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एक्टर ने सोशल मीडिया पर साझा किया अपना दर्द, कहा – मुझे किया गया धोखा, उन्होंने तोड़ा मेरा भरोसा।

अभिनव शुक्ला ने एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में अपने फैंस को बताया है। उन्होंने हाल ही में एक ब्रांड के साथ काम करने के बाद अपना अनुभव शेयर किया। मशहूर टीवी एक्टर जो अक्सर अपने विचारों और राय की वजह से चर्चा में रहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर उनके साथ हुई दुखद घटना के बारे में खुलासा किया है। इंस्टाग्राम पर अभिनव के 1 मिलियन से अधिक फैन फॉलोइंग है और इन प्रशंसकों को सचेत करने के लिए रुबीना दिलैक के पति ने बताया कि उन्हें दो ब्रांड कंपनी ने धोखा दिया है और यहां तक ​​​​कि अब वह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने वाले हैं।

लाखों की ठगी का शिकार हुए अभिनव शुक्ला

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अभिनव शुक्ला ने अपने प्रशंसकों को सूचित किया कि वह अब उन दो ब्रांड्स के साथ नहीं जुड़े हैं। उन्होंने उनके साथ अपने सारे बिजनेस रिलेशन खत्म करने का कारण भी बताया और लिखा, ‘उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन किया है और मेरे पैसों के साथ गोलमाल किया है!’ एक्टर ने यह भी साझा किया कि वह कानूनी कार्रवाई करेंगे और कहा, ‘कानून के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे!’

बिश्नोई गिरोह के निशाने पर टीवी एक्टर

अभिनव शुक्ला टेलीविजन इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेताओं में से एक रहे हैं। कुछ दिनों पहले, एक्टर तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने अपने प्रशंसकों को बिश्नोई गिरोह के सदस्य से जान से मारने की धमकियां मिलने की जानकारी दी थी। यह विवाद तब हुआ जब बैटलग्राउंड पर रुबीना दिलैक और आसिम रियाज़ के बीच हुई लड़ाई ने सबका ध्यान खींचा। यह तमाशा तब और बढ़ गया जब अभिनव ने रुबीना के लिए अपना समर्थन दिखाते हुए आसिम की खिंचाई की। जिसके बाद, बिश्नोई गिरोह के एक सदस्य ने अभिनव और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी।

स्क्रीन से दूर बेटी की सेवा में एक्टर

काम की बात करें तो अभिनव शुक्ला कई शो जैसे ‘जाने क्या बात हुई’, ‘छोटी बहू’, ‘गीत- हुई सबसे पराई’, ‘एक हज़ारों में मेरी बहना है’, ‘दीया और बाती हम’, ‘बिग बॉस 14’ और ‘खतरों के खिलाड़ी 11’ कुछ का हिस्सा रहे हैं। निजी जीवन की बात करें तो, अभिनव शुक्ला ने 21 जून, 2018 को शिमला में रुबीना दिलैक के साथ शादी के बंधन में बंध गए। उन्होंने 27 नवंबर, 2023 को जुड़वां बच्चियों, एधा और जीवा का स्वागत किया। कपल अक्सर सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की झलकियां शेयर करते हैं। एक्टर बेटियों के जन्म के बाद से किसी भी टीवी सीरियल और शो में नजर नहीं आए हैं। वे इन दिनों एधा और जीवा की देखभाल में लगे हुए हैं।

विदेशी छात्रों के दाखिले पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर हार्वर्ड ने ट्रंप पर किया मुकदमा, जानिए पूरा मामला

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने ट्रंप के विदेशों छात्रों के एडमिशन को लेकर लगाए गए बैन को बोस्टन कोर्ट में चुनौती दी है और इसे व्हाइट हाउस की राजनीतिक मांगों की अवेहलना करने के लिए असंवैधानिक प्रतिशोध कहा है। हार्वर्ड ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई प्रथम संशोधन का उल्लंघन करती है और इसका ‘हार्वर्ड और 7000 से अधिक विदेशी छात्रों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।’

मुकदमे में क्या कहा गया?

