औसत से 355 रन बनाए हैं, जिनमें एक शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं. एशिया कप से पहले सैमसन की ये जबरदस्त फॉर्म चयनकर्ताओं को यह सोचने पर मजबूर कर सकती है कि आखिर प्लेइंग इलेवन में उन्हें कैसे फिट किया जाए.

एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि सैमसन का बल्ला सिर्फ छक्कों में बात कर रहा है. वो अब तक लीग में कुल 30 छक्के लगा चुके हैं और वो इस सीजन करीब 190 के तूफानी स्ट्राइक रेट से बैटिंग कर रहे हैं. सैमसन की टीम कोच्चि ब्लू टाइगर्स की बात करें तो वो 8 मैचों में 6 जीत के बाद पॉइंट्स टेबल के टॉप पर विराजमान है.

Madhya Pradesh Tourism: बुरहानपुर – इत्र की नगरी, जहां हर कोना इतिहास और संस्कृति की दास्तां सुनाता है।

मध्य प्रदेश का बुरहानपुर एक ऐसा ऐतिहासिक नगर है जो स्थापत्य, संस्कृति, मुग़ल इतिहास और इत्र (परफ्यूम) निर्माण की समृद्ध परंपरा के लिए जाना जाता है। नर्मदा नदी के किनारे बसा यह नगर अपने भीतर अनेक कहानियाँ समेटे हुए है— युद्धों की, प्रेम की, भक्ति की और कला की। यदि आप इतिहास प्रेमी हैं या अद्भुत मुग़ल वास्तुकला देखना चाहते हैं, तो बुरहानपुर आपके लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल है।

बुरहानपुर का ऐतिहासिक परिचय

बुरहानपुर की स्थापना 14वीं शताब्दी में फारूक़ी सुल्तानों ने की थी, लेकिन इसे ख्याति मिली मुग़ल शासन के दौरान। बुरहानपुर को मुग़ल साम्राज्य ने एक प्रमुख सैनिक केंद्र और शाही विश्रामगृह के रूप में विकसित किया। यहीं से शाहजहाँ की पत्नी मुमताज़ महल की मृत्यु हुई थी, जिनकी याद में बाद में आगरा में ताजमहल का निर्माण हुआ।

बुरहानपुर के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. शाही क़िला (शाही महल)

बुरहानपुर का सबसे प्रमुख आकर्षण। यह क़िला नर्मदा नदी के किनारे स्थित है और इसे फारूकी सुल्तानों ने बनवाया था। इसमें मुग़ल शैली की नक्काशी, दीवार चित्र और सुंदर उद्यान देखने को मिलते हैं। यहीं पर मुमताज़ महल ने अंतिम साँसें ली थीं।

2. बड़ी दरगाह

यह सूफी संत हज़रत सैयद ज़ैन-उल-आबिदीन शाह की दरगाह है। यहाँ हर साल उर्स मेला आयोजित होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यह स्थल बुरहानपुर की धार्मिक सहिष्णुता और सूफी संस्कृति का प्रतीक है।

3. धरमपुरी और असिरगढ़ क़िला

बुरहानपुर के समीप स्थित असिरगढ़ क़िला एक विशाल और प्राचीन दुर्ग है, जिसे “दक्षिण का द्वार” कहा जाता है। इसकी दीवारें और गुप्त सुरंगें इसे एक रोमांचक स्थल बनाती हैं।

4. हामिदिया मस्जिद और जामा मस्जिद

ये मस्जिदें मुग़ल वास्तुकला के सुंदर उदाहरण हैं, जिनमें सुंदर मेहराब, मीनारें और नक्काशी देखने को मिलती है।

5. मुमताज़ महल का मूल मक़बरा (अहूखाना)

यह वह स्थल है जहाँ मुमताज़ महल का पार्थिव शरीर आगरा ले जाने से पहले रखा गया था। आज भी यहाँ की दीवारों पर उस काल की मौन गूंज सुनाई देती है।

इत्र और कारीगरी का केंद्र

बुरहानपुर को “इत्रों की नगरी” भी कहा जाता है। यहाँ पारंपरिक तरीके से गुलाब, केवड़ा और चंदन से इत्र बनाए जाते हैं। साथ ही, यहां की बुनाई कला (हैंडलूम टेक्सटाइल) भी प्रसिद्ध है, विशेष रूप से हिमरू और मशरू वस्त्र।

धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता

यहाँ हिंदू, मुस्लिम, जैन और सिख समुदायों के धार्मिक स्थल मिलते हैं, जो इसकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। नर्मदा किनारे का गोस्वामी तुलसीदास घाट और सिंधी समाज का बड़ा मंदिर भी दर्शनीय हैं।

कैसे पहुँचे?

निकटतम हवाई अड्डा: इंदौर (180 किमी)

रेलवे स्टेशन: बुरहानपुर जंक्शन, जो कई प्रमुख ट्रेनों से जुड़ा है

सड़क मार्ग: इंदौर, खंडवा और जलगांव से बस या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है

ठहरने की व्यवस्था

बुरहानपुर में हर बजट के अनुसार होटल, लॉज और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित होटल भी यहाँ मौजूद हैं।

यात्रा का सर्वोत्तम समय

नवंबर से फरवरी का समय बुरहानपुर घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, जब मौसम ठंडा और सुहावना होता है।

बुरहानपुर एक ऐसा स्थल है, जहाँ इतिहास केवल किताबों में नहीं, दीवारों, दरवाज़ों और हवाओं में बसा हुआ है। यह नगर न केवल स्थापत्य प्रेमियों और इतिहासकारों के लिए स्वर्ग है, बल्कि एक आम यात्री के लिए भी शांति, भक्ति और सुगंध से भरपूर अनुभव प्रदान करता है। एक बार की यात्रा आपको मुग़ल काल की भव्यता, सूफी परंपरा की गहराई और भारतीय विविधता की सुंदरता से परिचित करा देगी।

गणपति बप्पा के दर्शन करने आईं ऐश्वर्या राय, बेटी आराध्या भी उनके साथ थीं – मां-बेटी की जोड़ी भक्ति में मग्न दिखाई दी।

हिंदी सिनेमा की पॉपुलर अदाकारा ऐश्वर्या राय को हर साल मुंबई के जीएसबी पंडाल में गणेश भगवान का आशीर्वाद लेते देखा गया है. हर साल की तरह इस साल भी अदाकारा अपनी बेटी आराध्या संग गणपति बप्पा की कृपा पाने पंडाल में पहुंचीं. अब इसकी तस्वीरें और विडियोज सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं.

गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेने बेटी संग पंडाल पहुंचीं ऐश्वर्या राय
रविवार को ऐश्वर्या राय बच्चन अपनी बेटी आराध्या बच्चन के साथ मुंबई के गौड़ सारस्वत ब्राह्मण गणेशोत्सव यानी जीएसबी पंडाल में गणपति बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचीं. बेहद सादगी भरे अंदाज में हंसते हुए और हाथ जोड़कर एक्ट्रेस ने वहां मौजूद सभी लोगों का अभिवादन किया. जहां हसीना को वाइट एंब्रॉयडरी सूट में बहुत ही एलिगेंट लुक में देखा गया तो वहीं उनकी बेटी आराध्या बच्चन ने भी अपने ट्रेडीशनल लुक से लाइमलाइट अपने नाम की.

एक्ट्रेस ने खुले बालों और छोटी सी बिंदी लगा कर अपने लुक को कंप्लीट किया था. वायरल वीडियो में ऐश्वर्या राय को देख कर आप उनकी खूबसूरती का अंदाजा लगा सकते हैं. जीएसबी मंडल ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से ये वीडियो शेयर किया है जो सोशल मीडिया पर काफी पॉपुलर हो रहा है और फैंस एक्ट्रेस की तारीफ में पुल बांध रहे हैं. मां-बेटी की आस्था और सादगी भरा अंदाज़ सभी का ध्यान खींच रहा है.