हार्वर्ड ने अपने मुकदमे में कहा, अमेरिका की सरकार ने एक झटके से यूनिवर्सिटी के एक चौथाई विदेशी छात्र-छात्राओं को मिटाने की कोशिश की है, जो हमारे यूनिवर्सिटी मिशन में महत्वपूर्व योगदान देते हैं। आगे कहा कि वह होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट को यह कदम उठाने से रोकने के लिए एक अस्थायी निरोधक आदेश दायर करने की योजना बना रही है।

छात्रों में फैली अव्यवस्था

आगे मुकदमे में कहा कि इस कदम से ग्रेजुएट होने से कुछ दिन पहले ही परिसर में छात्रों के बीच परेशानी बढ़ गई है। प्रैक्टिकल क्लास लेने वाले, सिलेबस पढ़ाने वाले, प्रोफेसरों के सहायता करने वाले और हॉर्वर्ड के स्पोर्ट्स में भाग लेने वाले इंटरनेशनल स्टूडेट्स को इस फैसले के बाद यह तय करना है कि वे यूनिवर्सिटी से चले जाएं ले या देश में रहकर कानून प्रक्रिया का जोखिम उठाएं।

किन पर दिख रहा ज्यादा असर?

ट्रंप प्रशासन के फैसले का प्रभाव हार्वर्ड कैनेडी जैसे ग्रेजुएट स्कूलों पर सबसे ज्यादा दिख रहा है, यहां करीबन आधे से ज्यादा छात्र विदेशी मूल के हैं और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में करीब एक तिहाई विदेशी छात्र पढ़ रहे हैं।

यूनिवर्सिटी को बड़ा नुकसान

हार्वर्ड ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी को बड़े नुकसान में डाल रहा है, क्योंकि दुनिया के टॉपर स्टूडेंट यहां पढ़ते हैं। भविष्य में विदेशा मूल के छात्र यूनिवर्सिटी में आवेदन करने से पहले सोचेंगे क्योंकि सरकार हमसे बदला ले रही है। आगे हार्वर्ड ने कहा कि अगर सरकार की कार्रवाई जारी रहेगी तो उसे कम से कम 2 एकेडमिक सालों तक नए इंटरनेशनल छात्रों को एडमिशन देने से वंचित होना पड़ेगा।

जानकारी दे दें कि हार्वर्ड कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स में अपने परिसर में लगभग 6,800 विदेशी छात्रों को दाखिला देता है। इनमें से ज़्यादातर स्नातक छात्र हैं और वे 100 से ज़्यादा देशों से आते हैं।

विभाग ने क्या लगाए आरोप?

बता दें कि अमेरिकी सरकार ने हार्वर्ड पर यह आरोप लगाते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी में एंटी अमेरिकन और प्रो टेरेरिस्ट्स समर्थक आंदोलनकारियों को तैयार किया जाता है, जो यहूदी छात्रों पर हमला करते हैं। इसके अलावा, विभाग ने हार्वर्ड पर चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के साथ कोआर्डिनेट करने का आरोप लगाया, जिसमें कहा कि स्कूल ने 2024 तक चीन के पैरामिलिट्री के मेंबर की मेजबानी की और उन्हें ट्रेनिंग दी।

सैम और टॉम करन के भाई बेन करन इंग्लैंड के खिलाफ क्यों उतरे मैदान में? जानिए इसके पीछे की वजह।