ऐश्वर्या राय का वर्कफ्रंट
अदाकारा को आखिरी बार फिल्मी पर्दे पर तमिल फिल्म ‘पोन्नियिन सेलवन: II’ में देखा गया था. लेकिन हिंदी फिल्मों में आखिरी बार वो 2018 में ‘फन्ने खान’ में नजर आई थीं. अपने करियर में कई हिट्स देने के बाद आजकल फिल्मी पर्दे पर उनकी मौजूदगी कम ही होती है. भले फिल्मी पर्दे पर उन्हें कम ही देखा जाता है लेकिन ब्रांड एंडोर्समेंट के जरिये वो फैंस से जुड़ी रहती हैं. सोशल मीडिया और कई विज्ञापनों में वो अपना जलवा बिखेरती रहती हैं.

टखने का ट्रांसप्लांट कितनी सफलता प्राप्त करता है और ऑपरेशन से पहले किन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए?

हमारा टखना यानी एंकल शरीर का एक बेहद जरूरी जोड़ होता है, जो हमें खड़े रहने, चलने, दौड़ने और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. लेकिन जब किसी को टखने में गठिया, चोट, या पुरानी बीमारी की वजह से लगातार दर्द, सूजन या जकड़न हो, तो नॉर्मल लाइफ जीना मुश्किल हो जाता है. ऐसी स्थिति में कई बार दवाएं, थैरेपी या इंजेक्शन काम नहीं करते हैं और तब डॉक्टर टखने की सर्जरी या टखने का ट्रांसप्लांट जिसे टखने की रिप्लेसमेंट सर्जरी कहा जाता है की सलाह देते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि टखने का ट्रांसप्लांट क्या होता है, कितना कामयाब है, किसे जरूरत पड़ती है और रिकवरी से जुड़ी जरूरी बातें ताकि आप या आपके किसी अपने को अगर यह प्रक्रिया करनी पड़े तो आप पूरी तरह से तैयार हों.

टखने का ट्रांसप्लांट क्या होता है और कितना कामयाब है?

टखने की रिप्लेसमेंट सर्जरी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें टखने यानी एंकल के जो हिस्से खराब हो चुके होते हैं, जैसे हड्डियां और कारटीलेज, उन्हें सिंथेटीक मेटल और प्लास्टिक के जोड़ से बदल दिया जाता है. यह प्रक्रिया बिल्कुल घुटने या कूल्हे की रिप्लेसमेंट जैसी होती है, लेकिन टखना थोड़ा जटिल जोड़ होता है, इसलिए यह सर्जरी थोड़ी सावधानी और एक्सपीरियंस में ही होती है.

ज्यादातर मामलों में टखने की रिप्लेसमेंट सर्जरी से लोगों को काफी राहत मिलती है. वे चलने-फिरने के काबिल बनते हैं और दर्द से राहत मिलती है. हालांकि यह जरूरी है कि प्रक्रिया एक एक्सपीरियंस आर्थोपेडिक सर्जन के जरिए की जाए और आप पोस्ट-ऑपरेटिव केयर का पूरा पालन करें.

किन स्थितियों में जरूरत पड़ सकती है टखने की सर्जरी?

1. ऑस्टियोआर्थराइटिस – उम्र बढ़ने के साथ होने वाला जोड़ों का घिसाव के कारण टखने की सर्जरी कराने की जरूरत पड़ सकती है.

2. रुमेटाइड आर्थराइटिस – इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारी, जो जोड़ों को नुकसान पहुंचाती है, इसके चलते भी टखने का ट्रांसप्लांट कराना पड़ सकता है.

3. पोस्ट-ट्रॉमेटिक आर्थराइटिस – पुरानी चोट की वजह से होने वाली गठिया के कारण भी  टखने की सर्जरी कराने की जरूरत पड़ सकती है.

4. टखने की गंभीर चोट या फ्रैक्चर – किसी तरह की बड़ी चोट और फ्रैक्चर हो जाने पर भी टखने का ट्रांसप्लांट कराना पड़ सकता है.

ऑपरेशन कराते वक्त किन बातों का रखें ध्यान?