इंग्लैंड के खिलाड़ी सैम करन और टॉम करन को तो सभी जानते हैं कि ये सगे भाई हैं। हालांकि सैम करन इसलिए भारत में ज्यादा लोकप्रिय हैं, क्योंकि वे आईपीएल में खूब खेलते रहे हैं। टॉम करन भी आईपीएल खेल चुके हैं, लेकिन वे ज्यादा दिन नहीं चले, इसलिए भुला दिए गए। लेकिन ये कम ही लोगों को पता है कि उनके एक और भाई हैं बेन करन। जो इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते हैं, लेकिन इंग्लैंड के लिए नहीं, बल्कि जिम्बाब्वे के लिए। अब उनके पास मौका आया है कि वे अपने ही भाई की टीम इंग्लैंड के खिलाफ खेल रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि जब सैम और टॉम इंग्लैंड के लिए खेलते हैं तो बेन करन जिम्बाब्वे के लिए क्यों खेलते हैं। चलिए इसके पीछे की पूरी कहानी बताते हैं।

बेन करन के पिता जिम्बाब्वे के लिए खेल चुके हैं क्रिकेट

पहली बात तो ये है कि इंग्लैंड के लिए इंटरनेशनल ​क्रिकेट खेलना कोई आसान काम नहीं है। वहां पहले से ही इतने खिलाड़ी अपनी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं कि वहां बेन का नंबर आएगा कि नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। दूसरी बात ये है कि इन तीनों भाईयों यानी टॉम, सैम और बेन करन के पिता का जन्म जिम्बाब्वे में ही हुआ था। उनका नाम केविन करन है। खास बात ये भी है कि केविन करन यानी इन तीनों के पिता जिम्बाब्वे के लिए क्रिकेट खेल चुके हैं। उन्होंने साल 1983 से लेकर 1987 तक जिम्बाब्वे के लिए खेला है। केविन ने 11 मैच इस टीम के लिए खेले हैं, ऐसे में बेन ने भी सोचा कि वे अपने पिता की टीम यानी जिम्बाब्वे के लिए क्रिकेट खेलेंगे।

इंग्लैंड के लिए काउंटी क्रिकेट खेल चुके हैं बेन करन

बेन करन इंग्लैंड की काउंटी टीम के लिए क्रिकेट खेल चुके हैं। वे नॉर्थम्पटनशायर के लिए साल 1991 से लेकर 1999 तक क्रिकेट खेले हैं। यानी अपने भाईयों की तरह ही बेन के पास भी एक विकल्प था कि वे इंग्लैंड के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलें, लेकिन इसके बाद भी कुछ सोचकर उन्होंने अपने पिता की टीम के लिए क्रिकेट खेलने का फैसला किया और अब वे इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं और इंग्लैंड के खिलाफ भी खेलने का मौका उन्हें मिल गया है।

ऐसा रहा है अब तक बेन करन का प्रदर्शन

बेन करन अब तक इंग्लैंड के लिए 5 टेस्ट मैच खेल चुके हैं, जिसमें उनके नाम 307 रन हैं। उन्होंने एक अर्धशतक भी अब तक लगाया है। उन्हें पिछले साल दिसंबर में अफगानिस्तान के खिलाफ जिम्बाब्वे के लिए टेस्ट डेब्यू का मौका मिला था। हालांकि जब वे इंग्लैंड के खिलाफ खेलने के लिए उतरे तो कुछ खास नहीं कर सके। इस मैच की पहली पारी में वे दस बॉल पर केवल 6 रन ही बना सके। अब देखना है कि मैच की दूसरी पारी में वे कैसा प्रदर्शन करते हैं।

अग्निवीर को बचाने के लिए तेज बहाव में छलांग लगाने वाले लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी कौन थे? जानिए उनकी पूरी कहानी

इंडियन आर्मी के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी ने सिक्किम में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। सिक्किम स्काउट्स के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी 22 मई को उत्तरी सिक्किम में एक ऑपरेशनल टास्क के दौरान एक एक रूट ओपनिंग पैट्रोल का नेतृत्व कर रहे थे, इसी दौरान एक लॉग ब्रिज से एक अग्निवीर साथी का पैर फिसल गया और वह बहने लगा। यह देख 23 साल के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी ने बिना कुछ सोचे समझे नदीं में छलांग लगा दी और साथी को मौत के मुंह से खींचकर बाहर ले आए, लेकिन वह अपनी जान न बचा सके।