हर सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ संभावित जोखिम होते हैं. जैसे संक्रमण होना, खून बहना या थक्का बनना, नसों को नुकसान, जोड़ में फिर से गठिया या जकड़न और दोबारा से सर्जरी की जरूरत , इसके अलावा धूम्रपान, डायबिटीज, हड्डियों का कमजोर होना आदि इन जोखिमों को बढ़ा सकते हैं. इसलिए ऑपरेशन से पहले डॉक्टर से पूरी मेडिकल हिस्ट्री जरूर शेयर करें. डॉक्टर के सारे नियमों का पालन करें, सभी फॉलो-अप अपॉइंटमेंट पर जाएं, फिजियोथेरेपी बीच में न छोड़ें, अगर बुखार, तेज दर्द या सूजन हो तो तुरंत डॉक्टर को बताएं, साथ ही टखने पर अचानक भार डालने से बचें.

T20 Cricket Record: क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के जड़ने वाला भारतीय बल्लेबाज़ कौन है? नाम सुनकर आप हैरान रह जाएंगे!

टी20 क्रिकेट में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया भर में अलग पहचान बनाई है. आंकड़े बताते हैं कि रोहित शर्मा से लेकर श्रेयस अय्यर तक, भारतीय बल्लेबाजों ने छक्कों की ऐसी बरसात की है, जिसने विरोधी टीमों के गेंदबाजों को बार-बार परेशान किया है. आइए जानते हैं किस भारतीय बल्लेबाज ने टी20 में सबसे ज्यादा छक्के लगाए हैं.

रोहित शर्मा 

भारतीय कप्तान रोहित शर्मा टी20 क्रिकेट के सबसे बड़े सिक्स हिटर साबित हुए हैं. उन्होंने 463 मैचों में अब तक 1110 छक्के लगाए हैं. 2007 से जारी उनका यह करिश्मा उन्हें टी20 क्रिकेट का सबसे बड़ा सिक्सर किंग बनाता है.

विराट कोहली 

विराट कोहली भले ही अपने टेक्निकल खेल और रन मशीन वाली छवि के लिए मशहूर हों, लेकिन टी20 में उनका छक्कों का रिकॉर्ड भी बेहद शानदार है. उन्होंने 414 मैचों में 435 छक्के जड़े हैं.

सूर्यकुमार यादव 

सूर्यकुमार यादव की आक्रामक बल्लेबाजी ने उन्हें दुनिया का सबसे खतरनाक टी20 बल्लेबाज बना दिया है. उन्होंने 325 मैचों में 380 छक्के लगाए हैं और अपनी 360-डिग्री शॉट्स के लिए मशहूर हैं.

संजू सैमसन 

संजू सैमसन ने 2011 से लेकर अब तक खेले गए 304 मैचों में 350 छक्के जड़े हैं. उनकी बल्लेबाजी में ताकत और स्थिरता का शानदार मेल देखने को मिलता है.

एमएस धोनी 

भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी कप्तानी के साथ-साथ छक्कों से भी बड़ा योगदान दिया है. उन्होंने 405 मैचों में 350 छक्के लगाए और मुश्किल हालात में अंतिम गेंदों में छक्का जड़कर टीम को जीत भी दिलाई है.

केएल राहुल 

केएल राहुल अपनी टाइमिंग और क्लासिक शॉट्स के लिए पहचाने जाते हैं. उन्होंने 239 मैचों में 332 छक्के लगाए हैं और लगातार भारतीय टीम की बैटिंग लाइन-अप को मजबूती दी है.

सुरेश रैना 

सुरेश रैना भारतीय क्रिकेट के शुरुआती टी20 स्टार रहे हैं. उन्होंने 2006 से लेकर 2021 तक खेले गए 336 मैचों में कुल 325 छक्के लगाए और भारत को कई अहम मैच जिताए हैं.

हार्दिक पांड्या 

हार्दिक पांड्या अपनी पावर हिटिंग के लिए मशहूर हैं. उन्होंने 302 मैचों में 298 छक्के लगाए और टीम इंडिया के लिए एक अहम ऑलराउंडर साबित हुए हैं.

श्रेयस अय्यर 

2014 से लेकर अब तक खेले गए 240 मैचों में श्रेयस अय्यर ने 286 छक्के लगाए हैं. उनकी बल्लेबाजी में पावर और स्थिरता दोनों देखने को मिलते हैं.