पुल से फिसला था स्टीफन सुब्बा का पैर

भारतीय सेना के सिक्किम स्काउट्स के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को छह महीने से भी कम समय पहले 14 दिसंबर 2024 को कमीशन मिला था। सिक्किम में एक टैक्टिकल ऑपरेटिंग बेस (टीओबी) की ओर एक रूट ओपनिंग पेट्रोल का नेतृत्व कर रहे थे, यह एक जरूरी पोस्ट है जिसे भविष्य की तैनाती के लिए तैयार किया जा रहा था। लगभग 11:00 बजे गश्ती दल का एक सदस्य अग्निवीर साथी स्टीफन सुब्बा का पैर एक लॉग ब्रिज (लकड़ी का पुल) को पार करते समय पैर फिसल गया और तेज पहाड़ी धारा में बह गया।

बिना परवाह किए तेज धारा में कूद गए शंशाक तिवारी

सुब्बा को बहता देख लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी ने अपनी असाधारण सूझबूझ, निस्वार्थ नेतृत्व और अपनी टीम के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए, बिना किसी हिचकिचाहट के उसे बचाने के लिए सहज रूप से खतरनाक पानी में छलांग लगा दी। एक अन्य जवान नायक पुकार कटेल भी तुरंत उनकी सहायता के लिए उनके पीछे चले गए। साथ मिलकर, वे डूबते हुए अग्निवीर को बचाने में सफल रहे। हालांकि, लेफ्टिनेंट तिवारी दुर्भाग्य से तेज बहाव में बह गए।

सुबह मिला लेफ्टिनेंट का शव

लेफ्टिनेंट के गश्ती दल ने उन्हें उस दौरान खूब ढूंढने की कोशिश की लेकिन वह जिंदा नहीं बच सके, उनका शव सुबह 11:30 बजे 800 मीटर नीचे की ओर बरामद किया गया। सेना ने कहा कि लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी की वीरतापूर्ण कार्रवाई भारतीय सेना के मूल मूल्यों का एक शानदार उदाहरण है- निस्वार्थ सेवा, ईमानदारी, उदाहरण के तौर पर नेतृत्व और अधिकारियों और जवानों के बीच अटूट बंधन, जो रैंक से परे है और युद्ध और शांति दोनों में पोषित होता है।

ज्वाइनिंग को 6 माह भी नहीं हुआ था

लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी मात्र 23 वर्ष के थे और वह अयोध्या के मझवां गद्दोपुर के रहने वाले थे, आज उनका पार्थिव शरीर देर रात उनके घर पहुंच रहा है। अधिकारी के परिवार में उनके माता-पिता और एक बहन हैं। साल 2019 में उनका सिलेक्शन एनडीए में हुआ था। मिली जानकारी के मुताबिक, शशांक तिवारी बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे, उन्होंने अपने पहले अटेम्प्ट में ही एनडीए क्रैक किया था। 14 दिसंबर 2024 को उन्हें सेना ने ज्वाइनिंग दी थी।

भाजपा कार्यकर्ता से रिश्वत लेने वाला दरोगा निलंबित — सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने दिखाया सख्त एक्शन

  • वृंदावन चौकी प्रभारी दरोगा धीरेन्द्र सिंह को रिश्वत लेने के आरोप में तत्काल निलंबित किया गया।
  • भाजपा बूथ अध्यक्ष के बेटे से ₹10,000 की रिश्वत लेकर छोड़े जाने का मामला सामने आया।
  • भाजपा महिला कार्यकर्ता रीना उपाध्याय की शिकायत पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने लिया सख्त संज्ञान।
  • विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के हस्तक्षेप पर एसीपी और डीसीपी स्तर पर हुई जांच में आरोप सिद्ध पाए गए।
  • पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता में विधायक की सक्रियता को लेकर विश्वास और समर्थन और मजबूत हुआ।

लखनऊ, रिपोर्ट: True News UP: सरोजनीनगर विधानसभा के वृंदावन चौकी प्रभारी दरोगा धीरेन्द्र सिंह को भाजपा कार्यकर्ता से रिश्वत लेने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के सख्त हस्तक्षेप और भाजपा महिला कार्यकर्ता रीना उपाध्याय की सक्रिय पहल के चलते संभव हो सकी।

क्या है मामला?

दिनांक 17 मई की रात, भाजपा बूथ अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप सिंह के बेटे को वृंदावन चौकी पुलिस ने किसी मामूली विवाद में हिरासत में ले लिया। परिजनों का आरोप है कि दरोगा धीरेन्द्र सिंह ने युवक को जेल भेजने की धमकी दी और उसे छोड़ने के बदले ₹10,000 की रिश्वत की मांग की। रकम देने के बाद ही युवक को छोड़ा गया।

इस घटना की जानकारी जब भाजपा की सक्रिय महिला कार्यकर्ता रीना उपाध्याय को मिली तो उन्होंने इस पूरे मामले को पहले पार्टी के जिम्मेदार नेताओं और फिर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के संज्ञान में डाला।

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का त्वरित एक्शन

विधायक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत गोसाईगंज एसीपी और डीसीपी दक्षिणी से संपर्क किया और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। एसीपी स्तर पर हुई प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद डीसीपी दक्षिणी ने दरोगा के निलंबन की संस्तुति करते हुए विभागीय जांच के आदेश दे दिए।

डीसीपी दक्षिणी ने क्या कहा?

डीसीपी दक्षिणी ने बताया कि दरोगा धीरेन्द्र सिंह का आचरण पुलिस नियमावली और कर्तव्य के विरुद्ध पाया गया है। रिश्वत लेने की पुष्टि होने के बाद तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई है और विभागीय जांच चल रही है।

महिला कार्यकर्ता रीना उपाध्याय की अहम भूमिका

इस मामले में भाजपा महिला कार्यकर्ता रीना उपाध्याय की सक्रियता और साहस तारीफ के काबिल रही। उन्होंने बिना डरे, पार्टी और विधायक तक पूरी सच्चाई पहुंचाई और कार्यकर्ता के सम्मान की रक्षा की।

रीना उपाध्याय ने कहा,
“डॉ. राजेश्वर सिंह ने जिस त्वरितता से कार्रवाई की, उन्होंने हमें यह भरोसा दिलाया कि भाजपा में कार्यकर्ताओं की आवाज न सिर्फ सुनी जाती है, बल्कि उस पर ठोस कदम भी उठाए जाते हैं।”

पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता में संतोष

इस घटना के बाद न सिर्फ भाजपा कार्यकर्ताओं, बल्कि आम जनता में भी विधायक के प्रति विश्वास और सम्मान और अधिक गहरा हुआ है। लोगों का कहना है कि डॉ. सिंह हमेशा जनहित में सक्रिय रहते हैं और भ्रष्टाचार या अन्याय को कभी बर्दाश्त नहीं करते।

यह घटना क्यों है महत्वपूर्ण?

  • यह साबित करता है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। पुलिसिया भ्रष्टाचार के विरुद्ध विधायक स्तर पर भी सख्त कार्यवाही हो रही है। यहां महिला कार्यकर्ताओं की आवाज को गंभीरता से लिया गया। आम जनता को भी यह संदेश मिला कि वे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।

यह घटना सिर्फ रिश्वतखोरी की एक घटना नहीं है, बल्कि एक प्रेरक उदाहरण है कि कैसे एक सजग जनप्रतिनिधि और साहसी महिला कार्यकर्ता मिलकर सिस्टम के भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं।

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की संवेदनशीलता और ज़ीरो टॉलरेंस की नीति ने यह साबित कर दिया कि भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


रिपोर्ट संपर्क

शिवसागर सिंह चौहान
True News UP ब्यूरो
ईमेल: info@truenewsup.com